मदरसा ड्रेस कोड पर मचा बवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा मदरसा में ड्रेस कोड लागू करने के फैसले के बाद बवाल मचा है. मदरसों में ड्रेस लागू करने की योजना का मुस्लिम धर्म गुरुओं ने विरोध किया है. बुधवार को मदरसा दारुल उलूम फिरंगी महली ने कहा कि मदरसों में मुश्किल से एक या दो प्रतिशत मुस्लिम बच्चे ही शिक्षा लेते हैं. सरकार को उनके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है.

मदरसों पर बुल्डोजर चलवा दे…

इसके बाद फायर ब्रांड सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार ड्रेस कोड लागू करने के साथ पालन न करने पर मिलने वाली सजा भी बताए. सरकार पर व्यंग करते हुए कहा कि हो सकता है, सरकार आदेश का पालन न करने वाले मदरसों पर बुल्डोजर चलवा दे या शिक्षकों पर तेजाब डलवा दे.

सूफी निजाम ने मदरसों के पारंपरिक पहनावे पर छेड़छाड का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि देश भर में चल रहे कॉलेजों और स्कूलों में ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार संस्था की प्रबंध समिति को होता है, फिर मदरसों के साथ यह भेदभाव क्यों? गौरतलब है कि मंगलवार को मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने का एलान किया था. इस घोषणा के बाद मुस्लिम धर्म गुरुओं और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.

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इरफान के बाद इस स्टार को हाई ग्रेड कैंसर, न्यूयॉर्क में भर्ती

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार शाहरुख, सलमान, गोविंदा, अजय देवगन के साथ कई हिट फिल्में दे चुकीं हिरोईन कैंसर की चपेट में है. इरफान खान के बाद हिंदी सिनेमा की हीट स्टार सोनाली बेंद्रे हाई ग्रेड कैंसर से ग्रस्त हैं. भारत में इलाज कराने के बाद सोनाली बेंद्रे का इलाज न्यूयॉर्क में चल रहा है.

इरफान की तरह सोनाली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, ‘जब आप जिंदगी से ज्यादा उम्मीदें रखते हैं तो तब वो एक जोर का झटका देती है . हाल ही में मुझे पता चला कि मुझे हाई ग्रेड कैंसर है. मेरा परिवार और दोस्त मेरे साथ हैं. मैं इन सबकी शुक्रगुजार हूं.’ ‘इसके अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है. मेरे डॉक्टर की सलाह पर हमने तुरंत न्यूयॉर्क जाने का फैसला किया. अब सारा ट्रीटमेंट न्यूयॉर्क में होगा. मैं इस मुश्किल घड़ी से निकलने की पूरी कोशिश करूंगी.’

‘पिछले कुछ दिनों में मुझे लोगों का बहुत प्यार मिला है. मैं इतना प्यार पाकर खुद को खुशनसीब महसूस कर रही हूं . मेरे साथ पूरा परिवार मेरी ताकत बनकर खड़ा है.’ पिछले माह सोनाली का इलाज हिंदुजा सर्जिकल हेल्थकेयर में हुआ था. बता दें कि सोनाली से पहले एक्टर इरफान खान भी न्यूरो एंडोक्राइन नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं.

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‘आप’ की जीत, SC ने दिल्ली को दी ‘आजादी’

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है. इस आजादी के लिए आम आदमी पार्टी लंबे समय से संघर्ष कर रही थी जिसकी बुधवार को जीत हुई. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने मुख्य फैसले में कहा कि चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है, इसलिए मंत्री-परिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है. संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला दिया कि हर मामले में LG की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों की जानकारी देनी होगी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमनें सभी पहलुओं- संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि- पर गौर किया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि दिल्ली की असली बॉस चुनी हुई सरकार ही है यानी दिल्ली सरकार. बता दें कि दिल्ली सरकार बनाम उप राज्यपाल के बीच लंबी लड़ाई चल रही थी. दिल्ली में सरकार चलाने वाले का हमेशा शिकायत रहता था कि केंद्र सरकार यानी उप राज्यपाल काम नहीं करने दे रहे हैं लेकिन इस मामले का समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल हुई थीं. 6 दिसंबर 2017 को मामले में पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था. हालही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एलजी के यहां धरना दिया था. आखिरकार आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल कर ली.

