मायावती की विशेष बैठक, लखनऊ पर होगी देश की नजर

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की एक अहम बैठक कल 26 मई को लखनऊ में होने जा रही है. यह बैठक आम बैठक जैसी न होकर विशेष बैठक होगी. इसमें पार्टी के सभी प्रदेशों के प्रमुख नेता जुटेंगे. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर रणनीति तय की जाएगी, साथ ही यूपी सहित अन्य प्रदेशों में गठबंधन को लेकर भी आखिरी मुहर लगने की खबर आ रही है. इस बैठक को लेकर सबसे बड़ी खबर यह आ रही है कि पार्टी मायावती को पीएम पद के दावेदार के रूप में प्रस्तुत कर सकती है.

दरअसल, 2019 में मोदी विरोधी मोर्चे को बनाने में जुटी मायावती चुनावी रणनीति और आगामी चुनावों में गठबंधन को लेकर अपना रुख कार्यकारिणी में साफ कर सकती हैं. गठबंधन की रूपरेखा क्या होगी, इसके बारे में भी बैठक में फैसला हो सकता है. कार्यकारिणी की बैठक से ही तीसरे मोर्चे के प्रारूप का भी अंदाजा लग जाएगा.

हरियाणा में गठबंधन

मायावती उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा में नेशनल लोकदल के साथ गठबंधन का ऐलान कर चुकी हैं. कर्नाटक में उन्होंने जेडीएस के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ा था. इसी तरह दूसरे राज्यों में किन-किन दलों के साथ गठबंधन किया जा सकता है कार्यकारिणी में इस पर भी निर्णय लिया जा सकता है. साथ ही सपा के अलावा यूपी में कांग्रेस और रालोद गठबंधन का हिस्सा होंगे या नहीं इस पर भी फैसला होना हैं.

कर्नाटक में 23 मई को हुए शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी दलों की मौजूदगी के दौरान तमाम नेताओं ने जिस तरह बसपा प्रमुख को तव्वजो दी, उससे पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित हैं. समारोह में जिस तरह सोनिया गांधी और मायावती के बीच शुरू से लेकर आखिर तक करीबी और सहजता दिखी, उससे भी कई संदेश गया है. इन तस्वीरों ने जहां विपक्षी दलों की बेचैनी को बढ़ा दिया है तो वहीं इससे बसपा के कार्यकर्ता खासे उत्साहित हैं. बसपा समर्थकों को यह लगने लगा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी नेता मायावती की भूमिका काफी अहम होगी और अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वो प्रधानमंत्री भी बन सकती हैं.

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कैराना में बीजेपी को हराने मायावती ने चली चाल

लखनऊ। बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. कैराना व नुरपुर उपचुनाव में बसपा प्रमुख मायावती ने नई चाल चल दी है. जिसको लेकर किसी को यकीन नहीं हो रहा है. मायावती ने दलित वोटरों को देखते हुए कार्यकर्ताओं को मंत्र दिया है. साथ ही ऐसी बात कह दी है जिससे बीजेपी की मुश्किल बढ गई है. मायावती की चाल को रोकने के लिए बीजेपी ने यूपी मुख्यमंत्री योगी से लेकर तमाम बड़े नेताओं को मैदान में उतारा है.

जहां एक तरफ कहा जा रहा था कि मायावती कैराना व नुरपुर में गठबंधन नहीं करेंगी. लेकिन इस बात को मायावती ने झूठला दिया है. मायावती ने साफ तौर पर कहा है कि दोनों ही जगहों पर गठबंधन वाले प्रत्याशियों को सहयोग करना है. इसको लेकर उन्होंने 23 मई को कार्यकर्ताओं की एक बैठकर बुलाई थी, इस दौरान कार्यकर्ताओं को कहा कि गठबंधन वाले उम्मीदवारों को जीताने के लिए मदद करें.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कंवर हसन ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को गुरूवार को ही समर्थन दे दिया. इसके बाद लगभग साफ हो गया है कि अब कैराना में महागठबंधन बनाम बीजेपी की सियासी लड़ाई होगी. इससे बीजेपी का डर बढ़ता दिख रहा है. हालांकि इन दोनों जगहों पर दलित वोटरों की संख्या काफी ज्यादा है इसके बावजूद भी मायावती ने गठबंधन को समर्थन देकर बीजेपी को हराने की ठान ली है.

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बोधगया सीरियल ब्लास्ट में पांच दोषी, 31 मई को सजा

पटना। बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट में करीब पांच साल बाद कोर्ट का फैसला आ गया है जिसमें कोर्ट ने पांच लोगों को दोषी कारार दिया. शुक्रवार को कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. कोर्ट पांच दोषियों को 31 मई को सजा सुनाएगी.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार के बोधगया में 7 जुलाई 2013 को महाबोधी मंदिर सीरियल ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने सभी पांच आरोपियों को दोषी करार ठहराया है. अदालत सभी आरोपियों को 31 मई को सजा पर ऐलान करेगी. बोधगया सीरियल ब्लास्ट में एनआईए कोर्ट के स्पेशल जज मनोज कुमार ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि 7 जुलाई 2013 को बोधगया में हुए एक बाद एक सीरियल ब्लास्ट में दो लोग घायल हो गये थे. गौरतलब है कि बोधगया ब्लास्ट में एनआईए ने करीब 90 गवाहों को पेश किए.

ये हैं पांच दोषी

जांच एजेंसी एनआईए ने इम्तियाज अंसारी, उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी और मुजीबुल्लाह अंसारी को आरोपी बनाया था जिसे शुक्रवार को कोर्ट ने दोषी करार दिया. हैदर, मुजीबुल्लाह और इम्तियाज रांची के निवासी है. जबकि उमर और अजहर छत्तीसगढ़ के रायपुर का रहने वाला है. फिलहाल इनको बेउर जेल में बंद रखा है.

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कर्नाटकः स्पीकर पद से बीजेपी ने नाम लिया वापस, कांग्रेस जीती

बेंगलुरू। कर्नाटक में बीजेपी की रणनीति पूरी तरह फेल नजर दिख रही है. सरकार बनाने से चूकने के बाद बीजेपी ने स्पीकर पद से भी नाम वापस ले लिया है. नाम वापस लेने के बाद कांग्रेस का रास्ता साफ हो गया और स्पीकर पद पर कांग्रेस की झोली में चला गया.

