तूतीकोरिन में हमलावार पुलिस पर भड़क उठे रजनीकांत

PC-zeenews

तमिलनाडु। तूतीकोरिन में मारे गए लोगों से मिलने सुपरस्टार रजनीकांत पहुंचे. वहां पर उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. इस दौरान रजनीकांत भावुक दिखे लेकिन पुलिस की क्रूरता पर रजनीकांत भड़क गए और पुलिस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

बुधवार को अभिनेता से नेता बने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने तूतीकोरिन का दौरा किया. वेदांता के स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में घायल हुए लोगों से अस्पताल जाकर मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पुलिस फायरिंग की इजाजत देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही.

साथ ही रजनीकांत ने इससे पहले पुलिस फायरिंग के अगले दिन भी एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी. बता दें कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन के खिलाफ पिछले तीन महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन में 22 मई को अचानक उग्र हो गया. जिसमें पुलिस ने फायरिंग की और 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे. इस मामले में हंगामा बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया. साथ ही राज्य सरकार ने स्टरलाइट प्लांट का लाइसेंस रद्द कर दिया. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

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गौरी लंकेश हत्‍याः SIT ने दाखिल की 650 पेज की चार्जशीट

नई दिल्ली। गौरी लंकेश हत्या के मामले में एसआईटी ने चार्जशीट तैयार कर ली है. एसआईटी ने 650 पेज का चार्जशीट दाखिल की है जिसमें एफएसएल अधिकारियों और आरोपी केटी नवीन और प्रवीण सहित 131 लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं. गौरी लंकेश की हत्या के बाद मामला काफी बढ़ गया था और लोग सड़कों पर उतर आए थे. इसके बाद कर्नाटक सरकार ने एसआईटी की गठन कर मामले की जांच आरंभ कराई.

बता दें कि गौरी लंकेश कन्नड़ की साप्ताहिक पत्रिका की संपादक थीं. गौरी लंकेश की 5 सितंबर 2017 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. गौरी राइट विंग की कट्टर आलोचक थीं. इस मामले की जांच के लिए कर्नाटक सरकार ने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है. सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि हत्यारों ने हत्या वाले दिन लंकेश के घर की दो बार रेकी की थी.

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छह दलितों को जलाने वाले दरिंदे की दया याचिका पर राष्ट्रपति…

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने कार्यकाल के पहली फांसी की सजा पर दया याचिका खारिज कर दी है. करीब दस माह तक चर्चा करने के बाद राष्ट्रपति ने दया याचिका को खारिज किया. पीड़ित परिवार को न्याय देने के लिए कुख्यात दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई थी.

छह लोगों को जलाने का मामला

यह मामला बिहार के एक परिवार के छह दलित लोगों की हत्या का है. बता दें कि भैंस चुराने के आरोप से शुरू हुआ विवाद छह लोगों की हत्या के बाद थमा था. जगत राय पर विजेंद्र महतो ने भैंस चुराने का आरोप लगाया था. इस बात से जगत राय भड़क उठा और विजेंद्र महतो के परिवार को सोते समय जला दिया. इस घटना में विजेंद्र महतो की पत्नी और उसके पांच बच्चे जलकर मर गए.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पांच सला पहले ही जगत राय को फांसी दिए जाने की सजा को रोकने से मना कर दिया था. जिसके बाद उसने राष्ट्रपति से दया याचिका की गुहार लगाई थी. अमर उजाला की खबर के मुताबिक राष्ट्रपति ने मंगलवार को फांसी की दया याचिका को खारिज कर दी है.

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हरामी व्यवस्थाः दलित की मूंछ साफ कर देशभर के दलितों को धमकी

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गुजरात। गुजरात में दलित की मूंछ व नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने पर कुछ बदमाश उसे उठाकर ले गए और फिर उससे रेजर द्वारा मूंछ साफ करवाई. उन्हीं बदमाशों ने इसकी वीडियो बना कर दलित को मूंछ ना रखने व नाम के आगे सिंह ना जोड़ने की धमकी दी. एक बार फिर दलित के मूंछ व सिंह का मसला गुजरात में फैली जातिवादी दहशतगर्दी को बता रहा है.

दरअसल इस मामले से संबंधित एक वीडियो वायरल हो रही है. नेटवर्क 18 के मुताबिक मामला गुजरात के शहर बनासकांठा का है. सूत्रों का कहना है कि एक दलित परिवार ने मुंडन कार्यक्रम के निमंत्रण कार्ड पर नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने से ऊंची जाति के लोग उससे नाराज़ थे. इसके बाद गुस्साए ऊंची जाति वालों ने इस घटना को अंजाम दिया.

मूंछ पर चलाई रेजर

नाम के आगे ‘सिंह’ जोड़ने से बौखलाए ऊंची जाति वालों ने दलित युवक को उठाकर एकांत जगह पर ले आए. इसके बाद रेजर से उसकी मूंछ साफ करवाई. दलित युवक वीडियो में माफी मांगता रहा लेकिन बदमाशों पर इसका कोई असर नहीं हुआ. इसके बाद उस वीडियो के जरिए बदमाशों ने दलितों को धमकी दी और इससे सबक लेने की बात कही. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

गुजरात में इस तरह के कई मामले

गुजरात में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं. हालही में फरवरी माह में साबरकांठा जिले के गोराल गांव में ठाकोर समुदाय के आठ लोगों ने 23 वर्षीय अल्पेश पंड्या के साथ पहले मारपीट की, फिर जबरन उसकी मूंछ काट दी. इसके बाद दलित युवाओं ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ दी थी. इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद में भी ऐसी घटना देखनी की मिली थी. आरोप था कि लड़के ने फेसबुक प्रोफाइल में खुद के नाम के आगे सिंह लिख रखा था. जिसको लेकर उसे धमकियां भी मिल रही थीं. बाद में घर पर हमला बोला.

