धोनी की पत्नी रखना चाहती हैं पिस्टल

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी धोनी ने पिस्टल की मांग की है. अपने बचाव के लिए धोनी की पत्नी पास में पिस्टल रखना चाहती है. इसके लिए साक्षी ने हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया है. फिलहाल आवेदन पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए फाइल आगे बढ़ाई गई है.

कोई मुकदमा दर्ज नहीं…

साक्षी ने आवेदन में कहा है कि वो ज्यादातर समय घर में अकेली रहती हैं, ऐसे में उनकी जान को खतरा रहता है. इसलिए उन्हें हथियार खरीदने का लाइसेंस दिया जाए. साक्षी ने यह आवेदन पिस्टल या फिर 0.32 रिवाल्वर के लिए दिया है. आजतक की खबर के मुताबिक साक्षी ने लाइसेंस के लिए रांची के मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन दिया था जिसे अल्गोड़ा थाना भेजा गया. इसके बाद पुलिस ने जांच की और पाया कि उन पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं है. इसके बाद उनकी फाइल डीएसपी ऑफिस भेज दी गई.

बता दें कि साक्षी के आवेदन की फाइल हटिया डीएसपी होते हुए सिटी एसपी के ऑफिस से आगे बढ़ चुकी है. अब यह फाइल जल्द ही एसएसपी के कार्यालय और फिर रांची के जिलाधिकारी के पास पहुंचेगा. महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों रातू के दलादिली स्थित फार्महाउस नुमा एक आलीशान आवास में रहते हैं. यह आवास कई एकड़ में फैला है. वैसे इस आवास में अत्याधुनिक हथियारों से लैस 7 गार्ड्स तैनात हैं. निशानेबाजी का शौक रखने वाले धोनी ने करीब 9 साल पहले लाइसेंसी पिस्टल खरीदी थी.

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‘राष्ट्रविरोधी’ गाने पर नाचने वाले नाबालिगों पर देशद्रोह का केस, 8गिरफ्तार

पटना। बिहार के रोहतास जिले में पांच नाबालिगों व तीन अन्य पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है. बीते शुक्रवार को ईद से एक दिन पहले राष्ट्रविरोधी गाने पर डांस करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है. ऐसा बताया जा रहा है कि नाबालिग एक ऐसे विवादित गाने पर डांस कर रहे थे, जिसमें मुजाहिदों और भारत की एकता को तोड़ने का जिक्र था.

नेटवर्क 18 की खबर के मुताबिक एक नाबालिग के पिता ने कहा “बच्चे तो इन शब्दों का मतलब भी नहीं जानते, वो तो सिर्फ गाने की धुन सुनकर डांस कर रहे थे.” विवादित गाने पर डांस करते इन बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया इसके बाद रोहतास पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए. पुलिस ने प्राप्त जानकारी के आधार पर बीते रविवार को मामला दर्ज कर लिया.

एफआईआक के मुताबिक, चंदन ठाठेरा नामक शख्स ने वीडियो को शूट कर वहां के लोकल बजरंग दल नेता  को दिया इसके बाद नेता ने ये वीडियो पुलिस को दिया था. घटना बीते शुक्रवार को शाम करीब 8 बजे के आसपास की है. जब करीब 150 लोगों की भीड़ जिसमें 10 से 22 साल की उम्र के लोग शामिल थे, ईद का जश्न मनाते हुए डीजे पर डांस कर रहे थे. डीजे चलाने वाला आशीष कुमार नामक शख्स इलाके का ही रहने वाला था. आशीष अपने फोन से कव्वालियां बजा रहा था. अचानक ये विवादित गीत बजा और लोग डांस करते रहे. गाने के बोल थे ” ‘हम पाकिस्तानी मुजाहिद,धरती के हैं रखवाले….’ हैं जो कि विवादित गाना है.

रोहतास एसपी सत्यवीर सिंह के मुताबिक अपराधियों पर आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने पर) 122A (देशद्रोह) 153A (नफरत फैलाना) और 295A (गलत भावना से किया गया ) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. एसपी सत्यवीर सिंह ने कहा कि पुलिस ने वीडियो पर संज्ञान लिया और पांच नाबालिगों सहित आठ लोगों पर देशद्रोह के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है. इस संबंध में 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है. एसपी ने कहा कि वीडियो की सत्यता की जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब में भेजा गया है.

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मायावती की नसीहत के बाद कश्मीर में गिराई गई सरकार?

PC-Patrika

नई दिल्ली। कश्मीर में भाजपा व पीडीपी की सरकार गिरने से चार दिन पहले ही मायावती ने मोदी सरकार को नसीहत दी थी. 15 जून को दी गई नसीहत के हिसाब से देखा जाए तो लगता है कि कश्मीर में सरकार से समर्थन वापसी में बसपा प्रमुख की नसीहत का भी रोल है. हालांकि जाहिर है कि कोई पार्टी इस तरह की बात को स्वीकार नहीं करती लेकिन कभी-कभार संयोगवश ऐसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है. अपनी नसीहत में सुश्री मायावती ने साफ तौर पर कहा था कि कश्मीर में बिगड़ते हालात को देखकर भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए.