शुक्रवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक विश्वास मत साबित करने के पहले विधानसभा के स्पीकर के लिए हुए चुनाव को कांग्रेस ने जीत लिया है. बीजेपी के स्पीकर के पद के लिए एस सुरेश कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया है. ऐसे में कांग्रेस ने पूर्व स्पीकर के आर रमेश कुमार को स्‍पीकर नियुक्‍त किया है.

आज शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा है कि विश्वास मत हासिल करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी. इसके लिए वे तैयार हैं और जल्द ही बहुमत साबित कर देंगे.

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‘परमाणु’ देखने के लिए बस ये वजह काफी है

नई दिल्ली। ‘परमाणु’ ने धमाके के साथ सिनेमाघरों में एंट्री की है. इस फिल्म को लेकर काफी चर्चा है. इससे देश की सबसे बड़ी शक्ति परीक्षण के पल जुड़े हुए हैं. हालांकि संयुक्त राष्ट्रसंघ की तमाम अटकलों के बाद परमाणु परीक्षण किया गया था. ‘परमाणु’ परीक्षण की कहानी लोगों के दिल में दिलचस्पी व रोमांच पैदा कर रही है, जो आजतक छुपी हुई थी…

परमाणु को पर्दे पर देखने की दिलचस्पी

‘परमाणु’ फिल्म में लोगों को परमाणु परीक्षण की छुपी बातें देखने को मिलेंगी. इस बात को देखना दिलचस्प होगा कि किस प्रकार हमारे देश के वैज्ञानिकों व ईमानदार नेताओं ने मिलकर परमाणु परीक्षण कराया और दुनिया को भनक तक ना लगी.

आखिर किस प्रकार की रणनीति तैयार की गई थी. एक तरफ जहां अमेरिका सेटेलाइट से हम पर नजर रखे रहता है तो वहीं हमनें सेटेलाइट को भी मात दे दी. इसमें सबसे बड़ी व दिलचस्प कड़ी तो यही है. जो कि हमें ‘परमाणु’ देखने के लिए विवश करती है.

तीन दिन पांच सफल परीक्षण

11 मई, 1998 भारत ने तीन परमाणु हथियारों का परीक्षण कर दुनिया को दिखा दिया कि ‘हम किसी से कम नहीं’, तीन दिन के अंदर पांच सफल परीक्षण किए गए. वैज्ञानिक बिरादरी और देश में इसके बाद जश्न का माहौल था. हालांकि धमाका हमारे देश में हुआ लेकिन दुनिया को दहला दिया. इसके साथ ही हम परमाणु शक्ति को आजमाने वाले छठे देश बन गए.

अमेरिकन इंटेलिजेंस की हार

इस परीक्षण को सबसे करारा झटका अमेरिका को लगा था. डीआरडीओ के तत्कालीन चीफ व भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और एईसी के चेयरमैन आर. चिदंबरम की टीम ने देश को परमाणु शक्ति देकर नई शक्ति प्रदान की थी.

इनकी टीम ने इस प्रकार काम किया कि अमेरिका की सबसे चालाक इंटेलिजेंस सीआईए को भनक तक ना लगी. हालांकि अगले दिन अमेरिका की एजेंसी CIA ने उस विस्फोट की सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें डाउनलोड कीं तो उसके होश उड़ गए. भारत का ये मिशन CIA की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस की हार थी.

इस दौरान गुप्त मिशन के कारण मीडिया में जानकारी नहीं दी गई थी. वैसे भी राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को गुप्त रखा जाता है लेकिन अब उस पर फिल्म बनाकर मिशन की यादगार झलक दिखाई जा रही है. इन लम्हों को देश आजतक भूला नहीं तो ऐसे में पर्दा पर देखने को मिल रहा तो कैसे चूक सकता है.

-रवि कुमार गुप्ता इसे भी पढ़ें-‘नक्काश’ पोस्टर ने बटोरी वाहवाही, फिल्म के लिए बढ़ी बेताबी!
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तो क्या कुमारस्वामी पांच साल तक नहीं रहेंगे सीएम?

बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री कुर्सी को लेकर फिर बहस छिड़ गई है. कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कुमारस्वामी के सीएम बने रहने को लेकर बड़ा बयान दे दिया है. जी परमेश्वर का कहना है कर्नाटक में कुमारस्वामी को पांच साल तक सीएम बनाए रखने को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई है.

शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी विश्वास मत रखेंगे. ऐसे में विश्वास मत साबित करने से पहले कांग्रेस की ओर से इस तरह का बयान आना गठबंधन वाली सरकार पर सवाल खड़ा कर रहा है. हालांकि इसी प्रकार कांग्रेस व जेडीएस उप मुख्यमंत्री पद को लेकर फंसी थी लेकिन बाद में दोनों पार्टियों ने मिलकर जी परमेश्वर को उप मुख्यमंत्री की कमान सौंपी.

इसके अलावा उन्होंने मीडिया से कहा, ‘अभी इस बात पर फैसला किया जाना भी बाकी है कि कौन से विभाग उन्हें दिये जाएंगे और कौन हम लोगों के पास रहेगा. उन्हें पांच साल रहना चाहिये या हमें भी मिलेगा. इन तमाम विषयों पर हमने अब तक चर्चा नहीं की है.’

किसके कितने मंत्री

लेकिन बुधवार को शपथ ग्रहण से पहले ही कर्नाटक में कांग्रेस के प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने मंत्रीमंडल को लेकर बताया था कि कांग्रेस के 22 और जेडीएस से 12 मंत्री होंगे. इनके विभागों का बंटवारा का अबतक नहीं किया गया है. जो कि शुक्रवार को बहुमत साबित करने के बाद बांटे जाने की संभावना है.

बता दें कि बुधवार को कर्नाटक में कुमारस्वामी ने सीएम व कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री की शपथ ली थी जिसमें देशभर के विपक्षी नेता एकजुट हुए थे. बहुत मुश्किलों के बाद कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर राजनीति में वापसी की है ऐसे में कांग्रेस किसी भी हाल में सत्ता से हाथ धोना नहीं चाहेगी. राहुल गांधी ने इससे पहले भी कह दिया था कि गठबंधन में बाधा बनने वालों को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी.

रिपोर्ट- रवि कुमार गुप्ता

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हरामी व्यवस्थाः दलित ने फेसबुक नेम में ‘सिंह’ जोड़ा, राजपूतों ने घर पर हमला बोला

प्रतिकात्मक फोटो

गुजरात। एक बार फिर दलित युवक के नाम में सिंह जोड़ने को लेकर राजपूत समुदाय ने हमला बोला है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक दलित युवक के घर पर तोड़फोड़ व मारपीट हुई है. इसे मामले को लेकर दोनों पक्षों में जोरदार हिंसा हुई है. यह मामला बुधवार को प्रकाश में आया.

