उमा भारती ने रामदेव को लिखी चिट्ठी, मचा बवाल

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नई दिल्ली। बाबा रामदेव व उमा भारती इन दिनों चर्चा में हैं. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बाबा रामदेव को चिट्ठी लिखकर नसीहत दी है कि वह कुछ भी ना बोला करें. यहां तक कह दिया कि जुमाल उनके राजनीतिक कैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन इस खबर को अलग ढंग से चलाने पर भारत के एक बड़े टीवी चैनल को भी उमा भारती ने नसीहत दी है. उमा भारती की चिट्ठी लिखने पर जमकर बवाल मचा है.

दरअसल, माजरा ऐसा है कि गंगा सफाई कार्यक्रम को लेकर बाबा रामदेव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व उमा भारती के साथ तुलना कर दी. लंदन की टीवी को बयान देने के बाद मामले ने तुल पकड़ ली. तुलना किये जाने की खबर से आहत केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने योग गुरू को पत्र लिखकर कहा है कि उनके मुंह से निकला ऐसा कोई भी जुमला उन्हें (उमा भारती) हानि पहुंचा सकता है. बाबा रामदेव को लिखे पत्र में उमा भारती ने कहा कि मुझे आपके द्वारा गंगा की विवेचना करते समय दो मंत्रियों की तुलना करना अजीब लगा.

आपको बता दें कि लंदन में एक टीवी चैनल से बातचीत में योगगुरू रामदेव ने गंगा स्वच्छता कार्यक्रम के संदर्भ में एक सवाल के जवाब में कहा था कि उमा जी की फाइल आफिस में अटक जाती है जबकि गडकरी जी की फाइल नहीं अटकती. इस खबर को एबीपी न्यूज ने भी चलाई लेकिन गुस्साई उमा भारती ने ट्विट कर लिखा कि, “आदरणीय @abpnewstv मैंने बाबा @yogrishiramdev को ‘वाणी पर संयम’ रखने जैसे शब्द नहीं लिखे हैं. मैं तो बाबा का बहुत आदर करती हूं. आप, बाबा रामदेव तथा सभी लोग उस पत्र को एक बार फिर से पढ़ें.”

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बीजेपी के गढ़ में बसपा उतारेगी ओबीसी कैंडिडेट

रायपुर। चुनाव नजदीक आते हीं बसपा ने अपनी रणनीति के अनुसार काम शुरू कर दिया है. पिछड़ा वर्ग को लेकर राजनीति करने वाली बसपा ने ओबीसी कार्ड फेंक दिया है. छत्तीसगढ़ रमन सिंह के गढ़ में बसपा ओबीसी नेताओं के सहारे चुनाव लड़ेगी. पिछड़ा वर्ग में पकड़ बनाने और उन्हें साधने के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा की सीटों पर ज्यादा से ज्यादा ओबीसी कैंडिडेट उतारने की रणनीति बनाई है.

पार्टी नेताओं का कहना है कि पिछड़ा वर्ग के लिए प्रदेश में बसपा से बेहतर विकल्प नहीं है. राजधानी रायपुर में रविवार को बसपा के पिछड़ा वर्ग चेतना सम्मेलन में प्रदेश के ओबीसी वर्ग को साधने का प्रयास किया गया. सम्मेलन को प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 52 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई. चेतना सम्मेलन में पार्टी ने दावा किया कि अगर बसपा सत्ता में आई तो वो छत्तीसगढ़ के पिछड़ा वर्ग की आरक्षण समेत सभी संवैधानिक मांगों को पूरा करेगी.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश बाजपेयी ने बताया कि पिछड़ा वर्ग को पार्टी से जोड़ने के लिए इस बार विधानसभा चुनाव में ओबीसी उम्मीदवारों को ज्यादा से ज्यादा सीटों पर उतारने की रणनीति बनाई जा रही है. क्योंकि चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां केवल चुनाव के वक्त ही ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए झूठे वायदे करती है. जबकि बसपा ओबीसी वर्ग की भलाई के लिए जमीनी और ठोस काम करने पर भरोसा करती है. बहुजन समाज पार्टी राज्य के सभी 27 जिलों में पिछड़ा वर्ग चेतना सम्मेलन का आयोजन करेगी. जुलाई में पार्टी की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी होना है.

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बसपा ने पूर्व मंत्री को पार्टी से किया बाहर

सुलतानपर। उतर प्रदेश में बसपा पार्टी के खिलाफ काम करने वालों नेताओं को एक-एक कर निकाल रही है. सोमवार को मिली खबर के अनुसार सुल्तानपुर के लंभुआ विधान सभा से पूर्व विधायक एवं मंत्री विनोद सिंह को बसपा से निकाल दिया गया है. इन पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया है.

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव के दौरान विनोद सिंह खुद को व्यवस्त बताकर बीजेपी में जगह बनाने की कोशिश में थे. इस बात की जानकारी होने पर पार्टी ने जांच कराई. बसपा की ओर से त्रिस्तरीय जांच के बाद शनिवार को उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया.

जांच रिपोर्ट पर विचार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सिंह को निष्काषित करने का निर्देश दिया.

पार्टी जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश गौतम ने रविवार को बताया कि जो लोग पार्टी को चारागाह समझते है उनका यही हश्र होगा. बहुजन समाज पार्टी में रहना है तो कार्यकताओं का सम्मान करना होगा. धनबल पर कार्यकर्ता काम नही करेगा. उन्होंने बताया कि सुल्तानपुर के बसपा सरकार में पर्यटन मंत्री रहे विनोद सिंह को मनमानी करने और अनुशासनहीनता पर कई बार चेतावनी दी गई लेकिन वह पार्टी विरोधी गतिविधयों में लगकर तानाशाही रवैया अपनाये हुए थे.

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दंगाईयों को ‘आजादी’, मुसलमानों पर रासुका: रिहाई मंच

आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश में मुसलमान व दलितों पर रासुका लगाने को लेकर रिहाई मंच ने आपत्ति जताई है. एक और मुसलमान पर रासुका लगाने पर प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है. सरकार के रवैये को देखते हुए कहा जा रहा है कि किसी खास जाति-समुदाय के लोगों को फंसाने की कोशिश हो रही है. रिहाई मंच ने सरायमीर तनाव के बाद रासुका के तहत फंसाए गए लोगों के परिजनों से मिलने के बाद रासुका की कारवाई को राजनैतिक कारवाई बताया.