इस नसीहत के चार दिन के बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तत्काल बैठक बुलाकर 19 जून को कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया. इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उसी दिन शाम को राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया. मायावती की नसीहत के बाद अचानक से कश्मीर में भूचाल आना बहुत कुछ बताता है.

अब यह जान लिजिए कि आखिर मायावती ने नसीहत क्यों दी थी.

दरअसल श्रीनगर में 14 जून को तीन बाइक सवार आतंकियों ने राइजिंग कश्‍मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्‍या कर दी. इसके बाद आतंकियों ने सेना के जवान औरंगजेब की भी बेरहमी से हत्या कर दी थी. इन घटनाओं ने कश्मीर के हालात इस कदर बिगाड़े कि मायावती ने बीजेपी को जमकर खरी-खोटी सुनाई.

सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में जवानों की लगातार हो रही शहादत व सम्पादक सुजात बुख़ारी की हत्या पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुये सुश्री मायावती ने कहा था कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार अपनी अड़ियल नीति को त्याग कर देशहित में अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करे.

गठबंधन सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार होने के बावजूद भी वहां के हालात लगभग बेकाबू हैं. चूंकि आम जनता शांति व कानून-व्यवस्था चाहती है, इसको ध्यान में रखकर ही केन्द्र सरकार को कश्मीर नीति में परिवर्तन लाना चाहिये तथा राजनीतिक स्तर पर भी सुधार के प्रयास तेज़ करने चाहिये.

भाजपा की देशभक्ति वाली नीति पर तंज कसते हुए मायावती ने कहा था कि बीजेपी की कश्मीर नीति पूर्णतः जनहित व देशहित पर आधारित नहीं होकर पार्टी की संकीर्ण राजनीतिक सोच से ज़्यादा प्रभावित लगती है. शायद यही कारण है कि बीजेपी का जम्मू नेतृत्व भी काफी ज्यादा स्वार्थ में लिप्त पाया जाता है. इसी कारण जम्मू क्षेत्र भी तनाव व हिंसा का शिकार है तथा आम जनता का जीवन त्रस्त है.

कश्मीर में सरकार गिरने के बाद बीजेपी की ओर से अधिकारिक तौर कहा गया कि समर्थन वापसी का फैसला देशहित को ध्यान में रखकर लिया गया है. सरकार चलाने से ज्यादा जरूरी है कि कश्मीर में शांति व्यवस्था के लिए सही फैसले लिए जाए. भाजपा का बयान व मायावती की नसीहत को गौर से देखिए तो साफ लगता है कि भाजपा वही कहती दिखी तो मायावती पहले कह चुकी थीं.

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मायावती, ममता व सोनिया से समर्थन मांग रही बीजेपी

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने विपक्षी की दिग्गज महिला नेताओं से समर्थन मांगा है. इस वक्त सोनिया गांधी व ममता बनर्जी मायावती एक-दुसरे के बहुत करीब हैं, ऐसे में भाजपा सरकार मौका देखकर समर्थन मांगी है. इनके समर्थन से ही सरकार तीन तलाक के ऐतिहासिक फैसले पर आगे बढ़ पाएगी. मोदी सरकार इस मामले पर विरोधियों से पूरी तरह से घिर गई है. तीन तलाक विधेयक पिछले छह महीने से राज्यसभा में लंबित है. ऐसे में मोदी सरकार राज्यसभा में विपक्ष के आगे कमजोर है.

तीन तलाक को पारित कराने के लिए मोदी सरकार बेताब है. बिना विपक्ष के सहयोग के यह बिल संसद में पारित नहीं हो पा रहा है. अब सरकार इस बिल को पारित कराने के लिए अपने तीनों मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, बीएसपी और तृणमूल कांग्रेस से समर्थन मांगा है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी पार्टियों की प्रमुख महिला नेताओं से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेद को भूलकर महिला हित में तीन तलाक को प्रतिबंधित करने वाले विधेयक को आगे बढ़ाने में मदद करें. इनका कहना है कि सरकार के इस फैसले का स्वागत मुस्लिम महिलाएं कर रही हैं लेकिन इन तीन महिला नेताओं के समर्थन मिल जाता तो विधेयक जल्द पास हो जाता.

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कपिल शर्मा की तरह निरहुआ ने पत्रकार को दी गालियां, मामला दर्ज

नई दिल्ली। भोजपुरी के स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ विवादों में घिर गए हैं. निरहुआ पर पत्रकार को गाली देने व मारने-पीटने की धमकी देने का आरोप लगा है. इस बात को लेकर निरहुआ की निंदा हो रही है. इस मामले को लेकर पत्रकार ने निरहुआ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. लेकिन निरहुआ ने भी इस पर खुलकर अपनी बात रखी है.

