सुरक्षा घेरे में नए संसद का उद्धाटन बताता है कि सरकार डरी हुई है

835

जेल जाने के बाद अंग्रेजों से गिड़गिड़ा कर माफी मांगने वाले हिन्दू राष्ट्र के समर्थक विनय दामोदर सावरकर की जयंती के मौके पर सवारकर को अपना नायक मानने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता और फिलहाल 2024 तक के लिए भारत के प्रधानमंत्री का काम-काज देख रहे नरेन्द्र मोदी ने आज 28 मई को भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन कर दिया। भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के समर्थक कई नेताओं के मुखिया नरेन्द्र मोदी ने यह काम दर्जन भर से ज्यादा हिन्दू पुरोहितों की मौजूदगी में की।

इस दौरान संसद भवन से कुछ ही फर्लांग की दूरी पर इसी भारत के लिए दुनिया के सबसे बड़े खेल महोत्सव ओलंपिक में पदक जीतकर भारत के हर एक व्यक्ति की छाती चौड़ी करने वाले खिलाड़ियों के इंसाफ के आंदोलन को कुचल दिया गया। भाजपा नेता और कुश्ती फेडरेशन के बृजभूषण सिंह पर शोषण का आरोप लगाने के बाद ये खिलाड़ी करीब महीने भर से आंदोलन कर रहे थे। न तो भारत सरकार, न ही उसकी पुलिस उन्हें न्याय दिला सकी, उल्टे जब सरकार नए संसद भवन का जश्न मना रही थी, जंतर-मंतर पर पुलिस खिलाड़ियों के टेंट उखाड़ने के बाद उनको घसीट रही थी।

दिल्ली के आस-पास से इन महिला पहलवानों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचने वाले लोगों को बसों में भरकर जेलों में डाल रही थी। जो लोग सोशल मीडिया पर इसका विरोध कर रहे थे, सरकारी ट्रोलर उनके साथ गाली-गलौच कर रहे थे।

  लेकिन दूसरी ओर नए संसद के जश्न से विपक्ष का बड़ा हिस्सा गायब था। संसद के आस-पास एक भी विरोधी को पहुंचने नहीं दिया गया। राजा और उसके कारिदों की छाती फुली थी कि विरोध की हर आवाज को दबा दिया गया है। राजा, मंत्री, संतरी, और कारिंदे सब खुश थे। नए भवन को देखकर इठला रहे थे।

 लेकिन सवाल बस एक है कि जिस संसद भवन के उद्घाटन के दौरान थोड़ी दूर पर हजारों लोग सरकार का विरोध करने के लिए इकट्ठा थे। विपक्ष गायब था। उसको कैसे मुकम्मल माना जाए। जिस नए संसद भवन के उद्घाटन के वक्त उसके आस-पास उत्साहित जनता का हुजूम होना चाहिए था, वहां पुलिस का पहरा इसलिए लगाना पड़ा कि कोई विरोध का झंडा लेकर न पहुंच जाए। यह पहरा बताता है कि देश का हुक्मरान डरा हुआ है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.