विवि में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पीएचडी अनिवार्यः प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पीएचडी अनिवार्य कर दी गई है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि वर्ष 2021-22 से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिये पीएचडी अनिवार्य होगा. अब केवल राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को एकमात्र पात्रता के रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा. हालांकि, कॉलेजों में सीधे नियुक्ति के लिये न्यूनतम पात्रता के रूप में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी जारी रहेगा.

यह जान लें कि अभी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे प्रवेश स्तर के पदों के लिये न्यूनतम पात्रता स्नातकोत्तर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नये नियमन की घोषणा करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक (एपीआई) को कॉलेज शिक्षकों के शोध के लिये अनिवार्य बनाने को समाप्त कर दिया गया है. इससे शिक्षक छात्रों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगें. इसमें पूर्व के नियमन की सभी सुविधाओं को बनाये रखा गया है. केवल कॉलेज शिक्षकों के लिये एपीआई को समाप्त कर दिया गया है.

मंत्री ने कहा कि अब कॉलेज शिक्षकों के लिये अनिवार्य रूप से शोध करना जरूरी नहीं होगा. पदोन्न्ति में शिक्षकों के पढ़ाने से जुड़े परिणामों को ध्यान में रखा जायेगा. अगर शिक्षक शोध करते है, तब पदोन्नति में अतिरिक्त अंक जुड़ेंगे. जावड़ेकर ने कहा कि विश्वविद्ययालयों में नयी नियुक्ति केवल पीएचडी धारकों की होगी. इसके लिये तीन वर्षों का समय दिया गया है. साल 2021 से असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी धारक होना होगा.

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दाती बाबा के बाद दिल्ली की ‘गुरु मां’ ने 200 भक्तों के साथ किया ऐसा कारनामा

गुरू मां की फाइल फोटो

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में दाती महाराज के रेप केस के बाद अब एक ‘गुरु मां’ का केस सामने आया है. इस ‘गुरु मां’ की कहानी भी इन बाबाओं की तरह ही है जो कि लोगों को झांसे में लाकर लूटते हैं. इसके बाद मौका देखकर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं. ‘गुरु मां’ ने बड़ी चालाकी से आस्था के जाल में फंसाकर 200 से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया है. इस चालू ‘गुरु मां’ ने करोड़ो की चंपत लगाई है.

खजूरी इलाके में ‘गुरु मां’ के नाम से मशहूर पुष्पा गोयल ने बेटी की शादी के बहाने एक-एक अनुयायी से 5 से 20 लाख तक वसूले और मोटी राशि जमा होने के बाद फरार हो गई. नेहरू विहार निवासी संतोष तोमर नामक महिला की शिकायत पर खजूरी खास थाना पुलिस ने पुष्पा गोयल सहित तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर किया है.

दो सेविका व एक पति…

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार शिकायतकर्ता संतोष तोमर ने बताया कि वह तीन साल पहले पुष्पा गोयल से मंदिर में कीर्तन कै दौरान मिली थीं और बाद में सेवा में जुट गईं. पुष्पा गोयल का दयालपुर में किराये के मकान में रह रही थी लेकिन उसका ठिकाना कोई न कोई मंदिर ही होता था. उसके साथ हमेशा दो सेविकाएं रहती थीं.

लोगों को भरोसा इतना था कि एक बार कहने पर लोग जागरण, कीर्तन आदि कार्यक्रमों के लिए लाखों रुपये का चंदा जुटा लेते थे. कामाख्या देवी मंदिर, अमरनाथ यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए उसके साथ बड़ा जत्था रवाना होता था. यात्रा की व्यवस्था देविंदर नामक शख्स देखता था और उसे पुष्पा गोयल पति बताती थी. अप्रैल में पुष्पा व देविंदर उनके घर आए और बेटी की शादी के लिए रुपये लेने के बाद एक हफ्ते में लौटाने की बात कही. हफ्ते बाद जब वह पुष्पा गोयल के घर पहुंचीं तो उनकी तरह वहां 100 से ज्यादा लोग पैसे लेने के लिए पहुंचे थे. और पुष्पा गोयल वहां से गायब थी.

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आरोपों से घिरे शनिधाम के दांती महाराज ने सफाई में क्या कहा

नई दिल्ली। शनिधाम वाले बाबा दाती महाराज पर रेप का आरोप लगने के बाद फरार हो गए थे लेकिन आखिरकार उन्होंने मीडिया में आकर कहा कि जो भी आरोप लगे हैं वो आपके सामने हैं. मैं उस बिटिया पर आरोप नहीं लगाऊंगा. वो मेरी बेटी है और मैंने गलती की है तो पुलिस जांच करेगी और जांच में सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हूं.

उल्लेखनीय है कि राजस्थान की 25 वर्षीय युवती (शिष्या) ने स्वयंभू बाबा दाती महाराज और उसके चेलों पर बलात्‍कार का आरोप लगाया था. यह मामला दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में दर्ज कराया गया था. युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब एक दशक से महाराज की शिष्या थी. लेकिन महाराज और चेलों द्वारा बार-बार बलात्कार किए जाने के बाद वह अपने घर राजस्थान लौट गई.

साथ ही यह खबर आ रही है कि, मामला जिला पुलिस से अपराध शाखा को दे दिया गया है. पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) आलोक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामला अपराध शाखा को हस्तांतरित कर दिया गया है, हालांकि अभी उन्हें आधिकारिक आदेश नहीं मिले हैं. आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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यूपी पुलिस की दबंगई, पीड़ित दलित दिव्यांग महिला पर ही दर्ज किया मामला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। बांदा जिले के दंबगों ने एक दिव्यांग महिला के घर में घुसकर महिलाओं पर हमला किया था लेकिन यूपी पुलिस ने दबंगों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता पर ही मामला दर्ज कर दिया है. इससे एक बार फिर यूपी पुलिस की दबंगई साफ दिख रही है. जबकि पीड़ित महिला न्याय के लिए पुलिस से बार गुहार लगाती रही लेकिन न्याय ना मिलने पर महिला ने धर्म बदलने की बात कही.