शिकायत की कॉपी

प्राप्त जानकारी के मुताबिक निरहुआ के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने की मुंबई में शिकायत दर्ज कराई गई है. भोजपुरी सिनेमा के पीआरओ और पत्रकार शशिकांत सिंह ने निरहुआ के साथ अपनी इस गाली-गलौत भरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया है. इसमें गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देते हुए सुना जा रहा है. इसको लेकर निरहुआ के छोटे भाई और फिल्म एक्टर परवेश लाल यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से शशिकांत सोशल मीडिया पर ‘बॉर्डर’ के खिलाफ नेगेटिव अभियान चलाए हुए थे. हालांकि उन्होंने निरहुआ और शशिकांत की बातचीत के बारे में कुछ ज्यादा नहीं कहा, लेकिन ये माना कि दोनों में गरमागर्मी हुई थी.

बता दें कि इसी तरह कपिल शर्मा ने एक पत्रकार को गाली दी थी जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था और कपिल शर्मा की निंदा हुई थी. भोजपुरी के जुबली स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ की नई फिल्म ‘बॉर्डर’ ईद पर रिलीज हुई थी और फिल्म ने बिहार और यूपी के कुछ सेंटर्स में सलमान खान की ‘रेस 3’ को जबरदस्त टक्कर भी दी. फिल्म को मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स से फिल्म की टीम बेहद खुश है.

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गायब रेप आरोपी दाती बाबा क्राइम ब्रांच में हाजिर

PC-navodyatimes

नई दिल्ली। शनिधाम के संस्थापक दाती महाराज आखिरकार पुलिस के साथ लुकाछिपी करने का खेल बंद कर हाजिर हो गए. क्राइम ब्रांच ने बाबा के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. लेकिन बाबा नहीं मिला था. इसके बाद मंगलवार को दाती महाराज ने दोपहर में चाणक्यपुरी क्राइम ब्रांच में सरेंडर कर दिया है. बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रेप के मामले में पेश होने के लिए बुधवार तक का समय दिया था.

दाती महाराज पर अपनी एक शिष्या के साथ रेप करने का आरोप है. पीड़िता ने आरोप लगाया है कि दाती महाराज के दिल्ली और राजस्थान स्थित आश्रमों में उसका यौन उत्पीड़न किया गया था. दरअसल पुलिस ने उसे सोमवार 11 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन 01 बजे के बाद भी वह पूछताछ में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा. हालांकि उसके पूछताछ में शामिल होने की संभावना पहले से ही काफी कम थी. शुक्रवार से ही वह पाली, राजस्थान स्थित आश्रम से गायब था. राजस्थान के आश्रम में पुलिस ने जांच के दौरान 600 लड़कियों के गायब होने की बात कही थी.

पुलिस को भी आशंका थी कि वह पूछताछ में शामिल नहीं होगा. वहीं, दिल्ली पुलिस ने दो सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर आश्रमों से जब्त कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की बात कही थी. पुलिस इस मामले को लेकर दाती महाराज से पूछताछ कर रही है.

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ट्रेनी महिला पुलिस अफसरों से नाईटी में कराई परेड और फिर…

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी में ट्रेनी महिला पुलिस अफसरों ने जबरदस्त खुलासा किया है. इससे अकादमी के अफसरों द्वारा किए जा रहे ज्यातदी का काला सच सामने आया है. ट्रेनी महिला पुलिस अफसरों ने ट्रेनर पर बदसलूकी करने और अश्लील गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है. ट्रेनी महिला डीएसपी देर रात नाइटी में परेड कराने से भड़की हुईं हैं.

रात में कमरे का दरवाजा खुलवाने…

इस घटना की शिकार हुई दर्जन भर से ज्यादा ट्रेनी महिला डीएसपी ने एक शिकायत पत्र रायपुर के पुलिस अधीक्षक को भेजा है. इस शिकायत पत्र में एडिश्नल एसपी मिर्जा जियारत बेग पर सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं. इसमें कहा गया कि एडिशनल एसपी महिला प्रशिक्षुओं के सामने ही अभद्र व्यवहार व अश्लील भाषा का प्रयोग करते हैं. साथ ही नाइट ड्रेस में पुरुषों के सामने परेड कराई गई. इसके अलावा रात में कमरे का दरवाजा खुलवाने के लिए अधिकारियों द्वारा उस्ताद व मेजर को भेजा जाता है. रात को दस बजे ऑफिसर पुरुष सहकर्मियों के सामने ही नाइट ड्रेस में परेड कराते हैं. यहां स्त्रियों के लिए अच्छा वातावरण नहीं है. बीमार होने पर उपचार भी नहीं कराया जाता. स्तरहीन खाने और नियत मानक का खाना उपलब्ध ना कराने की भी शिकायत इस पत्र में की गई है.

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तीन साल में बीजेपी ने कश्मीर को किया बर्बाद, सरकार की और गलतियां पढें

नई दिल्ली। आखिरकार तीन साल के बाद कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की सरकार गिर गई. इस पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि हमनें कश्मीर के भविष्य का फैसला पहले ही कर दिया था. इतना ही नहीं कांग्रेस व अन्य नेताओं ने कश्मीर में विफल सरकार की गलती को गिनाया और कहा कि कश्मीर की बर्बादी के लिए बीजेपी जिम्मेदार है.