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राजस्थान के विश्वविद्यालय में SC/ST सीटों पर भर्ती का भंडा फूटा!

राजस्थान। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में आरक्षण रोस्टर में हो रही नियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. विश्वविद्यालय के बड़े पदों पर बैठे अधिकारी अपनी मनमानी कर एससी व एसटी आरक्षित सीटों पर वैकेंसी नहीं निकाल रहे हैं जबकि यूजीसी इसकी मंजूरी नहीं देता है. यानी कि नियमों को ताकर पर रखकर पिछड़े तबके के शिक्षित लोगों का संवैधानिक अधिकार छिना जा रहा है.

इसको लेकर कई प्रकार की बातें कही जा रही हैं. इस संदर्भ में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, एमएचआरडी, यूजीसी, राज्यपाल, मुख्यमंत्री से लेकर एससी व एसटी वेलफेयर, नई दिल्ली समेत दस विभागों को आवेदन लिखा है. साथ ही जांच कराकर योग्य उम्मीदवारों को उनका हक देने की बात कही है.

इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक रोस्टर संघर्ष समिति, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राजस्थान) ने इस मुद्दे को उठाया है. इस मामले को लेकर हमारी बात प्रोफेसर बीआर बमनिया व डॉ. हरिश से बात हुई. इनका कहना है कि विश्वविद्यालय खुलेआम संविधान का उल्लंघन कर रहा है. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के अधिकारों को छिना जा रहा है. इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा गैर शैक्षिक एलडीसी पदों के रोस्टर में महिलाओं के पदों को अलग से आवंटित नहीं किया गया है जिससे महिला आरक्षण का भी अवहेलना हुआ है. कुल मिलाकर समिति का कहना है कि विवि ने वर्ष 2018 में समस्त भर्तियां आरक्षम नितियों के खिलाफ की है.

उच्चस्तरीय जांच

इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक रोस्टर संघर्ष समिति की ओर से कमिटी गठन कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. साथ ही भर्ती प्रक्रिया को पूर्णतया प्रभाव से स्थगित किया जाए जिससे आरक्षण नियमों का पालन हो, संवैधानिक अधिकार का हनन से होने बचे व ए ग्रेड प्राप्त विवि की गरिमा बरकरार रहे. बता दें कि 2018 की भर्तियों का विज्ञापन में साफ तौर पर इनको देखा जा सकता है. साथ ही विवि की वेबसाइट पर भी जानकारी मौजूद है.

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दलित दस्तक मैग्जीन का जून 2018 अंक ऑन लाइन पढ़िए

दलित दस्तक मासिक पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. जून 2012 से यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित हो रही है. मई 2018 अंक प्रकाशित होने के साथ ही पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. हम आपके लिए सांतवें साल का पहला अंक लेकर आए हैं. इस अंक के साथ ही दलित दस्तक ने एक नया बदलाव किया है. इसके तहत अब दलित दस्तक मैग्जीन के किसी एक अंक को भी ऑनलाइन भुगतान कर पढ़ा जा सकता है.

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पतंजलि सीमः जियो से भी सस्ता अनलिमिटेड ऑफर

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नई दिल्ली। स्वदेशी फॉर्मूला पर फिट बैठने वाले बाबा रामदेव ने पतंजलि को टेलीकॉम सेक्टर से जोड़ दिया है. अब पतंजलि की ओर से टेलीकॉम सेवाएं दी जाएंगी. इसके लिए पतंजलि ने देश की सरकारी कंपनी बीएसएनएल के साथ हाथ मिलाया है. पतंजलि सीम को लेकर काफी चर्चाएं हो रही है. ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि इसमें आपको क्या फायदा मिलेगा.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक पतंजलि के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पतंजलि स्वदेशी समृद्ध कार्डधारकों को देश की पूर्ण स्वदेशी टेलीकॉम कंपनी ‘बीएसएनएल’ न्यूनतम शुल्क पर एक प्लान उपलब्ध कराएगी.

इसके फायदे जानें

बताया जा रहा है कि पतंजिल ने एक प्लान का जिक्र किया है. इस प्लान पर 144 रुपये के न्यूनतम शुल्क पर सभी नेटवर्क पर असीमित कॉल, प्रतिदिन 2 जीबी डाटा मिलेगा. साथ ही इसमें कोई रोमिंग चार्ज नहीं होगा और 100 एसएमएस प्रतिदिन करने की सुविधा मिलेगी. मतलब की जियो के बाद पतंजलि ने धमाल मचा दिया है.

प्लान को जारी करने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने बीएसएनएल का सिम लांच किया. इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा कि बीएसएनएल देश की पूर्ण स्वदेशी टेलीकॉम कंपनी है. कंपनी के पांच लाख काउंटर पर पतंजलि स्वदेशी समृद्ध कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे. पतंजलि इसके लिए जोर शोर के साथ काम कर ही है.

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हरामी व्यवस्थाः प्रेम विवाह करने पर दलित लड़के की आंख निकाल कर मार डाला

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केरल। एक दलित ईसाई लड़के को ऊंची बिरादरी के ईसाई लड़की से शादी करने के चार दिन बाद ही मौत के घाट उतार दिया. दलित लड़के के शरीर पर जख्म के निशान व उसकी गायब आंखे बता रही थी कि उसको कितनी बेरहमी से मारा गया था. रविवार को शव मिलने पर मृतक लड़के केविन की पत्नी नीनू फफक कर रो पड़ी.

एक अंग्रेजी वेबसाइट ‘अलट्रा’ की खबर के मुताबिक 24 मई को नीनू (लड़की) व केविन (मृतक लड़का) ने शादी की थी. नीनू ने शादी करने से पहले इसकी जानकारी घर पर दी लेकिन दलित लड़के के साथ शादी करने के कारण कोई नहीं आया. फिर भी नीनू ने केविन के साथ रजामंदी से शादी की.

