कैराना के दलित-मुस्लिम इलाकों में EVM फेल होने के बाद बवाल

लखनऊ। गोरखपुर और फूलपुर चुनाव के बाद बहुप्रतिक्षित कैराना लोकसभा सीट पर चुनाव जारी है. कैराना और नूरपूर समेत देश के 4 लोकसभा और 10 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव जारी है. इस बीच कई जगहों से ईवीएम मशीनों के खराब होने की शिकायतें आने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठने लगे हैं. तो वहीं चुनाव आयोग ने ईवीएम को बदलते हुए कहा है कि सभी जगहों पर पूरी वोटिंग होगी, भले देर रात क्यों न हो जाए.

इससे पहले उत्तर प्रदेश की 2 लोकसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों में खराबी की और होने और छेड़छाड़ संबंधी आ रही शिकायतों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी एल वेंकटेश्वर लू ने कहा, ‘मशीनों के खराब होने के आरोप निराधार हैं. महज 15 फीसदी मशीनें खराब हुई हैं. शिकायत मिलने के बाद इसे बदल दिया गया है.’ मशीनों के खराब होने की सूचना सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी और रालोद ने इसे एक साजिश बताया है. दोनों दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की है. सपा और रालोद का कहना है कि हार के डर से भाजपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करवाई है और चुनाव रद्द कराने की भी मांग की है.

मामले के राजनीतिक रंग लेने के बाद यह मामला चुनाव आयोग पहुंच गया है. इस पर चुनाव अधिकारी ने कहा कि हर बूथ पर सभी मतदाताओं से वोट डलवाए जाएंगे. चाहे रात के 12 बज जाएं. उन्होंने 25 फीसदी ईवीएम को रिजर्व रखने की भी बात कही. आयोग के अधिकारी ने कहा कि वह जिले के डीएम और कमिश्नर के संपर्क में है.

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कैराना जीतने के लिए पीएम ने बसपा-सपा की निकाली काट

लखनऊ। कैराना लोकसभा सीट उप चुनाव को देखकर पीएम नरेंद्र मोदी ने बसपा व सपा के लिए नई काट निकाली है. इसको लेकर कहा जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग इससे लाभवांतित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बागपत रैली के दौरान उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग के अंदर अति पिछड़ वर्ग (एमबीसी) के लोगों को एक विशेष कोटा देने की बात कही.

साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण नीतियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले. इसके लिए उन्होंने एक आयोग बनाया है. एमबीसी की पात्रता की जांच-पड़ताल करने के लिए बनाए एक पैनल की बात करते हुए मोदी ने कहा कि वह 27 प्रतिशत कोटा के अंतर्गत एक सब कोटा बनाएंगे. जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अति पिछड़ा वर्ग की मदद करेगा.

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की इस शानदार जीत के पीछे एमबीसी का हाथ था जिन्होंने मोदी और भाजपा को अपना मजबूत समर्थन दिया था. फुलपुर व गोरखपुर उप चुनाव में बीजेपी हारने के बाद कैराना व नूरपुर में जमकर मेहनत की है. उप चुनाव में सीएम योगी के साथ-साथ कई मंत्री क्षेत्र में मेहनत किए हैं. इन क्षेत्रों में चुनाव जारी है. अब देखना है कि क्या पीएम का पिछड़ा कार्ड कैराना में कितना कमाल कर पाता है.

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हरामी व्यवस्थाः गुजरात में दलित की हत्या, मुख्यमंत्री पर…

PC-twitter/jigneshmewani

गुजरात। एक दलित युवक की लाश मिली है. निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीटर पर शव की फोटो शेयर करते हुए मुख्यमंत्री विजय रुपाणी पर सवाल खड़ा किया है. करीब दो दिनों से फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. गुजरात में दलितों की हत्या को लेकर लोग बौखलाए नजर आ रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक रविवार को जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीटर पर शेयर कर लिखा कि, विजय रुपाणी पूरी तरह फेल हो गए हैं. ऊना, राजकोट, वडनगर के तमाम दलित हत्या सरकार की विफलता बता रहे हैं. फोटो में युवक की हत्या कर उसके चेहरे को बुरी तरह जला दिया गया है. जिग्नेश मेवाणी ने जानकारी दी कि मृत युवक की लाश पटन जिला के सिध्दपुर ब्लॉक के एडरना गांव में मिली है.

बता दें कि हालही में जिग्नेश मेवाणी ने एक और वीडियो शेयर किया था जिसमें दलित युवक की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी थी. इसके तुरंत बाद एक और दलित की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है.

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बसपा के नए नेशनल कोआर्डिनेटर से मिलिए

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बसपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी ने बसपा के युवा कार्यकर्ता जयप्रकाश सिंह को पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर नियुक्त किया है. 26 मई को लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बहनजी ने यह घोषणा की. सुर्खियों से दूर जयप्रकाश सिंह के बारे में लोग ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं. लेकिन जो लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें पता है कि जयप्रकाश सिंह बहुजन आंदोलन को समर्पित एक ऐसे मिशनरी हैं, जिन्होंने आंदोलन के लिए अपना जीवन दे दिया. संक्षेप में उनका जीवन-परिचय यह है कि यह दलित वर्ग से हैं और उत्तर प्रदेश में जनपद गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं. इनके पिता सरकारी अध्यापक व एक भाई वकील है तथा एक भाई अपना खुद का मेडिकल स्टोर भी चलाते हैं. जय प्रकाश ने खुद एल.एल.एम. की शिक्षा प्राप्त की है. बसपा की स्थापना के एक साल बाद जन्में जयप्रकाश सिंह का जन्म 1985 का है. इन्होंने बी.एस.पी. के मिशन के लिये सन् 2009 से ही अपने माँ-बाप का घर छोड़ा हुआ है इस सम्बन्ध में इनका खुद का यह कहना है कि “जब मैं बी.एस.पी. के मिशन में काम करने लगा तब मेरे माता-पिता व भाईयों आदि ने मुझे इस कार्य से रोकने का पूरा-पूरा प्रयास किया, जिसकी वजह से मैं मानसिक रूप से उनके दबाव में रहने लगा था और फिर एक दिन मैंने यह निर्णय लिया कि क्यों ना घर ही छोड़ दिया जाये, जिससे मेरे देर-सवेर आने से घर वाले, जो मुझे यह धमकी देते है कि ‘तू कुछ करता-धरता तो है नहीं और ऊपर से, हमें परेशान और करता है. तब फिर मैंनें सन् 2009 के अन्त में अपने माँ-बाप का घर छोड़कर, दिल्ली में एक कमरा किराये पर ले लिया.” दिल्ली आने के बाद जयप्रकाश सिंह का खर्च उनके साथियों एवं समाज के लोग ही मिलकर खुद उठाते थे. इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने कभी घर वापिस ना जाने व घरवालों से भी सभी रिश्ते-नाते आदि तोड़कर फिर बी.एस.पी. के मिशन में ही आजीवन अविवाहित रहकर, काम करने का भी फैसला ले लिया है. जयप्रकाश सिंह को महत्वपूर्ण पद देकर बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने जहां पार्टी में युवाओं को बड़ा मौका दिया है तो वहीं एक कार्यकर्ता को अहमियत देकर यह साबित किया है कि बसपा में मिशनरियों की कद्र है.
  • भानु प्रताप सिंह 

