दलितों के लिए गणतंत्र बना राजतंत्र!

विगत चार वर्षों से देश में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है. केन्द्र में ऐतिहासिक बहुमत की सरकार बनी है. ऐतिहासिक पार्टी अर्थात् कांग्रेस मुक्त भारत लगभग बन चुका है. लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा रही है और होती ही रहेगी. विपक्षी पार्टी को हराना हर दल या पार्टी का मुख्य लक्ष्य होता है. दलगत राजनीति तब खत्म हो जाती है जब कोई पार्टी बहुमत प्राप्त कर सत्ता में काबिज हो जाती है और वह देश की सरकार होती है किसी मजहब या जाति की नहीं. मगर संविधान के दायरे में रहकर शासन चलाना वास्तविक लोकतंत्र की पहचान होती है.वर्तमान सरकार भी एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्धारा चुनी गयी सरकार है, मगर वर्तमान माहौल को गहराई से देखा जाये या समझा जाये तो परोक्ष रुप से राजतंत्रात्मक शासन के गुण प्रकट होते हैं.

सबसे पहला काम योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया गया. सरकार की नीतियां संसद में क्या बन रही हैं पता नहीं मगर जबसे सरकार बनी है सड़को पर दमन का सिलसिला जारी है. एटी रोमिया स्वकायड यूपी में योगी सरकार द्धारा बनाया गया कुछ दिनों तक भाई बहनों का भी बाहर निकलना मुश्किल हो गया. मगर जब कठुआ और उन्नाव रेप कांड होता है सरकार भी खमोश और एंटी रोमियो पुलिस दस्ता भी लुप्त. भारत दुनियां का सबसे बडा़ लोकतंत्र वाला देश है और लोकतंत्र के चार स्तंभ हैं कार्यपालिका, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका तथा प्रेस (मीडिया).

सबसे पहला अटैक मीडिया पर होता है क्योंकि मीडिया लोकतंत्र की आँख और कान होते हैं. पत्रकारों की सुरक्षा पर निगरानी रखने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था “सीपेजी द्धारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में भ्रष्टाचार कवर करने वाले पत्रकार की जान को सबसे ज्यादा खतरा है. सोशल मीडिया की एक पड़ताल के मुताबिक वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक कुल 20 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या हो चुकी है. और 200 से ज्यादा हमले पत्रकारों पर हुए हैं. हिंदूवादी राजनीति पर मुखर नजर रखने वाली पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर गहरी चोट थी. इतना ही नहीं देश का सबसे बडा़ सनसनीखेज बौद्धिक घोटाला व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी जिसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है.

जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया. साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र सिंह को जिंदा जला दिया गया. पत्रकारों की हत्या लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है. एनडीटीवी पर बैन भी कट्टरता की ओर संकेत देता है. ऐसा नहीं कि इस तानाशही का शिकार सभी वर्ग है. जो सदियों से शोषित और वंचित है, जातिवाद के प्रसव पीड़ा से पीड़ित हैं, सामाजिक घृणा के शिकार हैं वही समाज और वर्ग विशेष आज पुनः अपने अस्तित्व और अपने संवैधानिक अधिकार के लिए चिंतित नजर आ रहा है.

जिस तरह अंबेडकर प्रेम दर्शाकर अंबेडकर विचारधारा को दबाने तथा अंबेडकरवादियों को कुचलने का षड्यंत्र चल रहा है कुछ घटनाओं से इसकी पुष्टि हो जायेगी. 17 जनवरी 2016 पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला को आत्महत्या करने को मजबूर होना पडा़. गुजरात के ऊँना में 11 जुलाई 2016 को दलित युवकों की सड़क पर बेरहम पिटाई, हरियाणा में दलित परिवार को जिंदा जलाया जाना, भीमा-कोरेगाँव की घटना तथा सबसे ज्यादा चर्चित यूपी का सहारनपुर कांड जहाँ आजतक दहशत के साये में वहाँ के दलित रह रहे हैं. सबसे बडी़ विडंबना ये है कि सवर्ण समूह के दमन का विरोध करने वाले चन्द्रशेखर रावण पर उल्टा रासूका लगाई गयी है और वो अभी तक जेल में बंद हैं.

न्यायपालिका पर भी सरकार की तानाशाही का संकेत तब दिखने लगे जब आजादी के 71 साल बाद देश के न्यायाधीश कोर्ट से बाहर जनता के दरबार में न्याय मांगने आ गये. एससीएसटी एक्ट में बदलाव कहीं न कहीं सरकार की मंसा के अनुरुप ही हुआ माना जा सकता है. विश्वविद्यालयों में एसएसएसटी के शिक्षको के भर्ती का रास्ता लगभग बंद कर दिया है. मेडिकल में पीजी कोर्स में आरक्षण खत्म कर दिया है. और कल ही एक और तानशाही फरमान जारी हुआ है कि बिना किसी परीक्षा के और बिना आरक्षण के 10 महत्वपूर्ण विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर नियुक्ति की जायेगी. चुनाव प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी इस शासन में प्रश्न चिन्ह लगना लोकतंत्र के लिए कहीं न कहीं खतरे की घंटी है.

ऐसा लगता है सिकंदर महान की तरह मोदी जी को भी भारत के राज्यों को जीतने का शौक हो गया है. राज्यों की विजय के लिए जिन्ना से लेकर शाहजहाँ, तैमूर से लेकर टीपू सुल्तान, मुहम्मदगोरी से लेकर इस्लाम, ताजमहल से लेकर अल्लाउद्दीन खिलजी तथा पद्मावती से लेकर औरंगजेब को बहुत याद किया गया. मगर देश के हालातों के बारे में, जेठ की धूप की तरह परेशान करती महँगाई के बारे में, स्वास्थ्य और शिक्षा के बारे में, रोजगार के बारे में, खाली हो रहे बैकों के बारे में, भ्रष्टाचार के बारे में, दलितों की वास्तविक स्थिति के बारे में कोई चर्चा नहीं कोई चिंता नहीं. यहाँ तक कि एक सिर के बदले दस पाकिस्तानी सिर लाने के वादे के बदले सैकड़ों जवान हर महीने शहीद हो रहे हैं.

मोदी जी का भारत की सत्ता तथा राज्यों पर विजय प्राप्त करने का सपना सम्राट अशोक की कलिंग पर चढा़ई करने जैसा प्रतीत होता है. अशोक का कलिंग को परास्त करने का लक्ष्य था उसने ये हाँसिल कर तो लिया मगर वो जीत कर भी हार गये. इस विजय से महान सम्राट अशोक का हृदय भी परिवर्तित हो गया. जीतने की अंधी धुन में जन-धन की अपार क्षति और बिलखती जनता के दर्द को वो महसूस नहीं कर सके. जब उसने देखा कि लाखों लोगों की जानें गयी हैं. खून की नदियाँ बह रही हैं, लोग भूख और प्यास से तड़प रहे हैं, विलख रहे हैं, मर रहे हैं. चारों दिशाओं में हाहाकार और अफरातफरी है. बच्चे, बूढें, महिलायें तड़प-तड़पकर मर रही हैं. मवेशियाँ भटक रही हैं. इतना व्याकुल दृष्य देखकर अशोक जीतकर भी हार गया और इस हार ने अशोक को बुद्धतत्व का मार्ग दिखा दिया और कलिंग विजय के बाद बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया. कुछ ऐसे ही हालात इस वक्त मोदी जी के सामने भी हैं. वो राज्यों केा निरंतर जीत तो रहे हैं, मगर इस जीत में कहीं न कहीं जनता हार रही है. राज्यों को फतह करने की होड़ में हम करोड़ों नौजवानों की आशाओं पर पानी फेर गये जिनको सुनहरे सपनें दिखाकर 2014 के चुनावों में भरपूर प्रचार कराया था.