रासुका पीड़ित-1

रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान आसिफ के पिता इफ्तेखार अहमद बताते हैं कि, आसिफ रोज़ की तरह वह अपनी सिलाई की दुकान पर गया था, दोपहर में खाना खाने के लिए घर भी आया. 28 अप्रैल की शाम को जब उसका भाई सब्ज़ी लेने के लिए गया तो उसी दौरान 6:30 बजे करीब पुलिस उसे और उसके भाई को दुकान से ही उठा ले गई. आसिफ के पिता 3-4 महीने के बच्चे का हवाला देते हुए कहते हैं कि अगर वह बवाल में रहता तो दुकान खोलने क्यों जाता? वे कहते हैं कि तीन साल पहले वह मलेशिया छोड़कर आया कि अपने देश आकर दो जून की रोज़ी रोटी कमाएगा. पर उसे क्या मालूम था कि उसे जेल की रोटी तोड़नी पड़ेगी. रासुका के बारे में पूछने वो बोलते हैं कि पुलिस नोटिस देकर गई है और कहा है कि साल भर जेल में बंद रहेगा. 10 जून को रासुका लगाया गया और 18 जून को नोटिस मिली.

रासुका पीड़ित-2

रासुका में निरुद्ध राजापुर सिकरौर गांव के 24 वर्षीय शारिब के पिता मो० शाहिद बताते हैं. गिरफ्तारी से 15-20 दिन पहले ही शारिब का निकाह हुआ था. शारिब के मामा ज़िकरुल्लाह ने अपने दोस्त की शादी में मेहमानों को खिलाने-पिलाने के लिए उसे और उसके भाई वासिक को बुलाया था. फैज़ान कटरा स्थित अपने मामू के घर अभी दोनों भाई पहुंचे ही थे कि हंगामा सुनकर वहीं रुक गए. करीब एक बजे करीब पुलिस ने उन्हें उठा लिया वे कहते हैं कि बहुत मुश्किल से 19 जून को शारिब ज़मानत पर रिहा होने वाला था कि देर रात पुलिस वालों ने बैरक में जाकर जगाकर दस्तखत करवाए और उस पर रासुका लगा दिया. शारिब पर भी 10 जून को रासुका लगाया गया और 18 जून को नोटिस हुई.

रासुका पीड़ित-3

प्रनिधिमंडल रासुका में निरुद्ध राग़िब के गांव सुरही पहुंचा तो वहां मालूम हुआ कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और उसके भाई विदेश में रह अपना परिवार चलाते हैं। राग़िब के भतीजे दानिश रासुका के बारे में पूछने पर बताते हैं कि आज सुबह ही पुलिस वाले आए थे और उसके भाई ज़ाकिर को एक कागज़ दिया है. उसे नहीं मालूम कि उसमें क्या है. राग़िब की गिरफ्तारी के बारे में पूछने पर बताते हैं कि वह हर रोज़ की तरह सुबह मवेशी खाने पर अपने सैलून गया जहां से उसे गिरफ्तार किया गया. वह पहले किराए के एक कमरे में सैलून चलाता था. बहुत मश्किल से उसने अपनी खुद की गुमटी बना ली थी. परिवार को समझ में नहीं आ रहा है कि लम्बी अवधि तक उसकी हिरासत के बाद घर कैसे चलेगा और मुकदमा किस तरह लड़ा जाएगा.

पुलिस का सच!

सरायमीर तनाव में गंभीर रूप से घायल महीने भर जेल काटने के बाद घर लौटे अबूज़र से भी मुलाकात हुई. वह बताते हैं कि वे अपने दोस्त अहमद के साथ सरायमीर से खरेवां मोड़ शादी में जा रहे थे तभी मची अफरातफरी में वे फैज़ान कटरे में चले गए जहां कटरे एंव मुख्यमार्ग के कुछ दुकानदारों ने खुद को बचाने के लिए कटरे में जाकर ताला बंद कर लिया था. पुलिस ने ताला तोड़कर 12 लोगों को गिरफ्तार कर बहुत मारा पीटा. अबूज़र के साथ गए अहमद को तो एसएचओ ने पुरानी किसी बात को लेकर गाड़ी में से निकाल कर बुरी तरह मारा पीटा. यह मारपीट तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी के निर्देश पर हो रही थी. अबूज़र की स्पलेंडर गाड़ी को तोड़ दिया और गिरफ्तारशुदा सभी को थाना रानी की सराय में रखा गया. वहां भी इन्हें मारा पीटा गया. दो महीने बाद भी कूल्हे और हाथ की गंभीर चोटों को दिखाते हुए अबूज़र बताते हैं कि उन्होंने पुलिस से इलाज के लिए कहा लेकिन उनकी नहीं सुनी गई और दूसरे दिन उनको कोर्ट में पेश कर दिया गया.

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले आरोपी अमित साहू पर रासुका लगाने की मांग को नकारते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों पर रासुका लगाना राजनीति से प्रेरित है. सरायमीर तनाव में 34 नामज़द व्यक्तियों पर मुकदमा और 18 गिरफ्तारियों के बाद रिहाई से ठीक पहले 3 लोगों पर रासुका की कारवाई पुलिस प्रशासन की बदले की भावना से की गई कारवाई है. तत्कालीन थानाध्यक्ष राम नरेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने न सिर्फ हिंदू समाज पार्टी के अमित साहू जैसे साम्प्रदायिक व्यक्ति का संरक्षण किया बल्कि पुलिस और मुस्लिम समाज के बीच के संवाद को पुलिसिया कारवाई कर साम्प्रदायिक तनाव का रूप दे दिया. सरायमीर तनाव में जिस तरीके से पुलिस ने खुलेआम तोड़फोड़ और हमले किए जिसके वीडियो मौजूद हैं, वह तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी की भूमिका को भी संदिग्ध बना देती है.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों, राजीव यादव, लक्ष्मण प्रसाद, मसीहुद्दीन संजरी, अनिल यादव, तारिक शफीक, शाहआलम शेरवानी और सालिम दाऊदी ने शेरवां, राजापुर सिकरौर, सुरही, खरेवां और सरायमीर में पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की. Read Also-चंद्रशेखर रावण पर रासुका तीन महीने और बढ़ी
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तोता खरीदने वाली महिला बनी ‘उल्लू’

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नई दिल्ली। एक औरत का पक्षी प्रेम उसको संकट में डाल दिया है. कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में एक दिलचस्प मामला सामने आया है. एक तोता खरीदने के लिए महिला को 71,500 रुपए देने पड़े फिर भी तोता पालने का सपना अधूरा ही रह गया. इसके बाद महिला ने पुलिसा का दरवाजा खटखटाया है.

