आरक्षण बचाओ पैदल मार्चः आरक्षण मांगों को जल्द पूरा करे सरकार

लखनऊ। ‘‘आरक्षण बचाओ पैदल मार्च” में दलित नेताओं व समर्थकों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को रखा. साथ ही कहा कि आरक्षित वर्ग के अधिकारों के आधार पर फायदा दिया जाए नहीं तो एक बार फिर लाखों की तदाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरेंगे. इस दौरान हजारों की संख्या में आरक्षण समर्थकों ने योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पदोन्नति बिल पास कराने व आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को 15-11-1997 से बहाल कराने की मांग उठाई. साथ ही कहा कि आरक्षण समर्थकों का ऐलान सरकार ने शीघ्र न किया न्याय तो उप्र में लाखों की संख्या में आरक्षण समर्थक विशाल रैली करेंगे. इसके अलावा पिछड़े वर्गों के लिये पदोन्नति में आरक्षण की वर्ष 1978 में लागू व्यवस्था पुनः बहाल करने की मांग को रखा. इस दौरान संघर्ष समिति ने पिछड़े वर्गों के लिये प्रदेश में वर्ष 1978 में लागू पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को पुनः बहाल कराने की मांग उठायी.

लोक सभा में लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल पास कराने व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को 15-11-1997 से बहाल कराने को लेकर आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में आज एक ‘‘विशाल आरक्षण बचाओ पैदल मार्च‘‘ डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मारक गोमती नगर से प्रातः 6 बजे प्रारम्भ हुआ. जिसमें हजारों की संख्या में शामिल आरक्षण समर्थक कार्मिकों के इस पैदल मार्च को उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति खेमकरन जी ने झण्डी दिखाकर रवाना किया.

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डॉ. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, रीना रजक, पीएम प्रभाकर, प्रेम चन्द्र, बनी सिंह, अशोक सोनकर, लेखराम, दिनेश कुमार, अजय चैधरी, डॉ. राजकरन, राम प्रकाश मौर्या, रामेन्द्र कुमार, योगेन्द्र रावत, सुशील कुमार, चमन लाल, प्रमोद कठेरिया, प्रभूशंकर, श्रीनिवास, सुखेन्द्र प्रताप, प्रतोष कुमार, बीना दयाल, राकेश पुष्कर, मंजू वर्मा, अनीता, अंजली, दिग्विजय सिंह, सुधा गौतम,सुनील कनौजिया, रंजीत कुमार, अरविन्द फोर्सवाल, मयाराम गौतम, बृहद्रथ वर्मा, राजेश कुमार, अरूण कुमार, रमेश चन्द्र ने आरक्षण को बचाने के लिए अपनी बात रखी.

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राहुल गांधी का बिहार के वरिष्ठ नेताओं संग लंच

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नई दिल्ली। राहुल गांधी बिहार पर नजर बनाए हुए हैं. राहुल गांधी के साथ बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं संग लंच पर बुलाया. साथ ही आगामी लोकसभा में पार्टी को जीत दिलाने को लेकर रणनीति बताई. इसको लेकर राजनीति में चर्चा जोरो पर चल रही है.

राजनीति पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता शक्तिसिंह गोहिल ने बिहार के सभी वरिष्‍ठ नेताओं को लंच पर बुलाया है. अभी राहुल गांधी के आवास पर नेताओं की बैठक हुई है. इसके बाद सभी नेताओं को गुजरात भवन बुलाया गया है. पार्टी की ओर से इसे आपस में समरसता बढ़ाने के लिए लंच बताया है. लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि लंच में बिहार की राजनीति पर भी चर्चा हो सकती है.

बता दें कि सुबह 10 बजे से बिहार कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ बैठक चली. बैठक के बाद करीब 12 बजे दिन में सभी पदाधिकारियों की राहुल गांधी से वन टू वन मुलाकात हुई. सूत्रों के अनुसार वन टू वन बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों से बिहार कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर राय मशविरा किया. बताया जाता है कि बैठक में लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस की रणनीति को भेदने के लिए विपक्षी ताक लगाए बैठे हैं.

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रेप आरोपी दाती महाराज व आश्रम की 600 लड़कियां भी गायब!

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नई दिल्ली। मशहूर शनिधाम वाले बाबा दाती महाराज उर्फ मदनलाल रेप का आरोप लगने पर छिपते फिर रहा है. क्राइम ब्रांच की टीम आश्रम जाकर तलाशी ली लेकिन वहां पर भी नहीं मिला. इतना ही पुलिस का कहना है कि आश्रम से करीब 600 लड़कियां भी गायब हैं. पुलिस ने आश्रम से सीसीटीवी फूटेज व कैसेट बरामद कर जांच के लिए भेजा है.

दिल्ली पुलिस दुष्कर्म मामले के आरोपी शनिधाम के संस्थापक दाती महाराज के काफी करीब पहुंचकर भी काफी दूर है. पुलिस ने उसे सोमवार 11 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन 1 बजे के बाद भी वह पूछताछ में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार से ही वह पाली, राजस्थान स्थित आश्रम से गायब है. तब से ही उसका कोई पता नहीं है. अपराध शाखा के अधिकारी ने बताया कि दाती महाराज को पूछताछ में शामिल होने के लिए शुक्रवार को ही नोटिस जारी किया गया था. छतरपुर स्थित शनिधाम में भी नोटिस भेजा गया था. अगर वह तफ्तीश में शामिल नहीं होता है तो उसे दूसरा नोटिस भेजा जाएगा.

अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आश्रम में रहकर करीब 700 लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं. सभी का खर्च दाती महाराज उठाता है. पुलिस को अधिकांश कमरे खाली मिले. अब सवाल यह है कि किसी डर के चलते दाती महाराज ने इन लड़कियों को कहीं भेज दिया है या वे छुट्टियां होने के कारण अपने घर चली गई हैं. पुलिस आश्रम के चप्पे चप्पे की तलाशी कर रही है.

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डीजल के बढ़ते दाम के खिलाफ हड़ताल पर नब्बे लाख ट्रक

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नई दिल्ली। डीजल के बढ़ते दाम के खिलाफ ट्रक मालिकों ने हड़ताल आरंभ कर दिया है. पूरे देश भर के ट्रक चालकों व मालिकों ने मिलकर डीजल के दाम घटाने को लेकर हड़ताल में मांग की है. सोमवार से नब्बे लाख ट्रक हड़ताल पर हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि हड़ताल काफी लंबी चलेगी जिससे आम लोगों को दिक्कत का सामना कर पड़ सकता है.

जान लें कि किसानों की दस दिनों की हड़ताल के बाद ही देशव्यापी ट्रकों की हड़ताल शुरू हुई है. इससे एक राज्य से दुसरे राज्य आने-जाने वाले सामान नहीं पहुंच पाएंगे. इससे सबसे ज्यादा परेशानी का सामना आम लोगों को करना पड़ेगा. पेट्रोल-डीजलों के दाम ने जिस तरह बीते दिनों उछाल लगाई है ट्रक चालक और मालिक उससे खफा हैं यही कारण है कि ये हड़ताल बुलाई गई है. इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का दाम बढ़ने से भी ट्रक वाले नाराज़ हैं.

ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ गुड्स व्हीकल्स ऑनर्स के अनुसार, डीजल और पेट्रोल के दाम से काफी भारी नुकसान हो रहा है. यही कारण है कि करीब 90 लाख ट्रक हड़ताल पर जा रहे हैं. ये करीब देश भर के 60 फीसदी ट्रक हैं. देश के कई ट्रक संगठनों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे के अंदर लाने की बात की है.

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केजरीवाल ऐसे कैसे कर सकते हैं हड़तालः हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सात दिन के हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है. दिल्ली में राज्य सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रही खींचतान को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को कहा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये धरना है या हड़ताल और क्या इसकी कोई अनुमति ली गई या खुद ही तय कर लिया गया.

इस मुद्दे पर कोर्ट ने पूछा कि अगर ये खुद व्यक्तिगत रूप से तय किया गया फैसला है तो ये एलजी के घर के बाहर होना चाहिए था. क्या एलजी के घर के अन्दर ये धरना करने के लिए इजाजत ली गई है? हाईकोर्ट ने कहा कि आप कैसे किसी के घर या दफ्तर में जाकर हड़ताल पर बैठ सकते हैं. उन्होंने सीधा सवाल किया कि जैसे ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठती है, क्या ये वैसी ही हड़ताल है. धरने पर बैठने का फ़ैसला कैबिनेट का है या ये व्यक्तिगत फ़ैसला है. कोर्ट की ओर से कहा गया है कि इसका जल्द से जल्द कोई समाधान ढूंढा जाना चाहिए.

जान लें कि एलजी से ना मिल पाने पर रविवार को आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास को घेरने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग से आगे नहीं बढ़ने दिया. साथ ही इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खबर की पुष्टि की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “सत्येंद्र जैन को खराब स्वास्थ्य के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है.” अरविंद केजरीवाल के इस आंदोलन को अब देश के कई अन्य नेताओं का समर्थन मिलना शुरू हो गया है. रविवार को नीति आयोग की बैठक के लिए नई दिल्ली पहुंचे कर्नाटक सीएम एच.डी. कुमारस्वामी, आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू, केरल सीएम विजयन और बंगाल की ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बारे में बात भी की.

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क्रिकेटर रोहित शर्मा ने फीफा में लहराया तिरंगा

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टीम इंडिया के ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा इन दिनों अपनी पत्नी रितिका सजदेह के साथ छुट्टियां मना रहे हैं। इस वक्त वह फीफा वर्ल्ड कप देखने के लिए रूस गए हुए हैं। दोनों ने गुरुवार को फीफा वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी और उद्घाटन मैच का आनंद उठाए। रोहित ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक फोटो शेयर की है। इस फोटो में रोहित तिरंगा थामे खड़े हैं। उन्होंने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, ‘हमें अपने तिरंगे को हर जगह ऊंचा रखना है।’

गौरतलब है कि फुटबॉल का महाकुंभ फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण की शुरुआत 14 जून से हो चुका है। उद्घाटन मुकाबला मेजबान रूस और साउदी अरब के बीच खेला गया, जिसमें साउदी अरब को रूस के हाथों 0-5 से हार झेलनी पड़ी। 14 जून से 15 जुलाई तक चलने वाले इस महाकुंभ में 32 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिनके बीच 64 मुकाबले खेले जाएंगे। फीफा विश्व कप में भारत भले ही नहीं खेल रहा हो, लेकिन यहां के लोगों में भी अब फुटबॉल के प्रति वही जोश, जुनून और दीवानगी जगी है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक टेस्ट का हिस्सा ‘हिटमैन’ नहीं थे। टीम इंडिया ने इस ऐतिहासिक टेस्ट में अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रन के विशाल अंतर से हराया। टीम इंडिया को इस महीने के अंत में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी है। इस सीरीज के साथ रोहित क्रिकेट मैदान पर वापसी करेंगे। इसके अलावा टीम इंडिया टीम का इंग्लैंड दौरा 3 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ 3 वन-डे, 5 टेस्ट और 3 टी-20 मैच खेलना है।