धर्म बदलने की बात से पुलिस नाराज हो गई और यूपी पुलिस ने उसके खिलाफ ही शांति भंग करने के कारण कार्रवाई कर दी. बता दें कि हालही में यूपी पुलिस ने एक तीन साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट लगाया था. इस बात पर जज पुलिस पर भड़के थे और पुलिस की खूब फजीहत हुई थी.

धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी

दरअसल मामला बांदा जिले का है. बांदा जिले के बिसंड़ा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव के जिस दिव्यांग दलित परिवार ने कुछ दिन पूर्व धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दी थी. बिसंडा पुलिस ने उसे ही शांति भंग करने के अपराध में फंसा दिया है. इससे दबंगों पर पुलिस की मेहरबानी झलक रही है. पीड़ित दिव्यांग दलित संतोष कोरी ने बुधवार को बताया, ‘गांव के कुछ दबंगों ने 24 मई को उसके घर की महिलाओं पर हमला किया था. पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं करने पर वह अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश होकर धर्म परिवर्तन किए जाने की चेतावनी दी थी.’

पीड़ित ने कहा कि पुलिस संरक्षण से दबंगों के हौसले बुलंद हैं और 22 जून को होने जा रही उसके भतीजे की शादी में खलल डाल सकते हैं. पुलिस क्षेत्राधिकारी बी ओमप्रकाश ने बताया कि एक खंडहरनुमा पुराने मकान की जमीन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था, जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है, अभी तक ऊपर से कोई आदेश नहीं आया. दलित के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई किए जाने की जानकारी नहीं है.

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राजस्थान की धूल भरी आंधी, घूंट रहा दिल्लीवासियों का दम!

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। करीब दो-तीन दिनों से देश की राजधानी में शाम के वक्त धूल एकाएक छाता दिख रहा है. इसको लेकर लोग परेशान हैं. लेकिन मौसम व प्रदूषण विभाग ने जानकारी दी है कि धूल राजस्थान से आ रही है जिससे दिल्ली की हवाओं को खराब कर दिया है. हालांकि बुधवार हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर से अधिक बिगड़ गई. इससे राजधानी में आंधी के कारण हवा में मोटे कणों की बढ़ोतरी हुई है. तो वहीं, उत्तर प्रदेश में भी धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया गया है.

अत्यंत गंभीर स्थिति…

बता दें कि इसी तरह पिछले साल पंजाब-हरियाणा के खेतों में आग लगने के कारण भी दिल्ली का प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इलाके में पीएम 10 (10 मिमी से कम व्यास वाले कण) का स्तर 778 पर अत्यंत गंभीर से ऊपर है. दिल्ली में यह विशेषकर 824 पर है. इसके कारण धुंध की स्थिति है, जिससे विजिबिलिटी का स्तर सीमित है.

मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में अगले तीन दिनों तक दिल्ली में यह स्थिति बरकरार रहने की आशंका व्यक्त की गई है. मंत्रालय ने इन दिनों दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने को अस्वाभाविक बताते हुए कहा कि इसकी मुख्य वजह राजस्थान में आने वाली धूल भरी आंधी है.

मौसम विज्ञाग ने दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन तक धूल भरी हवा बरकरार रहने का अनुमान व्यक्त किया है. इसके मद्देनजर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य यूनिट के माध्यम से स्थानीय निकायों और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी एजेंसियों से लगातार पानी का छिड़काव करने को कहा है.

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और इस तरह मायावती के करीब चले गए संजू बाबा

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लखनऊ। सिनेमा व राजनीति का कनेक्शन कुछ ऐसा ही होता है. वैसे दोनों ही फिल्ड में पब्लिसिटी की जरूरत होती है. अब संयोग देखिए कि जाने माने हीरो संजय इन दिनों मायावती के करीब जाने के बाद एक फिर सुर्खियों में छाए हैं. इतना ही नहीं संजय दत्त मायावती के पड़ोसी तक बन गए हैं.

राजनेता बने संजय

ऐसा बताया जा रहा है कि इन दिनों लखनऊ शहर में चल रही फिल्म ‘प्रस्थानम्’ की शूटिंग चल रही है. फिल्म में जहां संजय दत्त राजनेता का रोल अदा कर रहे हैं. इसको लेकर संजय दत्त आए दिन प्रदेश के कद्दावर नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं.

दरअसल बात ऐसी है कि शूटिंग के लिए संजय दत्त का आवास पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती के नए आवास के बगल में है. इसे महज एक संयोग कहा जा सकता है लेकिन शहर में इन दिनों संजू बाबा को लेकर चर्चा जोरों पर है. जान लें कि फिल्म में संजू बाबा नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के बेड़े नेता ठाकुर बलदेव प्रताप सिंह का किरदार निभा रहे हैं. उनका दफ्तर भी महानगर में खुला हुआ है. ऐसी संभावना है कि जल्द ही संजय दत्त मायावती से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि इससे पहले वह मुख्यमंत्री योगी व सपा नेता शिवपाल सिंह से मिल चुके हैं.

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दलित वर्ग फिर करेगा भारत बंद, लैटेरल एंट्री सिस्टम पर घिरी भाजपा

File Photo/dalilyhunt

नई दिल्ली। प्रशासनिक सेवाओं में लैटरल एंट्री कराने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दलित समूह भारत बंद की तैयारी में हैं. जानकारों का ऐसा कहना है कि मोदी सरकार अप्रत्यक्ष रुप से आरक्षण व दलितों के अधिकार को छिनने का काम कर रही है. इसके खिलाफ दलित एक बार फिर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे.

ऐसा बताया जा रहा है कि अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास इस बंद का आह्वान करने की योजना है. दलित कार्यकर्ता अशोक भारती का कहना है कि सरकार का यह कदम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संवैधानिक संस्था की उपेक्षा है. उनके मुताबिक लैटेरल एंट्री सिस्टम अनुसूचित जातियों व जनजातियों को आरक्षण देने की अनदेखी करता है. अशोक भारती ने कहा कि इस बार का भारत बंद संसद के मानसून सत्र में बुलाए जाने की योजना है ताकि आंदोलन की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे.

