नई दिल्ली। चुनावी मौसम में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को रिझाने का सरकार ने एक और नया दांव चला है. इसके तहत ओबीसी वर्ग के लिए चलाई जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के दायरे को बढ़ा दिया गया है. जिसका लाभ अब डेढ़ लाख सलाना आमदनी वाले परिवारों के बच्चों को भी मिलेगा. अभी तक इस योजना में एक लाख की सलाना आमदनी वाले ओबीसी परिवारों के बच्चे ही पात्र थे. बावजूद इसके इस योजना का लाभ मौजूदा समय में 25 लाख से ज्यादा ओबीसी परिवारों के बच्चों को मिल रहा है.
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस योजना में यह बदलाव उस समय किया है, जब आने वाले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित चार राज्यों में चुनाव होने है. ऐसे में सरकार को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है. साथ ही योजना में इस बदलाव से लाभार्थियों की संख्या भी काफी बढ़ सकती है. वैसे भी इस योजना में बदलाव की यह मांग पिछले कई सालों से उठ रही थी. राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने खासतौर से इस बदलाव की मांग की थी. सरकार ने इससे पहले प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में भी कुछ इसी तरह से का बदलाव किया था. जिसके तहत पात्रता की सीमा को बढ़ाने हुए सलाना ढाई लाख कर दी थी. इससे पहले सरकार ने ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देकर इस वर्ग को एक तोहफा दिया है.
मंत्रालय ने इसके अलावा ओबीसी वर्ग के लिए चलाए जाने वाले पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के दो अन्य बदलाव भी किए है, जिसमें इस योजना की 30 फीसद राशि इस वर्ग से आने वाली बालिकाओं और पांच फीसद राशि दिव्यांगजनों पर खर्च की जाएगी. केंद्र ने राज्यों को अनिवार्य रुप से इसे लागू करने के निर्देश भी दिए है. योजना में जो दूसरा बड़ा बदलाव किया है, उसके तहत छात्रवृत्ति के लिए राज्यों को पैसा अब ओबीसी की आबादी के हिसाब से किया जाएगा. मौजूदा समय में राज्यों की मांग के आधार पर इसका फैसला किया जाता था. मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों को नई गाइड लाइन भी जारी कर दी है.
नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि आरएसएस का दिल्ली में तीन दिनों तक चला बहु-प्रचारित संवाद राजनीति से ज्यादा प्रेरित था. यह भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार की विफलता से चुनाव के समय लोगों का ध्यान बंटाने के लिए किया गया.
बसपा सुप्रीमो ने जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार की विफलताओं से जनता के गुस्से से आरएसएस भी चिंतित है. उसने भाजपा की जीत के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था. अब इन विफलताओं से ध्यान बांटने का इस तरह का प्रयास सफल होने वाला नहीं है. कहा, ‘अयोध्या में जन्मभूमि पर मंदिर बने और अगर मुसलमान खुद बनवाते हैं तो बरसों से उन पर उठ रही अंगुलियां झुक जाएंगी’
संबंधी आरएसएस प्रमुख के बयान से बसपा सहमत नहीं है. एक नहीं बल्कि अनेकों मंदिर बन जाएं तब भी संकीर्ण संघी हिंदु व मुसलमान के बीच रिश्ते सुधारने वाले नहीं हैं. इनकी बुनियादी सोच व मानसिकता दलित, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक विरोधी है.
मायावती ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘तीन तलाक’ अध्यादेश को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है. उन्होंने कहा कि यह लोगों का ध्यान हिंदू-मुस्लिम की तरफ भटकाने की कोशिश भर है. भाजपा इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर भी स्वार्थ की राजनीति कर रही है.
छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ दशक से सत्तारुढ़ बीजेपी राज्य में अपनी सत्ता बचाए रखने की कोशिशों में जुटी है, तो कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए संघर्षरत है, लेकिन इस बीच नए राजनीतिक समीकरण में मायावती ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की नई पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान के आग्रह पर विदेश स्तर की बातचीत करने के लिए तैयार हो गया है. भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात होगी, हालांकि मुलाकात की जगह, समय और तारीख अभी बाद में तय होगी.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद के जो प्रमुख पड़ाव हैं, उनमें संघ के संस्थापक केशवराव बलिराम हेडगेवार के बाद दूसरा अहम नाम है गुरु गोलवरकर का. हेडगेवार के संघ को आक्रामक और तेज़ी से प्रसारित करने का काम गोलवरकर ने किया. इसके बाद राममंदिर आंदोलन के दौरान दूसरा बड़ा विस्तार था मधुकर दत्तात्रेय यानी बालासाहेब देवरस की सोशल इंजीनियरिंग. इस दौरान संघ अगड़ी जातियों से निकलकर पिछड़ों और दलितों, आदिवासियों को एक अभियान के तहत खुद से जोड़ने की रणनीति के साथ आगे बढ़ा.
पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम के कायराना हमले में बीएसएफ जवान की मौत और शव के साथ बर्बरता करने के मामले पर भारत सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है. वहीं सूत्रों के मताबिक, जवान पर हमला करने से एक दिन पहले बीएसएफ ने इलाके में पाकिस्तान का हेलिकॉप्टर देखा था. वहीं PAK रेंजर्स अब भी इस घटना को मानने से इनकार कर रहे हैं. पाकिस्तान के रेंजर्स भारत के ऊपर आरोप लगा रहे हैं.
इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) से छेड़छाड़ के आरोप विपक्षी पार्टियां गाहे-बगाहे लगाती रहती हैं. इसी मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर भी निशाना साधा जाता रहा है. वहीं बीते कुछ वर्षों में कम से कम 9 देश भारतीय चुनाव आयोग से इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों के लिए आग्रह कर चुके हैं. ये खुलासा सूचना के अधिकार के तहत एक याचिका (RTI) से हुआ है.
भोपाल। बसपा प्रमुख मायावती मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ेंगी. मायावती ने कहा कि वह सभी 230 सीटों अपने उम्मीदवार खड़े करेंगी. बसपा ने गुरुवार को उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी. इस सूची में 22 उम्मीदवारों के नाम हैं. बसपा की पहली सूची में जिन 22 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, उनमें तीन वर्तमान विधायक हैं. इससे कांग्रेस को लगा बड़ा झटका लगा है और BSP से गठबंधन की आस खत्म हो गई है. जारी सूची के अनुसार, मुरैना जिले के सबलगढ़ से लाल सिंह केवट, अम्बाह से सत्य प्रकाश, भिंड से संजीव सिंह कुशवाह, सेवढ़ा से लाखन सिंह यादव, करैरा से प्रागीलाल जाटव, अशोकनगर से बाल कृष्ण महोबिया, छतरपुर जिले के चंदला से पुष्पेंद्र अहिरवार को उम्मीदवार बनाया गया है.
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के अनुसार, दमोह के पथरिया से राम बाई परिहार, जबेरा से डेलन सिंह धुर्वे, सतना के रैगांव से उषा चौधरी, अमर पाटन से छंगे लाल कोल, रामपुर बघेलान से रामलखन सिंह पटेल, रीवा के सिरमौर से राम गरीब कोल, सेमरिया से पंकज सिंह पटेल, देवतलाब से सीमा सिंह, मनगंवा से शीला त्यागी, सिंगरौली के चितरंगी से अशोक गौतम, शहडोल के धोहनी से अवध प्रताप सिंह, उमरिया के बांधवगढ़ से शिव प्रसाद कोल, कटनी के बहोरीबंद से गोविंद पटेल और जबलपुर के सीहोरा से बबीता गोटिया को उम्मीदवार बनाया है.
बसपा के उम्मीदवारों की यह सूची राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर और प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के दस्तखत से जारी की गई है. बता दें कि मायावती ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी के साथ गठबंधन किया है.
