विदेश मंत्री सुषमा का अचानक गायब हुआ विमान

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नई दिल्ली। विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज मॉरीशस के रास्ते यात्रा पर निकली थीं तभी अचानक उनका विमान गायब हो गया. इसके बाद भारत से लेकर मॉरीशस तक हड़कंप मच गया. प्राप्त खबरों के मुताबिक जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर उड़ान भर रहा वायुसेना का विशेष विमान मॉरीशस के एयरस्पेस में गायब हो गया था. हालांकि, करीब 14 मिनट बाद यह विमान मॉरीशस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के संपर्क में आ गया.

बताया जा रहा है कि मॉरीशस होते हुए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर विदेश मंत्री शनिवार को वायुसेना के विशेष विमान आईएफसी-31 द्वारा त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से भारतीय समयानुसार 02:08 बजे पर मॉरीशस के लिए रवाना हुईं थीं. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की जानकारी के अनुसार भारतीय समयानुसार शाम 4:44 बजे मॉरीशस के एयरस्पेस में प्रवेश करने के बाद विमान वहां के एटीसी के संपर्क में नहीं आया. इसको लेकर अफरातफरी मच गई लेकिन जैसे 14 मिनट के बाद विमान संपर्क की सूचना मिली तो सांस में सांस आई.

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डर के साए में शिलांग के दलित सिख, इंटरनेट बंद-कर्फ्यू लगा

शिलांग। मेघालय की राजधानी शिलांग में हालत अबतक गंभीर है. इस दौरान दूसरे दिन भी शहर में कर्फ्यू लगे रहे. रातभर हुई हिंसा के दौरान आक्रोशित भीड़ ने एक दुकान और एक घर को आग के हवाले कर दिया. यहां के दलित सिखों की जान खतरे में पड़ी है. घटना आरंभ होने पर सिख न्यूज अपडेट नामक फेसबुक पेज के जरिए मदद की गुहार लगाई थी. सिखों की जान खरते में देख पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गंभीर चिंता व्यक्त की है.

पंजाब से टीम जाएगी

पंजाब मुख्यमंत्री ने दलित सिखों की सुरक्षा के लिए सोमवार को चार सदस्यीय टीम को मेघायल भेजने का फैसला किया था. इस टीम का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री सुखजिंदगर रंधावा करेंगे, जबकि उनके अलावा सांसद गुरजीत उजला, रवनीत बिट्टू और विधायक कुलदीप सिंह वैद जाकर मामले की जानकारी लेंगे. सीएम अमरिंदर सिंह ने अपनी टीम को सख्त निर्देश दिए हैं. वहीं मेघालय के सीएम ने भी पंजाब के सीएम को सिख समुदायों की पूर्ण सुरक्षा के लिए आश्वासन दिया है.

हिंसा का कारण

आपको बता दें कि शिलांग के बारा बाजार इलाके में गुरुवार दोपहर को खासी बस चालक और दलित पंजाबी महिला के बीच बहसबादी के दौरान यह तनाव पैदा हुआ जिसने बाद में एक बड़ी हिंसा का रूप ले लिया. इसके बाद दो लोगों के बीच का मामला समुदाय के तौर पर बंट गया. हालांकि इसको लेकर वहां पर कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवा ठप कर दी गई है.

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बैंक के इन दो कामों पर जीएसटी फ्री

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नई दिल्ली। जीएसटी को लेकर बैंक खाताधारकों के लिए खुशखबरी है. सरकार जीएसटी को लेकर बैंक खातधारकों को बड़ी राहत दी है. सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार बैंकों की एटीएम निकासी तथा चेकबुक के लिए नि:शुल्क सेवाओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रखा गया है. इसके लिए जीएसटी नहीं लगेगी.

यहां ध्यान दें कि एटीएम निकासी व चेकबुके पर जीएसटी नहीं लगेगी लेकिन क्रेडिट कार्ड बिल के बकाया भुगतान पर लगा विलंब शुल्क (लेट चार्ज) तथा अनिवासी भारतीयों द्वारा बीमा की खरीद पर जीएसटी लगेगा. सरकार इन बातों को अब साफ कर दिया है. राजस्व विभाग ने बैंकिंग, बीमा और शेयर ब्रोकर सेवाओं पर जीएसटी लागू होने के संबंध में ‘बार-बार उठने वाले प्रश्नों का निवारण (एफएक्यू)’ जारी कर इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया है.  इसके अनुसार विभाग ने कहा कि प्रतिभूतिकरण, डेरिवेटिव्स और वायदा सौदों से जुड़े लेन-देन को भी जीएसटी दायरे से बाहर रखा है. जीएसटी को लेकर अभी तक लोगों के अंदर कंफ्यूजन है जो कि धीरे-धीरे क्लीयर हो रहा है. बता दें कि ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के तर्ज पर बीजेपी सरकार ने इसको लागू किया है.