गुजरात के ढोलका नगर में एक दलित शख्स के अपने उपनाम में ‘सिंह’ जोड़ने से राजपूत बिरादरी के लोग भड़क गए और उसे बेरहमी से पीटा. दोनों पक्षों की ओर से हिंसा भड़काने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है.

फेसबुक पर घोषणा

मौलिक जाधव नाम के दलित युवक ने हालही में फेसबुक पर अपने नाम में ‘सिंह’ जोड़ने की घोषणा और लिखा कि, अब उसे मौलिक सिंह जाधव नाम से जाना जाएगा. पुलिस निरीक्षक एलबी तावड़ी ने कहा कि जाधव ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि अपने नाम में ‘सिंह’ जोड़ने पर सहदेव सिंह वघेला नाम के एक राजपूत व्यक्ति और पांच अन्य ने उससे धक्का मुक्की की और उसके घर मे तोड़फोड़ की.

सहदेव सिंह वघेला और अन्य के खिलाफ एसी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. दोनों मामलों में फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. बता दें कि इससे पहले भी गुजरात में एक दलित युवक ने शादी कार्ड में सिंह जुड़वाया था जिसको लेकर ऊंची बिरादरी वालों  ने बारात पर हमला किया था.

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योगीराज में दिव्यांग बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म के बाद पटक-पटक कर मार डाला

प्रतिकात्मक फोटो

वाराणसी। योगी सरकार के राज्य व पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में एक दिव्यांग महिला को रेप कर हत्या करने का मामला सामने आया है. मानसिक रूप से कमजोर महिला को रेप कर मार दिया गया है. ऐसे में योगी सरकार के महिला सुरक्षा देने का दावा खोखला साबित हो रहा है.

गुरूवार को पंजाब केसरी की खबर के मुताबिक मामला बड़ागांव थाना क्षेत्र का है. यहां बगीचे में स्थित हनुमान मंदिर पर बीते 3 सालों से मानसिक विक्षिप्त महिला रह रही थी. अंतिम बार मंगलवार रात को महिला मंदिर के पास चबूतरे पर सोई थी जबकि अगले दिन महिला का शव मंदिर के पास मिला. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

फर्श पर पटक कर…

इस मामले में एसपी ग्रामीण अमित कुमार ने बताया कि मंगलवार की रात आरोपी को बगीचे में देखा गया था. सूचना पर जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह और उसके साथी ने मंदिर के पास बैठकर शराब पी. इसके बाद दोनों ने महिला के साथ बलात्कार किया और फिर विरोध किया तो दोनों ने महिला का सिर मंदिर के चबूतरे पर पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया. फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

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केवल इंटरव्यू देकर बनें रेलवे टीचर

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नई दिल्ली। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने टीचर के पदों पर वेकैंसी निकाली है. इसके लिए रेलवे ने आवेदन मांगी है. जिन लोगों को रेलवे में टीचर बनना है तो आवेदन कर सकते हैं. रेलवे ने 6 पदों पर भर्ती के लिए नोटिपिकेशन जारी कर आवेदन मांगे हैं. 12 वीं+डी.एल.एड. /बी.एल.एड./ डी.एड. /स्नातक डिग्री/ मास्टर डिग्री+बी.एड. वाले उम्मीदवार अपनी इच्छा से अप्लाई कर सकते हैं. रेलवे में टीचर बनने का सुनहरा मौका है.

ऐसे करें आवेदन

उपरोक्त पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार विभाग की वेबसाइट www.secr.indianrailways.gov.in के जरिए 25 मई 2018 तक अप्लाई कर सकते है.

पद विवरण

पीजीटी, टीजीटी, पीएसटी

चयन प्रकिया

उम्मीदवार का चयन इंटरव्यू में प्रदर्शन के अनुसार किया जाएगा।

सैलरी

पीजीटी – 27,500 /- रुपये

टीजीटी  – 26,250 /- रुपये

पीएसटी  – 21,250 /- रुपये

इंटरव्यू की तिथि एवं समय

25 मई 2018

आयु सीमा

उम्मीदवार की आयु 18-65 साल की उम्र के बीच होनी चाहिए.

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कर्नाटक से लौटकर कैराना उपचुनाव में विपक्ष एकजुट, योगी की नींद उड़ी

लखनऊ। कर्नाटक से लौटकर यूपी के कैराना उपचुनाव में विपक्ष भाजपा को हराने के लिए नई चाल चली है. कैराना उपचुनाव में बीजेपी की मुसीबत बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कंवर हसन ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को समर्थन दे दिया है. आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम के विपक्ष में उनके देवर कंवर हसन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे.

महागठबंधन बनाम बीजेपी

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेता इमराज मसूद कई दिनों से कंवर हसन को समर्थन के लिए मनाने में जुट गए थे. आखिरकार इमराद की मेहनत रंग लाई. इसके बाद लगभग साफ हो गया है कि अब कैराना में महागठबंधन बनाम बीजेपी की सियासी लड़ाई होगी. इससे बीजेपी का डर बढ़ता दिख रहा है.

28 मई को वोटिंग

कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 28 मई को वोटिंग होनी है. कैराना में आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम और दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह (बीजेपी प्रत्याशी) के बीच सीधी टक्कर होनी है. वहीं, नूरपुर में एसपी ने नईमुलहसन को मैदान में उतारा तो बीजेपी ने अवनी सिंह पर दाव लगाई है.

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी के क्षेत्र गोरखपुर व फुलपुर उपचुनाव में बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी थी. इस बात का ख्याल रखकर बीजेपी ने कैराना में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को तीन दिन तक यहां रखा और फिर प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय भी लगातार दौरा कर किए हैं. साथ बी संगठन महामंत्री सुनील बंसल पांच दिन तक बैठक किए. केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह के अलावा दस से ज्यादा यूपी के मंत्री, सात सांसद और 19 विधायकों के साथ ही संगठन के पदाधिकारियों की एक बड़ी टीम यहां डेरा डाले हुए है. सीएम योगी आदित्यनाथ भी तीन दिन में दो सभाएं कर चुके हैं.