उन्होंने यह भी कहा, ‘विरोध के जरिए यह संदेश देना है कि अगर (लैटरल एंट्री सिस्टम को लेकर) हमारी चिंताओं पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो दलित समुदाय 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को करारा जवाब देगा.’ इससे पहले बीते अप्रैल में एससी-एसटी एक्ट के कथित रूप से कमजोर होने के मुद्दे पर दलित संगठनों ने भारत बंद किया था.

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लालू के 45 करोड़ की जमीन को ईडी ने किया जब्त

पटना। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को फिर करारा झटका लगा है. लालू प्रसाद यादव एक बाद एक मुश्किल में फंसते जा रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने लालू परिवार को बड़ा झटका दिया है. ईडी ने दानापुर में बन रहे निर्माणाधीन मॉल को सील कर दिया है. इससे लालू के परिवार को करोड़ों का नुकासन हुआ है.

जान लें कि इससे पहले भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पटना के बेली रोड पर सगुना मोड़ के पास लालू यादव परिवार के बन रहे चर्चित मॉल के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी. 750 करोड़ की लागत से बन रहा बिहार का यह सबसे बड़ा मॉल है.

यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे बेटे तेजस्वी यादव के नाम पर है. इस जमीन का सर्किल रेट 44.7 करोड़ रुपये है, लेकिन इसे लालू यादव की कंपनी लारा प्रोजेक्ट ने वर्ष 2005-06 में महज 65 लाख रुपये में खरीदा था.

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दलितों के लिए गणतंत्र बना राजतंत्र!

विगत चार वर्षों से देश में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है. केन्द्र में ऐतिहासिक बहुमत की सरकार बनी है. ऐतिहासिक पार्टी अर्थात् कांग्रेस मुक्त भारत लगभग बन चुका है. लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा रही है और होती ही रहेगी. विपक्षी पार्टी को हराना हर दल या पार्टी का मुख्य लक्ष्य होता है. दलगत राजनीति तब खत्म हो जाती है जब कोई पार्टी बहुमत प्राप्त कर सत्ता में काबिज हो जाती है और वह देश की सरकार होती है किसी मजहब या जाति की नहीं. मगर संविधान के दायरे में रहकर शासन चलाना वास्तविक लोकतंत्र की पहचान होती है.वर्तमान सरकार भी एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्धारा चुनी गयी सरकार है, मगर वर्तमान माहौल को गहराई से देखा जाये या समझा जाये तो परोक्ष रुप से राजतंत्रात्मक शासन के गुण प्रकट होते हैं.

सबसे पहला काम योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया गया. सरकार की नीतियां संसद में क्या बन रही हैं पता नहीं मगर जबसे सरकार बनी है सड़को पर दमन का सिलसिला जारी है. एटी रोमिया स्वकायड यूपी में योगी सरकार द्धारा बनाया गया कुछ दिनों तक भाई बहनों का भी बाहर निकलना मुश्किल हो गया. मगर जब कठुआ और उन्नाव रेप कांड होता है सरकार भी खमोश और एंटी रोमियो पुलिस दस्ता भी लुप्त. भारत दुनियां का सबसे बडा़ लोकतंत्र वाला देश है और लोकतंत्र के चार स्तंभ हैं कार्यपालिका, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका तथा प्रेस (मीडिया).

सबसे पहला अटैक मीडिया पर होता है क्योंकि मीडिया लोकतंत्र की आँख और कान होते हैं. पत्रकारों की सुरक्षा पर निगरानी रखने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था “सीपेजी द्धारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में भ्रष्टाचार कवर करने वाले पत्रकार की जान को सबसे ज्यादा खतरा है. सोशल मीडिया की एक पड़ताल के मुताबिक वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक कुल 20 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या हो चुकी है. और 200 से ज्यादा हमले पत्रकारों पर हुए हैं. हिंदूवादी राजनीति पर मुखर नजर रखने वाली पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर गहरी चोट थी. इतना ही नहीं देश का सबसे बडा़ सनसनीखेज बौद्धिक घोटाला व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी जिसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है.

जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया. साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह को जिंदा जला दिया गया. पत्रकारों की हत्या लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है. एनडीटीवी पर बैन भी कट्टरता की ओर संकेत देता है. ऐसा नहीं कि इस तानाशही का शिकार सभी वर्ग है. जो सदियों से शोषित और वंचित है, जातिवाद के प्रसव पीड़ा से पीड़ित हैं, सामाजिक घृणा के शिकार हैं वही समाज और वर्ग विशेष आज पुनः अपने अस्तित्व और अपने संवैधानिक अधिकार के लिए चिंतित नजर आ रहा है.

जिस तरह अंबेडकर प्रेम दर्शाकर अंबेडकर विचारधारा को दबाने तथा अंबेडकरवादियों को कुचलने का षड्यंत्र चल रहा है कुछ घटनाओं से इसकी पुष्टि हो जायेगी. 17 जनवरी 2016 पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला को आत्महत्या करने को मजबूर होना पडा़. गुजरात के ऊँना में 11 जुलाई 2016 को दलित युवकों की सड़क पर बेरहम पिटाई, हरियाणा में दलित परिवार को जिंदा जलाया जाना, भीमा-कोरेगाँव की घटना तथा सबसे ज्यादा चर्चित यूपी का सहारनपुर कांड जहाँ आजतक दहशत के साये में वहाँ के दलित रह रहे हैं. सबसे बडी़ विडंबना ये है कि सवर्ण समूह के दमन का विरोध करने वाले चन्द्रशेखर रावण पर उल्टा रासूका लगाई गयी है और वो अभी तक जेल में बंद हैं.

न्यायपालिका पर भी सरकार की तानाशाही का संकेत तब दिखने लगे जब आजादी के 71 साल बाद देश के न्यायाधीश कोर्ट से बाहर जनता के दरबार में न्याय मांगने आ गये. एससीएसटी एक्ट में बदलाव कहीं न कहीं सरकार की मंसा के अनुरुप ही हुआ माना जा सकता है. विश्वविद्यालयों में एसएसएसटी के शिक्षको के भर्ती का रास्ता लगभग बंद कर दिया है. मेडिकल में पीजी कोर्स में आरक्षण खत्म कर दिया है. और कल ही एक और तानशाही फरमान जारी हुआ है कि बिना किसी परीक्षा के और बिना आरक्षण के 10 महत्वपूर्ण विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर नियुक्ति की जायेगी. चुनाव प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी इस शासन में प्रश्न चिन्ह लगना लोकतंत्र के लिए कहीं न कहीं खतरे की घंटी है.