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तोगड़िया बनाम मोदीः मोदी से खफा 14 हजार बजरंग दल व विहिप कार्यकर्ता का इस्तीफा

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नई दिल्ली। भाजपा के लिए 2019 की राह आसान नहीं दिख रही है, महागठबंधन के बाद एक और मुश्किल खड़ी हो गई है. असम के करीब 90 फीसद बजरंग दल व विहिप कार्यकर्ता मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार-प्रसार करने का काम करेंगे. मोदी सरकारी की नीतियों से खफा दोनों हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के खिलाफ जंग छेड़ने का ऐलान कर दिया है.

मीडिया खबरों की मानें तो असम में असम में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के 90 फीसद कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है. बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक दीपज्योति शर्मा ने इस बात कि पुष्टि करते हुए एक स्थानीय अखबार को बताया कि, गुवाहाटी में 820 बजरंग दल कार्यकर्ताओं में से 816 ने अपनी सदस्यता छोड़ी और खुद दीपज्योति शर्मा ने भी 24 मई को शहर के सुरकेश्वर मंदिर में महत्वपूर्ण मीटिंग के दौरान इस्तीफा देने की भी बात कही. चौंकाने वाले आकड़े ये हैं कि पूरे राज्य के 14 हजार बजरंग दल कार्यकर्ताओं में से 13,900 ने सदस्यता त्याग दी है. बजरंग दल के अलावा गुवाहाटी में विश्व हिंदू परिषद के 400 सदस्यों में से 380 ने इस्तीफा दे दिया है. यहां विहिप के राज्य सलाहकार डॉ. टीके शर्मा ने भी इस्तीफा दे दिया है.

तोगड़िया बनाम मोदी

दीपज्योति शर्मा बताते हैं कि 1 जुलाई को विहिप से बागी हुए पूर्व अध्यक्ष डॉ.प्रवीण तोगड़िया नए दल का ऐलान करेंगे. ये दल देशभर में मोदी के खिलाफ अगामी लोकसभा चुनाव को लेकर प्रचार करेगा. इन तमाम गतिविधियों से महागठबंधन को बल मिलेगा लेकिन भाजपा के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है जो कि हिंदू वोटों को बीजेपी से छिन सकती है.

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बंगला खाली कर मायावती ने बीजेपी की खोली पोल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ के 13 माल एवेन्यू स्थित बंगले को खाली किया लेकिन इससे पहले उन्होंने बीजेपी की पोल खोल दी. मायावती ने दोनों सरकारी बंगला खाली कर दिया है. साथ ही मीडिया को बताया कि वे बंगला खाली करने से मना नहीं की थी बल्कि बीजेपी कैराना हार को छिपाने के लिए इस मुद्दे को जबरन मीडिया में चलवा रही थी. लेकिन बीजेपी कुछ भी कर ले उसकी हार नहीं छिपने वाली.

प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनऊ के 13 माल एवेन्यू स्थित बंगले को शनिवार को खाली कर दिया. लेकिन इससे पहले उन्होंने मीडिया को बुलाकर बंगला दिखाया. लखनऊ के 13 माल एवेन्यू स्थित बंगले को मीडिया को दिखाया. इस दौरान साफ दिख रहा था कि लखनऊ के 13 माल एवेन्यू बंगला में कांशीराम की स्मृतियां रखी गई हैं. साथ ही बहुजन समाज आंदोलन के यादगार पलों को संजोया गया है. डॉ. भीमराव आंबेडकर, कांशीराम व मायावती की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेती हुई तस्वीरें हैं.

बता दें कि इससे पहले मायावती ने मुख्यमंत्री योगी को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी थी कि लखनऊ के 13 माल एवेन्यू स्थित बंगला बसपा शासनकाल में माननीय कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित किया जा चुका है. साथ ही यह भी लिखा था कि यदि सरकार इस यादगार बंगला का ख्याल नहीं रख पाए तो वह बेहिचक बसपा को सौंप सकती है. साथ ही मायावती ने अपना दुसरा सरकार बंगला करीब एक सप्ताह पहले ही खाली कर दिया था.

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इंसाफ ना मिलने पर 120 दलितों ने अपनाया बौध्द धर्म

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नई दिल्ली। करीब चार माह धरना देने के बाद भी सरकार से इंसाफ ना मिला तो दलितों ने बौध्द धर्म को अपनाने का फैसला लिया और बौध्द के शरण में चले गए. 120 दलितों को सरकार से इंसाफ की उम्मीद थी लेकिन आखिरकार सरकार की ओर से निराशा हाथ लगी.

बौध्द धर्म अपनाने वाले परिवारों ने खुशी जाहिर की. प्राप्त जानकारी के अनुसार जींद व आस-पास के क्षेत्र के दलित इंसाफ व अधिकार के लिए धरना पर बैठे थे. 120 लोगों ने दिल्ली के लदाख बौद्ध भवन में जाकर धर्म अपनाया. इनका कहना है कि हिंदू धर्म के ठेकेदार दलितों का शोषण कर रहे हैं और सरकार भी इनका साथ दे रही है. लेकिन बौध्द धर्म में इससे निजात मिल जाएगी.