कश्मीर में जो हुआ बिलकुल ठीक हुआ…

सरकार गिरने के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने अपने बयान में कहा, ‘बीजेपी और पीडीपी ने जम्मू कश्मीर को बर्बाद कर दिया है. 3 साल की बीजेपी और पीडीपी की सरकार में जम्मू कश्मीर में सबसे ज्यादा जवान शहीद हुए हैं. बीजेपी और पीडीपी दोनों को ही सरकार चलाने का अनुभव नहीं था और जम्मू कश्मीर में अब जो हुआ वो बिलकुल ठीक हुआ’. कांग्रेस की ओर से कुल मिलाकर दोनों ही सरकार को विफल बताया. इस दौरान पीडीपी का बचाव करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पीडीपी को जमकर बदनाम कर रही है.

हालही में राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी व सेना जवान औरंगजेब की आतंकियों द्वारा हत्या के बाद सरकार घिर गई थी. इससे कश्मीर के हालात और भी बिगड़ चुके थे. पीडीपी नेता नईम अख्तर ने महबूबा के इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा कि उन्हें भी कुछ ज्यादा समझ नहीं आ रहा है. पार्टी बैठक में ही बात होगी कि आगे क्या करना है. जबकि कांग्रेस ने पीडीपी के साथ गठबंधन करने से साफ तौर पर मना कर दिया है.

जबकि कश्मीर में हुई बदहाल व्यवस्था के लिए बीजेपी ने पीडीपी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. बीजेपी का कहना है कि कश्मीर के हित को देखते हुए पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया है. हमें ऐसी पार्टी के साथ सरकार नहीं बनानी. फिलहाल हम कश्मीर में राज्यपाल शासन की मांग करते हैं. फिलहाल अब यह देखना है कि इस्तीफा देने के बाद कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती क्या कहती हैं.

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नीतीश कुमार ने गठबंधन पर कही ऐसी बात

पटना। उधर जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन वाली सरकार गिर है तो वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है. इससे बिहार में गठबंधन को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जाने लगे हैं. वैसे भी बीजेपी को उप चुनावों में मिली हार के बाद जदयू ने नाराजगी जाहिर की थी.

सांप्रदायिकता से समझौता करना एजेंडे में नहीं…

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वो अपने एजेंडे पर काम करते रहेंगे. लेकिन अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता से समझौता करना उनके एजेंडे में नहीं है. उनका एक एजेंडा है, न्याय के साथ विकास का. उन्होंने कहा कि गठबंधन काम करने के लिए होता है. बहुत लोगों को गठबंधन के अंदर झंझट हो जाता है, परेशानी हो जाती है. उसको छोड़िए, काम देखिए. इससे पहले भी बाढ़ राहत राशि व प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर नीतीश कुमार ने केंद्र से नाराजगी जाहिर की थी.

वैसे तो बिहार की सियासत में गठबंधन की राजनीति को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. इससे पता चल रहा है कि बिहार की गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है. सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा, जदयू, रासलोपा और लोजपा में बयानबाजी और एक-दूसरे पर छींटाकशी जारी है. इसको लेकर हर कोई अलग-अलग बयान दे रहा है. हालही में अमित शाह के लंच पार्टी में जाने से उपेंद्र कुशवाहा ने साफ मना कर शामिल नहीं हुए थे.

नरेंद्र मोदी या नीतीश कुमार

इसके अलावा भाजपा जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को बड़ा बता रही है वहीं जदयू नीतीश कुमार के चेहरे पर ही चुनाव लड़ना चाहती है. अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में गठबंधन पर बड़ी बात कही है. इन तमाम बातों से लग रहा है कि बिहार की गठबंधन किसी भी करवट बैठ सकती है.

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कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन फेल, सरकार गिरी

नई दिल्ली। कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन वाली सरकार गिर गई है. जम्मू-कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपित शासन लगाने की बात सामने आई है. हालांकि इसको लेकर महबूबा मुफ्ती ने गुजारिश की है. सरकार गिरने के बाद पीडीपी की ओर से कहा जा रहा है कि बीजेपी की नाकामी की वजह से कश्मीर में हालात बिगड़ रहे थे. इसको लेकर दोनों ही दलों में खटर-पटर चल रही थी.

दुसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज मंगलवार को दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का फैसला किया.

कुछ ही देर में महबूबा का इस्तीफा…

गठबंधन टूटने के बाद आज 19 जून की शाम को जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने पद से इस्तीफा देंगी. BJP कोटे के सभी मंत्रियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है. बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को सौंप दी है. फैसले के बाद बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि हमनें गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर ये फैसला किया है.