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कोहली के बाद मोदी को राहुल गांधी व तेजस्वी का चैलेंज

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री को एक के बाद एक चैलेंज मिल रहे हैं. गुरूवार को क्रिकेटर विराट कोहली के चैलेंज के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने चैलेंज दिया. लेकिन विराट कोहली की चैलेंज से इन दोनों युवा नेताओं की चैलेंज काफी अलग है. हालांकि विराट कोहली की चैलेंज को पीएम ने स्वीकार कर ली है लेकिन बाकि दो चैलेंज को नहीं स्वीकार किया है.

राहुल का चैलेंज

राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा है कि, प्रिय प्रधानमंत्री जी, मुझे खुशी है कि आपने विराट कोहली की चुनौती को स्वीकार किया है. एक चुनौती मेरी तरफ से भी है. पेट्रोल-डीजल के दाम करिये नहीं तो कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन करेगी फिर और आपको ऐसा करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा.

तेजस्वी के तीन चैलेंज

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने विराट कोहली की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन चैलेंज दिए हैं. तेजस्वी ने लिखा कि युवाओं को रोजगार दें, दलित अत्याचार जीरो कर दें व किसानों को राहत देने का काम करें.

बता दें कि #HumFitTohIndiaFit हैशटैग नाम से केंद्रीय मंत्री और ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने टि्वटर पर एक फिटनेस चैलेंज शुरू किया था. उन्होंने विराट कोहली, रितिक रोशन और सायना नेहवाल को चैलेंज दिया था. जिसको विराट कोहली ने एक्सेप्ट किया और उन्होंने फिटनेस चैलेंज को आगे बढ़ाने के लिए महेंद्र सिंह धोनी, अनुष्का शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था.

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‘महबूबा की मनमानी’ के कारण जम्मू में बढ़ी फायरिंगः बीजेपी विधायक

जम्मू। जम्मू सीमा पर बढ़ती फायरिंग व बिगड़ते हालात के लिए बीजेपी विधायक ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को जिम्मेदार बताया है. इस विवादित बयान के बाद भाजपा विधायक लाल सिंह कठुआ कांड के बाद एक बार फिर घिर गए हैं. कठुआ कांड में आरोपियों को बचाने के चक्कर में इसी विधायक को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था.

क्यों ठहराया जिम्मेदार

जम्मू सीमा पर बिगड़े हालात के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को इसलिए जिम्मेदार ठहराया है क्योंकि उन्होंने रमजान से पहले फायरिंग बंद करने के लिए केंद्र सरकार से अपील की थी. इसके बाद गृह मंत्रालय ने महबूबा की बात मानकर फैसला लिया था. इस फैसले के बाद ही जम्मू में हालात बदतर हो गए हैं.

कठुआ जिले की बशोली सीट से विधायक लाल सिंह ने कहा, “वास्तव में यह दुर्भाग्यपूर्ण है फायरिंग लगातार हो रही है. सरकार ने जब कहा कि रमजान में फायरिंग नहीं होगी तो इसके पीछे उसका नेक इरादा था, लेकिन इस औरत (महबूबा मुफ्ती) की जिद की वजह से आज हालात इतने खराब हुए हैं.”

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान बीते 10 दिन से एक साथ कई सेक्टर में फायरिंग कर रहा है. खौफ के कारण करीब 76 हजार लोगों ने 100 से ज्यादा गांव खाली कर दिए हैं. भाजपा व महबूबा मुफ्ती की गठबंधन वाली सरकार जम्मू में है.

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हरामी व्यवस्थाः डॉक्टर ने दलित मरीज को स्ट्रेचर से धकेल मार डाला

उत्तर प्रदेश। डॉक्टर ने दलित मरीज होने के कारण उसे मरने दिया. मानवता को शर्मशार करने वाली यूपी के जौनपुर की घटना सामने आई है. डॉक्टर ने दलित मरीज को स्ट्रेचर से नीचे धकेल दिया. इसके बाद मरीज की मौत हो गई. आक्रोशित परिजनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

मरीज को छूने एक हजार रुपए मांगी

अमर उजाला की एक खबर के मुताबिक जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मछलीशहर के डॉक्टर व उसके स्टाफ ने अनुसूचित जाति के वृद्ध मरीज को छूने के लिए 1000 रुपए फीस मांगी. फीस ना देने पर परिजनों के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया और स्ट्रेचर से धकेल दिया. मृतक के परिवार ने हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर सीजेएम ने डॉक्टर व उनके स्टाफ समेत छह लोगों पर वाद दर्ज कर थाने से रिपोर्ट तलब की है.

स्ट्रेचर से धकेला

केशव प्रसाद गौतम निवासी परसूपुर, मछलीशहर ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र के अनुसार, 17 मई 2018 को उसके पिता नरेंद्र की तबीयत बहुत खराब थी. वह बाइक से पिता को सीएचसी मछलीशहर ले गया. पिता को स्ट्रेचर पर लिटाया और इमरजेंसी बताते हुए डॉक्टर से तुरंत इलाज करने की गुजारिश की. तब डॉक्टर, नर्स आदि ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए कहा कि मरीज को छूने की फीस एक हजार रुपए लूंगा. विरोध करने पर वे आग बबूला हो गए. जातिसूचक शब्द प्रयोग कर गालियां देते हुए बीमार पिता को स्ट्रेचर से धकेल दिया. गिरने के साथ ही मरीज की मौत हो गई. पुलिस अधीक्षक को घटना की सूचना दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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विपक्षी खेमें के केंद्र में क्यों हैं मायावती

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23 मई की बंगलुरू की तस्वीरें अब भी कई लोगों के जहन से नहीं उतर रही होगी. एक कतार में खड़े देश के दिग्गज नेताओं की तस्वीरें जाहिर है मोदी और अमित शाह की जोड़ी के माथे पर शिकन ले आई होगी. हालांकि यह भाजपा के साथ पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी की जीत है, लेकिन इन दोनों ने ये नहीं सोचा होगा कि उनके खिलाफ इतनी जल्दी विपक्षी दलों का इतना बड़ा जमावड़ा लग जाएगा. इस कतार में राहुल और सोनिया गांधी से लेकर मायावती तक, ममता बनर्जी से लेकर चंद्रबाबू नायडू तक, अखिलेश यादव से लेकर तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन तक, शरद पवार से लेकर अजीत सिंह तक और केजरीवाल से लेकर लेफ्ट के सीताराम येचुरी तक एक-दूसरे का हाथ थामे दिखें.