पुलिस को थी खबर

केविन के अपहरण की जानकारी नीनू ने गांधी नगर पुलिस थाना में दी. पुलिस स्टेशन में जाकर वह अपने पति केविन को बचाने के लिए गुहार लगाती रही लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और आखिरकार जिसका डर था वही हुआ. हालांकि लोकल मीडिया के दबाव के बाद पुलिस जागी लेकिन तबतक केविन की हत्या हो चुकी थी. नीनू ने जिस हसरत के साथ केविन का हाथ पकड़ा था, वह चार दिन के अंदर ही ऊंची बिरादरी वाली दरिंदों ने छिन लिया.

हत्या में नीनू का भाई व सीपीआई…

इस हत्या के संबंध में कुल दस लोगों पर केस दर्ज किया गया है. इस हत्या में नीनू के भाई व सीपीआई (एम) के यूथ विंग के दो कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम बताई जा रही है. पुलिस इस मामले को लेकर जांच में जुटी है. पुलिस ने लापरवाही करने वाले गांधी नगर पुलिस थाना के सब-इंस्पेक्टर को निलंबित करने के साथ-साथ कोट्टायम के पुलिस अधीक्षक (प्रभारी) मोहम्मद रफीक का ट्रांसफर कर दिया है. पुलिस ने इस मामले में सीपीआई (एम) के यूथ विंग के ईशान को गिरफ्तार किया है जबकि दूसरा, नियाज फरार है.

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आंधी-बारिश में 45 की मौत, 24 घंटों में अभी और…

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। तेज आंधी-तूफान व बिजली गिरने से अधिक संख्या में लोगों की मौत हुई है. उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में आंधी-तूफान ने एक बार फिर तांडव कोहराम मचाया है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक इन दोनों राज्यों में अबतक 45 लोगों की मौत हो गई है. इनमें से 17 बिहार, 15 उत्तर प्रदेश और झारखंड में 13 लोगों की मौत बिजली गिरने व आंधी तूफान की वजह से हुई है.

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम का कहर अभी तक थमा नहीं है क्योंकि मौसम विभाग ने नोटिस जारी कर आशंका जताई है कि अगले 24 घंटों में बिहार के कई हिस्सों में तेज हवाएं चलेंगी और जोरदार बारिश होगी. मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, पटना, दरभंगा और आसपास के अन्य जिलों में इसका प्रभाव ज्यादा रहेगा. मौसम विभाग ने इस बात की भी आशंका जताई है कि अगले 24 घंटों में आंधी तूफान और बारिश के बीच बिजली गिर सकती है.

यूपी में भी अलर्ट

इतना ही नहीं बिहार के अलावा मौसम विभाग ने यूपी में अगले 24 घंटे में बाराबंकी, कुशीनगर, गोरखपुर और आजमगढ़ में दोबारा तूफान की चेतावनी जारी की है. राजधानी दिल्ली में भी मौसम विभाग ने आंधी की सूचना दी है. यहां 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफ़ान आ सकता है. उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले 24 घंटे में मरने वाले लोगों के लिए मुआवजे की घोषणा की है.

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हरामी व्यवस्थाः दलित लड़की की शादी में पानी सप्लाई से रोका

प्रतीकात्मक फोटो

उत्तर प्रदेश। योगीराज में दलितों के साथ भेदभाव के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं. प्राप्त जानकारी के मुताबिक एक दलित लड़की की शादी में कारोबारी ने पानी सप्लाई से मना कर दिया. यहां तक की पुलिस शिकातय तक की बात कही लेकिन कारोबारी अपनी बात पर डटा रहा और दलित के घर शादी में पानी से इंकार कर दिया.

आजतक की खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के एटा की घटना है. शिकायतकर्ता परिवार के यहां लड़की की शादी थी. अपनी शिकायत में दलित परिवार ने कहा कि पानी सप्लाई करने वाले ने उनके यहां शादी समारोह में पानी देने से मना कर दिया, क्योंकि वे दलित हैं.

योगी जी से करेंगे शिकायत

दलित परिवार के एक सदस्य ने बताया कि वाटर सप्लायर के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया है. इतना ही नहीं दलित परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर स्थानीय पुलिस उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती है तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाएंगे.

सप्लायर का डर

पानी सप्लायर भी डर के कारण मना कर दिया. इसके पीछे उसने अजीब सी वजह भी बताई. सप्लायर ने कहा कि अगर वह दलित के घर पानी सप्लाई करता है तो इलाके के सवर्ण उससे पानी लेना बंद कर देंगे. इस बात से डरकर सप्लायर ने पानी देने से मना कर दिया. लेकिन पीड़ित परिवार आरोपी सप्लायर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर डटा है.

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आदिवासियों के गांव में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी को कांग्रेस नेता ने बंधक बनाया

प्रतीकात्मक फोटो, साभार- गूगल

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पिछले दिनों कुपोषण से हुई मामले के बाद स्थानीय लोगों में काफी रोष है. इस घटना का जायजा लेने गांव में पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी को गांव वालों ने एक स्थानीय नेता की मदद से काम करने से रोक दिया. इनका आरोप था कि अधिकारी आते हैं और घूम फिर कर चले जाते हैं.