बंगलूरू के सरजापुर रोड के विजयकुमार लेआउट इलाके में एक महिला तोता पालना चाहती थी. तोता पालने के चक्कर में महिला ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होकर 71,500 रुपए गंवा दिए. महिला ने साइबर क्राइम में मामले की शिकायत दर्ज कराई है.

श्रीजा नाम की महिला ने पुलिस को बताया है कि वह ऑनलाइन तोता खरीदने के लिए ऑनलाइन सर्च कर रही थी. इस दौरान कई वेबसाइट आदि उसने खंगाले थे. उसी दौरान बॉबी नाम का व्यक्ति से उससे संपर्क किया. फिर तोता खरीदने की बातचीत हुई और उसने अपना फेसबुक और वॉट्सऐप नंबर भी दिया. उसे लगा कि बॉबी उसे तोता दिला देगा. बॉबी से सौदा तय करने के बाद श्रीजा ने बॉबी के विभिन्न बैंक खातों में 21 से 23 जून के बीच पैसे ट्रांसफर किए. रकम खाते में जाने के बाद भी श्रीजा को तोता नहीं मिला. इसके बाद जब श्रीजा ने बॉबी से संपर्क किया तो कोई जवाब नहीं मिला. फिर उसे लगा कि बॉबी ने उससे उल्लू बना दिया है.

वह 25 जून को साइबर क्राइम पुलिस के पास पहुंची और केस दर्ज कराया. पुलिस ने श्रीजा की शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है. पुलिस उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है, जिसमें श्रीजा ने रुपये ट्रांसफर किए हैं.

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दिल्ली के घर में 11 लटकती लाशें, दो डायरी में मौत की दास्तां

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नई दिल्ली। रविवार को दिल्ली वालों की आंखे खुली तो एक खबर ने सन्न कर दिया. देश की राजधानी में एक ही घर में 11 लाशें मिली और वो भी लटकती हुई. देखते ही देखते खबर आग की तरह फैल गई और जो सुनता खामोश हो जा रहा था. इनके मौत की अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं यानी कि अभी तक मौत का कारण अज्ञात बना हुआ है. लेकिन मृतक परिवार के घर से बरामद दो डायरी 11 लाशों की कहानी को बता रही है.

सोमवार को मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में जिन 6 लोगों का पोस्टमॉर्टम हुआ हैं उनकी मौत का कारण हैंगिंग है. इसके अलावा चोट का कोई निशान नहीं है. जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि मौत के दौरान कोई हाथापाई या जबरन नहीं हुई है. पुलिस के  साथ-साथ आम लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. जिसमें कि मोक्ष पाने व तंत्र-मंत्र की बात सबका ध्यान खींच रही है.

वही तरीका दोनों रजिस्टर में लिखा

पुलिस सूत्रों से कई जानकारियां मिली हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जहां 10 लोगों के शव लटके हुए मिले, उसके पास ही एक कमरे से 2 रजिस्टर बरामद हुए हैं, जिस तरह से मौत हुई है वही तरीका दोनों रजिस्टर में लिखा गया है जिसमें मुंह बांधने और हाथ बांधने का भी ज़िक्र है. दोनों रजिस्टर में मौत और मोक्ष को लेकर एक कहानीनुमा लंबा लेख है, जिसमें किसी आध्यात्मिक गुरु का नाम नहीं है. लेकिन मौत की क्रियाओं को लेकर एक बड़ा हिस्सा है. पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रजिस्टर में लिखी हैंड राइटिंग परिवार में से किस की है. क्राइम ब्रांच गुत्थी सुलझाने में जुटी है.

संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक कुमार ने बताया, ‘हमें हाथ से लिखे नोट मिले हैं जिनमें विस्तार से बताया गया है कि हाथ और पांव किस तरह बांधे जाएं. सूत्रों का कहना है कि घर में मिली डायरी में भी कई जगह जिक्र है कि हरि की प्राप्ति कैसे होगी. हरि भगवान किस दिन मिलेंगे. वहीं जेल में बंद इस बाबा पर शक करने की पुलिस की दूसरी और पुख्ता वजह ये भी है कि बाबा पर पहले भी तंत्र-मंत्र साधना करने के आरोप लगते रहे हैं.

बता दें कि रविवार 01 जुलाई को पुलिस ने बताया कि 10 सदस्यों की आंखें और मुंह कपड़ों से बंधे हुए थे और उनके शव झूल रहे थे जबकि 77 साल की एक महिला फर्श पर मृत पाई गईं और उसकी आंखों और मुंह पर पट्टी नहीं बंधी थी. बच्चों के हाथ-पांव बंधे हुए थे.

सभी 11 मृतकों की आंखों को उनके रिश्तेदारों के कहने पर दान किया गया. अब पोस्टमॉर्टम के बाद सभी का अंतिम संस्कार एक साथ कश्मीरी गेट के पास निगमबोध घाट पर होगा, क्योंकि इतने शव एक साथ राजस्थान के पैतृक गांव ले जाना आसान नहीं है. वैसे पुलिस इस मामले को लेकर पूछताछ कर रही है. फिलहाल हत्या का कारण अस्पष्ट है.

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दलित-मुस्लिम की शादी से भड़की पंचायत ने दी ऐसी सजा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न को लेकर एक और शर्मनाक मामला सामने आया है. हाल ही में बुलंदशहर में एक दलित युवक व मुस्लिम लड़की के शादी होने पर गांव के लोग भड़क गए हैं. इसके बाद दलित व्यक्ति के परिवार को प्रताड़ित किया गया. पीड़ित का आरोप है कि भरी पंचायत में उसे बेइज्जत करते हुए थूक कर चाटने को कहा गया.