बता दें कि टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी बखूबी जानते हैं कि भारत की टीम इस वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले रही है, लेकिन उनका मानना है कि अपने देश का तिरंगा हर जगह लहराते रहना चाहिए। इसके अलावा रोहित फीफा वर्ल्ड कप में स्पेन का जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। स्पेन और पुर्तगाल के बीच शुक्रवार को खेला गया मैच 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ।

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मध्यप्रदेश में बसपा ने छोड़ा कांग्रेस का साथ

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश चुनाव से पहले ही कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. बसपा के साथ मिलकर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की बात से बसपा ने नकार दिया है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से साफ तौर कहा गया है कि मध्यप्रदेश में साथ चुनाव लड़ने की बात अफवाह थी. रविवार को इस बात की पुष्टि करते हुए बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने कांग्रेस से गठबंधन की बात क झूठा बताया. साथ ही कहा कि कांग्रेस से गठबंधन के बारे में कोई भी फैसला नहीं लिया गया है.

कांग्रेस के साथ गठबंधन की पर नर्मदा प्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस गठबंधन वाली बात तो हमारी सुप्रीमो की ओर से कभी नहीं कहा गया. प्रदेश में किससे गठबंधन करना है, इसका फैसला बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव से तीन माह पहले करेंगी. हालांकि दुसरी ओर उन्होंने दावा किया कि बसपा सभी 230 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. इन बयानों से कांग्रेस व बसपा की गठबंधन पर कोई संभावना नहीं दिख रही है. जानकारों का ऐसा कहना है कि इससे महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा सकता है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा की गठबंधन ने भी कांग्रेस को वहां अकेले चुनाव लड़ने को छोड़ दिया है.

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में, भाजपा को 44.88 फीसदी, कांग्रेस को 36.38 फीसदी जबकि बसपा को 6.29 प्रतिशत वोट मिले थे. 2013 के चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 165, कांग्रेस ने 58, बसपा ने 4 और 3 तीन सीटें अन्य ने जीतीं थी. इसको लेकर कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

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बिहार में विकास पर नीतीश और मोदी सरकार में ठनी

पटना। बिहार में नीतीश कुमार खुद को सुशासन बाबू के तौर पर पहचाना जाना पसंद करते हैं. तो वहीं पीएम मोदी ने अपनी छवी विकास पुरुष की गढ़ी है. फिलहाल बिहार में सुशासन बाबू और विकास पुरुष की पार्टी मिलकर सरकार भी चला रहे हैं. लेकिन बिहार के विकास को लेकर इन दोनों नेताओं में ठन गई है. प्रदेश में सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े मामले में दोनों आमने-सामने हैं.

नीतीश कुमार की सरकार ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान को झूठा करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में दो लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है. गडकरी के इस बयान पर बिहार पथ निर्माण विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में साफ किया गया कि बिहार में सिर्फ 54 हजार 700 करोड़ रुपये की ही सड़क परियोजना पर काम चल रहा है. इस परियोजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 के चुनाव के दौरान विशेष पैकेज के तौर पर की थी.

 बिहार सरकार ने केंद्रीय मंत्री गडकरी के उस आरोप को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़क निर्माण के लिए जमीन देने में राज्य सरकार देरी कर रही है. प्रेस रिलीज में कहा गया कि सिर्फ चार ऐसी परियोजानएं है, जिसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. बाकी सभी परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है.

मजेदार बात यह है कि बीजेपी कोटे के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है. पथ निर्माण विभाग के मुताबिक प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के अंतर्गत कुल 82 सड़क परियोजनाएं शामिल है, जिनकी अनुमानित लागत 54 हजार 700 करोड़ रुपये है. इनमें से 24 परियोजनाएं एनएचएआई के जिम्मे हैं, जबकि 58 योजनाओं का निर्माण बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा किया जाना है.

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गुजरात की राजधानी में मनुवादी गुंडों ने दिखाई नीचता

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अहमदाबाद। हर रोज देश के अलग-अलग हिस्सों से कमजोर वर्ग के लोगों पर उत्पीड़न की खबरें आना आम हो गया है. गुजरात में भी दलितों पर एक के बाद एक अत्याचार की खबरें आम हो गई है. इसी कड़ी में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के माणसा में 17 जून (रविवार) को कुछ मनुवादी गुंडों ने एक दूल्हे को जबरन इसलिए घोड़ी से उतार दिया क्योंकि वह समाज के कमजोर वर्ग से ताल्लुक रखता था.

घटना माणसा के पारसा गांव की है. रविवार को युवक की शादी थी, जिसमें उसके सगे-संबंधी पहुंचे थे. बारात धूमधाम से निकली, दूल्हा घोड़ी पर सवार था. लेकिन तभी गांव के कुछ मनुवादी गुंडों ने दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने पर आपत्ति जता दी और इसे अपना अपमान बताया. उन्होंने दूल्हे को जबरन घोड़ी से उतार दिया, जिससे बराती भड़क गए और पुलिस को घटना की सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और बीच-बचाव किया.