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हिन्दू आतंकवाद पर दिग्विजय सिंह के बयान से बवाल

भोपाल। हिंदू आंतकवाद व आरएसएस को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह हमेशा से विवादित बयान देते आए हैं. एक बार फिर उन्होंने इतिहास का आईना दिखाते हुए कहा कि अबतक के हिंदू आंतकी आरएसएस से जुड़े हुए थे. इससे संघ की असलीयत का पता चलता है.

इतिहास का पन्ना पलटकर देखें…

दिग्विजय सिंह ने बेखौफ अंदाज में झाबुआ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हिंदू आंतकी व संघ का कनेक्शन समझाया और साथ ही कहा कि अभी तक जितने भी हिंदू आतंकी सामने आए हैं, सब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं. जितने भी हिंदू धर्म वाले आतंकवादी पकड़े गए हैं सब संघ के कार्यकर्ता रहे हैं. इसके लिए इतिहास का पन्ना पलटकर देख सकते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘महात्मा गांधी की हत्या करने वाला नाथूराम गोड्से भी कभी संघ से जुड़ा था. यह विचारधारा घृणा फैलाती है. घृणा हिंसा को बढ़ावा देती है और हिंसा फिर आतंकवाद की ओर ले जाती है.” दरअसल में अमेरिकी एजेंसी सीआईए द्वारा बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद को उग्रवादी संगठन और आरएसएस को राष्ट्रवादी संगठन बताए जाने के बारे में एक सवाल पर दिग्विजय ने यह बात कही.

हाल में दिग्विजय सिंह ने संघ आतंकवाद व हिंदू आतंकवाद पर बात करते हुए कहा था कि वह हमेशा ‘संघी आतंकवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं न कि हिंदू आतंकवाद के बारे में.’ जान लें कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का हाथ होने के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मानहानि का मुकदमा झेल रहे हैं. 12 जून को ही वे इस मामले में नागपुर की एक कोर्ट में पेश हुए थे. इस बयान के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है. हालांकि इसको लेकर संघ या बीजेपी की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है.

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बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा पर लगाए बड़े आरोप

लखनऊ। एक बार फिर मायावती ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए बीजेपी को जनविरोधी करार दिया है. इनका कहना है कि भाजपा देश की आम जनता का अपमान कर रही है. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा देश की सवा सौ करोड़ ग़रीब, मज़दूर, किसान व मेहनतकश आमजनता के दुःख-तकलीफ व महँगाई की जबर्दस्त परेशानी एवं उनकी गरीबी की घोर अनदेखी करते हुये पेट्रोल-डीजल पर शुल्क कम नहीं करने को ‘‘जनविरोधी‘‘ नीति बताया.

मंगलवार को भाजपा को घेरते हुए कहा कि केन्द्र सरकार में केवल अपना ख़ज़ाना भरने के साथ-साथ धन्नासेठों की तिजोरी भरने की ही चिन्ता लगी रहती है. पेट्रोल व डीजल पर अर्न्तराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमत का बोझ सालो-साल तक अगर गरीब जनता के ऊपर थोपा जाता है तो उसकी क़ीमत कम होने पर उसका वाजिब लाभ भी आमजनता को क्यों नहीं मिलना चाहिये?

इसके अलावा कहा कि बीजेपी की ओर से चलाए जा रहे ‘‘सम्पर्क फार समर्थक‘‘ कार्यक्रम के तहत केवल नामी शख्सियतों से ही मिल-मिलाकर ’’फोटोआप’’ कराना देश के गाँव, देहात, गरीब, किसान, मजदूर व आम मेहनतकश लोगों का अपमान नहीं तो और क्या है जबकि वे लोग ही असली भारत है जिसकी बीजेपी सरकारों को चिन्ता नहीं है.

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कैंसर से जूझ रहे इरफान का लंदन से आया खत, पढ़कर रो पड़ेंगे

नई दिल्ली। बीमारी के गिरफ्त में कब कौन चला जाए, कोई नहीं जानता. अच्छी-खासी जिंदगी जी रहे सिने स्टार इरफान खान की जिंदगी को कैंसर की बीमारी ने तोड़ डाला है. बेइंतहा दर्द व डर के साए में जिंदगी जी रहे इरफान ने अपने फैंस को एक खत लिखा है. ये खत उनकी बेचैनी व दर्द को बयां कर रहा है. इसे पढ़कर आंख में आंसू छलक आएंगे.

मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए…

आपको तो पता हीं होगा कि अपनी बीमारी के इलाज के लिए इरफान खान लंदन गए हैं. इरफान खान के खत के चलते वो एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे इरफान खान बीमारी के दौरान भी काम करने की इच्छा ने एक ‘कारवां’ शुरू किया है. जान लें कि इरफान की कारवां फिल्म 03 अगस्त को रिलीज होगी. इरफान ने ये खत वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज को भेजा है. उन्होंने इरफान का ये इमोशनल खत अपने ब्लॉग चवन्नी चैप पर शेयर किया है.