पीड़िता परिवार का कहना है कि ‘पंचायत की बैठक के दौरान मुझे थूक चाटने को कहा गया. साथ ही मुझे गांव छोड़कर चले जाने का भी आदेश दिया गया.’ उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत ने मेरी पत्नी और बेटी को नग्न कर गांव में घुमाने का भी फरमान सुनाया है जिसके बाद मैने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

मामला सामने आने पर जिले के एसपी देहात ने कहा, ‘हमें एक दलित शख्स की तरफ से शिकायत मिली है कि उसे थूककर चाटने को कहा गया क्योंकि उसके बेटे ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की है. हम जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे.’ इस घटना के बाद पीड़ित परिवार दहशत में है और नव दंपति को छुपाकर रखा गया है.

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मोदी के चहेतों का पैसा स्विस बैंक में जमाः मायावती

लखनऊ। कालाधन को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है. स्विस बैंक में भारतीय पूंजीपतियों के जमा धन में पचास प्रतिशत वृध्दि को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है. मायावती ने साफ तौर पर कहा कि स्विस बैंक में जमा पैसा मोदी जी के चहेतों का है जिसको रोकने में भाजपा सरकार विफल हुई है.

मायावती का कहना है कि मोदी सरकार विफलताओं का श्रेय लेना क्यों नहीं चाहती है. आम जनता का पैसा लेकर फरार भगोड़ों व स्विस बैंक में बढ़ता पैसा बीजेपी की साफ नीयत व सही विकास की पोल खोल रहा है. मायावती ने यहां एक बयान में आरोप लगाते हुए पूछा कि ‘भाजपा के चहेते भारतीय पूंजीपतियों के स्विस बैंक में जमा धन में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, तो क्या इसका श्रेय भाजपा एण्ड मोदी कम्पनी लेना पसन्द नहीं करेंगे?’ उन्होंने कहा कि वैसे देशहित का मूल प्रश्न यह है कि भारत में कमाया गया धन विदेशी बैंकों में क्यों जमा है?

मोदी सरकार यह अपराध स्वीकार करे…

आगे तीखा सवाल दागते हुए उन्होंने कहा कि क्या मोदी सरकार यह अपराध स्वीकार करने को तैयार है कि विदेशी बैकों में जमा देश का कालाधन वापस लाकर उसे देश की गरीब जनता के घर 15 से 20 लाख रुपये देने के चुनावी वायदे पूरी तरह फर्जी साबित हुये हैं. बसपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों ने अमीर को अमीर और गरीब को महागरीब बना दिया है.

साथ ही विदेश यात्रा को लेकर महिमामंडन करने वाली पीएम मोदी को पता होना चाहिए कि उनके करीबी अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रंप किस तरह अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है. इन घटनाक्रमों पर केन्द्र सरकार की खामोशी उसकी विफलता और कमजोरी को ही साबित करती है. उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार अमेरिका में भारतीय पासपोर्ट धारकों के हित तथा सुरक्षा की गारण्टी लेकर इस सम्बन्ध में तत्काल कदम उठाये. इस दौरान मंदसौर की घटना का निंदा करते हुए दोषियों को कठोर सजा दिलाने की बात भी कही.

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20 हजार आदिवासी क्रांतिकारियों का पहला स्वतंत्रता संग्राम

नई दिल्ली। वैसे तो पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में शुरू हुआ, ऐसा कहा जाता है. लेकिन जानकारों का यह भी कहना है कि उससे पहले 1855 में ही झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी और इसमें हमारे बीस हजार से अधिक आदिवासी क्रांतिकारी मारे गए थे. इस याद में हम हर साल हूल दिवस को मनाते हैं.

देश आज इनके शहादत याद कर रहा है.

30 जून, 1855 को 400 गांवों के करीब 50 हजार आदिवासी भगनाडीह गांव पहुंचे और आंदोलन की शुरुआत हुई. इसी सभा में यह घोषणा कर दी गई कि वे अब मालगुजारी नहीं देंगे. इसके बाद अंग्रेजों ने सिद्धू, कान्हू, चांद तथा भैरव- इन चारों भाइयों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. जिस दरोगा को चारों भाइयों को गिरफ्तार करने के लिए वहां भेजा गया था, संथालियों ने उसकी गर्दन काट कर हत्या कर दी. इस दौरान सरकारी अधिकारियों में भी इस आंदोलन को लेकर भय पैदा हो गया था.

आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए मार्शल लॉ लगा दिया गया. आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी के लिए अंग्रेज सरकार ने पुरस्कारों की भी घोषणा की थी. बहराइच में अंग्रेजों और आंदोलनकारियों की लड़ाई में चांद और भैरव शहीद हो गए. प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार हंटर ने अपनी पुस्तक ‘एनल्स ऑफ रूलर बंगाल’ में लिखा है, ‘संथालों को आत्मसमर्पण की जानकारी नहीं थी, जिस कारण डुगडुगी बजती रही और लोग लड़ते रहे.’ जब तक एक भी आंदोलनकारी जिंदा रहा, वह लड़ता रहा. इस युद्ध में करीब 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जान दी थी। सिद्धू और कान्हू के करीबी साथियों को पैसे का लालच देकर दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया और फिर 26 जुलाई को दोनों भाइयों को भगनाडीह गांव में खुलेआम एक पेड़ पर टांगकर फांसी की सजा दे दी गई.

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दलित युवक के पेट में मारी गोली

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक दलित युवक को गोली मारकर मौत के घाट उतारने की कोशिश हुई. शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार कोतवाली पट्टी इलाके के धरौली नहर के समीप एक दलित युवक को गोली मारने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. पुरानी रंजिश को लेकर घटना को अंजाम देने की बात कही जा रही है.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक आसपुर देवसरा के दियांवा गांव निवासी कृष्ण कुमार गौतम पुत्र भगवानदीन का आरोप है कि वह घर से देवसरा बाजार बाइक से जा रहा था. दोपहर ढाई बजे के करीब धरौली नहर पुलिया पर पीछे से दो बाइक से आए गांव के ही चार लोगों ने उसे रोक लिया और बतकही के दौरान ही किसी ने तमंचे से फायर कर दिया. गोली उसके पेट में लगी. फौरन उसे सीएचसी अमरगढ़ ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन जांच में फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई. कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पुराने मुकदमे को लेकर रंजिश है. तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी जबकि पीड़ित का परिवार कह रहा है कि उसको गोली मारी गई है.