दलितों व अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचार के आँकड़े भी तो देते मोदी जी

केंद्र में मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गये हैं. वर्ष 2014 में जब इस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब जनता की उम्मीदें यूं ही आसमान पर नहीं थीं, बल्कि मोदी जी ने जनता को दिन में ऐसे तारे दिखाए थे, जिन्हें भाजपा के अमित शाह ने जुमला करार देकर जनता की छाती पर दाल दलने का काम किया. गौरतलब है कि तीस साल बाद केंद्र में किसी पार्टी को जुमलेबाजी के बलपर अकेले बहुमत हासिल हुआ था. किंतु इस मजबूत सरकार से जनता को कुछ बड़े बदलावों की आशा की जा रही थी और खुद मोदी और उनके सहयोगियों ने इसका वादा भी किया था. किंतु हुआ क्या? टीम मोदी जी ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले लेकर देश की आम जनता और व्यापारिक वर्ग को तबाई के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया. भाजपा बेशक इन फैसलों को अपनी सफलता मानती रहे. नोटबन्दी के फैसले के साथ जुड़ी अपेक्षाओं को लेकर कई जरूरी आंकड़े सरकार ने अभी तक भी जारी नहीं किए हैं, फिर सरकार इस नोटबन्दी को किस आधार पर अपनी सफलता से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है?

सरकार का कहना है कि गत चार वर्षों के दौरान विभिन्न मोर्चों पर कई परेशानियों का सामना करते हुए, उसने हर परेशानी को दूर कर विकास का मार्ग प्रशस्त किया. सरकार ने दावा किया कि मुद्दा चाहे डोकलाम का रहा हो या फिर सीमा पर पाक की कार्रवाई का या फिर देश में नक्सनलवाद का या फिर घरेलू मंच पर तेल का, हर मुद्दे को सुलझाने में सरकार ने बखूबी सफलता हाशिल की. डोकलाम और पाक सीमाओं का तो हमें पता नहीं किंतु तेज की कीमतों का बहीखाता तो हमारे सामने है, फिर किस आधार पर ये मान लिया जाय कि मोदी सरकार ने ऐसे बड़े मामले आसानी से हल कर लिए? सरकार का यह भी कहना है कि न केवल देश में बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत का मान बढ़ाया, किंतु मोदी सरकार ने ये खुलासा नहीं किया कि किस प्रकार से भारतीय दूतावास के जारिए मोदी जी की सभा में प्रवासी भारतियों की भीड़ को इक्ट्ठा किया गया?

सरकार का कहना है कि सरकार ने हर मोर्चे पर पारदर्शी रहते हुए अपने सभी फैसलों की जानकारी आम-जन तक पहुंचाई. जबकि सरकार का ऐसा कहना सच्चाई से कोसो दूर है. सच तो ये है कि सरकार की असफलता को उजागर करने वालों को सीधा देशद्रोही ठहराकर दिया जाता रहा. सरकार का यह एक थोथा दावा है कि पीएम मोदी ने सोशल नेटवर्किंग से जुड़कर लोगों को अपने रोजाना के कार्यक्रम और लोगों को अपनी सोच के बारे में बताया और उनसे सुझाव भी मांगे. हाँ! ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए पीएम ने अपने मन की बात तो की किंतु जनता के मन की बात न तो सुनी और न ही जनता से किए गए वादों के कार्यांवयन के बारे सही से कुछ बताया. कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के चार साल में झूठ और धर्मान्धता की संस्कृति का इस कदर फैलाव हुआ है कि भाजपा अन्दरखाने इस फैलाव का जश्न मना रही है. सरकार को अपने इस कृत्य पर तनिक भी अफसोस नहीं है. इस बारे में जिस तरह से सोशल मीडिया पर कुतर्कों को जाल बुना गया है, वह बताता है कि यह सरकार जनता की तर्क बुद्धि का कितना सम्मान करती है.

सरकार ने मीडिया की गुलामगीरी पर कोई स्पष्टीकरण नही दिया.….क्यों? विदित हो कि मोदी सरकार ने सबसे ज्यादा पैसा मीडिया को मौन रखने और सरकार की वाहवाही करने के लिए खर्च किया है. सरकार को इसका खुलासा करना चाहिए. कोई तो बात होगी कि भारत का मीडिया 180 देशों के रिपोर्ट कार्ड में 138वें स्थान पर आ गया है. भारतीय प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया सत्ता का पैरोकार बनने को मजबूर किया गया है या फिर उसकी आदत बन गई है कि अब चाटुकारिता के अलावा कुछ और कर ही नहीं सकता.

सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि दो करोड़ की रिश्वत माँगने के आरोप में जेल जाने वाले पत्रकार सुधीर चौधरी को इस सरकार ने वाई श्रीणी की सुरक्षा मुहैया कराई हुई है और रवीश कुमार, पुन्य प्रसून वाजपेयी, अभिसार शर्मा, बरखा दत्त जैसे ईमानदार पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने में कोताही क्यों बरती जा रही है, जबकि उन्हें हिन्दुवादी हिंसक ताकतों द्वारा न केवल हिन्दू विरोधी करार दिया जा रहा है अपितु उन्हें जान से मार देने की धमकियां दी जा रही हैं. होना तो ये चाहिए कि सरकार को इन बातों खुद संज्ञान लेकर ऐसे पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए. खेद की बात है कि भाजपा के शासन काल में पिछ्ले शासन काल के मुकाबले सबसे ज्यादा पत्रकारों की हत्याएं की गई हैं….. सरकार ने इस पर कोई बयान क्यों नहीं दिया? इस दौरान रोहित विमोला, नजीब जैसे कई प्रतिभाशाली छात्रों को जमींदोज करने का काम भी किया गया है, क्या ऐसे मुद्दे मोदी सरकार के एजेंडे से बाहर के मुद्दे हैं? क्या आर एस एस के मुद्दे ही आज की सरकार के मुद्दे हैं? क्या हिन्दुत्व ही मोदी जी का मूल मुद्दा है? जब वो अपने को ओ बी सी का बताते हैं तो फिर वो कैसे ब्राहम्णवाद का समर्थन कर सकते हैं? अगर वो ब्राहम्णवाद का समर्थन करते हैं तो फिर ओ बी सी (दलित) कैसे हो सकते हैं?

