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दलित संतों और इन्फ्लुएंसर्स को साधने में जुटी सपा, 5 नवंबर को बड़े कार्यक्रम का ऐलान

समाजवादी पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती के नेतृत्व में आगामी 5 नवंबर को लखनऊ में इसको लेकर बड़े कार्यक्रम की तैयारी है। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और हरियाणा के दलित संतों तथा रविदास, कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित करने की योजना है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ सपा के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती (फाइल फोटो)लखनऊ। दलित वोटों को साधने के लिए समाजवादी पार्टी कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। इसी कड़ी में सपा की नजर अब दलित समाज के संतों पर है। समाजवादी पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती के नेतृत्व में आगामी 5 नवंबर को लखनऊ में इसको लेकर बड़े कार्यक्रम की तैयारी है। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और हरियाणा के दलित संतों तथा रविदास, कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित करने की योजना है। सपा एससी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती के मुताबिक इस कार्यक्रम में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी मौजूद रहेंगे।

दरअसल सपा की कोशिश है कि बसपा से छिटके दलित वोट समाजवादी पार्टी से जुड़े। इसके लिए पार्टी की नजर मुजफ्फर नगर के शुक्रताल और आस-पास के क्षेत्रों में लोकप्रिय सतगुरु रविदास जी की परंपरा के संत समनदास महाराज के अलावा कबीरपंथ और महर्षि वाल्मीकि परंपरा से जुड़े अनुयायी उनके समर्थन में साथ आएं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सतगुरु रविदास महाराज का चित्र भेंट करते सपा के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती (फाइल फोटो)खबर है कि सपा इस बार केवल राजनीतिक दलित चेहरों तक सीमित नहीं रहना चाहती है. वह दलित समाज पर असर रखने वाले संतों, पंथों और संस्थाओं के अलावा दलित इंफ्ल्यूएंसरों को भी साधने में जुट गई है। दरअसल, सपा की कोशिश ऐसे सामाजिक नेटवर्क खड़े करने की है, जिनके जरिए पार्टी का संदेश दलित बस्तियों और अलग-अलग बिरादरियों तक पहुंच सके। सपा की इस कवायद के पीछे 2027 का चुनावी गणित है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीती, जबकि बसपा का खाता तक नहीं खुला। बसपा की इस चुनावी कमजोरी में सपा को दलित राजनीति में अपने विस्तार की गुंजाइश दिखाई दे रही है।
हालांकि सपा के लिए यह आसान नहीं होगा। क्योंकि बसपा अपने पुराने जनाधार को वापस हासिल करने में मजबूती से जुट गई है। तो वहीं बसपा से छिटका दलित वर्ग आजाद समाज पार्टी और चंद्रशेखर आजाद में भी अपनी संभावनाएं तलाश रहा है। बीते साल संत समनलाल महाराज की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हाजिरी लगा चुके हैं और कई घोषणाएं कर चुके हैं। इसके अलावा वाराणसी में सतगुरु रविदास जन्मस्थली से डेरा सच्चा बल्लां के प्रमुख संत की उपस्थिति में सीएम योगी कार्यक्रम भी कर चुके हैं। अब देखना होगा कि सपा की यह कोशिश कितनी सफल होती है।

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