चार माह धरना पर

दलित समाज के नेता का कहना है कि वे पिछले तकरीबन 113 दिन से जींद में धरना दे रहे थे. कई बार दलित समाज का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ ना मिला. बता दें कि झांसा गैंग रेप की सीबीआई जांच, ईश्वर हत्याकांड के परिजनों को नौकरी, जम्मू में शहीद हुए दलित के परिवार को नौकरी, एससीएसटी एक्ट में अध्यादेश आदि मुद्दों को लेकर दलित धरना दे रहे थे.

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हरामी व्यवस्थाः ऊंची जाति का खौफ, दलित महिलाएं तीन किमी दूर जाती हैं पानी भरने

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पानीपत। दलितों के साथ भेदभाव आज भी जारी है. देखिए कैसे ऊंची जातियों के खौफ के कारण पानी के लिए दलितों को तीन किलोमीटर दूर जाकर लाना पड़ता है. तपती धूप में तीन किमी दूर जाकर पानी लाकर जीवन जीने को विवश हैं लेकिन अभी तक कोई मदद के लिए आगे नहीं आया है. जबकि हर दिन इन दलितों की भीड़ पानी के लिए आती-जाती दिखती है. लेकिन इनको देखकर हर कोई मुंहफेर लेता है.

मामला हरियाणा के देवरड़ गांव, जिंद की है. शुक्रवार को दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट ने राजेश शर्मा ने फोटो स्टोरी की थी. इसके बाद दैनिक जागरण ने शनिवार को प्रकाशित किया. इनकी खबर के अनुसार देवरड़ गांव के ऊंची जाति के लोगों ने सबमर्सिबल से पानी लेने से मना कर दिया है. फोटो में साफ तौर दिख रहा है कि किस प्रकार दलित महिलाएं नन्हें बच्चों को लेकर पानी भरन के लिए कितने किलो मीटर की दूरी तय करते हैं.

दैनिक जागरण में छपी जिंद की तस्वीर

बता दें कि दलितों के साथ भेदभाव व हिंसा को लेकर कई खबरें हालही में सामने आई हैं जिसमें पानी ना भरने को लेकर यूपी व केरल से हालही में खबर मिली थी. वहां पर भी ऊंची बिरादरी के दबादबा के कारण लोगों को गड्ढें का गंदा पानी पीना पड़ता है. इस तरह के व्याप्त भेदभाव के खिलाफ सरकार ने अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

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मोदी के कृषि मंत्री ने किसान आंदोलन को बताया…

नई दिल्ली। मोदी के केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने देश में किसानों की खुदकुशी को लेकर बेतुका बयान दिया है. इनको किसान आंदोलन दिखावा लगता है. इनका मानना है कि किसान आंदोलन मीडिया कवरेज के लिए किए जा रहे हैं. एक कृषि मंत्री का किसानों के प्रति ऐसा बेतुका बयान बताता है कि उनको किसानों की तनीक चिंता भी नहीं है. अब ऐसे में किसान किसके पास अपनी फरियाद लेकर जाएं.

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मीडिया में आने के लिए कुछ किसान तरह-तरह के उपक्रम कर रहे हैं. देश में करोड़ों की संख्या में किसान हैं और उसमें कुछ किसानों का ये प्रदर्शन मायने नहीं रखता. भारतीय किसान यूनियन शुक्रवार से 10 दिनों की हड़ताल की घोषणा पर हैं. किसानों ने दूध, सब्जियों और अनाज जैसे कृषि उत्पादों की आपूर्ति बंद करने का ऐलान कर धरना शुरू किया है. कुल मिलाकर कहा जाए तो आंदोलन में देश के करीब 22 राज्यों के 130 संगठन समर्थन में उतरे हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के किसान साथ में हैं.

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14 नए जज नियुक्त, 420 पद अभी भी खाली

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नई दिल्ली। देश में चौदह नए जजों की नियुक्ति की गई है. विधि मंत्रालय ने कहा कि तीन हाईकोर्ट में शुक्रवार को कुल 14 जजों को नियुक्त किया गया. इसे हाईकोर्ट में हुई सबसे बड़ी नियुक्तियों में से एक कहा जा रहा है. इसके बावजूद भी करीब 400 सीट खाली हैं.

मंत्रालय की जानकारी के अनुसार मद्रास हाईकोर्ट में सात और कर्नाटक हाईकोर्ट में दो अतिरिक्त जज नियुक्त किए गए हैं. तो वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 5 जज नियुक्त किए गए हैं. बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट में जजों की मंजूर संख्या बल 75 है, दबकि 56 जजों के साथ काम कर रहा है. इसी तरह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की मंजूर संख्या बल 53 है. वहां केवल  31 जजों के साथ काम हो रहा है. वहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट में जजों की मंजूर संख्या बल 62 है.