रविवार दोपहर में पूर्व क्षेत्रीय विधायक रहे प्रधुमन सिंह के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने गांव पहुंची टीम को घेर लिया. हाल ही में जिले में आए नए सीएमएचओ डॉ. एमके सक्सेना आदिवासियों की बस्ती में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी हासिल कर रहे थे. इसी दौरान पूर्व विधायक ने मोहल्ले की महिलाओं को आंगनवाड़ी के गेट पर लाकर बैठा दिया और वे खुद भी बैठ गए और भजन शुरू कर दिया. कांग्रेस नेता ने मांग किया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां के हर घर में जाकर मरीजों की खोजबीन कर उनका वैक्सीनेशन करें और उन्हें भर्ती करवाए. साथ ही जिन आदिवासियों के बच्चों ने बीमारी के चलते दम तोड़ा है उनके परिवार को मुआवजा दिया जाए.

एक घंटे से ज्यादा वक्त तक काफी जद्दोजहद करने के बाद सीएमएचओ एम.के सक्सेना के द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण का आश्वासन देने के बाद ही लोगों ने उन्हें काम करने दिया. पूर्व विधायक का कहना है कि हमेशा सरकारी अफसर सिर्फ अपना दौरा कर के यूं ही वापस चले जाते हैं लेकिन आदिवासी समाज के लोगों की समस्याएं जस की तस रहती हैं.

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… तो इस कारण बहनजी ने अपने भाई को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटा दिया

मायावती के साथ उनके भाई आनंद कुमार

नई दिल्ली। बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया है. बसपा प्रमुख ने यह निर्णय 26 मई को लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया. बैठक के दौरान पार्टी के संविधान में कुछ संशोधन करते हुए संगठन में कई अहम बदलाव किए गए. इसके मुताबिक पार्टी अध्यक्ष के परिवार का कोई भी सदस्य संगठन में किसी भी स्तर पर कोई पद नहीं लेगा.

बसपा प्रमुख ने इस ऐलान के बाद खुद अपने भाई आनंद कुमार को भी BSP के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया. इस दौरान बसपा अध्यक्ष ने ये भी ऐलान किया कि उनके बाद जो भी पार्टी का अध्यक्ष बनेगा उसके परिवार के किसी भी नज़दीकी को ना तो कोई चुनाव लड़ाया जाएगा और ना ही उसे राज्यसभा सांसद, MLC और मंत्री बनाया जाएगा.

इसके अलावा अंदर की खबर यह भी है कि भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर भी कई स्तरों पर इसकी निंदा हो रही थी. पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी इसको लेकर गलत संदेश गया था. चूंकि आनंद कुमार पार्टी के भीतर राजनैतिक तौर पर सक्रिय नहीं थे, इस वजह से उनके अचानक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने की स्थिति में कई बड़े नेता भी खुद को ठगा महसूस कर रहे थे. लेकिन बसपा अध्यक्ष के प्रति सम्मान को लेकर किसी भी नेता ने इस विषय पर सार्वजनिक तौर पर अपना कोई विरोध दर्ज नहीं कराया.

तो वहीं दूसरी ओर यह भी सूचना है कि आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने के बाद खुद बसपा प्रमुख के परिवार में भी कुछ लोग राजनीति में सक्रिय होना चाहते थे. ऐसे में पार्टी के भीतर के विरोध और परिवार से दबाव के कारण बसपा अध्यक्ष ने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया.

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कैराना के दलित-मुस्लिम इलाकों में EVM फेल होने के बाद बवाल

लखनऊ। गोरखपुर और फूलपुर चुनाव के बाद बहुप्रतिक्षित कैराना लोकसभा सीट पर चुनाव जारी है. कैराना और नूरपूर समेत देश के 4 लोकसभा और 10 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव जारी है. इस बीच कई जगहों से ईवीएम मशीनों के खराब होने की शिकायतें आने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठने लगे हैं. तो वहीं चुनाव आयोग ने ईवीएम को बदलते हुए कहा है कि सभी जगहों पर पूरी वोटिंग होगी, भले देर रात क्यों न हो जाए.

इससे पहले उत्तर प्रदेश की 2 लोकसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों में खराबी की और होने और छेड़छाड़ संबंधी आ रही शिकायतों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी एल वेंकटेश्वर लू ने कहा, ‘मशीनों के खराब होने के आरोप निराधार हैं. महज 15 फीसदी मशीनें खराब हुई हैं. शिकायत मिलने के बाद इसे बदल दिया गया है.’ मशीनों के खराब होने की सूचना सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी और रालोद ने इसे एक साजिश बताया है. दोनों दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की है. सपा और रालोद का कहना है कि हार के डर से भाजपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करवाई है और चुनाव रद्द कराने की भी मांग की है.

मामले के राजनीतिक रंग लेने के बाद यह मामला चुनाव आयोग पहुंच गया है. इस पर चुनाव अधिकारी ने कहा कि हर बूथ पर सभी मतदाताओं से वोट डलवाए जाएंगे. चाहे रात के 12 बज जाएं. उन्होंने 25 फीसदी ईवीएम को रिजर्व रखने की भी बात कही. आयोग के अधिकारी ने कहा कि वह जिले के डीएम और कमिश्नर के संपर्क में है.

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कैराना जीतने के लिए पीएम ने बसपा-सपा की निकाली काट

लखनऊ। कैराना लोकसभा सीट उप चुनाव को देखकर पीएम नरेंद्र मोदी ने बसपा व सपा के लिए नई काट निकाली है. इसको लेकर कहा जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग इससे लाभवांतित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बागपत रैली के दौरान उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग के अंदर अति पिछड़ वर्ग (एमबीसी) के लोगों को एक विशेष कोटा देने की बात कही.

साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण नीतियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले. इसके लिए उन्होंने एक आयोग बनाया है. एमबीसी की पात्रता की जांच-पड़ताल करने के लिए बनाए एक पैनल की बात करते हुए मोदी ने कहा कि वह 27 प्रतिशत कोटा के अंतर्गत एक सब कोटा बनाएंगे. जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अति पिछड़ा वर्ग की मदद करेगा.

