महिला जज को थूक वाला पानी पिलाने वाले चपरासी की खुली पोल

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आगरा। आगरा में एक चपरासी ने सिविल जज को थूक वाला पानी पिलाता था. इस घटना की जानकारी लगने के बाद चपरासी की नौकरी चली गई. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. चपरासी गिलास में थूक कर पानी लेकर जाता है जो कि वीडियो में साफ दिख रहा है. इस घिनौने काम को महिला जज ने बड़ी चालाकी से पकड़ा और चपरासी की घिनौनी हरकर सबके सामने आ गई.

अभी और मिलेगी सजा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी चपरासी ने महिला सिविल जज को पानी पिलाने से पहले उसमें थूका. घटना करीब एक हफ्ता पहले की है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आरोपी चपरासी विकास गुप्ता को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. आगरा के सेशन कोर्ट जज पीके सिंह ने इस घटना की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं. एक महीने के भीतर जांच की रिपोर्ट आने पर आरोपी चपरासी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

महिला जज ने यूं पकड़ा

जानकारी के मुताबिक महिला सिविल जज को आरोपी चपरासी की गतिविधियों के बारे में बहुत पहले से पता चल चुकी थी लेकिन इसको साबित करना जरूरी था. इसलिए इसलिए, उन्होंने अपने चैंबर में CCTV कैमरा लगवाया. इसके बाद तो चपरासी की गंदी हरकत कैमरे में कैद हो गई. बाद में उन्होंने यह वीडियो अपने सीनियर जजों को सौंप दिया, जिसके आधार उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया. इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर थू-थू हो रही है और लोग चपरासी की हरकत को घटिया बता रहे हैं.

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मायावती के बाद मुलायम-अखिलेश की आई बारी

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उत्तर प्रदेश। बसपा प्रमुख मायावती के बाद अब सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव ने सरकारी बंगला को बाय बोल दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है. इससे पहले मायावती ने बंगला खाली कर चाबी स्पीड पोस्ट से भिजवाई थी.

अखिलेश के पास स्थाई व्यवस्था नहीं

फिलहाल खबर यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास स्थाई ठिकाना नहीं है. इसके लिए कुछ समय लग सकता है. इसलिए अखिलेश यादव ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है, जब तक उनके पास रहने के लिए कोई स्थाई व्यवस्था ना हो जाए तब तक उन्हें सरकारी गेस्ट हाउस में रहने दिया जाए. इसके लिए अखिलेश यादव ने गेस्ट हाउस में चार कमरे देने का अनुरोध किया है.

अखिलेश यादव ने राज्य संपत्ति विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि सरकारी गेस्ट हाउस में पार्टी के कार्यों के लिए एक कमरा मेरे लिए, एक कमरा कन्नौज से सांसद डिम्पल यादव के लिए और दो कमरे राज्यसभा सांसद संजय सेठ और सुंदर नागर के लिए 31 मई से बुक कर दिया जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आने के बाद अखिलेश यादव ने आवास बनाने के लिए दो साल का समय मांगा था जिसको लेकर याचिका दायर की जो अबतक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया था. जिसके बाद राज्य सरकार के संपत्ति विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के अन्दर सरकारी आवास खाली करने की नोटिस दे दी थी. राजनाथ सिंह ने भी अपने सरकारी आवास खाली कर दिए हैं.

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भाजपा की तरकश का नया तीर, होगा आरक्षण का वर्गीकरण

23 मई को कर्णाटक के नए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी नेताओं की भीड़ देखकर भाजपा के कुशासन से त्रस्त जिन लोगों ने भारी राहत की सांस लिया था, वे निश्चय ही 31 मई को आये चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों के उपचुनाव का परिणाम देखकर काफी गदगद हुए होंगे. इसमें कोई शक नहीं कि इन चुनाव परिणामों, खासकर कैराना, नूरपुर और जोकीहाट के परिणामों ने मोदी-मुक्त भारत की सम्भावना को उज्ज्वलतर कर दिया है. इसलिए कैराना लोकसभा की विजयिनी तब्बसुम हसन का यह बयान किसी को भी अतिरेक नहीं लगा कि कैराना में भाजपा दफ़न हो गयी है. भाजपा चार लोकसभा में एक और दस विधानसभा सीटों में महज एक जीतने में कामयाब रही. यदि विपक्ष अपने छोटे-छोटे स्वार्थों का त्याग कर इसी तरह संगठित होकर लड़ा तो  भाजपा की जीत का यही अनुपात 2019 में भी सामने आ सकता है, इसका अनुमान तमाम लोग लगा रहे होंगे, जो गलत भी नहीं है. बहरहाल आम भाजपा विरोधी भले ही 2019 में मोदी राज के आसानी से ख़त्म होने की कल्पना करे, लेकिन विपक्ष के जिम्मेवार नेताओं को इस विजय से पूरी तरह आश्वस्त नहीं होना चाहिए. यदि वे ऐसा किये तो 2019 में गच्चा खा सकते हैं.

कारण, अभी भी दुनिया की सबसे शक्तिशाली पार्टी भाजपा के साथ साधु-संतो, लेखकों-सेलिब्रेटीयों, मीडिया और पूंजीपतियों का नब्बे प्रतिशत  से ज्यादा समर्थन है: अभी भी उसके पास संघ जैसे दुनिया के विशालतम व सबसे समर्पित संगठन का भरपूर समर्थन है, जो 2019 में भाजपा की रुखसती को देखते हुए और शिद्दत से सक्रिय होगा. यही नहीं उसके तरकश में अभी दो ऐसे खास तीर हैं, जो विपक्ष को धराशायी कर सकते है. इनमे पहला है राम मंदिर जो उसे सत्ता दिलाने में आज भी पहले की भाँति ही प्रभावी है. यूपी जैसे निर्णायक प्रदेश में योगी की ताजपोशी इसी के इस्तेमाल के लिए हुई थी और योगी नए सिरे से इसके लिए खुद को तैयार करेंगे, यह बात विपक्ष अपने जेहन में जितनी जल्दी बिठा ले, उतना ही बेहतर होगा. लेकिन भाजपा के तरकश में अभी एक ऐसा मारक तीर है, जिसे झेलने के लिए विपक्ष शायद तैयार नहीं होगा. पर यदि वह उसे व्यर्थ नहीं कर पाता है तो जिन दलित,पिछड़ों और अकलियतों के सामाजिक समीकरण के जरिये वह मोदी राज के खात्मे का गणित तैयार कर रहा है , वह गड़बड़ा सकता है. विपक्ष के सामाजिक समीकरण को क्षत-विक्षत कर देने वाला वह तीर है: ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण जो दलित आरक्षण के वर्गीकरण तक भी प्रसारित हो सकता है. बहरहाल भाजपा इस मारक हथियार का इस्तेमाल करे, इस दिशा में उसके बुद्धिजीवी सक्रिय हो चुके हैं. ऐसे ही बुद्धिजीवियों में से एक ने 24 मई को भाजपा के अघोषित मुखपत्र के रूप में जाने जानेवाले एक बड़े दैनिक पत्र में एक खास लेख लिखकर भाजपा को 50 प्रतिशत वोट पाने के लिए ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण का नुस्खा सुझाते हुए बहुत दावे के साथ लिखा था कि जो आरक्षण का वर्गीकरण करेगा उसे शर्तिया तौर पर भारी राजनीतक लाभ मिलेगा. इसके पक्ष में युक्ति खड़ी करते हुए उसने  निम्न बातें लिखा था.