ऐसा लगता है सिकंदर महान की तरह मोदी जी को भी भारत के राज्यों को जीतने का शौक हो गया है. राज्यों की विजय के लिए जिन्ना से लेकर शाहजहाँ, तैमूर से लेकर टीपू सुल्तान, मुहम्मदगोरी से लेकर इस्लाम, ताजमहल से लेकर अल्लाउद्दीन खिलजी तथा पद्मावती से लेकर औरंगजेब को बहुत याद किया गया. मगर देश के हालातों के बारे में, जेठ की धूप की तरह परेशान करती महँगाई के बारे में, स्वास्थ्य और शिक्षा के बारे में, रोजगार के बारे में, खाली हो रहे बैकों के बारे में, भ्रष्टाचार के बारे में, दलितों की वास्तविक स्थिति के बारे में कोई चर्चा नहीं कोई चिंता नहीं. यहाँ तक कि एक सिर के बदले दस पाकिस्तानी सिर लाने के वादे के बदले सैकड़ों जवान हर महीने शहीद हो रहे हैं.

मोदी जी का भारत की सत्ता तथा राज्यों पर विजय प्राप्त करने का सपना सम्राट अशोक की कलिंग पर चढा़ई करने जैसा प्रतीत होता है. अशोक का कलिंग को परास्त करने का लक्ष्य था उसने ये हाँसिल कर तो लिया मगर वो जीत कर भी हार गये. इस विजय से महान सम्राट अशोक का हृदय भी परिवर्तित हो गया. जीतने की अंधी धुन में जन-धन की अपार क्षति और बिलखती जनता के दर्द को वो महसूस नहीं कर सके. जब उसने देखा कि लाखों लोगों की जानें गयी हैं. खून की नदियाँ बह रही हैं, लोग भूख और प्यास से तड़प रहे हैं, विलख रहे हैं, मर रहे हैं. चारों दिशाओं में हाहाकार और अफरातफरी है. बच्चे, बूढें, महिलायें तड़प-तड़पकर मर रही हैं. मवेशियाँ भटक रही हैं. इतना व्याकुल दृष्य देखकर अशोक जीतकर भी हार गया और इस हार ने अशोक को बुद्धतत्व का मार्ग दिखा दिया और कलिंग विजय के बाद बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया. कुछ ऐसे ही हालात इस वक्त मोदी जी के सामने भी हैं. वो राज्यों केा निरंतर जीत तो रहे हैं, मगर इस जीत में कहीं न कहीं जनता हार रही है. राज्यों को फतह करने की होड़ में हम करोड़ों नौजवानों की आशाओं पर पानी फेर गये जिनको सुनहरे सपनें दिखाकर 2014 के चुनावों में भरपूर प्रचार कराया था.

देश के अन्नदाता किसानों की आत्महत्यायें नहीं रोक सके.महँगाई के पहिए को नहीं रोक सके. महिलाओं की इज्जत नहीं बचा सके. वोट बैंक बने देश के दलित/पिछडें/अल्पसंख्यक अपने भविष्य के प्रति डरे और सहमें नजर आ रहे हैं. संविधान बचाओ की गूँज, भारत छोडो़ आंदोलन की याद ताजा कर रहा है. देश के बैंक कैशलैस होने लगे हैं. भ्रष्टाचार, भ्रष्टापाँच की ओर अग्रसर है. ऐसी विषम परिस्थिति देश की इस वक्त है अब देखना ये है कि 2019 तक सम्राट अशोक की तरह मोदी जी का ह्दय परिवर्तन होता है या देश की जनता का.

लेखकः आईपी हृयूमन

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यूपी से गठबंधन पर अब तक की बड़ी खबर

लखनऊ। यूपी में 2019 के चुनाव से पहले गठबंधन की कवायद में जुटे विपक्षी दलों की ओर से एक बड़ी खबर आई है. खबर है कि उत्तर प्रदेश के महागठबंधन से कांग्रेस बाहर रह सकती है. और लोकसभा चुनाव में यूपी में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि तीन सीटें रालोद के खाते में जाने की बात सामने आई है.

कांग्रेस से गठबंधन न होने के बावजूद सपा और बसपा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली और अमेठी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस समझौते की रूपरेखा के संकेत दे दिए हैं.

दरअसल, कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखने की सपा-बसपा के पास जायज वजह भी है. राज्य में कांग्रेस अपना आधार खो चुकी है. फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में अकेले लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को महज 19,353 और 18,858 वोट ही मिले. सपा और बसपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के पास अब न दलित वोट हैं, न पिछड़े और न ही अल्पसंख्यक. कांग्रेस को अधिकतर वोट सवर्णों के मिल रहे हैं जो भाजपा के भी वोट बैंक हैं. यानी कांग्रेस को मिल रहा हर वोट भाजपा के खाते से ही जा रहा है, जो सपा-बसपा गठबंधन के हित में ही है.

यदि कांग्रेस विपक्षी एकता में शामिल हो जाती है तो ये सवर्ण भी भाजपा में चले जाएंगे. इसीलिए सपा-बसपा को लगता है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से ही उन्हें ज्यादा फायदा है. तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी को भी इस फार्मूले से ज्यादा दिक्कत नहीं होगी.

दरअसल यूपी में जिस तरह का माहौल बन रहा है और उपचुनावों के जो नतीजे आए हैं, उसके मुताबिक सपा-बसपा के साथ लड़ने से ज्यादा सीटें इस गठबंधन को मिलने की संभावना है. कांग्रेस इसमें किसी तरह का रोड़ा नहीं अटकाना चाहती है. क्योंकि सपा-बसपा जीतनी ज्यादा सीटें जीतेंगी भाजपा उतनी ही कमजोर होगी. तो वहीं यह तय है कि 2019 में सपा-बसपा केंद्र में कांग्रेस के साथ खड़ी रहेगी, जिससे कांग्रेस केंद्र में मजबूत ही होगी. संभव है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती इस फार्मूले का ऐलान जल्द करें.