अच्छी बात यह रही की स्थानीय पुलिस ने तुरंत मामले को संभाला और बारात को पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के साथ रवाना कर दिया. गौरतलब है कि घटना के एक दिन पहले ही मेहसाणा में रजवाड़ी जूती पहनने पर एक अनुसूचित जाति के युवक की कथित ऊंची जाति के गुंडों ने बेरहमी से पिटाई की थी.

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गौरी लंकेश पर श्रीराम सेना प्रमुख का विवादित बयान

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बेंगलुरू। गौरी लंकेश की हत्या में शुरू से ही हिन्दूवादी संगठनों का नाम आता रहा है. तो हिन्दूवादी संगठन के लोग भी गौरी लंकेश को लेकर अपनी तल्खी अपने बयानों से सामने रखते रहे हैं. अब हिन्दूवादी संगठन श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने मृत पत्रकार गौरी लंकेश को लेकर एक विवाद बयान दिया है. प्रमोद मुतालिक ने पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की तुलना कुत्ते की मौत से कर डाली. श्रीराम सेना प्रमुख ने यह बयान कर्नाटक के बेंगलुरू में एक सभा के दौरान दी.

हर छोटी बड़ी बात पर ट्विट करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गौरी लंकेश की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. इसको लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई. सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने पीएम मोदी पर इसको लेकर सवाल भी उठाए थे. ऐसा ही सवाल सामने आने पर प्रमोद मुतालिक ने कहा, “महाराष्ट्र में दो और कर्नाटक में दो हत्याएं कांग्रेस के वक्त हुई हैं. लेकिन फिर भी कोई कांग्रेस की विफलताओं की बात नहीं कर रहा बल्कि इसकी जगह यह कहा जा रहा है कि पीएम मोदी इस पर शांत क्यों हैं? पीएम मोदी अपनी प्रतिक्रिया दें? क्या आप चाहते हैं कि पीएम मोदी हर कुत्ते की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया दें?”

इस बयान के सामने आने के बाद विवाद बढ़ता देख प्रमोद मुतालिक ने बाद में इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी कोई सीधी तुलना नहीं की है. मुतालिक ने अपनी सफाई में कहा कि राज्य में कांग्रेस की सत्ता है, लेकिन बुद्धिजीवी पीएम मोदी पर उंगली उठा रहे हैं. उनके संगठन का गौरी लंकेश से वैचारिक मतभेद था, ‘लेकिन हम इतने नीचे नहीं गिर सकते कि किसी की हत्या कर दें.

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एक साल में चार गुणा बढ़ी मैला ढोने वालों की संख्या

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नई दिल्ली। देश में मैला ढोने की प्रथा खत्म करने से जुड़ा पहला कानून 1993 आया था, इसके बाद 2013 में इससे संबंधित दूसरा कानून बना, जिसके मुताबिक नाले-नालियों और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए रोज़गार या ऐसे कामों के लिए लोगों की सेवाएं लेने पर प्रतिबंध है.

विभिन्न अदालतों द्वारा समय-समय पर मानवाधिकार और गरिमामय जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकार मैला ढोने (मैनुअल स्कैवेंजर) वाले लोगों को पहचानकर उनके पुनर्वास के लिए काम करे. लेकिन स्थिति यह है कि कानून और अदालती निर्देशों के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या बढ़ती जा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक अंतर-मंत्रालयी कार्यबल (इंटर-मिनिस्टीरियल टास्क फोर्स) द्वारा देश में मौजूद मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या का आंकड़ा जारी किया गया है. उनके मुताबिक देश के 12 राज्यों में 53, 236 लोग मैला ढोने के काम में लगे हुए हैं.

यह आंकड़ा साल 2017 में दर्ज पिछले आधिकारिक रिकॉर्ड का चार गुना है. उस समय यह संख्या 13,000बताई गयी थी.

हालांकि यह पूरे देश में काम कर रहे मैनुअल स्कैवेंजर का असली आंकड़ा नहीं है क्योंकि इसमें देश के 600से अधिक जिलों में से केवल 121 जिलों का आंकड़ा शामिल है.

द वायर द्वारा इस बारे में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया भी गया था कि सरकार द्वारा पहले फेज में देश में काम कर रहे मैनुअल स्कैवेंजर की गिनती की जा रही है.

पहले फेज में वो सफाईकर्मी शामिल थे जो रात के समय सूखे शौचालयों को साफ करते हैं. सरकार द्वारा दिए गये आंकड़े में सीवर और सेप्टिक टैंक साफ करने वाले सफाईकर्मियों का आंकड़ा नहीं है. इस टास्क फोर्स को 30 अप्रैल तक यह सर्वे देना था लेकिन इसमें देर हुई.

इसकी वजह राज्यों का असहयोग था क्योंकि वे यह बात नहीं स्वीकारना चाहते थे कि वे इस मुद्दे से निपटने और इससे जुड़े लोगों के पुनर्वास में नाकाम रहे हैं. इस सर्वे का संपूर्ण आंकड़ा इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है.

सरकार द्वारा नेशनल सर्वे में बताए 53 हज़ार मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या में से राज्यों ने 6,650 को ही आधिकारिक रूप से स्वीकारा है. राज्य सरकारों का यह रवैया स्पष्ट रूप से मैला ढोने की प्रथा और सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर उनकी उदासीनता दिखाता है.