देश के अन्नदाता किसानों की आत्महत्यायें नहीं रोक सके.महँगाई के पहिए को नहीं रोक सके. महिलाओं की इज्जत नहीं बचा सके. वोट बैंक बने देश के दलित/पिछडें/अल्पसंख्यक अपने भविष्य के प्रति डरे और सहमें नजर आ रहे हैं. संविधान बचाओ की गूँज, भारत छोडो़ आंदोलन की याद ताजा कर रहा है. देश के बैंक कैशलैस होने लगे हैं. भ्रष्टाचार, भ्रष्टापाँच की ओर अग्रसर है. ऐसी विषम परिस्थिति देश की इस वक्त है अब देखना ये है कि 2019 तक सम्राट अशोक की तरह मोदी जी का ह्दय परिवर्तन होता है या देश की जनता का.

लेखकः आईपी हृयूमन

Read Also-पांच करोड़ खर्च के बाद भी मर रही मछलियां, बिहार के सबसे बड़े तालाब बदहाल

यूपी से गठबंधन पर अब तक की बड़ी खबर

लखनऊ। यूपी में 2019 के चुनाव से पहले गठबंधन की कवायद में जुटे विपक्षी दलों की ओर से एक बड़ी खबर आई है. खबर है कि उत्तर प्रदेश के महागठबंधन से कांग्रेस बाहर रह सकती है. और लोकसभा चुनाव में यूपी में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि तीन सीटें रालोद के खाते में जाने की बात सामने आई है.

कांग्रेस से गठबंधन न होने के बावजूद सपा और बसपा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली और अमेठी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस समझौते की रूपरेखा के संकेत दे दिए हैं.

दरअसल, कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखने की सपा-बसपा के पास जायज वजह भी है. राज्य में कांग्रेस अपना आधार खो चुकी है. फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में अकेले लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को महज 19,353 और 18,858 वोट ही मिले. सपा और बसपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के पास अब न दलित वोट हैं, न पिछड़े और न ही अल्पसंख्यक. कांग्रेस को अधिकतर वोट सवर्णों के मिल रहे हैं जो भाजपा के भी वोट बैंक हैं. यानी कांग्रेस को मिल रहा हर वोट भाजपा के खाते से ही जा रहा है, जो सपा-बसपा गठबंधन के हित में ही है.

यदि कांग्रेस विपक्षी एकता में शामिल हो जाती है तो ये सवर्ण भी भाजपा में चले जाएंगे. इसीलिए सपा-बसपा को लगता है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से ही उन्हें ज्यादा फायदा है. तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी को भी इस फार्मूले से ज्यादा दिक्कत नहीं होगी.

दरअसल यूपी में जिस तरह का माहौल बन रहा है और उपचुनावों के जो नतीजे आए हैं, उसके मुताबिक सपा-बसपा के साथ लड़ने से ज्यादा सीटें इस गठबंधन को मिलने की संभावना है. कांग्रेस इसमें किसी तरह का रोड़ा नहीं अटकाना चाहती है. क्योंकि सपा-बसपा जीतनी ज्यादा सीटें जीतेंगी भाजपा उतनी ही कमजोर होगी. तो वहीं यह तय है कि 2019 में सपा-बसपा केंद्र में कांग्रेस के साथ खड़ी रहेगी, जिससे कांग्रेस केंद्र में मजबूत ही होगी. संभव है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती इस फार्मूले का ऐलान जल्द करें.

इसे भी पढ़ें-बीजेपी की नफरत कम करेगी अखिलेश की टोटी

इग्नू में आम्बेडकर और आदिवासी पर पाठ्यक्रम शुरू

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानि इग्नू नए सत्र से चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है. इनमें संविधान निर्माता डा. भीमराव आम्बेडकर और आदिवासी​​​​​​ अ​ध्ययन पर आधारित पाठ्यक्रम भी शामिल है.​ ​इसके अलावा, प्राथमिक चिकित्सा​ और इवेंट मैनेज​मेंट जैसे रो​जगारपरक पाठ्यक्रम भी ​हैं​​​​. यह सभी डिप्लोमा या प्रमाणपत्र आधा​​रित पाठ्यक्रम ​हैं​​​. इग्नू क्षेत्रीय कार्यालय राजघाट की दाखिला प्रमुख डॉ. विनीता कटियार ने बताया कि अकादमिक सत्र जुलाई 2018 के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है.

नए सत्र के दाखि​​ले के साथ ही द्वितीय और तृतीय वर्ष में दाखिले की प्रक्रिया भी चल रही है. इसकी अंतिम तिथि 15 जून है.​ ​​डॉ. आम्बेडकर पर शुरू हुए पाठ्यक्रम के बारे में इग्नू के क्षेत्रीय प्रबंधक​  डॉ. के. डी प्रसाद​ का कहना है कि युवा पीढ़ी के लिए डॉ. भीमराव आम्बेडकर को जानना बहुत जरूरी है. वह किसी वर्ग या जाति के नेता नहीं, बल्कि देश की महान विभूतियों में शामि हैं. आज के परिदृश्य में उनके विचार बेहद प्रासंगिक है. उन पर पाठ्यक्रम शुरू करना इसी कड़ी का हिस्सा है.

ये होंगे पाठ्यक्रम

सर्टिफिकेट इन ट्राइबल स्टडीज (सीटीआरबीएस) इस पाठ्यक्रम को जनजातीय जीवन के अध्ययन और उनके विकास को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को इसके टारगेट ग्रुप में रखा गया है.

कौन कर सकता हैः 12वीं या इग्नू से बीपीपी उत्तीर्ण

फीस- 1000 रुपये

सर्टिफिकेट प्रोग्राम ऑन लाइफ एंड थॉट्स ऑफ बीआर आम्बेडकरः सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक क्षेत्र पर आम्बेडकर के विचारों को समझने के प्रयास के रूप में शुरू किया गया है.

अहर्ता- 12वीं, फीस- 1000 रुपये

साभारः मानसी मिश्रा

Read Also-बिहार के निवासी को इस सरकारी नौकरी में मिलेगी छूट, ऑनलाइन आवेदन करें

कर्नाटक में बीजेपी को एक और झटका

बेंगलुरू। कर्नाटक में कांग्रेस ने एक बार फिर बीजेपी को मात दिया है. इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और झटका लगा है. भारी मतों के साथ जयनगर विधानसभा सीट कांग्रेस ने जीत ली है. कांग्रेस उम्मीदवार सौम्या रेड्डी ने 16 राउंड की गिनती के बाद भाजपा के उम्मीदवार बीएन प्रहलाद को लगभग 2900 वोटों से हराया. इस जीत के साथ ही कांग्रेस के सीटों की संख्या बढ़ गई है.

जान लें कि आठवें राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस उम्मीदवार सौम्या रेड्डी, भाजपा प्रत्याशी बी एन प्रहलाद से 10,205 वोटों से आगे चल रही थी. मतों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी. हालांकि इस जीत के बाद कर्नाटक ने एक बार फिर जश्न मनाती दिखी. कर्नाटक चुनाव के दौरान कांग्रेस को 78 सीटें  मिली थीं. जबकि बाद में आरआर नगर पर हुए चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली थी. फिर आज विजयनगर सीट पर भी कांग्रेस का कब्जा हो गया. इस तरह कांग्रेस के खाते में अब 80 सीटें हो गईं.

बता दें कि भाजपा उम्मीदवार बीएन विजयकुमार के निधन के बाद जयनगर में चुनाव स्थगित कर दिया गया था. जिसके बाद यहां पर 11 जून को मतदान कराया गया. निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि सुबह दस बजे तक कांग्रेस की उम्मीदवार सौम्या रेड्डी 27,195 मतों के साथ भाजपा के बीएन प्रहलाद से आगे चल रही हैं, जिन्हें अब तक 19,873 मत मिले हैं.

Read Also-कर्नाटकः बसपा के एन महेश ने मंत्री बनकर बनाया रिकॉर्ड

बीजेपी की नफरत कम करेगी अखिलेश की टोंटी

PC-abp.in

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री के बंगलों को खाली कराने के बाद भी विवाद रूकने का नाम नहीं ले रहा है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में तोड़फोड़ होने के बाद तो विवाद इतना बढ़ गया है कि इसको शांत कराने के लिए टोंटी का सहारा लेना पड़ा. इतना ही नहीं बीजेपी सरकार पर अखिलेश यादव ने जमकर तंज कसा तो वहीं मीडिया कवरेज पर भी खूब ताना कसा.