मोदी सरकार ने पिछ्ले चार साल में जनहित के नाम पर लगभग सौ से भी ज्यादा योजनाओं की घोषणाएं की हैं. ये एक अच्छी बात है. किंतु इन योजनाओं के क्रियांवयन पर ये सरकार खाली कागजी आँकड़े पेश करके ही संतुष्टी का ढोंग कर जनता को 2019 के बजाय 2022 तक अपने वादों को पूरा करने का झुनझुना थमा दे रही है. रिटायर हो चुके लोगों को अब न्यू पेंशन स्कीम का झुनझुना थमा दिया. अब वो इस झांसे को समझ गये हैं. सच ये है कि मोदी सरकार की एक भी स्कीम का कार्यांवयन जमीनी आधार पर नहीं हुआ है. खाली कागजों को रंगने का काम किया है मोदी सरकार ने.

सरकार ने इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं किया कि बैंकों का पूरा सिस्टम क्यों ध्वस्त है? सरकार ने माल्या, नीरव मोदी, मोहल भाई और न जाने और भी कितने ही ऐसे भाई लोग हैं जो बैंकों को चूना लगाकर इस मोदी राज में परदेशी हो गए. उनपर कोई चर्चा क्यों नहीं की? उल्टा बैंक कर्मियों को ही दोषी ठहराने का काम किया जा रहा है. राजनेता चाहे कांग्रेस के हों या भाजपा के, सब दूध के धुले हैं, यह सिद्ध करना ही उनका काम रहा है. वेतन न बैंक कर्मियों का बढ़ाया जा रहा है और न ही डाकियों का. यह है भाजपा की जनहित योजना का दर्शन.

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के अनुसार दो ऐसे सेक्टर हैं जिनको ये सरकार फैलाने का काम कर रही है…एक- झूठ और दूसरा- धर्मांधता. माना कि हर सरकार के दौर में एक राजनीतिक संस्कृति पनपती है, किंतु मोदी सरकार के दौर में “झूठ” नई सरकार की संस्कृति बनकर उभरी है. अब सवाल किया जा सकता है कि जब प्रधानमंत्री ही झूठ बोलते हों तो फिर दूसरों के बारे में क्या कहें? उल्लेखनीय है कि धर्मांधता की धारा को आगे बढ़ाने के मकसद से भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से इत्तेफाक रखने वाले कई संगठन बनकर खड़े हो गए हैं जो काम तो इन्हीं के लिए करते हैं मगर अलग इसलिए हैं ताकि बदनामी उन पर न आएं.

सरकार ने इस सत्य पर भी कोई टिप्पणी नहीं की कि उनकी सरकार नौकरी के फ्रंट पर फेल रही है. रोजगार न दे पाने के कारण भी सरकार की चमक फीकी हो रही है, किंतु इस मसले पर सरकार मौन रही है और पकौड़े तलने जैसे सुझाव देकर ही अपनी असफलता को छुपाने के काम में लगी रही. अफसोस की बात है कि अपना सबसे बड़ा वादा मोदी सरकार पूरा नहीं कर पाई. चुनावी घोषणा पत्र में उसने हर साल 2 करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा किया था, मगर हकीकत कुछ और ही निकली. सरकार की सोच है कि सिर्फ नौकरी को ही रोजगार न माना जाए. लेकिन ऐसा तब होता जब काफी लोगों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध हो पाते. स्टार्ट-अप योजना के जरिए इस दिशा में एक कोशिश जरूर हुई पर वह लहर दो साल भी नहीं चली. सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले रीयल एस्टेट सेक्टर का हाल बुरा है. इस सदी में सबसे ज्यादा मध्यवर्गीय नौकरियां टेलिकॉम सेक्टर में मिलती थीं, जो अचानक समस्याग्रस्त लगने लगा है. नौकरियों में आरक्षण पर कुठाराघात, एस सी/ एस टी पर अत्याचार के विरोध में पूर्व पारित सरकारी आदेश का सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किया जाना, क्या मोदी सरकार के संज्ञान में नहीं आया? यदि नहीं, तो क्यों?

और भी बहुत से सवाल हैं जो देश की दलित और अल्पसंख्यक आवादी से जुड़े हुए हैं जिन्हें मोदी सरकार ने चार साल पूरे होने के जश्न के दौरन छुआ तक नहीं. मसलन कश्मीर में हिंसा को रोकने के लिए क्या किया? एक सिर के बदले दस सिर लाने वाले मोदी जी ने यह भी नहीं बताया कि उनके शासन काल में कितने सैनिक शहीद हुए और कितनों को यथावत सम्मान दिया गया? कितनों के सिर देश में लाए. मोदी सरकार के पिछ्ले चार सालों में कितने दलितों और अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतारा गया और किस आधार पर? मोदी सरकार के पिछ्ले चार सालों में कितनी किशोरियों की लाज लूटी गई और कितनों की हत्या की गई? मोदी सरकार ने यह भी नहीं बताया कि मोदी जी के पिछ्ले चार सालों में शासन-प्रशासन ने दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ कितने फर्जी केश दर्ज किए और कितने फर्जी एनकाउंटर किए? केवल और केवल सरकारी आँकड़ों के बल पर सुर्खियां बटोरने का काम करना न केवल राजनीतिक है अपितु समाज विरोधी भी है.

खैर! सरकार के पास अभी एक साल का वक्त और है. इस बीच वह जनता की कुछ मुश्किलें दूर कर दे तो सरकार को अपना गुणगान करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी अपितु जनता उनका ये काम खुद ही कर देगी. विकास का काम जमीन पर ऐसे ही दिखना चाहिए जैसे कि दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ लगातार हो रहे अत्याचार तो फिर माना जा सकता है कि सरकार विकास के कार्यो के लिए कटिद्ध है, अन्यथा नहीं.

