भारतीय समाज एक सूखा जंगल है और जो भी चाहे धर्म और आग के गोले को फेंक कर आग लगा दे। ताजा उदाहरण मणिपुर का लिया जा सकता है। इम्फाल वैली में कभी भी इस तरह का नही हुआ कि एक विशेष वर्ग - कुकी...
गुजरात के मेहसाणा जिले में बीते रविवार (14 मई) को एक धार्मिक आयोजित था। इसमें शामिल दलित समाज के लोगों का आरोप है कि वहां उनसे जातिगत भेदभाव किया गया। अनुसूचित जाति के लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन में दावत के दौरान...
कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर लगातार मंथन जारी है। इस पर किसी भी वक्त फैसला आ सकता है कि कर्नाटक का ताज या तो डी के शिवकुमार को मिलेगा या फिर सिद्धारमैया को। इस बीच में कर्नाटक में कांग्रेस की शानदार जीत...
केरला स्टोरी फिल्म को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उसके बड़े-बड़े दिग्गज नेता जिस तरह सक्रिय हो गए हैं, उससे लगता है कि यह फिल्म नहीं, बल्कि पार्टी का अपना एजेंडा हो। अब भाजपा नेता आदिवासियों समाज की महिलाओं को यह फिल्म दिखाने को...
कनाडा से लौटने से पहले की शाम को मैं रो पड़ा था। दरअसल दूसरे दिन सुबह मेरी फ्लाइट थी और मेरी विदाई के लिये तमाम साथी इकट्ठा हुए थे। सभी बारी-बारी से मेरे बारे में अपने अनुभव बता रहे थे। फिर मेरी बारी आई,...
सुदूर रेगिस्तान के दलित-किसान-मजदूर परिवार में पैदा हुये भट्टाराम एक ऐसे इलाके से आते है,जहां पर जातिगत भेदभाव व छुआछूत भयंकर रूप में विद्यमान है.यह इलाका आज भी सामंतवाद की चपेट में है.आज भी यहां दलितों को छूने तक से परहेज किया जाता है.बच्चों...
राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक चुनावी भाषण में एक नारा दिया, “जितनी जिसकी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” इसका अर्थ है कि किसी समाज और किसी विशिष्ट सामाजिक समूह की हिस्सेदारी जनसंख्या में उनके हिस्से के अनुरूप होना चाहिए। अपनी बात राहुल गांधी ने...
ब्राह्मणवादी परंपरा में सबसे ‘महान’ राज्य ‘रामराज्य’ और सबसे ‘महान’ राजा राम हुए हैं, लेकिन इस रामराज्य में लोगों का मूल कर्तव्य वर्णव्यवस्था का पालन था। यानी शूद्र और अतिशूद्र द्विजों की सेवा करेंगे और स्त्रियां पुरुषों की। यदि कोई इसका उल्लंघन करता, तो...
प्लेटो ने अपनी चर्चित किताब ‘रिपब्लिक’ में एक ऐसे राजा की कल्पना की है जिसमें दार्शनिक जैसी मानवीय गरिमा, साहस और राजनीतिक श्रेष्ठता एवं बौद्धिकता का मेल हो. उसका कहना था कि ऐसा राजा मानव जाति को तमाम अभिशाप से मुक्त कर सकता है...
शूद्रों गुलाम रहते, सदियां गुजर गई हैं
जुल्मों सितम को सहते, सदियां गुजर गई हैं
अब तो जरा विचारो, सदियां गुजर गई हैं
अपनी दशा सुधारो, सदियां गुजर गई हैं
बहुजनों के जागरण का आह्वान करने वाली उपरोक्त पंक्तियां स्वामी अछूतानंद ‘हरिहर’ की हैं। वे उत्तर भारत में...
जिस एक व्यक्तित्व ने मानव इतिहास को सर्वाधिक प्रभावित किया, उस व्यक्तित्व का नाम कार्ल हेनरिख मार्क्स है। वे पहले दार्शनिक थे, जिन्होंने यह व्याख्यायित किया कि मानव इतिहास की गति एवं उसकी विकास यात्रा की बुनियाद में क्या है? क्यों पूरी दुनिया में...
Written by - Jai Birdi and Param Kainth
As the saying goes, "all good things must come to an end", such is the case with the Dr. Ambedkar International Symposium on Emancipation and Equality Day Celebrations. Purpose of the symposium was to rethink, restrategize, and...
इस समय पूरे देश की निगाहें कनार्टक विधानसभा चुनाव प्रचार पर लगी हैं, जहाँ 10 मई को 224 सीटों के लिए वोट पड़ने हैं.वोटों की गिनती 13 मई को होगी. चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि जेडीएस के साथ...
हिंदू पांचांग के अनुसार (25 अप्रैल) या ( 26 अप्रैल) या दोनों के बीच परशुराम जयंती होती है। हिंदू धर्मग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार एवं ब्राह्मण जाति के कुल गुरु हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में भूमिहार राय...
तेलंगाना में 14 अप्रैल को 125 फीट की बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ। तेलंगाना सरकार की ओर से यह शानदार प्रतिमा बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने बाबासाहेब के पोते प्रकाश आंबेडकर को...
कहते हैं कि जज़्बा दमदार हो तो पत्थर का सीना चीर कर भी पानी निकाला जा सकता है। झारखण्ड के हजारीबाग जिले के डाडी प्रखंड अंतर्गत स्थित आदिवासियों के एक गाँव कुरकुट्टा में रहने वाले बेदिया जनजाति के युवा इस कहावत को चरितार्थ कर...
भारत में दलितों की स्थिति देश के कई हिस्सों में आज भी बदतर है। आज भी वो मूल अधिकारों और जीवन जीने की जरूरी चीजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दलितों की एक बड़ी आबादी तक आज तक न तो शिक्षा पहुंच पाई...
1 जून, 1873 को ज्योतिराव फुले (11अप्रैल 1827 – 28 नवम्बर 1890) की रचना ‘गुलामगिरी’ का प्रकाशन हुआ था। यह किताब मराठी में लिखी गयी। इसकी प्रस्तावना फुले ने अंग्रेजी में और भूमिका मराठी में लिखी है। इस किताब को लिखने का मूल उद्देश्य...
खबर चलाने वाले खबर खा ले रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे। भारतीय मीडिया टीवी में दिनभर बैठ कर यह बात करता है कि अमेरिका जैसा एक दिन भारत होगा। लेकिन वही मीडिया, भारत के सबसे बड़े राष्ट्रनिर्माता के गौरव को छिपा...
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अंबेडकर जयंती की तैयारियों जोर पकड़ चुकी हैं। चाहे भारत हो, चाहे अमेरिका, चाहे इंग्लैंड या फिर कनाडा, दुनिया भर के अंबेडकरवादियों में अंबेडकर जयंती का खासा उत्साह है।
कनाडा के वैंकुअर के अंबेडकरवादी इसे Dr. Ambedkar International Symposium for...