नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी को चुनौती दी है. ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर सरकारी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी को चुनौती दी है कि वो 2019 के साथ ही सारे चुनाव करा ले. इसके लिए समाजवादी पार्टी पूरी तरह तैयार है. इससे अच्छा मौका कहां मिलेगा देश का सबसे बड़ा प्रदेश है. संदेश तो यहीं से जाएगा.
‘एक देश एक चुनाव’ तय करने को बनी सरकारी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. कमेटी ने यूपी में अगला विधानसभा चुनाव 2022 के बजाय 2024 लोकसभा चुनाव के साथ कराने की राय दी है. यदि ऐसा होता है तो योगी सरकार का कार्यकाल सात साल का हो जाएगा. कमेटी चाहती है कि दिसंबर 2021 के पहले होने वाले सारे चुनाव 2019 में लोक सभा चुनाव के साथ करा लिया जाए. विधि आयोग के सुझाव की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है. समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी.
बता दें कि हालही में बीजेपी को कैराना व नूरपुर में मात देने के बाद समाजवादी पार्टी पूरी जोश में दिख रही है. माना जा रहा है कि आगामी लोक सभा चुनाव में सपा व बसपा मिलकर चुनाव लड़ेगी. हालांकि सीट बंटवारों को लेकर फिलहाल बातचीत नहीं हो पाई है.
नई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव मामला में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों पर आरोप है कि इन्होंने भीमा-कोरेगांव में नफरत भरे भाषण और विवादास्पद पर्चे बांटे थे. साथ ही पुणे पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से दिल्ली से मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना जैकब विल्सन को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने रोना को दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है. 8 जून को उन्हें पुणे की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा. पुलिस ने रोना के घर की तलाशी के दौरान कई दस्तावेजों और उनके लैपटॉप को जब्त कर लिया था.
इसके अलावा नागपुर से एक्टिविस्ट वकील सुरेंद्र गाडलिंग को भी केस से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. एक अन्य कार्यवाही में पुणे पुलिस ने भरतनगर में प्रोफेसर सोमा सेन के घर में तलाशी ली. सेन के पति तुषारकांत भट्टाचार्य को भी माओवादियों के साथ उनके कथित संबंधों के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया था. इसी प्रकार पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और दिल्ली से कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.
जिग्नेश मेवानी भड़के
गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने पुलिस की गिरफ्तारी पर सवाल खड़ा करते हुए इन्हें अंबेडकवादी आंदोलन पर हमला बताया है. मेवानी ने ट्वीट कर लिखा, ” महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में अंबेडकरवादी कार्यकर्ता और संपादक सुधीर धावले, नागपुर में वकील सुरेंद्र गाडलिंग और दिल्ली में रोना विल्सन को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों पर यूएपीए के सख्त कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि भीमा कोरेगांव का अपराधी मनोहर भिड़े आजाद घूम रहा है.”
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी आरक्षण के आधार पर सरकारी कर्माचारियों को प्रमोशन देने पर फैसला सुनाया है. इस फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वागत किया लेकिन भाजपा सरकार पर मायावती ने कड़े रूख इख्तेयार किए. मायावती का कहना है कि भाजपा केवल सस्ती पब्लिसिटी के लिए काम करती है.
मुँह में राम बगल में छुरी…
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बुधवार को मायावती ने कहा कि एसससी/एसटी वर्गों के प्रति बीजेपी सरकार जातिवादी रवैया त्यागे और सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा निर्णय के बाद केन्द्र व राज्य सरकारें अपने पिछले तमाम निर्णयों की समीक्षा करे तथा इन वर्गों के कर्मचारियों पर हुये अन्यायों को दुरुस्त करने के साथ-साथ उन्हें अभियान चलाकर प्रोन्नति में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ दे. पहले कांग्रेस व अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ‘‘प्रोन्नति में आरक्षण‘‘ के मुद्दे पर भी अपना जातिवादी रवैया त्यागने को तैयार नहीं लगती है. बीजेपी सरकार व कांग्रेस पार्टी केवल सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने वाली दिखावटी सहानुभूति व काम करने का आरोप लगाते हुये मायावती ने कहा कि ख़ासकर एसससी/एसटी व ओबीसी वर्गो के हित व कल्याण के लिये ठोस काम करने के मामले में इनकी सरकारों का रिकार्ड ज़ीरों ही रहा है. इनकी नीति व कार्य प्रणाली मुँह में राम बगल में छुरी की तरह से ही है.
उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उप चुनावों से एकजुट हो रहीं विपक्षी पार्टियों के सामने भाजपा की हार का जो सिलसिला शुरू हुआ वह हाल में कैराना और नूरपुर समेत अन्य जगहों पर हुए उप चुनावों में भी जारी रहा. उप चुनावों में भाजपा की लगातार जारी हार से अब मोदी-शाह के अपराजित होने का मिथक टूटता जा रहा है. पिछले चार साल में देश के बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों,संस्थाओं, समाज, संस्कृति और सभ्यता के लिए अभूतपूर्व संकट पैदा करने वाले मोदी राज से निजात पाने में यदि विपक्षी दलों की एकजुटता सफल होती है तो यह निश्चित तौर पर देश और लोकतंत्र के लिए अच्छा होगा. लेकिन क्या इससे जनता के अच्छे दिन आ जाएंगे?
