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दलित समाज के व्यक्ति का शव दफनाने से रोका, पैरों में गिरने पर किया मजबूर!

तामिलनाडु के ईरोड जिले में पेरुंदुरई के निकट पेरुमपल्ली गांव में हुई। करीब 90 वर्षीय दलित बुजुर्ग चेन्नी की मृत्यु के बाद परिजन उनके शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान ले गए थे। आरोप है कि वहां जातिवादियों ने दलित समुदाय के लोगों को शव दफनाने से रोक दिया। विवाद के दौरान धमकी दिए जाने और दो दलित व्यक्तियों को अपमानित करने का भी आरोप है।

इरोड/चेन्नई। तमिलनाडु के इरोड जिले में एक बुजुर्ग दलित व्यक्ति का शव दफनाने को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि प्रभावशाली जाति के कुछ लोगों ने दलित परिवार को साझा कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोका और विवाद के दौरान दो दलित व्यक्तियों को अपने पैरों में गिरने के लिए मजबूर किया। घटना के बाद पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक मामला 10 अक्तूबर का सामने आया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना पेरुंदुरई के निकट पेरुमपल्ली गांव में हुई। करीब 90 वर्षीय दलित बुजुर्ग चेन्नी की मृत्यु के बाद परिजन उनके शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान ले गए थे। आरोप है कि वहां जातिवादियों ने दलित समुदाय के लोगों को शव दफनाने से रोक दिया। विवाद के दौरान धमकी दिए जाने और दो दलित व्यक्तियों को अपमानित करने का भी आरोप है। घटना की सूचना मिलने पर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। बुजुर्ग का अंतिम संस्कार पुलिस सुरक्षा में कराया गया। मामले में दर्ज शिकायत और आरोपों की जांच की जा रही है।

इस घटना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इरोड का संबंध महान सामाजिक सुधारक ई.वी. रामासामी नायकर यानी पेरियार से है। पेरियार का जन्म 1879 में इरोड में हुआ था। उन्होंने Self-Respect Movement के माध्यम से जातिगत ऊंच-नीच, अस्पृश्यता और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष किया था।

तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय ने 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में राज्य की राजनीति में बदलाव आया है। लेकिन इरोड की घटना एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है कि क्या राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव से जातिगत भेदभाव की जमीनी स्थिति भी बदलेगी?

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