अजय अपने ब्लॉग में लिखते हैं कि, ‘कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं. यह शब्द मैंने पहली बार सुना था. जब मैंने इसके बारे में सर्च की तो पाया कि इस पर ज्यादा शोध नहीं हुए हैं. इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी मौजूद नहीं थी. यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है.

अभी तक मैं तेज रफ्तार वाली ट्रेन में सफर कर रहा था. मेरे कुछ सपने थे, कुछ योजनाएं थीं, कुछ इच्छाएं थीं, कोई लक्ष्य था. लेकिन अचानक ही किसी ने मुझे हिलाकर रख दिया मैंने पीछे देखा तो वो टीसी था. उसने कहा, आपका स्टेशन आ गया है कृपया नीचे उतर जाइए. मैं कन्फ्यूज हो गया. मैंने कहा नहीं अभी मेरी मंजिल नहीं आई है. उसने कहा- नहीं आपको अगले किसी भी स्टॉप पर उतरना होगा.’

‘इस डर और दर्द के बीच मैं अपने बेटे से कहता हूं, ‘मैं किसी भी हालत में ठीक होना चाहता हूं. मुझे अपने पैरों पर वापस खड़े होना है. मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए. कुछ हफ्तों के बाद मैं एक अस्पताल में भर्ती हो गया. बेइंतहा दर्द हो रहा है. यह तो मालूम था कि दर्द होगा, लेकिन ऐसा दर्द… अब दर्द की तीव्रता समझ में आ रही है…कुछ भी काम नहीं कर रहा है…. पूरा खत यहां पढें

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प्राचार्य की सुविधा के लिए दुसरे जिला में शिफ्ट हुई ITI, 70Km दूर जाते हैं स्टूडेंट्स!

प्रतीकात्मक फोटो

पटना। बिहार के शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को बताते हुए एक और मसला सामने आया है. स्टूडेंट्स को पढ़ाई करने के लिए 70 किमी दूर पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ता है. समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल का एकमात्र सरकारी आईटीआई कॉलेज में पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को करीब सत्तर किलोमीटर पढाई के लिए जाना पड़ता है.

दिव्यांग छात्र-छात्राओं…

जानकारी के अनुसार आईटीआई की स्थापना 2016 में हुआ था. स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षाओं के कारण रोसड़ा से 70 किलोमीटर दूर दरभंगा शहर में कॉलेज को शिफ्ट कर दिया गया. जबतक कॉलेज के लिए अपना भवन नहीं बन जाता है तब तक के लिए शहर के ही किसी सरकारी विद्यालय या महाविद्यालय में कॉलेज को शिफ्ट किया जाना चाहिए, लेकिन प्राचार्य अपने सुविधा को देखते हुए दरभंगा शहर में शिफ्ट करा लिया. जिससे कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन 70 किलोमीटर दूरी तय करने के लिए छह घंटा आने-जाने के लिए देना पड़ता है. इसके अलावा आर्थिक व शारिरिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है. खासकर दिव्यांग छात्र-छात्राओं को जाने-आने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

नहीं सुन रहे अधिकारी

इस समस्या से निजात पाने के लिए छात्रों ने इस समस्या को लेकर कई बार जिले के उच्चाधिकारियों से अपनी समस्या बताई. लेकिन आजतक कोई नहीं सुना. इसके साथ-साथ जनप्रतिनिधियों से भी जाकर मिला, परन्तु अबतक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है. इस बात को जानने के बाद समाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार सुमन ने जानकारी को फेसबुक वॉल पर शेयर किया. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निवेदन किया है कि इस समस्या का निदान निकालें.

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मासूम बच्ची के हाथों चली गोली, मां घायल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एक घटना घटी है. इस घटना में मां को गोली लग गई. गोली उसकी छोटी बच्ची के हाथ से चली. इसके बाद आसपास अफरा-तफरी मच गई. आनन-फानन में खून से लथपथ मां को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक एक मां ने खिलौना समझ कर अपनी बेटी को वह भरी हुई पिस्तौल थमा दी जो उसे अपने घर के बाहर एक बागान में मिली थी. बच्ची खेलते-खेलते ट्रिगर दबा दी और गोली से उसकी मां घायल हो गई. यह घटना राज्य के हुगली जिले के खानाकूल की है. गंभीर रूप से घायल काकोली जाना नामक उक्त महिला को आरामबाग अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

पुलिस की जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार को हुई. पुलिस ने बताया कि महिला को बागान में पिस्तौल मिली थी. उसने खेलने के लिए पिस्तौल अपनी बेटी को दे दी फिर घटना घटी. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वह पिस्तौल बागान में कहां से पहुंची.