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मंदसौर रेपः बीजेपी MLA का शर्मनाक करतूत

इंदौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में सात साल की मासूम के साथ हुई बर्बरता पर पूरा देश आक्रोशित है, रो रहा है तो वहीं बीजेपी के विधायक ने घटियापंती दिखाई है. विधायक के इस काम के बाद लोगों में जमकर गुस्सा फूटा है. सोशल मीडिया पर लोग इसकी कड़ी निंदा कर रहे हैं.

बच्ची के बेसुध माता-पिता ने हाथ जोड़ लिए

माजरा यह है कि बीजेपी के विधायक सुधीर गुप्ता पीड़ित बच्ची की तबीयत का जायजा लेने इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल पहुंच गए. शुक्रवार को तड़पती बच्ची को देखने के बाद भी विधायक साहब को इज्जत कराने की याद आई. फिर क्या था तपाक से बच्ची के माता-पिता से बोल पड़े कि वे मंदसौर के विधायक महोदय का धन्यवाद करें, क्योंकि वह उनसे मिलने अस्पताल तक आए हैं. इस पर बच्ची के बेसुध माता-पिता ने विधायक सुधीर गुप्ता के सामने हाथ जोड़ लिए. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कहा, ‘विधायक जी को धन्यवाद बोलिए, स्पेशल आपके लिए आए हैं.’

सीएम शिवराज सिंह चौहान के इस एमएलए के कारनामे ने साबित कर दिया कि वह घटियापंती करने में पीछे नहीं हैं. फिलहाल इस केस के लिए 15 सदस्यी टीम का गठन किया गया है. संभावना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा जल्द ही आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी. वैसे देश इस घटना के बाद बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा पर अड़ा हुआ है.

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‘निर्भया’ से भी बुरे हालात में 7 साल की मासूम, कहा-‘मुझे ठीक करो या मार दो’

नई दिल्ली। निर्भया या आसिफा की घटना के बाद मध्य प्रदेश के मंदसौर में हवस के हैवानों ने सात साल की बच्ची को शिकार बनाया. हैवानियत की हद को पार करते हुए दरिंदों ने तीसरी क्लास में पढ़ने वाली सात साल की बच्ची के साथ रेप किया फिर रॉड के जरिए उसके अंतड़ियों को बाहर निकाल दिया और भी ना जानें क्या-क्या यातनाएं दी.

बच्ची को मरा हुआ समझकर फेंक गए. लेकिन कुछ लोगों की नजर पड़ी तब जाकर बच्ची को  इंदौर के महाराजा यशवन्तराव होलकर चिकित्सालय (एमवाय अस्पताल) में भर्ती कराया गया. इस सात साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत के बाद बच्ची को बचाना मुश्किल है फिर भी डॉक्टरों की टीम हर संभव प्रयास कर रही है. बच्ची के कुछ अंतड़ी को काटकर निकाला गया. बच्ची शुक्रवार को दर्द से इतना तड़प रही थी कि उसने तड़पती-कराहती आवाज में कहा कि “मां मुझे ठीक कर दो या मार डालो.”

बचाना सबसे बड़ी चुनौती…

डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के जख्मी अंगों का ऑपरेशन किया जा चुका है. अब उसे संक्रमण से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होगी. घाव भरने में दो हफ्ते का समय लग सकता है. जिसके बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है. बच्ची का इलाज कर रहे पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजेश लाहोटी ने बताया कि अब उसकी हालत खतरे से बाहर है. उन्होंने उम्मीद जताई कि घाव ठीक होने के बाद वह सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी बिता सकेगी.

शव गांव में नहीं दफनाने देंगे

बाल आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान बच्ची का हाल जानने अस्पताल पहुंचे. उन्होंने पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही. सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलना चाहिए. विधायक उषा ठाकुर ने आरोपी को फांसी दिए जाने की मांग की. वहीं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि मामले की गहन जांच हो. मंदसौर में सात साल की बच्ची के साथ हैवानियत करने वाला दूसरा आरोपी आसिफ शुक्रवार को गिरफ्तार हो गया. उसने कबूल किया कि वे बच्ची को लड्डू खिलाने का लालच देकर ले गए थे. मामले के आरोपी इरफान के गांव रिंगनोद के निवासियों ने कहा है कि फांसी के बाद इरफान का शव गांव में नहीं दफनाने देंगे.

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चौकीदार उमेश पासवान की कविता संग्रह को साहित्य अकादमी पुरस्कार

PC-bbc

नई दिल्ली। बिहार के मधुबनी जिला के लौकही थाना के चौकीदार उमेश पासवान की कविता को गांव-घर में कोई नही सुनता है. लेकिन कविता को अपन जिंदगी मानने वाले उमेश पासवान पुलिसिया नौकरी से समय निकालकर गंवई जीवन को अपने शब्दों में पिरोते हैं और अपनी मां को जबरन सुनाते फिरते हैं. इनकी लग्न रंग लाई और उमेश को उनके कविता संग्रह ‘वर्णित रस’ के लिए मैथिली भाषा में साल 2018 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिला है.

उमेश पासवान नवटोली गांव के चौकीदार हैं. गांव के माहौल में जो देखते हैं, वो लिख देते हैं. 34 साल के उमेश पासवान मैथिली भाषा में साल 2018 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार पाकर खुश हैं. 22 भाषाओं में मिलने वाला साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 35 साल से कम उम्र के साहित्यकार को मिलता है. विद्यानाथ झा मैथिली भाषा की कैटेगरी में अवॉर्ड तय करने वाली तीन सदस्यीय ज्यूरी मेंबर में से एक हैं.

उमेश के जीवन के उतार-चढ़ाव ने उनकी कविता को जन्म दिया. इनके पिता खखन पासवान चौकीदार की नौकरी करते थे और मां अमेरीका देवी को खेतों में मज़दूरी करती हैं. बाद में पिता खखन पासवान को लौकही थाने में चौकीदार की नौकरी मिली जो उनकी मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर उमेश को मिल गई.