सबसे ज्यादा 28,796 मैनुअल स्कैवेंजर उत्तर प्रदेश में रजिस्टर किए गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान,हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्य जहां राज्यों द्वारा शून्य से 100 तक की संख्या दर्ज की गयी थी, वहां यह आंकड़ा काफी बढ़ा है.

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ब्रांडेड कपड़ों पर संकट! अभी से कर लें खरीददारी

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नई दिल्ली। ब्रांडेड कपड़े खरीदना महंगा होने जा रहा है. इसको लेकर खबर आ गई है. ऐसे में यदि आप कपड़ा खरीदने का मूड बना रहे हैं तो जल्द ही कपड़े की खरदीदारी कर लें. बताया जा रहा है कि देश में विदेशी कंपनियों के ब्रांडेड कपड़े खरीदना और महंगा हो सकता है. कई कंपनियां अपने उत्पादों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी आने वाले दिनों में कर सकती हैं.

जानकारों का मानना है कि कपड़ों की डाई बनाने में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि हो गई है. इससे ब्रांड्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. जिन विदेशी ब्रांडों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ने की संभावना है उनमें ज़ारा, गैप, एचएंडएम, ओल्ड नेवी आदि हैं. यह कंपनियां भारत में ही अपने कपड़ों को तैयार कराती हैं और फिर पूरे विश्व में इनको बेचती हैं. दिल्ली-एनसीआर में ऐसी कंपनियों की तादाद सबसे ज्यादा है, जो विदेशी कंपनियों के लिए कपड़े तैयार करती हैं.

खबर यह भी आई है कि कंपनियों ने प्रोडक्शन बंद कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर में स्थित कई कंपनियों ने डाई के महंगा हो जाने के बाद अपना प्रोडक्शन बंद करने की बात भी बताई है. यह ऐसे समय में है, जब नए कलेक्शन के लिए पूरे विश्व से ऑर्डर आ रहे हैं. डाई की कीमतों में पिछले 15 दिनों में खासी वृद्धि देखने को मिली है.

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दौड़ते वक्त एडिशनल डीसीपी की मौत

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नई दिल्ली। एक सिपाही की दौड़ते-दौड़ते मृत्यु हो गई. इस घटना ने सबको हैरान कर दिया है. प्राप्त खबर के मुताबिक राजस्थान के जयपुर में पुलिस पदोन्नति परीक्षा में दौड़ते वक्त हेड कांस्टेबल सुशील कुमार शर्मा (45) की हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस घटना को लेकर जांच प्रक्रिया चल रही है.

जान लें कि सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा की दौड़ शहर के आमेर रोड पर आयोजित करवाई गई थी. घटना की जानकारी मिलते ही साथी पुलिसकर्मी समेत पुलिस कमिश्नर और अन्य उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए. जानकारी के मुताबिक हेड कांस्टेबल सुनील एडिशनल डीसीपी क्राइम एंव विजिलेंस के ऑफिस में तैनात थे. गुरुवार को एएसआई की लिखित परीक्षा का परिणाम भी आ चुका था. इसके बाद उनके ब्लड प्रेशर की जांच की गई और अगले दिन शुक्रवार सुबह शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया.

बताया जा रहा है कि इस परीक्षा में करीब 15 मिनट में 2 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी. जैसे ही कांस्टेबल सुनील दौड़ खत्म करने के बाद रुके तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई. अचानक उनके सीने में तेज दर्द हुआ और वह अचेत होकर गिर पड़े. शव का पोस्टमार्टम कर परिवार को सौंप दिया गया है.

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गौरी लंकेश के हत्यारे ने बताई हत्या की असली वजह

नई दिल्ली। आखिरकार कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्यारे ने गुनाह कबूल कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की टीम ने हत्यारे से सच उगलवा दिया. इस कहानी को सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी. जान लें कि गौरी लंकेश की हत्या के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने परशुराम वाघमारे को गिरफ्तार किया है. इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में एसआईटी ने आरोपी वाघमारे को उत्तर कर्नाटक के विजयपुरा जिले से गिरफ्तार किया था. एसआईटी का दावा है कि पूछताछ में वाघमारे ने लंकेश की हत्या की बात कबूल ली है. उसने जांच टीम को बहुत कुछ जानकारी दी है.

हत्यारे का कहना

एसआईटी की जानकारी के अनुसार वाघमारे को हत्या से पहले यह पता नहीं था कि वह किसे मार रहा है. और उसने 05 सितंबर, 2017 को बेंगलुरु के पॉश इलाके आरआर नगर में लंकेश को उनके घर के बाहर चार गोली मारकर हत्या कर दी.

महिला को नहीं मारना चाहिएः हत्यारा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान वाघमारे ने कहा, “मई 2017 में मुझे कहा गया कि अपने धर्म की रक्षा के लिए हमें किसी को मारना है. मैं इसके लिए राजी हो गया. तबतक मुझे यह पता नहीं था कि किसे मारना है. अब लगता है कि मुझे किसी महिला को नहीं मारना चाहिए था.” उसे 3 सितंबर को बेंगलुरु लाया गया. उसने बेलगावी में एयरगन चलाने की ट्रेनिंग ली थी.