‘आप’ का कहना

  • सुप्रीम कोर्ट से मिले फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत हुई है. लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत है.
  • दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की जनता का एक ऐतिहासिक फैसला था. मैं दिल्ली की जनता की तरफ से इस फैसले के लिए धन्यवाद करता हूं, जिसमे माननीय न्यायालय ने जनता को ही सर्वोच्च बताया है. LG को मनमानी का अधिकार नहीं, दिल्ली सरकार के काम को रोका जा रहा था. माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है.
  • आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लैंड, पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर सरकार के अधीन नहीं आएंगे. इन तीन विषयों को छोड़कर चाहे वह बाबुओं के ट्रांसफर का मसला या और नई शक्तियां हों, वह सारी शक्तियां अब दिल्ली सरकार के अधीन आ जाएंगी.

चीफ जस्टिस का कहना

इस मामले को लेकर पांच जजों की बेंच चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एक सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस ने कहा कि संघीय ढांचे में absolutism और अनार्की की कोई जगह नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई फैसला लेने से पहले LG की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत. साथ ही कोर्ट ने कहा कि छोटे-छोटे मामलों में में मतभेद ना हो. राय में अंतर होने पर राष्ट्रपति को मामला भेजें LG. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्य को बिना किसी दखल के कामकाज की आजादी हो. चीफ जस्टिस और दो अन्य जजों ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर फैसला एलजी को बताना होगा. हालांकि, हर मामले में एलजी की सहमति जरूरी नहीं.

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प्यार के कारण भाभी ने ली देवर की जान

प्रतीकात्मक फोटो

कोलकाता। भाभी-देवर को रिश्ते को तार-तार करने वाली खबर सामने आई है. एक भाभी ने अपने ही देवर को मौत के घाट उतार दिया है. हत्या की वजह प्यार-दुलार बताया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 साल की एक महिला ने कोलकाता में कथित रूप से अपने देवर को मार डाला व खुद हत्या की बात भी बताई.

रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार वाले आठ साल के लड़के को ज़्यादा लाड-प्यार करते थे. इस बात से खफा प्रियंका दास (भाभी) ने रिजु दास को पानी में डुबोकर मार डाला. नेटवर्क 18 की खबर के मुताबिक पीड़ित की मां डॉली दास ने बताया कि शुरुआत में परिवार को लगा कि बच्चे की मौत एक दुर्घटना है. लेकिन बाद में आरोपी प्रियंका दास ने खुद ही अपने पति सुब्रत को बताया कि उसने ही बच्चे को मारा है. उसने कहा कि उसने बच्चे को ड्रम में नहाते हुए देखा और उसे डुबा के मार डाला. आरोपी के पति व ससुर ने मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद प्रियंका हत्या के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

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मायावती ने किया बड़ा फेर-बदल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी में दिग्गज नेताओं को निकालने के साथ-साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए भी पुरजोर काम चल रहा है. मायावती की रणनीति के अनुसार बसपा में बड़े फेर-बदल भी किए गए हैं. एक-दो दिन के भीतर ही इन राज्यों में पार्टी ने नए लोगों को बड़ी जिम्मेदारी के साथ कमान सौंपी है तो वहीं बागी नेताओं को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया है.

इनको सौंपी गई जिम्मेदारी

आगामी चुनाव को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के नेता राजिक उस्मानी को पार्टी की ओर से बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. बसपा संगठन की ओर से उन्हें गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रभारी बनाया गया है. जिला अध्यक्ष हरिश्चन्द्र गौतम की ओर से जारी सूचना के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर श्री उस्मानी को सदर विधानसभा सभा का प्रभारी बनाया गया है. संगठन की ओर से निर्देश दिये गये हैं कि श्री उस्मानी बसपा के प्रचार-प्रसार और संगठन को मजबूत करने के लिए क्षेत्र का नियमित दौरा और बैठक करें.

सूत्रों के मुताबिक श्री उस्मानी लोकसभा चुनाव में भी टिकट के दावेदार के रूप में चर्चा में है. प्रभारी बनाये जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे शीर्ष नेतृत्व की अपेक्षाओं और निर्देशों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेगें.