 ‘ध्यान रहे बीते साल अक्तूबर में मोदी सरकार ने ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के उद्देश्य से दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय एक आयोग  गठित किया . इस आयोग को तीन महीने में रपट देनी थी, लेकिन उसका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा. पिछली बार कार्यकाल बढाते समय केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि 20 जून के बाद कार्यकाल नहीं बढेगा. इसका मतलब है कि इस तिथि तक आयोग की रपट आ जाएगी. यह रपट इस बात को स्पष्ट करेगी कि पिछड़े, अधिक पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्ग में कौन-कौन सी जातियां आयेंगी. ओबीसी जातियों को इन तीन वर्गों में विभाजित कर उन्हें नौ-नौ प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की जा सकती है. आसार यही है कि केंद्र सरकार इस आशय की अधिसूचना जल्द से जल्द जारी करेगी.

चूँकि यह अधिसूचना 1993 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुकूल होगी, इसलिए उसके किसी कानूनी पचड़े में पड़ने की गुंजाइश भी नहीं रहेगी. हो सकता है की इस अधिसूचना से ओबीसी की उन जातियों में कुछ नाराजगी फैले जिन्हें अभी आरक्षण का लाभ उनकी आबादी के अनुपात से कहीं अधिक मिल रहा है. लेकिन वे शेष ओबीसी जातियां अवश्य खुश होंगी जिनका हक़ मारा जाता रहा है. जाहिर है कि इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा और उसे अपना वोट प्रतिशत 31 से 50 प्रतिशत करने में आसानी होगी. ओबीसी आरक्षण में वर्गीकरण का अच्छा- खासा असर जिन राज्यों में देखने को मिल सकता है, उनमें  उत्तर प्रदेश और बिहार प्रमुख है. अकेले इन दो राज्यों में लोकसभा की कुल 120 सीटें हैं. ये दोनों राज्य आरक्षण के लिहाज से संवेदनशील भी हैं. 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के समय आरक्षण पर कुछ बयानों ने भाजपा को नुक्सान पहुचाया था. अभी भी भाजपा विरोधी दल कहते रहते हैं कि मोदी सरकार आरक्षण ख़त्म करना चाहती है, लेकिन यदि वह आरक्षण वर्गीकरण कर देती है तो विरोधी दलों के मन में पिछड़े वर्गों के मन में संशय पैदा करना कठिन हो जायेगा. उनके पास इस सवाल का जवाब भी नहीं होगा कि उन्होंने अबतक यह काम क्यों नहीं किया ?’

इसमें कोई शक नहीं कि लेखक की बात की ही पुष्टि करते जब गत अक्तूबर में ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के लिए पांच सदस्यीय एक आयोग गठित किया गया , तब ढेरों राजनीतिक विश्लेषकों ने एक स्वर में कहा था-‘मोदी सरकार का यह निर्णय जाति की राजनीति का एक नया दौर  शुरू कर देगा . ओबीसी जातियों में यह विभाजन तो पहले से है, लेकिन इसके कारण वह विभाजन औपचारिक रूप प्राप्त कर लेगा.’ वास्तव में गत वर्ष के उत्तरार्द्ध से ही विपक्ष की भावी एकता सहित कुछ ऐसे हालात पैदा होने लगे थे कि भाजपा के रणनीतिकारों को आरक्षण के वर्गीकरण की दिशा में बढ़ना एक मज़बूरी बन गयी थी.  किन्तु ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के जरिये भाजपा का लक्ष्य महज आरक्षित वर्गों में सामाजिक विभाजन पैदा करना ही नहीं था: इसके जरिये उसकी मंशा मोदी की छवि सामाजिक न्याय के नए मसीहा के रूप में स्थापित करने की भी थी. आरक्षण का वर्गीकरण करने पर चिरकाल से अभावों में रहे आरक्षित वर्ग के लोग, अपने नाम मात्र के फायदे को देखते हुए मोदी को सामाजिक न्याय का नया मसीहा मानने लग सकते हैं, इस बात को ध्यान में रखकर ही भाजपा ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण की परिकल्पना की थी. जब उसने यह परिकल्पना की थी तब बहुत से बुद्धिजीवियों ने ओबीसी के तर्ज पर दलितों के आरक्षण में वर्गीकरण का कयास लगाया था. किन्तु भाजपा की और से यह कहकर उस पर विराम लगा दिया था कि फिलहाल सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है.पर,  अब जबकि 31 मई के बाद हालात बदतर हो चुके हैं, भाजपा दलित आरक्षण के वर्गीकरण की दिशा में भी बढ़ सकती है .