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की इस शानदार जीत के पीछे एमबीसी का हाथ था जिन्होंने मोदी और भाजपा को अपना मजबूत समर्थन दिया था. फुलपुर व गोरखपुर उप चुनाव में बीजेपी हारने के बाद कैराना व नूरपुर में जमकर मेहनत की है. उप चुनाव में सीएम योगी के साथ-साथ कई मंत्री क्षेत्र में मेहनत किए हैं. इन क्षेत्रों में चुनाव जारी है. अब देखना है कि क्या पीएम का पिछड़ा कार्ड कैराना में कितना कमाल कर पाता है.

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हरामी व्यवस्थाः गुजरात में दलित की हत्या, मुख्यमंत्री पर…

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गुजरात। एक दलित युवक की लाश मिली है. निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीटर पर शव की फोटो शेयर करते हुए मुख्यमंत्री विजय रुपाणी पर सवाल खड़ा किया है. करीब दो दिनों से फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. गुजरात में दलितों की हत्या को लेकर लोग बौखलाए नजर आ रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक रविवार को जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीटर पर शेयर कर लिखा कि, विजय रुपाणी पूरी तरह फेल हो गए हैं. ऊना, राजकोट, वडनगर के तमाम दलित हत्या सरकार की विफलता बता रहे हैं. फोटो में युवक की हत्या कर उसके चेहरे को बुरी तरह जला दिया गया है. जिग्नेश मेवाणी ने जानकारी दी कि मृत युवक की लाश पटन जिला के सिध्दपुर ब्लॉक के एडरना गांव में मिली है.

बता दें कि हालही में जिग्नेश मेवाणी ने एक और वीडियो शेयर किया था जिसमें दलित युवक की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी थी. इसके तुरंत बाद एक और दलित की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है.

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बसपा के नए नेशनल कोआर्डिनेटर से मिलिए

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बसपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह
नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी ने बसपा के युवा कार्यकर्ता जयप्रकाश सिंह को पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर नियुक्त किया है. 26 मई को लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बहनजी ने यह घोषणा की. सुर्खियों से दूर जयप्रकाश सिंह के बारे में लोग ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं. लेकिन जो लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें पता है कि जयप्रकाश सिंह बहुजन आंदोलन को समर्पित एक ऐसे मिशनरी हैं, जिन्होंने आंदोलन के लिए अपना जीवन दे दिया. संक्षेप में उनका जीवन-परिचय यह है कि यह दलित वर्ग से हैं और उत्तर प्रदेश में जनपद गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले हैं. इनके पिता सरकारी अध्यापक व एक भाई वकील है तथा एक भाई अपना खुद का मेडिकल स्टोर भी चलाते हैं. जय प्रकाश ने खुद एल.एल.एम. की शिक्षा प्राप्त की है. बसपा की स्थापना के एक साल बाद जन्में जयप्रकाश सिंह का जन्म 1985 का है. इन्होंने बी.एस.पी. के मिशन के लिये सन् 2009 से ही अपने माँ-बाप का घर छोड़ा हुआ है इस सम्बन्ध में इनका खुद का यह कहना है कि “जब मैं बी.एस.पी. के मिशन में काम करने लगा तब मेरे माता-पिता व भाईयों आदि ने मुझे इस कार्य से रोकने का पूरा-पूरा प्रयास किया, जिसकी वजह से मैं मानसिक रूप से उनके दबाव में रहने लगा था और फिर एक दिन मैंने यह निर्णय लिया कि क्यों ना घर ही छोड़ दिया जाये, जिससे मेरे देर-सवेर आने से घर वाले, जो मुझे यह धमकी देते है कि ‘तू कुछ करता-धरता तो है नहीं और ऊपर से, हमें परेशान और करता है. तब फिर मैंनें सन् 2009 के अन्त में अपने माँ-बाप का घर छोड़कर, दिल्ली में एक कमरा किराये पर ले लिया.” दिल्ली आने के बाद जयप्रकाश सिंह का खर्च उनके साथियों एवं समाज के लोग ही मिलकर खुद उठाते थे. इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने कभी घर वापिस ना जाने व घरवालों से भी सभी रिश्ते-नाते आदि तोड़कर फिर बी.एस.पी. के मिशन में ही आजीवन अविवाहित रहकर, काम करने का भी फैसला ले लिया है. जयप्रकाश सिंह को महत्वपूर्ण पद देकर बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने जहां पार्टी में युवाओं को बड़ा मौका दिया है तो वहीं एक कार्यकर्ता को अहमियत देकर यह साबित किया है कि बसपा में मिशनरियों की कद्र है.
  • भानु प्रताप सिंह 

दलितों व अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचार के आँकड़े भी तो देते मोदी जी

केंद्र में मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गये हैं. वर्ष 2014 में जब इस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब जनता की उम्मीदें यूं ही आसमान पर नहीं थीं, बल्कि मोदी जी ने जनता को दिन में ऐसे तारे दिखाए थे, जिन्हें भाजपा के अमित शाह ने जुमला करार देकर जनता की छाती पर दाल दलने का काम किया. गौरतलब है कि तीस साल बाद केंद्र में किसी पार्टी को जुमलेबाजी के बलपर अकेले बहुमत हासिल हुआ था. किंतु इस मजबूत सरकार से जनता को कुछ बड़े बदलावों की आशा की जा रही थी और खुद मोदी और उनके सहयोगियों ने इसका वादा भी किया था. किंतु हुआ क्या? टीम मोदी जी ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले लेकर देश की आम जनता और व्यापारिक वर्ग को तबाई के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया. भाजपा बेशक इन फैसलों को अपनी सफलता मानती रहे. नोटबन्दी के फैसले के साथ जुड़ी अपेक्षाओं को लेकर कई जरूरी आंकड़े सरकार ने अभी तक भी जारी नहीं किए हैं, फिर सरकार इस नोटबन्दी को किस आधार पर अपनी सफलता से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है?