इतनी बड़ी नियुक्ति के बाद भी विधि मंत्रालय के एक जून तक के आंकड़े के मुताबिक, देश के 24 हाईकोर्ट में जजों की मंजूर संख्या बल 1,079 है, लेकिन वहां 659 जज ही काम कर रहे हैं, जो मंजूर संख्या बल से 420 कम है.

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सलमान के भाई ने पुलिस के सामने उगला सच

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मुंबई। एक्टर सलमान खान के भाई अरबाज खान ने गुनाह कबूल कर सच बता दिया है. इसके साथ ही अरबाज ने करोड़ों रुपए की बात भी बताई जो कि मीडिया में चल रही थी. एएनआई सूत्रों के हवाले खबर मिल रही है कि अभिनेता अरबाज खान ने पुलिस की पूछताछ में मान लिया है कि वह आईपीएल की सट्टेबाजी में शामिल थे. एएनआई में छपी खबर के मुताबिक अरबाज खान ने माना है कि उन्होंने पिछले साल आईपीएल के मैचों में सट्टा लगाया था.

इस दौरान अरबाज खान ने यह भी बताया कि वह 2.75 करोड़ रुपये हारे थे. अरबाज ने बताया है कि वह पिछले 6 सालों से सट्टेबाजी कर रहे हैं लेकिन दुसरी तरफ कहते हैं कि वह इस साल कोई सट्टा नहीं लगाया. गौरतलब है कि शुक्रवार को ठाणे क्राइम ब्रांच ने समन जारी किया था. इसके बाद सलमान खान के भाई अभिनेता अरबाज खान ठाणे पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल के सामने पेश होने पहुंचे थे. पुलिस ने 29 मई को मुंबई के नामी सट्टेबाज सोनू जालान को गिरफ्तार किया था, जिससे पूछताछ करने पर अरबाज खान का नाम सामने आया. ऐसा आरोप है कि सोनू क्रिकेट बेटिंग के किंग जूनियर कोलकाता के लिए काम करता है.

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दिल्ली में तेज आंधी का खतरा

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नई दिल्ली। धूल भरी तेज आंधी ने कई राज्यों में भारी तबाही मचाई है. शुक्रवार को तेज आंधी के कारण यूपी में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए. देश की राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार की शाम आंधी चली. लेकिन मौसम विभाग ने कहा है कि रविवार को भी तेज हवा मौसम बिगाड़ सकती है.

प्रादेशिक मौसम केंद्र नई दिल्‍ली की से जारी की गई चेतावनी में 2 जून को आंधी और 3 जून को तेज हवाओं के तेज होने के चलने की संभावना है. 2 जून को तेज आंधी और बिजली चमकने की आशंका है. इस दौरान घरों से निकलने में सावधानी बरतें. वहीं 3 जून को लेकर कहा गया है कि इस दिन भी मौसम थोड़ा बदला बदला रहेगा. जबकि 7 और 8 जून को बिजली कड़कने के साथ हल्‍की बारिश होने की संभावना है.

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यूपी में तूफान की तबाही में 15 लोग मरे

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान के कारण मरने वालों की संख्या 15 बताई जा रही है. शुक्रवार की देर शाम आए तूफान ने भारी तबाही मचाई. इसमें नौ से ज्यादा लोगों के घायल होने की भी बात कही जा रही है. आंधी-तूफान ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा और संभल जिलों में सबसे ज्यादा तांडव मचाया. इसके अलावा सूचना विभाग के प्रधान सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया था कि उन्नाव जिले में सोमवार को बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गयी, जबकि चार अन्य घायल हो गये. कानपुर और राय बरेली से भी दो – दो लोगों के मारे जाने की सूचना है.

बता दें कि इससे पहले भी 28 मई को आंधी-तूफान ने यूपी में काफी तबाही मचाई थी. तूफान की वजह से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में आंधी व बिजली की चपेट में आकर 9 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 6 लोग घायल हो गए थे जबकि यूपी समेत बिहार, झारखंड राज्यों में करीब 40 से ज्यादा लोग मर गए थे. गौरतलब है कि मई की शुरुआत से अबतक उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में तूफान ने काफी तबाही मचाई है. तूफान की चपेट में आने से 150 से ज्यादा जानें गई हैं. आंधी-तूफान की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान यूपी को पहुंचा है.

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‘सीता का अपहरण राम ने किया’, जांच का आदेश

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अहमदाबाद। ‘सीता का अपहरण राम ने किया’, इस बात को सुनकर सब हैरान हैं. लेकिन सच जानतक हैरानी और बढ़ सकती है. इस बात को लेकर मीडिया में खूब चर्चा हो रही है. यहां तक की सोशल मीडिया पर बहस छिड़ चुकी है. हालांकि इसको लेकर जांच भी जारी है.

