Tuesday, December 9, 2025

इतिहास-नायक

नहीं रहें दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन, जानिये झारखंड के इस महानायक की कहानी

दिल्ली/रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने गंगाराम अस्पताल में आखिरी सांस ली। बेटे व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। हेमंत सोरेन ने लिखा- आदरणीय...

13th Foundation Day Celebration of Ambedkar International Center (AIC) in America

"In the 1980s, it was considered a great matter of pride in Western Uttar Pradesh if someone got admitted to an MBBS program. When Rahul Ji from our neighboring village secured admission, his name echoed across the nearby districts for years." These sentiments were conveyed...

जेएनयू के पहले दलित प्रोफेसर नंदू राम का निधन

नई दिल्ली। देश के प्रख्यात समाजशास्त्री, शिक्षाविद् और दलित चिंतक प्रोफेसर नंदू राम का शनिवार 13 जुलाई की सुबह निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। प्रो. नंदू राम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सामाजिक विज्ञान विभाग में पहले दलित प्रोफेसर और डीन...

बिरसा मुंडा की शहादत के 125 वर्ष और अबुआ आंदोलन

महानायक बिरसा का जन्म छोटानागपुर के उलीहातु या चालकाद के बंबा गांव में 15 नवम्बर 1875 ई को हुआ था। 12 वर्ष की उम्र में सिंहभूम के चाईबासा के लूथरन मिशन चर्च में 1886ई में ईसाई धर्म में उन्हें दीक्षा दी गई थी। उनके...

यदि डॉ. आंबेडकर प्रधानमंत्री होते?

नेहरू की जगह सरदार पटेल पी.एम. होते तो देश के हालात कुछ और होते। ये सवाल नेहरू या कांग्रेस से नाराज हर नेता या राजनीतिक दल खासकर संघी/ जनसंघी/ भाजपायी हमेशा उठाते रहे हैं। समय समय पर समाचार पत्र और पत्रिकाओं में भी इसकी...

जोतीराव फुले: भारतीय पुनर्जागरण के असली पुरोधा

भारतीय पुनर्जागरण के पुरोधा राजा राममोहन राय, देवेन्द्र नाथ टैगोर, विवेकानंद और दयानंद सरस्वती नहीं, बल्कि जोतिराव फुले, शाहू जी, पेरियार, सावित्रीबाई फुले, ताराबाई शिंदे और पंडिता रमाबाई हैं। भारतीय पुनर्जागरण का केंद्र बंगाल नहीं, महाराष्ट्र है। इस पुनर्जागरण की नींव जोतीराव फुले ने...

बोधगया महाबोधि महाविहार के लिए क्यों हो रहा है दुनिया भर में आंदोलन, जानिये पूरा मामला

बोधगया। बिहार का बोधगया, जहां तथागत बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उसकी मुक्ति के लिए आंदोलन चल रहा है। यह आंदोलन इस महाविहार को ब्राह्मण पंडों से मुक्त कराने के लिए है। आंदोलन करने वाले बौद्ध समाज BT ACT 1949 को रद्द...

संत रैदास की बेगमपुर की अवधारणा की वर्तमान प्रासंगिकता

संत रैदास जी की वाणी में से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-  ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न। छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।। जात-जात में जात हैं, जों केलन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जात न जात।। रैदास कनक और...

मंडल पूर्व युग के महानायक थे कर्पूरी ठाकुर

24 जनवरी, 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौझिया को अपने जन्म से धन्य करने वाले कर्पूरी ठाकुर वंचित बहुजन समाज में जन्मे उन दुर्लभ नेताओं में एक रहे, जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में प्रभावी योगदान के साथ स्वाधीन भारत की राजनीति में भी...

तिलका मांझी के शहादत दिवस की कहानी

जनवरी की 13 तारीख भारत के इतिहास में एक क्रांतिकारी वीर सपूत के शहादत दिवस के रूप में दर्ज है। साल 2025 में भारत और भागलपुर- संथाल परगना क्षेत्र  के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी, महान् क्रान्तिकारी किसान नेता एवं महान मूलनिवासी बहुजन नायक, अमर शहीद...