उत्तर प्रदेश के झांसी मंडल में बसपा ने लापरवाही से काम करने और निष्क्रिय रहने वाले पदाधिकारियों के पदों में मंगलवार को बड़ा बदलाव करते हुए मंडल जोन प्रभारी रविकांत को पद से हटाकर पवन चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी के जिलाध्यक्ष रामबाबू चिरगाईयां ने बताया कि मंडल जोन इंचार्ज रविकांत मौर्य को उनके पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर अब पवन चौधरी को झांसी मंडल जोन का इंचार्ज बनाया गया है.

इसके अलावा जयपाल अहिरवार जिला जोन इंचार्ज को पद से हटाकर उनके स्थान पर मुन्ना लाल अहिरवार (दरोगा) को जिला जोन इंचार्ज झांसी बनाया गया है. इसी क्रम में विधानसभा प्रभारी चन्द्रभान अहिरवार को हटाकर उनके स्थान पर मनोज अहिरवार को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसके साथ ही संतराम अहिरवार भट्पुरा को मऊरानीपुर विधानसभा प्रभारी बनाया गया है.

बसपा विधायक बाहर

चंडीगढ़ में पिछले चार साल से सत्तारूढ़ भाजपा को समर्थन दे रहे बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक टेक चंद शर्मा को आखिरकार पार्टी ने मंगलवार को निष्कासित कर दिया है. टेक चंद फरीदाबाद जिले की पृथला विधानसभा सीट से बसपा के एकमात्र विधायक थे. इनेलो-बसपा गठबंधन के दौरान ही शर्मा को निलंबित कर दिया गया था, मगर उनके बसपा से निष्कासन का फैसला अब जाकर हुआ है. बसपा द्वारा निष्कासित कर दिए जाने के बावजूद टेक चंद शर्मा की विधानसभा सदस्यता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा. विधानसभा में अब शर्मा को आजाद विधायक के तौर पर गिना जाएगा. विधानसभा में अब आजाद विधायक की संख्या बढ़कर छह हो जाएगी.

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बसपा-इनेलो के 23 हजार कार्यकर्ताओं के लिए अस्थाई जेल बनी अनाज मंडी

नई दिल्ली। हरियाणा की भाजपा सरकार के जन विरोधी कामों व विकास से भटकती खट्टर सरकार के खिलाफ बसपा व इनेलो ने मिलकर हमला बोला है. सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के पानी को लेकर मंगलवार को झज्जर जिले के बेरी में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बसपा ने जेल भरो आंदोलन किया. बेरी की अनाज मंडी में करीब 23 हजार कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी दी.

प्रशासन ने बेरी अनाज मंडी को ही अस्थायी जेल मानकर इनेलो कार्यकर्ताओं को पहले तो गिरफ्तार किया और उसके दो मिनट बाद ही सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया. उन्होंने कहा एसवाईएल का निर्माण सरकार को सौ फीसदी करना होगा. अगर जेल भरो आंदोलन के बाद सरकार ने नहर का निर्माण नहीं करवाया तो इससे भी बड़ा आंदोलन होगा, जिससे सरकार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

अभय चौटाला ने मंच से कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए जनता तैयार है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद किसानों का कर्ज माफ करेगी. गरीब कन्या की शादी के लिए कन्यादान के तौर पर पांच लाख रुपए देने का काम भी इनेलो सरकार करेगी. अभय चौटाला ने मंच से ही इनेलो-बसपा के कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि प्रदेश में इनेलो- बसपा की लहर है और आने वाली सरकार भी उन्हीं की होगी.

इस मौके पर इनेलो नेता अभय चौटाला ने मंच से भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला. अभय चौटाला ने बताया कि झज्जर प्रदेश का 18वां जिला है, जिसमें जेल भरो आंदोलन पूरा हुआ है. उन्‍होंने कहा कि 17 जुलाई के बाद इनेलो की बैठक बुलाकर बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा.

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बसपा के चार दिग्गज नेता बाहर

लखनऊ। बसपा एक के बाद एक अपने पुराने दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा रही है. पूर्व मंत्री विनोद सिंह को निकालने के बाद फिर सुल्तानपुर जिला के चार नेताओं को निकालने की बात सामने आई है. दो बार विधायक रह चुके भगेलूराम को पार्टी को बाहर निकाल फेंका है. इससे बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी के गद्दार नेताओं का सफाया किया जाना चाहिए. बहनजी सफाई अभियान चलाकर पार्टी को साफ करने का काम कर रही है.