दरअसल मामला यह है कि गुजरात राज्य स्कूल पाठ्य पुस्तक बोर्ड (जीएसएसटीबी) ने कक्षा बारहवीं की पाठ्य पुस्तक में हुई इस गड़बड़ी की जांच का आदेश दिया है कि ‘सीता का अपहरण राम ने किया.’ गुजरात में कक्षा बारहवीं की पाठ्य पुस्तक के अनुसार सीता का ‘अपहरण’ राम ने किया था. बोर्ड ने कहा है कि संस्कृत से अंग्रेजी में अनुवाद के दौरान ऐसी गडबड़ी हुई है और इसकी जांच करायी जाएगी.

कक्षा बारहवीं के अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की पाठ्यपुस्तक में यह भयंकर गलती हुई है. जीएसएसटीबी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन पेठानी ने दावा किया कि ‘त्याग’ शब्द का अंग्रेजी में अपहरण (एबडक्टेड) अनुवाद किया गया जबकि यह परित्याग (एबनडंड) होना चाहिए था. इस गलती की फौरन सुधार की जाएगी. हालांकि यह बात जगजाहिर है कि सीता का अपहरण रावण ने किया था.

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विज्ञापन व्यापार और राजनीति का हथियार है, साहित्य का नहीं

‘साहित्य की छन्नी’ शीर्षांकित अपने लेख में संजय कुंदन जी लिखते है, “फेसबुक और व्हॉट्सऐप सोशल मीडिया के वो भाग हैं जो साहित्यिक प्रवृत्ति वाले लोगों को सबसे ज्यादा रास आए हैं. फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से और व्हॉट्सऐप पर निजी स्तर पर अपने आपको प्रतिष्ठित किया जा सकता है. फेसबुक और व्हॉट्सऐप के जरिए आप कुछ ही दिनों में राष्टीय और अंतरराष्टीय स्तर पर ख्यातिलब्ध कवि अथवा लेखक बन सकते हैं.”  चन्दन जी के इस आकलन में सच्चाई साफ झलकती है. फेसबुक और व्हॉट्सऐप सोशल मीडिया पर देखी जाने वाली पोस्टस से पता चलता है कि न जाने कितने ही नए-पुराने कवि रोतोंरात ‘राष्ट्र कवि’ ही नहीं अपितु ‘विश्व कवि’ तक बन गए या फिर बना दिए गए.

मेरे दिमाग में भी कुन्दन जी के विचार के समकक्ष यह विचार आया है कि कभी साहित्य में छायावाद, प्रगतिवाद आदि आदि वाद आते रहे और जाते रहे किंतु फेसबुक और व्हॉट्सऐप के इस जमाने में साहित्य में एक और वाद ने जन्म लिया है और वह है “बधाईवाद”. किसी को कुछ अच्छा लगे न लगे फेसबुक और व्हॉट्सऐप पर अपने मित्रों या अमित्रों द्वारा की गई पोस्ट्स पर “बधाई” टंकित करना इसलिए जरूरी हो गया लगता है कि यदि किसी अमुक फेसबुक फ्रेंड ने अपने फेसबुक फ्रेंड को “लाइक” अथवा “बधाई” नहीं दी तो वह भी उसे “लाइक” अथवा “बधाई” नहीं देगा. वैसे ये परम्परा कोई नई परम्परा नहीं है. फेसबुक और व्हॉट्सऐप के जमाने से पहले भी लोग एक-दूसरे से रूबरू हो अथवा मंचों पर, एक-दूसरे की इसी आश्य से प्रसंशा करते होंगे.

साहित्य जगत में ‘तू मुझे पंडा कह, मैं तुझे पंडा कहूँ’ की परम्परा कोई नई नहीं, पुरानी है. फेसबुक और व्हॉट्सऐप ने तो इसे और आगे बढ़ाने का काम किया है, ऐसा मेरा मानना है. यहाँ यह जानना बहुत जरूरी है कि बधाईवाद वो परम्परा है, जिसमें बेचारे साहित्यकार एक – दूसरे बेचारे साहित्यकार को इच्छा-अनिच्छा से बधाई देने को मजबूर होते हैं. सोशल मीडिया पर आजकल ये चलन जोरों से फल-फूल रहा है. किताब आती नहीं, उसका कवरपेज फेसबुक और व्हॉट्सऐप पर प्रसारित हो जाता है. और बधाईयों का तांता लग जाता है. कल तक का गुमनाम लेखक/कवि रातोंरात सुर्खियों में आ जाने के भ्रम में झूम उठता है. यहीं से ये सिलासिला भी जारी होता है कि मुझे किसने लाइक किया, किसने नहीं.