वो सब लौटा दें सीएम योगी…

बंगला विवाद को लेकर बुधवार को अखिलेश यादव ने प्रेस कांन्फ्रेंस की, इस दौरान उनके हाथों में टोटी थीं और उसको दिखाकर अखिलेश यादव बीजेपी सरकार की खूब खिंचाई किए. अखिलेश ने कहा कि जो टोटी गायब मिली है वही लौटाने आया हूं. मैं सारी टोंटियां देने को तैयार हूं. ये टोंटी बीजेपी को देना चाहता हूं ताकि उनकी नफरत कम हो. साथ ही अखिलेश ने ये भी कहा कि सीएम आवास में भी बहुत सारे मेरे सामान हैं, वो सब लौटा दें सीएम योगी. यहां पर अखिलेश ने साफ तौर पर कहा कि हमारी ओर से राष्ट्रीय संपति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. फिर भी हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. बता दें कि सरकार आवास खाली करने के बाद अखिलेश के आवास में टोंटी निकली थी और अन्य सामान गायब थे जिसको लेकर खूब बहस चली.

इसे भी पढ़ें-अखिलेश ने दी बीजेपी को बड़ी चुनौती

‘बॉर्डर’ का टी-शर्ट पहन चंपा को बचाने निकला “निरहुआ”

पटना। भोजपुरी सिनेमा के हीट हीरो “निरहुआ” चंपा को बचाने के लिए निकले हैं. दिनेश लाल यादव “निरहुआ” बुधवार को चंपारण जिला में जाकर चंपा लगाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान का हिस्सा बने. इस दौरान स्कूल के बच्चों से मिलकर बात किए.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक “निरहुआ” ने चम्पारण अभियान में अपना समर्थन दिया और माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल में चम्पा का पौधा भी लगाया. इस मौके पर “निरहुआ” ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए भोजपुरी सिनेमा हर संभव प्रयास करेगा. इन्होंने कहा कि आगामी फिल्म में चंपा अभियान को जोड़ा जा सकता है ताकि लोगों को इस अभियान का मतलब समझ में आए. इनका कहना है कि चंपा अभियान के जरिए चंपारण व चंपा दोनों को बचाया जा सकता है.

बता दें कि कौन बनेगा करोड़पति के विजेता सुशील कुमार ने अप्रैल में चंपा अभियान को आरंभ किया था जो कि चंपारण के अलावा देश-विदेश में तेजी से फैल रहा है. इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सुशील कुमार लगातार प्रयास कर रहे हैं. अभी तक हजारों की संख्या में चंपा के पौधे लगाए जा चुके हैं. फिलहाल “निरहुआ” ने इस अभियान से जुड़कर इसे आगे बढ़ाने का काम किया है.

इसे भी पढ़ें-विश्व पर्यावरण दिवसः बिहार के तीन लाल, धरती को बचाने में लूटा रहे जवानी

अयोध्या के महंत ने नग्न युवती के साथ ली सेल्फी, तस्वीर वायरल

लखनऊ। अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर का महंत की युवती के साथ आपत्तिजनक अवस्था में तस्वीर वायरल हो रही है. इस तस्वीर से साफ जाहिर हो रहा है कि महंत ने खुद ही युवती के साथ सेल्फी ली है. इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है. लोग तमाम प्रकार के कमेंट कर रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अयोध्या हनुमान गढ़ी मन्दिर के महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास की तस्वीर बताई जा रही है. युवती के साथ खड़े युवक की फोटो व महंत के फेसबुक अकाउंट की फोटो के साथ मिल रही है.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह व योगी की तस्वीर

महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास प्रसिध्द व्यक्ति है. इसने गृहमंत्री राजनाथ सिंह व यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी के साथ तस्वीर फेसबुक पर शेयर की है. इसके अलावा फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर राजनाथ सिंह के साथ लगा रखी है. लोग इन दो तस्वीरों को भी आपत्तिजनक तस्वीर के साथ शेयर कर रहे हैं. लोगों ने यह भी लिखा कि महंत अनिलदास उर्फ बलराम दास सीएम योगी का चहेता है.

Read Also-शनिधाम वाले दाती महाराज पर रेप का मामला दर्ज

ऋषिकेश के इस नींबू-पानी वाले को अमेरिकी अम्बेडकरवादी भी जानते हैं

1

​देहरादून से लौटते वक्त ऋषिकेश रुकना हुवा, साथियों ने कहा चलो लक्ष्मण झूला भी देख लेते हैं। वहाँ पहुँचे तो इन शख्सियत को देखकर मन प्रसन्न हो गया। साथी Rakesh Kumar Bauddh जी की नजर बैकग्राउंड पर पड़ी तो बोले, “चलिए नीबू पानी पीते हैं” वहाँ पहुँचते ही प्रश्न ये फोटो आपने लगाई है? वो बोले हाँ। नीबू-पानी वाले भाई साहब बोले, “जय भीम” उनका इतना कहना था कि सोच में पड़ गया। अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे कहे जाने वाले लोगों को जय भीम सम्बोधन कहने में चेहरे पर बल पड़ते देखा है कितनी बार। सलाम है भाई आपको और आपकी जिंदादिली को। अब जरा इनका परिचय दे दें। मेरी नजर इनके हाथ पर पड़ी तो देखा नाम गुदा हुआ है। नाम है इनका गरीब दास। बोला ये आपका नाम है उनका उत्तर था जी। अब आप ही सोचिये किसने इनका यह नाम रखा होगा। हम साथियों की नजर में इनका नाम गरीब दास नहीं अमीर दास हो गया। हम लोगों ने नीबू पानी पिया, लेकिन हमें उसमें रत्ती भर भी खट्टापन नहीं लगा इतनी मिठास महसूस हुई बता नहीं सकता। यह न केवल मुझे बल्कि हमारे ​अन्य साथियों को भी ​महसूस ​हुई। अंत में इनकी एक बात बहुत अच्छी लगी बोले इस फोटो से मेरी अमेरिका में भी पहचान है। वहाँ के कुछ लोग आये थे उन्होंने देखा तो मेरा नम्बर लिया और अब उनका फोन आते रहता है।

-​ संजय कुमार​

Read Also-मोदी जी ने आरक्षण खत्म कर दिया, आपको पता भी नहीं चला

​​मोदी जी ने आरक्षण खत्म कर दिया, आपको पता भी नहीं चला

सदियों से सोये हुए लोगों, अपने दिमाग पर थोड़ा प्रेशर डालिये और बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी का एक बयान याद किजिए जो उन्होंने जयपुर में दिया था. उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार आरक्षण को ऐसी स्थिति में पहुंचा देगी जहां इसके होने या ना होना बराबर होगा. आपको शायद यह जानकारी न हो लेकिन मोदी जी ने स्वामी जी के इस बयान को साकार कर दिया है. आज आरक्षण के नाम पर आपको गालियों तो मिल रही है लेकिन आरक्षण आज लगभग खत्म हो चुका है.

जयपुर में ही दिए गए एक और बयान को याद किजिए, आरएसएस के मनमोहन वैद्य ने कहा था कि आरक्षण सदियों से लोगों के बीच अलगाव बढ़ा रहा है. इन बयानों को आपने शायद हल्के में लिया और सोते रहे लेकिन बीजेपी धीरे-धीरे आरक्षण को खत्म करने का प्लान बनाती रही और वो बयान भी उसी प्लान का हिस्सा थे. भाजपा की एक दलित सासंद ने मोदी पर आरक्षण को खत्म करने का आरोप लगाया है.

आपके सामने विस्तार से तीन उदाहरण रखूंगा जिससे यह साफ हो जाएगा कि बीजेपी ने आरक्षण को खत्म कर दिया है.