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को झटका देते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी के नेतृत्व वाली जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) से गठबंधन करने का फैसला किया है. इधर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन की चर्चा को झटका देते हुए बहुजन समाज पार्टी ने गुरुवार को 22 प्रत्याशियों का एलान कर दिया.
छत्तीसगढ़ की 90 सीटों वाली विधानसभा की 35 सीटों पर जहां बसपा चुनाव लड़ेगी, वहीं 55 सीटों पर जकांछ उम्मीदवार उतारेगी. गठबंधन पर फैसले के लिए जकांछ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी गुरवार को लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती से मिले. बाद में संयुक्त हस्ताक्षर से लिखित बयान जारी किया. मायावती ने कहा कि अजीत जोगी ही गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे. गठबंधन की जल्द ही बड़ी रैली छत्तीसगढ़ में होगी.
मध्य प्रदेश, राजस्थान के लिए कांग्रेस पर बढ़ाया दबाव छत्तीसगढ़ में जोगी से गठबंधन करके जहां बसपा ने कांग्रेस को झटका दिया है, वहीं उसने लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान और मध्यप्रदेश विस चुनाव में कांग्रेस पर समझौते का दबाव भी बढ़ा दिया है. दरअसल कांग्रेस, राज्यों के चुनाव में भी बसपा से समझौता तो करना चाहती है लेकिन, जितनी सीटें मायावती चाह रही हैं उतनी देने को तैयार है.
राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी निकाय चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है. प्रदेश नेतृत्व ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से राज्य के मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए चुनावों को स्थगित करने की मांग की है.
वीरवार को यहां पत्रकारों से रूबरू बसपा के प्रदेश प्रधान सोमराज मगोत्रा ने कहा कि राज्य की मौजूदा परिस्थितियां चुनाव के लायक नहीं हैं. भाजपा और आरएसएस राज्य की जनता पर जबरन चुनाव थोप रहे हैं. भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर क्षेत्र में विफल रही है. राज्य के प्रमुख दलों के चुनाव से किनारा करने के बाद भाजपा सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार है.
पंचायती चुनाव पर पूछे गए सवाल पर मगोत्रा ने कहा कि इस पर आगामी हालात को देखते हुए बाद में फैसला लिया जाएगा. राज्य में 8 अक्तूबर से चार चरणों में निकाय और 17 नवंबर से नौ चरणों में पंचायत चुनाव करवाए जा रहे हैं.
नई दिल्ली। गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में जहर खाकर शोध छात्र दीपक कुमार ने बृहस्पतिवार को खुदकुशी करने की कोशिश की. गंभीर हालत में शोध छात्र को जिला अस्पताल ले जाया गया. हालत बिगड़ने के बाद उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. जहर खाने से पहले शोध छात्र ने मोबाइल से वीडियो बनाया और डीन कला संकाय प्रो. सीपी श्रीवास्तव के साथ विभागाध्यक्ष प्रो. द्वारिकानाथ पर उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया.
दीपक ने कहा कि तीन महीने से दौड़ाया जा रहा है. साथ ही जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करके अपमानित किया जा रहा. इस मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया. कुलपति ने विभागाध्यक्ष प्रो. द्वारिका को पद से हटा दिया. साथ ही प्रति कुलपति प्रो. एसके दीक्षित की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी. कुलपति का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
झंगहा क्षेत्र के राघोपट्टी निवासी जगदीश के पुत्र दीपक ने इसी वर्ष दर्शनशास्त्र विभाग में शोध के लिए पंजीकरण कराया है. वह बिलंदपुर में किराए का मकान लेकर रहता और पढ़ाई करता है. दीपक ने अपराह्न तीन बजे के आसपास जो वीडियो बनाकर वायरल किया, उसके मुताबिक मनमाफिक शोध सुपरवाइजर प्रो. डीएन यादव को चुना था. इस वजह से डीन कला संकाय, विभागाध्यक्ष नाराज थे. आए दिन दुर्व्यवहार और जातीय टिप्पणी करते थे. दीपक का आरोप है कि दर्शनशास्त्र विभाग के इन दो शिक्षकों ने मेरी पीएचडी पूरी न करने देने की धमकी दी थी.
इस मामले की शिकायत कुलपति से छह सितंबर को ही की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. बल्कि इसका उल्टा असर हुआ. डीन, विभागाध्यक्ष का नाम लेकर 18 सितंबर को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कुछ लोगों ने मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे. इसके बाद दीपक ने वीडिया बनाकर वायरल किया.
दीपक ने कहा कि सारे मामले से कुलपति को अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैं अवसाद में हूं और आत्महत्या करने जा रहा हूं. बाद में दर्शनशास्त्र विभाग में ही जाकर जहर खा लिया. इसकी जानकारी हुई तो अफरा-तफरी मच गई. आनन-फानन में दीपक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में इलाज चल रहा है.
आज जब हम समाचार पत्रों अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया पर खबरें पढ़ते अथवा सुनते हैं तो विभिन्न प्रकार के संदर्भ पढ़ने और सुनने को मिलते हैं. कभी किसी खबर पर हम उछ्ल पड़ते हैं तो कभी किसी पर अपना माथा धुन लेते हैं. कारण केवल यह है कि आज का ‘मीडिया’ गोदी मीडिया बनकर रह गया है… पूरी तरह व्यावसायिक हो गया है. सच और फेक न्यूज से उसका कुछ लेना-देना नहीं रह गया है. …आज मैं भी कुछ अलग-अलग मुद्दों पर बात कर रहा हूँ. कुछ संघ की, कुछ आरक्षण की, कुछ जाति-व्यवस्था की तो कुछ सरकार से असहमति की….. यह सब मैंने गोदी मीडिया के माध्यम से ही जाना है.
पिछले दिनों यहाँ-वहाँ हुए चुनावों में भाजपा के नेताओं न जाने कितने ही आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया, इनकी गिनती करना नामुमकिन ही नहीं, अपितु कष्टदायी भी है. राजनीतिक दलों द्वारा राजनीति में श्मशान, कब्रिस्तान, भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों का प्रयोग नितांत ही समाज विरोधी कहे जा सकते हैं. इतना ही राजनीतिक विचारधारा में दकियानूसी सोच की ठुस्मठास भी कही जा सकती है.
संघ प्रमुख भागवत कहने को तो खुले तौर पर ये कहते हैं कि राजनीति लोक कल्याण के लिए चलनी चाहिए. लोक कल्याण का माध्यम सत्ता होती है. यदि राजनेता इस सोच के तहत काम करें तो श्मशान, कब्रिस्तान, भगवा आतंकवाद जैसी बातें होंगी ही नहीं. ये सारी बातें तब होती हैं, जब राजनीति केवल सत्ता भोग के लिए चलती है…. किंतु जब भागवत जी का गोदी राजनीतिक दल के राजनेता इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करके समाज में दीवार खींचने का यत्न करते हैं तो भागवत जी मौन रहने अलावा और कुछ नहीं करते…क्यों? इस प्रकार क्या भागवत जी खुद अस्वस्थ्य राजनीती को पीछे से हवा नहीं दे रहे नहीं लगते?