अब जिसने भी अमुक लेखक/कवि को लाइक किया है, जाहिर है वो भी उन लेखकों/कवियों को  इच्छा-अनिच्छा से बधाई देने का मन बना लेता है. और् जिन्होंने उसके हक में कुछ भी नहीं किया, उसे नकारने या उपेक्षा का पात्र समझने का उपक्रम करता है. देखा यह भी गया है कि प्राय: फेसबुकिया मित्र अपने मित्रों द्वारा की गई टिप्पणियों को बिना पढ़े ही लाइक करने के अलावा कोई और टिप्पणी नहीं करते. क्योंकि किसी भी पोस्ट पर टिप्पणी करने के लिए पोस्ट को पढ़ना भी पड़ेगा और दिमाग पर जोर भी देना पड़ेगा. …. हाँ! अतार्किक टिप्पणी करने वालों की भरमार जरूर देखी जाती है. किंतु उनमें अक्सर राजनीतिक मूड के छुटभैये नेता ही ज्यादा होते हैं या फिर तथाकथित धार्मिक कट्टरवाद के समर्थक.

यह तर्क बिला वजह ही नहीं दिया जाता है कि आज बाजार में जब प्रचार के बगैर कुछ भी नहीं चलता तो क्यों न रचनाकार भी अपनी कृतियों का प्रचार करे. इससे उसकी किताबें बिकें न बिकें किंतु रचनाकार विशेष साहित्यकारों की पंक्ति में तो दर्ज हो ही जाएगा. इस युक्ति को आधार बनाकर हिंदी के रचनाकार अब खुद अपनी कृतियों के प्रचार में खुद ही जुट गए हैं. किंतु कोई माने न माने ऐसे लेखक\कवि अपनी रचनाओं का प्रचार करते-करते खुद ही घोर आत्मप्रशंसा के गर्क में चले जाते हैं. किसी ने कहा है कि  दरअसल विज्ञापन और आत्मप्रशंसा में एक बारीक रेखा है, जिसे समझने की जरूरत है.  जब कोई लेखक बताता है कि उसकी अमुक किताब आई है, तो यह एक विज्ञापन है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. लेकिन जब वह रोज-रोज यह बताना शुरू कर देता है कि अमुक आलोचक ने इसे महान बताया, तो यह एक तरह से खुद ही मूल्यांकन करना हुआ. कई लेखक तो यह बताना शुरू कर देते हैं कि फलां कस्बे से एक पाठक का फोन आया और उसने कहा कि ऐसी रचना तो मैंने आज तक पढ़ी ही नहीं थी. क्या यह आत्मप्रशंसा नहीं? मेरा मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से बचना चाहिए.

हद तो जब पार हो जाती है तब कुछ लेखक अपनी किताब के साथ जानेमाने अफसरों, खिलाड़ियों और नेताओं की तस्वीरें  पोस्ट करना शुरू कर देते हैं. ऐसा करना अपनी रचना के प्रति सम्मान न करने बराबर है. समर्थ साहित्य को किसी की बैसाखियों की जरूरत नहीं होती. कबीर, रैदास, अब्दुल रहिम खानखाना, मीरा, सूरदास, रसखान आदि का वो जमाना था कि जब फेसबुक और व्हॉट्सऐप जैसा कोई सोशल मीडिया नहीं होता था किंतु ऐसे रचनाकार अपने कथन के बल पर आज तक भी जिन्दा है और रहेंगे. छायावादी और प्रगतिवादी साहित्यिक काल के अनेक साहित्यकार अपने साहित्य के लिए सर्वत्र जाने जाते हैं.

कोई माने न माने, सच तो यह  है कि सोशल मीडिया ने लोगों को आत्ममुग्ध बनाया है, जिनमें लेखक ही नहीं, समाज का हर वर्ग भी शामिल है. कमाल तो ये है कि  मैंने बहुत कम लेखकों को दूसरे साहित्यकारों की रचनाओं के बारे में यह  बात करते हुए  देखा है कि फलां की रचनाएं उसे बहुत अच्छी लगीं. बस! ‘लाइक’, ‘बधाई’, ‘उम्दा’, ‘क्या कहने’, ‘ प्रयासजारी रखें’ जैसी टिप्पणीयां ही फेसबुक और व्हॉट्सऐप पर अक्सर देखने को मिलती हैं. इससे सिद्ध होता है कि हिंदी के लेखकों में आत्मविश्वास और धैर्य में कहीं न कहीं कुछ न कुछ कमी तो जरूर है. स्मरण रहे कि खूब शोर मचाकर अपनी रचना को महान साबित नहीं किया जा सकता. अनावश्यक कूद-फांद कर ऐसा करने वाले कवि/लेखक साहित्यिक जमात में  खुद को ढलान पर ले जाने का काम कर रहे हैं. इससे उभरने की जरूरत है. साहित्यकारों को समझ लेना चाहिए कि विज्ञापन व्यापार और राजनीति का हथियार है, साहित्य का नहीं.