बहरहाल आज जबकि 31 मई को आये उपचुनावों से मोदी की रुखसती तय सी दिख रही है, मोदी सरकार आरक्षण के वर्गीकरण के जरिये बहुजनों की एकता को खंडित करने और मोदी को सामाजिक न्याय के नए मसीहा के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगी ही बढ़ेगी.  ऐसा करने पर निश्चित रूप से विपक्ष के लिए भाजपा की काट मुश्किल हो जायेगा. विशेषकर यूपी –बिहार में , जहाँ की राजनीति देश की दिशा तय करती है, मजबूत हथियार जातियों का गणित है. इन अंचलों में दलित,पिछड़े और अकलियतों का संख्या बल भाजपा पर भरी पड़ेगा. किन्तु आरक्षण से कम लाभान्वित जातियों की भाजपा के पक्ष गोलबंदी से विपक्ष का गणित गड़बड़ा सकता है. ऐसे में जरुरी है कि इन जातियों को अपने पाले में बनाये रखने का ठोस एजेंडा लेकर आगे बढे. इसके लिए विपक्ष को दो काम करने पड़ेंगे.पहला, उन्हें इस बात को तथ्यों के साथ प्रमाणित करना पड़ेगा कि भाजपा ने 24 जुलाई ,1991 को नरसिंह राव द्वारा लागू नव उदारवादी अर्थनीति को हथियार बनाकर आरक्षण को महज कागजों की शोभा बना दिया है. इसलिए आरक्षण के वर्गीकरण से उन्हें कोई लाभ नहीं होने जा रहा है. यह तथ्य बताने के साथ दूसरा जो सबसे महत्त्वपूर्ण काम करना होगा , वह है सर्वव्यापी आरक्षण की घोषणा . इसके तहत उन्हें अपने घोषणापत्र में यह बात मजबूती से उठानी होगी कि सत्ता में आने पर न्यायपालिका, मिलिट्री सहित निजी और सरकारी क्षेत्र की सभी प्रकार की नौकरियों, सप्लाई, डीलरशिप, ठेकों, पार्किंग, परिवहन, फिल्म-मीडिया इत्यादि धनार्जन के समस्त स्रोतों में आरक्षित वर्गों को संख्यानुपात में आरक्षण दिलाएंगे. आज जबकि तमाम जागरूक लोगों को पता चल चुका है कि सरकारी नौकरियां दिलाने वाला आरक्षण महज कागजों की शोभा बन चुका है, ऐसे में एकमात्र सर्वव्यापी आरक्षण ही वह हथियार है,जिसके जरिये विपक्ष आरक्षण से कम लाभान्वित जातियों को अपने पाले में बनाये रख सकता है, साथ ही साथ चुनाव को पूरी तरह सामाजिक न्याय पर केन्द्रित भी कर सकता है. और सबको पता है, चुनाव जब सामाजिक न्याय पर केन्द्रित होता है ,भाजपा के समक्ष हार वरण करने के सिवाय कोई और उपाय नहीं बचता है.

एच.एल.दुसाध   

लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

संपर्क: 9654816191

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आठ साल की बच्ची को उल्टा कर मौलवी ने की…

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जम्मू। एक निर्दयी मौलवी की डरावनी करतूत वीडियो में कैद हो गई. इसके बाद सोशल मीडिया पर जमकर लोगों ने खिंचाई की. जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में पुलिस ने एक मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है. मौलवी पर मदरसे में एक नाबालिग को उल्टा लटकाकर पीटने का आरोप है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मौलवी आठ साल के एक बच्चे को उल्टा लटकाकर बेरहमी से मार रहा है.

पुलिस ने मौलवी की पहचान मुश्ताक अहमद डार के तौर पर की है. मौलवी बारामूला के इकबाल कॉलोनी का रहने वाला है. फिलहाल मौलवी पुलिस की गिरफ्त में है. मौलवी ने बच्ची को मारने का कारण नहीं बताया है. फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर गुस्साए लोग अरोपी मौलवी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पुलिस के मुताबिक बारामूला पुलिस स्टेशन में धारा 342 और 323 के अंतर्गत ज्यूविनाइल एक्ट 2013 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है. बच्ची का इलाज जारी है. बच्ची काफी डरी सहमी है.

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ब्रह्मेश्वर मुखिया के समर्थकों ने दी धमकी, पत्रकार ने यूं दिया जवाब

नई दिल्ली। फारवर्ड प्रेस के हिंदी-संपादक नवल किशोर कुमार को ब्रह्मेश्वर मुखिया के समर्थकों से जान से मार डालने की धमकियां मिल रही हैं. पिछले 24 घंटे से  उन्हें  लगातार गालियों से भरे फोन आ रहे हैं. इन धमकियों में कहा जा रहा है कि बिहार में रह रहे उनके परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाएगा तथा उन्हें दिल्ली आकर मार डाला जाएगा.  धमकियां उनके फेसबुक पेज पर कमेंट में भी दी जा रही हैं.

नवल किशोर रणवीर सेना पर काम करने वाले देश के प्रमुख पत्रकारों में से एक हैं. उन्होंने न सिर्फ सेना की कारगुजारियों का विस्तृत अध्ययन किया है, बल्कि ब्रह्मेश्वर मुखिया का एकमात्र उपलब्ध मुकम्मल वीडियो इंटरव्यू भी उन्होंने किया था, जो फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित हुआ था तथा हमारे यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है.

दरअसल, 1 जून, 2018 को  भोजपुर जिला के खोपिरा में रणवीर सेना  ब्रह्मेश्वर मुखिया की प्रतिमा की स्थापना करने जा रही है. वर्ष 2012 में इसी दिन उसे अज्ञात हमलावरों  ने गोलियों से भून दिया था. मुखिया के हत्यारों का आज तक पता नहीं चल सका. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रणवीर सेना के लोग अपने नायक की हत्या की बरसी मनाने के लिए एक जून को खोपिरा में जुटेंगे. कुछ सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में इसकी  तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.

नवल किशोर कुमार ने  तीन दिन पहले -27 मई, 2018 को – अपनी  फेसबुक पोस्ट में इस अयोजन का विरोध किया था. उन्होंने 300 से अधिक दलित-पिछडों की नृशंस हत्या के आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौत को ‘कुत्ते की मौत’  कहा था तथा बिहार में सामंती ताकतों के बढते मनोबल के लिए जदयू-भाजपा की सरकार को आडे हाथों लिया था.