इन दलों और बन रहे गठबंधन के पास बदहाल होते जा रहे किसानों और कृषि संकट का क्या समाधान है, बेरोजगारी की मार झेल रहे नौजवानों को रोजगार देने की क्या नीति है, शोषित वर्गों और दलित, पिछड़े, आदिवासी, महिलाओं समेत वंचित तबकों की बेहतरी और न्याय के लिए उनकी क्या नीतियां हैं ? इस कसौटी पर तस्वीर बेहद निराशाजनक है.
कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन की मनमोहन सरकार के दस साल के शासन में जो जनविरोधी नीतियां देश पर थोपी गईं. उनसे जनता के विभिन्न वर्गों के विक्षोभ से फायदा उठाकर सत्ता में आई मोदी सरकार अपने पूर्ववर्तियों की उन्हीं आर्थिक- औद्योगिक नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाने का काम ही कर रही है. जनता के जीवन का संकट और अधिक गहराता गया और कारपोरेट मीडिया द्वारा गढ़ी गई मोदी की छवि से पैदा हुई छदम उम्मीदें धरातल पर दम तोड़ने लगीं. जनता के विभिन्न वर्गों के जीवन के मूलभूत प्रश्नों को पीछे धकेलने के मोदी-संघ द्वारा किये जा रहे विभाजनकारी प्रयास अब लोकप्रिय जनमत तैयार कर पाने में तात्कालिक तौर पर ही सही सफल नहीं हो पा रहे हैं.
जाहिर है संकट ढांचागत है और नव उदारीकृत नई आर्थिक-औद्योगिक नीतियों ने इसे और गहरा किया है. कांग्रेस ने इन जनविरोधी नीतियों से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है और मानवीय चेहरे के साथ उदारीकरण का मनमोहन मॉडल कितना मानवीय था, सब देख चुके हैं.
यूपीए गठबंधन की अन्य क्षेत्रीय पार्टियां भी इन्हीं नीतियों की पिछलग्गू हैं. अजीत सिंह तो खुद कैबिनेट के अंग रहे, उत्तर प्रदेश की सपा और बसपा यूपीए -2 को बाहर से समर्थन करती रहीं और सूबे में इनकी सरकारें नई आर्थिक- औद्योगिक नीतियों की पैरोकारी में पीछे नहीं रहीं. अब 2019 में सत्ता के बदलाव में यदि ये सफल होते हैं तो यूपीए- 1 जैसी स्थिति भी नहीं होगी जहां वामदलों के दबाब में नई आर्थिक नीतियों की रफ्तार धीमी हुई, कुछ जनपक्षधर काम करने पड़े और जनता को कुछ राहत मिली. यह यूपीए-2 की नीतियों का ही विस्तार होगी. जनविरोधी नीतियों पर कोई लगाम नहीं होगी और जनता के लिए कोई विशेष राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती.
राष्ट्रीय स्तर पर आमतौर पर यूपीए-1 के समय जैसी ही गठबंधन की स्थिति है. सीपीएम ने कांग्रेस के साथ किसी भी राजनीतिक गठबंधन को नकार दिया है. जिस “भाजपा हराओ महागठबंधन” की बात की जा रही है यह उत्तर प्रदेश केंद्रित परिघटना दिखती है जहां सपा और बसपा जो यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन तो पहले भी देती रहीं थीं लेकिन सूबे की राजनीति में धुर विरोधी रहते हुए भी इस बार लोकसभा चुनावों में एक गठबंधन की दिशा में बढ़ रही हैं. इन दलों का यह गठबंधन भाजपा को हराने की कोई राजनीतिक-वैचारिक प्रतिबद्धता से अधिक अपने-अपने राजनीतिक बजूद को बचाने की कवायद ज्यादा दिखता है.
उप चुनावों में भाजपा की हार से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन से बन रहा बड़ा संगठित सामाजिक आधार चुनावी शक्ति संतुलन में भाजपा पर भारी पड़ रहा है और भाजपा तात्कालिक तौर पर उसकी काट नहीं कर पा रही है. लेकिन सपा-बसपा गठबंधन की जनमुद्दों पर चुप्पी और इसके द्वारा कोई घोषित जनपक्षधर कार्यक्रम के साथ सामने न आना इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है.
मोदी को सत्ता से हटा देने भर से जनता के अच्छे दिन नहीं आ जाएंगे. जन आंदोलन की ताकतों और जनपक्षधर लोकतांत्रिक शक्तियों को भाजपा हराने के राजनीतिक कार्यभार को सामने रखते हुए कांग्रेस सहित सपा और बसपा आदि भाजपा विरोधी गठबंधन के सामने जनता के सवालों को उठाना चाहिए और जनविरोधी नई आर्थिक-औद्योगिक नीतियों से पीछे हटने की मांग मजबूती से रखनी होगी.
(अजीत सिंह यादव, मजदूर किसान मंच, उत्तरप्रदेश के संयोजक हैं.)
नई दिल्ली। स्टेशन पर उतरने के बाद गांव जाने के लिए गाड़ी ना मिलने के कारण अक्सर लोगों को भटकना पड़ता है. कई बार तो स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ती है और नहीं तो प्राइवेट गाड़ी वाले मनमाना दाम वसूलते हैं. इतना के वाबजूद भी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती. समस्या यहीं खत्म नहीं होती है. जब गांव से शहर आकर अहले सुबह या शाम-रात में ट्रेन पकड़नी हो तो गांव के लोगों को एक दिन पहले ही निकलना होता है.
