सपा के कई सांसदों और विधायकों के बसपा के संपर्क में होने के कयास लगाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलको में बीते 48 घंटों में यह नई चर्चा शुरू हो गई है। जिसे सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इस खबर के पीछे कितनी सच्चाई है इसका दावा तो हम नहीं करते लेकिन चर्चा है कि 2027 में बसपा मजबूत वापसी करने वाली है, इसको देखते हुए समाजवादी पार्टी के तमाम नेता बसपा के संपर्क में हैं।
इसी साल जनवरी में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी में अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा था। सपा के कद्दावर नेता और नगर पालिका परिषद बाराबंकी के पूर्व अध्यक्ष हफीज भारती ने सपा को छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। हाफीज सईद ने इसे घरवापसी कहा था।
तो वहीं, उत्तर प्रदेश की गौरीगंज विधानसभा सीट को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह 2027 में बसपा से चुनाव लड़ सकते हैं। बसपा नेता शशिकांत तिवारी ने भी एक वीडियो रिपोर्ट में इस बात का दावा किया था।
कुल मिलाकर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने कमर कस ली है। भाजपा के सामने जहां सत्ता को बचाए रखने की चुनौती है तो बसपा के सामने मजबूत वापसी की। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती सहित पार्टी के तमाम नेता पार्टी के कैडर दलित वोटों को पार्टी से मजबूती से जोड़ने में जुटे हैं। बसपा विधानसभा चुनाव में अपना सबसे बुरा वक्त देख चुकी है। यानी अब पार्टी का प्रदर्शन पहले से बेहतर ही होने की मजबूत संभावना है। ऐसे में अगर बसपा मजबूती से वापसी करने में सफल रहती है तो इससे सबसे बड़ा झटका समाजवादी पार्टी को लगेगा।

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