याद दिलाने की आवश्यकता शायद नहीं है कि यह वही ब्रह्मेश्वर मुखिया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने अपने लोगों को कहा था कि जहां नरसंहार करने जाओ वहां दलित-पिछडों के बच्चों को भी मत छोडो. वे संपोले हैं, बडे होकर नक्सलवादी बनेंगे. रणवीर सेना ने विभिन्न नरसंहारों में दर्जनों बच्चों को गाजर-मूली की तरह काट डाला. गर्भवती महिलाओं के गर्भ चीर डाले. युवतियों के स्तन काट डाले

ब्रह्मेश्वर मुखिया जैसे लोगों के लिए हमारी राय पूरी तरह स्पष्ट रही है. उसकी हत्या के बाद हमने फारवर्ड प्रेस (जुलाई,2012) की कवर स्टोरी का शीर्षक दिया था – ‘किसकी जादूई गोलियों ने ली बिहार के कसाई की जान’. यह कवर स्टोरी नवल किशोर ने ही लिखी थी. उसी अंक में प्रसिद्ध दलित चिंतक कंवल भारती का भी एक लेख था,  जिसका शीर्षक था : ‘हत्यारे की हत्या पर दु:ख कैसा?’

हमारी नजरों में वह एक हत्यारा, एक नरपिशाच ही था. उसके लिए किसी भी प्रकार के सम्मानजक शब्द के प्रयोग का सवाल ही नहीं उठता.

बहरहाल, घमकियों की लिखित शिकायत बिहार के डीजीपी व घमकी देने वाले जिन लोगों के नाम मिल सके हैं, उनके जिलों के एसपी से की जा रही है. फेसबुक कमेंटों में कई जगह  दलित समुदाय के लिए भी गालियां दी गई हैं. उनके लिए उपयुक्त पात्रों द्वारा अलग से संबंधित जगहों पर शिकायत भेजी जा रही है.

रणवीर सेना के लंपट कान खोल कर सुन लें. हमने सैकडों लोगों की शहादत दी है. हम डरने वाले नहीं हैं.

-प्रमोद रंजनसंपादक (फॉरवर्ड प्रेस)

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विपक्ष की मुंहजुबानी, बीजेपी हार की कहानी

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नई दिल्ली। कर्नाटक में शिकस्त के बाद बीजेपी के दिन अच्छे नहीं जा रहे हैं. कर्नाटक में ज्यादा सीट लाकर भी कांग्रेस व जेडीएस ने सत्ता छिन ली तो वहीं 11 विधान सभा व 04 लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा को केवल दो सीट ही हाथ लगे. तो वहीं योगी की दिन-रात मेहनत के बाद भी उत्तर प्रदेश में एक सीट हाथ ना लगी. महागठबंधन की मुंहतोड़ जवाब से बीजेपी की बेचैनी बढ़ती दिख रही है. कल तक जो विपक्ष खामोश बैठा था वो अब बीजेपी को हार का कारण गिना रहा है. इतना ही नहीं जदयू ने भी बिहार में हारने के बाद भाजपा पर ऊंगली उठाई है. देखिए किस तरह बीजेपी के साथ जुड़े दल भाजपा का साथ छोड़ रहे हैं…

विपक्षियों की नसीहत

इस उप चुनाव के नतीजों पर विपक्षियों की जीत देखकर लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला. तेजस्वी ने कहा कि अवसरवादी नीतीश कुमार को जनता ने सबक दिया है. साथ ही बताया कि बिहार में दंगा फैलाने के कारण जदयू को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि देश को और समाज को बांटने वाली सरकार का खात्मा हुआ है. किसानों, बेरोजगारों ने भाजपा को जवाब दिया है. कैराना लोकसभा और नूरपुर के मतदाताओं को धन्यवाद और बधाई.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज के नतीजे दिखाते हैं कि देशभर में मोदी सरकार के खिलाफ लोगों में बहुत ज्यादा गुस्सा है. अभी तक लोग पूछते थे- विकल्प क्या है? अब लोग कह रहे हैं कि मोदी जी विकल्प नहीं हैं, पहले इन्हें हटाओ.

बीजेपी गठबंधन पर खतरा

इतना ही नहीं उप चुनाव की हार को देखकर बीजेपी के साथ जुड़ें अन्य दलों ने भी चिंता जताई है. जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई के कारण भाजपा हारी है. इनके साथ हमें भी हार का मुंह देखना पड़ा है. केसी त्यागी ने यह भी कहा कि उपचुनाव के नतीजे एनडीए के लिए चिंता का विषय हैं. एनडीए में अभी सहयोगी अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दो बड़े दल एक साथ आ गए हैं, इसलिए वहां के नतीजे खतरे की घंटी बन सकते हैं.

महबूबा मुफ्ती भी नाराज

बात को जारी रखते ही केसी त्यागी ने यह भी बताया कॉ आज चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है, शिवसेवा बीजेपी के खिलाफ ही लड़ रही है. वहीं अकाली दल खुश नहीं है, INLD साथ छोड़ चुकी है, महबूबा मुफ्ती ने भी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को दुरुस्त करने की जरूरत है.

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बीजेपी में शामिल दलित को मारकर लटकाया

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कोलकाता। भाजपा के एक दलित कार्यकर्ता की मौत होने पर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं. भाजपा के दलित कार्यकर्ता की लटकती लाश वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने फोटो शेयर कर लिखा कि केवल विचारधार के साथ जुड़ने पर बीजेपी के कार्यकर्ता की हत्या की गई है. इतनी निर्ममता से उसको मौत के घाट उतार दिया है.

गुरूवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर गांव के पास जंगल में पुलिस ने एक भाजपा कार्यकर्ता का शव बरामद किया है. बीजेपी ने इसे हत्या करार देते हुए इसके लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. पार्टी का आरोप है कि बीते महीने हुए पंचायत चुनावों में सक्रिय भागीदारी के चलते त्रिलोचन महतो की हत्या की गई है.

नोट में लिखा है कि…

हत्या कर शव को लटकाने के बाद उसके पीठ पर एक नोट चिपकाया गया है. सूत्रों ने बताया कि शव के पास एक नोट भी बरामद हुई है. नोट में लिखा गया है कि भाजपा में शामिल होने की वजह से हत्या की गई है. भाजपा के एक स्थानीय नेता ने बताया कि पंचायत चुनावों में जीतने वाले सभी उम्मीदवारों को सुरक्षा के लिहाज से पार्टी के दफ्तर में रखा गया है. तृणमूल कांग्रेस की धमकियों की वजह से अपने घर तक नहीं लौट पा रहे हैं. बता दें कि पंचायत चुनाव के दौरान भारी हिंसा की घटना घटी थी जिसको लेकर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट भी मांगी थी.