साहित्य अकादमी यहां कोई नहीं समझता…

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उमेश बताते भी हैं, “साहित्य अकादमी यहां कोई नहीं समझता. हम मधुबनी, दिल्ली, पटना सब जगह अपनी कविता सुनाते हैं, लेकिन हमारे गांव में कोई नहीं सुनता. जब किसी ने नहीं सुना तो हमने कांतिपुर एफएम और दूसरे रेडियो स्टेशनों पर कविता भेजनी शुरू की ताकि कम से कम रेडियो के श्रोता तो मेरी कविता सुनें.” कांतिपुर एफ़एम नेपाल से प्रसारित होने वाला रेडियो स्टेशन है. दो बच्चों के पिता उमेश के अब तक तीन कविता संग्रह ‘वर्णित रस’, ‘चंद्र मणि’, ‘उपराग’ आ चुके हैं. उमेश मैथिली साहित्य में बहुत कुछ लिखना चाहते हैं इसके लिए वे चौकीदारी के साथ-साथ कविता लेखन को भी जारी रखेंगे.

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बिहार की ‘असली’ टॉपर मुसहर गर्ल की कहानी

पटना। बिहार का रिजल्ट आने के बाद मीडिया का ध्यान केवल टॉपर पर रहता है. लेकिन इसमें से कई ऐसे स्टूडेंट होते हैं जो काफी मशक्कत व बेड़ियों को तोड़कर शिक्षा प्राप्त करते हैं. इस साल 26 जून को बिहार में दसवीं का रिजल्ट आ गया. हर तरफ उन बच्चों का जिक्र है जो अपने राज्य या अपने जिले के टॉपर हैं. ऐसे में कहलगांव के पत्रकार प्रदीप विद्रोही एक अलग ही कहानी लेकर आये हैं.

यह कहानी महादलित जाति के कोमल की है.

कोमल को तो वैसे तो सिर्फ 42.4 फीसदी अंक आये हैं. मगर उसकी कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है कि 150 साल से बसे भागलपुर के घोघा के मुशहरी टोला की वह पहली मैट्रिक पास है. 50-60 घरों के उस टोले में आजतक कोई चौथी-पांचवी से आगे पढ़ ही नहीं पाया. लेकिन कोमल ने इस दायरे को तोड़कर मैट्रीक पास कर नई कहानी लिखी है.

कोमल का मैट्रिक पास होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जैसी उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है उसमें एक लड़की का पढ़ना जंग जीत लेने जैसा है. पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और मां ईट-भट्ठे पर काम करती है. घर में पांच बहनें और एक भाई है. मां बीमार हुई तो उसके बदले मजदूरी करने कोमल को ईट भट्ठे पर जाना पड़ता है. नहीं तो घर और भाई-बहनों को संभालना, खाना-पकाना. गांव का समाज इतना दंभी और जातिवादी है कि इस टोले के लोगों पर कई किस्म के जातिवादी प्रतिबंध लगाता है.

टॉपरों से बड़ी उपलब्धि

आज भी इस टोले में किसी की मौत होती है तो लोग शवयात्रा नहीं निकाल पाते. लाश को कपड़े में लपेट कर चुपके से ले जाना पड़ता है. इन परिस्थितियों में महादलित समुदाय की एक लड़की अगर पढ़कर मैट्रिक पास कर जाती है तो वह टॉपरों से बड़ी उपलब्धि है.

बड़ी बहनों ने उतनी पढ़ाई नहीं की, मगर कोमल इन तमाम बाधाओं के बीच लगातार पढ़ती रही. उस परिवेश के बीच जहां हर सुबह यह फिक्र की जाती थी कि शाम के खाने का किसी तरह इंतजाम हो जाये, वह रोज समय निकाल कर स्कूल जाती रही. और जब उसने दसवीं का फार्म भरा तो पता चला कि अपने टोले से इस परीक्षा में शामिल होने वाली वह पहली लड़की है.

फिर प्रदीप विद्रोही कोमल को लेकर फिक्रमंद हो गये.

प्रभात खबर में उसकी कहानी छापी तो कहलगांव के व्यापारी मदद करने के लिए तैयार हो गये. विद्रोही जब भी उधर से गुजरते एक कॉपी या कलम लेकर जाते और कोमल को दे आते. सीख देते कि पढ़ लो बेटा यही काम आयेगा.

कोमल को पढ़ने में मन लगता था और वह होशियार भी थी. मगर अपने जीवन की परेशानियों के बीच उसे इतना कम समय मिलता कि वह हमेशा डरती रहती कि पास कर पायेगी या नहीं. उसने कभी नहीं सोचा था कि टॉप करेगी. वह पास करना चाहती थी. और वह पास कर गयी, इतने से ही वह खुश है.

एक ओर जहां सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा देने वाले संपन्न घर के बच्चे टेन सीजीपीए लाने के लक्ष्य के साथ पढ़ाई करते हैं, वहीं बिहार जैसे राज्य स्तरीय बोर्ड का महत्व इसलिए है कि कोमल जैसी लड़कियां भी पढ़ लिखकर आगे बढ़ती है. इसलिए कोमल का मैट्रिक पास होना मेरे लिए किसी के सीबीएसई टॉप करने से बड़ी खबर है.

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इंग्लिश चैनल को पार करने वाले सत्येंद्र जाटव बनें एशिया के पहले दिव्यांग तैराक

नई दिल्ली। सत्येंद्र सिंह जाटव ने गरीबी व दिव्यांग होने के बावजूद भी समुद्र पार ना केवल देश-दुनिया में नाम रोशन किया है. सत्येंद्र सिंह का पैर काम नहीं करता है यानी कि 75 फीसदी तक इनका शरीर काम नहीं करता है. मुश्किल केवल इतनी ही नहीं थी ट्रेनिंग लेने के लिए पैसे नहीं थे. इन तमाम मुश्किलों को मात देने के बाद सत्येंद्र ने समुद्र को भी मात दे दी.

34Km का इंग्लिश चैनल पार

सत्येंद्र सिंह जाटव मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं. पैरास्विमर सत्येन्द्र ने ब्रिटेन और यूरोप के बीच के समुद्र यानि इंग्लिश चैनल को पार करके इतिहास रच दिया है. स्विमर सत्येन्द्र ने 12 घंटे और 26 मिनट में 34 किलोमीटर का इंग्लिश चैनल पार किया. रिले की तर्ज पर सत्येन्द्र ने अपने तीन साथियों के साथ ये उपलब्धि हासिल की है. महाराष्ट्र के चेतन राउत, बंगाल के रीमो शाह और राजस्थान के जगदीश चन्द्र ने तैराकी की. इसके साथ ही सत्येन्द्र इंग्लिश चैनल पार करने वाले एशिया के पहेल पैरास्विमर (दिव्यांग तैराक) भी बन गए है. यही नहीं पूरे एशिया में भी यह खिताब हासिल करने वाले वह पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं.