विपक्ष के इस गठबंधन से भाजपा डरी हुई है. वह इसलिए ज्यादा डरी है क्योंकि पिछले दो मौके पर विपक्ष जब भी एकजुट हुआ है भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है और मोदी और शाह की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई है. अगर मोदी और शाह कर सकते तो वह हर हाल में गोरखपुर और फूलपुर का चुनाव जीतना चाहते, अगर ये दोनों कर सकते तो हर हाल में कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनाकर विपक्षी दलों की एकजुटता को हताश करने की कोशिश करते. लेकिन भाजपा की ये करिश्माई जोड़ी ऐसा नहीं कर सकी.

23 मई की शपथ ग्रहण की दर्जनों तस्वीरों में जो तस्वीर सबसे खास रही और अखबारों और चैनलों में छाई रही वो मायावती और सोनिया गांधी की हाथ थामें तस्वीर रही. तो मायावती और अखिलेश यादव की बातचीत की तस्वीर भी चर्चा के केंद्र में है. यह तस्वीर कर्नाटक में सरकार के गठन में मायावती की महत्वपूर्ण भूमिका की ओर साफ इशारा कर रहा है. क्योंकि कर्नाटक चुनाव में बसपा से गठबंधन का फायदा कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस को मिला.

इसे संभवतः बसपा का साथ ही कहा जाएगा कि भाजपा के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद जद (एस) ने अपना पिछला प्रदर्शन बरकरार रखा. तो बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की राजनीतिक दूरदर्शिता ने कर्नाटक में कांग्रेस को हार के बाद भी बचाए रखा. अगर मायावती ने सोनिया गांधी और फिर देवगौड़ा को फोन नहीं किया होता तो भाजपा आराम से कर्नाटक में अपनी सरकार बना चुकी होती. लेकिन मायावती के एक फोन ने भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर दी. इसने जहां कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बना दी तो वहीं विपक्षी एकता की नींव भी रख दी है.

तो क्या यह समझा जाए कि तीसरा मोर्चा बनने की स्थिति में मायावती में उसका नेतृत्व करने की संभावना है? यह सवाल इसलिए आ रहा है कि हरियाणा में बसपा से गठबंधन के बाद इनेलो नेता अभय चौटाला लगातार मायावती के नेतृत्व में तीसरे मोर्चे की घोषणा कर रहे हैं. तो दूसरी ओर ममता बनर्जी भी मायावती पर मेहरबान हैं. पिछले दिनों में ऐसा कई बार हुआ, जब ममता बनर्जी ने मायावती के बयान का समर्थन किया. अखिलेश यादव भी यूपी में बसपा के साथ खड़े हैं. बिहार से राजद भी मायावती के नाम पर लगभग राजी है.

तो क्या यह माना जाए कि तमाम दल मायावती में तीसरे मोर्चा का नेतृत्व करने की संभावना देख रहे हैं, और उन्हें लगता है कि ‘जय श्रीराम’ के नारे को ‘जय भीम’ का नारा ही चुनौती दे सकता है? जैसा कि पिछले दिनों बिहार के नेता विपक्ष तेजस्वी यादव कह चुके हैं. दलित समुदाय भले ही अलग-अलग राज्यों में तमाम अलग-अलग पार्टियों को वोट करते हों, उनकी सर्वमान्य नेता मायावती ही हैं. इस बात को इसलिए भी जोर देकर कहा जा सकता है क्योंकि मायावती के अलावा अम्बेडकरवाद का झंडाबरदार कोई दूसरा नहीं दिखता. तो 23 मई की तस्वीरों ने भी काफी कुछ कह दिया है.

ऐसे में इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि विपक्ष मायावती के नाम पर एकमत हो जाए और इसी बहाने देश भर में फैले 16 फीसदी दलित वोटों को अपने खेमें में एकजुट कर ले. यह इसलिए भी संभव है क्योंकि फिलहाल राहुल गांधी वो करिश्मा कर पाने में सफल नहीं दिख रहे हैं जिसकी कांग्रेस पार्टी को आस है. और भाजपा और कांग्रेस के बाद बसपा देश की तीसरी बड़ी और इकलौती ऐसी पार्टी भी है जिसका वोट बैंक देश भर में है.

जिस तरह सोनिया गांधी और मायावती की करीबी देखी गई, उसमें एक संभावना यह भी बनती है कि कांग्रेस पार्टी फिलहाल राहुल गांधी को आगे न करे और यूपीए के बैनर तले मायावती के नाम पर राजी होते हुए महागठबंधन तैयार करे. ऐसे में 2019 का मुकाबला दो ध्रुवों के बीच हो जाएगा, क्योंकि तब मोदी और अमित शाह सियासी अनुभव के आधार पर मायावती को नहीं घेर पाएंगे, न तो सीधे मायावती पर कठोर टिप्पणी कर पाएंगे. क्योंकि भाजपा मायावती को लेकर जितनी ज्यादा कठोर बयानी करेगी, दलित-आदिवासी समाज के 22 फीसदी मतदाताओं के मायावती के पीछे मजबूती से खड़ा होने की संभावना बढ़ती जाएगी.

लेकिन इन तमाम सवालों के बीच सबसे बड़ी चुनौती मायावती के सामने है. क्योंकि विपक्ष अगर मायावती के नाम पर भरोसा जताने को राजी होता है तो मायावती को भी विपक्ष को भरोसा दिलाना होगा कि वह तीसरे मोर्चे की नेता की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं. हालांकि देश में तीसरा मोर्चा बनेगा या फिर सोनिया गांधी के नेतृत्व और मायावती के चेहरे को आगे करते हुए यूपीए फिर से मजबूती से खड़ा होगा यह इस साल के आखिर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव के बाद साफ हो सकेगा.

इन तीनों राज्यों में सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है तो बसपा भी यहां महत्वपूर्ण धुरी है. इन राज्यों में कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन की खबरें भी आ रही हैं. अगर ऐसा होता है तो यहां से भाजपा की विदाई तय है. तब मायावती और मजबूत होकर उभरेंगी और जाहिर है ऐसे में गठबंधन की राजनीति में उनका कद और ज्यादा बढ़ेगा. और अगर दोनों अलग-अलग लड़ते हैं और बसपा बेहतर प्रदर्शन करती है तो उसका प्रदर्शन कांग्रेस को आईना दिखाने के लिए काफी होगा. अगर लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं होने और यूपी में 19 सीटों पर सिमट जाने के बावजूद मायावती गठबंधन के केंद्र में दिख रही हैं तो इसकी वजह उनका वह वोटर है जो देश के हर गांव में मौजूद है.