इन तमाम समस्याओं से जूझते एक जुझारू बिहारी युवा ने समाधान निकाला. इस युवा ने काफी मेहनत कर ओला-उबर की तरह गांव के लिए कैब सेवा शुरू की. इसकी मेहनत देखकर पीएम के वीडियो कांफ्रेंस कार्यक्रम में शामिल किया गया. इस युवा का दावा है कि गांव के लोगों को सस्ती व सुरक्षित कार का सफर कराने के लिए सेवा आरंभ की गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार की कैब सर्विस ओला-उबर से भी सस्ती कैब सेवा है. रवि रणवीरा, दलित दस्तक से बातचीत करने पर बिहारी युवा ने बताई अपने सफर की कहानी…
बिहार के सहरसा के दूर दराज बनगांव में रहने वाले दिलखुश कुमार जो कल तक कंस्ट्रक्शन कंपनी में करते थे. वो आज आर्य गो कैब कंपनी के मालिक हैं. अक्टूबर, 2016 में कैब सर्विस के शुरू कर बिहार के तीन जिला सहरसा, मधेपुरा व सुपौल में कैब सेवा को पहुंचा दिए हैं. और दरभंगा व मुजफ्फरपुर में शुरू होने वाली है. इनका कहना है कि 2020 तक पूरे बिहार में इनकी कंपनी काम करना शुरू कर देगी. साथ ही उत्तराखंड में भी शुरू करने की तैयारी चल रही है.
ड्राइवर पिता का दर्द…
दिलखुश कुमार बताते हैं कि इनके पिताजी पवन खां ने प्राइवेट बस चलाकर इनको पढाया-लिखाया. लेकिन बिहार में ड्राइवरों को तनख्वाह नहीं मिलती जिसके चलते पलायन कर बड़े शहरों में चले जाते हैं. इस पलायन को रोकने के लिए दिलखुश अपनी कंपनी के जरिए ड्राइवरों की जिंदगी बदलने का संकल्प लेकर काम आरंभ किए हैं. साथ ही जिनकी कार, बेकार पड़ी हुई हैं उनको भी अपने साथ जोड़ेंगे.
बेटी होने पर मुफ्त सैर…
दिलखुश जमीनी स्तर पर जुड़े होने के कारण इनका यह भी मानना है कि मुनाफा के साथ-साथ समाजिक कल्याण के लिए भी काम किया जाना चाहिए. इसके लिए आर्य गो कैब बेटी पैदा होने पर जच्चा-बच्चा को सरकारी अस्पताल से घर तक की मुफ्त सेवा देगा. साथ ही सैनिक-शहीदों के परिवार के लिए भी आकर्षक ऑफर दिया जाएगा.
पीएम मोदी से बात…
06 जून, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा स्टार्ट्प्स से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात की. केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम में दिलखुश की कंपनी आर्य गो कैब को शामिल किया गया. इस दौरान दिलखुश ने पीएम की बात सुनी. हालांकि समय अभाव के कारण करीब एक घंटा तक ही पीएम ने युवाओं को संबोधित किया. इनका कहना है कि बिहार सरकार इनको मदद कर रही है, आने वाले दिनों में सरकार हम युवाओं की मदद करेगी तो हम रोजगार पैदा करेंगे और गांवों की तस्वीर भी बदलेगी.
सुरक्षा की गारंटी
दिलखुश बताते हैं कि सुरक्षा के लिए हमारी टीम ऑनलाइन निगरान रखेगी. इसके अलावा हमारे ड्राइवर किसी प्रकार का भेदभाव या गलती करते हैं तो उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा. इसके साथ-साथ हमारी टीम हर जिला के डीएम व पुलिस प्रशासन से मिलकर सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत कर रही है.
नई दिल्ली। नाराज सहयोगी दलों के दिलों को जोड़ने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संपर्क अभियान शुरू किया है. इस संबंध में अमित शाह बुधवार की शाम शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे लेकिन इससे पहले ही शिवसेना ने साफ तौर कह दिया है कि वह 2019 में अकेले चुनाव लड़ेगी. हालांकि अभी तक शिवसेना के उध्दव ठाकरे की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि मातोश्री में सभी का स्वागत है लेकिन शिवसेना ने अब ‘एकला चलो रे’ की नीति अपना ली है. हमने पालघर के चुनाव में इसको साबित कर के दिखा दिया है. अब शिवसेना अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी.
इसके अलावा शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिये भाजपा को कड़वाहट भरा जवाब दिया है. ‘सामना’ के अनुसार अमित शाह इन चुनावों में किसी भी तरह 350 सीटें जीतना चाहते हैं. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं, किसान सड़क पर हैं, कोई भी खुश नहीं है लेकिन बीजेपी चुनाव जीतना चाहती है. शिवसेना का इशारा है कि बीजेपी पहले आम जनता का दिल जीते और इनसे संपर्क करने की कोशिश करे.
लखनऊ। महागठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी के बीट गठबंधन की बात जोरों पर चल रही हैं. हालांकि इस बात को लेकर बसपा ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में 80 में से 40 सीटों पर बसपा लड़ेगी. इसको लेकर अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार चल रहा था. अब इसको लेकर अखिलेश यादव का जवाब आया है.