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इग्नू में आम्बेडकर और आदिवासी पर पाठ्यक्रम शुरू

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानि इग्नू नए सत्र से चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है. इनमें संविधान निर्माता डा. भीमराव आम्बेडकर और आदिवासी​​​​​​ अ​ध्ययन पर आधारित पाठ्यक्रम भी शामिल है.​ ​इसके अलावा, प्राथमिक चिकित्सा​ और इवेंट मैनेज​मेंट जैसे रो​जगारपरक पाठ्यक्रम भी ​हैं​​​​. यह सभी डिप्लोमा या प्रमाणपत्र आधा​​रित पाठ्यक्रम ​हैं​​​. इग्नू क्षेत्रीय कार्यालय राजघाट की दाखिला प्रमुख डॉ. विनीता कटियार ने बताया कि अकादमिक सत्र जुलाई 2018 के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है.

नए सत्र के दाखि​​ले के साथ ही द्वितीय और तृतीय वर्ष में दाखिले की प्रक्रिया भी चल रही है. इसकी अंतिम तिथि 15 जून है.​ ​​डॉ. आम्बेडकर पर शुरू हुए पाठ्यक्रम के बारे में इग्नू के क्षेत्रीय प्रबंधक​  डॉ. के. डी प्रसाद​ का कहना है कि युवा पीढ़ी के लिए डॉ. भीमराव आम्बेडकर को जानना बहुत जरूरी है. वह किसी वर्ग या जाति के नेता नहीं, बल्कि देश की महान विभूतियों में शामि हैं. आज के परिदृश्य में उनके विचार बेहद प्रासंगिक है. उन पर पाठ्यक्रम शुरू करना इसी कड़ी का हिस्सा है.

ये होंगे पाठ्यक्रम

सर्टिफिकेट इन ट्राइबल स्टडीज (सीटीआरबीएस) इस पाठ्यक्रम को जनजातीय जीवन के अध्ययन और उनके विकास को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को इसके टारगेट ग्रुप में रखा गया है.

कौन कर सकता हैः 12वीं या इग्नू से बीपीपी उत्तीर्ण

फीस- 1000 रुपये

सर्टिफिकेट प्रोग्राम ऑन लाइफ एंड थॉट्स ऑफ बीआर आम्बेडकरः सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक क्षेत्र पर आम्बेडकर के विचारों को समझने के प्रयास के रूप में शुरू किया गया है.

अहर्ता- 12वीं, फीस- 1000 रुपये

साभारः मानसी मिश्रा

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कर्नाटक में बीजेपी को एक और झटका

बेंगलुरू। कर्नाटक में कांग्रेस ने एक बार फिर बीजेपी को मात दिया है. इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और झटका लगा है. भारी मतों के साथ जयनगर विधानसभा सीट कांग्रेस ने जीत ली है. कांग्रेस उम्मीदवार सौम्या रेड्डी ने 16 राउंड की गिनती के बाद भाजपा के उम्मीदवार बीएन प्रहलाद को लगभग 2900 वोटों से हराया. इस जीत के साथ ही कांग्रेस के सीटों की संख्या बढ़ गई है.

जान लें कि आठवें राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस उम्मीदवार सौम्या रेड्डी, भाजपा प्रत्याशी बी एन प्रहलाद से 10,205 वोटों से आगे चल रही थी. मतों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी. हालांकि इस जीत के बाद कर्नाटक ने एक बार फिर जश्न मनाती दिखी. कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस को 78 सीटें  मिली थीं. जबकि बाद में आरआर नगर पर हुए चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली थी. फिर आज विजयनगर सीट पर भी कांग्रेस का कब्जा हो गया. इस तरह कांग्रेस के खाते में अब 80 सीटें हो गईं.

बता दें कि भाजपा उम्मीदवार बीएन विजयकुमार के निधन के बाद जयनगर में चुनाव स्थगित कर दिया गया था. जिसके बाद यहां पर 11 जून को मतदान कराया गया. निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि सुबह दस बजे तक कांग्रेस की उम्मीदवार सौम्या रेड्डी 27,195 मतों के साथ भाजपा के बीएन प्रहलाद से आगे चल रही हैं, जिन्हें अब तक 19,873 मत मिले हैं.

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बीजेपी की नफरत कम करेगी अखिलेश की टोंटी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री के बंगलों को खाली कराने के बाद भी विवाद रूकने का नाम नहीं ले रहा है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में तोड़फोड़ होने के बाद तो विवाद इतना बढ़ गया है कि इसको शांत कराने के लिए टोंटी का सहारा लेना पड़ा. इतना ही नहीं बीजेपी सरकार पर अखिलेश यादव ने जमकर तंज कसा तो वहीं मीडिया कवरेज पर भी खूब ताना कसा.

वो सब लौटा दें सीएम योगी…

बंगला विवाद को लेकर बुधवार को अखिलेश यादव ने प्रेस कांन्फ्रेंस की, इस दौरान उनके हाथों में टोटी थीं और उसको दिखाकर अखिलेश यादव बीजेपी सरकार की खूब खिंचाई किए. अखिलेश ने कहा कि जो टोटी गायब मिली है वही लौटाने आया हूं. मैं सारी टोंटियां देने को तैयार हूं. ये टोंटी बीजेपी को देना चाहता हूं ताकि उनकी नफरत कम हो. साथ ही अखिलेश ने ये भी कहा कि सीएम आवास में भी बहुत सारे मेरे सामान हैं, वो सब लौटा दें सीएम योगी. यहां पर अखिलेश ने साफ तौर पर कहा कि हमारी ओर से राष्ट्रीय संपति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. फिर भी हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. बता दें कि सरकार आवास खाली करने के बाद अखिलेश के आवास में टोंटी निकली थी और अन्य सामान गायब थे जिसको लेकर खूब बहस चली.