लेखक: तेजपाल सिंह तेज स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर आप इन दिनों स्वतंत्र लेखन के रत हैं. हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किए जा चुके हैं.

बीएसपी प्रमुख मायावती ने बदला बसपा का संविधान, कई और बड़े बदलावों की घोषणा

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज 26 मई को लखनऊ में हुई. इस दौरान बसपा प्रमुख मायवती ने कई अहम फैसले किए. सबसे प्रमुख बदलाव पार्टी के संविधान में किया गया, जिसके मुताबिक यह व्यवस्था की गई है कि किसी विशेष परिस्थिति में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सक्रिय न रहने पर वह राष्ट्रीय संरक्षक बन जाएगा और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके निर्देश में काम करना होगा. पार्टी में पहली बार कुछ अहम पद भी बनाया गया है तो साथ ही पार्टी को परिवारवाद से मुक्त करने को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है.

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिन अहम बिन्दुओं का जिक्र किया गया उसे हम सिलसिलेवार बता रहे हैं.

(1) विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी को भी मिलाकर व उनके बाद अब आगे भी बी.एस.पी. का जो भी ‘‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’’ बनाया जायेगा, उसके जीते-जी व ना रहने की स्थिति में भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी भी स्तर के पद पर नहीं रखा जायेगा. अगर परिवार का सदस्य पार्टी में काम करना चाहे तो उसे बिना किसी पद पर रहे एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही काम करना होगा.

कुमारस्वामी ने दिल्ली में बसपा प्रमुख मायावती से मिलकर उन्हें शपथग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया

(2) बी.एस.पी. का राष्ट्रीय अध्यक्ष यदि अपनी ज्यादा उम्र होने की वजह से पार्टी में फील्ड का कार्य करने में अपने आपको कमजोर महसूस करता है तो ऐसी स्थिति में उसकी सहमति से उसे पार्टी का ‘‘राष्ट्रीय संरक्षक’’ नियुक्त कर दिया जायेगा. उसी की सलाह से बी.एस.पी. का नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष काम करेगा.

(3) बहुजन समाज पार्टी में पहली बार ’नेशनल को-आर्डिनेटर’ की नियुक्ति की गई है. पहले चरण में इस पद पर दो लोगों को नियुक्त किया गया है. इस पद पर पार्टी के राज्यसभा सांसद एडवोकेट वीर सिंह व जयप्रकाश सिंह को नियुक्त किया गया है. आने वाले दिनों में इस पद पर और नियुक्तियां भी हो सकती हैं.

नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर
राम अचल राजभर

(4) पार्टी के पुराने नेता आर.एस.कुशवाहा को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. जबकि निवर्तमान अध्यक्ष श्री राम अचल राजभर का प्रमोशन कर उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. रामअचल राजभर को तीन राज्यों का को-ओर्डिनेटर भी बनाया गया है.

(5) राज्यसभा सांसद और कर्नाटक के प्रभारी अशोक सिद्धार्थ को कर्नाटक में बेहतर रणनीति बनाने के लिए ईनाम मिला है. उन्हें दक्षिण भारत के तीन राज्यों का को-आर्डिनेटर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा लालजी वर्मा को छत्तीसगढ़ का को-आर्डिनेटर बनाया गया है.

(6) गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों के बीच बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने साफ किया है कि बी.एस.पी. विधानसभा या लोकसभा चुनाव में केवल तभी चुनावी गठबंधन करेगी, जब उसे ‘‘सम्मानजनक’’ सीटें मिलेंगी. ऐसा नहीं होने की स्थिति में हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी.

अशोक सिद्धार्थ

(7) गठबंधन पर अपनी स्थिति को और ज्यादा साफ करते हुए सुश्री मायावती ने अपने बयान में कहा है कि उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में गठबंधन करके चुनाव लड़ने की बातचीत चल रही है. हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी आवाह्न किया है कि फिर भी पार्टी संगठन को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिये तैयार रहना होगा.

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा उलट फेर हुआ है. पार्टी के कई नेताओं को इधर-उधर किया गया है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जहां उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया है तो वहीं राष्ट्रीय महासचिव के पद पर भी नई जिम्मेदारी दी है.

उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद से रामअचल राजभर को हटाकर उनकी जगह आर. एस. कुशवाहा को यूपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. तो वहीं रामअचल राजभर को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. राजस्थान के प्रदेश प्रभारी जयप्रकाश सिंह को बसपा अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय को-आर्डिनेटर बनाया गया है.

इसके अलावा भी कई बदलाव किए गए हैं. हमें जैसे जैसे जानकारी मिलेगी, हम उसे आप तक पहुंचाएंगे.

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राहुल गांधी के रिपोर्ट कार्ड में मोदी को A+

नई दिल्ली। एक तरफ मोदी सरकार चार साल का जश्न मना रही है तो वहीं कांग्रेस इसको धोखा बता रही है. कांग्रेस की ओर से इसको विश्वासघात दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. लेकिन इसी बीच राहुल गांधी ने मोदी सरकार को A+ देकर नया मोड़ दे दिया है. साथ ही रिपोर्ट कार्ड को ट्वीटर पर शेयर कर दिया है.

राहुल गांधी का रिपोर्ट कार्ड

राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिए उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पोस्ट किया है. इस रिपोर्ट कार्ड में राहुल गांधी ने मोदी सरकार को दो विषयों में A+ जबकि एक विषय में B- दिए हैं. यही नहीं राहुल गांधी के रिपोर्ट कार्ड में मोदी सरकार को चार विषयों में फेल भी कर दिया है. मोदी सरकार शनिवार को चार साल पूरे होने का जश्‍न मना रही है. लेकिन विपक्ष का हमला एक बार फिर बीजेपी सरकार पर तेज हो गया है. मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड में राहुल गांधी ने एग्रीकल्‍चर- F, विदेश नीति- F, तेल की कीमत- F, रोजगार के अवसर- F, स्‍लोगन बनाना- A+, खुद की तारीफ- A+ और योगा- B- दिया है. बता दें कि शनिवार को कांग्रेस देशभर में विश्वासघात दिवस मना रही है.