आज जबकि देश के हर कौने में नाना प्रकार से अनुसूचित /अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों/ शिक्षा में प्रदत्त संवैधानिक आरक्षण का सवर्णों के अनेकानेक संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है, संघ् प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं, ‘सामाजिक विषमता हटाने के लिए संविधान के तहत सभी प्रकार के आरक्षण को संघ का समर्थन है…और रहेगा. उनका कहना है कि आरक्षण नहीं, बल्कि आरक्षण की राजनीति समस्या है. ऐतिहासिक – सामाजिक कारणों से समाज का एक अंग पीछे है. बराबरी तब आएगी, जब जो लोग ऊपर हैं, वो झुकेंगे. समाज के सभी अंगों को बराबरी में लाने के लिए आरक्षण जरूरी है. हजार वर्ष से यह स्थिति है कि हमने समाज के एक अंग को विफल बना दिया है. जरूरी है कि जो ऊपर हैं वह नीचे झुकें और जो नीचे हैं वे एड़ियां उठाकर ऊपर हाथ से हाथ मिलाएं. इस तरह जो गड्ढे में गिरे हैं उन्हें ऊपर लाएंगे. समाज को आरक्षण पर इस मानसिकता से विचार करना चाहिए. सामाजिक कारणों से एक वर्ग को हमने निर्बल बना दिया. स्वस्थ समाज के लिए एक हजार साल तक झुकना कोई महंगा सौदा नहीं है. समाज की स्वस्थता का प्रश्न है, सबको साथ चलना चाहिए.’… भागवत जी के इस कथन को पढ़ने के बाद तो जैसे लगा कि संघ भारत का सबसे आदर्श संगठन है, किंतु संघ की कथनी और करनी में जमीन और आसमान का अंतर है. कहना अतिशयोक्ति न होगा कि आरक्षण के विरोध में जितने भी आन्दोलन हो रहे हैं अथवा किए जाए जा रहे हैं, सब के सब संघ और सत्ता द्वारा प्रायोजित ही लगते हैं… राजनीतिक लाभ लेने के लिए इन आन्दोलनों के पीछे विपक्षी दलों का हाथ भी हो सकता, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता.
आर एस एस और विभिन्न मुद्दों पर उसकी सोच को लेकर कौतुहल का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि तीन दिनों तक चले कार्यक्रम में भाजपा व संघ से जुड़े लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में न सिर्फ पत्रकार, लेखक, कलाकार, अधिवक्ता, प्राध्यापक, छात्र व अन्य जुटे बल्कि सवालों की बारी आई तो 215 सवालों की बौछार भी की गई. उसे जोड़कर समूहों में भागवत ने जवाब भी दिए और आरोप लगाने वालों पर परोक्ष निशाना भी साधा. कभी गंभीरता से तो कभी हास्य विनोद के साथ उन्होंने यह स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि संघ किसी जाति, समुदाय, धर्म के पक्ष और विरोध में नहीं, राष्ट्र के लिए कार्यरत है. संघ लकीर का फकीर नहीं, बल्कि बदलते जमाने के साथ परंपरा और सभ्यता का ध्यान रखते हुए कदमताल करता संगठन है. राजनीति से संघ का कोई लेना देना नहीं है…… संघ का यह बयान कितना ईमानदार और व्यावहारिक है? इस पर कैसे विश्वास किया जाय जबकि जमाने भर से स्पष्ट है कि पहले की जनसंघ और आज की भारतीय जनता पार्टी की पैत्रिक संस्था आर एस एस ही तो है. इस तीन दिन की संगोष्ठी ने मोहन भागवत ने तमाम के तमाम सवालों के दोहरे अर्थ वाले जवाब दिए. किसी भी सवाल का सीधा उत्तर नहीं दिया.
एक सवाल आया कि अगर सभी धर्म समान ही हैं तो धर्म परिवर्तन का विरोध क्यों? क्या इसके लिए कोई कानून बनना चाहिए? इसके उत्तर में भागवत जी ने इतना ही कहा कि मैं भी सवाल ही पूछता हूं, अगर सभी धर्म समान हैं तो धर्म परिवर्तन क्यों?… यही भाजपा का भी रवैया है …वह सवाल का उत्तर, सवाल के जरिए ही देती है. अपनी गलतियों पर परदा डालने के लिए दूसरी राजनीतिक पार्टियों की कमियां गिनाने पर उतर आती है.
जब भागवत जी से पूछा गया कि समाज में जाति व्यवस्था को संघ कैसे देखता है. संघ में अनुसूचित जाति और जनजातियों का क्या स्थान है? घुमंतू जातियों के कल्याण के लिए संघ ने क्या कोई पहल की है? तो भागवत जी बड़े ही दार्शनिक अन्दाज में सवाल को लील गए और कहा, ‘आज व्यवस्था कहां है, अव्यवस्था है. कभी जाति व्यवस्था रही होगी, आज उसका विचार करने का कोई कारण नहीं है. जाति को जानने का प्रयास करेंगे तो वह पक्की होगी. हम सामाजिक विषमता में विश्वास नहीं करते.’
एससी/एसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर समाज में विभाजन की स्थिति है? इस पर प्रतिक्रिया और आक्रोश निर्मित हुआ है. क्या संसद को इसे बदलना चाहिए था? संघ इसे कैसे लेता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोई भी कानून गलत नहीं होता किंतु उसका अनुपालन ईमानदारी से होना चाहिए, उसका दुरुपयोग नहीं. … प्रतिक्रियात्मक दृष्टि से तो यही लगता है कि सत्ता द्वारा अपने वकीलों के जरिए ही कोर्ट मे केस डालना और अपने ही वकीलों के द्वारा उस वाद के प्रतिवाद का केस डलवाना राजनीति का जैसे खेल हो गया है. और बाद में संसद के माध्यम से एससी/एसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में अध्यादेश पारित कर देना, क्या राजनीतिक रोटियां सेकने का एक नापाक इरादा नहीं है? अध्यादेश पारित होने के बाद भी, क्या सुप्रीम कोर्टा नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय को मान्यता प्रदान करेगा…अभी यह प्रश्न निरुत्तर है.
चलते-चलते …. भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में पाँच (5) सामाजिक एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19.09.2018) को कहा कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता का महज अनुमान के आधार पर गला नहीं घोटा जा सकता. हमारे संस्थान इतने मजबूत होने चाहिए कि विरोध और असहमति को बर्दास्त कर पाएं…. मैं समझता हूँ कि यहाँ संस्थान का आशय केवल संस्थानों से ही नहीं, केन्द्रीय और राज्य सरकारों से भी है. हमें यह समझने की जरूरत है कि असहमति हमेशा नकारात्मक नहीं होती. …सरकार को यह समझने की जरूरत है, अन्यथा……
नई दिल्ली। तीनों तक चलने वाले आरएसएस के संवाद कार्यक्रम पर बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने संघ को कठघरे में खड़ा किया है. एक बयान जारी कर संवाद कार्यक्रम की पोल खोलते हुए बसपा प्रमुख ने कहा है कि देश की राजधानी में हुआ आर.एस.एस. का बहु-प्रचारित संवाद कार्यक्रम राजनीति से ज़्यादा प्रेरित था. ताकि चुनावों के समय भाजपा सरकार की घोर कमियों व देश की ज्वलन्त समस्याओं से लोगों का ध्यान हट जाए.
बसपा प्रमुख ने कहा कि- भाजपा की केंद्र सरकार की विफलताओं के कारण व्यापक जन आक्रोश से आर.एस.एस. भी चिंतित है, क्योंकि धन्नासेठों की तरह इन्होंने भी बीजेपी की जीत के लिये अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था. इसीलिए लोगों का ध्यान बांटने के लिये आरएसएस इस तरह के कार्यक्रम कर रही है.
जन्मभूमि पर मुसलमानों द्वारा मंदिर बनवाने के संघ प्रमुख मोहन भागवत की अपील पर बसपा प्रमुख ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुस्लिम समाज अगर अनेकों मंदिर भी बना दे तो भी संकीर्ण हिन्दुओं की मुसलमानों को लेकर बुनियादी सोच बदलने वाली नहीं है. क्योंकि इनकी बुनियादी सोच व मानसिकता दलित, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक विरोधी है. बता दें कि भागवत ने कहा था कि जन्मभूमि पर मन्दिर बने और अगर मुसलमान इसे खुद बनवाते हैं तो बरसों से उन पर उठ रही अंगुलियाँ झुक जायेंगी.
यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में बीजेपी के केन्द्र व विभिन्न राज्यों में सत्ता में आने के बाद इनका संकीर्ण जातिवादी व साम्प्रदायिक चाल, चरित्र व चेहरा और ज्यादा बेनकाब हुआ है. आरएसएस को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि- आर.एस.एस. की सोच व मानसिकता अगर इतनी ही सही, मानवीय, सच्ची संवैधानिक व जनहित में ईमानदार होती तो फिर आजादी के बाद तीन बार इस संगठन को प्रतिबन्धित होने का कलंक नहीं झेलना पड़ता. “तीन तलाक’’ पर अध्यादेश लाकर इसे अपराध घोषित करने पर बसपा प्रमुख ने भाजपा पर संवेदनशील मुद्दों पर स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाया.
BBAU के होनहार दलित छात्र रोहित सिंह को हॉस्टल न मिलने से विवि के प्रांगण में बिना किसी दबाव के तंबू लगाकर रहने के लिए मजबूर हुआ. आज रोहित सिंह ने विवि प्रशासन को लिखित में रहने के लिए ज्ञापन दिया.
आपको सूचित करना चाहता हूँ कि प्रार्थी रोहित सिंह जो एम०ए० शिक्षा शास्त्र प्रथम वर्ष का छात्र है, और साथ मे बी०पी०एल०कार्ड धारक है, जिसने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए छात्रावास न मिलने से विश्वविद्यालय के प्रांगड़ में तंबू लगाने की अनुमति और तंबू का सामान मांगने के लिए 31 अगस्त2018 को प्रार्थना पत्र DSW,कुलसचिव,और कुलपति को दिया था लेकिन विश्विद्यालय ने एक हफ्ते के बाद भी मेरे प्रार्थना पत्र के जबाब देने को उचित नही समझा, तो प्रार्थी ने पुनः 10 सितम्बर2018 को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें प्रार्थी ने ये अवगत कराया था कि प्रार्थी 13 सितम्बर2018 से तंबू लगाकर रहने लगेगा, लेकिन प्रार्थी यह सोचकर नही रहा कि शायद आखिरी सूची में प्रार्थी का नाम आ जाए लेकिन आखिरी सूची जारी होने के बाद जब प्रार्थी की सारी उम्मीद खत्म हो जाने के बाद तथा अपनी पढ़ाई को नियमित व सुचारूरूप से करने लिए और अपने उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर दिनांक 24/09/2018 दिन सोमवार से बिना किसी दवाव के विश्वविद्यालय के छात्रावास के प्रांगड़ में तंबू लगाकर रहने जा रहा है.यदि इस दरमियान प्रार्थी को कोई शारीरिक व मानसिक नुकसान होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी कुलानुशासक और DSW महोदय की होगी .
अतः श्री मान जी से निवेदन है कि प्रार्थी के द्वारा बताई गई समस्याओ को, उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर उसको रहने दिया जाए, और उसके सामान की सुरक्षा की मुहैया कराई जाए.
महान कृपा होगी.
दिनांक:- 18/09/2018 प्रार्थी
रोहित सिंह
एम०ए०शिक्षा शास्त्र प्रथम वर्ष
बी बी ए यू लखनऊ
मो.8381909041
संलग्न:-पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रो की छायाप्रति.
प्रेषित प्रतिलिपि-
1:-कुलसचिव, बी बी ए यू ,लखनऊ.
2:-सा. कुलसचिव, SC/ST सेल,बी बी ए यू लखनऊ.
3:-कुलपति,बी बी ए यू ,लखनऊ.
4:-कुलानुशासक, बी बी ए यू, लखनऊ.
5:-मा. चैयरमैन, राष्ट्रीय अनु. जाति आयोग, भारत सरकार, नई दिल्ली.
6:-मा. मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली.
7:-मा. प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.
8:-मा. राष्ट्रपति महोदय, नई दिल्ली.
मेरठ। इलाहाबाद होईकोर्ट ने बसपा पूर्व विधायक योगेश वर्मा से रासुका हटाने और रिहा करने का आदेश दिया है. योगेश वर्मा पर दो अप्रैल को मेरठ में हुई हिंसा के आरोप में रासुका की कार्रवाई की गई थी.
बता दें कि मेरठ के हस्तिनापुर सीट से पूर्व बसपा विधायक योगेश वर्मा को बड़ी राहत मिली है. योगेश वर्मा ने रासुका के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी. जस्टिस वी. के. नारायण और जस्टिस आर. एन. कक्कड़ की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है.
उल्लेखनीय है कि बसपा नेता और पूर्व विधायक योगेश वर्मा को मेरठ पुलिस ने जेल भेजा था. योगेश वर्मा और उनके भाई पवन वर्मा व राजन वर्मा इस आंदोलन से सीधे जुड़े थे. सुबह जो बवाल मवाना में हुआ, उसके पीछे योगेश वर्मा के समर्थक ही रहे. एनएच-58 पर मोदीपुरम की तरफ से जो बवाल होते हुए रोहटा रोड और कंकरखेड़ा तक पहुंचा, वहां पर भी योगेश वर्मा ने खुद ही कमान संभाले रखी. यही नहीं कचहरी के पूर्वी गेट पर डॉ. अंबेडकर प्रतिमा के पास सुबह से जनसभा हो रही थी और भारी भीड़ जमा थी. लेकिन उसमें सिर्फ नारेबाजी के अलावा कोई हंगामा नहीं था. लेकिन जैसे ही दोपहर में करीब 12 बजे योगेश वर्मा अपने करीब सौ समर्थकों के साथ वहां पहुंचे तो भीड़ में हलचल शुरू हो गई. इस दौरान योगेश वर्मा ने संबोधन शुरू किया तो समर्थकों ने एनएएस कॉलेज की तरफ से आने वाले मार्ग पर उपद्रव करते हुए डिवाइडर पर रखे गमले तोड़ डाले और पुलिस कर्मियों की पिटाई करते हुए गाड़ी में तोड़फोड़ करते हुए जला डालीं.
इसके बाद इन उपद्रवियों की तरफ से फायरिंग भी हुई तो योगेश वर्मा ने मंच से कहा कि फायर नहीं है, जोश में युवक डंडे फटकार रहे हैं. लेकिन उपद्रवी लगातार उग्र होते गए. इसके बाद माहौल तब ज्यादा गरमाया जब उपद्रवियों ने पूर्वी कचहरी गेट तोड़ भीतर घुसकर वाहनों को क्षतिग्रस्त करते हुए एक बाइक और स्कूटी में आग लगा दी और पथराव कर दिया. तब जवाब में पुलिस ने भी हवाई फायरिंग की. इस दौरान योगेश वर्मा वहां से खिसक गए और सबसे ज्यादा बवाल वाले कंकरखेड़ा क्षेत्र में पहुंचे. यहां भी उनके पहुंचने के बाद बवाल बढ़ता चला गया, लेकिन पुलिस योगेश वर्मा को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सकी. इन तमाम सूचनाओं पर नजर रखे भाजपा विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी से फोन पर बात करते हुए पूरे माहौल की जानकारी दी. साथ ही बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा पर सख्ती की मांग की. इसके बाद शासन से मिले निर्देश पर तत्काल योगेश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. योगेश वर्मा के पकड़े जाने के बाद तमाम बवाली भी गायब हो गए.
रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन करने के लिए अपने पुत्र विधायक अमित जोगी के साथ दिल्ली में डेरा डाल दिया है. वहीं, बसपा प्रदेश प्रभारी ओपी वाचपेयी भी मायावती से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं.