वाघमारे ने कहा, “सबसे पहले मुझे एक घर में ले जाया गया. कुछ देर बाद एक बाइक सवार आया और मुझे वह घर दिखाने ले गया जहां मुझे किसी को मारना था. अगले दिन बाइक सवार मुझे बेंगलुरु के किसी और घर में ले गया. एक दूसरा शख्स मुझे बाइक से आरआर नगर के एक मकान में छोड़ गया. मुझे गौरी लंकेश को आज-आज में मारने की बात कही गई लेकिन लंकेश उस दिन घर से नहीं निकलीं.”

वाघमारे ने आगे बताया, “5 सितंबर को शाम 04 बजे मुझे बंदूक दी गई. शाम को ऑफिस से लौटते वक्त लंकेश कार का दरवाजा खोलकर जैसे ही बाहर निकलीं, मैंने उनपर चार गोलियां दाग दीं. मैं और बाइक सवार अपने रूम पर लौटे और उसी रात शहर छोड़कर निकल गए.

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मजिस्ट्रेट की शादी रूकवाने महिला ने दायर की याचिका

crime against womanनई दिल्ली। मजिस्ट्रेट की शादी की बात पता चलते ही महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. प्राप्त खबरों के मुताबिक मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के मजिस्ट्रेट के खिलाफ एक महिला ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में शिकायतकर्ता महिला ने मजिस्ट्रेट की शादी पर रोक लगाने के लिए कहा है. हालांकि इसको लेकर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया है.

मजिस्ट्रेट की शादी व सुनवाई एक ही दिन

मामला कुछ ऐसा है, महिला ने मजिस्ट्रेट पर आरोप लगाया है कि उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया. मजिस्ट्रेट जिले के अजयगंज में नियुक्त हैं. संयोगवश मामले की सुनवाई अब 18 जून को होनी है और इसी दिन मजिस्ट्रेट की शादी भी तय हुई है. अब देखना है कि इस दिन कोर्ट का फैसला क्या आता है. हालांकि महिला का दावा है कि कोर्ट उसके साथ न्याय करेगा.

महिला का कहना है कि उसका पिछले तीन साल से मजिस्ट्रेट के साथ संबंध था. मजिस्ट्रेट ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारिरिक संबंध बनाए. इतना ही नही महिला ने आगे कहा कि जब उसने मजिस्ट्रेट को शादी के लिए कहा तो वह 50 लाख रुपये दहेजके तौर पर मांगने लगा लेकिन जब उसके परिवार ने पैसे देने से इंकार कर दिया तो उसने कहीं और शादी तय कर ली. पीड़िता ने कहा  मामला दर्ज कराने के बाद से ही उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

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दलित युवक की सीएम नीतीश कुमार को चिठ्ठी से बिहार में बवाल

nitish-kumarपटना। दलित समाज के युवकों को अक्सर आरक्षण को लेकर ताने दिये जाते हैं. यहां तक की बहस के दौरान दलित युवकों के करीबी मित्र भी आरक्षण को लेकर ताने देने से बाज नहीं आते. ऐसे लोगों को बिहार के एक युवक ने मुंहतोड़ जवाब दिया है. जब तमाम सवर्ण जातियों के लोग अपने लिए आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, यह युवक अपना आरक्षण छोड़ने को तैयार है. लेकिन इसके लिए उसने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक शर्त रखी है.

युवक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर खुद को ब्राह्मण जाति में शामिल करने की मांग की है. और इसके लिए सीएम से सिफारिश करने को कहा है. उसने लिखा है कि वह आरक्षण नहीं लेना चाहता है, बस उसको ब्राह्मण जाति में शामिल कर लिया जाए. इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए. दलित युवक की इस चिट्ठी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. साथ ही कईयों को सोचने पर विवश कर दिया है.

अब आप आगे की कहानी सुनेंगे तो आप भी खुद को इस युवक की वाहवाही करने से नहीं रोक पाएंगें. सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखने वाले इस दलित युवक का नाम अभिनंदन कुमार है, जो चमार जाति का है. ‘दलित दस्तक’ से बातचीत में अभिनंदन कहते हैं-

“हाल ही में बिहार के कुछ सवर्ण जाति के लोगों ने धरना देकर दलित बनने की मांग की थी. स्थानीय अखबारों में छपी एक खबर के मुताबिक इस मुद्दे पर नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से उन सवर्णों के मांग की अनुशंसा की है. इस पर मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी ब्राह्मण जाति अपना लूं, ताकि ब्राह्मण बनकर मुझे सदियों की प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके. मैं आरक्षण नहीं चाहता मुझे बस दलित जाति से मुक्ति चाहिए.”

अभिनंदन दलित जातियों में शामिल होने वाले सवर्णों का स्वागत करते हुए कहते हैं कि वे आएं दलित बनें, आरक्षण लें लेकिन इसके साथ ही वह दलितों की तरह नालियों की सफाई, मरे पशुओं को फेंकना, चप्पल-जूता पॉलिस का काम भी करें.”

सीएम को पत्र लिखने वाले अभिनंदन अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के शेखपुरा जिला के अध्यक्ष है. युवक की इस पहल ने सोशल मीडिया पर एक बहस को जन्म दे दिया है. सीएम नीतीश को लिखी अभिनंदन की चिट्ठी कुछ यूं है….