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क्या अब मायावती और बसपा बदलने वाली है?​

बसपा प्रमुख सुश्री मायावती देश की इकलौती ऐसी नेता हैं, जिनकी राजनीति अन्य दलों से अलग है. मसलन, जैसे तमाम पार्टियां प्रवक्ताओं की फौज उतार कर दिन रात हर मुद्दे पर अपना बयान देती दिखती हैं, वहीं मायावती गिने-चुने मुद्दों पर सीधे खुद ही अपनी ठोस राय रखती हैं. या फिर अपने पार्टी के पदाधिकारियों के जरिए सीधे कार्यकर्ताओं तक अपनी बात पहुंचाने में यकीन रखती हैं.

जैसे तमाम पार्टियां सार्वजनिक मंचों पर एक दूसरे से हाथ जोड़े खड़ी रहती हैं, मायावती अमूमन सिर्फ बसपा के मंच पर अकेले दिखती हैं. लेकिन 23 मई की तस्वीरों ने एक झटके में काफी कुछ बदल दिया है. अलग-अलग दल के नेताओं के बीच बिना हिचक पूरी सहजता से मायावती का दिखना यह इशारा कर रहा है कि वह अब बदल रही हैं.

बीते दशक में जब तमाम विपक्षी दल अपने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे से गठबंधन कर रहे थे, मायावती तमाम मुश्किलों के बावजूद अकेले चल रही थीं. लेकिन पहले यूपी के उपचुनाव में सपा को समर्थन देकर तो फिर कर्नाटक और हरियाणा में चुनाव पूर्व गठबंधन कर के उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि वह अब बदल रही हैं.

एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में सोनिया गांधी के साथ दिखी उनकी आत्मीय सहजता के बाद तो इस बात पर मुहर लगाई जा सकती है कि बसपा अपने चिरपरिचित ‘अलगाववाद’ की नीति से हट रही है.

1990 के दशक की शुरुआत से बसपा खुद को दलितों की अकेली राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर पेश करती रही है. मायावती 2007 में अपने राजनीतिक करियर के शीर्ष पर पहुंची थीं जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के चुनाव में 30 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए विधानसभा की 206 सीटें जीती थीं. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का अपना कार्यकाल भी पूरा किया. तो वहीं 2009 में बसपा को लोकसभा में 21 सीटें मिली थीं जो उसका अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन है.

बसपा की यह सफलता एक बेजोड़ सामाजिक गठबंधन का नतीजा थी. तब पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने दलित वोट बैंक को एकजुट रखते हुए ब्राह्मणों को भी साथ कर लिया था. लेकिन इसके बाद से पार्टी लगातार कमजोर हुई है. 2014 में उसे एक भी लोक सभा सीट नहीं मिल पाई थी. वहीं 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई और इसके साथ ही लगातार दूसरी बार राज्य की सत्ता हासिल करने से चूक गईं.

हाल के चुनाव में पिछड़ा वोटर भी बसपा से छिटका है, जिसका खामियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ा. बसपा अभी जिस जगह पर खड़ी है, उसके पास खुद को बदलने के अलावा और कोई चारा भी नहीं दिखता. यूपी में सपा से गठबंधन और बेंगलुरू में विपक्षी दलों के साथ गठजोड़ का इशारा यह बता रहा है कि बसपा और मायावती खुद को बदलने को तैयार हैं और उन्होंने इसकी कोशिश भी शुरू कर दी है. जाहिर है कि यह बदलाव बहुजनों के हित के लिए भी जरूरी है.

मायावती ने बताई पीएम की चार साल की ऐतिहासिक गलतियां

PC-Patrika

लखनऊ। मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने करारा जवाब दिया है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी कर पार्टी सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार की विफलताओं को गिनाना शुरू कर दिया. इनका कहना है कि मोदी सरकार 4 साल हर मोर्चे पर विफल रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के अपने ही नेता उनसे नाराज हो रहे हैं. इनकी उलटी गिनती शुरू हो चुकी है.

सरकार में ऐतिहासिक वृद्धि

इस दौरान मायावती ने महंगाई को लेकर जमकर हमला किया. इस दौरान पेट्रोल-डीजल में मूल्य वृद्धि को लेकर मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पीएम नरेंद्र मोदी अपने हर काम को ऐतिहासिक बताते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में उनकी सरकार में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है. साथ ही चार साल में सरकार ने गरीबों और दलितों का उत्पीड़न किया है. बीजेपी सरकार के लोग अनर्गल बयानबाजी करते हैं और बीजेपी पार्टी अपने ही नेताओं की नहीं सुनती है.

मायावती ने बताया कि पार्टी अधिवेशन में आगामी विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी के अच्छे रिजल्ट की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी. कर्नाटक से लौटकर आने के बाद ही मायावती ने इसकी घोषणा की थी. शनिवार को लखनऊ में बसपा का राष्ट्रीय अधिवेशन है.

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पीएम मोदी का वीडियोः ‘साफ नीयत, सही विकास’ का पर्दाफाश

PC-indiatvnews

नई दिल्ली। ‘साफ नीयत, सही विकास’ का नारा देकर मोदी सरकार चार साल के जश्न में डूबी है. लेकिन जिन मुद्दों पर पीएम मोदी ने 56 इंच का सीना दिखाया था, दावा किया था इससे देश की कायापलट होगी, देश का विकास होगा. उन तमाम मुद्दों पर मोदी की साफ नीयत वाली विकास दिख नहीं पाई है. ये मैं नहीं कह रहा है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ही उनका जिक्र नहीं किया है.

शनिवार को भाजपा सरकार के चार साल पूर हो गए हैं. ‘साफ नीयत, सही विकास’ का नारा ट्रेंड कर रहा है. नरेंद्र मोदी ने एक करीब तीन मिनट का वीडियो शेयर कर साफ नीयत वाली विकास की कहानी सुनाई है. ‘साफ नीयत, सही विकास’ भले ही ट्रेंड कर रहा है लेकिन मोदी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होने लगे हैं.

जयशाह के स्टार्ट अप जैसी तरक्की

साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने युवा,युवा,युवा का नारा देकर युवाओं का दिल जीत लिया. युवाओं की बात करने वाले नरेंद्र मोदी ने चार साल में युवाओं के लिए किया क्या? रोजगार के नाम पर पकौड़ा, चाय बेचने की नसीहत और 15 लाख देने वाली बात को जुमला बताकर बच लिए. यदि युवाओं के लिए कुछ किया है तो फिर रोजगार का जिक्र वीडियो में क्यों नहीं है? हां, ऐसा मान लिजिए कि, साफ नीयत, सही विकास में रोजगार शामिल नहीं था. स्कील इंडिया, स्टार्ट अप का जिक्र किया है लेकिन अमित शाह के बेटे जयशाह के स्टार्ट अप जैसी तरक्की कितनों ने की है.