ज्ञात हो कि अपना इलाज कराने दिल्ली पहुंचे जोगी ने कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की थी, लेकिन उस समय बसपा ने गठबंधन पर कोई तवज्जो नहीं दिया था. तब जोगी ने उस मुलाकात को औपचारिक बताकर गठबंधन की खबर को सिरे से खारिज कर दिया था.
जोगी इलाज के बहाने बुधवार को फिर दिल्ली रवाना हुए. पार्टी सूत्रों के अनुसार वह गठबंधन के लिए बसपा सुप्रीमो से फिर बातचीत करेंगे. छत्तीसगढ़ में बसपा के गढ़ में 23 सितंबर से अजीत जोगी का विजय रथ भी निकलना है.
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली व पंजाब की दलित सियासत में मजबूत पैठ बनाने की कोशिश में है. देश भर में कहीं भी दलितों के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल काफी मुखर रहते हैं. वहीं, बीते दिनों पंजाब में हरपाल चीमा को नेता प्रतिपक्ष बनाने के पीछे दलित समाज को सम्मान व हक दिलाने की आप ने दलील दी थी. दूसरी तरफ दिल्ली विधानसभा से लेकर सड़क पर दलित मसलों पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम सड़क से लेकर सदन में संघर्ष करते दिखते हैं. इसी कड़ी में बुधवार को राजेंद्र पाल गौतम ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मुलाकात की. उनके साथ दलित समाज का एक प्रतिनिधिमंडल भी था. इस दौरान दोनों नेताओं ने 2019 के लोक सभा चुनाव के बारे में एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा की. साथ ही दलित आंदोलन को साथ-साथ आगे बढ़ाने की मंशा भी जाहिर की.
मुलाकात के बारे में राजेंद्र पाल गौतम का कहना था कि चंद्रशेखर उनके समाज से ताल्लुक रखते हैं. उनकी तबियत की जानकारी लेने के साथ ही 2019 के चुनाव में न्याय की लड़ाई और संविधान की रक्षा सहित कमजोर वर्ग की लड़ाई में भीम आर्मी प्रमुख का भी सहयोग लिए जाने पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे से ज्यादा समाज के अलग-अलग मसलों पर बात की. गौरतलब है कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी सहारनपुर जाकर भीम आर्मी प्रमुख से मिलने की इच्छा जताई थी. लेकिन जिला प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. ऐसे में केजरीवाल को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था.
नई दिल्ली। फरीदाबाद केभतौला गांव में कार में गाना बजाने को लेकर एक दलित युवक और उसकी मां के साथ मारपीट का मामला सामने आया है. आरोप है कि जब युवक अपनी कार में गाना बजा रहा था, तो कुछ युवक वहां आ गए और झगड़ने लगे. थोड़ी देर बाद वे युवक के घर पहुंचे और लाठी डंडों से पीटने लगे. इस दौरान बीचबचाव करने आई युवक की मां को भी उन्होंने फावड़ा मार दिया, जिससे वह घायल हो गईं. उनके 12 टांके आए हैं. शिकायत पर पुलिस ने मारपीट और एससी-एसटी ऐक्ट में केस दर्ज कर जांच शुरू केस के जांच अधिकारी एएसआई कर्मबीर ने बताया कि भतौला गांव का करण अपनी कार घर के सामने खड़ी करता है. करण अपनी कार में गाना बजा रहा था. इसे लेकर विवाद हो गया. शिकायत के मुताबिक, कुछ देर में गांव के रवि, सुभाष, विधुड़ी और पवन एक साथ करण के घर पर पहुंच गए. चारों ने करण को सरिया और लाठी डंडों से पीटा और जातिसूचक गाली भी दी.
इस बीच जब करण की मां पूरण देवी बेटे को बचाने के लिए आई तो आरोपितों ने उन्हें फावड़ा मार दिया. यह उनके चेहरे पर लगा. इसके बाद आरोपित वहां से फरार हो गए. बाद में पुलिस को सूचना दी गई. एससी-एसटी ऐक्ट लगने के चलते खेड़ी पुल थाना पुलिस ने केस की फाइल डीसीपी सेंट्रल ऑफिस भेज दी है. अब आगे की जांच एसीपी या डीसीपी स्तर पर होगी.
नई दिल्ली। तेलंगाना में दलित दामाद की निर्मम तरीके से हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि तेलंगाना से एक और हिला देने वाली घटना सामने आई है. दलित युवक से शादी करने को लेकर बेटी से नाराज पिता ने उसका हाथ काट दिया और चेहरे को भी जख्मी कर दिया. यह घटना हैदराबाद की है. बंजारा हिल्स पुलिस ने बताया कि एक पिता इस बात से गुस्से में था कि उसकी बेटी ने दलित युवक से शादी कर ली थी.
20 वर्षीय माधवी ओबीसी वर्ग से आती हैं जबकि उनका पति बी.संदीप (22) दलित समुदाय से हैं. संदीप और माधवी चारी पांच सालों से रिलेशनशिप में थे. 12 सितंबर को उनलोगों ने लड़की के पिता मनोहर चारी (42) के कड़े विरोध के बाद भी चोरी-छिपे शादी कर ली. पुलिस ने बताया कि दंपती ने 12 सितंबर को शादी करने के बाद एसआर नगर थाने जाकर मदद की गुहार लगाई थी.
बुधवार दोपहर बाद मनोहर ने अपनी बेटी को फोन किया था और सुलह के लिए अपने पति के साथ घर आने को कहा था. पति-पत्नी एरागाडा इलाके के गोकुल थिएटर पहुंचे. करीब 3.30 बजे माधवी का पिता भी वहां पहुंचा और अपने थैले से चॉपर निकाला. पुलिस को मिली सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि मनोहर ने पहले संदीप पर हमला किया जो वहां से भाग गया. मनोहर ने फिर अपनी बेटी के हाथ पर चॉपर मारा और अगली बार उसके चेहरे पर निशाना बनाया. माधवी जमीन पर गिर गईं. मनोहर ने फिर से अपनी बेटी पर हमला करना चाहा लेकिन एक व्यक्ति ने पीछे से उसको लात मारी. वह डर गया और भाग गया.
माधवी के गले और जबड़े के बीच 12 ईंच गहरा जख्म है. उनका बायां हाथ कटकर त्वचा के सहारे झूल रहा था. खबर लिखे जाने तक उनकी सर्जरी चल रही थी. दूसरे अस्पताल में संदीप का इलाज चल रहा है. डॉक्टर ने बताया कि वह काफी सदमे में हैं.
बंजारा हिल्स के एसीपी विजय कुमार ने बताया कि मनोहर के खिलाफ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज कर लिया गया है.
पटना। बिहार में जदयू ने दलित कार्ड खेला है. पहली अक्टूबर से जदयू हर जिला में दलित-महादलित सम्मेलन का आयोजन करेगा. मंगलवार को कार्यक्रम का कैलेंडर जारी करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने बताया कि सम्मेलन के लिए छह टीम गठित की गई है.
इसके अलावा 19 अक्टूबर से ही सम्मेलन की तैयारी के लिए पार्टी के जिला प्रभारियों का दौरा आरंभ हो जाएगा. एक टीम का वह खुद नेतृत्व करेंगे.
आरसीपी सिंह ने बताया कि हर टीम में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ताओं को भी शामिल किया गया है. सिंह ने बताया कि दशहरा बाद 25 अक्टूबर से प्रमंडल स्तर पर दलित-महादलित सम्मेलन आयोजित होगा जो 3 नवंबर को संपन्न होगा.
उनके मुताबिक, 25 अक्टूबर को सारण, 26 अक्टूबर को तिरहुत, 27 अक्टूबर को दरभंगा, 28 अक्टूबर को सहरसा, 29 अक्टूबर को पूर्णिया, 30 अक्टूबर को भागलपुर, 31 अक्टूबर को मुंगेर, पहली नंवबर को मगध एवं 3 नवंबर को पटना प्रमंडल में यह सम्मेलन आयोजित होगा.