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‘बॉर्डर’ का टी-शर्ट पहन चंपा को बचाने निकला “निरहुआ”

पटना। भोजपुरी सिनेमा के हीट हीरो “निरहुआ” चंपा को बचाने के लिए निकले हैं. दिनेश लाल यादव “निरहुआ” बुधवार को चंपारण जिला में जाकर चंपा लगाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान का हिस्सा बने. इस दौरान स्कूल के बच्चों से मिलकर बात किए.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक “निरहुआ” ने चम्पारण अभियान में अपना समर्थन दिया और माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल में चम्पा का पौधा भी लगाया. इस मौके पर “निरहुआ” ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए भोजपुरी सिनेमा हर संभव प्रयास करेगा. इन्होंने कहा कि आगामी फिल्म में चंपा अभियान को जोड़ा जा सकता है ताकि लोगों को इस अभियान का मतलब समझ में आए. इनका कहना है कि चंपा अभियान के जरिए चंपारण व चंपा दोनों को बचाया जा सकता है.

बता दें कि कौन बनेगा करोड़पति के विजेता सुशील कुमार ने अप्रैल में चंपा अभियान को आरंभ किया था जो कि चंपारण के अलावा देश-विदेश में तेजी से फैल रहा है. इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सुशील कुमार लगातार प्रयास कर रहे हैं. अभी तक हजारों की संख्या में चंपा के पौधे लगाए जा चुके हैं. फिलहाल “निरहुआ” ने इस अभियान से जुड़कर इसे आगे बढ़ाने का काम किया है.

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अयोध्या के महंत ने नग्न युवती के साथ ली सेल्फी, तस्वीर वायरल

लखनऊ। अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर का महंत की युवती के साथ आपत्तिजनक अवस्था में तस्वीर वायरल हो रही है. इस तस्वीर से साफ जाहिर हो रहा है कि महंत ने खुद ही युवती के साथ सेल्फी ली है. इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है. लोग तमाम प्रकार के कमेंट कर रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अयोध्या हनुमान गढ़ी मन्दिर के महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास की तस्वीर बताई जा रही है. युवती के साथ खड़े युवक की फोटो व महंत के फेसबुक अकाउंट की फोटो के साथ मिल रही है.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह व योगी की तस्वीर

महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास प्रसिध्द व्यक्ति है. इसने गृहमंत्री राजनाथ सिंह व यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी के साथ तस्वीर फेसबुक पर शेयर की है. इसके अलावा फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर राजनाथ सिंह के साथ लगा रखी है. लोग इन दो तस्वीरों को भी आपत्तिजनक तस्वीर के साथ शेयर कर रहे हैं. लोगों ने यह भी लिखा कि महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास सीएम योगी का चहेता है.

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ऋषिकेश के इस नींबू-पानी वाले को अमेरिकी अम्बेडकरवादी भी जानते हैं

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​देहरादून से लौटते वक्त ऋषिकेश रुकना हुवा, साथियों ने कहा चलो लक्ष्मण झूला भी देख लेते हैं। वहाँ पहुँचे तो इन शख्सियत को देखकर मन प्रसन्न हो गया। साथी Rakesh Kumar Bauddh जी की नजर बैकग्राउंड पर पड़ी तो बोले, “चलिए नीबू पानी पीते हैं” वहाँ पहुँचते ही प्रश्न ये फोटो आपने लगाई है? वो बोले हाँ। नीबू-पानी वाले भाई साहब बोले, “जय भीम” उनका इतना कहना था कि सोच में पड़ गया। अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे कहे जाने वाले लोगों को जय भीम सम्बोधन कहने में चेहरे पर बल पड़ते देखा है कितनी बार। सलाम है भाई आपको और आपकी जिंदादिली को। अब जरा इनका परिचय दे दें। मेरी नजर इनके हाथ पर पड़ी तो देखा नाम गुदा हुआ है। नाम है इनका गरीब दास। बोला ये आपका नाम है उनका उत्तर था जी। अब आप ही सोचिये किसने इनका यह नाम रखा होगा। हम साथियों की नजर में इनका नाम गरीब दास नहीं अमीर दास हो गया। हम लोगों ने नीबू पानी पिया, लेकिन हमें उसमें रत्ती भर भी खट्टापन नहीं लगा इतनी मिठास महसूस हुई बता नहीं सकता। यह न केवल मुझे बल्कि हमारे ​अन्य साथियों को भी ​महसूस ​हुई। अंत में इनकी एक बात बहुत अच्छी लगी बोले इस फोटो से मेरी अमेरिका में भी पहचान है। वहाँ के कुछ लोग आये थे उन्होंने देखा तो मेरा नम्बर लिया और अब उनका फोन आते रहता है।

-​ संजय कुमार​

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​​मोदी जी ने आरक्षण खत्म कर दिया, आपको पता भी नहीं चला

सदियों से सोये हुए लोगों, अपने दिमाग पर थोड़ा प्रेशर डालिये और बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी का एक बयान याद किजिए जो उन्होंने जयपुर में दिया था. उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार आरक्षण को ऐसी स्थिति में पहुंचा देगी जहां इसके होने या ना होना बराबर होगा. आपको शायद यह जानकारी न हो लेकिन मोदी जी ने स्वामी जी के इस बयान को साकार कर दिया है. आज आरक्षण के नाम पर आपको गालियों तो मिल रही है लेकिन आरक्षण आज लगभग खत्म हो चुका है.

जयपुर में ही दिए गए एक और बयान को याद किजिए, आरएसएस के मनमोहन वैद्य ने कहा था कि आरक्षण सदियों से लोगों के बीच अलगाव बढ़ा रहा है. इन बयानों को आपने शायद हल्के में लिया और सोते रहे लेकिन बीजेपी धीरे-धीरे आरक्षण को खत्म करने का प्लान बनाती रही और वो बयान भी उसी प्लान का हिस्सा थे. भाजपा की एक दलित सासंद ने मोदी पर आरक्षण को खत्म करने का आरोप लगाया है.