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना

एक नजर में देखिए पीएम के वादे। फोटो साभार- गूगल इमेज

दुसरी और बीजेपी ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखाया लेकिन इसका जिक्र वीडियो में नहीं है. बल्कि नोटबंदी के समय का मीडिया कवरेज देखिए तो पता चलता है कि नोटबंदी को किस प्रकार से मोदी और इनके मंत्री ताल ठोक कर भ्रष्टाचार मुक्त करने की बात कहते हैं. मतलब कि नोटबंदी पर भी नीयत साफ नहीं है. जीएसटी को वन नेशन, वन टैक्स बताकर लागू कराया लेकिन इसमें इतनी उलझन डाल दी कि आजकत लोगों को समझ हीं नहीं आ रहा है. शायद इसलिए जीएसटी का जिक्र भी साफ नीयत वाली वीडियो में नहीं है.

चौकीदार सरकार की हार

अब भ्रष्टाचार पर क्या कहना, खुद ही देखिए भाजपा सरकार में ही नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसी जैसे भगौड़े करोड़ों की चंपत लगाकर भाग गए और हमारी चौकीदार सरकार देखते रह गई. कुछ एक्शन लिया है तो फिर चार से विकास में इसका जिक्र किया क्यों नहीं क्योंकि ये अबतक के सबसे बड़े घोटालें माने जाते हैं.

बुलेट ट्रेन का सपना

रेलवे की स्थिति तो ज्यों की त्यों बनी हुई है. ट्रेनें लेट, जनरल बोगियों की संख्या नहीं बढ़ी लेकिन हादसें बढ़ गए. रेलवे विकास के नाम पर चार साल में सरकार बता रही है कि टिकट बुक करना आसान कराया है. बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया है.

साफ तौर पर कहें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन वादों के बदौलत सत्ता में आए और चर्चा में रहे, पर अब वह खुद ही रोजगार, नोटबंदी, जीएसटी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर चर्चा से नजर छिपाते दिख रहे हैं. अब भाजपा सरकार ही इनको अपने विकास के चैप्टर में शामिल नहीं कर रही है तो फिर आम लोग कैसे मान लें कि साफ नीयत के साथ सही विकास हुआ है.

-रवि कुमार गुप्ता

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‘साफ नीयत, सही विकास’ पर कांग्रेस का ‘विश्वासघात’

नई दिल्ली। बीजेपी सरकार के चार साल पूरे होने पर भाजपा ‘साफ नीयत, सही विकास’ के गीत गुनगुना रही है तो वहीं कांग्रेस ने इसको जनता के साथ विश्वासघात बताया है. शनिवार को कांग्रेस देशभर में विश्वासघात मनाकर लोगों को जागरूक करने का काम करेगी. साथ ही बीजेपी का भंडाफोड़ करेगी.

शनिवार की सुबह तक मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस ‘विश्वासघात दिवस’ मनाने में जुटी है. जो कि मोदी सरकार के कारनामों का काला चिट्ठा खोलेगी. राहुल गांधी ने दो-तीन पहले ही कहा था कि भाजपा के चार साल पूरे होने पर ‘विश्वासघात दिवस’ मनाएंगे. ‘विश्वासघात दिवस’ के जरिए लोगों को बताया जाएगा कि मोदी ने देश को किस तरह जनता को लूटा है. भाजपा की योजनाओं ने जनता को कंगाल कर दिया है.

बता दें कि कांग्रेस ने कर्नाटक में वापसी करने के बाद सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. कर्नाटक में विजयी होने के बाद बीजेपी पर हमला बोला है. राहुल गांधी बीजेपी को हर मुद्दे पर घेर रहे हैं. यहां तक कि प्रधानमंत्री को चैलेंज दिया और कहा कि मोदी जी इसको स्वीकार करें.

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शिवसेना प्रमुख ने कहा- भोगी आदित्यनाथ योगी को चप्पल से पिटना चाहिए

मुंबई। महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के संबंध बिगड़ते दिख रहा है. रिश्तों में करवाहट इतनी हो गई है कि शिवसेना प्रमुख ने यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी को चप्पल से पिटने की बात कह दी. इतना ही नहीं योगी को और भी बहुत भला-बुरा कह डाला.

आजतक की खबर के मुताबिक शुक्रवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस तरह की भाषा का प्रयोग किया. ठाकरे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भोगी कहा. साथ ही ठाकरे ने कहा कि विरार में शिवाजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान योगी ने अपना खड़ाऊं नहीं उतारा. योगी को चप्पलों से पीटना चाहिए.

ठाकरे ने कहा कि ईश्वर के प्रतिरूप शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समक्ष खड़ाऊं ना उतारना उनके प्रति अपमान है. योगी ने ऐसा शिवाजी का सम्मान नहीं किया है. आगे उन्होंने कटाक्ष करते हुए बोला कि, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है? हालांकि इसको लेकर अभीतक आदित्यनाथ योगी ने कोई जवाब नहीं दिया है. लेकिन इस तरही की भाषा की निंदा की जा रही है.

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मुस्लिम युवक को मारने लगे भगवाधारी, मिला सिख पुलिस का सपोर्ट

प्रतीकात्मक फोटो

उत्तराखंड। आज एक और मुस्लिम युवक भगवाधानी भीड़ की बलि चढ़ जाता. मुस्लिम युवक को मंदिर के पास भगवाधारी युवकों ने घेर लिया और जमकर पिटाई करने लगे. मारता देखकर आसपास के लोगों में खौफ भर गया और किसीकी हिम्मत नहीं हुई बचाने की और मुसलमान युवक बेवजह मार खाता रहा.

शुक्रवार को जानकारी प्रकाश में आई जबकि यह मामला 22 मई का है जो कि उत्तराखंड के रामनगर में गिरिजा मंदिर क पास घटी. दरअसल, मंदिर के पास मिलने आए एक हिन्दू-मुस्लिम जोड़े को भीड़ ने घेर लिया और मुस्लिम लड़के के साथ खींचा-तानी व मारपीट शुरू कर दी. हिंदू प्रेमिका से मिलने के कारण भगवाधारी युवकों ने पिटाई की.

सब-इंस्पेक्टर ने दिखाई बहादुरी

वहां पर मौजूद सिख सब इंस्पेक्टर गगनदीप की नजर गई वह लड़के को बचाने आ गए. भीड़ ने उनपर भी हमला करने की कोशिश की लेकिन गगनदीप लड़के को बचाने में कामयाब हो गए. और वो लड़के को लेकर पुलिस स्टेशन आ गए. इसके बाद लड़के को परिजनों को सौंप दिया.