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एक्टर परेश रावल ने मोदी को बताया जीजा

नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकार बनने के बाद भी घमासान जारी है. कर्नाटक में कुमारस्वामी के सीएम पद की शपथ ग्रहण के दौरान पूरा विपक्ष एकजुट होकर हो गया था. इस बात को लेकर एक्टर परेश रावल चिड़चिड़ दिख रहे हैं. परेश रावल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीजा तक कह दिया. इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

क्यों कहा मोदी को जीजा

बुधवार को कुमारस्वामी ने कर्नाटक सीएम पद की शपथ ली. इस मौके पर मायावती, ममता बनर्जी, सोनिया गांधी से लेकर तमाम विपक्षी नेता वहां मौजूद थे. तभी ममता बनर्जी ने ट्विटर पर कुमारस्वामी के लिए कुछ लिखा. इसके बाद परेश रावल ने ट्वीट किया कि, देख तमाशा देख और एक टेक्सट फोटो शेयर की जिसपर लिखा है कि, “मोदीजी को रोकने के लिए विरोधी ऐसे खड़े हैं जैसे जीजा को रोकने के लिए साली दरवाजे पर खड़ी हो जाती हैं. जबकि, पता साली को भी होता है कि जीजा तो आएगा ही.”

जीजा-साली बात को लेकर ममता ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है. लेकिन वहां पर कई यूजर्स ने जवाब लिखा है. बता दें कि कर्नाटक में ज्यादा सीट लाने के बाद भी बीजेपी सरकार बनाने से चूक गई. इसके बाद विपक्षी दलों को नई ऊर्जा मिल गई है और ऐसा कहा जा रहा है कि सभी एकजुट होकर मोदी को पटखनी देना चाहते हैं.

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दीपिका बनेगी रणवीर की दुल्हन

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मुंबई। वर्ष 2018 में एक और बॉलीवुड हस्ती की शादी होने वाली है. सोनम कपूर, नेहा धूपिया, हिमेश रेशमिया की शादी के बाद दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की खबर ने खलबली मचा दी है. इनकी शादी की खबर सुनकर फैंस काफी खुश हो गए हैं.

एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के मुताबिक दोनों इसी साल 18-20 नवंबर के बीच शादी करने वाले हैं. इनका शादी मुंबई में ही होगी. हालांकि इनके रिश्तों को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही थी और सोनम कपूर ने तो एक इंटरव्यू में जिक्र भी किया था.

यहां पर थोड़ी निराशा हो सकती है क्योंकि अभी तक दोनों में से किसी ने भी इस खबर की पुष्टि नहीं की है. दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की खबरें तो वैसे ही काफी दिनों से आ रही हैं. इससे पहले DNA की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों की फैमिली में शादी की डेट्स पर बात चल रही है रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि नंवबर में शादी के चलते दीपिका की ने अपनी टीम के सदस्यों को छुट्टी लेने से मना कर दिया है. वैसे बॉलीवुड की अफवाहों के बारे में तो जानते ही हैं.

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दिल्ली का यह नामी स्कूल बच्चों के दिमाग में भर रहा आरक्षण विरोधी सवाल

प्रतिकात्मक फोटो

नई दिल्ली। ये देश की राजधानी का बड़ा स्कूल है जो संविधान के विरोध में बच्चों को तैयार कर रहा है. संवैधानिक अधिकारों को राष्ट्रीय बाधा व असमानता बता रहा है. इसके सवालों को देखकर लगता है कि बच्चों को आरएसएस व आईटी सेल द्वारा जारी सवालों के आधार पर बच्चों को पाठ पढ़ा रहा है. इतना ही नहीं स्कूल प्रशासन से बात करने पर इनकी मानसिकता का छिपा अध्याय भी पढ़ने को मिला.

एक नजर सवाल पर

शहीद राजपाल डीएवी स्कूल, दयानंद विहार, दिल्ली ने क्लास आठ के बच्चों के लिए छुट्टीयों के लिए अंग्रेजी का सवाल दिया है. इनका सवाल नंबर-04 कहता है कि,

“आरक्षण देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. आरक्षण के कारण अयोग्य को मौका मिलता है और योग्य व्यक्ति को मौका नहीं मिलता. इससे देश में असमानता पैदा हो रही है.”

अब आप खुद सोचिए कि अंग्रेजी भाषा के पेपर में ऐसे सवाल का क्या संबंध है? संवैधानिक अधिकार को देश विरोधी बताना क्या देशहित है?
स्कूल का प्रश्न पत्र

आरएसएस व आईटी सेल का सवाल

फेसबुक या व्टॉसऐप पर हिंदू संगठन या आईटी सेल द्वारा इस तरह के सवाल अक्सर देखने को मिलते हैं. कई प्रकार के आरक्षण विरोधी असंवैधानिक फेसबुक पेज व ग्रुप में ठीक इसी प्रकार के सवाल व विचारों को फैलाने का काम करते हैं. जिनके पेज या वॉल पर भयंकर कट्टरवादी कमेंट, धमकी, गाली पढने को मिलती है. इस प्रकार के असंवैधानिक तत्वों को बढावा देने का काम शहीद राजपाल डीएवी स्कूल कर रही है.

बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहा स्कूल

इस तरह के सवाल को देकर बच्चों के दिमाग में बारूद भरने का काम किया जा रहा है. मां-बाप स्कूल में बच्चों को सभ्य-सुशील व शिक्षित बनने के लिए भेजते हैं जो कि अनुशासन सीखे और समाज को विकास की राह पर बढाए. लेकिन बच्चों को ही असंवैधानिक पाठ पढाकर देश के भविष्य को बिगाड़ने की साजिश की जा रही है. बच्चों के अंदर जातिवाद का जहर भरा जा रहा है.

स्कूल का कहना

सवाल मिलने पर हमनें सबसे पहले स्कूल की वेबसाइट चेक की तो सवाल उनके वेबसाइट पर मौजूद मिला. इसके बाद इनके दिए गए नंबर हमनें कॉल कर बातचीत की लेकिन तीन-चार नंबरों पर बात करने के बाद हमें गोल-गोल घुमाया गया. इतना ही नहीं सवाल पूछने पर स्कूल प्रशासन हंसकर बात टाल दिया. इससे साफ जाहिर होता है कि स्कूल प्रशासन को अपनी असंवैधानिक करतूत पर कोई अफसोस नहीं.