लेकिन वहीं बसपा नेता श्यामलाल का कहना है कि इस तरह से अंधाधुंध निष्कासन करना पार्टी के नुकसानदेह साबित हो सकता है. नेताओं को निकालने से पहले समझाने का काम किया जाना चाहिए. दिग्गजों नेताओं को निकालने से उनके समर्थक भी हमसे टूट रहे हैं. इससे आगामी चुनाव में विपक्षी दल की स्थिति मजबूत होगी.

सोमवार को मायावती के आदेश के बाद कादीपुर से दो बार विधायक रहे चुके भगेलूराम को निकालने के साथ ही जिला प्रभारी राजमणि वर्मा, तिलकधारी व विनोद गौतम को भी बसपा ने बाहर निकाल दिया. बता दें कि भगेलूराम पार्टी के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे. 2002 व 2007 में दो बार पार्टी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं.

इससे पहले उन्होंने पूर्व सांसद कैसरजहां, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामहेत भारती और पूर्व विधायक जासमीर अंसारी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निकाल दिया है. साथ ही मायावती के इस फैसले के बाद अन्य नेता चिंता में पड़ गए हैं.

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फिल्म ‘संजू’ में हिरानी ने क्यों नहीं दिखाई ये सच्चाई?

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नई दिल्ली। पिछले साल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम.एस धोनी पर एक बायोपिक बनी थी. फिल्म ने खूब धूम मचाया. वो तमाम लोग जो भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन कूल की एक सहज इंसान और रांची वाले लड़के की कहानी नहीं जानते थे, इस फिल्म ने उसमें सब दिखाया. हालांकि फिल्म और जिंदगी दो अलग-अलग चीजे हैं और किसी की जिंदगी पर फिल्म बनाते वक्त कुछ बातें छोड़ देने की मजबूरी होती है लेकिन फिर भी कुल मिलाकर धोनी की बायोपिक दर्शकों को धोनी के जीवन के तमाम रंगों से परिचित करा गई.

इसमें उनका फुटबॉलर से क्रिकेटर बनना, रांची के दोस्त, रेलवे की नौकरी, क्रिकेट का स्ट्रगल, लव स्टोरी आदि तमाम चीजें दिखाई गई थी. फिल्म में धोनी के धोनी बनने में जिस-जिस ने भूमिका निभाई है, उन सभी किरदारों को समेटा गया है. फिल्म थोड़ी लंबी थी, लेकिन वो फिल्म दर्शकों को संतुष्ट करती है. लेकिन हाल ही में संजय दत्त के जीवन पर बनी फिल्म संजू में संजय दत्त के जीवन के तमाम रंग और तमाम लोग नहीं दिखे.

इस फिल्म के रिलीज होने के पहले संजय दत्त के जीवन से जुड़ी तमाम खबरें मीडिया में खूब छाई रही. उन तमाम सच्ची खबरों की फोटो भी खूब वायरल हुई, लेकिन जब दर्शक फिल्म देखने पहुंचे तो फिल्म से संजय दत्त के जीवन की वो तमाम महत्वपूर्ण बातें गायब थी, जिसके बारे में दर्शक जानना चाहते थे. आइए डालते हैं ऐसी ही घटनाओं पर एक नजर जिसे फिल्म संजू में अनदेखा कर दिया गया.

नंबर-1 लव अफेयर्स

संजय दत्त एक अभिनेता हैं. उनकी पहचान या फिर लोगों की उनमें रुचि की एक यही वजह है. लेकिन फिल्म में उनके फिल्मी जीवन की कोई बात नहीं दिखाई गई है. न किसी फिल्मी कलाकार से दोस्ती न दुश्मनी और न ही प्यार. जबकि संजय दत्त अपनी जिंदगी में 350 लड़कियों से संबंध होने की बात करते हैं. लेकिन फिल्म में उनकी फिल्मी दुनिया की एक भी गर्लफ्रेंड को नहीं दिखाया गया है. जबकि माधुरी दीक्षित और रिया पिल्लई का संजय दत्त की जिंदगी में अहम रोल रहा है.

नंबर-2 निजी जिंदगी

संजय दत्त की निजी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण किरदार फिल्म से गायब हैं. सबसे बड़ी मिसिंग संजय दत्त की पहली पत्नी ऋचा शर्मा और बेटी त्रिशाला हैं, जिनको फिल्म से साफ गायब कर दिया गया है. इसी तरह संजय दत्त के जिगरी दोस्त और बहनोई कुमार गौरव भी इस फिल्म से गायब हैं. यह बात खलती है.