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दलितों के गांव पर हमला, दो दलित की मौत

प्रतीकात्मक फोटो, गूगल इमेज

नई दिल्ली। तमिलनाडु में दलितों के एक गांव पर ऊंची जाति के हिंदू परिवार ने हमला बोल दिया. इस हमला में दो दलितों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हो गए. हिंसा की खबर मिलने के बाद पुलिस बल तैनात कर शांति बनाई गई है. लेकिन हमला के बाद दलितों का परिवार दहशत में जी रहा है.

तो इसलिए किया हमला

मीडिया खबरों की मानें तो सोमवार को तमिलनाडु के शिवगंगा जिला के कंचनाथम गांव में करीब दस बजे हमला किया गया. सीपीएम नेता ने हमले के बाद गांव का दौरा किया. इस हमले के कारण को लेकर इनका कहना है कि दलित गांव के लोग अपने इलाके में भांग की बिक्री करने पर विरोध किए थे. इस बात से नाराज पड़ोसी गांव के लोगों ने हमला बोल दिया.

पुलिस का कहना है कि 15 सदस्यी गिरोह के गुस्साए लोगों ने गांव की बिजली काटकर हमला किया. इस दौरान लाठी व धारदार हथियार से दलितों की पिटाई की. जिसमें बुजुर्ग केआर अरुमुगम (65) और शानमुगा नाथन (20) को गंभीर चोट लगने के कारण मौत हो गई. साथ ही करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए. घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस ने कहा कि 25 मई को कच्छनाथ में मंदिर त्यौहार के बाद परेशानी शुरू हुई. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

गांव में 250 पुलिसकर्मियों का एक पद तैनात किया गया है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. अपराधियों को पकड़ने के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

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सिम लांच के बाद, पतंजलि को करारा झटका

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नई दिल्ली। पतंजलि ने सीम लांच करने के बाद टेलिकॉम सेक्टर में खूब चर्चा बटोरी लेकिन सीम लांच करने के बाद व्हॉट्सऐप की तरह पतंजलि ने एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप भी लांच किया. इसको लेकर भी खूब चर्चा हुई लेकिन एक-दो दिन के भीतर ही बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी को करारा झटका लगा है.

30 मई बुधवार को ही गूगल प्ले-स्टोर पर योगगुरू बाबा रामदेव का मैसेजिंग ऐप किम्भो (Kimbho) लॉन्च हुआ था, बाबा के नाम पर लोगों ने इस ऐप को खूब डाउनलोड भी किया लेकिन अब किम्भो ऐप को प्ले-स्टोर से हटा दिया गया है. हालांकि पतंजलि या बाबा रामदेव की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सिक्योरिटी को लेकर उठे सवाल के बाद हटाया गया है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक फ्रांस के सिक्योरिटी रिसर्चर इलियट ऐल्डर्सन ने ट्वीट करके किम्भो ऐप की सिक्योरिटी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने यहां तक दावा किया कि वे सभी यूजर्स के मैसेज को आसानी से पढ़ सकते हैं.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक गूगल प्ले-स्टोर पर किम्भो ऐप के डेवलपर का एड्रेस भी पतंजिल आयुर्वेद लिमिटेड, डिपार्टमेंट ई-कॉमर्स, D-28 इंडस्ट्रियल एरिया, नियर इनकम टैक्स ऑफिस, हरिद्वार, उत्तराखंड, 249401 दिया गया था और इस ऐप को पतंजलि कंम्यूनिकेशन द्वारा लॉन्च किया गया था.

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‘नीतीश जी ने बिहार में दो लाख तलवारें बंटवाई, नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए’

पटना। बिहार में राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है. बिहार में जोकीहाट में विधानसभा उपचुनाव में राजद ने जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार को हराया. यहां पर जोकीकाट में राजद ने 41224 वोटों से जीत दर्ज की. इस शानदार जीत पर तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला. बिहार में बिगड़ते हालात को लेकर नीतीश कुमार को घेरा और सीधे-सीधे जिम्मेवार ठहराया. इस जीत पर कहा कि, जनशक्ति ने धनशक्ति को हराया है.

2 लाख तलवारें बँटवाई…

हालही में बिहार के कई जिलों में दंगे फसाद होने को लेकर तेजस्वी ने तंज कसा है. और ट्विटर पर शेयर कर लिखा कि, “प्यारे चाचा नीतीश जी ने बिहार में 2 लाख क़लम की जगह 2 लाख तलवारें बँटवाई. नीतीश चाचा को तलवार बाँटने का ईनाम मिला है. उन्होंने बिहार में प्यार पर नफ़रत को तरजीह दी. हम मोहब्बत और शांति फैला रहे है. हम वोट व कुर्सी की नहीं अमन और चैन की परवाह करते है. जनशक्ति ने धनशक्ति को हराया.”

पलटी मारने का नोबेल पुरस्कार

बात केवल यहीं तक नहीं रूकी. तेजस्वी ने एक और ट्वीट दागते हुए लिखा कि, “ये अवसरवाद पर लालूवाद की विजय है. लालू एक विचार है, विज्ञान है. उन्हें समझने में नीतीश कुमार को कई जन्म लेने पड़ेंगे. अवसरवादिता के लिए इतिहास कभी नीतीश कुमार को माफ़ नहीं करेगा. नीतीश कुमार को पलटी मारने और जनादेश को अपमानित करने का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए.”

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कैराना जीतने वाली तब्बसुम ने बीजेपी को दिया करारा जवाब

उत्तर प्रदेश। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना व नूरपुर सीट गंवा दिया है. यूपी में एकजुट विपक्ष ने साफ कर दिया है कि भाजपा चाहे जितना जोड़ लगा ले 2019 में उसका सत्ता में आना मुश्किल है. कैराना में भाजपा को हराने वाली आरएलडी प्रत्याशी की जीत पर बीजेपी प्रवक्ता ने उधार की सिंदूर कह कर मजाक उड़ाया तो वहीं कैराना में जीत दर्ज करने के बाद तबस्सुम बेगम बोलीं- 2019 में साथ मिलकर बीजेपी को धूल चटाएंगे.