समाजवादियों का दिल बहुत बड़ा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हो पाई है लेकिन समय आने पर इस मुद्दे पर बात जरूर होगी. बीएसपी यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 40 सीटें मांगने वाली बात पर अखिलेश ने मुस्कुरा कर कहा, ‘समाजवादियों का दिल बहुत बड़ा है. सही समय पर सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की जाएगी.’
बता दें कि अखिलेश यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव भी बसपा से गठबंधन कर लड़ने का भी ऐलान किया है. गौरतलब है कि इसी साल गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था, जिसमें बीजेपी को करारी हार मिली थी. साथ ही हाल ही में कैराना व नूरपुर में भी दोनों दलों ने मिलकर भाजपा को हराने का काम किया.
जालंधर। पंजाब में हक मांग रही दलित औरतों पर ट्रैक्टर चढ़ाने के मामले को लेकर दलितों ने विरोध जताया है. लोगों का कहना है कि प्रशासन नींद में सो रही है. इसको जगाने के लिए चक्का जाम किया जाएगा. इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा. साथ ही प्रशासन को कुंभकर्णी नींद से जागने की बात भी कही.
पेंडू मजदूर यूनियन ने बताया कि सरकार की घोषणाओं के बावजूद दलितों को उनके हक नहीं मिल पा रहे हैं. जब ब्लाक जालंधर वैस्ट के गांव हसनमुंडा में बीते दिनों अपना हक मांगने सड़क पर उतरे तो दलितों पर अत्याचार किया गया व दलित औरतों पर ट्रैक्टर चढ़ाया गया. लेकिन कान खोलकर सुन लें इससे हमारी आवाज नहीं दब सकती है. यदि ऐसा करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा.
जमीनों पर अमीरों का कब्जा
इस मामले को लेकर जिलाधीश कार्यालय में मांग पत्र दिया गया जिसमें पंचायत की जमीन का तीसरा हिस्सा दलितों को दिए जाने की बात कही. इनका कहन है कि संवैधानिक अधिकार के बावजूद भी दलितों के पंचायतों की जमीनों पर अमीर लोगों का कब्जा है. पंजाब केसरी की खबर के अनुसार गांव हसनमुंडा के अलावा ब्लाक फिल्लौर का गांव संगतपुर, ईस्ट का गांव हरदोफराला, मैहतपुर के गांव कुरशेतपुर में नियमों के विपरीत जाकर जमीनें दी गई हैं. प्रदेश प्रधान तरसेम पीटर, जिला प्रधान हंसराज पबवां, जिला सचिव कश्मीर सिंह घुगशोर, दर्शन पाल बटाला, चन्नन सिंह, बलविन्द्र कौर ने कहा कि यदि तुरंत प्रभाव से उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे 11 जून को पंजाब भर में चक्का जाम करेंगे.
अयोध्या। राम मंदिर मुद्दा भाजपा के लिए 2019 में हार का कारण बन सकता है. विहिप के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के बाद अयोध्या के महंत सुरेश दास ने बीजेपी के खिलाफ आंदोलन कनरे की बात कही है. राम मंदिर को लेकर केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है. महंत का कहना है कि राम मंदिर बनाने में विफल मोदी सरकार को हराने के लिए कोशिश की जाएगी. भाजपा सत्ता में आना चाहती है तो फिर राम मंदिर का वादा पूरा करे.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिगंबर अखाड़े के महंत ने बात जारी रखते हुए कहा है कि भाजपा को राम मंदिर बनाना ही होगा. चेतावनी भी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो हम भाजपा के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे जिससे उनकी हार तय है. जबकि राम मंदिर मुद्दा को लेकर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मीडिया को कहा है कि 2019 के चुनाव में भाजपा का एकमात्र एजेंडा विकास ही होगा. 2019 के चुनावों में हिंदुत्व और ‘राम मंदिर’ के मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं होगी, सिर्फ विकास ही हमारा मुद्दा है. बता दें कि हाल ही में बीजेपी से नाराज बजरंग दल व विहिप के करीब 14 हजार कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला है.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एक गांव में प्रेम प्रसंग के कारण दलित युवक की हत्या की खबर सामने आई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्यानपुर थाना क्षेत्र के बिंदकी रोड नहर पटरी पर रविवार की शाम एक दलित युवक अचेत अवस्था में पड़ा मिला. लेकिन घर से अस्पताल ले जाते समय युवक ने दम तोड़ दिया.
गंभीर चोट के निशान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सीने में गंभीर चोट से मौत की पुष्टि हुई है. अमर उजाला की खबर के अनुसार थानाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह गौर का कहना है कि युवक के मौत के पीछे प्रेम प्रसंग है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. युवक के चचेरे भाई रामशरण ने गांव के लोधी बिरादरी के लोगों पर भाई की हत्या का आरोप लगाया है. हालांकि यह बात तो साफ हो गई है कि दलित युवक की बेरहमी से हत्या की गई है. पुलिस इस मामले में पूछताछ कर रही है.
कौन है युवक
थाना क्षेत्र के कोरसम के पुरवा निवासी रमेश सोनकर का छोटा बेटा नरेंद्र (22) रविवार सुबह किसी काम से बिंदकी गया था. सोमवार शाम करीब सात बजे बिंदकी के पहले चौडगरा रोड पर नहर पटरी में अचेत पड़ा मिला. बेटे की मौत से पिता रमेश और मां कमला बेहोश होकर गिर पड़े. स्थानीय लोगों का कहना है कि फतेहपुर गांव की गैर बिरादरी की लड़की से प्रेमप्रसंग करता था. चौडगरा पुलिस चौकी ने दो जून को चौकी बुलाकर दोनों पक्षों में सुलह समझौता कराकर घर भेज दिया था.