“प्रणय एक मां की तरह मेरा ख़्याल रखता था. वह मुझे नहलाता था, खिलाता था और मेरे लिए खाना बनाता था. वह मेरी ज़िंदगी और दिनचर्या का हिस्सा था.”
यह कहना है 21 वर्षीय अमृता वर्षिनी का जिनके पति की उनके सामने गर्दन पर वार करके हत्या कर दी गई थी.
चार दिन पहले नलगोंडा (तेलंगाना) के मिरयालागुडा शहर में 24 वर्षीय प्रणय पेरुमल्ला की तब हत्या कर दी गई थी जब वह अपनी गर्भवती पत्नी का चेकअप कराकर अस्पताल से बाहर आ रहे थे.
प्रणय पेरुमल्ला की हत्या कथित तौर पर कॉन्ट्रेक्ट किलर ने की थी जिसकी सुपारी उनकी पत्नी अमृता के परिजनों ने दी थी.
नलगोंडा के पुलिस अधीक्षक ए.वी. रंगनाथ ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया कि अमृता के पिता मारुति राव, उनके क़रीबी करीम, असग़र, भारी, सुभाष शर्मा, अमृता के चाचा श्रवण और उनके ड्राइवर को प्रणय की हत्या और उसकी साज़िश के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
प्रणय की हत्या की पूरी साज़िश के बारे में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इसके लिए एक करोड़ रुपये का सौदा हुआ था. अमृता के पिता के निर्देश पर करीम नाम के शख़्स ने असग़र अली, भारी और सुभाष शर्मा से संपर्क किया. पुलिस
ने बताया कि अभियुक्त असग़र अली और मोहम्मद भारी नलगोंडा के निवासी हैं और हिरेन पंड्या की हत्या मामले में भी अभियुक्त हैं.
9 अगस्त से इसको लेकर रेकी की जा रही थी.
पुलिस ने सार्वजनिक किया है कि प्रणय पर हमले की पहली कोशिश 14 अगस्त, दूसरी सितंबर के पहले हफ़्ते और आख़िरी 15 सितंबर को दोपहर 1.30 बजे की गई और उनकी हत्या कर दी गई.
पुलिस अधीक्षक ने कहा, “जांच के दौरान लड़की के पिता ने कहा कि प्रणय अनुसूचित जाति से था, उसने ठीक से पढ़ाई नहीं की थी और मध्यम वर्ग के परिवार से संबंध रखता था.”
बीबीसी ने अमृता से उनके ससुराल में मुलाक़ात की. पांच महीने की गर्भवती अमृता दुर्बल नज़र आती हैं, लेकिन चेहरे पर उनके साहस है. रोने के बाद ख़ुद को हिम्मत बंधाते हुए वह कहती हैं कि वे दोनों बचपन से एक-दूसरे को प्यार करते थे.
अमृता ने प्रणय और ख़ुद की बचपन की एक फ़ोटो फ़ेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “बचपन के प्यार से शादी करने से कुछ भी बेहतर नहीं है. हमेशा साथ रहने के लिए पैदा हुए.”
बेचैनी से अपने फ़ोन को दूर करते हुए वह अपने बेडरूम के दरवाज़े पर नज़रें गड़ाकर देखती हैं जहां से कमरे में लोग आ जा रहे हैं. अमृता अपने ख़्यालों में खोई नज़र आती हैं.
2016 में पहली बार की शादी
प्रणय से वह कैसे मिलीं? इस सवाल पर उनके चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान आती है और वह कहती हैं, “स्कूल में वह मुझसे एक साल सीनियर थे. हम हमेशा एक-दूसरे को पसंद करते थे. मैं नौवीं क्लास में थी और प्रणय 10वीं क्लास में थे. हमारा प्यार तब शुरू हुआ था. हम फ़ोन पर बहुत अधिक बात करते थे.”
वह धीरे-धीरे अपना हाथ पेट पर ले जाती हैं और कहती हैं कि यह बच्चा हमारे प्यार का प्रतीक रहेगा. “मुझे ख़ुशी है कि कम से कम मेरे पास मेरा बच्चा है. यह बच्चा प्रणय को मेरे पास रखेगा जैसे वह हमेशा था.”
अमृता कहती हैं, “हमें एक-दूसरे के लिए भागना पड़ा.”
अमृता और प्रणय की कहानी ऐसी नहीं है कि वह एक-दूसरे से मिले और ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे. उन्हें एक-दूसरे से शादी से पहले धमकियों और शारीरिक यातनाओं का सामना करना पड़ा.
अमृता कहती हैं, “यह बेहद छोटा शहर है. तो यह बहुत सामान्य बात है कि मेरे परिजनों को हमारे रिश्ते के बारे में पता चल गया. मेरे परिजनों ने मुझे चेतावनी दी. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं प्रणय से कभी भी न मिलूं, लेकिन यह सब मुझे नहीं रोक सका.”
“मैंने उनकी जाति या आर्थिक स्थिति नहीं देखी थी. हमारे लिए यह महत्वपूर्ण था कि हम एक-दूसरे को प्यार करते हैं और अच्छे से समझते हैं.”
अमृता जब इंजीनियरिंग में दूसरे वर्ष की छात्रा थीं तब दोनों ने अप्रैल 2016 में पहली बार शादी की. हालांकि, उन्होंने शादी का पंजीकरण नहीं कराया था. उनके परिजनों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने अमृता को कमरे में बंद कर दिया था.
प्रणय अपने भाई के साथ
अमृता साहस के साथ कहती हैं, “मेरे चाचा ने प्रणय को धमकी दी थी. उन्होंने डम्बल से मुझे मारा. यह सब मेरी मां और तकरीबन 20 रिश्तेदारों के सामने हुआ. कोई भी मेरे साथ नहीं खड़ा हुआ. मुझे कमरे में बंद कर दिया गया. वह चाहते थे कि मैं प्रणय को भूल जाऊं क्योंकि वह अनुसूचित जाति से है.”
“बचपन में मेरी मां दूसरी जाति के दोस्त बनाने के लिए मुझे हतोत्साहित करती थीं. मुझे कमरे में बंद रखा जाता था और हर दिन कुछ अचार और चावल ही खाने के लिए दिया जाता था. प्रणय को मैं भूल जाऊं इसलिए मेरे चाचा मुझे मारते थे और धमकी देते थे. उन्होंने मेरी पढ़ाई बंद करा दी. मेरे पास प्रणय से बात करने के लिए कोई रास्ता नहीं था.”
उस समय के बाद अमृता ने प्रणय को तभी देखा जब उन्होंने 30 जनवरी 2018 को आर्य समाज मंदिर में दोबारा शादी की.
वह कहती हैं, “मुझे स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं तो मैं डॉक्टर या अस्पताल के किसी स्टाफ़ का फ़ोन लेकर प्रणय से बात करती थी. वह कुछ लम्हे हमारे प्यार को आगे बढ़ा रहे थे. हमने आख़िरकार आर्य समाज मंदिर में शादी करने का फ़ैसला किया ताकि हमारे पास शादी का कोई दस्तावेज़ हो. हम दोनों ने अपने प्यार के लिए लड़ने का फ़ैसला किया.”
प्रणय के परिवार को शादी की कोई जानकारी नहीं थी. शादी के बाद यह जोड़ा सुरक्षा के लिहाज से हैदराबाद चला गया.
अमृता बताती हैं, “हम डेढ़ महीने तक हैदराबाद में रहे, लेकिन मेरे पिता ने हमारी जानकारी के लिए कुछ गुंडों को भेजा. इस वजह से हम प्रणय के घर में मिरयालागुडा रहने चले आए हमने सोचा की परिवार के पास रहने से हम सुरक्षित रहेंगे.”