हाल ही के दिनों में यह देखने को मिल रहा है कि जिन विश्वविद्यालयों में फैकल्टी के पद वर्षों से रिक्त पड़े थे वहां अचानक से नोटिफिकेशन जारी करके उन पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. लेकिन जैसे ही नोटिफिकेशन में पदों की संख्या पर नजर जाती है तो आरक्षित श्रेणी वाले कॉलम में जीरो लिखा मिलेगा. 80 प्रोफेसरों की भर्ती में एक भी पद एससी/एसटी को नहीं फिर आरक्षण कैसा?

दरअसल ये हुआ ऐसे कि इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यूजीसी ने एक आदेश जारी किया कि अब भर्तियों में विश्वविद्यालय को ईकाई न मानते हुए विभाग को ईकाई माना गया. आसान भाषा में समझिए कि पहले पूरे विश्वविद्यालय में खाली पदों की संख्या पर आरक्षण लागू होता था लेकिन अब ऐसा न होकर के एक विभाग में खाली पदों की संख्या पर आरक्षण लागू होगा. इससे हुआ ये कि आरक्षित वर्ग के हिस्से में एक भी सीट नहीं आती और आराम से अपने लोगों सेट किया जा रहा है. उदाहरण से समझिए कि मान लिजिए पहले अगर विश्वविद्याल में सौ पदो पर भर्ती निकलती तो आरक्षण की अलग-अलग श्रेणियों के प्रतिशत के हिसाब से बंटवारा होता था क्योंकि विश्वविद्यालय को ईकाई माना जाता था लेकिन अब नए फैसले के बाद विभाग को ईकाई माना जाता है जैसे कि मान लो किसी विभाग में एक ही पद खाली है तो जनरल कोटे से भरा जाएगा क्योंकि आरक्षण विभाग पर ही लगना है.

ये बात तो अब जग जाहिर है कि मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा का कबाड़ा कर दिया है. किसी ने किसी बहाने से विश्वविद्यालयों पर हमला किया गया. राजस्थान में ही वसुंधरा सरकार ने दो विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया जिसमें से एक तो अंबेडकर के नाम पर ही था और दूसरा पत्रकारिता का था.

एससी और एसटी के छात्र-छात्राओं को पीएचडी और एमफिल करने के लिए कांग्रेस सरकार ने एक स्कीम चालू कि थी जिसके तहत इन वर्गों के विद्यार्थियों को फैलोशिप दी जाती थी. राजीव गांधी नेशनल फैलोशिप नाम की यह स्कीम मोदी सरकार आने के बाद इतिहास बन चुकी है. मोदी के शपथ ग्रहण के बाद से ही इस स्कीम को ग्रहण लग गया. इस स्कीम के लिए हर साल फॉर्म भरवाये जाते थे लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से एक बार भी राजीव गांधी फैलोशिप के लिए एक बार भी आवेदन नहीं मांगे गए हैं. लेकिन इसमें मजे की बात यह है कि  मोदी सरकार की ओर से न तो इस स्कीम को बंद करने का कोई आदेश जारी किया और न हीं यूजीसी ने इसकी वेबसाइट पर जाते हैं तो चार साल एक ही बात दिखा रहा जल्द ही आवेदन मांगे जाएंगें.

पीएम मोदी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि इंटरव्यू से छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होता है, आखिर मेरे समझ में यह नहीं आता कि लोगों के पास ऐसी कौनसी विधा जिससे पांच मिनट में व्यक्ति के ज्ञान की पहचान कर लेते हैं इसलिए बीजेपी सरकार सरकारी नौकरियों से इंटरव्यू को खत्म करने का काम करेगी. पीएम मोदी ने इंटरव्यू खत्म करने वाली बात का जिक्र स्वतंत्रता दिवस लाल किले से दिए अपने भाषण में भी किया था. लेकिन अब केंद्र सरकार के मौजूदा रवैये से ऐसा लग रहा कि अब आईएएस की परीक्षा खत्म कर दी जाएगी और उम्मीदवारों का चयन केवल इंटरव्यू के माध्यम से ही होगा.

केंद्र सरकार ने दस बड़े विभागों में जाइंट सेक्रेटरी के पद के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें केवल इंटरव्यू के माध्यम से ही उनका चयन होगा और खास बात यह कि इस चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार का आरक्षण लागू नहीं होगा.

बिहार चुनाव से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी आरक्षण को लेकर बयान दिया था हालांकि बाद में वे अपने बयान से मुकर गए थे लेकिन आरक्षण आरएसएस को हमेशा से ही चुभता रहा है. आरएसएस हिंदू राष्ट्र की बात करता है हिंदू यानी जाति व्यवस्था जिसमें एक वर्ग ऊंचा हो दूसरा नीचा. चूंकी बीजेपी भी संघ के विचारधारा का ही पालन करती है ऐसे में आरक्षण कहीं न कहीं बीजेपी को चुभता है और यही कारण है कि केंद्र की मोदी सरकार ने आरक्षण को समाप्त किए बिना ही खत्म कर दिया है.

सूरज कुमार बैरवा

सीतापुरा, जयपुर

पांच करोड़ खर्च के बाद भी मर रही मछलियां, बिहार के सबसे बड़े तालाब बदहाल

दरभंगा के सबसे बड़े दिग्घी तालाब की तस्वीर

पटना। बिहार के दरभंगा जिला की पहचान पोखर (तालाब) व मछली से होती है लेकिन मिथिला अब अपनी पहचान खोता दिख रहा है. हालांकि सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि सरकार ने इनको बचाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपए खर्च किए लेकिन मौजूदा तस्वीर तालाबों की बदहाली बयां कर रही है. मछलियां पानी में मरने को विवश हैं.

दरभंगा जिला के जाने माने रंगकर्मी व फिल्मकार प्रकाश बंधु बताते हैं कि पग-पग पोखर,माछ-मखान जो मिथिला की पहचान हुआ करता था. जहाँ तालाब जीवन का श्रोत हुआ करता था, आज उन्ही तालाबों का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है जिसके कारण मछलियाँ मर रही हैं. ये परिस्थिति कमोवेश मिथिला के तमाम पोखरों की है. इसे मिथिला का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की यहाँ के लोग अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ भी संरक्षित नहीं रखना चाहते. अगर हम आज अपने तालाबों को नहीं बचा पाएं तो आने वाले 4-5 वर्षों में दरभंगा को जबरदस्त जल संकट का सामना करना पड़ेगा और इसके ज़िम्मेवार यहाँ के निवासी ही होंगे.

आरटीआई का खुलासा

यह जानकर हैरानी होगी कि बिहार सरकार ने दरभंगा के तीन बड़े तालाब दिग्घी, हराही व गंगा सागर के विकास के लिए 474.55 लाख रुपए आवंटित किए थे. लेकिन इन पैसों का खर्च कहां किया गया है इसको पता लगाना मुश्किल है. स्थानीय लोग बताते हैं कि पोखरों की दुर्दशा ऐसी है कि लोगों को नाक बंदकर आना जाना पड़ता है. पोखरों में कचरा भरा पड़ा है. आजतक किसी प्रकार की दवाई आदि का छिड़काव नहीं किया गया और ना ही कोई अधिकारी काम करते दिखा.

विलुप्त हो रहे तालाब

इंडिया वाटर पोर्टल की मानें तो पटना से 157 किलोमीटर दूर दरभंगा शहर में महज 25 वर्ष पहले लगभग 213 तालाब थे जो आज घट कर लगभग 84 तालाब रह गए हैं. बिहार सरकार के आँकड़ों के मुताबिक पूरे राज्य में लगभग 67 हजार से अधिक निजी तालाब महज बीस साल के समय में विलुप्त हो गए. सरकारी तालाबों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है. उनके चारों तरफ घर बन गए हैं और अक्सर नगर पालिका या नगर निगम के लोग उसमें कचरा डम्प कराते रहतें हैं. दरभंगा शहर का दिग्घी तालाब जो काफी बडा है लगातार इस तरह के अतिक्रमण का आये दिन शिकार हो रहा है. उसके साथ ही गंगा सागर, हराही और मिर्जा खां तालाब जैसे झीलनुमा बड़े तालाबों को भरे जाने की साजिश चलती रहती है.

