
नई दिल्ली। बाबा रामदेव व उमा भारती इन दिनों चर्चा में हैं. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बाबा रामदेव को चिट्ठी लिखकर नसीहत दी है कि वह कुछ भी ना बोला करें. यहां तक कह दिया कि जुमाल उनके राजनीतिक कैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन इस खबर को अलग ढंग से चलाने पर भारत के एक बड़े टीवी चैनल को भी उमा भारती ने नसीहत दी है. उमा भारती की चिट्ठी लिखने पर जमकर बवाल मचा है.
दरअसल, माजरा ऐसा है कि गंगा सफाई कार्यक्रम को लेकर बाबा रामदेव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व उमा भारती के साथ तुलना कर दी. लंदन की टीवी को बयान देने के बाद मामले ने तुल पकड़ ली. तुलना किये जाने की खबर से आहत केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने योग गुरू को पत्र लिखकर कहा है कि उनके मुंह से निकला ऐसा कोई भी जुमला उन्हें (उमा भारती) हानि पहुंचा सकता है. बाबा रामदेव को लिखे पत्र में उमा भारती ने कहा कि मुझे आपके द्वारा गंगा की विवेचना करते समय दो मंत्रियों की तुलना करना अजीब लगा.
आपको बता दें कि लंदन में एक टीवी चैनल से बातचीत में योगगुरू रामदेव ने गंगा स्वच्छता कार्यक्रम के संदर्भ में एक सवाल के जवाब में कहा था कि उमा जी की फाइल आफिस में अटक जाती है जबकि गडकरी जी की फाइल नहीं अटकती. इस खबर को एबीपी न्यूज ने भी चलाई लेकिन गुस्साई उमा भारती ने ट्विट कर लिखा कि, “आदरणीय @abpnewstv मैंने बाबा @yogrishiramdev को ‘वाणी पर संयम’ रखने जैसे शब्द नहीं लिखे हैं. मैं तो बाबा का बहुत आदर करती हूं. आप, बाबा रामदेव तथा सभी लोग उस पत्र को एक बार फिर से पढ़ें.”
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सुलतानपर। उतर प्रदेश में बसपा पार्टी के खिलाफ काम करने वालों नेताओं को एक-एक कर निकाल रही है. सोमवार को मिली खबर के अनुसार सुल्तानपुर के लंभुआ विधान सभा से पूर्व विधायक एवं मंत्री विनोद सिंह को बसपा से निकाल दिया गया है. इन पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया है.
आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश में मुसलमान व दलितों पर रासुका लगाने को लेकर रिहाई मंच ने आपत्ति जताई है. एक और मुसलमान पर रासुका लगाने पर प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है. सरकार के रवैये को देखते हुए कहा जा रहा है कि किसी खास जाति-समुदाय के लोगों को फंसाने की कोशिश हो रही है. रिहाई मंच ने सरायमीर तनाव के बाद रासुका के तहत फंसाए गए लोगों के परिजनों से मिलने के बाद रासुका की कारवाई को राजनैतिक कारवाई बताया.
बता दें कि रविवार 01 जुलाई को पुलिस ने बताया कि 10 सदस्यों की आंखें और मुंह कपड़ों से बंधे हुए थे और उनके शव झूल रहे थे जबकि 77 साल की एक महिला फर्श पर मृत पाई गईं और उसकी आंखों और मुंह पर पट्टी नहीं बंधी थी. बच्चों के हाथ-पांव बंधे हुए थे.
नई दिल्ली। वैसे तो पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में शुरू हुआ, ऐसा कहा जाता है. लेकिन जानकारों का यह भी कहना है कि उससे पहले 1855 में ही झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी और इसमें हमारे बीस हजार से अधिक आदिवासी क्रांतिकारी मारे गए थे. इस याद में हम हर साल हूल दिवस को मनाते हैं.
डॉ. आंबेडकर भारतमाता की अवधारणा या भारत सभी भारतीयों का है, इस भावात्मक कथन में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते थे. उनका मानना था कि भारत के भीतर एक बहिष्कृत भारत है. इसी के चलते उन्होंने भारतमाता या भारतीय मातृभूमि के बरक्स बहिष्कृत भारत की अवधारणा रखी. उन्होंने अपने जीवन के उद्देश्य की घोषणा इन शब्दों में किया, “युगों से दबे हुए दरिद्र बहिष्कृतों को बंधनमुक्त करना है.”
जयपुर। एक बार फिर असमाजिक तत्वों द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने की खबर सामने आई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में बाबा साहेब डॉ. बीआर अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़ दी थी. घटना की जानकारी मिलते ही रात में ही भीम सैनिक व अंबेडकर आंदोलनकारी सैकड़ों की संख्या में इकठ्ठे हो कर असमाजिक तत्वों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.