इससे पहले सत्येंद्र तैराकी का सबसे बड़ा खिताब विक्रम अवॉर्ड से नवाजे जा चुके हैं. इसके अलावा करीब तैराकी स्पर्धाओं में अबतक 16 मैडल जीते हैं.

पैरों ने दे दिया जबाव

दरअसल, सत्येंद्र बचपन से ही दिव्यांग हैं. जब वह 15 दिन के थे उन्होंने ग्लूकोज ड्रिप के रिएक्शन के चलते अपने पैर खो दिेए. गरीबी के कारण भी इनका इलाज ठीक ढंग से ना हो सका. सतेंद्र को बचपन से ही तैराकी का शौक था,  लेकिन दिव्यांगता के चलते शुरुआती दौर में उन्हें खासी समस्याओं का सामना करना पड़ा. पर कमजोर शरीर को अपन ताकत बनाई और सबसे पहले अपने गांव की बैसली नदी में तैराकी की. इसके बाद तैराकी का हुनर निखरने लगा लेकिन इसके लिए उनको ट्रेनिंग की जरूरत भी थी. इसलिए ट्रेनिंग के लिए सत्येंद्र ने अपने पास बचे घर को गिरवी रखकर दाव पर लगा दिया. सत्येंद्र ने पहला मैडल कलकत्ता में 2009 में हासिल किया. और आज इनके जज्बे को दुनिया सलाम कर रही है.

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कुएं से पानी भरने पर 25 दलितों को गांव से निकाला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। योगीराज में दलितों पर अत्याचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. फिलहाल खबर सामने आई है कि ऊंची जाति के कुएं से पानी भरने पर दलित परिवार को गांव से निकाल दिया गया है. दलित परिवार कई दिनों से बेघर होकर भटक रहे हैं. पुलिस प्रशासन की ओर से भी कोई मदद नहीं मिल पाई है. पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि गांव में घुसे तो ऊंची जाति के लोग जान से मार देंगे.

सबकुछ कर दिया बंद…

मामला टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र के सरकनपुर गांव का है. इस गांव में पानी की विकट समस्या है. नवभारतटाइम्स की खबर के मुताबिक दलित मुन्ना लाल वंशकार के परिवार की महिला ने पीने के लिए कुएं से पानी भर लिया. इसके बाद ऊंची जाति वाले बौखला गए और पंचातय बुलाई. इस पंचायती कंगारू कोर्ट ने फरमान जारी करने के बाद गांव की दुकानों से सामान खरीदना, किसीसे बात करना, चक्की वाला आटा नहीं पीसना बंद कर दिया. पंचायत ने फैसला लेकर दो साल के लिए गांव से बाहर कर दिया.

परिवार के अन्य सदस्य नाथूराम वंशकार का कहना है, ‘गांव के लोग छुआछूत मानते हैं, जिसके कारण हमें दो साल के लिए गांव से बाहर कर दिया गया है. गांव में खाने को कुछ मिल नहीं रहा, पानी भरने की मनाही है. हम पुलिस के पास गए, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई.’

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के जांच अधिकारी फूल सिंह परिहार का कहना है, ‘गांव से मारपीट की शिकायत आई थी. पंचायत या गांव से बाहर करने का कोई मामला नहीं है.’ जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि पीड़ित वंशकार परिवार के 23 सदस्य गांव नहीं जा पा रहे हैं, उनके घरों में ताले लटके हुए हैं. पुलिस के इसी रवैये से पीड़ित परिवार इंसाफ से वंचित रह गया है.

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शादी में नाच रहे दलित युवक को मारी गोली

प्रतीकात्मक फोटो

पटना। अब दलितों का नाचना-गाना भी रास नहीं आ रहा है. बिहार के मुजफ्फरपुर में शादी में नाचने को लेकर हुए विवाद में एक दलित युवक की गोली मार कर हत्या कर दी गई है. इसके बाद नाराज गांव वालों ने आधा दर्जन गाड़ियों को गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और लड़की वाले के घर पर भी हमला किया.

पुलिस ने गुरुवार 28 जून को बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. जिले के डीएसपी शंजर झा ने बताया कि माहौल तनावपूर्ण है लेकिन स्थिति पर काबू पा लिया गया है. जिला प्रशासन ने गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया है.

यह घटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले सरैया थाना क्षेत्र के अभीछपरा गांव की है. शादी में नाचने को लेकर हुए विवाद में बुधवार को नवीन मांझी नाम के शख्स को गोली मार दी गई. पुलिस के मुताबिक गांव के कुछ लोगों को शादी में नहीं नाचने की चेतावनी दी गई थी, जिसके बावजूद भी नवीन शादी में नाचने पर जोर दे रहा था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया और उसी दौरान नवीन को गोली मार दी. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

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डॉ. आंबेडकर ने गांधी से क्यों कहा कि मेरी कोई मातृभूमि नहीं है?

डॉ. आंबेडकर भारतमाता की अवधारणा या भारत सभी भारतीयों का है, इस भावात्मक कथन में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते थे. उनका मानना था कि भारत के भीतर एक बहिष्कृत भारत है. इसी के चलते उन्होंने भारतमाता या भारतीय मातृभूमि के बरक्स बहिष्कृत भारत की अवधारणा रखी. उन्होंने अपने जीवन के उद्देश्य की घोषणा इन शब्दों में किया, “युगों से दबे हुए दरिद्र बहिष्कृतों को बंधनमुक्त करना है.”

वे यहां तक कहते थे कि बहिष्कृत भारत के लोगों की कोई मातृभूमि नहीं है.