लेखक:  तेजपाल सिंह तेज (जन्म 1949) की गजल, कविता, और विचार की कई किताबें प्रकाशित हैं- दृष्टिकोण, ट्रैफिक जाम है, गुजरा हूँ जिधर से आदि ( गजल संग्रह), बेताल दृष्टि, पुश्तैनी पीड़ा आदि (कविता संग्रह), रुन-झुन, खेल-खेल में आदि ( बालगीत), कहाँ गई वो दिल्ली वाली ( शब्द चित्र), दो निबन्ध संग्रह  और अन्य. तेजपाल सिंह साप्ताहिक पत्र ग्रीन सत्ता के साहित्य संपादक, चर्चित पत्रिका अपेक्षा के उपसंपादक, आजीवक विजन के प्रधान संपादक तथा अधिकार दर्पण नामक त्रैमासिक के संपादक रहे हैं. स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर आप इन दिनों स्वतंत्र लेखन के रत हैं. हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से सम्मानित किए जा चुके हैं.

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सिवगंगा हिंसाः अबतक तीन दलितों की मौत

तमिलनाडु। दलितों के एक गांव पर ऊंची जाति के हिंदू परिवार ने हमला बोल दिया था. घटना के दिन ही दो दलितों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हो गए. फिलहाल खबर मिल रही है कि अस्पताल में भर्ती एक और घायल दलित की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई. इसको लेकर दो पुलिस को निलंबित भी किया गया है.

01 जून को टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सिवगंगा जिला के जीआरएच हॉस्पिटल में एक और दलित की मौत हो गई जो कि 28 मई की हिंसा में घायल हो गया था. मृतक का नाम वी चंद्रशेखरन (34) बताया जा रहा है. एसपी टी जयचंद्रन ने इस मामले में दो सब इंस्पेक्ट को निलंबित कर दिया है. बता दें कि घटना के दिन ही बुजुर्ग केआर अरुमुगम (65) और शानमुगा नाथन (20) को गंभीर चोट लगने के कारण मौत हो गई थी.

मीडिया खबरों की मानें तो सोमवार 28 मई को तमिलनाडु के सिवगंगा जिला के कंचनाथम गांव में करीब दस बजे हमला किया गया. सीपीएम नेता ने हमले के बाद गांव का दौरा कर बताया था कि दलित गांव के लोग अपने इलाके में भांग की बिक्री करने पर विरोध किए थे. इस बात से नाराज पड़ोसी गांव के लोगों ने हमला बोल दिया. पुलिस के मुताबिक 15 सदस्यी गिरोह के गुस्साए लोगों ने गांव की बिजली काटकर हमला किया. इस दौरान लाठी व धारदार हथियार से दलितों की पिटाई की थी. जिसमें साथ ही करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए.

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मायावती-सोनियाः बीजेपी के गढ़ों में साथ चुनाव लड़ने की तैयारी

PC-ndtv

नई दिल्ली। कांग्रेस व बसपा साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. खबरों की मानें तो बीएसपी और कांग्रेस राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव साथ लड़ने को तैयार हैं. फिलहाल इन तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है. विपक्षी दल कांग्रेस व बसपा तीनों राज्यों में हराने के लिए तैयारी कर रही है.

कांग्रेस छोड़ेगी सीट

मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस बीएसपी के लिए 30 सीट छोड़ेगी. वहीं राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ में सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के वरिष्‍ठ नेताओं के बीच चर्चा जारी है. बीएसपी यूपी में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. हालांकि अभी गठबंधन को लेकर तस्‍वीर साफ नहीं है. यूपी में सीट बंटवारे को लेकर सपा व बसपा के बीच में तालमेल नहीं बन पा रही है. इसको लेकर अभी चर्चा जारी है. सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव की ओर से खासी दिलचस्पी नहीं दिख रही है. जबकि बसपा का कहना है कि यूपी में 40 सीट मिलने पर गठबंधन करने को तैयारी है.

कांग्रेस व बसपा का गठबंधन तो लगभग साफ दिख रहा है. दोनों ही पार्टियां तीन राज्यों में चुनाव लड़ने को तैयार दिख रही है. इससे मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान में वसुंधरा राजे और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की चुनौती बढ़ जाएगी. वैसे उप चुनाव में आदित्यनाथ योगी को बुरी तरह हराने के यूपी में बीजेपी पर खतरा बढ़ गया है.

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हरामी व्यवस्थाः यूपी में दलित बस्ती पर हमला, कई थानों की पुलिस पहुंची

प्रतीकात्मक फोटो

उत्तर प्रदेश। तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश में मामूली विवाद को लेकर ऊंची सामुदाय के लोगों ने दलित बस्ती पर हमला बोल दिया. इस हमले में दलित परिवार के लोगों की बेरहमी से पिटाई की. जिसमें की कई दलित लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. मामला इस कदर बढ़ा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को रोकने के लिए कई थानों की पुलिस को आना पड़ा.

