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फिर विवाद में फंसे रिंकू सिंह राही, गिर गई गाज

घटना के बाद ब्लॉक प्रमुख ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया, जिसमें रिंकू सिंह राही ब्लॉक प्रमुख के फोन पर हाथ मारते और धक्का देते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं, एसडीएम रिंकू सिंह राही ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

जालौन/ लखनऊ। महीनों के लंबे इंतजार के बाद जालौन के एसडीएम का पद संभालने वाले चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर विवाद में घिर गए हैं। रिंकू सिंह राही पर भाजपा के जालौन ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने बदसलूकी करने, थप्पड़ मारने की कोशिश और धक्का देने के आरोप हैं, जिसके बाद उन्हें जालौन के संयुक्त मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम के पद से हटाकर उरई भेज दिया गया है। अब वह न्यायिक मजिस्ट्रेट उरई होंगे।

23 जून की घटना के मुताबिक, रिंकू सिंह राही पांच सदस्यों की टीम के साथ बेतवा आइस एंड कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण करने गए। जांच के दौरान उन्होंने कोल्ड स्टोरेज मालिक व वर्तमान जालौन ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन से कागजात दिखाने को कहा। नेता होने की अकड़ में रामराजा निरंजन आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही से कहा सुनी करने लगा। कागजात दिखाने को लेकर बहस और धक्का मुक्की हो गई।

घटना के बाद ब्लॉक प्रमुख ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया, जिसमें रिंकू सिंह राही ब्लॉक प्रमुख के फोन पर हाथ मारते और धक्का देते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं, एसडीएम रिंकू सिंह राही ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि-

 निरीक्षण के दौरान कोल्ड स्टोरेज में कई गंभीर अनियमितताएं मिली थीं, जिनकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है। कार्रवाई से बचने और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

 बता दें कि, उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही लगातार विवादों में रहे हैं। जुलाई 2025 में उनकी नियुक्ति शाहजहांपुर में जॉइंट मजिस्ट्रेट और पूवायां तहसील के एसडीएम के पद पर हुई थी। एक घटनाक्रम में उनका वकीलों के विरोध के दौरान सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक कर माफी मांगने का वीडियो वायरल हो गया था। इसके बाद उन्हें मात्र 36 घंटे में पद से हटा दिया गया और राजस्व परिषद से जोड़ दिया गया। तब से वह हाशिये पर चल रहे थे।

मार्च 2026 में वह फिर तब चर्चा में आएं जब उन्होंने भारत के राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश नियुक्ति विभाग और डीओपीटी को प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस्तीफा भेज दिया था। रिंकू सिंह राही ने इस्तीफे में आरोप लगाया था कि उन्हें लंबे समय से कोई अच्छा काम या फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जा रही है। इससे देश भर में बहस छिड़ गए थी। हालांकि एक महीने बाद ही उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था, जिसके बाद उन्हें जालौन में नियुक्ति मिली थी।

बता दें कि रिंकू सिंह राही ने आईएएस बनने से पहले साल 2004 में उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा पास की थी और 2008 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने थे। साल 2009 में उन्होंने 80 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति और पेंशन घोटाले का खुलासा किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के कारण उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उनके आंख की रोशनी चली गई थी। उनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी की है।

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