सोशल मीडिया पर वाहवाही

इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जोर शोर से वायरल हो रहा है. लोग इसमें उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. गगनदीप की इस बहादुरी के कारण लोग ट्विटर पर उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं. यहां तक की सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भी ट्वीट कर उनकी तारीफ की.

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CBSE Class 12th Results 2018: कल आएगा रिजल्ट,सबसे पहले ऐसे चेक करें

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नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) शनिवार 26 मई को 12वीं के नतीजे घोषित करेगा. मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव अनिल स्‍वरूप ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. इसके साथ ही स्टूडेंट्स की बेचैनी बढ़ गई है लेकिन रिजल्ट चेक करन के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन तरीके दिए गए हैं. जिनकी जानकारी नीचे आपको मिलेगी. इंटरनेट की दिक्कत होने पर एसएमएस के जरिए भी रिजल्ट चेक कर सकते हैं.

बता दें कि इस साल 10वीं और 12वीं में 28 लाख स्‍टूडेंट ने बोर्ड परीक्षा दी थी. जहां 10वीं में 16.38 लाख स्‍टूडेंट व 12वीं में 11.86 लाख स्‍टूडेंट शामिल हुए थे. अब 12 वीं की रिजल्ट आ रही है जिसको चेक करने की तमाम सुविधा दी जा रही है लेकिन हम आपको सबसे आसान तरीका बताने जा रहे हैं.

ऑफिशियल वेबसाइट

यदि आप चाहें तो CBSE board 12वीं के नतीजे ऑफिशियल वेबसाइट cbseresults.nic.in और cbse.nic.in पर जारी किए जाएंगे. हालांकि इस बार CBSE के 10वीं और 12वीं के रिजल्‍ट www.google.com गूगल के सर्च पेज पर भी उपलब्‍ध होंगे.

गूगल सर्च ऐसे करें

  • सबसे पहले www.google.com पर जाएं.
  • फिर ‘CBSE results’ or ‘CBSE class 10 results’ or ‘CBSE class 12 results’ सर्च करें.
  • अब गूगल के सर्च रिजल्‍ट पेज पर रिजल्‍ट सर्च विंडो दिखाई देगी. यहां अपना रोल नंबर और जन्‍म तारीख डालें.
  • अपनी डिटेल सब्मिट कर रिजल्‍ट चेक करें.
मैसेज के जरिए चेक करें

अब यदि आप चाहते हैं कि एसएमएस के जरिए रिजल्ट प्राप्त करना तो यहां पर चेक कर पाएंगे. इसके लिए आपको 57766 (BSNL), 54321202 (Airtel),5800002 (Aircel), 52001 (MTNL), 55456068 (Idea), 54321, 51234 और 5333300 (Tata Teleservices)  और 9212357123 नंबरों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं. साथ ही आप चाहें तो अपने सर्किल नेटवर्क के कस्टमर केयर से संपर्क कर जानकारी लेकर प्राप्त कर पाएंगे.

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मायावती ने योगी को लेटर लिख बताया- 13 ए माल एवेन्यू सरकारी आवास नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व मंत्रियों को सरकार आवास खाली करने को नोटिय दिया था. इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती का सरकारी बंगले सुर्खियों में आ गया था. इसको लेकर मायावती ने एक और बात मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को खत लिखकर बातें बताई है, जिसमें उनका कहना है कि जिस बंगला का खाली करने की बात कही जा रही है वह उनका सरकारी आवास नहीं है.

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार वह मायावती का सरकारी आवास नहीं है तो है क्या. लेकिन इस बात को साफ तौर पर मायावती ने बताया कि, 13 ए माल एवेन्यू तो मायावती का सरकारी आवास है ही नहीं. उनका सरकारी आवास तो 6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग है और वह इसे जल्द ही खाली कर देंगी.

कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित

मायावती के इस पत्र को लेकर शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा और लालजी वर्मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले. पत्र में मायावती ने लिखा है कि बसपा शासनकाल के समय 13 जनवरी, 2011 में 13 माल एवेन्यू कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित किया जा चुका है. उसके कुछ भाग में मुझे इस उद्देश्य से रहने की अनुमति दी गई थी कि इस स्थल का रखरखाव एवं सुरक्षा मेरी देखभाल में हो सके. उन्होंने कहा है कि 23 दिसंबर 2011 में राज्य संपत्ति विभाग ने  6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग उन्हें आवास के रूप में आवंटित किया गया था. इसलिए मैं इसे खाली कर विभाग को सौंप दूंगी.

साथ ही मायावती ने ये भी अनुरोध किया है कि श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल की देखरेख और सुरक्षा राज्य संपत्ति विभाग करे और अगर किसी तरह की दिक्कत विभाग को होती है तो पहले की तरह ही बसपा को अधिकृत करे दें. बता दें कि हालही में मायावती ने 13 माल एवेन्यू में कांशीराम जी यादगार स्थल का बोर्ड लगवाया था जिसको लेकर बहस छिड़ गई थी.

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बौखलाए येदियुरप्पा, सीएम कुमारस्वामी को दी चेतावनी

बेंगलुरू। कर्नाटक की करारी हार के बाद येदियुरप्पा के बौखलाए नजर आ रहे हैं. कर्नाटक की जेडीएस-कांग्रेस सरकार के खिलाफ येदियुरप्पा आक्रामक दिख रहे हैं. कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है. इस चेतावनी के बाद कर्नाटक की राजनीति फिर गरमा गई है. इस चेतावनी के जरिए येदियुरप्पा खुद को किसान नेता दिखाने की कोशिश में लगे हैं.

53,000 करोड़ रुपये माफ…

येदियुरप्पा ने कहा कि यदि कुमारस्वामी की सरकार विश्वास मत के बाद 24 घंटे के अंदर कसानों का कर्ज माफ नहीं करती है तो उनकी पार्टी राज्य भर में आंदोलन करेगी. इस आंदोलन की आवाज देश भर जाएगी. येदियुरप्पा ने कहा कि जेडीएस ने 53,000 करोड़ रुपये का किसान ऋण माफ करने का वादा किया था जिसमें नेशनलाइज्ड बैंकों से लिया गया उधार भी शामिल है. बता दें कि येदियुरप्पा सीएम की शपथ लेने के बाद किसानों का कर्ज माफ करने का घोषणा किए थे और आईएस-आईपीएस का तबादला कराए थे जिसके बाद कोर्ट ने उनको नीतिगत फैसले लेने से रोक दिया था.