Read Also-दिल्ली में फैला जहर असल में नैतिक प्रदूषण है

आईसीयू में भर्ती अटल जी से मिलने एम्स पहुंचे मनमोहन सिंह, इन नेताओं ने भी की मुलाकात

File Photo

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स में नेताओं की लाइन लग गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राहुल गांधी के बाद पूर्व पीएम मनमोहन सिंह एम्स पहुंचकर अटल जी का हाल लिए. सोमवार को इनको एम्स में भर्ती कराया गया लेकिन स्थिति ठीक ना होने के कारण फिलहाल भर्ती ही रखा गया है. हालांकि मंगलवार को इनको एम्स से डिस्चार्ज किया जाना था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं किया जा सका है.

आईसीयू में भर्ती

रात आठ बजे एम्स की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, ”उनकी हालत स्थिर है। इलाज का उनपर असर हो रहा है। डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनपर नजर बनाए हुए है.” एम्स ने पहले कहा था कि उन्हें इंजेक्शन के जरिए एंटीबायटिक्स दिए जा रहे हैं. संक्रमण के नियंत्रण में आने तक उन्हें अस्पताल में ही रखा जाएगा. खबरों की मानें तो एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया की निगरानी में 12 चिकित्सकों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वह अभी भी एम्स के कार्डियोथोरैकिक केन्द्र के आईसीयू में हैं.

दो पूर्व पीएम ने की मुलाकात

भारत के दो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा ने अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की है. इनके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र, विधि राज्य मंत्री पी. पी. चौधरी, भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और केन्द्रीय मंत्री अनंत गीते भी वाजपेयी का हालचाल पूछने पहुंचे. भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जयप्रकाश नड्डा और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्द्धन भी बीमार नेता को देखने पहुंचने वालों में शामिल रहे.

एम्स गेट पर हवन

दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष पंकज जैन ने एम्स के गेट नंबर -1 पर हवन कर पूर्व प्रधानमंत्री के जल्दी स्वस्थ होने और दीर्घायु की कामना की. इसके अलावा कानपुर में भी बीजेपी की ओर हवन किया गया. साथ ही देश भर से लोग प्रार्थना कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें-पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी से मिलने पहुंचे राहुल गांधी

दलितों के बस्ती में दबंगों ने चलाई गोली, 12 लोग घायल, तीन की हालत नाजुक

लखनऊ। जमीनी विवाद को लेकर दबंगों ने दलितों की बस्ती में घुसकर दनादन गोलियां चलाई. और देखते ही देखते दलितों की बस्ती खून से सन गई. घटना में करीब दर्जनों दलित घायल हो गए जिनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया. इस घटना से पूरा इलाका दहशत में है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक फैजाबाद के गोसाईंगंज नगर में जमीन पर कब्जे के लिए दबंग असलहों से लैस होकर बस्ती में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए लोगों की पिटाई की. इसमें आठ महिलाएं समेत दर्जनभर लोग घायल हुए हैं. तीन लोगों की हालत गम्भीर होने पर उन्हें जिला चिकित्सालय भेजा गया है.

हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार मंगलवार को बस्ती में हमला करने वालों ने दहशत फैलाने के लिए फायरिंग की. गोसाईंगंज थाने की पुलिस ने चार नामजद सहित 50 से अधिक लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने, धमकी देने, बलवा व दलित उत्पीड़न आदि के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है.

पुलिस के अनुसार गोसाईंगंज नगर में स्थित बस्ती के पीछे एक जमीन है. नगर की जमीन पर दबंग नजर टिकाए बैठे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि अम्बेडकर नगर जनपद के अहिरौली थाना क्षेत्र के चतुरी पट्टी गांवनिवासी कृष्णा वर्मा के बैनामे की जमीन है. उसी जमीन की बाउंड्रीवाल बैनामेदार करा रहे थे. जबकि दूसरी ओर दलित पक्ष के माता प्रसाद, राम बहादुर,परशुराम, श्रीराम व विश्राम आदि हरिजन आबादी की जमीन बता कर विरोध कर रहे थे.

Read Also-बेकसूर दलित युवक को शराब के नशे में पुलिस ने दिया थर्ड डिग्री, मौत से जूझ रहा पीड़ित

गौरी लंकेश हत्याः एक और गिरफ्तार युवक को कोर्ट ने 14 दिन के लिए पुलिस को सौंपा

बेंगलुरू। गौरी लंकेश हत्याकांड मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को कोर्ट में पेश किया गया. इसके बाद कोर्ट ने उसकी कस्टडी 14 दिनों के लिए पुलिस को सौंप दी. पुलिस इस संबंध में अब गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ करेगी. इस दौरान पुलिस गौरी लंकेश हत्या की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करेगी.

गौरतलब है कि कन्नड़ की साप्ताहिक पत्रिका की संपादक गौरी लंकेश की 05 सितंबर, 2017 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच के लिए कर्नाटक सरकार ने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है. सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि हत्यारों ने हत्या वाले दिन लंकेश के घर की दो बार रेकी की थी. सफेद शर्ट और ब्लैक हेलमेट पहने एक व्यक्ति ने दोपहर 3 बजे और फिर शाम 7 बजे घर की रेकी की थी. वह रात 8:05 बजे फिर वहां आया. जब गौरी लंकेश घर पहुंची तो उसने उनपर गोलियां चला दीं. लंकेश ने अपने घर में दाखिल होने की कोशिश की लेकिन वह नीचे गिर पड़ीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.

इसे भी पढ़ें-गौरी लंकेश हत्‍याः SIT ने दाखिल की 650 पेज की चार्जशीट

23 लाख रिटायर्ड शिक्षकों को सरकार का तोहफा

नई दिल्ली। चुनाव नजदीक आते ही केंद्र सरकार ने रिटायर्ड शिक्षकों को तोहफा दे दिया है. बीजेपी सरकार ने रिटायर्ड शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पेंशन में इजाफा किया है. इससे रिटायर्ड शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों खुश होंगे. केंद्र सरकार ने 23 लाख से अधिक विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से रिटायर्ड शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे दिया है. सरकार ने इनकी पेंशन में 18 हजार रुपये तक का इजाफा कर दिया है. मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने खुद सरकार के इस फैसले की जानकारी ट्विटर के माध्यम से दी.

जान लें कि सरकार की ओर से इन शिक्षक-गैर शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया गया है. सरकार के इस फैसले से केंद्रीय विश्वविद्यालयों व यूजीसी के आधीन डीम्ड विश्वविद्यालयों के 25 हजार पेंशनरों को फायदा पहुंचेगा. इसके अलावा राज्यों के उन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनके यहां पर सातवां वेतन आयोग लागू हो चुका है. फिलहाल इसमें आठ लाख शिक्षक व 15 लाख गैर-शिक्षक कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं.

Read Also-यूपी के शिक्षकों ने खून से लिखी सीएम योगी को चिट्ठी

तो इसलिए भय्यूजी महाराज ने खुद को मार ली गोली

नई दिल्ली। दुसरों को ज्ञान देकर जीने की सीख देने वाले भय्यूजी महाराज की मौत ने सबको सदमे में डाल दिया है. मंगलवार को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली. उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अभी-अभी भय्यूजी महाराज के मौत के कारण पर कुछ हद तक पर्दा हटा है. उनके पास से सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिससे कि उनके मौत का कारण पता चल रहा है.

उनके पास से अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट मिला है जिसमें कि उन्होंने लिखा है कि काफी परेशान हैं, इस कारण उनकी जिंदगी तनावग्रस्त हो गई है. तनाव के कारण वो खुद को गोली मार रहा हूं. मेरी मौत के लिए परिवार का कोई जिम्मेदार नहीं होगा. हालांकि इसको लेकर कांग्रेस के नेता ने आजतक से कहा कि बीजेपी के दबाव के कारण भय्यूजी महाराज की मौत हुई है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना के फौरन बाद भय्यूजी को इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उन्होंने खुदकुशी क्यों कि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है. उनकी दर्दनाक मौत से उनके भक्त और समर्थक गहरे सदमे में हैं. मध्य प्रदेश में भय्यूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था. कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. उनके अलावा 4 अन्य संत भी राज्यमंत्री बनाए गए थे.