आपके सामने विस्तार से तीन उदाहरण रखूंगा जिससे यह साफ हो जाएगा कि बीजेपी ने आरक्षण को खत्म कर दिया है.

हाल ही के दिनों में यह देखने को मिल रहा है कि जिन विश्वविद्यालयों में फैकल्टी के पद वर्षों से रिक्त पड़े थे वहां अचानक से नोटिफिकेशन जारी करके उन पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. लेकिन जैसे ही नोटिफिकेशन में पदों की संख्या पर नजर जाती है तो आरक्षित श्रेणी वाले कॉलम में जीरो लिखा मिलेगा. 80 प्रोफेसरों की भर्ती में एक भी पद एससी/एसटी को नहीं फिर आरक्षण कैसा?

दरअसल ये हुआ ऐसे कि इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यूजीसी ने एक आदेश जारी किया कि अब भर्तियों में विश्वविद्यालय को ईकाई न मानते हुए विभाग को ईकाई माना गया. आसान भाषा में समझिए कि पहले पूरे विश्वविद्यालय में खाली पदों की संख्या पर आरक्षण लागू होता था लेकिन अब ऐसा न होकर के एक विभाग में खाली पदों की संख्या पर आरक्षण लागू होगा. इससे हुआ ये कि आरक्षित वर्ग के हिस्से में एक भी सीट नहीं आती और आराम से अपने लोगों सेट किया जा रहा है. उदाहरण से समझिए कि मान लिजिए पहले अगर विश्वविद्याल में सौ पदो पर भर्ती निकलती तो आरक्षण की अलग-अलग श्रेणियों के प्रतिशत के हिसाब से बंटवारा होता था क्योंकि विश्वविद्यालय को ईकाई माना जाता था लेकिन अब नए फैसले के बाद विभाग को ईकाई माना जाता है जैसे कि मान लो किसी विभाग में एक ही पद खाली है तो जनरल कोटे से भरा जाएगा क्योंकि आरक्षण विभाग पर ही लगना है.

ये बात तो अब जग जाहिर है कि मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा का कबाड़ा कर दिया है. किसी ने किसी बहाने से विश्वविद्यालयों पर हमला किया गया. राजस्थान में ही वसुंधरा सरकार ने दो विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया जिसमें से एक तो अंबेडकर के नाम पर ही था और दूसरा पत्रकारिता का था.

एससी और एसटी के छात्र-छात्राओं को पीएचडी और एमफिल करने के लिए कांग्रेस सरकार ने एक स्कीम चालू कि थी जिसके तहत इन वर्गों के विद्यार्थियों को फैलोशिप दी जाती थी. राजीव गांधी नेशनल फैलोशिप नाम की यह स्कीम मोदी सरकार आने के बाद इतिहास बन चुकी है. मोदी के शपथ ग्रहण के बाद से ही इस स्कीम को ग्रहण लग गया. इस स्कीम के लिए हर साल फॉर्म भरवाये जाते थे लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से एक बार भी राजीव गांधी फैलोशिप के लिए एक बार भी आवेदन नहीं मांगे गए हैं. लेकिन इसमें मजे की बात यह है कि  मोदी सरकार की ओर से न तो इस स्कीम को बंद करने का कोई आदेश जारी किया और न हीं यूजीसी ने इसकी वेबसाइट पर जाते हैं तो चार साल एक ही बात दिखा रहा जल्द ही आवेदन मांगे जाएंगें.

पीएम मोदी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि इंटरव्यू से छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होता है, आखिर मेरे समझ में यह नहीं आता कि लोगों के पास ऐसी कौनसी विधा जिससे पांच मिनट में व्यक्ति के ज्ञान की पहचान कर लेते हैं इसलिए बीजेपी सरकार सरकारी नौकरियों से इंटरव्यू को खत्म करने का काम करेगी. पीएम मोदी ने इंटरव्यू खत्म करने वाली बात का जिक्र स्वतंत्रता दिवस लाल किले से दिए अपने भाषण में भी किया था. लेकिन अब केंद्र सरकार के मौजूदा रवैये से ऐसा लग रहा कि अब आईएएस की परीक्षा खत्म कर दी जाएगी और उम्मीदवारों का चयन केवल इंटरव्यू के माध्यम से ही होगा.

केंद्र सरकार ने दस बड़े विभागों में जाइंट सेक्रेटरी के पद के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें केवल इंटरव्यू के माध्यम से ही उनका चयन होगा और खास बात यह कि इस चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं होगा.

बिहार चुनाव से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी आरक्षण को लेकर बयान दिया था हालांकि बाद में वे अपने बयान से मुकर गए थे लेकिन आरक्षण आरएसएस को हमेशा से ही चुभता रहा है. आरएसएस हिंदू राष्ट्र की बात करता है हिंदू यानी जाति व्यवस्था जिसमें एक वर्ग ऊंचा हो दूसरा नीचा. चूंकी बीजेपी भी संघ के विचारधारा का ही पालन करती है ऐसे में आरक्षण कहीं न कहीं बीजेपी को चुभता है और यही कारण है कि केंद्र की मोदी सरकार ने आरक्षण को समाप्त किए बिना ही खत्म कर दिया है.

सूरज कुमार बैरवा

सीतापुरा, जयपुर

पांच करोड़ खर्च के बाद भी मर रही मछलियां, बिहार के सबसे बड़े तालाब बदहाल

दरभंगा के सबसे बड़े दिग्घी तालाब की तस्वीर

पटना। बिहार के दरभंगा जिला की पहचान पोखर (तालाब) व मछली से होती है लेकिन मिथिला अब अपनी पहचान खोता दिख रहा है. हालांकि सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि सरकार ने इनको बचाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपए खर्च किए लेकिन मौजूदा तस्वीर तालाबों की बदहाली बयां कर रही है. मछलियां पानी में मरने को विवश हैं.