नंबर-3 पोलिटिकल कनेक्शन

संजय दत्त जब मुंबई ब्लास्ट में फंसे तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और नरसिंहा राव प्रधानमंत्री थे. तो वहीं महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सरकार थी. उस दौरान सुनील दत्त कांग्रेस के एमपी थे. लेकिन बलास्ट के बाद सुनील दत्त को न तो राज्य में और न ही केंद्र सरकार से कोई मदद मिली. तब निराश सुनील दत्त अपने बेटे संजय दत्त की खातिर अपने धुर विरोधी बाल ठाकरे के पास पहुंचे. ठाकरे ने उन्हें निराश नहीं किया.

इस मुलाकात के बाद संजय दत्त के पक्ष में सामना में लेख आए और माहौल बदलने लगा. जमानत मिलने के बाद संजय दत्त अपने पिता के साथ ठाकरे के घर मातोश्री पहुंचे थे, जिसकी तस्वीरें मौजूद हैं. लेकिन यह अहम घटना फिल्म से गायब रही.

नंबर-4 फिल्मी जीवन

संजय दत्त फिल्म स्टार सुनील दत्त और नर्गिस के बेटे हैं. उनका खुद का करियर भी फिल्मों का रहा है. खलनायक और वास्तव जैसी फिल्मों ने संजय दत्त की वापसी को बेहतर बनाया था. लेकिन संजय दत्त के फिल्मी जीवन और शूटिंग से जुड़ा कोई भी किस्सा इस फिल्म में नहीं दिखाया गया, और न ही किसी दूसरे एक्टर को दिखाया गया है. एक जगह महेश मांजरेकर दिखते तो हैं; लेकिन यह चीजों को स्थापित नहीं कर पाती.

नंबर-5 कमजोर कड़ी

ऐसा नहीं है कि फिल्म में और घटनाएं दिखाने की गुंजाईश नहीं थी. क्योंकि फिल्म का पहला भाग काफी आराम से चलता है. घटनाएं आकर ठहर जाती हैं, फिर आगे बढ़ती हैं. फिल्म के डायरेक्टर चाहते तो इस वक्त में कुछ और घटनाओं को भी शामिल किया जा सकता था. तो जेल के कुछ किस्से भी प्रभावी हो सकते थे. मुंबई ब्लास्ट के दौरान की राजनीति को भी और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था, यह फिल्म के लिए बेहतर होता.

फिलहाल यह फिल्म बड़ी हिट हो चुकी है और रणवीर कपूर ने एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है. इस फिल्म ने रणवीर कपूर और संजय दत्त को हिट कर दिया है लेकिन थ्री इडियट और मुन्ना भाई एमबीबीएस वाले राजू हिरानी को थोड़ा पीछे छोड़ दिया है.

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जेएनयू ने पीएचडी छात्र को हॉस्टल से निकाला, छात्र ने लिखा ये खत

साथियों, आप सबके लिए कुछ शब्द….

2009 में जे॰एन॰यू॰ आने से लेके आज प्रशासन द्वारा हॉस्टल से ज़बरदस्ती निकाले जाने तक मैंने बहुत कुछ सीखा है, तरह-तरह के लोगों से सामना हुआ है और अच्छे-बुरे सारे अनुभव भी लिए है इन 9 सालों में. वक़्त के साथ सब कुछ बदलना पड़ता है, पर अपने मूल सिद्धांतो को नहीं बदलना चाहिए.

मैंने ऐसा ही करने का प्रयास किया.

सामाजिक न्याय के विचार को सिर्फ़ समझा नहीं…उसके लिए संघर्ष किया और उसे अपने निजी जीवन में भी जीने लगा. सामाजिक न्याय पर जब-जब ख़तरा मंडराया हुआ दिखा, तब मैंने और हम सब साथियों ने साथ मिल कर उसके लिए लड़ाई लड़ी.

ऐसा ही एक ख़तरा तब मंडराया जब 2016 में UGC का गज़ट आया. इस गज़ट में आदिवासी-दलित-पिछड़ों के साथ साफ़-साफ़ अन्याय हो रहा था, उनके मूल हक़ का हनन हो रहा था. इसी के विरोध में 20 जनवरी 2017 को मैं भूख हड़ताल पर बैठ गया. भूख हड़ताल तो 78 घंटे बाद प्रशासन ने पुलिस द्वारा ख़त्म करा दी, पर हम लोगों का UGC गज़ट के खिलाफ संघर्ष जारी रहा. इस संघर्ष का परिणाम ये हुआ की मई 2018 में UGC ने अपना बहुजन-विरोधी गज़ट वापस ले लिए.