लखनऊ। कैराना-नूरपुर में बीजेपी को पटखनी देने पर विपक्षी दल जीत का जश्न मनाने की तैयारी में जुटे हैं. इन दो सीटों पर बीजेपी का सुपड़ा साफ करने के बाद आरएलडी काफी खुश नजर आ रही है. इसके लिए आरएलडी बुधवार को लखनऊ में पार्टी दफ्तर में इफ्तार का आयोजन कर रही है. इफ्तार पार्टी में बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निमंत्रण दिया गया है.
खबरों की मानें तो आरएलडी के इफ्तार पार्टी में कांग्रेस, सपा और बसपा नेताओं को निमंत्रण दिया गया है. आरएलडी नेता जयंत चौधरी और कैराना में जीत दर्ज करने वाली सांसद तबस्सुम हसन भी मौजूद रहेंगी. इस बात को लेकर राजनीति गरमाई दिख रही है. इसे सियासी इफ्तार बताया जा रहा है.
बता दें कि कैराना उपचुनाव में आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन के समर्थन में विपक्षी दलों ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे. इस कारण तबस्सुम ने बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह को करीब 42 हजार मतों से हरा दिया. साथ ही नूरपुर की सीट पर सपा का कब्जा रहा. इस इफ्तार पार्टी में मायावती व अखिलेश शामिल होंगे या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.
इलाहाबाद। छात्रसंघ ने विरोध प्रदर्शन करने के दौरान गुस्साए छात्रों ने पुलिस वाहन को फूंक दिया. साथ ही जमकर नारेबाजी की. इस दौरान विवि में जमकर तोड़फोड़ी की गई. इससे पहले विवि के कुलपति को बंधक भी बनया गया था. इसके बाद भी विवि प्रशासन ने बात नहीं मानी तो छात्र सड़कों पर उतर आए.
बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों ने जबरदस्त हंगामा किया है. इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया. साथ ही पथराव भी जमकर किया. तभी हॉस्टल खाली कराने गई पुलिस के वाहनों में गुस्साए छात्रों ने आग लगा दी. हालांकि दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई. इतना ही नहीं इस दौरान छात्रों ने हवाई फायरिंग कर देशी बम फोड़े. बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के वाश आउट के फैसले के बाद छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया.
जान लें कि सारा मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव के तबादले विरोध में आरंभ हुआ. इसके लिए कुलपति को विश्वविद्यालय प्रांगण में बंधक बना लिया. कुलसचिव कर्नल हितेश लव से कार्यभार छीनने के बाद इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थिति बिगड़ गई है.
नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार का खेल अभी थमा नहीं है. कर्नाटक के कांग्रेस विधायक दिल्ली आ गए हैं. सूत्रों का कहना है कि मंत्री पद की आस में कांग्रेस विधायक दिल्ली आए हैं. यहां पर बैठक कर मंत्री पद बनाने पर फैसला लिया जाएगा. इस बात को लेकर कांग्रेस व जेडीएस विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं. अभी देखना है कि किस विधायक को मंत्री पद सौंपा जाता है.
सूत्रों का कहना है कि इस समय दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित कर्नाटक भवन दक्षिण भारत के कांग्रेस नेताओं का ठिकाना बना हुआ है. 34 संभावित मंत्री पदों में से कांग्रेस को 22 पद मिलने की उम्मीद है. मंत्री पद पाने की रेस में प्रमुख कांग्रेसी विधायक दिनेश गुंडू राव, कृष्णा बायरे गौड़ा, आरवी देशपांडे, ईश्वर खंडरे, अजय सिंह आदि हैं. मंत्री पद बंटवारे के बाद कर्नाटक सरकार तेजी से काम करेगी. मंत्री पद बंटवारा ना होने के कारण थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
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नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कर्मचारियों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है. एससी व एसटी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण देने की इजाजत दे दी है. एएनआई की खबर के अनुसार मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि वर्तमान कानून के हिसाब से यह व्यवस्था इस मामले में संवैधानिक बेंच का अंतिम फैसला आने तक लागू रह सकती है.
पांच साल बाद…
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के कर्मचारियों के लंबे प्रतिक्षा के बाद जीत मिली है. सुप्रीम कोर्ट एससी-एसटी कर्मचारियों को पांच साल बाद भी प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंजूरी दी है.
बता दें कि 1992 में बहुचर्चित इंदिरा साहनी मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 1997 तक प्रमोशन में पांच साल तक आरक्षण देने की व्यवस्था लागू थी. तब अगस्त 1997 में केंद्र ने नई अधिसूचना लाकर प्रमोशन में आरक्षण को पूरे सेवाकाल तक बढ़ा दिया. लेकिन इस फैसले को एनजीओ ऑल इंडिया इक्वालिटी फोरम और अन्य लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट में उठाया और चुनौती दे दी थी. इस पर सुनवाई करने के बाद 23 अगस्त 2017 को हाई कोर्ट ने अगस्त 1997 में जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया था. दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नवंबर 2017 में इस मामले को अपनी संवैधानिक बेंच को सौंप दिया था. फिलहाल इस फैसले आधार पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कर्मचारियों को आरक्षण के आधार पर प्रमोशन मिलेगा.