रिपोर्ट- रवि कुमार गुप्ता

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सुप्रीम कोर्ट का फरमान, डीयू की प्रेग्नेंट स्टूडेंट नहीं दे सकती परीक्षा

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नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक गर्भवती छात्रा को परीक्षा में नहीं बैठने के कारण सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. लेकिन छात्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई. कोर्ट ने गर्भवती छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है. इससे छात्रा को झटका लगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने संबंधी याचिका पर अंतरिम राहत देने से मना कर दिया. कानून (लॉ) की छात्रा गर्भवती होने की वजह से कई लेक्चर क्लास में अनुपस्थित थी. उपस्थिति नहीं होने के कारण परीक्षा में बैठने के योग्य नहीं है. फॉर्थ सेमेस्टर की छात्रा की उपस्थिति कम होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद उसने कोर्ट से मदद की गुहार लगाई थई.

जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने परीक्षा देने संबंधी उसकी याचिका को खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता के एक पेपर की परीक्षा बुधवार को हुई. छात्रा के वकील आशीष विरमानी और हिंमाशु धुपर इस मामले में मंगलवार को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और मामले की तत्काल सुनवाई करने की मांग की ताकि छात्रा परीक्षा में बैठ सके लेकिन फायदा ना हो सका.

विश्वविद्यालय की तरफ से पेश वकील मोहिंदर जेएस रूपल ने कहा कि फैकल्टी ऑफ लॉ के कानून और बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के नियम के मुताबिक परीक्षा  में बैठने के लिए न्यूनतम उपस्थिति 70 फीसदी होना अनिवार्य है. हमारी ओर से कानून का पालन किया जा रहा है.

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नॅन्सी फ्रेझर और सामाजिक न्याय की अवधारणा

समकालीन वास्तविकता में जीन कुछ गिने चुने विचारक एवं चिंतको का नाम जागतिक परिपेक्ष में आदरसे लिया जाता है, उनमे से एक नाम ‘नॅन्सी फ्रेजर’ जी का है. सामजिक सुधार के क्षेत्र में ‘चिकत्सक सिद्धांतवादी’ नॅन्सी अपने आप को ‘फ्रॅंकफुर्ट स्कूल’ से संबधित मानती है. जर्मनी स्थित ‘फ्रॅंकफुर्ट’ शहर के ‘इन्स्टिटूट फ्युर सोत्सियालफोर्शुंग’ अर्थात समाज संशोधन संस्थान में ‘फ्रांकफुर्ट स्कूल’ के विचारधारा कि शुरुवात पोथीनिष्ठ मार्क्सवाद पर उठे वैचारिक मतभेद की अपरिहार्यता थी. सन १९२० के दशक से चली आ रही वैचारिक चर्चाये तथा मूलगामी मार्क्सवादी विचारधारा के मतभेदों के बिच ‘फ्रॅंकफुर्ट स्कूल’ की निर्मिति यह एक महत्वपूर्ण कदम था. तत्कालीन कथित साम्यवादी विचारधारा के उपयोजन कार्यक्रम से असहमत मार्क्सवादी चिंतको ने इस ‘स्कुल’ के माध्यम से ‘नव मार्क्सवाद’ की नीव रखी. जिसमे टेओडोर आडोर्नो तथा युर्गेन हाबरमास आदि जर्मन चिंतक तथा फ्रेडरिक जेमिसन जैसे अमेरिकन विचारक प्रमुख है. नॅन्सी फ्रेजर अपने आप को इसी ‘फ्रॅंकफुर्ट स्कूल’ का चिंतक मानने के साथ ही समकालीन जागतिक परिपेक्ष में अपने चिकित्सक सिद्धांतो के माध्यम से उपयोजन का नवाचार प्रस्तुत करती है.

नॅन्सी फ्रेजर का जन्म २० मई १९४७ को अमेरिका में हुवा. सन १९६९ में तत्वज्ञान विषय में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद सन १९८० में उन्होंने ‘दी ग्रॅज्युएशन सेंटर ऑफ़ दी सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क’ से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.

तदोपरांत कुछ वर्ष ‘नॉर्थवेस्टर्न’ विश्वविद्द्यालय के तत्वज्ञान विभाग में अध्यापन का कार्य शुरू कर न्यू यॉर्क स्थित ‘न्यू स्कूल’ में भी तत्वज्ञान विषयक अध्यापन कार्य शुरू किया. फिलहाल जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन तथा नेदरलैंड आदि देशो के सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालयो मे नॅन्सीजी आगंतुक अध्यापन का कार्य करती है.

सामाजिक न्याय की अवधारणा का तत्वज्ञानात्मक विश्लेषण यह नॅन्सी फ्रेजर जी का महत्वपूर्ण अकादमिक तथा सैद्धांतिक कार्य माना जाता है. साथ, ही समकालीन दौर के ‘आइडेंटिटी पॉलिटिक्स’ तथा उदारमतवादी स्त्रीवाद की गहन समीक्षा कर वैश्वीकरण के परिपेक्ष में अपने विचार रखती है.

आज समस्त मानवी समाज वैश्वीकरण के काल अनेक प्रकार के स्थित्यंतरो के बिच जूझ रहा है. वास्तविकतः वैश्वीकरण का बृहद परिणाम समस्त सामाजिक तबको पर हुवा है. अपितु वैश्विकरण के परिपेक्ष में बदलती सामाजिक न्याय, समता, बंधुता आदि मूल्य व्यवस्था एवं शास्वत मानवता के विकास की धारणा को बनाये रखने के लिए कार्य होना अत्यावश्यक है. इसी बिच नॅन्सी फ्रेजर के विचार महत्वपूर्ण साबित होते है. वैश्विक परिपेक्ष में जहा सामाजिक न्याय की अवधारणा आश्चर्य जनक रूप से तथा सापेक्षतापूर्ण ढंग से परिवर्तित होती जा रही है वही नॅन्सी फ्रेजर सामाजिक न्याय का तत्वज्ञानात्मक विश्लेषण कर उसके जागतिक उपयोजन का कार्यक्रम प्रस्तुत करती है.

आधुनिक समाज में भी जहां जागतिक जनसंख्या का बहुसंख्य हिस्सा सामाजिक न्याय के अभाव संकट से जूझ रहा है. सत्तावादी मानसिकता के समतामूलक समाज के सपनो के अनूपयोजन कारको के कारण सामाजिक अन्याय को बढ़ावा मिल रहा है. यह केवल एक राष्ट्र या समाज की स्थिति नहीं अपितु समूचे विश्व परिपेक्ष की स्थिति है. नॅन्सी फ्रेजर इसी स्थिति पर भाष्य कर उसे सुधारने के लिए सामजिक बदलाव का मॉडल प्रस्तुत करती है. वह आशा व्यक्त करती है की इस प्रकारसे सामाजिक व्यवस्था का निर्वहन किया जाए जिसके उपयोजन से सभी समाज घटक एक ही पायदान पर हो. सहभागी समता का यह तत्व सुचारु रुप से चलाने हेतु नॅन्सी नया सैद्धांतिक मॉडल प्रस्तुत करती है. जिसे वे ‘पार्टिसिपेटरी पॅरिटी’ अथवा ‘सहभागितावादी समता’ का सिद्धांत कहती है.