“मुख्यमंत्री जी, निवेदनपूर्वक कहना है कि मैं अभिनंदन कुमार, पिता- स्व. भुवनेश्वर दास चमार जाति से हूं. मैं ब्राह्मण जाति बनना चाहता हूं. मुझे सवर्ण में ब्राह्मण में जाति बनाया जाय. मैं आरक्षण छोड़ना चाहता हूं क्योंकि हमसे बड़े-बड़े जाति के लोग अब दलित बनने के लिए तैयार हैं तो मैं सवर्ण बनने के लिए तैयार हूं. क्योंकि सदियों से पूर्वजों से हरिजन, दलित, चमरवा का प्रताड़ना झेलते आ रहा हूं. इन सभी से निजात पाने के लिए मैं सवर्ण बनना चाहता हूं तब तो कोई मुझे प्रताड़ित नहीं करेंगे. जब किसी को भी किसी जाति में शामिल करने को सक्षम हैं तो फिर मुझे भी सवर्ण जाति में शामिल करने में परेशानी नही होनी चाहिए. मेरे लिए भी केंद्र सरकार से सिफारिस करने की कृपा करें. ताकि मैं भी ब्राह्मण की तरह बाकि जाति के लोगों पर शान से राज कर सकूं. मेरा जो काम है जैसे लोग कहते हैं मरा जानवर ढोना, चप्पल-जूतो में पालिस करना, गंदगी साफ करना ये सब वो लोग करेंगे जो दलित बनने को तैयार हैं. और उन्हें ही आरक्षण की जरूरत पड़ेगी. तब वे आरक्षण के हकदार भी होंगे. क्योंकि पहले जाति बना और जाति कार्य के आधार एवं परिवारिक स्थिति के अनुसार आरक्षण मिला. तो आरक्षण समाप्त करने का मतलब जाति भी समाप्त जब आरक्षण लेने वाले जाति समाप्त हो जाएंगे तो सभी ऊंची जाति हो जाएंगे यानि सवर्ण. मुझे सवर्ण में ब्राह्मण जाति बनाया जाए. इस उपकार के लिए श्रीमान का मैं सदा आभारी रहूंगा.”

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काले रंग के कारण इस बड़े कोरियोग्राफर को नहीं मिला था काम

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फिल्म काला में रंग को लेकर एक संवाद काफी मशहूर हुआ था. जब नाना पाटेकर काला का किरदार निभाने वाले रजनीकांत से पूछते हैं कि ये काला कैसा नाम है? तो रजनीकांत जवाब देते हैं कि काला मेहनतकश लोगों का रंग है. लेकिन इसी फिल्म इंडस्ट्री में काले रंग के कारण एक शानदार कोरियोग्राफर को काम नहीं मिला था. वो कोरियाग्राफर फिल्म जगत में आज अपनी पहचान बना चुके रेमो डिसूजा हैं.

15 जून को रिलिज हुई फिल्म रेस-3 के डायरेक्टर रेमो डिसूजा ने रंग को लेकर फिल्म जगत में होने वाले भेदभाव की पोल खोली है. दैनिक अखबार हिन्दुस्तान को दिए इंटरव्यू में रेमो ने यह बात बताई है. आज रेमो एक चर्चित नाम है और फिल्म जगत में हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल है. लेकिन एक वक्त ऐसा था जब रेमो को उनके काले रंग की वजह से काम नहीं मिला था.

इस इंटरव्यू में रेमो ने कहा-

“रामगोपाल वर्मा की रंगीला के लिए मैंने डांसिंग ऑडिशन दिया था. वहां सभी को मेरा डांस पसंद आया था, पर अंतिम समय में अहमद खान ने मुझे मना कर दिया, क्योंकि उन्हें एक गोरा-चिट्टा लड़का चाहिए था, जो मैं नहीं था. उस दिन मैं काफी दुखी था, क्योंकि मैं सब बदल सकता हूं लेकिन अपना रंग और शक्ल-सूरत नहीं बदल सकता था.” हालांकि रेमो डिसूजा का डांस अहमद खान के असिस्टेंट को काफी पसंद आय़ा और उन्हें रंगीला फिल्म के गाने ‘… आई रे’ के लिए रख लिया गया.

रेमों की यह बात रंग को लेकर लोगों के नजरिए को बताता है, साथ ही यह भी साफ करता है कि गोरा रंग नहीं होने के कारण देश के एक बहुत बड़े तबके को कई बार बेइज्जत तक होना पड़ता है. देश के दिग्गज कोरियोग्राफर में शुमार रेमो ने अपने इंटरव्यू में एक और घटना का भी जिक्र किया है, जब उनको अपने रंग के कारण पुलिस के डंडे तक खाने पड़े थे.

बकौल रेमा- “जब मैं गुजरात से मुंबई आया तो मेरी हालत बहुत ठीक नहीं थी. मुझे काम चाहिए था, फिर वो चाहे किसी भी कीमत पर क्यों न मिले. रंगीला के दौरान हम बीच पर शूटिंग कर रहे थे. उस दिन सुरक्षा के लिए पुलिस बुलाई गई थी. मेरा डांस सीन भी उसी दिन शूट होना था, इसलिए मैंने टपोरी के कपड़े पहने हुए थे. मैं एक तरफ खड़ा था, तभी पुलिस वाले मेरी तरफ आए और मुझ पर डंडे बरसाने लगे. मैंने कहा कि मैं फिल्म का हिस्सा हूं, लेकिन पुलिस वालों ने कहा कि … तू शूट करेगा… शक्ल देखी है अपनी!”