UGC से तो हम जीत गए पर हमारी असली लड़ाई संघ-भाजपा जैसी ब्रह्मणवादी ताक़तों से है. इन ब्रह्मणवादी ताक़तों को ये क़तई पसंद नहीं आता है कि बहुजन अपने हक़ की आवाज़ उठाए. ये अपने जनेऊ से लगातार बहूजनो के का गला घोटने की कोशिश में लगे रहते हैं. मैं हक़ के लिए आवाज़ उठाई तो इन्होंने उसको दबाने के लिए मनु के क़ानून का हर पैंतरा अपनाया. 50 हज़ार का फ़ाइन लगाया, सस्पेंड किया, पुलिस कम्प्लेन की, हॉस्टल ट्रान्सफ़र किया और आज उस समय हॉस्टल से निकाल दिया जब मेरी PhD का सबसे अहम समय है…15 दिन में PhD जमा करनी है और मेरे पास रहने-पढ़ने के लिए कोई रूम नहीं है!

पर आज हम डंके की चोट पर कहता हूँ की ना कभी अपनी विचारधारा से समझौता किया है और ना कभी करूँगा. ये चाहे जितने भी ज़ुल्म कर लें पर मैं लगातार बहुजनो के हक़ की लड़ाई लड़ता रहूँगा…इनके जनेऊ को तोड़ कर बहुजनों का छीन लूँगा. पर इस सब के लिए मुझे आप सभी साथियों की ज़रूरत है. मेरे संघर्ष की रीढ़ की हड्डी आप लोग ही हैं. आपसे बस इतना की कहना चाहता हूँ की “साथियों, चाहे जो हो जाए, समझौता नहीं करना है. एकता के साथ लड़ना है और अपना हक़ लेना है. ब्राह्मणवादियों को दिखा देना है की हमारा हौंसला उनके जनेऊ से बहुत-बहुत मजबूत है. अरे हम तो मेहनतकश लोग हैं…मेहनत करके जीना जानते हैं…ये कुछ भी कर लें पर हम अपनी मेहनत से अपना अधिकार लेकर ही रहेंगे.”

जय भीम-जय बिरसा-जय मंडल

सामाजिक न्याय ज़िंदाबाद

साभारः दिलीप यादव का फेसबुक वॉल  इसे भी पढ़ें-बिहार की ‘असली’ टॉपर मुसहर गर्ल की कहानी
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गोरखपुर विविः शिक्षक नियुक्ति में ब्राह्मण-ठाकुरों की बहार, आरक्षण की अनदेखी

गोरखपुर। वैसे यह कहना गलत नहीं होगा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्तियों में जमकर ठाकुर-ठाकुर, बाभन-बाभन का खेल खेला गया है. 02 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय में 62 नये शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. करीब सारे सीटों पर इनका ही हक है. आंकड़ा देखने के बाद भी शायद आप भी ऐसा ही कहेंगे.

टोटल 62 शिक्षक के सीट में 42 शिक्षक सिर्फ दो जातियों के हैं. 24 ठाकुर और 18 ब्राह्मण यानी 67.74 प्रतिशत शिक्षक या तो ठाकुर या बाभन. करीब दो तिहाई. इसमें भी इस बार बाभनों से ठाकुरों ने बाजी मार ली. 18 बाभनों की तुलना में 24 ठाकुर हुए अर्थात  कुल पदों के 38.70 प्रतिशत पर ठाकुरों ने कब्जा कर लिया. बाभनों से करीब 10 प्रतिशत अधिक. कुल नियुक्तियों में बाभनों का प्रतिशत 29.03 है.

कोई पूछ सकता है कि ज्ञानी बाभनों की तुलना में ठाकुरों ने कैसै बाजी मार ली. अगर मुख्यमंत्री अजय सिंह विष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ और कुलपति विजय कृष्ण सिंह के रहते भी ऐसा न होता, तो आखिर कब होता?