राजकिशोरजी नहीं रहे. हिंदी पत्रकारिता में विचार की जगह आज और छीज गई. कुछ रोज़ पहले ही उन्होंने अपना प्रतिभावान इकलौता बेटा खोया था.
पिछले महीने जब मैं उनसे मिलने गया, वे पत्नी विमलाजी को ढाढ़स बँधा रहे थे. लेकिन लगता था ख़ुद भीतर से कम विचलित न रहे होंगे. मेरे आग्रह पर राजस्थान पत्रिका के लिए वे कुछ सहयोग करने लगे थे. एक मेल में लिखा – “दुख को कब तक अपने ऊपर भारी पड़ने दिया जाये.” फिर जल्द दूसरी मेल: “तबीयत ठीक नहीं रहती. शरीर श्लथ और दिमाग अनुर्वर. फिर भी आप का दिया हुआ काम टाल नहीं सकता. आज हाथ लगा रहा हूँ.”
लेकिन होना कुछ बुरा ही था. फेफड़ों में संक्रमण था. कैलाश अस्पताल होते एम्स ले जाना पड़ा. आइसीयू में देखा तो अचेत थे. कई दिन वैसे ही रहे. तड़के उनकी बहादुर बेटी ने बताया डॉक्टर कह रहे हैं कभी भी कुछ हो सकता है; कुछ घंटे या दो-तीन रोज़ … और दो घंटे बाद वे चले गए. फ़ोन पर मुझसे कुछ कहते नहीं बना. परिवार पर दूसरा वज्रपात हुआ है. ईश्वर उन्हें इसे सहन कराए.
मेरा परिचय उनसे तबका था जब सत्तर के दशक में बीकानेर में शौक़िया पत्रकारिता शुरू की थी. वे कलकत्ता में ‘रविवार’ में थे. तार भेजकर मुझसे लिखवाते थे. फिर जब मैं राजस्थान पत्रिका समूह के साप्ताहिक ‘इतवारी पत्रिका’ का काम देखने लगा, उन्होंने हमारे लिए नियमित रूप से ‘परत-दर-परत’ स्तम्भ लिखा जो बरसों चला. ‘जनसत्ता’ के भी वे नियमित लेखक रहे.
गांधी और समाजवाद में उनकी गहरी आस्था थी.
उन्होंने ‘परिवर्तन’, ‘दूसरा शनिवार’, (ऑनलाइन) ‘हिंदी समय’ और हाल में नए ‘रविवार’ का सम्पादन किया. नवभारत टाइम्स में भी रहे. उनकी किताबें हैं – पत्रकारिता के पहलू, पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति, एक अहिंदू का घोषणापत्र, जाति कौन तोड़ेगा, रोशनी इधर है, सोचो तो संभव है, स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार, स्त्रीत्व का उत्सव, गांधी मेरे भीतर. समकालीन मुद्दों और समस्याओं पर उन्होंने ‘आज के प्रश्न’ शृंखला में कोई पच्चीस किताबों का सम्पादन भी किया. उनके दो उपन्यास और एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए.
राजकिशोरजी ही नहीं गए, उनके साथ हमारा काफ़ी कुछ चला गया है. जो लिखा हुआ छोड़ गए हैं, उसकी क़ीमत अब ज़्यादा समझ आती है.
नई दिल्ली। बिहार के तीन ऐसे युवाओं की कहानी बताने जा रहा हूं, जो किसी लड़की के नहीं बल्कि धरती के दिवाने हैं. कहानी ऐसी ही हैं, ये तीन युवा पर्यावरण को बचाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ा, तो कोई करोड़ों का मोह त्याग दिया और एक युवा तो और भी पागल; जो कि धरती के लिए छुट्टी लेता है. पर्यावरण दिवस पर रवि रणवीरा, ‘दलित दस्तक’ की बात इन तीनों युवाओं से हुई और इन्होंने कुछ यूं जाहिर की अपनी पर्यावरण प्रेम कहानी…
करोड़पति का चंपा प्रेम
‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) के विजेता सुशील कुमार, मोतिहारी चंपारण को फिर से जिंदा करने में जुटे हैं. चंपारण की असली पहचान को बचाने के लिए ‘चंपा अभियान’ शुरू किए हैं. इनका कहना है कि चंपारण का अर्थ होता है चंपा+अरण्य लेकिन आधुनिक काल में चंपारण के लोग ही अपना अस्तित्व खो दिए हैं. औषधिय गुण से भरपूर पौधे को लगाने का काम 27 अप्रेल, 2018 को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता व प्रथम ग्रीन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मेधा पाटकर के हाथों आरंभ कराया और अबतक करीब 30 हजार चंपा के पौधे चंपारण भर में लगा चुके हैं. इनका कहना है कि चंपारण को चंपा से सजाकर ही दम लेंगे. इनके साथ देश-विदेश के युवा भी जुड़कर ‘चंपा-अभियान’ को आगे बढा रहे हैं. सुशील कुमार कहते हैं कि पार्किंग के साथ-साथ एक पेड़ के लिए भी घर में जगह होनी चाहिए.