फातिमा शेख पर बहस के बीच इतिहासकार विक्रम हरिजन ने दिलीप मंडल को किया बेनकाब

9 जनवरी को माता सावित्री बाई फुले की सहयोगी और पहली महिला मुस्लिम शिक्षिका फातिमा शेख की जयंती हुई थी। इस दौरान जब देश भर के लोग उन्हें श्रद्धांजली दे रहे थे, पूर्व अंबेडकरवादी और वर्तमान में भाजपा की मोदी सरकार में मीडिया एडवाइजर...

सवर्ण महिलाओं को सावित्रीबाई फुले का एहसानमंद होना चाहिए

सावित्रीबाई फुले का जन्म 03 जनवरी, 1831 में पश्चिमी महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था। इन्होंने पति जोतीराव फुले के साथ मिलकर शिक्षा क्रांति के लिए जो काम किया, वह हर कोई जानता है। लेकिन इसके साथ ही फुले दंपति ने समाज की अन्य...

बिरसा मुंडा जयंती विशेषः ऐसा महानायक योद्धा, जिससे खौफ खाते थे अंग्रेज

बिरसा मुंडा भारत के उस महान सपूत का नाम है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल तब फूंक दिया था, जब उनकी उम्र 25 साल भी नहीं थी। इसके बावजूद बिरसा मुंडा को लेकर अंग्रजों का खौफ ऐसा था कि उन्होंने उन पर...

ऑस्ट्रेलिया में बौद्ध आंदोलन, मेलबोर्न में बौद्ध समाज ने किया शानदार कार्यक्रम

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में भारतीय बौद्ध समुदाय ने 19 अक्टूबर 2024 को 68वां धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस मनाया। यह कार्यक्रम मेलबर्न बुद्धिस्ट सेंटर और भारतीय बौद्ध समुदाय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इस दौरान बौद्ध समाज ने बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर और...

विपश्यना से लौटे पत्रकार यशवंत ने साझा किया शानदार अनुभव

मैंने हरियाणा के सोहना स्थित धम्मा सेंटर में भिक्षु के रूप में दस दिन बिताए। यहां न बोलना था, न आंखें मिलानी थी किसी से, जो मिल जाए वो खाना था। काम के नाम पर दिन भर ध्यान करना साधना करना। बाहरी दुनिया से...

14 अक्टूबर, जब 1956 में बाबासाहेब ने अपनाया था बौद्ध धर्म

भारत के इतिहास में 14 अक्टूबर 1956 का दिन एक क्रांति के रूप में दर्ज है। इस दिन भारत में वह क्रांति हुई, जिसके बारे में किसी ने भी सोचा नहीं होगा। अछूत समाज पर हिन्दू समाज के लगातार अत्याचार और इसमें सुधार की...

जानिये असोक धम्मविजय दशमी का पूरा इतिहास

सम्राट असोक ने धरती पर समता और शांति का साम्राज्य स्थापित करने हेतु बौद्ध धम्म को अपना कर तलवार के विकल्प के रूप में धम्म को चुना। उन्होंने ईसा पूर्व 266 में विधिवत आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी के दिन बौद्ध धम्म ग्रहण किया था...
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कास्ट मैटर्स

अंबेडकर यूनिवर्सिटी लखनऊ में दलितों-पिछड़ों पर हमला

लखनऊ। लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 17 सितंबर को धार्मिक आयोजन को लेकर विवाद हो गया। बाद में यह विवाद हिंसक...

वीडियो

ओपीनियन

ज्योतिबाराव फुले और डॉ. आंबेडकर के बीच समानता

ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब अम्बेडकर का जीवन और कर्तृत्व बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है। आज जिस तरह की परिस्थितियाँ हैं...

राजनीति

नीतीश 10वीं बार बने सीएम, देखिए शपथ लेने वाले कैबिनेट की पूरी लिस्ट

नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यकमंत्री के तौर पर आज 20 नवंबर 2025 को शपथ ली। उनके साथ 26 अन्य ने भी...
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