सरकार का कहना है कि गत चार वर्षों के दौरान विभिन्न मोर्चों पर कई परेशानियों का सामना करते हुए, उसने हर परेशानी को दूर कर विकास का मार्ग प्रशस्त किया. सरकार ने दावा किया कि मुद्दा चाहे डोकलाम का रहा हो या फिर सीमा पर पाक की कार्रवाई का या फिर देश में नक्सनलवाद का या फिर घरेलू मंच पर तेल का, हर मुद्दे को सुलझाने में सरकार ने बखूबी सफलता हाशिल की. डोकलाम और पाक सीमाओं का तो हमें पता नहीं किंतु तेज की कीमतों का बहीखाता तो हमारे सामने है, फिर किस आधार पर ये मान लिया जाय कि मोदी सरकार ने ऐसे बड़े मामले आसानी से हल कर लिए? सरकार का यह भी कहना है कि न केवल देश में बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत का मान बढ़ाया, किंतु मोदी सरकार ने ये खुलासा नहीं किया कि किस प्रकार से भारतीय दूतावास के जारिए मोदी जी की सभा में प्रवासी भारतियों की भीड़ को इक्ट्ठा किया गया?

सरकार का कहना है कि सरकार ने हर मोर्चे पर पारदर्शी रहते हुए अपने सभी फैसलों की जानकारी आम-जन तक पहुंचाई. जबकि सरकार का ऐसा कहना सच्चाई से कोसो दूर है. सच तो ये है कि सरकार की असफलता को उजागर करने वालों को सीधा देशद्रोही ठहराकर दिया जाता रहा. सरकार का यह एक थोथा दावा है कि पीएम मोदी ने सोशल नेटवर्किंग से जुड़कर लोगों को अपने रोजाना के कार्यक्रम और लोगों को अपनी सोच के बारे में बताया और उनसे सुझाव भी मांगे. हाँ! ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए पीएम ने अपने मन की बात तो की किंतु जनता के मन की बात न तो सुनी और न ही जनता से किए गए वादों के कार्यांवयन के बारे सही से कुछ बताया. कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के चार साल में झूठ और धर्मान्धता की संस्कृति का इस कदर फैलाव हुआ है कि भाजपा अन्दरखाने इस फैलाव का जश्न मना रही है. सरकार को अपने इस कृत्य पर तनिक भी अफसोस नहीं है. इस बारे में जिस तरह से सोशल मीडिया पर कुतर्कों को जाल बुना गया है, वह बताता है कि यह सरकार जनता की तर्क बुद्धि का कितना सम्मान करती है.

सरकार ने मीडिया की गुलामगीरी पर कोई स्पष्टीकरण नही दिया.….क्यों? विदित हो कि मोदी सरकार ने सबसे ज्यादा पैसा मीडिया को मौन रखने और सरकार की वाहवाही करने के लिए खर्च किया है. सरकार को इसका खुलासा करना चाहिए. कोई तो बात होगी कि भारत का मीडिया 180 देशों के रिपोर्ट कार्ड में 138वें स्थान पर आ गया है. भारतीय प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया सत्ता का पैरोकार बनने को मजबूर किया गया है या फिर उसकी आदत बन गई है कि अब चाटुकारिता के अलावा कुछ और कर ही नहीं सकता.

सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि दो करोड़ की रिश्वत माँगने के आरोप में जेल जाने वाले पत्रकार सुधीर चौधरी को इस सरकार ने वाई श्रीणी की सुरक्षा मुहैया कराई हुई है और रवीश कुमार, पुन्य प्रसून वाजपेयी, अभिसार शर्मा, बरखा दत्त जैसे ईमानदार पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने में कोताही क्यों बरती जा रही है, जबकि उन्हें हिन्दुवादी हिंसक ताकतों द्वारा न केवल हिन्दू विरोधी करार दिया जा रहा है अपितु उन्हें जान से मार देने की धमकियां दी जा रही हैं. होना तो ये चाहिए कि सरकार को इन बातों खुद संज्ञान लेकर ऐसे पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए. खेद की बात है कि भाजपा के शासन काल में पिछ्ले शासन काल के मुकाबले सबसे ज्यादा पत्रकारों की हत्याएं की गई हैं….. सरकार ने इस पर कोई बयान क्यों नहीं दिया? इस दौरान रोहित विमोला, नजीब जैसे कई प्रतिभाशाली छात्रों को जमींदोज करने का काम भी किया गया है, क्या ऐसे मुद्दे मोदी सरकार के एजेंडे से बाहर के मुद्दे हैं? क्या आर एस एस के मुद्दे ही आज की सरकार के मुद्दे हैं? क्या हिन्दुत्व ही मोदी जी का मूल मुद्दा है? जब वो अपने को ओ बी सी का बताते हैं तो फिर वो कैसे ब्राहम्णवाद का समर्थन कर सकते हैं? अगर वो ब्राहम्णवाद का समर्थन करते हैं तो फिर ओ बी सी (दलित) कैसे हो सकते हैं?

मोदी सरकार ने पिछ्ले चार साल में जनहित के नाम पर लगभग सौ से भी ज्यादा योजनाओं की घोषणाएं की हैं. ये एक अच्छी बात है. किंतु इन योजनाओं के क्रियांवयन पर ये सरकार खाली कागजी आँकड़े पेश करके ही संतुष्टी का ढोंग कर जनता को 2019 के बजाय 2022 तक अपने वादों को पूरा करने का झुनझुना थमा दे रही है. रिटायर हो चुके लोगों को अब न्यू पेंशन स्कीम का झुनझुना थमा दिया. अब वो इस झांसे को समझ गये हैं. सच ये है कि मोदी सरकार की एक भी स्कीम का कार्यांवयन जमीनी आधार पर नहीं हुआ है. खाली कागजों को रंगने का काम किया है मोदी सरकार ने.