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भाजपा को जीताने के लिए मैदान में उतरा संघ

नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत से जीताने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बड़ी भूमिका मानी जाती है. 2019 के चुनाव में जब भाजपा का सत्ता में वापसी करना आसान नहीं दिख रहा है, संघ ने एक बार फिर कमान संभाल ली है. भाजपा की जीत को पक्का करने के लिए संघ मैदान में उतर गया है. खास बात यह है कि इस रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए संघ अपने 100 प्रचारकों को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं. ये प्रचारक जमीन पर भाजपा की कमान संभालेंगे. और इसके लिए ये प्रचारक बकायदा भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

खबर है कि लोकसभा चुनावों की रणनीति बनाने के लिए हरियाणा के सूरजकुंड में संघ और भाजपा की 14 से 17 जून तक बैठक चली, जिसमें संयुक्त रूप से चुनाव में काम करने की रणनीति बनी. इसी दौरान संघ के 100 प्रचारकों को बीजेपी में शामिल करने का फैसला लिया गया. ये प्रचारक अभी तक विभिन्न राज्यों में बीजेपी के प्रदेश संगठन मंत्री या पार्टी के किसी न किसी संगठन से जुड़े हुए थे.

 इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशीडॉ. कृष्ण गोपाल और सुरेश सोनी शामिल हुए. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहसंगठन महासचिव रामलाल और सह संगठन महासचिव वी सतीश भी बैठक में मौजूद थे.

जिन सौ प्रचारकों को भाजपा में शामिल किया गया है, उनकी कई स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका होगी. ये 2019 में टिकटों को तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये पार्टी के सभी सांसदों के कामों और लोकप्रियता की समीक्षा करेंगे, जिसके आधार पर टिकट दिए जाएंगे. इनसे अगले एक महीने के भीतर ही रिपोर्ट देने को कहा गया है.

असल में सूरजकुंड की बैठक के दौरान ही आरएसएस और बीजेपी के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर डिनर दिया था. इसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहगृहमंत्री राजनाथ सिंहबीजेपी के संगठन मंत्री रामलाल और अन्य कई प्रमुख संघ नेता मौजूद रहे. संघ के इस साथ का भाजपा को कितना साथ मिलेगा यह आगामी लोकसभा चुनाव के नतीजे बताएंगे.

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हरामी व्यवस्थाः दलित दुल्हा के घोड़ी चढ़ने पर मचा बवाल, पुलिस ने निकलवाई बारात

गुजरात। दलित युवक के घोड़ी चढ़ने पर और नया विवाद सामने आया है. गांधीनगर में सवर्णों द्वारा दलित दुल्हे की बारात निकलने से रोक दी गई. सवर्णों ने आपत्ति जताई कि दलित दुल्हा कैसे घोड़ी पर चढकर बारात निकालेगा. इस बात को लेकर शादी के जश्न के माहोल पर बवाल मचा.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना 17 जून को सामने आई. खबरों के अनुसार पारसा गांव में क्षत्रिय समुदाय के लोगों ने रविवार को प्रशांत सोलंकी नामक दूल्हेय को घोड़ी पर चढ़ने से रोक दिया. इसके बाद फौरन पुलिस को इसकी जानकारी दी गई तब जाकर दलित दूल्हे की बारात निकली. इस मामले में पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ एट्रोसिटी, धमकी, मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है.

यह जान लें कि इस तरह का पहला मामला नहीं है. गुजरात में दलित अत्याचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इसको रोकने में पुलिस प्रशासन विफल दिख रही है. दो दिन पहले ही गुजरात में फैंसी कपड़े व मोजड़ी (जूती) पहने पर राजपूत युवाओं ने जमकर पिटा और उससे माफी मंगवाई. इससे पहले भी दलित युवक के घोड़ी चढने, मूंछ रखने, कपड़े पहनने, कुएं में नहाने को लेकर विवाद हो चुका है.

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जातिवाद के जहर में डूबा समाज और बाज़ार

(फोटो साभार : फेसबुक/Dalit Solidarity Network UK)

कुछ चीजों को तथाकथित ऊँची जात के लोगों ने अपना जातीय श्रेष्ठता दिखाने का बपौतीया अधिकार मान लिया है जैसे- मूँछ, सूट-बूट, जींस, सुनहरी मोजड़ी( जूती), सोने की मोटी सी चेन, गोरा रंग, घोड़े की सवारी, सिंह जैसे सरनेम, अच्छी कद-काठी आदि-आदि.

इसलिए जब कोई दलित इन चीजों में दिखता है तो इन सवर्णों के अंदर का जातिवाद ज़ोर मारने लगता है. इन दिनों मार्केट में जातीय दम्भ दिखाने वाले टीशर्ट-लोगों आदि भी खूब चल पड़े हैं. जातिवाद का ज़हर अचानक से मार्केट का फ़ैशन बन गया है. हालाँकि मार्केट वही बेचता है जो बिकता है, और दिनों जाति का दंभ भी बिक रहा है.

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद जाति घृणा से भरे लोग अपने ऊँचे होने का बोध कराने के लिए अब खुले रूप में सामने आने लगें हैं.

नतीज़न ये दलितों के साथ मार-पीट, गाली-गलौज, हिंसा, हत्या, सामूहिक अपमान, परेड निकालना, उन्हें नंगा करना, जैसे कृत्यों पर उतर आते हैं. मुस्लिमों( पसमांदाओं) के साथ होने वाली मॉब लिंचिंग भी इसी प्रेक्टिसेस का हिस्सा है. ऐसी कोई भी अमानवीय घटना को ये अकेले नहीं बल्कि समूह में अंजाम देते हैं. क्योंकि इन्हें पता है कि अकेले कोई हरकत करेंगे तो बराबर की टक्कर मिलेगी.

