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केतन लाल मामले में नया अपडेट, केतन और उसके दोस्त के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज

इस मामले में मृतक केतन लाल और उसके दोस्त के खिलाफ पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंग रेप) का मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में नाबालिग लड़की की मेडिकल जांच रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न (sexual assault) के संकेत होने की बात कही गई है।

देहरादून/ दिल्ली। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में केतन लाल हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में मृतक केतन लाल और उसके दोस्त दिवाकर डिमरी के खिलाफ पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंग रेप) का मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में नाबालिग लड़की की मेडिकल जांच रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न (sexual assault) के संकेत होने की बात कही गई है। रिपोर्ट सामने आने और लड़की की मां द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर रविवार 12 जुलाई को पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इस मामले में केतन लाल की हत्या के आरोप में लड़की के पिता और दादा समेत चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अब केतन लाल और उसके दोस्त के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने से इस प्रकरण ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि केतन के दोस्त को गैंगरेप के मामले में किस आधार पर आरोपी बनाया गया है।

मामला 7 जून का है, जब 16 वर्षीय दलित किशोर की कथित तौर पर नाबालिग सवर्ण लड़की के परिजनों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, लड़की के फोन करने के बाद वह किशोर अपने एक मित्र के साथ देर रात उसके घर गया था।

अब मामले में मृतक केतन लाल और उसके दोस्त दिवाकर डिमरी पर पॉक्सो एक्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बीते 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा था कि 15 से 18 साल की उम्र भावनात्मक बदलाव की होती है, इसलिए हर ऐसे मामले को POCSO का मामला मानना उचित नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने किशोर किशोरियों की आपसी सहमति वाले रिश्तों में पॉक्सो कानून के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई।

अदालत ने कहा कि कई मामलों में जब किशोरियां अपने साथी के साथ घर छोड़ देती हैं, तो परिवार अपनी तथाकथित ‘इज्जत’ बचाने के लिए पॉक्सो के तहत आपराधिक मामले दर्ज करा देते हैं। बाद में अदालतों को ऐसे मामलों में आरोपियों को बरी करना पड़ता है। न्यायालयों ने विधायिका से इस पहलू पर विचार करने की आवश्यकता भी बता चुकी है। सीनियर वकील माधवी दीवान ने कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए पॉक्सो मामलों की निगरानी के लिए डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया।

हालांकि वर्तमान कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के दो नाबालिगों के बीच आपसी सहमति से बने यौन संबंध भी POCSO कानून के दायरे में आते हैं।

जहां तक केतन लाल मर्डर केस की बात है तो इस मामले में अब दो समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं चलेंगी। एक ओर केतन लाल की हत्या का मुकदमा है, वहीं दूसरी ओर उसके और उसके मित्र के खिलाफ पॉक्सो का मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच में कौन-से साक्ष्य सामने आते हैं और अदालत इन दोनों मामलों को किस दृष्टि से देखती है। साथ ही यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण रहेगा कि क्या किशोर प्रेम संबंधों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून के इस्तेमाल पर उठ रही न्यायिक चिंताओं का इस मामले पर कोई प्रभाव पड़ता है।

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