गौरतलब है कि शुक्रवार को कर्नाटक विधानसभा में कुमारस्वामी ने बहुमत साबित कर खुद को कदावर व भरोसेमंद नेता साबित कर दिय है. साथ ही उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि गठबंधन का भविष्य सुरक्षित है. उनकी पार्टी गठबंधन पर टिकी है इसलिए वे किसी प्रकार का गलत कदम नहीं उठाएंगे.

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निपाह वायरस को रोकेगी मलेशिया की दवाईयां

PC- zeenews

नई दिल्ली। निपाह वायरस का आतंक बढ़ता जा रहा है. केरल में मरने वालों की संख्या केरल में अबतक 12 लोगों की मौत हो गई जबकि सैकड़ों का इलाज चल रहा है. निपाह वायरस को रोकने के लिए सरकार ने जरूरी हिदायत बरतने को कहा है. साथ ही इसको रोकने के लिए मलेशिया से दवा मंगाने की बात भी सामने आई है.

इस वायरस का हालिया शिकार कोझीकोड़ के पेरंब्रा गांव के निवासी मूसा बने हैं. मूसा के दोनों बेटे मुहम्मद सादिक, मुहम्मद सालीह और उनकी भाभी मरियम इस बीमारी की वजह से मर चुके हैं. केरल का खौफ अब देश कई राज्यों में पहुंच रहा है. सरकार इसको रोकने का प्रयास कर रही है. लेकिन बहुत फायदा नहीं हो पा रहा है क्योंकि मरने वालों की संख्या के साथ-साथ संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है.

मलेशिया की दवाई

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने रीबाविरीन नाम के एंटी-वायरल ड्रग को मलेशिया से मंगवाया है ताकि निपाह से लड़ा जा सके. कोझीकोड के मेडिकल कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में तीन मरीजों को यह ड्रग दिया जा रहा है. चूंकी निपाह सबसे पहले मलेशिया में फैला था इसलिए उनके पास इसको रोकने की कारगर दवा है. सरकार मलेशिया से दवा मंगाने में जुटी है ताकि जल्दी से इसको रोका जा सके. राज्य में विभिन्न अस्पतालों में इस वायरस के लक्षणों वाले 23 लोग भर्ती हैं. वहीं जिन दो लोगों की पहचान वायरस से पीड़ित के तौर पर हुई थी उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है.

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दावे पर खरे उतरे कुमारस्वामी, बीजेपी विधायकों का वॉकआउट

बेंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अपने दावे पर खरा उतरे. आखिरकार उन्होंने विधायकों का विश्वसा मत हासिल कर लिया. फ्लोर टेस्ट में विश्वासमत हासिल करने के बाद जेडीएस व कांग्रेस की जीत पूरी तरह पक्की हो गई है. कुमारस्वामी ने पहले जिस तरह दावा किया था उस दावे को आज पूरा कर दिखाया.

पार्टी का भविष्य भी गठबंधन

एचडी कुमारस्वामी को उनके समर्थन में 117 विधायकों ने वोट किया. उनके विश्वासमत से पहले बीजेपी विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया था. विश्वासमत पेश करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि काफी सोच-समझकर ही गठबंधन सरकार बनाई है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का भविष्य भी गठबंधन पर ही टिका है. विश्वास मत से पहले पहले विधानसभा के स्पीकर के लिए हुए चुनाव को कांग्रेस ने जीता. बीजेपी के स्पीकर के पद के लिए एस सुरेश कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद कांग्रेस के पूर्व स्पीकर के आर रमेश कुमार को स्‍पीकर चुना गया.

बता दें कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार ने कर्नाटक जीत के साथ वापसी की है. इस गठबंधन ने पूरे विपक्ष को एकजुट कर दिया है. बुधवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष के नेताओं ने एकजुट होकर महागठबंधन की झलक दिखाई दी थी. इसका प्रभाव यूपी के कैराना व नूरपुर में भी देखने को मिला है. मायावती ने वहां पर गठबंधन को समर्थन देने की बात कही है.

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हरामी व्यवस्थाः चार दलित महिलाओं पर आधा दर्जन राजपूतों ने किया जानलेवा हमला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार का एक शर्मनाक मामला सामने आया है. घर पर अकेला देखकर राजपूतों ने दलित महिलाओं पर जानलेवा हमला किया. इतना ही नहीं घर में घुसकर मारा और फिर घर को पूरी तरह उजाड़ दिया. ये महिलाएं जान बचाकर 100 नंबर डायल कर पुलिस को बुलाई तब जाकर इनकी जान बच पाई.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूपी के बांदा जिले के बिसंड़ा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव में गुरुवार सुबह ऊंची जाति के एक समूह ने एक दलित परिवार के घर पर हमला बोल दिया. इस हमले में दलित परिवार की एक बुजुर्ग महिला सहित चार महिलाएं बुरी तरह घायल हो गई.

दलित का अकेला घर

पीड़ित परिवार के मुखिया संतोष ने बताया कि कहा, “हमले के समय घर में सिर्फ महिलाएं थीं. वह खुद जरूरी काम से इलाहाबाद में है. हमलावर समूह उसके परिवार का घर छीनना चाहते हैं. ऊंची जाति के इलाके में सिर्फ उसका घर बचा है, जिसे छीनने की पुरजोर प्रयास किया जा रहा है. राजपूतों की ओर से यह छठा हमला है. घटना की सूचना एसपी, थानाध्यक्ष सहित कई पुलिस अधिकारियों को जरिए फोन दे दी गई है. साथ ही हमेशा मारने-पीटने की धमकी देते रहते हैं.”

ऐसे किया हमला

यह हमला सुबह करीब साढ़े छह बजे किया जब बुजुर्ग दलित महिला शिवकलिया (58) अपने घर के पिछवाड़े गोबर के उपले उठाने गई थी. तभी संतराम सिंह, उसका बेटा अमित सिंह, लालू सिंह और दो महिलाएं सावित्री व सपना ने उपले उठाने से दलित महिला को रोका व धक्का मुक्की की. जब वह नहीं मानी, तब इस समूह के आधा दर्जन लोगों ने एक साथ मिलकर उस पर हमला बोल दिया. उसे बचाने पहुंची गुड्डन (32), रोशनी (16) और सुनीता (29) को भी घर में घुस कर मारा-पीटा गया.

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