दरभंगा जिला के जाने माने रंगकर्मी व फिल्मकार प्रकाश बंधु बताते हैं कि पग-पग पोखर,माछ-मखान जो मिथिला की पहचान हुआ करता था. जहाँ तालाब जीवन का श्रोत हुआ करता था, आज उन्ही तालाबों का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है जिसके कारण मछलियाँ मर रही हैं. ये परिस्थिति कमोवेश मिथिला के तमाम पोखरों की है. इसे मिथिला का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की यहाँ के लोग अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ भी संरक्षित नहीं रखना चाहते. अगर हम आज अपने तालाबों को नहीं बचा पाएं तो आने वाले 4-5 वर्षों में दरभंगा को जबरदस्त जल संकट का सामना करना पड़ेगा और इसके ज़िम्मेवार यहाँ के निवासी ही होंगे.

आरटीआई का खुलासा

यह जानकर हैरानी होगी कि बिहार सरकार ने दरभंगा के तीन बड़े तालाब दिग्घी, हराही व गंगा सागर के विकास के लिए 474.55 लाख रुपए आवंटित किए थे. लेकिन इन पैसों का खर्च कहां किया गया है इसको पता लगाना मुश्किल है. स्थानीय लोग बताते हैं कि पोखरों की दुर्दशा ऐसी है कि लोगों को नाक बंदकर आना जाना पड़ता है. पोखरों में कचरा भरा पड़ा है. आजतक किसी प्रकार की दवाई आदि का छिड़काव नहीं किया गया और ना ही कोई अधिकारी काम करते दिखा.

विलुप्त हो रहे तालाब

इंडिया वाटर पोर्टल की मानें तो पटना से 157 किलोमीटर दूर दरभंगा शहर में महज 25 वर्ष पहले लगभग 213 तालाब थे जो आज घट कर लगभग 84 तालाब रह गए हैं. बिहार सरकार के आँकड़ों के मुताबिक पूरे राज्य में लगभग 67 हजार से अधिक निजी तालाब महज बीस साल के समय में विलुप्त हो गए. सरकारी तालाबों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है. उनके चारों तरफ घर बन गए हैं और अक्सर नगर पालिका या नगर निगम के लोग उसमें कचरा डम्प कराते रहतें हैं. दरभंगा शहर का दिग्घी तालाब जो काफी बडा है लगातार इस तरह के अतिक्रमण का आये दिन शिकार हो रहा है. उसके साथ ही गंगा सागर, हराही और मिर्जा खां तालाब जैसे झीलनुमा बड़े तालाबों को भरे जाने की साजिश चलती रहती है.

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आईसीयू में भर्ती अटल जी से मिलने एम्स पहुंचे मनमोहन सिंह, इन नेताओं ने भी की मुलाकात

File Photo

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स में नेताओं की लाइन लग गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राहुल गांधी के बाद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह एम्स पहुंचकर अटल जी का हाल लिए. सोमवार को इनको एम्स में भर्ती कराया गया लेकिन स्थिति ठीक ना होने के कारण फिलहाल भर्ती ही रखा गया है. हालांकि मंगलवार को इनको एम्स से डिस्चार्ज किया जाना था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं किया जा सका है.

आईसीयू में भर्ती

रात आठ बजे एम्स की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, ”उनकी हालत स्थिर है। इलाज का उनपर असर हो रहा है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनपर नजर बनाए हुए है.” एम्स ने पहले कहा था कि उन्हें इंजेक्शन के जरिए एंटीबायटिक्स दिए जा रहे हैं. संक्रमण के नियंत्रण में आने तक उन्हें अस्पताल में ही रखा जाएगा. खबरों की मानें तो एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया की निगरानी में 12 चिकित्सकों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वह अभी भी एम्स के कार्डियोथोरैकिक केन्द्र के आईसीयू में हैं.

दो पूर्व पीएम ने की मुलाकात

भारत के दो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा ने अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की है. इनके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र, विधि राज्य मंत्री पी. पी. चौधरी, भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और केन्द्रीय मंत्री अनंत गीते भी वाजपेयी का हालचाल पूछने पहुंचे. भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जयप्रकाश नड्डा और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्द्धन भी बीमार नेता को देखने पहुंचने वालों में शामिल रहे.

एम्स गेट पर हवन

दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष पंकज जैन ने एम्स के गेट नंबर -1 पर हवन कर पूर्व प्रधानमंत्री के जल्दी स्वस्थ होने और दीर्घायु की कामना की. इसके अलावा कानपुर में भी बीजेपी की ओर हवन किया गया. साथ ही देश भर से लोग प्रार्थना कर रहे हैं.

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दलितों के बस्ती में दबंगों ने चलाई गोली, 12 लोग घायल, तीन की हालत नाजुक

लखनऊ। जमीनी विवाद को लेकर दबंगों ने दलितों की बस्ती में घुसकर दनादन गोलियां चलाई. और देखते ही देखते दलितों की बस्ती खून से सन गई. घटना में करीब दर्जनों दलित घायल हो गए जिनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया. इस घटना से पूरा इलाका दहशत में है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक फैजाबाद के गोसाईंगंज नगर में जमीन पर कब्जे के लिए दबंग असलहों से लैस होकर बस्ती में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए लोगों की पिटाई की. इसमें आठ महिलाएं समेत दर्जनभर लोग घायल हुए हैं. तीन लोगों की हालत गम्भीर होने पर उन्हें जिला चिकित्सालय भेजा गया है.

हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार मंगलवार को बस्ती में हमला करने वालों ने दहशत फैलाने के लिए फायरिंग की. गोसाईंगंज थाने की पुलिस ने चार नामजद सहित 50 से अधिक लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने, धमकी देने, बलवा व दलित उत्पीड़न आदि के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है.

पुलिस के अनुसार गोसाईंगंज नगर में स्थित बस्ती के पीछे एक जमीन है. नगर की जमीन पर दबंग नजर टिकाए बैठे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि अम्बेडकर नगर जनपद के अहिरौली थाना क्षेत्र के चतुरी पट्टी गांवनिवासी कृष्णा वर्मा के बैनामे की जमीन है. उसी जमीन की बाउंड्रीवाल बैनामेदार करा रहे थे. जबकि दूसरी ओर दलित पक्ष के माता प्रसाद, राम बहादुर,परशुराम, श्रीराम व विश्राम आदि हरिजन आबादी की जमीन बता कर विरोध कर रहे थे.

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