“हमारी योजना थी कि हम उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाएंगे और इसी बीच मैं गर्भवती हो गई. यह हमारे लिए सबसे अच्छा क्षण था.”
“जब तक बच्चा नहीं हो जाता तब तक हमने यहीं रुकने का फ़ैसला लिया. बच्चा होने के बाद पढ़ाई के लिए हम कनाडा जाने की पूरी व्यवस्था कर रहे थे.”
अमृता कहती हैं कि उनके गर्भवती होने की ख़बर ने उन्हें उम्मीद और ख़ुशी दी. हालांकि, बच्चे के लिए वे कुछ ज़्यादा ही युवा थे, लेकिन प्रणय ने अपने परिजनों को बताया कि बच्चा अमृता के परिजनों के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़े होने में मदद करेगा.
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अमृता के पिता ने गर्भपात कराने को कहा
अमृता ने अपने परिजनों को गर्भवती होने की बात कही थी. वह बताती हैं, “मैंने जब से उन्हें गर्भावस्था की बात कही थी, वह तभी से कह रहे थे कि मैं गर्भपात करा लूं. गणेश चतुर्थी की बधाई के लिए मैंने दोबारा उनसे बात की थी. उन्होंने फिर गर्भपात कराने को कहा.”
“हम हमेशा इस डर में रहते थे कि मेरे पिता और उनके गुंडे हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वह इतनी क्रूरता पर उतर आएंगे.”
अमृता कहती हैं कि प्रणय उन्हें प्यार से ‘कन्ना’ बुलाते थे. उस दिन को याद करते हुए वह कहती हैं, “हम सुबह लगभग 11 बजे देर से सोकर उठे थे. मेरे पीठ में दर्द था. मैंने प्रणय को बुलाया. मुझे अभी भी उनकी आवाज़ याद है, उन्होंने कहा था, ‘कन्ना आ रहा हूं.”
वह सिसकते हुए कहती हैं, “मैंने नाश्ता किया. प्रणय ने अपना नाश्ता तक नहीं किया था. हम अस्पताल गए. हम बात कर रहे थे कि कैसे मेरा पीठ का दर्द ठीक हो सकता है.”
वह बताती हैं कि जब वे डॉक्टर के पास थे तब अमृता के पिता का डॉक्टर के पास फोन आया और उन्होंने गर्भपात के बारे में मालूम किया.
“डॉक्टर ने यह कहते हुए फ़ोन काट दिया कि हम अस्पताल में नहीं हैं. इस बीच मेरे पिता की मिस्ड कॉल मेरे पास आई. मेरे चेकअप के बाद हम अस्पताल से बाहर निकल रहे थे और मैं प्रणय से कुछ पूछ रही थी, लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला. मैंने देखा तो वह ज़मीन पर गिरे थे और एक शख़्स उनकी गर्दन काट रहा था.”
“मेरी सास ने उस शख़्स को धक्का दिया और मैं मदद मांगने अस्पताल के अंदर गई. कुछ मिनट बाद मैंने अपने पिता को कॉल किया, लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि वोह क्या कर सकते हैं? उसे अस्पताल ले जाओ.”
“कुछ दिनों पहले मेरे पिता का एक छोटा ऑपरेशन था. मेरी मां और रिश्तेदारों ने मुझे उन्हें देखने को कहा. मैंने मना कर दिया और झूठ बोला कि हम बेंगलुरु जा रहे हैं. अगले दिन एक शख़्स मेरे घर किसी किराए की कार के बारे में जानकारी लेने आया जो घर के बाहर खड़ी थी. उस शख़्स का उच्चारण बेहद अजीब था. मेरे ससुर ने उसे जवाब दिया. मुझे लगता है कि अस्पताल में वही शख़्स था जिसने प्रणय को मारा.”
अमृता कहती हैं कि उन्हें विश्वास है कि उनके पिता प्रणय को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ समय से योजना बना रहे थे.
प्रणय की मां
अमृता की मां ने पिता को दी पूरी जानकारी?
“अभी तक मेरे घरवालों ने मुझसे बात नहीं की है. मेरी मां अक्सर मुझे फ़ोन करती थीं. मुझे लगता है कि वह मेरे स्वास्थ्य की जानकारी लेने की जगह मेरे पिता को जान-बूझकर या अनजाने में मेरी जानकारी दे रही थीं. मैं अपने पूरे परिवार को दोष देती हूं. मैं वापस उनके पास नहीं जाऊंगी. प्रणय के परिजन अब मेरे परिजन हैं.”
इस घटना के बाद दलितों और महिलाओं से जुड़े कल्याण समूह प्रणय के घर आकर अपनी सहानुभूति जता रहे हैं. उनके घर में ‘जय भीम’ और ‘प्रणय अमर रहे’ जैसे नारे गूंज रहे हैं.
अमृता कहती हैं कि उन्हें ख़ुशी है कि उन्हें इस लड़ाई में समर्थन मिल रहा है. उन्होंने ‘जस्टिस फ़ॉर प्रणय’ नाम से एक फ़ेसबुक पेज बनाया है. मैं इसका जाति विहीन समाज के रूप में अपने काम के तौर पर इस्तेमाल करूंगी.
दृढ़ संकल्प की भावना के साथ अमृता कहती हैं, “प्रणय हमेशा कहते थे कि प्रेमियों को जाति के कारण समस्याओं का सामना नहीं करना चाहिए. जाति के कारण हमने मुश्किलों का सामना किया है. मैं न्याय के लिए लड़ूंगी. मेरी इच्छा है कि प्रणय की मूर्ति शहर के बीचों बीच लगाई जाए. मैं इसके लिए ज़रूरी अनुमति लूंगी.”
वह आरोप लगाते हुए कहती हैं कि उनके पिता ने उनके पति को इसलिए मारा क्योंकि वह उनकी जाति के नहीं थे.
प्रणय के घर में महिला और दलित समाज का आना जाना जारी
‘जाति विहीन समाज के लिए लड़ूंगी’
वह कहती हैं, “अगर वह कोशिश करते तो प्रणय से बेहतर पति मेरे लिए नहीं ढूंढ सकते थे. मेरे पिता को हमारे संबंध से सिर्फ़ इसलिए समस्या थी क्योंकि प्रणय अनुसूचित जाति से था.”
“मैं जाति विहीन समाज के लिए लड़ूंगी.”
प्रणय की मां हेमलता, पिता बालास्वामी और छोटे भाई अजय बेहद मायूस हैं. अजय अमृता की मदद करते दिखते हैं और उन्हें अकेला नहीं छोड़ते.
‘प्रणय अमर रहे’ के नारे लगने के बाद जब प्रणय की मां हेमलता रोते हुए बरामदे में आती हैं तो अमृता उन्हें सांत्वना देती हैं. वह कहती हैं, “अजय अब मेरा भी भाई है. यह मेरा घर है और यहीं मेरा बच्चा आएगा.”
उन्हें डर है कि उनके पिता उनके बच्चे और ससुराल पक्ष के लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. लेकिन अब अमृता और उनके बच्चे के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है.
प्रणय के परिवार ने कहा है कि वह अमृता को अपनी बेटी की तरह मानते हैं, लेकिन अमृता की वित्तीय स्वतंत्रता भी एक बड़ा विषय है. यह भी याद रखे जाने की ज़रूरत है कि उन्होंने अपने प्यार के लिए लड़ते समय पढ़ाई छोड़ दी थी.