प्रेमिका के लिए नहीं बल्कि…
दुसरे ऐसे युवा की कहानी है जो कि अपनी प्रेमिका के लिए नहीं बल्कि खेत-खलिहान को बचाने के लिए छुट्टी लेता है. पीयूष तिवारी बताते हैं कि प्राइवेट जॉब में छुट्टी लेना बहुत मुश्किल होता है लेकिन मिट्टी को बचाने के लिए टाइम मैनेज कर दो-तीन माह में गांव जाता हूं और लोगों को जैविक खेती की ट्रेनिंग देता हूं. इसके साथ-साथ मुफ्त में मिट्टी जांच करता हूं. इसके अलावा लोगों को मुफ्त में जैविक खाद आदि भी देते हैं. प्राइवेट जॉब के पैसे को बचाकर जैविक खेती की परंपरा को पुनः जीवित करने के लिए पीयूष तिवारी जी-जान से जुटे हैं. इनकी मेहनत के कारण ही हालही में इनको कृषि मंत्रालयद्वारा आयोजित कार्यक्रम स्टार्ट अप इंडिया एग्रीकल्चर ग्रांड चैलेंज में कृषि समस्याओं के निदान पर सुझाव देने के लिए नई दिल्ली में शामिल किया गया और आईआईएम कोलकाता व टीएसटी द्वारा आयोजित स्मार्ट-50 में इनकी संस्था सेनटायल बायोटेक को टॉप-3000 स्टार्ट अप में शामिल किया गया. पीयूष तिवारी व इनकी टीम का कहना है कि मिट्टी को रसायनिक खाद के जहर से बचाने के लिए हम लोग ताउम्र काम करेंगे. क्योंकि मिट्टी के बिना किसान व जीवन की कल्पना करना असंभव है.
और लगा दिए 23 हजार पौधे
एक तरफ जहां हमारे युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों-साल पागलों की तरह मेहनत कर रहे हैं तो वहीं राजेश कुमार सुमन सरकारी नौकरी छोड़कर गांव लौट आए और सेल्फी विद ट्री नामक अभियान शुरू कर दिया. इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए रिश्तेदारों के शादी-पार्टी में पौधे गिफ्ट करते हैं. अबतक करीब 22-23 हजार पौधों को लगवाया जा चुका है. 05 मई, 2018 मंगलवार को बिहार के सभी जिलों में इनकी संस्था की ओर से 10 हजार पौधे लगवाएं. साथ ही रैली निकाली गई. आज इस अभियान के साथ लाखों लोग जुड़कर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में वृक्षारोपण कर रहे हैं. राजेश कुमार सुमन का कहना है कि धरती को बचाने व सजाने के लिए हमारा प्रयास जारी है. जिस तरह लोग हमारे अभियान के साथ जुड़कर पौधा लगा रहे हैं उसे देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में धरती एक बार फिर श्रृंगार कर सज-संवर जाएगी.
भोपाल। बसपा ने मध्य प्रदेश के दो दिन के दौरे पर राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर को भेजकर पार्टी की रणनीति तैयार करने के लिए भेजा है. सोमवार को पहले दिन महासचिव का स्वागत किया गया. इस दौरान महासचिव ने सभी जिला अध्यक्ष व विधान सभा के प्रभारियों से को संबोधित किया और राज्य के बारे में पार्टी प्रभारी से पूछताछ की.
पहले दिन के प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में महासचिव ने शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कहा कि सबसे पहले किसान व दलित-मजदूर विरोधी शिवराज की सरकार गिरानी है. इसके साथ ही केंद्र से भाजपा को उखाड़ फेंकना है. इसके लिए उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को मजबूत होने के लिए कहा. साथ ही यह भी कहा कि वे अपने क्षेत्र में दौरा करें और दबे-कुचले लोगों की मदद करें. बसपा प्रमुख मायावती का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी मुखिया ने कर्नाटक में बीजेपी को पटखनी देकर भाजपा की बैचेनी बढ़ा दी है. हमें मायावती के सपने को साकार करने के लिए जमकर मेहनत करनी है.
इस मौके पर राज्य के 51 जिलों व 230 विधान सभा क्षेत्रों से बसपा के प्रभारी व पदाधिकारी आए हैं. हजारों की भीड़ में कार्यकर्ताओं हिस्सा लिया. मंगलवार को मध्य प्रदेश का दौरा करने के बाद अगले राज्य के लिए महासचिव निकलेंगे. बता दें कि राम अचल राजभर को तीन राज्य मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी भी बनाया गया है.
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दनादन हमला कर रहे हैं. सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंगापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया संवाद कार्यक्रम का वीडियो शेयर कर कटाक्ष किया है. राहुल ने कहा कि अच्छा है कि उनके कार्यक्रम के सवाल-जवाब पहले से तय होते हैं, अगर ऐसा नहीं होता तो ‘हम सभी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा हो जाती.’
राहुल गांधी ने सिंगापुर दौरे पर पीएम मोदी के एक कार्यक्रम के ऊपर तंज कसते हुए यह ट्वीट किया. राहुल ने मोदी के इस संवाद कार्यक्रम का एक अंश का वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सवाल-जवाब पहले से ही तय कर दिए जाते हैं. बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री का सिंगापुर के नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनटीयू) में संवाद कार्यक्रम का वीडिया शेयर किया है. राहुल गांधी ने इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी को ट्वीटर पर चैलेंज किया था.