सरकार ने इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं किया कि बैंकों का पूरा सिस्टम क्यों ध्वस्त है? सरकार ने माल्या, नीरव मोदी, मोहल भाई और न जाने और भी कितने ही ऐसे भाई लोग हैं जो बैंकों को चूना लगाकर इस मोदी राज में परदेशी हो गए. उनपर कोई चर्चा क्यों नहीं की? उल्टा बैंक कर्मियों को ही दोषी ठहराने का काम किया जा रहा है. राजनेता चाहे कांग्रेस के हों या भाजपा के, सब दूध के धुले हैं, यह सिद्ध करना ही उनका काम रहा है. वेतन न बैंक कर्मियों का बढ़ाया जा रहा है और न ही डाकियों का. यह है भाजपा की जनहित योजना का दर्शन.

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के अनुसार दो ऐसे सेक्टर हैं जिनको ये सरकार फैलाने का काम कर रही है…एक- झूठ और दूसरा- धर्मांधता. माना कि हर सरकार के दौर में एक राजनीतिक संस्कृति पनपती है, किंतु मोदी सरकार के दौर में “झूठ” नई सरकार की संस्कृति बनकर उभरी है. अब सवाल किया जा सकता है कि जब प्रधानमंत्री ही झूठ बोलते हों तो फिर दूसरों के बारे में क्या कहें? उल्लेखनीय है कि धर्मांधता की धारा को आगे बढ़ाने के मकसद से भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से इत्तेफाक रखने वाले कई संगठन बनकर खड़े हो गए हैं जो काम तो इन्हीं के लिए करते हैं मगर अलग इसलिए हैं ताकि बदनामी उन पर न आएं.

सरकार ने इस सत्य पर भी कोई टिप्पणी नहीं की कि उनकी सरकार नौकरी के फ्रंट पर फेल रही है. रोजगार न दे पाने के कारण भी सरकार की चमक फीकी हो रही है, किंतु इस मसले पर सरकार मौन रही है और पकौड़े तलने जैसे सुझाव देकर ही अपनी असफलता को छुपाने के काम में लगी रही. अफसोस की बात है कि अपना सबसे बड़ा वादा मोदी सरकार पूरा नहीं कर पाई. चुनावी घोषणा पत्र में उसने हर साल 2 करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा किया था, मगर हकीकत कुछ और ही निकली. सरकार की सोच है कि सिर्फ नौकरी को ही रोजगार न माना जाए. लेकिन ऐसा तब होता जब काफी लोगों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध हो पाते. स्टार्ट-अप योजना के जरिए इस दिशा में एक कोशिश जरूर हुई पर वह लहर दो साल भी नहीं चली. सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले रीयल एस्टेट सेक्टर का हाल बुरा है. इस सदी में सबसे ज्यादा मध्यवर्गीय नौकरियां टेलिकॉम सेक्टर में मिलती थीं, जो अचानक समस्याग्रस्त लगने लगा है. नौकरियों में आरक्षण पर कुठाराघात, एस सी/ एस टी पर अत्याचार के विरोध में पूर्व पारित सरकारी आदेश का सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किया जाना, क्या मोदी सरकार के संज्ञान में नहीं आया? यदि नहीं, तो क्यों?

और भी बहुत से सवाल हैं जो देश की दलित और अल्पसंख्यक आवादी से जुड़े हुए हैं जिन्हें मोदी सरकार ने चार साल पूरे होने के जश्न के दौरन छुआ तक नहीं. मसलन कश्मीर में हिंसा को रोकने के लिए क्या किया? एक सिर के बदले दस सिर लाने वाले मोदी जी ने यह भी नहीं बताया कि उनके शासन काल में कितने सैनिक शहीद हुए और कितनों को यथावत सम्मान दिया गया? कितनों के सिर देश में लाए. मोदी सरकार के पिछ्ले चार सालों में कितने दलितों और अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतारा गया और किस आधार पर? मोदी सरकार के पिछ्ले चार सालों में कितनी किशोरियों की लाज लूटी गई और कितनों की हत्या की गई? मोदी सरकार ने यह भी नहीं बताया कि मोदी जी के पिछ्ले चार सालों में शासन-प्रशासन ने दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ कितने फर्जी केश दर्ज किए और कितने फर्जी एनकाउंटर किए? केवल और केवल सरकारी आँकड़ों के बल पर सुर्खियां बटोरने का काम करना न केवल राजनीतिक है अपितु समाज विरोधी भी है.

खैर! सरकार के पास अभी एक साल का वक्त और है. इस बीच वह जनता की कुछ मुश्किलें दूर कर दे तो सरकार को अपना गुणगान करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी अपितु जनता उनका ये काम खुद ही कर देगी. विकास का काम जमीन पर ऐसे ही दिखना चाहिए जैसे कि दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ लगातार हो रहे अत्याचार तो फिर माना जा सकता है कि सरकार विकास के कार्यो के लिए कटिद्ध है, अन्यथा नहीं.

लेखक: तेजपाल सिंह तेज स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर आप इन दिनों स्वतंत्र लेखन के रत हैं. हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किए जा चुके हैं.

बीएसपी प्रमुख मायावती ने बदला बसपा का संविधान, कई और बड़े बदलावों की घोषणा

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज 26 मई को लखनऊ में हुई. इस दौरान बसपा प्रमुख मायवती ने कई अहम फैसले किए. सबसे प्रमुख बदलाव पार्टी के संविधान में किया गया, जिसके मुताबिक यह व्यवस्था की गई है कि किसी विशेष परिस्थिति में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सक्रिय न रहने पर वह राष्ट्रीय संरक्षक बन जाएगा और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके निर्देश में काम करना होगा. पार्टी में पहली बार कुछ अहम पद भी बनाया गया है तो साथ ही पार्टी को परिवारवाद से मुक्त करने को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है.