हालांकि तभी क्रू वालों ने रेमो को देख लिया और उन्हें बचाया. रेमो अपने साथ ऐसे कई वाकये होने की बात कहते हैं. हालांकि आज लोग रेमों को जानते हैं और उनके साथ काम करना चाहते हैं. कुछ सालों से स्टार प्लस पर डांस प्लस नाम के डांस शो के कारण रेमो अब हर घर में पहचाने जाने लगे हैं. लेकिन काले रंग को लेकर रेमो डिसूजा और तमाम लोगों के साथ भेदभाव एक बार फिर फिल्म काला के संवाद को स्थापित करती है.

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‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ पर दिग्विजय सिंह की सफाई

फाइल फोटो

नई दिल्ली। ‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ को लेकर कांग्रेस घिरी हुई है. इसके लिए राहुल गांधी को कोर्ट तक जाना पड़ा. इसी बीच ‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है. इस बयान को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है.

हां, मैं संघी आतंक का इस्तेमाल करता हूं…

अब तो दिग्विजय सिंह ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह हमेशा ‘संघी आतंकवाद’ इस्तेमाल करते हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिंसा और घृणा फैलाता रहा है फिर आतंकवाद को जन्म देने लगा है. वहीं दिग्विजय सिंह की ओर से आए इस बयान पर बीजेपी ने कहा है कि जो लोग संघ से जुड़े हैं उनकी भावनाओं को आहत हुई हैं. बीजेपी सांसद संजय पाठक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि कोई भी शख्स अगर धर्म का पालन करता है, गलत नहीं कर सकता है. कोई भी धर्म कट्टरता नहीं सिखाता है.

साथ ही आगे उन्होंने कहा कि कभी ‘हिंदू आतंकवाद’ की बात कभी नहीं की है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि आतंकवाद को कभी किसी धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता है. पत्रकारों से बातचीत करते हुये मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आपके पास गलत सूचना है कि दिग्विजय सिंह ने हिंदू आतंकवाद की बात कही है. मैंने हमेशा संघी आतंकवाद की बात की है.’ अपनी बात पर जोर देते हुये दिग्विजय सिंह ने कहा कि बम विस्फोट जिन लोगों ने किया था वह संघ की विचारधारा से प्रभावित थे फिर चाहे वह मालेगांव, मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस या फिर दरगाह शरीफ बम विस्फोट कांड रहा हो.

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बसपा नेता की प्रधान पत्नी व भतीजी पर हमला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। बसपा नेता की पत्नी व भतीजी पर बदमाशों ने जानलेवा हमला किया है. खबरों की मानें तो औरैया जिले में बसपा जिलाध्यक्ष इंद्रेश कुमार शाक्य की पत्नी व भतीजी पर गांव के दबंगों ने हथियार से हमला बोला. जिससे दोनों घायल हो गई. सूचना के बावजूद पहले पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की.

बताया जा रहा है कि बिधूना कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रुरुखुर्द की श्रीदेवी प्रधान हैं जबकि उनके पति इंद्रेश कुमार शाक्य बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं. पुलिस को उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वह अपने देवर दुर्गेश के प्लाट पर निर्माण कार्य देखने गयी थीं. तभी गांव के कई लोगों ने एक साथ हमला बोल दिया. हमलावर के हाथ में तमंचा व लाठी-डंडा लिए थे.

इसी दौरान बदमाशों ने बिना किसी वजह अचानक हमला बोल दिया. मारपीट के दौरान आरोपियों ने उनके गले में पड़ी सोने की चेन भी तोड़ ली. उनके साथ भतीजी भी मौजूद थी. उससे भी मारपीट की गई. मामला जमीनी विवाद से जुड़ा है लेकिन श्री देवी का कहना है कि जिस भूखंड पर निर्माण कार्य चल रहा है. उसके कागजात उनके पास है. इसके बावजूद गांव के ही कुछ लोग भूखंड पर कार्य नहीं होने दे रहे हैं.

मारपीट के बाद रुरुगंज चौकी पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी. लेकिन बिना शिकायत दर्ज किए यहां से उनको कोतवाली भेज दिया गया. घटना के बाद पुलिस मारपीट करने वालों की गिरफ्तारी के लिये जुटी है.

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बीजेपी विधायक ने मुसलमानों को बताया बिजली चोर

लखनऊ। बीजेपी विधायकों की बेतुकी बयानबाजी रूकने का नाम नहीं ले रही है. अभी यूपी के कौशांबी जिले से भाजपा विधायक संजय गुप्ता का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. ऑडियो में भाजपा विधायक ने कहा कि 90 फीसदी मुसलमान बिजली चोर हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है. इस ऑडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी विधायक की किरकिरी हो गई है.

बीजेपी विधायक संजय गुप्ता के क्षेत्र में विद्युत विभाग पिछले कई दिनों से छापेमारी की कार्रवाई कर रहा है और बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा रहा है. इस मामले की शिकायत जब कुछ लोगों ने बीजेपी विधायक से की. उन्होंने इस कार्रवाई को रोकने और एफआईआर वापस लेने के लिए बिजली विभाग की जेई से बात की. सूत्रों के मुताबिक विधायक संजय गुप्ता जेई से बात करते हुए एक दम भड़क गए. विधायक ने कहा है कि अगर अफसरों ने हिन्दुओं के खिलाफ हो रही कार्रवाई को बीच में रोककर सभी मामले वापस नहीं लिए तो वह न सिर्फ अफसरों का जीना मुहाल कर देंगे.

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