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘ संघ के नजरिए से भारत का भविष्य’ तीन दिवसीय मंथन शिविर को संबोधित करते हुए मोहनभागवत ने कुछ आदर्श वाक्य बोले हैं, जिसका निहितार्थ यह निकाला जा रहा है कि सभी भारतीय बिना किसी भेदभाव के समान हैं और संघ उनको अपना मानता है. उनके इस भाषण ने मेरे मन में कुछ प्रश्न पैदा किए-
1- पहला प्रश्न यह है कि क्या मोहनभागवत और संघ वर्ण-व्यवस्था, जाति व्यवस्था और महिलाओं को पुरूषों की अधीनता में रखने के विचार का समर्थन करने वाले वेदों, स्मृतियों, पुराणों, रामायण, गीता और रामचरित मानस को खारिज करते हैं और अब संघ इन ग्रंथों को महान ग्रंथ नहीं मानेगा. क्या संघ डॉ. आंबेडकर, पेरियार और रामस्वरूप वर्मा द्वारा इन ग्रंथों को जलाने जाने का समर्थन करता है?
2- दूसरा प्रश्न यह कि क्या संघ और मोहनभागवत हेडगेवार, गोलवरकर, दीनदयाल उपाध्याय और अभी-अभी जल्दी ही स्वर्ग सिधारे अटल बिहारी बाजपेयी जैसे अपने आदर्श नायको को खारिज करता है, जो वर्ण- जाति व्यस्वस्था और स्त्रियों पर पुरूषों के नियंत्रण का समर्थन करते थे और मनुस्मृति को महान ग्रंथ मानते.
3- क्या संघ और मोहनभागवत सावरकर की इन बात के लिए निंदा करते हैं कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के साथ बलात्कार को हिंदुओं के लिए वीरतापूर्ण कार्य माना था. क्या अब सावरकर को अपना नायक नहीं मानेगे.
4- क्या संघ और मोहनभागवत राम को ईश्वर या आदर्श व्यक्तित्व अब नहीं मानेगे, जिन्होंने वर्ण व्यवस्था की रक्षा के लिए शंबूक का बध किया और स्त्रियों पर पुरूषों के नियंत्रण के लिेए सीता की अग्नि परीक्षा ली और बाद उनको घर से निकाल दिया या जिन्होंने साफ-साफ कहा कि द्विज ( सवर्ण) ही मुझे सबसे प्रिय हैं.
5- क्या संंघ बाबरी मस्जिद विध्वंस, गुजरात नरसंहार और हाल के मुजफ्फपुर दंगों कि लिए शर्मिंदा है?
6- क्या संघ अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को संघ में शामिल नहीं करेगा, जो वर्ण-जाति व्यवस्था में विश्वास रखता हो और वर्णवादी-जातिवादी आचरण करता हो.
7-क्या संघ अपनी शाखाओं में स्त्री-पुरूषों को समान रूप से एक साथ शामिल होने की इजाजत देगा.
8-क्या संघ कार्पोेरेट घरानों और सरकारों के उस गठजोड़ के खिलाफ खड़ा होगा, जो इसे देश मूल निवासी 10 करोड़ आदिवासियों को उजाड़ रहे हैं, उनके जल, जंगल और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. उन्हें उनके निवास स्थानों से खदेड़ रहे है, प्रतिरोध और विरोध करने पर जेलों में ठूस रहे और उनकी हत्याएं कर रहे है.
9- क्या संघ मुट्ठीभर उच्च जातीय कार्पोरेरट घरानों के हाथों में देश की सारी संपदा केंद्रित होते जाने के खिलाफ है? संघ को यह भी बताना चाहिए कि वह कार्पोरेट के साथ खड़ा है या 90 प्रतिशत भारत के बहुजन के साथ?
10- क्या मोहनभागवत फुले, डॉ. आंबेडकर और पेरियार की इस बात का समर्थन करता है कि ब्राह्मणवाद, हिंदुत्व और वर्ण-जाति व्यस्था एक दूसरे के पर्याय हैं. तीनों का खात्मा एक साथ ही होगा?
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश के दो हजार से ज्यादा प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया गया है। साथ ही बंद किए विद्यालयों को विद्या भारती को देने का आदेश दे दिया गया है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड के. आलोक शेखर तिवारी ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों की पिछले दिनों बैठक के बाद 12 सितम्बर 2018 को एक पत्र जारी किया है।
पत्र के 17वें प्वाइंट में ऐसे विद्यालय जो कि शून्य या 10 से कम छात्र संख्या वाले हैं, उनको बंद करने के पश्चात् उसके भवनों को विद्या भारती के विद्यालयों को देने का प्रस्ताव शासन को दिया गया है। अगर ऐसे विद्यालयों की संख्या की बात करें तो कैबिनेट में ऐसे 2715 प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक के विद्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया जा चुका है। महानिदेशक के इस फैसले के बाद वह कठघरे में हैं।
सवाल है कि जब उन क्षेत्रों में बच्चे ही नहीं हैं तो विद्या भारती के विद्यालयों के लिए बच्चे कहाँ से आयेंगे? आरोप लगाया जा रहा है कि कहीं आरएसएस के विद्यालयों को स्थापित करने के लिए दो हजार से ज्यादा स्कूलों को तो बंद नहीं किया गया है?
दरअसल ये नियमों की अनदेखी का भी मामला है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 साफ़ कहता है कि 1 किमी में प्राथमिक विद्यालय हो तो 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कैसे किया जा सकता है? इसी पत्र के 15 वे बिंदु में विद्या भारती के मान्यता प्राप्त विद्यालयों को भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने हेतु समग्र शिक्षा अभियान से अनुदान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से भी शिक्षा विभाग के भीतर बड़ी साजिश की बू आ रही है। एक तरफ जहां सैकड़ों की संख्या में राज्य के सरकारी विद्यालय जर्जर बने हुए हैं और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है तो वहीं दूसरी ओर विद्या भारती के विद्यालयों के लिए बजट कहां से आ गया? प्रदेश में चर्चा है कि बीजेपी की सरकार सरकारी विद्यालयों को बंद कर उसी के जरिए आरएसएस का एजेंडा चलाने की पृष्ठभूमि तैयार करने में जुटी है.
नई दिल्ली। आगामी 23-24 सितंबर को जापान के शहर फुकोका में 4th डॉ. बी.आर. आम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल मिशन, बुराकु लिबरेशन लीग और इंटरनेशनल मूवमेंट अगेंस्ट डिस्क्रीमिनेशन एंड रेसिज्म, जापान द्वारा फुकेका के रिसेन्ट होटल में आयोजित किया गया है. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का बीजक भाषण भारत के सुप्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अम्बेडकर चेयर के प्रोफेसर एवं विश्व प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो. विवेक कुमार देंगे.
यह अपने आप में एक ऐतिहासिक आयोजन है. जैसा कि लोग जानते हैं कि बाबासाहेब आम्बेडकर के अनुयायियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अम्बेडकरी आंदोलन को स्थापित किया जा रहा है. इस आंदोलन के तहत 9 विश्वविद्यालयों में बाबासाहेब की प्रतिमाओं की स्थापना अपने आप में बहुत कुछ कहती है. इसी कड़ी में विदेश में रह रहे अम्बेडकरवादियों ने सामानांतर मुहिम भी चला रखी है, जिसके तहत विश्व के अनेक राष्ट्रों के बहिष्कृत समाज आपस में गठबंधन कर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर विश्व को अपनी परेशानियों से अवगत करा रहे हैं.
अतः इसी कड़ी में 1999 में रंगभेद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार समिति द्वारा डरबन में सैकड़ों भारतीय पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज उठाने गए थे. इसलिए जापान में ये चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है. यहां पर डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा को कोयासान (Koyasan) विश्वविद्यालय में 2015 में किया गया था. अब अम्बेडकरी आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए यहां तमाम रणनीति बनाई जाएगी, जिससे भविष्य के अंतरराष्ट्रीय आंदोलनों को नई दिशा मिल सकेगी.