जब द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के बाद गांधी और अम्बेडकर की पहली मुलाकात हुई, तो गांधी ने अम्बेडकर से कहा कि डॉ. अम्बेडकर भारत आपकी मातृभूमि है, तो इसके जवाब में अम्बेडकर ने कहा कि “आप कहते हैं कि यह मेरी मातृभूमि है, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं कि मेरी कोई मातृभूमि नहीं है. जिस देश में कुत्ते-बिल्ली के समान भी हमें जीने नहीं दिया जाता, उन्हें जो सुविधाएं मिल रही हैं, वह भी हमें नसीब नहीं.

अस्पृश्यों को मानवता की चेतना और स्वाभिमान दोनों से वंचित कर दिया गया है. इस देश ने हमारे साथ इतना अक्षम्य अपराध किया है कि हम उसके विरोध में कितना बड़ा द्रोह का कार्य करें, फिर भी उसके पाप की जिम्मेदारी हमारे सिर पर नहीं आएगी. अतः कोई मुझे अर्राष्ट्रीय कह दे तो भी मैं बुरा नहीं मानूंगा, क्योंकि मेरे अराष्ट्रवाद के लिए ही मुझे अराष्ट्रीय कहते हैं. मेरे पाप के वे ही उत्तरदायी हैं. मेरा कोई दोष नहीं है. लेकिन मेरे पास सद्विवेक बुद्धि है.

मैं राष्ट्र या राष्ट्र धर्म का उपासक नहीं हूं, किंतु अपनी विवेक बुद्धि का उपासक हूं. जैसा आप कहते हैं कि मेरे द्वारा राष्ट्र की सेवा की जा रही है. उसका श्रेय मेरी राष्ट्र भक्ति को नहीं, बल्कि मेरी विवेक बुद्धि से पैदा प्रेम को है. जिस राष्ट्र में मेरी अछूत जनता की मानवता धूल के समान पैरों तले रौंदी जा रही है, उस मानवता को प्राप्त करने के लिए, इस राष्ट्र को यदि मैंने कोई हानि भी पहुंचाई है तो पाप नहीं पुण्य कहलायेगा….इस राष्ट्र को हानि पुहंचाए बिना अपनी अछूत जनता का कैसे कल्याण किया जा सकता है, इसी चिंता में मैं हूं.”

आज भी भारतीय राष्ट्र और राज्य किसी भी तरह दलितों का राष्ट्र या राज्य नहीं बना है. मैं अरूनधती राय के इस कथन से अक्षरश : सहमत हूं कि भारतीय राज्य कार्पोरेट उच्च जातियों का हिंदू राज्य है. इस देश के संसाधनों और असली सत्ता के मालिक उच्च जातीय हिंदू मर्द हैं. दलित, पिछड़े, आदिवासी, औरतें, अल्पसंख्य समुदायों पर उनका पूर्ण वर्चस्व और नियंत्रण है. अभी भी ये वंचित समुदायों का यह देश नहीं, इसके मालिक कार्पोरेट उच्च जातीय हिंदू मर्द हैं.

कोई यह पूछ सकता है कि इस देश का प्रधानमंत्री पिछड़े वर्ग (शूद्र) का और राष्ट्रपति दलित (अतिशूद्र) समुदाय का है, फिर भी इस देश के मालिक कैसे उच्च जातीय मर्द हैं. इसका सीधा और प्रत्यक्ष उत्तर यह है कि इस देश के इस समय दो ही शक्तियां चला रही हैं, उच्च जातीय कारपोरेट और उच्च जातीय संघ.

लेखक- रामू सिद्धार्थ, (लेखक पत्रकार हैं.)
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बाबासाहेब की प्रतिमा टूटने पर अम्बेडकरवादियों ने किया बवाल

जयपुर। एक बार फिर असमाजिक तत्वों द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने की खबर सामने आई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में बाबा साहेब डॉ. बीआर अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़ दी थी. घटना की जानकारी मिलते ही रात में ही भीम सैनिक व अंबेडकर आंदोलनकारी सैकड़ों की संख्या में इकठ्ठे हो कर असमाजिक तत्वों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

युवाओं में आक्रोश देखकर पुलिस ने प्रशासन मामला शांत कराने में जुटी रही लेकिन प्रतिमा नहीं लगने तक युवा गिरफ्तारी की मांग पर डटे रहे. हालांकि पुलिस गिरफ्तारी तो ना कर पाई लेकिन मामले पर काबू पाने के लिए आनन-फानन में रातों रात खंडित प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा लगवा दी.

भीम आर्मी ने एफआईआर दर्ज करवाई. शुक्रवार की सुबह तक तो एरिया पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. सुबह में फिर वापस भीम सैनिक इकट्ठे हुए और आरोपियों को गिरफ्तार करवाने के लिए पुलिस थाना मालवीयनगर जयपुर में सभी युवा साथियों ने विरोध प्रदर्शन करके दो एफआईआर दर्ज करवाई व अल्टीमेटम दिया कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक के लिए प्रतिमा के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे रहेंगे. इसके साथ ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. भीम आर्मी के अध्यक्ष अमित लहरी (जयपुर), भीम आर्मी प्रदेश सचिव भागचन्द बैरवा, निवाई राहुल कलोशिया सवाई माधोपुर आदि लोग मौजूद थे.

किशन संगत

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चारा घोटालाःलालू को कोर्ट ने दी बड़ी राहत, राजद में खुशी की लहर

File Photo

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में बड़ी राहत मिली है. लालू यादव अब करीब दो माह तक जेल नहीं जाएंगे. लालू चारा घोटाले के आरोप में रांची जेल में सजा काट रहे हैं, लेकिन जेल जाने के बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहा, जिसके बाद उनके अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ा दी गई है. चारा घोटाले के आरोप में उन्हें पांच साल कैद और 25 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है.

एएनआई की खबर के मुताबिक स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें रांची हाईकोर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह ने 17 अगस्त तक के लिए जमानत दे दी है. उनकी जमानत पर अब अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी. लालू यादव के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी जमानत अवधि को 6 हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

जमानत मिलने के बाद लालू यादव के वकील अभिषेक सिंघवी ने मीडिया से कहा कि 26 तारीख को ही यादव का ऑपरेशन हुआ है. जिसके कारण उन्हें ठीक होने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा. बता दें कि बीमारी के कारण 11 मई को कोर्ट से लालू यादव को 6 हफ्तों की जमानत मिली थी. जिसके बाद यादव इलाज के लिए मुंबई और बेंगलुरु भी गए थे.

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