तब्बसुम ने बीजेपी की मृगांका सिंह को हरा दिया है. जीत से कुछ समय पहले एनडीटीवी के इंटरव्यू में आरएलडी की तबस्सुम बेगम ने कहा कि अहंकारी लोगों हमलोग साथ मिलकर 2019 में धूल चटाएंगे. साथ ही यह भी कहा कि हम लोग साथ मिलकर भाजपा को हराएंगे. जीत के बाद तबस्सुम ने कहा, ‘यह सच की जीत है.

इसके अलावा 31 मई को महागठबंधन की ओर से सबसे पहली जीत समाजवादी सपा प्रत्याशी नईमुल हसन ने हासिल की. नूरपुर की सीट पर सपा ने 6 हजार वोटों से जीत ली. नूरपुर की सीट पर इससे पहले बीजेपी का कब्जा था जिसको भाजपा ने गंवा दिया.

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उपचुनावों में बीजेपी ने घुटने टेके

PC-thewire

नई दिल्ली। कर्नाटक विधान सभा में मायावती ने बीजेपी के सर से ताज छिन लिया था, ठीक वैसे ही कैराना व नूरपुर में सपा-बसपा और रालोद ने भाजपा को मात दे दिया है. गोरखपुर व फुलपुर उप चुनाव में सीट गंवाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना व नूरपुर सीट भी गंवा दिया है. यूपी में एकजुट विपक्ष ने साफ कर दिया है कि भाजपा चाहे जितना जोड़ लगा ले 2019 में उसका सत्ता में आना मुश्किल है.

31 मई को महागठबंधन की ओर से सबसे पहली जीत समाजवादी सपा प्रत्याशी नईमुल हसन ने हासिल की. नूरपुर की सीट पर सपा ने 6 हजार वोटों से जीत ली. नूरपुर की सीट पर इससे पहले बीजेपी का कब्जा था जिसको भाजपा ने गंवा दिया है. तो वहीं कैराना में आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने भी भाजपा प्रत्याशी को पटखनी दे दी हैं.

इससे पहले कर्नाटक में सीएम कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में सभी विपक्षी नेताओं ने एकजुट हो कर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला था. इस दौरान सोनिया गांधी मायावती का हाथ मंच पर थामे रही जिससे साफ दिख रहा था कि आने वाले इलेक्शन में महागठबंधन अहम रोल अदा करेगी.

तो वही कैराना व नूरपुर में दलित वोट होने के बावजूद भी मायावती ने चुनाव प्रचार नहीं किया बल्कि कैराना में लोकदल प्रत्याशी तबस्सुम हसन को समर्थन देने की बात कही थी. इन दोनों क्षेत्रों में सीएम योगी सहित तमाम मंत्री डटे रहे लेकिन विपक्षी एकता के कारण सबको मुंह की खानी पड़ी.

अन्य राज्यों के हाल

उपचुनावों में खास बात ये रही कि भाजपा केवल यूपी में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी हारी है. महाराष्ट्र के पलूस कडेगांव की सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी विश्वजीत कदम जीते हैं. इस सीट पर भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ संग्राम सिंह देशमुख को उतारा था लेकिन आखिरी समय पर उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था. लेकिन महाराष्ट्र में पालघर सीट पर बीजेपी की ओर से गावित राजेंद्र ने जीत दर्ज की है. तो वहीं महाराष्ट्र के भंडारा-गोदिया से एनसीपी के उम्मीदवार मधुकर कुकड़े ने सीट जीत ली. केरल के चंग्गनूर में सीपीएम उम्मीदवार सजी चेरियन ने जीत हासिल की. बिहार में जोकीहाट में विधानसभा उपचुनाव में राजद ने जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार को हराया. जोकीकाट में राजद ने 41224 वोटों से जीत दर्ज की.

ध्यान दें कि 28 मई को बिहार, झारखंड, केरल, मेघालय, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की कुल मिलाकर 04 लोकसभा व 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए वोट डाले गए थे. उप चुनाव सीटों पर विपक्षी दलों ने बीजेपी को पटखनी देकर शानदार वापसी की है. इससे 2019 में बीजेपी की मुश्किल बढ़ती दिख रही है. इस जीत ने विपक्षी दलों को जहां हौंसला दे दिया है तो भाजपा की चुनौती को दोहरा कर दिया है.

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हार से बौखलाई बीजेपी, चुनाव जीत को बता रही…

उत्तर प्रदेश। कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में को बीजेपी करारी हार मिली है. नूरपुर से रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हुसैन बड़ी जीत हासिल करने जा रही हैं. जब कैराना के नतीजों पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह  ने मीडिया का जवाब दिया कि जब एक लंबी छलांग लगानी पड़ती है तो कुछ कदम पीछे लेने पड़ते हैं. दरअसल, राजनाथ सिंह के इस बयान को मार्क्सवादी विचारक व्लादिमीर लेनिन के एक वाक्य से भी जोड़ा जा सकता है. लेनिन का एक मशहूर वक्तव्य है, ” One Step Forward, Two Step Backword’.

‘ये उधार का सिंदूर है’

वहीं बीजेपी की हार पर पार्टी के प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने कहा, ‘ये उधार का सिंदूर है’. बीजेपी की हार के बाद थोड़ी बौखलाई नजर आ रही है. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ कैराना लोकसभा ही नहीं बल्कि नूरपुर विधानसभा में भी झटका लगा है. इससे पहले भी गोरखपुर व फुलपुर में भी बीजेपी ने सीट गंवा दी थी. बता दें कि कर्नाटक के साथ ही बीजेपी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है. इस हार के कारण बीजेपी को 2019 में मुश्किल हो सकती है.

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‘एक लाख दो नहीं तो अर्थी को कंधा नहीं मिलेगा’

छत्तीसगढ़। समाज के ठेकेदारों ने आदिवासी लड़की के साथ प्रेम विवाह करने पर लड़के को बिरादरी ने बहिष्कृत कर दिया. इसके बाद समाजिक ठेकेदार लड़के के परिवार को प्रताड़ित करते रहे. लड़के के परिवार वाले बिना गलती किए भी सालों से जुल्म सह रहे हैं और अब कलेक्टर के पास जाकर मदद की गुहार लगाई है. छत्तीसगढ़ के धमतरी के फुसेरा गांव निवासी भागीरथी साहू को परिवार सहित समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है.