दूसरी बात इस तरह की सामूहिक मारपीट और अपमान की घटना एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समुदाय को संबोधित होती है. इसलिए एक बड़े जनसमूह को डराने के लिए ये सामूहिक रूप से घटना को अंजाम देते हैं. कारण अलग-अलग गिना देंगे पर इन सब घटनाओं का एक ही सबब है सवर्ण होने, जात के ऊंचा होने की घोषणा और बहुजनों को ग़ुलाम बनाने के लिए व्यापक स्तर पर संबोधित करना. कई बार ये पूर्णतः नियोजित या प्रायोजित भी देखी गई हैं.

-दीपाली तायड़े (लेखिका पत्रकार हैं.)

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ऑनलाइन टेस्ट देकर एयर फोर्स में पाएं जॉब

नई दिल्ली। एयर फोर्स में कई पदों पर वैकेंसी निकली है. भारतीय वायुसेना ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए नोटीफिकेशन जारी किया है. सबसे अच्छी बात यह है कि उम्मीदवारों की भर्ती एयर फोर्स कॉमन एडमिशन ऑनलाइन टेस्ट (एफसीएटी) के जरिये होगी. वायुसेना में नौकरी करने वाले ऑनलाइन फॉर्म भर कर नौकरी के आवेदन कर सकते हैं. इन पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2018 है.

यहां हम आपको कुछ जरूरी जानकारी दे रहे हैं. इसके हिसाब से आप चयन कर आगे का काम कर पाएंगे. साथ ही अलग सूचना माध्यमों से भी इसकी जानकारी ले सकते हैं. आवेदन करने के लिए इन जानकारियों को पढ़ लें.

कुल पदों की संख्या: 182

विभागः फ्लाइंग ब्रांच

पद: 42 पोस्ट

विभागः ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल)

AE (L): परमानेंट कमीशन (PC): 22, SSC: 30 पद

AE(M): PC-10, SSC: 14

विभागः नॉन टेक्निकल  (टेक्निकल)

एडमिन ऑफिसर: PC: 8, SSC-12 पद

लॉजिस्टिक्स: PC: 01, SSC- 04 पद

एकाउंट्स: PC: 3, SSC- 05 पद

एजुकेशन: PC: 3, SSC- 4 पद

योग्यताः इन पदों के लिए उम्मीदवार के पास फिजिक्स और गणित से बैचलर डिग्री होनी चाहिए. साथ ही कम से कम 60 फीसदी अंक होने चाहिए.

उम्र सीमा: फ्लाइंग ब्रांच के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 20 साल और अधिकतम आयु 24 साल निर्धारित की गई है. जबकि, ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल/नॉन टेक्निकल) के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 20 साल और अधिकतम आयु 26 साल होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का चयन AFCAT एग्जाम में प्रदर्शन के आधार पर होगा. शॉर्लिस्टेड उम्मीदवारों को ट्रेनिंग कोर्स कराया जाएगा, जिसके पूरे होने के बाद उम्मीदवारों की पोस्टिंग भारतीय वायु सेना में कमीशंड अधिकारी के तौर पर की जाएगी. ऑफिशियल वेबसाइट  www.afcat.cdac.in पर वैकेंसी के संबंध में विस्‍तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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बाबासाहेब के नाम में ‘महाराज’ जोड़ने पर रजिस्ट्रार पर कार्रवाई

Baba Saheb Ambedkarऔरंगाबाद। बाबासाहेब के नाम में ‘महाराज’ जोड़ना रजिस्ट्रार को भारी पड़ा. प्राप्त जानकारी के मुताबिक 16 जून को महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय की कार्यवाहक रजिस्ट्रार साधना पांडे को डॉ. बीआर आंबेडकर के नाम के साथ ‘महाराज’ जोड़ने पर निलंबित कर दिया गया. विश्वविद्यालय के कुलपति बी चोपड़े ने विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्यों की बैठक के दौरान पांडे के निलंबन की घोषणा की.

जान लें कि प्रबंधन परिषद का चुनाव कराने के लिए बैठक का आयोजन किया गया था. भाषा की खबर के मुताबिक इस बैठक में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पांडे ने आंबेडकर के नाम के साथ ‘महाराज’ जोड़ दिया जिससे बैठक में हंगामा मच गया. उनके निलंबन करने पर ही मामला शांत हुआ. सीनेट के सदस्यों ने आरोप लगाया कि आंबेडकर के नाम के साथ गलत इरादे से यह शब्द जोड़ा गया. उन्होंने पांडे पर दक्षिणपंथी विचारधारा के अनुसरण का भी आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की. कुलपति ने पांडे के निलंबन की घोषणा की और उन्हें बैठक से चले जाने को कहा.

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