इसके अलावा जान लें कि 1968 को जन्मे भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है. वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं. भय्यू जी महाराज ने 2011 में अन्ना हजारे के अनशन अपने हाथ से जूस पीकर अनशन तुड़वाया था. वहीं पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे. उस उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

इसे भी पढें-शनिधाम वाले दाती महाराज पर रेप का मामला दर्ज

संत भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार मौत के घाट उतारा

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली. उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हालांकि अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना के फौरन बाद भय्यूजी को इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उन्होंने खुदकुशी क्यों कि इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है. उनकी दर्दनाक मौत से उनके भक्त और समर्थक गहरे सदमे में हैं. मध्य प्रदेश में भय्यूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था. कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. उनके अलावा 4 अन्य संत भी राज्यमंत्री बनाए गए थे.

इसके अलावा जान लें कि 1968 को जन्मे भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है. वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं. भय्यू जी महाराज ने 2011 में अन्ना हजारे के अनशन अपने हाथ से जूस पीकर अनशन तुड़वाया था. वहीं पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे. उस उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था.

Read Also-डोली उठने से पहले प्रेमिका ने लगाई फांसी

न्यायपालिका को लेकर बीजेपी पर भड़की मायावती

लखनऊ। न्यायपालिका को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा सरकार की जमकर खिंचाई की. मायावती का कहना है कि सरकार न्यायपालिका को अपना काम स्वतंत्र रुप से करने दे. साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ न्यायपालिका को बार-बार अपमानित करने व उससे नीचा दिखाने की प्रवृत्ति की तीखी आलोचना की.

इनका मानना है कि केन्द्र सरकार का न्यायपालिका के साथ ऐसा विद्वेषपूर्ण बर्ताव सही नहीं है तथा प्रतिपक्षी पार्टियों के साथ-साथ देश की न्यायपालिका के प्रति भी यह केन्द्र सरकार की हठधर्मी व निरंकुशता का द्योतक है. केन्द्र सरकार का कानून मंत्रालय अगर ’’पोस्ट आफिस’’ (डाकघर) नहीं है तो उसे पुलिस थाना (कोतवाली) बनने का भी अधिकार कानून व संविधान ने नहीं दिया है. यह बात श्री नरेन्द्र मोदी सरकार को विनम्रता के साथ स्वीकार करनी चाहिये.

इसके अलावा जजों की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि पहले 300 से ज्यादा जजों के पदों को खाली लटकाये रखना और फिर उसके बाद 126 जजों की नियुक्ति करना यह कौन सा जनहित व देशहित का काम है? नीति-निर्धारण मामलों के साथ-साथ न्यायपालिका में भी दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गो व धार्मिक अल्पसंख्यकों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण भी संविधान को उसकी सही जनहिताय की मंशा के अनुरूप देश में आज तक ढाला नहीं जा सका है. बीजेपी के मंत्रीगण अगर न्यायपालिका का पूरा-पूरा आदर-सम्मान नहीं कर सकते तो कम-से-कम उसका अपमान भी ना करें.

Read Also-बंगला खाली कर मायावती ने बीजेपी की खोली पोल

योगी सरकार ने मानी मायावती की बात

लखनऊ। सरकारी बंगला को लेकर मची घमासान में एक बड़ी खबर आ रही है. योगी सरकार ने मायावती के पुराने सरकारी बंगला पर सुरक्षा बढ़ा दी है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती का दांव आखिरकार कारगर साबित होता नजर आ रहा है. यूपी की पूर्व सीएम ने अपने पुराने निवास स्थान 13 ए मॉल एवेन्यू को खाली करने से पहले योगी सरकार को चिट्ठी लिखकर उसे मान्यवर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल बताया था. इसके साथ ही मायावती ने योगी आदित्यनाथ सरकार से इस स्थल की सुरक्षा की मांग भी की थी. मान्यवर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल मुद्दे को लेकर योगी सरकार ने मायावती की बात मान ली है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक योगी सरकार ने इस स्थल की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए हैं. इसके अलावा राज्य संपत्ति विभाग ने भी सफाई के लिए यहां कर्मचारी तैनात किए हैं. इसके अलावा बीएसपी अध्यक्ष के पूर्व निवास स्थान वाले 13 ए मॉल एवेन्यू बंगले पर जल्द ही पुलिस तैनात की जाएगी. राज्य संपत्ति विभाग ने इसके लिए लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार को एक पत्र भी लिखा हॉ. राज्य संपत्ति विभाग का कहना है कि यहां मान्यवर कांशीराम की मूर्ति के साथ कई दलित महापुरुषों की मूर्तियां भी हैं, इनकी देखभाल के लिए अभी चार गार्ड लगाए गए हैं.

गन्ना आयुक्त के दफ्तर को तुड़वाकर…

गौरतलब है कि संपत्ति विभाग के मुताबिक गन्ना आयुक्त दफ्तर को कांशीराम मेमोरियल को 13-ए मॉल एवेन्यू बनाया गया था. लेकिन मायावती ने 2007 में सत्ता में आने के बाद गन्ना आयुक्त के दफ्तर को तुड़वाकर अपने 13 मॉल एवेन्यू वाले घर से इसे जोड़ दिया था. इसके बाद मायावती के शासनकाल में ही इसे मान्यवर कांशीराम यादगार स्थल घोषित कर दिया गया.

इसे भी पढ़ें-मायावती ने योगी को लेटर लिख बताया- 13 ए माल एवेन्यू सरकारी आवास नहीं

राजस्थान के स्कूलों में होगा संतो का प्रवचन

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। राजस्थान के स्कूलों में बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए संतो का प्रवचन सुनाया जाएगा. इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों की एक सूची जारी की है. इस सूची के अनुसार महीने के हर तीसरे शनिवार को छात्र स्कूल परिसर में संतों के प्रवचन सुनाए जाएंगे. साथ ही स्कूलों में बाल सभा का आयोजन किया जाएगा. विभाग ने हाल ही में शिविरा पंचांग जारी किया है. इस पंचांग के आधार पर हर तीसरे शनिवार को स्कूलों में राष्ट्रीय महत्व के समसामयिक समाचारों की समीक्षा होगी और किसी महापुरुष या स्थानीय संत के प्रवचन सुनाए जाएंगे. महीने के पहले शनिवार को बच्चों को किसी प्रेरक संत के बारे में जानकारी दी जाएगी.

प्राप्त खबरों के मुताबिक वैसे तो पहले भी स्कूलों के अंदर बाल सभाओं का आयोजन किया जाता था लेकिन वह महज खानापूर्ति हुआ करती थी. मगर अब इसके लिए बकायदा कलेंडर जारी कर दिया गया है. बाल सभाओं में बच्चों को बालसरंक्षण संबंधित मुद्दों पर बाल चलचित्र, चित्रकला प्रतियोगिता आदि के जरिए बाल अधिकार और बाल संरक्षण के संबंध में जागरुकता पैदा करने की कोशिश की जाएगी. इतना ही नहीं इसके साथ ही स्कूलों को बाल सभाओं और उत्सवों का रिकॉर्ड भी रखना होगा. चौथे शनिवार को साहित्य और महाकाव्यों पर प्रश्न व उत्तर का कार्यक्रम रखा जाएगा.

Read Also-शनिधाम वाले दाती महाराज पर रेप का मामला दर्ज

झारखंड में मजदूर नेताओं पर राजकीय दमन

देश में चुनावी वर्ष प्रारंभ हो चुका है और इसी के साथ प्रारंभ हो चुका है आगामी चुनाव जीतने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी का चुनावी तिकड़म. देश में लगातार बढ़ रही मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भूखमरी, आत्महत्या, अपराध, दलितों-आदिवासियों-अल्पसंख्यकों-महिलाओं के उत्पीड़न, महिलाओं के साथ छेड़खानी से लेकर बलात्कार की घटनायें, अमीरों की अमीरी व गरीबों की गरीबी आदि से आम जनता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी सरकार से एवं इसके मुखिया नरेन्द्र मोदी से खासे नाराज व गुस्से में हैं, जिसका प्रदर्शन पिछले वर्ष से ही कई बड़े-बड़े जनांदोलनों के जरिये कर रहे हैं.