आदिवासी लड़की के साथ प्रेम विवाह करने पर गावं-समाज ने ऐसा कदम उठाया.

परिवार वालों का आरोप है कि अब समाज इस परिवार को फिर से अपनाने के एवज में एक लाख रुपये की मांग रहा है. पैसे नहीं देने पर इस परिवार में किसी की अर्थी को भी कंधा नही देने की धमकी दी गई है. पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है.

चार साल पहले

बता दें कि चार साल पहले मजदूरी करने के लिए भागीरथी केशकाल गया और वहीं उसने सीता कंवर से प्रेम विवाह किया. हालांकि प्रेम विवाह करना कोई गुनाह नहीं है फिर भी समाज के ठेकेदार इसे गुनाह बताकर भागीरथी के परिवार को परेशान कर रहे हैं. बगैर किसी गुनाह के चार सालों से भागीरथी का परिवार सजा काट रहा है.

इतना ही नहीं जब भागीरथी के छोटे भाई की शादी हुई और समाज को खाना खिलाने के लिए भागीरथी के पूरे परिवार ने माफी मांगी और कुछ समाज के ठेकेदारों को 10 हजार रुपए दिए तब जाकर बात बनी.

अर्थी के लिए पैसा फिर कंधा…

बात यहीं तक नही रूकी है, एक बार दस हजार रुपए का स्वाद चखने के बाद समाज के ठेकेदारों को चस्का लग गया है. अब इनका कहना है कि आदिवासी लड़की के साथ शादी करने के कारण अब कोई भी भागीरथी के परिवार को मरने पर कंधा नहीं देगा. हां, यदि भागीरथी का परिवार इन ठेकेदारों को एक लाख रुपए देकर माफी मांगेगा तब जाकर बिरादरी में शामिल किया जाएगा.

प्रशासन दिलाएगी न्याय

धमतरी के कलेक्टर सीआर प्रसन्ना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले की पड़ताल करने की बात कही है. कुरूद एसडीएम को पूरे मामले का समाधान करवाने के निर्देश दिये गए हैं. इसके अलावा हर संभव मदद की बात भी धमतरी कलेक्टर ने कही है. आशा है कि भागीरथी को जल्द ही न्याय मिलेगा.

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मायावती ने खाली किया सरकारी बंगला, स्पीड पोस्ट से भेजी चाबी

लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक सरकारी बंगले 6 लाल बहादुर शास्त्री मार्ग को खाली कर दिया है. इस सरकारी बंगला का 73 लाख रुपए बकाया बिजली की रसीद व उसकी चाबी स्पीड पोस्ट से सरकार को भेज दी है. लेकिन एक और बंगला अभी खाली करना बाकि है

मायावती के निजी सचिव मेवालाल गौतम ने बुधवार की रात जारी एक प्रेस नोट में कहा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुये उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 29 मई को लालबहादुर शास्त्री मार्ग स्थित बंगला नंबर छह खाली कर दिया है. यह बंगला उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से आवंटित किया गया था. साथ ही मेवालाल गौतम ने बिजली बिल चुकाने व चाबी भेजने की बात का जिक्र भी किया. इसके लिए जरूरी दस्तावेज भी संलग्न किए थेय

कांशीराम स्मारक के लिए मोहलत

वहीं मायावती के दुसरे सरकारी आवास 13 माल एवेन्यू वाले बंगला को खाली करने के लिए मोहलत मांगी है. फिलहाल वो इसी बंगले में रूकी हैं जो कि कांशीराम स्मारक है. इस सरकारी बंगले को मायावती शासन काल में कांशीराम स्मारक घोषित किया जा चुका है. इसकी जानकारी भी बसपा ने हालही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी थी.

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बिना आधार कार्ड अंतिम संस्कार नहीं कर पाएंगे

वाराणसी। आधार कार्ड के बिना अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाएंगे. जी, हां यह सरकारी फरमान है. यदि मरने के बाद काशी में मोक्ष प्राप्त करने के लिए जाना चाहते हैं तो बिना आधार कार्ड के नहीं जाएं. प्रशासन अंतिम संस्कार के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है.

बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार काशी में अंतिम संस्कार करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. इस बीच अब यहां पर अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन ने आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है. किसी कारणवंश आधार कार्ड लेकर नहीं गए तो अंतिम संस्कार नहीं कर पाएंगे.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है. काशी में यह व्यवस्था एनडीआरएफ के सहयोग से शुरू की हुई है. कहा जा रहा है कि शव वाहिनी की सुविधा उसे ही मिलेगी, जिसके पास मृतक से संबंधित पहचान पत्र मौजूद होगा. हालांकि इसको लेकर प्रशासन सख्ती से काम कर रहा है. अंतिम संस्कार के लिए अब आधार कार्ड जरूरी करना लोगों के लिए मुसीबत खड़ा कर सकता है.

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तीन साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट, मां के गोद में आरोपी को देख जज साहब हैरान

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पुलिस ने तीन साल के बच्चे पर एक्ट लगाया है. इसके बाद मां अपने नन्हें बच्चे को गोद में उठाकर कोर्ट पहुंची तो जज भी देखकर हैरान रह गए. बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार श्रावस्ती के गांव निबिहनपुरवा के रहने वाले विद्याराम के तीन साल के बेटे पर गिलौला पुलिस थाने में पहले एससी एसटी/एक्ट लगाया और फिर उसके ऊपर गुंडा एक्ट लगाकर न्यायालय में पेश होने के लिए नोटिस भेजी.

गोद में लेकर कोर्ट पहुंची मां

एनडीटीवी की खबर के अनुसार यूपी पुलिस के फरमान पर जब विद्या राम अपने तीन साल के बेटे को गोद में लेकर कोर्ट पहुंची तो हड़कंप मच गया. बच्‍चे को देखकर जज ने भी पुलिस को खरी खोटी सुनाई. कोर्ट ने कहा कि बिना जांच पड़ताल किए कैसे तीन साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट लगाया गया. पुलिस को जज साहब ने सलाह दी कि बिना जांच पड़ताल किए इस तरह का केस ना लिखें. इस मामले में अब पुलिस कह रही है कि इस गलती को तुरंत सुधारा जा रहा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि एससी/एसटी मामले में बिना जांच किए मामला न दर्ज किया जाए. इस मामले के प्रकाश में आने पर यूपी पुलिस की सोशल मीडिया पर खूब खिंचाई हो रही है.