केरल। निपाह वायरस का खौफ इतना है कि एक विधायक हाथ-मुंह ढंक कर विधान सभा पहुंचे. इसके बाद मुख्यमंत्री ने पी विजयन ने इस पर विधायक का मजाक उड़ा दिया. हालांकि कुछ विधायकों ने इसका स्वागत भी किया. लेकिन स्वास्थ्य मंत्री शैलेजा ने भी विधायक का मजाक उड़ा दिया लेकिन इससे विधायक कोई फर्क नहीं पड़ा.
इसलिए पहना मास्क
केरल के कोझीकोड जिले में निपाह संक्रमण के प्रभाव की ओर ध्यान खींचने के लिए आईयूएमएल के विधायक ने विधानसभा में मास्क और दस्ताने पहनकर हिस्सा लिया. इसके बाद सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ के नेता आपस में भीड़ गए. कुट्टीयाडी से विधायक पी अब्दुल्लाह विधानसभा में मास्क और दस्ताने पहनकर दाखिल हुए, इनको देखकर विपक्षी सदस्यों से अभिवादन किया.
सदन में नहीं आना चाहिए था…
विपक्षी दलों ने भले ही स्वागत किया लेकिन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ये अंदाज रास ना आया. इसलिए मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा कि सदस्य का व्यवहार एक गंभीर मुद्दे को ‘महत्वहीन’ बनाने के समान है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने इसे ‘हास्यापद’ बता कर उपहास का पात्र बना दिया. इसके अलावा विजयन ने कहा कि विधायक ने मास्क पहनकर सदन में आकर खुद का मजाक बनाया है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मास्क कुछ विशेष कारणों से पहना जाता है. उन्होंने कहा कि अगर विधायक संक्रमण से पीड़ित हैं तो उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए था.
नई दिल्ली। हिंदी पत्रकारिता के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार-संपादक राज किशोर ने सोमवार को एम्स में आखिर सांस ली. राज किशोर का जाना हिंदी पत्रकारिता के लिए अपूर्णक्षति है. हिंदी पत्रकारिता में इनका योगदान अव्वल दर्जे का रहा. देश के सभी पत्रकारों ने इनके प्रति श्रध्दांजलि समर्पित की और इससे सबसे बड़ी क्षति बताई है.
लेकिन जिम्मेदार व निर्भय पत्रकार ने भाजपा को हटाने के लिए अपने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा है जिसमें वह विपक्ष को विरोध के सिवा अन्य रास्ते भी बता रहे हैं…
“भाजपा की कमान में कई तीर हैं, क्योंकि वह पूरे आधुनिक भारत का विपक्ष है.
उसका मुकाबला करने के लिए सिर्फ उसके मुद्दों का विरोध करना काफी नहीं है. विपक्ष को अपने मुद्दे उभारने होंगे.
कुछ मुद्दे ये हो सकते हैं- आक्रामक समाजवादी नीतियां, प्रत्येक को रोजगार नहीं तो बेकारी भत्ता, साठ से ऊपर हर आदमी को पांच हजार की पेंशन, निजी सेक्टर में आरक्षण, महिला आरक्षण तुरंत लागू करना, पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पौष्टिक भोजन, विदेशी कंपनियों के लिए अपनी जरूरत का अस्सी प्रतिशत सामान भारत में बनाना, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए अधिक से अधिक उत्पाद आरक्षित करना, प्रत्येक उद्योग में एक जैसा सामान बनाने वाली सिर्फ तीन कंपनियों को मंजूरी देना– बाकी कंपनियों को अन्य क्षेत्रों में निवेश करने का निर्देश देना, किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना मूल्य देना, गांवों और कस्बों में लघु उद्योगों का जाल बिछाना, हर खेत की सिंचाई नहरों की मार्फत सुनिश्चित करना, शहरी संपत्ति की सीमा तय करना, अधिकतम वेतन निर्धारित करना, निजी अस्पतालों का अधिग्रहण, पर्याप्त संख्या में जज और मजिस्ट्रेट नियुक्त कर अधिकतम एक वर्ष में केसों का निपटारा करना, सभी सरकारी रिक्तियों को भरना, रेल समय पर चलाना, बारह वर्ष से अधिक के बच्चों को आधा दिन पढ़ाना आधा दिन काम कराना, पीएचडी तक पढ़ाई और किताबें मुफ्त पर बारह वर्ष से ऊपर के हर विद्यार्थी को रोज चार घंटे काम करना होगा, हर मरीज का मुफ्त इलाज, रिटायर लोगों के लिए पार्ट टाइम रोजगार की व्यवस्था करना, जेलों की स्थिति में सुधार लाना, मंहगे होटल बंद, सेना और पुलिस में गुलामी वाली ड्यूटियां खत्म, अंतरजातीय विवाह करने पर दोनों को सरकारी नौकरी, तीन वर्ष के लिए मंत्रियों और अफसरों की विदेश यात्रा पर रोक, जिला कलक्टर पद को समाप्त करना,रेलों में सिर्फ दो दरजे रखना – एसी और नान-एसी, जीएसटी की सिर्फ एक दर रखना- 10% आदि.
भाजपा की हालत उलट गए, पीठ के बल फड़फड़ाते तिलचट्टे जैसी न हो जाए, तो कहना.
(मित्रों से निवेदन है कि वे भी अपनी ओर से नए नए प्रगतिशील कार्यक्रम जोड़ते चलें. इस तरह एक राष्ट्रीय मांगपत्र तैयार हो जाएगा.)”
साभारः इस पोस्ट को राज किशोर जी के फेसबुक वॉल पर 11 मई को शेयर किया था.