केन्द्र सरकार के प्रति आम जनता के तमाम तबकों के आक्रोश से डरी सरकार ने जनांदोलनों का नेतृत्व कर रहे नेताओं व बुद्धिजीवियों को राष्ट्रीय स्तर पर निशाना बनाना पिछले वर्ष से ही प्रारंभ कर दिया था, जिसके बारे में आप भली-भांति जानते हैं (दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईं बाबा से लेकर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर तक). साथ ही केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश से माओवाद को खत्म करने का एलान भी गद्दी संभालते ही किया था, लेकिन सरकार द्वारा करोड़ों-करोड़ रूपये खर्च करने व मिशन-2016 एवं मिशन-2017 के जरिये माओवाद को खत्म करने की तमाम जद्दोजहद के बावजूद भी जब सरकार माओवादियों को जंगल में बहुत अधिक नुकसान नहीं दे पायी, तो अब उसे कुछ नया करने के अलावा कोई उपाय नजर नहीं आया. इसीलिए चुनावी वर्ष की शुरुआत होते ही राष्ट्रीय स्तर पर ‘अरबन माओइस्ट’ का शिगूफा छोड़ा गया और बड़े ही सतही तौर पर ‘अरबन माओइस्ट’ के जरिये ‘प्रधानमंत्री की हत्या’ की साजिश की बात फैलायी जा रही है.

भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी को हुई हिंसा को बहाना बनाकर ‘अरबन माओइस्ट’ के नाम पर दिल्ली, मुंबई व पुणे से देश के जाने-माने एक्टिविस्ट रोना विल्सन, वकील सुरेन्द्र गाडलिंग, प्रोफेसर शोमा सेन, दलित एक्टिविस्ट सुधीर ढावले एवं विस्थापन विरोधी नेता महेश राउत को 6 जून को गिरफ्तार कर लिया गया है. 6 जून को ही डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (डीएसयू) के तेलंगाना राज्य अध्यक्ष कंचरला बद्री, राज्य कार्यकारणी सदस्य सुधीर एवं ओस्मानिया यूनिवर्सिटी मेम्बर रंजीत को ही पुलिस ने हैदराबाद से ‘अपहरण’ कर लिया और 2-3 दिन के बाद उनके साथियों के काफी मशक्क्त के बाद ही उसे कोर्ट में पेश किया. फिर 10 जून को तेलंगाना डेमोक्रेटिक फ्रंट (टीडीएफ) के राज्य संयोजक बंदी दुर्गा प्रसाद को भी हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया. बेशक, हैदराबाद से गिरफ्तार इन चारों को भी ‘अरबन माओइस्ट’ से ही विभूषित किया गया.

देश के अन्य राज्यों की तरह झारखंड में भी केन्द्र व राज्य सरकार के खिलाफ आम जनता के आक्रोश का विस्फोट पिछले वर्ष से ही लगातार बड़े-बड़े जनांदोलनों के जरिये हुआ है. सीएनटी-एसपीटी एक्ट में किये जा रहे संशोधनों के खिलाफ व गलत स्थानीयता नीति के खिलाफ व्यापक जनांदोलन की बात हो या फिर फर्जी मुठभेड़ में कोबरा द्वारा डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की हत्या के खिलाफ उभरा अनोखा जनांदोलन, कई जगहों पर पुलिसिया गुंडागर्दी के खिलाफ जनता का स्वतःस्फूर्त्त आंदोलन हो व अपने हक-अधिकार के लिये ‘पत्थलगढ़ी आंदोलन’ हो, झारखंड भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ अपने हक-अधिकार के लिये देश के अन्य हिस्सों के आंदोलनकारियों के साथ कदमताल कर रहा था. झारखंड में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है और इसके मुखिया हैं रघुवर दास, वैसे तो आजसू भी सत्ता में साझीउार है, लेकिन उसकी कोई औकाद नहीं है. झारखंड में व्यापक होते जनांदोलन एवं सरकार की नीतियों के खिलाफ कई किस्म के बनते संयुक्त मोर्चे ने रघुवर सरकार को सोचने को मजबूर कर दिया और सरकार ने इन सभी से निपटने के लिए अपने परंपरागत ‘दमन’ अधिकार को अपनाया.

इसकी शुरुआत हुई 7 नवंबर 2017 से, 7 नवंबर 2017 को झारखंड में 13 जनसंगठनों (जिसमें कई मजदूर संगठन, महिला संगठन, युवा संगठन व विस्थापित संगठन शामिल थे) के जरिये बनाये गये ‘महान बोल्शेविक क्रांति शताब्दी समारोह समिति, झारखंड’ के द्वारा गिरिडीह में समारोह का आयोजन किया गया था, इस समारोह में उमड़ी भीड़ से डरकर सरकार ने ‘ भाकपा (माओवादी) के नेताओं के इशारे पर उग्र प्रदर्शन व सशस्त्र क्रांति छेड़ने संबंधी नारे लगाने’ का आरोप लगाकर ‘महान बोल्शेविक क्रांति शताब्दी समारोह समिति, झारखंड’ के संयोजक बच्चा सिंह (रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन ‘मजदूर संगठन समिति’ के केन्द्रीय महासचिव), सह-संयोजक दामोदर तुरी (विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजन समिति सदस्य), मजदूर संगठन समिति के वरिष्ठ नेता शहजाद अंसारी, कन्हाई पांडेय, गिरिडीह शाखा के अध्यक्ष प्रधान मुर्मू, सचिव अमित यादव, राजेन्द्र कोल, तुलसी तुरी, रंजीत राय, राजन तुरी, मनोज टुडू, दिलेश्वर कोल (कुल-12) पर नामजद व 800 अज्ञात पर मुफस्सिल थाना, गिरिडीह में कांड संख्या-386/17 धारा- 147, 148, 149, 341, 342, 323, 504, 506 एवं 353 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. यह मुकदमा झारखंड में आंदोलनकारी ताकतों को डरा नहीं सकी और सरकार की पुलिस मशीनरी से लड़ते-भिड़ते ‘महान बोल्शेविक क्रांति शताब्दी समारोह समिति, झारखंड’ ने 30 नवंबर 2017 तक 17 जगहों पर बोल्शेविक क्रांति की शताब्दी समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन किया. जनता के इस जुझारूपन को देखते हुए और फर्जी मुठभेड़ में मारे गये डोली मजदूर मोतीलाल बास्के के मामाले में अपनी व अपने सिपहसलार डीजीपी डीके पांडेय का गर्दन फंसता देख झारखंड सरकार ने झारखंड के आंदोलनकारियों की मुख्य आवाज बन कर उभर रहे ‘मजदूर संगठन समिति’ को भाकपा (माओवादी) का फ्रंटल संगठन बताते हुए 22 दिसंबर 2017 को प्रतिबंधित करने की घोषणा कर दी, जबकि ‘मजदूर संगठन समिति’ एक रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन (पंजीयन संख्या-3113/89) था एवं 1989 से ही पंजीकृत था.