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10 लाख बैंककर्मी हड़ताल पर, दो दिन बैंकिंग सेवा ठप

नई दिल्ली। वेतन संशोधन की अपनी मांगों को पूरा करान के लिए देशभर के दस लाख बैंककर्मी बुधवार को धरना पर बैठ गए. यह धरना गुरुवार दो दिन तक चलेगा. इससे बैकिंग सेवा पूरी तरह ठप रहेगी. हालांकि पहले दिन ही बैंक सेवाएं ठप रही जिससे कि लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. साथ ही बैंककर्मी अपनी मांगों को पूरा करने के लिए आवाज उठाते दिखे. इनका कहन है कि सरकार जल्द से इनकी मांगों को पूरा करे.

बैंकिंग एसोसिएशन का कहना

बैंककर्मी इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) की तरफ से पूर्व में प्रस्तावित दो प्रतिशत से अधिक वेतन वृद्धि नहीं करने का विरोध कर रहे हैं. तो वहीं अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने यह जानकारी दी कि सरकारी हमारी बातें नहीं मानती है तो और भी बड़े पैमाने पर धरना दिया जाएगा. इस हड़ताल का नेतृत्व यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) कर रहा है, जो कि नौ यूनियनों का नेतृत्वकारी संगठन है. बैककर्मियों ने बताया कि उनके वेतन में एक नवंबर, 2017 से वृद्धि नहीं हुई है.

यह भी कहा गया कि मांगों पर कदम उठाने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है. दो प्रतिशत की पेशकश ठीक नहीं है. इसके साथ ही बैंकों के 7वें स्केल तक के अधिकारी के वेतनमानों को वेतन संशोधन बातचीत में शामिल करने की पहले से चली आ रही व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए. इन तमाम मांगों को लेकर बैंककर्मी धरना दे रहे हैं.

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यूपी का एक और बीजेपी विधायक नाबालिग के साथ रेप मामले में फंसा

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उत्तर प्रदेश। बीजेपी के एक और विधायक पर नाबालिग के साथ रेप करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा. बदायूं के बिसौली से भाजपा विधायक कुशाग्र सागर पर उनकी नौकरानी की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा है. मंगलवार को अपनी मां के साथ एसएसपी के सामने पीड़ित युवती ने आरोप लगाया कि कुशाग्र ने पहली बार उसके साथ करीब पांच साल पहले अपने ग्रीन पार्क स्थित आवास में दुष्कर्म किया था. उस वक्त युवती नाबालिग थी.

पांच सालों तक रखा चुप

पीड़िता बताती है कि पांच साल पहले रेप होने पर उसने इस बात को परिजनों से बताया था. लेकिन कुशाग्र और उनके परिवार वालों ने उसे बालिग होने पर शादी करने का झांसा देकर चुप करा दिया. साथ ही इसके बाद भी पांच साल तक कुशाग्र उसके साथ शारीरिक शोषण करते रहे. एसएसपी ने मामले की जांच सीओ नीति द्विवेदी को सौंप दी है.

बता दें कि बारादरी में रहने वाली एक महिला पूर्व विधायक योगेंद्र सागर के ग्रीन पार्क स्थित आवास पर काम करती थी. इस दौरान नौकरानी अपनी बेटी को साथ लेकर जाती थी. तभी मौका देखकर योगेंद्र के बेटे कुशाग्र सागर 2012 से नौकरानी की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया. पीड़िता 2014 तक खामोश रही, इस दौरान भी शारीरिक संबंध बनाए जाते रहे और कुशाग्र भी विधायक बन गए.

10 लाख व गर्भपात

आरोप यह भी है कि जब पीड़िता गर्भवती हुई तो उसका गर्भपात भी कराया गया. 15 जुलाई, 2014 को पीड़िता ने तत्कालीन एसएसपी से मामले की शिकायत की. यहां पीड़िता से लिखित समझौता हुआ और शपथपत्र लिखे जाने पर 10 लाख रुपये कुशाग्र ने पीड़ित परिवार को दिए थे.

पीड़िता का आरोप है कि 04 अप्रैल, 2018 को कुशाग्र ने उसके साथ रातभर दुष्कर्म किया. विरोध करने पर मारपीट की. उसकी मां को भी पीटा और फिर दोनों को घर से निकाल दिया गया. धमकी दी गई कि अगर इस मामले की शिकायत की तो दोनों की हत्या करा दी जाएगी. पीड़ित युवती के मुताबिक अगर विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्मदाह कर लेगी.

युवती को कभी देखा नहीं…

वहीं मामले पर बिसौली विधायक कुशाग्र सागर का कहना है, युवती को मैंने कभी देखा तक नहीं. 2014 में भी साजिशन दुष्कर्म के आरोप लगाए गए. मामला एसएसपी तक जाने के बाद सीओ से जांच कराई गई, लेकिन कोई साक्ष्य नहीं मिला. मुझे राजनीति में आगे बढ़ते देखकर यह साजिश की जा रही है.

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तो क्या दस दिनों तक नहीं मिलेगी दूध-सब्जी

नई दिल्ली। सरकार से नाराज किसानों ने दूध-सब्जी की सप्लाइ बंद करने की धमकी दी है. किसान नेताओं का कहना है कि पूरे दस दिनों तक दूध-सब्जी आदि को बंद कर हम अपना विरोध जताएंगे. किसान नेताओं ने स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने और किसानों की बेहतर आर्थिक स्थिति के लिए सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ने की बात कह दी है.

बुधवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक किसान नेताओं ने 1-10 जून तक अपने गांव को सील कर बाहर जाने वाले सामान जैसे कि सब्जियां, फल और दूध ना भेजने का ऐलान किया है. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई किसान संगठनों से जुड़े किसान नेताओं ने बैठक कर स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू कराने को लेकर बात की थी.

एग्रीकल्चरल एक्टिविस्ट देवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि 1 जून से लेकर 10 जून तक गांव से शहर जाने वाली सप्लाई बंज कर दी जाएगी. किसान नेताओं का कहना है कि लंबे वक्त से हम स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं लेकिन सरकार हमारी मांगों को नजरअंदाज कर रही है. अब किसान आंदोलन करने को मजबूर हो गए हैं.

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