सहभागितावादी समता का सिद्धांत मूलतः पहचान (रिकग्नाइझेशन) तथा पुनर्वितरण (रेडिस्ट्रीब्यूशन) इन दो तत्वावधानो पर खड़ा है. मात्र, आधुनिक काल में वह बिना सहभागिता या प्रतिनिधित्व (रिप्रेसेंटेशन) के पूर्ण नहीं हो सकता है. यह त्रिमितीय परिमाण ही सहभागितावादी समता या सामजिक न्याय के सिद्धांत को पूर्णत्व को प्रदान कर सकता है. अपितु इसी सिद्धांत को उन्होंने ‘पोस्ट वेस्टफेलियन डेमोक्रेटिक जस्टिस थेअरी’ अथवा ‘उत्तर वेस्टफेलियन गणतांत्रिक न्याय सिद्धांत’ कहा है. उपरोक्त, पहचान, पुनर्वितरण तथा प्रतिनिधित्व आदि से निर्मित त्रिमितीय परिमाण सामाजिक न्याय के समतामूलक सिद्धांत के उपयोजन हेतु परस्पर व्यवहार पर सकारात्मक गहन प्रभाव प्रसारित करता है. जो की तांत्रिक तथा निति निर्धार के कार्य में मौलिक सिद्ध होता है. अथवा बगैर एक दूसरे तत्व के सामाजिक न्याय की अवधारणा का अपयोजन सिद्ध नहीं हो सकता.

इसी लिए नॅन्सी फ्रेजर ‘No redistribution or recognition without representation’ अपनी इस ऐतिहासिक घोषणा के माध्यम से ‘पुनर्वितरण एव पहचान, प्रतिनिधित्व के तत्व के बिना अपूर्ण’ होने की बात करती है.

वैश्वीकरण के दौर में जहा सामाजिक न्याय की अवधारणा पूर्णतः बदल रही है और समाज का हर एक तबका खुद की व्याख्या न्याय के संदर्भ में अमल में लाना चाहता हो उसी बिच संसाधनों का समानतापूर्वक पुनर्वितरण एवं नव आर्थिक व्यवस्था में मानवीय अधिकारों के मूलाधारो पर विराजित पहचान का अधिकार बगैर प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के बुनियादी उपयोजन से कदापि संभव नहीं हो सकता.

अपितु, समकालीन परिपेक्ष में मानवाधिकारो का बढ़ता हनन वैश्विक परिपटल पर गहन चिंता का कारण बनता जा रहा है. वही फासीवादी सत्ताधारी ताकते शोषित वर्ग को अत्याधिक गुलामी की और खींच रही है. गरीबी अमीरी के बिच गहराती खाई घोर निराशा पैदा कर रही है. समाज का शक्तिशाली या सत्ताधारी वर्ग समाज के दबे – कुचले या शोषित वंचित तबके को और दबा कर सत्ता का दुरुपयोग करता है. इस शोषित वर्ग की सांस्कृतिक विरासते ध्वस्त कर अपना शासन मजबूत करने का प्रयास करता है. जिसके कारण आर्थिक, सांस्कृतिक एव राजनैतिक क्षेत्र में परिवर्तन शोषित वर्ग को सामाजिक न्याय का लाभ कराने हेतु उपरोक्त त्रिमितीय परिमाणो का उपयोजन महत्वपूर्ण हो जाता है. यद्यपि, मानवीयता के गहन सामाजिक संकट के बीच जुझ रहे समाज पर यदी पुनर्वितरण, पहचान एवं  प्रतिनिधित्व के त्रिमितीय तत्व के उपयोजन का अभाव समस्त शासक, सत्ताधारी एवं विकास के लाभकारी रहे वर्ग के लिये ‘राजनैतिक आत्महत्या’ के सामान सिद्ध होगा. यद्यपि, सामाजिक न्याय कि अनुपलब्धी ऐसे अमानवीय अन्याय को जन्म देगी. नॅन्सी फ्रेजर के यह विचार समकालीन वास्तविकता मे अत्याधिक प्रासंगिक साबित होते है.

वैश्विक पररीपटल पर सातत्यपूर्ण गहन सामाजिक बदलाव के समीक्षणात्मक तथा चिकित्सक चिंतन से युक्त नॅन्सी फ्रेजर अपनी किताबो के माध्यम से आज इसी विषय को आगे ले जा राही है. जिसमे, सामाजिक न्याय के संदर्भ मे ‘रिडिस्ट्रिब्युशन अँड रेकग्नाईझेशन अ पॉलिटिकल, फिलॉसॉफिकल एक्सचेंज’, तथा ‘ऍडींग इंसल्ट टू इंज्युरी’ आदी प्रमुख है. एक चिकित्सक चिंतक होने के नाते नॅन्सी फ्रेजर सामाजिक न्याय पर प्रस्तुत किया गया चिंतन बदलते दौर मे महत्वपूर्ण है.

लेखक-कुणाल रामटेके

विद्यार्थी, दलित-आदिवासी अध्ययन एवं कृती विभाग

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्था, मुंबई

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SSC पेपर लीक मामले में सीबीआई का बड़ा एक्शन

नई दिल्ली। एसएससी पेपर लीक होने के मामले को लेकर सीबीआई ने केस दर्ज किया है. पेपर लीक मामले को लेकर छानबीन करने की खबर भी मिल रही है. हालांकि एसएससी पेपर लीक मामले को लेकर सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी. नेटवर्क 18 की एक खबर के अनुसार एसएससी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. सीबीआई इस मामले की गहनता से जांच कर रही है. सीबीआई ने करीब बारह जगहों पर छापेमारी कर सूत्र तलाश रही है. सीबीआई के सूत्रों के अनुसार सात छात्रों और 9 अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हुई है. उल्लेखनीय है कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सीजीएल 2017 के टियर2 की परीक्षा के प्रश्‍न पत्र और उत्तर पुस्तिका लीक हो गए थे. छात्रों का आरोप था चयन आयोग में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के कारण पेपर लीक हुए हैं. इसको लेकर छात्रों ने देशभर में प्रदर्शन किया था.

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