मजदूर संगठन समिति पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही झारखंड सरकार ने मजदूर नेताओं पर राजकीय दमन अभियान तेज कर दिया. मजदूर संगठन समिति के कई कार्यालयों को सील कर दिया गया, केन्द्रीय कार्यालय सहित कई शाखाओं व केन्द्रीय नेताओं सहित कई शाखाओं के मजदूर नेताओं के बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया. गिरिडीह के मधुबन में मजदूर संगठन समिति के नेतृत्व में ‘डोली मजदूर कल्याण कोष’ से संचालित मजदूरों का, मजदूरों के लिये व मजदूरों के द्वारा नारे के आधार पर चलाये जा रहे ‘श्रमजीवी अस्पताल’ को भी सील करते हुए ‘डोली मजदूर कल्याण कोष’ के बैंक अकाउंट को भी फ्रीज कर दिया गया. त्रिपक्षीय समझौते (मजदूर संगठन समिति, जैन संस्था व जिला प्रशासन) के तहत ‘डोली मजदूर कल्याण कोष’ संग्रह कर रहे तीन मजदूर नेताओं व कार्यकर्त्ताओं अजय हेम्ब्रम, दयाचन्द हेम्ब्रम व मोहन मुर्मू को 24 दिसंबर 2017 को मधुबन से गिरफ्तार कर लिया गया और इन तीनों समेत मजदूर संगठन समिति के केन्द्रीय महासचिव बच्चा सिंह, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजन समिति सदस्य दामोदर तुरी (मजदूर संगठन समिति पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए झारखंड सरकार ने दामोदर तुरी को भी मसंस का मुख्य संचालक बताया था), मसंस के मधुबन शाखा के अध्यक्ष अजीत राय, सचिव थानुराम महतो, कोषाध्यक्ष द्वारिका राय, कार्यालय सचिव नारायण महतो एवं मांसु हांसदा पर मधुबन थाना कांड संख्या-28/17 के अधीन 17 सीएलए एवं 10/13 यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया और गिरफ्तार तीनों को गिरिडीह जेल भेज दिया गया, जो कि अभी तक जेल में ही बंद हैं.

मधुबन थाना में यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद 30 दिसंबर 2017 को बोकारो जिला के बोकारो थर्मल थाना में थाना कांड संख्या– 139/17 के अधीन धारा 17 (1) (2) सीएलए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. फिर 21 जनवरी 2018 को धनबाद जिला के कतरास थाना में थाना कांड संख्या 13/18 के अधीन 13 यूएपीए व 17 सीएलए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. इन दोनों मुकदमों में भी एक साजिश के तहत बच्चा सिंह और दामोदर तुरी के साथ स्थानीय नेताओं का भी नाम दर्ज किया गया.

15 फरवरी 2018 को रांची के एक हॉल में लोकतंत्र बचाओ मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद देश में विस्थापन विरोधी आवाज के रूप में उभर रहे व झारखंड में विस्थापितों की आवाज उठाने वाले प्रमुख नेताओं में से एक दामोदर तुरी को गिरफ्तार कर लिया गया और गिरिडीह जेल भेज दिया गया. झारखंड सरकार ने इनकी गिरफ्तारी को भी ‘अरबन माओइस्ट’ की गिरफ्तारी की तरह ही पेश किया. गिरिडीह जेल से जमानत मिलने के बाद अभी ये धनबाद जेल में बंद हैं.

1 मई 2018 को गिरिडीह के मुफस्सिल थानान्तर्गत एक गांव में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस समारोह समिति के बैनर तले ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ मन रहे 13 मजदूर नेताओं- कन्हाई पांडेय, प्रधाल मुर्मू, मसूदन कोल, डेलियन कोल, कालीचरण साव, रंजीत राय, गुजर राय, लखन कोल, धनेश्वर कोल, अरविन्द लाल टुडू, कोलेश्वर कोल, सीताराम सोरेन एवं राजेन्द्र कोल को गिरफ्तार कर लिया गया और मुफस्सिल थाना कांड संख्या- 144/18 के अधीन धारा 188, 124ए, 34 एवं 10/13 यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरिडीह जेल भेज दिया, जो कि अब तक गिरिडीह जेल में ही बंद हैं. ज्ञात हो कि इन सभी मजदूर नेताओं में से किसी पर भी पहले से किसी मुकदमे मे वारंट नहीं था. 7 नवंबर 2017 को इनमें से कुछ नेताओं पर मुकदमा दर्ज जरूर हुआ था, लेकिन उस मुकदमे में सभी ने जमानत ले लिया था. इन 13 मजदूर नेताओं को भी माओवादियों के शहरी चेहरे के बतौर ही झारखंड सरकार ने चित्रित किया.

मजदूर संगठन समिति पर झारखंड सरकार द्वारा प्रतिबंध की घोषणा के तुरंत बाद ही इसके नेता बच्चा सिंह ने रांची उच्च न्यायालय में ‘प्रतिबंध’ को चुनौती दी थी, लेकिन आज तक उसपर बहस नहीं हुई है. इस बीच बच्चा सिंह व अन्य नेताओं पर विभिन्न थानों में हुए मुकदमे में (सिर्फ बोकारो थर्मल में दर्ज हुए मुकदमे को छोड़कर) मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी पर रांची उच्च न्यायालय ने स्टे लगा दिया था. मजदूर संगठन समिति पर प्रतिबंध के बाद जहां-जहां भी इस यूनियन का सघन कार्य था, वहां प्रबंधन की मनमानी बढ़ने लगी थी और इसके खिलाफ मजदूरों का आक्रोश भी. फलतः मजदूरों ने जगह-जगह पर नये-नये नाम से मजदूर संगठन बनाकर आंदोलन प्रारंभ कर दिया और 1 मई 2018 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ व 5 मई 2018 को ‘मार्क्स का दो सौवां जन्मदिवस’ भी कई जगहों पर शानदार ढंग से मनाया. झारखंड सरकार ने इस सब के पीछे बच्चा सिंह का हाथ महसूस किया और उनकी गिरफ्तारी के लिये एक टीम बनाकर बोकारो पुलिस ने रात-दिन एक कर दिया. 31 मई 2018 को बच्चा सिंह अपने संगठन के केन्द्रीय सचिव दीपक कुमार के साथ बोकरो जिला के चन्दनकियारी के पर्वतपुर गांव में महावीर मंडल के घर में ठहरा हुआ था, वहीं से पुलिस ने अपने मुखबिर से सूचना पाकर रात के 11ः30-12ः00 बजे उनदोनों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पुलिस गिरफ्तारी से इंकार करती रही. 1 जून से ही सोशल साइट पर गिरफ्तारी की बात वायरल होने व 2 जून को बच्चा सिंह की पत्ना बबली देवी द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पति व उनके सहयोगी को कोर्ट में पेश करने की मांग करने अन्यथा कानूनी कार्रवाई की धमकी देने के बाद 3 जून की सुबह में बोकारो एसपी द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में दोनों नेताओं को सामने लाया गया और बाद में तेनुघाट जेल भेज दिया गया. लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी 2 जून को दिखायी. मालूम हो कि दीपक कुमार पर पहले से कोई मुकदमा ना होने के बावजूद भी मजदूर संगठन समिति का केन्द्रीय सचिव होने के कारण ही उन्हें भी जेल भेज दिया. झारखंड सरकार ने इन दोनों की गिरफ्तारी को भी ‘अरबन माओइस्ट’ के बतौर ही दिखाया.

इस प्रकार झारखंड में अब तक मजदूरों के बीच माओवादी विचारधारा के प्रचारक व संगठक का आरोप लगाते हुए 18 मजदूर नेताओं व कार्यतर्त्ताओं के साथ-साथ विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के नेता को भी मजदूर नेता बताते हुए खतरनाक काला कानून ‘यूएपीए’ के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है और अभी भी कई मजदूर नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. झारखंड सरकार इन गिरफ्तारियों के जरिये मजदूरों के अनन्त शोषण, दलितों-अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले, भूख से हो रही मौतों, जंगलों-पहाड़ों पर सेना के आर्मर यूनिट द्वारा मोर्टारों व रॉकेट लांचरों से बरसाये जा रहे गोलों व जंगलो-पहाड़ों पर रहनेवाली आदिवासी जनता के साथ पुलिस द्वारा किये जा रहे कुकृत्यों के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाना चाहती है और साथ ही 16-17 फरवरी 2017 को ‘मोमेंटम झारखंड’ में देशी-विदेशी पूंजीपतियों के साथ किये गये 210 एमओयू (210 एमओयू के तहत हजारों एकड़ जमीने पूंजीपतियों को सौंपी जानी है, जिससे लाखों लोग विस्थापित होंगे) को धरातल पर उतारना चाहती है.

-रूपेश कुमार सिंह, स्वतंत्र पत्रकार

(नोट- लेख में दर्ज थाना कांड संख्या व मजदूर नेताओं पर लगाया गया धारा विभिन्न अखबारों में छपे समाचार से लिया गया है.)