प्रमोद रंजन
फरवरी, 2020 में जब अखबारों में दुनिया में एक नए वायरस के फैलने की सूचना आने लगी और मेरे सहकर्मियों के बीच इसकी चर्चा होने लगी तो मैंने इन खबरों के संबंध में प्रमाणिक सूचनाएं पाने के लिए विश्व स्वास्थ संगठन की वेबसाइट...
अजय कुमार
दिनांक 06 जून 2020 को सम्यक प्रकाशन के संस्थापक शांति स्वरूप बौद्ध का परिनिर्वाण हो गया। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1949 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने हिंदी में दलित प्रिंट के लिए के लिए एक मुक्कम्मल जगह बनायी थी। शांति स्वरूप बौद्ध...
विगत ढाई महीनों से कोरोना के दहशत भरे माहौल में लिखते-पढ़ते भारी राहत के साथ दिन इसलिए कट रहे थे क्योंकि अपना कोई आत्मीय – स्वजन, इसकी चपेट में नहीं आया था। किन्तु 6 जून की शाम 4 बजे जिस खबर से रूबरू हुआ,...
I am so shocked and heart broken to inform you of the passing away of Br. Bauddhacharya Shanti Swarup Bauddhji on Saturday, June 6, 2020 at about 7:00 am in the hospital due to COVID-19.
Baudhji, an Ambedkarite Buddhist was a writer, fiery orator, activist, great Bahujan publisher, and painter of...
We the undersigned twenty-five organizations strongly condemn the shameful imprisonment of India’s finest public intellectuals and social justice defenders, Dr. Anand Teltumbde and Mr. Gautam Navalakha who’ve been in custody since April 14, 2020. Dr. Teltumbde & Mr. Nalvlakha join nine others – journalists,...
- अभय कुमार
बिहार के गाँवों से बहुत सारे मज़दूर दो पैसा कमाने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में पलायन करते हैं। कोरोना संकट के बाद अब वे मजबूरन घर लौट रहे हैं। मगर क्या गाँव उनको राह़त दे पायेगा?
इतना तो ज़रूर है कि घर...
भारतीय प्रशासनिक सेवा की अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अजीत प्रमोद कुमार जोगी यानी अजीत जोगी (जन्मः 29 अप्रैल 1946 - निर्वाणः 29 मई 2020) जिलाधिकारी से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले संभवत: अकेले शख्स थे। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले के...
सच्ची घटना है। एक गांव में मुझे बचपन का परिचित मिल गया। परदेस में वह ठीक ठाक कमा लेता था लेकिन गांव में मुफ्त की सरकारी सुविधाओं का सुनकर गांव आ गया। बीपीएल में नाम लिखवा दिया। फिर क्या था, उसके तो सपने साकार...
क्या सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को भी कोरोना वायरस से उतना ही खतरा है, जितना कि अन्य बीमारियों और भुखमरी से, जिसकी अब आहट सुनाई देने लगी है। या, इन वर्गों में इस खतरे को महसूस करने के स्तर में गुणात्मक...
इंडियन एक्सप्रेस में इधर किसी लेख के जवाब में लेखक, अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्वानंद की टिप्पणी पर नजर पड़ी। पहले तो मुझे लगा कि शायद लेखक कह रहे हैं कि लेनिन के क्रांति के मॉडल को भारत में दोहराने की जरूरत नहीं है।...
अभय कुमार
ईद का मतलब होता है जो "बार बार आए". मगर इसका मतलब "ख़ुशी मनाना" और "जश्न मनाना" भी होता है. महीने भर रोज़ा रखने के बाद ईद मनाई जाती है. यह ख़ुशी का दिन होता है. दरअसल ख़ुशी कोई अकेले मना नहीं...
- सुभाष गाताडे
तेरह साल का एक वक्फा़ गुजर गया जब थोरात कमेटी रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. याद रहे सितम्बर 2006 में उसका गठन किया गया था, इस बात की पड़ताल करने के लिए कि एम्स अर्थात आल इंडिया इन्स्टिटयूट आफ मेडिकल साईंसेस में अनुसूचित...
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कोरोना के बहाने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों में जो मजदूर विरोधी बदलाव किये हैं, उन्हें श्रम सुधार का नाम दिया जा रहा है. सच्चाई यह है कि किसी भी तरह से ये बदलाव श्रम सुधार नहीं बल्कि मोदी सरकार...
अमेरिका में सक्रिय संगठन अम्बेडकर एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका यानी AANA ने साल 2020 के लिए अपने अवार्ड की घोषणा कर दी है. इस साल चार अवार्ड की घोषणा की है. इसमें आईपीएस अधिकारी और तेलंगाना सोशल वेलफेयर एंड रेजिडेंशियल स्कूल के सेक्रेट्री डॉ....
देश के बहुसंख्य आमजन-मेहनतकशों के लिए ऐसी सरकार, ऐसे राज्य के बने रहने का तर्क (Raison d'être) खत्म हो गया है। कोरोना की आपदा तो वैश्विक है, लेकिन इससे जिस तरह हमारे देश में निपटा जा रहा है, उसने मजदूरों की जिस दिल दहला...
मनुवादी मानसिकता से सभी लोग परिचित हैं। मनुवादी आए दिन दलितों-पिछड़ों को प्रताड़ित करते हैं। ऐसे में हमारे लोग प्रताड़ित किए जाते हैं। ऐसे में समाज सिर्फ मनुवादी व्यवस्था द्वारा किए गए कार्य के प्रति प्रतिक्रिया देने में अपनी सारी ऊर्जा लगा देता है।...
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भगवान दास
मैंने लियू शाओ ची से प्रसिद्ध चीनी नेता और पुस्तक “ हाउ टू बी अ गुड कम्युनिस्ट?” के शीर्षक के अलावा कुछ भी उधार नहीं लिया है, जिसने हजारों को कम्युनिज्म में बदल दिया। ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ और “दास कैपिटल” के अलावा...
शशि शेखर
हाल ही में कार्ल मार्क्स का जन्मदिन था। अपनी जवानी पूंजीपतियों की मजूरी-हजूरी में बीता देने के बाद, आज भारत के मजदूर अपने घर खाली हाथ लौट रहे हैं। रेल की पटरियों के किनारे 1000 किलोमीटर दूर के सफर पर पैदल चल...
'तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुश्बू से सारा घर महके'
इस समय हम जैसे सरकारी सेवकों के फोन पर जिस बेचैनी और बेसब्री से अपने घर लौटने के लिए प्रवासी मजदूर सवालों की झड़ी लगाये हुए हैं उससे दो निष्कर्ष मेरे सामने आ रहे...
सर्वविदित है कि हिन्दू धर्म पर एक कुलीन वर्ग का कब्ज़ा है। चंद मुट्ठी भर कुलीन वर्ग के लोग हजारों बरसों से हिन्दुओं के सभी संस्थानों और लाखों मंदिरों पर चौकड़ी मार के बैठे हैं। किसान, दस्तकार, मज़दूर, आदिवासी के लिए इनके दरवाज़े आदिकाल...