HomeTop Newsजिस सतलज फिल्म पर रोक लगी है, जानिये उसके नायक जसवंत सिंह...

जिस सतलज फिल्म पर रोक लगी है, जानिये उसके नायक जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी

80 और 90 के दशक में पंजाब में सिखों को हिरासत में लेकर फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा था। और लापता बता कर उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया जा रहा था। ये आंकड़ा 25 हजार से ज्यादा का बताया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। सतलज उसी कहानी को कहती है।

तीन जुलाई को OTT प्लेटफार्म जी5 पर रिलीज़ हुई फिल्म सतलुज को पांच जुलाई को इस प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया रविवार पांच जुलाई को शाम 8.30 बजे ज़ी5 के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक बयान प्रकाशित कर इसकी जानकारी दी गई। ज़ी5 ने कहा है, “अगले आदेश तक ‘सतलुज’ भारत में उपलब्ध नहीं होगी। फ़िल्म को जल्द से जल्द दोबारा उपलब्ध कराने के लिए सभी उचित विकल्पों पर काम किया जाएगा।”

फिल्म को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। इस फ़िल्म को 7 फ़रवरी 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किए जाने की घोषणा की गई थी और इसका टीज़र भी जारी कर दिया गया था। हालांकि बाद में इसकी रिलीज़ एक बार फिर टाल दी गई। और अब ओटीटी पर रिलीज होने के बाद भी इसे हटा दिया गया है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है।

1952 में जन्में जसवंत सिंह खालड़ा अमृतसर की एक बैंक में काम करते थे। समाजसेवी थे और मानव के अधिकारों के बचाव के लिए काम करते थे। 80 और 90 के दशक में उन्हें पता चला कि राज्य में बड़ी संख्या में सिखों पर अत्याचार हो रहा है। उनको गैर क़ानूनी तरीके से हिरासत में लेकर फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है। लापता बता कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया जा रहा है। ये आंकड़ा 25 हजार से ज्यादा का बताया गया।

उन्होंने जून 1984 से दिसंबर 1994 के बीच अमृतसर, मजीठा और तरनतारन के तीन श्मशान घाटों में मिले अज्ञात शवों का ब्योरा सार्वजनिक किया था। उनका दावा था कि ये लावारिस शव पुलिस की अवैध कार्रवाइयों के गवाह हैं। खालड़ा के इस दावे को इस तथ्य से बल मिला कि इनमें से ज़्यादातर शव पुलिस ही श्मशान घाटों तक लाई थी।

सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक़, जसवंत सिंह खालड़ा ने इन कथित घटनाओं के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। पुलिस इससे काफी गुस्से में थी। आखिरकार  6 सितंबर 1995 को अमृतसर के कबीर पार्क स्थित जसवंत खालड़ा के घर से उनका अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद वो कभी घर वापस नहीं लौटे। रिपोर्ट के मुताबिक, “उन्हें अवैध हिरासत में रखने के बाद उनकी हत्या कर दी गई और उनके शव को सतलुज नहर में फेंक दिया गया।”

सीबीआई जांच में  6 पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए। कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और 6 में से 4 को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी पर बनी है फिल्म सतलुज। इस फ़िल्म का मूल नाम ‘पंजाब 95’ था। अलग-अलग कारणों से इसकी रिलीज़ लंबे समय से अटकी हुई थी।

साल 2022 के आखिर से ही यह फिल्म लगातार सेंसर और प्रमाणन बोर्ड में फंसी रही। घोषणा के बावजूद मार्च 2025 में भी फिल्म की रिलीज को टालना पड़ा था। तब हनी त्रेहन ने बीबीसी से कहा था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने शुरुआत में फ़िल्म में 21 कट लगाने को कहा था। लेकिन जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, कट की संख्या 120 से भी अधिक हो गई। यह मेरी समझ से परे है। कई कट ऐसे थे, जिनका कोई कारण भी नहीं बताया गया। बल्कि एक समय तो निर्देशक हनी त्रेहन से जसवंत सिंह खालड़ा का नाम ही फिल्म से हटाने को कहा गया। जबकि यह जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है।

फ़िल्म में जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभा रहे दिलजीत सिंह दोसांझ ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “अब ये फ़िल्म रुकने वाली नहीं है। खालड़ा साब की आवाज़ को कोई नहीं दबा सकता।”

लोकप्रिय

अन्य खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Skip to content