HomeTop Newsछत्तीसगढ़: बैगा बहुल गांव में पांच महीने में पांच बच्चों की मौत,...

छत्तीसगढ़: बैगा बहुल गांव में पांच महीने में पांच बच्चों की मौत, प्रशासन ने शुरू की जांच

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बैगा बहुल गांव में पांच महीने में पांच बच्चों की मौत हुई। कुपोषण के आरोपों के बीच प्रशासन ने स्वास्थ्य जांच तेज की, कांग्रेस ने जांच समिति बनाई।

कवर्धा/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बैगा बहुल नंदनी कुमान गांव में पिछले पांच महीनों के दौरान पांच बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। इन मौतों के बाद गांव में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बच्चों की मौत कुपोषण के कारण हुई है। हालांकि, अब तक मौतों के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव में स्वास्थ्य जांच और सर्वे का काम तेज कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, गांव के 15 कुपोषित बच्चों का इलाज बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में बच्चों की जांच कर रही हैं और परिवारों से जानकारी जुटा रही हैं। एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में 17 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी दी गई है।

बच्चों की जांच के निर्देश, कलेक्टर ने किया स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण
बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य और पोषण संबंधी इंतजामों की समीक्षा शुरू की है। कबीरधाम की कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने बोड़ला विकासखंड के ग्राम कुमान में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे स्वास्थ्य परीक्षण और सर्वे कार्यों की जानकारी ली।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांव के प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए। किसी बच्चे में कमजोरी या कुपोषण के लक्षण मिलने पर उसका तत्काल उपचार कराया जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को जरूरत के मुताबिक कमजोर और कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की व्यवस्था करने को कहा।
प्रशासन की ओर से बच्चों को समय पर इलाज, पौष्टिक आहार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिया कि सर्वे के दौरान कोई घर या बच्चा छूटना नहीं चाहिए और प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि बीमारी या कुपोषण की पहचान समय रहते हो सके।

कांग्रेस ने बनाई सात सदस्यीय जांच समिति
पांच बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने घटनाक्रम की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की है। समिति गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेगी और बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण संबंधी स्थिति की पड़ताल करेगी।
कांग्रेस ने बच्चों की मौत को कुपोषण से जोड़ते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और प्रभावित परिवारों के बयान अहम होंगे। जब तक आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आते, तब तक कुपोषण को सभी मौतों का पुष्ट कारण मानना उचित नहीं होगा।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह है बैगा समुदाय
बता दें कि बैगा समुदाय भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups—PVTGs) में शामिल है। इस समुदाय को आम बोलचाल में “राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र” भी कहा जाता है। ऐसे समुदायों के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों के पोषण, नियमित जांच और समय पर इलाज तक पहुंच सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है।
नंदनी कुमान में पांच बच्चों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों की मौत किन कारणों से हुई और क्या समय रहते बीमारी, कुपोषण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की जा सकती थी। प्रशासन की जांच और स्वास्थ्य शिविर से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए मौतों के कारणों की पारदर्शी जांच और गांव के सभी बच्चों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी जरूरी है।

लोकप्रिय

अन्य खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Skip to content