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिन अहम बिन्दुओं का जिक्र किया गया उसे हम सिलसिलेवार बता रहे हैं.

(1) विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी को भी मिलाकर व उनके बाद अब आगे भी बी.एस.पी. का जो भी ‘‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’’ बनाया जायेगा, उसके जीते-जी व ना रहने की स्थिति में भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी भी स्तर के पद पर नहीं रखा जायेगा. अगर परिवार का सदस्य पार्टी में काम करना चाहे तो उसे बिना किसी पद पर रहे एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही काम करना होगा.

कुमारस्वामी ने दिल्ली में बसपा प्रमुख मायावती से मिलकर उन्हें शपथग्रहण समारोह में आने का निमंत्रण दिया

(2) बी.एस.पी. का राष्ट्रीय अध्यक्ष यदि अपनी ज्यादा उम्र होने की वजह से पार्टी में फील्ड का कार्य करने में अपने आपको कमजोर महसूस करता है तो ऐसी स्थिति में उसकी सहमति से उसे पार्टी का ‘‘राष्ट्रीय संरक्षक’’ नियुक्त कर दिया जायेगा. उसी की सलाह से बी.एस.पी. का नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष काम करेगा.

(3) बहुजन समाज पार्टी में पहली बार ’नेशनल को-आर्डिनेटर’ की नियुक्ति की गई है. पहले चरण में इस पद पर दो लोगों को नियुक्त किया गया है. इस पद पर पार्टी के राज्यसभा सांसद एडवोकेट वीर सिंह व जयप्रकाश सिंह को नियुक्त किया गया है. आने वाले दिनों में इस पद पर और नियुक्तियां भी हो सकती हैं.

नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर
राम अचल राजभर

(4) पार्टी के पुराने नेता आर.एस.कुशवाहा को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. जबकि निवर्तमान अध्यक्ष श्री राम अचल राजभर का प्रमोशन कर उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. रामअचल राजभर को तीन राज्यों का को-ओर्डिनेटर भी बनाया गया है.

(5) राज्यसभा सांसद और कर्नाटक के प्रभारी अशोक सिद्धार्थ को कर्नाटक में बेहतर रणनीति बनाने के लिए ईनाम मिला है. उन्हें दक्षिण भारत के तीन राज्यों का को-आर्डिनेटर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा लालजी वर्मा को छत्तीसगढ़ का को-आर्डिनेटर बनाया गया है.

(6) गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों के बीच बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने साफ किया है कि बी.एस.पी. विधानसभा या लोकसभा चुनाव में केवल तभी चुनावी गठबंधन करेगी, जब उसे ‘‘सम्मानजनक’’ सीटें मिलेंगी. ऐसा नहीं होने की स्थिति में हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी.

अशोक सिद्धार्थ

(7) गठबंधन पर अपनी स्थिति को और ज्यादा साफ करते हुए सुश्री मायावती ने अपने बयान में कहा है कि उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में गठबंधन करके चुनाव लड़ने की बातचीत चल रही है. हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी आवाह्न किया है कि फिर भी पार्टी संगठन को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिये तैयार रहना होगा.

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बसपा में बड़ा उलट फेर, कुशवाहा यूपी अध्यक्ष राजभर बनें राष्ट्रीय महासचिव

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा उलट फेर हुआ है. पार्टी के कई नेताओं को इधर-उधर किया गया है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जहां उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया है तो वहीं राष्ट्रीय महासचिव के पद पर भी नई जिम्मेदारी दी है.

उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद से रामअचल राजभर को हटाकर उनकी जगह आर. एस. कुशवाहा को यूपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. तो वहीं रामअचल राजभर को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. राजस्थान के प्रदेश प्रभारी जयप्रकाश सिंह को बसपा अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय को-आर्डिनेटर बनाया गया है.

इसके अलावा भी कई बदलाव किए गए हैं. हमें जैसे जैसे जानकारी मिलेगी, हम उसे आप तक पहुंचाएंगे.

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राहुल गांधी के रिपोर्ट कार्ड में मोदी को A+

नई दिल्ली। एक तरफ मोदी सरकार चार साल का जश्न मना रही है तो वहीं कांग्रेस इसको धोखा बता रही है. कांग्रेस की ओर से इसको विश्वासघात दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. लेकिन इसी बीच राहुल गांधी ने मोदी सरकार को A+ देकर नया मोड़ दे दिया है. साथ ही रिपोर्ट कार्ड को ट्वीटर पर शेयर कर दिया है.

राहुल गांधी का रिपोर्ट कार्ड

राहुल गांधी ने ट्वीट के जरिए उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पोस्ट किया है. इस रिपोर्ट कार्ड में राहुल गांधी ने मोदी सरकार को दो विषयों में A+ जबकि एक विषय में B- दिए हैं. यही नहीं राहुल गांधी के रिपोर्ट कार्ड में मोदी सरकार को चार विषयों में फेल भी कर दिया है. मोदी सरकार शनिवार को चार साल पूरे होने का जश्‍न मना रही है. लेकिन विपक्ष का हमला एक बार फिर बीजेपी सरकार पर तेज हो गया है. मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड में राहुल गांधी ने एग्रीकल्‍चर- F, विदेश नीति- F, तेल की कीमत- F, रोजगार के अवसर- F, स्‍लोगन बनाना- A+, खुद की तारीफ- A+ और योगा- B- दिया है. बता दें कि शनिवार को कांग्रेस देशभर में विश्वासघात दिवस मना रही है.

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