ओडिशा। सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर रैंडल सिक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक की गिरफ्तारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 16 अक्टूबर की रात करीब 10:45 बजे पुलिस ने डॉ. रैंडल सिक्वेरा के भवानीपटना स्थित घर से दोनों को हिरासत में लिया। रातभर हिरासत में रखने के बाद दोनों को रायगड़ा ले जाया गया, जहां शाम करीब साढे छह बजे उप-मंडलीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) के सामने पेश करने के बाद उन्हें रायगड़ा उप-जेल भेज दिया गया।
दोनों की गिरफ्तारी के बाद सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। रोजी रोटी अधिकार अभियान नाम के संगठन ने इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। संगठन द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, दोनों की गिरफ्तारी रायगड़ा जिले के काशीपुर पुलिस थाने में दर्ज केस संख्या 85/2026 से जुड़ी है। यह मामला 6 और 7 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात कांटामाल गांव में हुई एक घटना से संबंधित है। उस दौरान ग्रामीणों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। इस घटना में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है।
अभियान ने दावा किया है कि डॉ. रैंडल और लक्ष्मण नायक के नाम इस मामले की एफआईआर में दर्ज नहीं हैं. संगठन ने दोनों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने और हिरासत के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। रोजी रोटी अधिकार अभियान ने इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि हिरासत में लेने की कार्रवाई कानून के मुताबिक होनी चाहिए और परिवार तथा वकीलों को समय पर जरूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता और ट्राइबल आर्मी के फाउंडर हंसराज मीणा ने भी इसको लेकर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, ओडिशा में आदिवासियों की सेवा करने वाले डॉक्टर रैंडल सिक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक की गिरफ्तारी बेहद चिंताजनक है। जो डॉक्टर वर्षों से आदिवासी बच्चों का इलाज कर रहा था, आज वही आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के कारण जेल में है। आखिर सरकार आदिवासियों की जमीन और जंगल बचाने वालों को अपराधी क्यों बना रही है? क्या खनन कंपनियों के हित आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से बड़े हो गए हैं? मीणा ने डॉ. रैंडल सिक्वेरा और लक्ष्मण नायक की तत्काल रिहाई, निष्पक्ष जांच और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की हैं।
डॉ. रैंडल सिक्वेरा एक चिकित्सक और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने ओडिशा के कालाहांडी और रायगड़ा जिलों में आदिवासी समुदायों के बीच काम किया है। लक्ष्मण नायक दलित कार्यकर्ता हैं और मां माटी माली सुरक्षा मंच तथा समाजवादी जन परिषद से जुड़े हुए हैं। दोनों खनन परियोजनाओं के विरोध और स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़े संघर्षों में सक्रिय रहे हैं।

पत्रकारिता और लेखन में रुचि रखने वाले सिद्धार्थ गौतम वर्तमान में दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से समाजशास्त्र में एम.ए कर रहे हैं।