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना आजमगढ़ जिले की है जो कि गुरूवार को घटी. बखरा गांव में बच्चे को लेकर विवाद आरंभ हुआ और हिंसा में तब्दील हो गया. दरअसल, बखरा गांव में गुरुवार रात आठ बजे एक समुदाय विशेष युवक का दलित बस्ती के रहने वाले अमन पुत्र रामअचल राम से विवाद हो गया था. इसके बाद अमन घर चला गया. थोड़ी देर बाद समुदाय विशेष के लोगों ने दलित बस्ती पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया.

इस दौरान ऊंची बिरादरी के गुंडों ने दलितों को जहां देखा वहीं जमकर पीटा. हमले में 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. इस दौरान दलितों के घर को उजाड़ा गया और अंदर रखे सामानों को बाहर निकालकर फेंक दिया. घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है. घायलों को खरेवां के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

एसपी ग्रामीण, सीओ फूलपुर देर रात तक मौके पर मौजूद रहे. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस तलाशी कर रही है. सूचना पर डायल-100 सहित सरायमीर, दीदारगंज, फूलपुर आदि थानों की फोर्स मौके पर पहुंची.

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मोदी सरकार देगी पांच करोड़ रुपए, करना होगा ये काम

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। ब्लैक मनी के खिलाफ एक बार फिर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र ने काले धन के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए नई रणनीति लेकर आई है. इसमें शामिल हो कर जानकारी देने वालों को एक करोड़ रुपए का इनाम भी दिया जाएगा. बेनामी संपत्ति और लेनदेन की जानकारी देने वालों को मोदी सरकार इनामी राशि देकर प्रोत्साहित करेगी. यदि विदेश में काले धन की जानकारी देते हैं तो पांच करोड़ रुपये तक का इनाम जीत सकते हैं. अब तक इनकम टैक्स इंफार्मेंट्स रिवार्ड स्कीम के तहत देश में आय या संपत्ति पर कर चोरी की मुखबिरी करने वाले को 50 लाख रुपये तक इनाम दिया जाता था.

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को बेनामी ट्रांजेक्शंस इंफार्मेंट्स रिवार्ड स्कीम, 2018 की घोषणा की. इसके तहत कोई भी व्यक्ति आयकर विभाग के जांच निदेशालय में बेनामी निषेध इकाई के संयुक्त या अतिरिक्त आयकर आयुक्त को ऐसी बेनामी संपत्ति की जानकारी देकर इनाम जीत सकता है. सीबीडीटी ने कहा कि आय छुपाने वालों की जानकारी देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम राशि में बढ़ोतरी की गई है. साथ ही आयकर विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

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योगी सरकार में कुत्‍तों को फांसी, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कुत्तों के आतंक से परेशान योगी सरकार ने कुत्तों को मौत के घाट उतार दिया. इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया है कि जिस तरह से कुत्‍तों को इस तरह मारना ठीक नहीं है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. इस मामले की अगली सुनवाई आठ जून को होनी है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीतापुर में आदमखोर कुत्‍तों का आतंक इतना बढ़ गया था कि लोग खौफ में थे. रात में तो लोग बाहर निकलने से डरते थे. हालांकि दिन में भी कुत्ते हमला बोल देते थे. इसके बाद लोगों ने कुत्‍तों को मारना शुरू कर दिया था. इस मामले में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा था जिसमें कुत्‍तों को फांसी देते हुए दिखाया गया था. याचिका में ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ ही इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी. याचिका में बताया गया है कि सीतापुर में 13 बच्‍चों की मौत के बाद वहां पर कुत्‍तों को मारे जाने की घटना तेज हो गई है जबकि अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्‍चों की मौत कुत्‍तों के हमले से हुई थी या नहीं.

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यूपी उपमुख्यमंत्री का सीता माता पर विवादित बयान

लखनऊ। बीजेपी मंत्री एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं. त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देव के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने भी सीता पर ऐसा बयान दिया है जिसको सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. इस बयान ने एक बार फिर सबको आश्चर्यचकित कर दिया है.

पत्रकारिता दिवस पर बोले मंत्री

मथुरा में हिंदी पत्रकारिता दिवस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सीता भी टेस्ट ट्यूब बेबी हो सकती हैं. रामायण काल में माता सीता का जन्म एक मिट्टी के बर्तन (घड़े) से हुआ था. इससे यह साबित होता है कि उस समय में टेस्ट ट्यूब बेबी की तकनीक रही होगी.

महाभारत का सीधा प्रसारण

बात केवल वहीं तक नहीं रूकी और उन्होंने कहा कि आज लाइव प्रसारण की समझ महाभारत के समय भी यह तकनीक मौजूद थी. महाभारत के वक्त संजय ने धृतराष्ट्र को महाभारत की लड़ाई का सीधा प्रसारण प्रस्तुत किया था. इसके अलावा यह भी कहा कि आज के डब्लूडब्लूडब्लू के जवाब में नारद का नारायण..नारायण..नारायण था. इन अजीबोंगरीब बातों को लेकर लोग भी अजब-गजब प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

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