बाभन ऋषि वशिष्ठ के वंशजों को ठाकुर ऋषि विश्वामित्र में वंशजों ने पराजित ही कर दिया. गोरखपुर में बाभनों और ठाकुरों का संघर्ष काफी पुराना है. हरिशंकर तिवारी और विरेन्द्र प्रताप शाही के जमाने में तो कितने लोग इस वर्चस्व की लड़ाई में मारे गये. फिलहाल गोरखपुर में अजय सिंह विष्ट के वर्चस्व के बाद गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में बाभनों के दिन ठाकुरों की तुलना में बुरे चल रहे हैं. फिर भी बाभन शंबूक के बंशजों के खिलाफ ठाकुरों के साथ एकजुट  हैं.

शंबूक के वंशजों को कितने पद मिले इसका जायजा लेने से पहले थोड़ा लाला लोगों का जायजा ले लिया जाय. 02 लाला ( श्रीवास्तव) लोग भी नियुक्त हुए हैं. लाला लोग शंबूक के वंशज हैं या वशिष्ठ-विश्वामित्र के तय नहीं हो पाया है. अंदर-अंदर बाभन-ठाकुर इन्हें शंबूक का वंशज मानते हैं, जबकि ये लोग अपने को वशिष्ठ-विश्वामित्र से जोड़ते हैं. कौन इस पचड़े में पड़े इसे छोड़ते हैं. इन्हें बाभनों-ठाकुरों की गोल का मान लेते हैं. अब जरा शंबूक के वंशजों के की चर्चा.  करीब 20 प्रतिशत पदों पर ओबीसी और दलित समाज के लोग भी नियुक्त हुए हैं.

उर्दू विभाग में 2 मुसलमानों को निुयक्त करना पड़ा है. पता चला है कि कोई हिंदू इस योग्य नहीं था. दुखद है, योगी के गढ़ में संघी कुलपति के रहते म्लेच्छ की नियुक्ति?

खैर नियुक्तियों का एक दौर और पूरा हुआ. 15 प्रतिशत से भी कम आबादी बाले ठाकुरों-बाभनों ने करीब 70 प्रतिशत पदों पर कब्जा कर लिया. ठाकुरों ने बाभनों को पराजित कर दिया. दोनों ने मिलकर शंबूक के करीब 70 प्रतिशत वंशजों को 20 प्रतिशत पद देकर राम राज्य की उदारता का परिचय दिया.

-सिध्दार्थ रामू इसे भी पढ़ें-आरक्षण की मांग पर योगी जी के ढोंग की खुली पोल
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एटीएम कार्ड फिर दे सकता है झटका

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। एटीएम कार्ड धारकों को एक बार फिर झटका लग सकता है. एटीएम कार्ड यूज करने वालों को पहले के मुकाबले ज्यादा चार्जेज पे करने पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं और भी कई प्रकार के नियम बनाने की तैयारी हो रही है. इससे एटीएम कार्ड यूजर्स की जेब का बोझ बढ़ेगा यानी कि महंगा पड़ सकता है. इसके लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से मंजूरी मिलनी है, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा.

मुफ्त ट्रांजेक्शन

बैंकों ने आरबीआई को जो प्रस्ताव दिया है उसके मुताबिक प्रत्येक ग्राहक को हर महीने मिलने वाले मुफ्त ट्रांजेक्शन की संख्या को घटाने की बात कही है. अभी ज्यादातर बैंक कुल मिलाकर 8 ट्रांजेक्शन मुफ्त देते हैं, जिनमें 5 अपनी बैंकों पर और 3 अन्य बैंकों पर मिलते हैं. ये घटकर के कुल 5 हो सकते हैं.

वर्तमान में सभी बैंक एटीएम पर होने वाले कैश ट्रांजेक्शन के लिए 15 रुपये और नॉन कैश ट्रांजेक्शन करने पर खाते से 5 रुपये काटते हैं. यह चार्ज हर महीने फ्री में मिलने वाले ट्रांजेक्शन के ऊपर लगता है.

1635 एटीएम बंद

बैंक इसके अलावा एटीएम पर होने वाले नॉन बैंकिंग ट्रांजेक्शन की फीस को भी 18 रुपये से बढ़कर 25 रुपये तक हो सकती है. आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक आदि ने पिछले एक साल में अपने 1635 एटीएम को बंद कर दिया है.

आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वो नए नियमों को 31 जुलाई तक लागू कर दें. कैश वैन के लिए बनाए गए इन नियमों के अनुसार कैश मैनेजमेंट कंपनियों के पास में कम से कम 300 कैश वैन, प्रत्येक कैश वैन में एक ड्राइवर, दो कस्टोडियन और दो बंदूकधारी गार्ड होने चाहिए ताकि कैश की सुरक्षा हो सके. इसके साथ ही प्रत्येक गाड़ी में जीपीएस, लाइव मॉनेटरिंग के साथ भू मैपिंग और नजदीकी पुलिस स्टेशन का पता होना चाहिए ताकि इमरजेंसी के वक्त मदद ली जा सके.

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बसपा प्रदेश अध्यक्ष पर FIR दर्ज

भोपाल। मध्य प्रदेश बसपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की खबर सामने आई है. प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार समेत तीन के खिलाफ FIR दर्ज हुई है. छेड़खानी और जान से मारने की धमकी का केस दर्ज हुआ है.

टीटी नगर थाने में बसपा पार्टी की ही महिला कार्यकर्ता ने केस दर्ज कराया है. बताया जा रहा है कि पांच मई को 74, बंगले में पार्टी की मीटिंग के दौरान एक महिला कार्यकर्ता को नर्मदा प्रसाद ने रात भर रुकने को कहा था. इतना ही नहीं इसके बाद नर्मदा का समर्थक महेश कुशवाहा महिला को अश्लील फोटो और वीडियो भेज कर प्रताड़ित कर रहा था. टीटी नगर थाने में नर्मदा प्रसाद अहिरवार के खिलाफ धारा 354, 506 और साइबर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

इस बात को लेकर नर्मदा प्रसाद ने आरोपों को खारिज कर दिया है. महिला के आरोपों पर प्रदेश अध्यक्ष ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है. फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर ली है.

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गोरक्षा को लेकर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश

नई दिल्ली। गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को मारने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. गोरक्षा के नाम पर हो रही मॉब लिंचिंग के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पूरी हो गई है. मंगलवार को कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने केंद्र व राज्य सरकारों को कहा कि गोरक्षा के नाम पर इस तरह की हिंसा की वारदातें नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि राज्यों का ये दायित्व है कि इस प्रकार की घटना को ना होने दिया जाए. आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार ले और उचित कदम उठाए. सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि गोरक्षकों के द्वारा हिंसा को रोकने के लिए कोर्ट एक विस्तृत आदेश जारी करेगा. SC ने कहा कि केंद्र को इस मसले पर आर्टिकल 257 के तहत एक स्कीम लानी चाहिए.

किसी स्कीम की जरूरत नहीं…

आजतक की एक खबर के मुताबिक ASG नरसिम्हा ने सुनवाई में कहा कि इस मामले में किसी स्कीम की जरूरत नहीं है, ये लॉ एंड ऑर्डर का मामला है. सवाल है कि आखिर कौनसा राज्य सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को मानता है. सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े ने इन घटनाओं से निपटने और घटना होने के बाद अपनाए जाने वाले कदमों पर विस्तृत सुझाव कोर्ट के सामने रखे. ये सुझाव मानव सुरक्षा कानून (मासुका) पर आधारित हैं. सुझावों में नोडल अधिकारी, हाइवे पेट्रोल, FIR, चार्जशीट और जांच अधिकारियों की नियुक्ति जैसे कदम शामिल हैं.

इसके साथ ही तत्काल में घटी घटनाओं को याद दिलाते हुए वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ गया है, वो गाय से आगे बढ़कर बच्चा चोरी का आरोप लगाकर खुद ही कानून हाथ में लेकर लोगों को मार रहे हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसी ही एक घटना में 4 लोगों को मार दिया गया है. इंदिरा जयसिंह ने धर्म, जाति और लिंग को ध्यान में रखते हुए मुआवज़ा की मांग भी की.

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सदी का सबसे लंबा ग्रहण, दिखेगा ‘ब्लड मून’

नई दिल्ली। सदी का सबसे लंबा ग्रहण देखने के लिए तैयार हो जाएं. न्यूज एजेंसी भाषा की जानकारी के मुताबिक ‘ब्लड मून’ दिखने वाला है. दुबई में 27 जुलाई को इस सदी का सबसे लंबा चन्द्र ग्रहण दिखाई देगा. अधिकारियों ने बताया कि ग्रहण के दौरान चन्द्रमा करीब चार घंटे के लिए धरती की छाया में आ जाएगा. इस ग्रहण को कम से कम तीन महाद्वीपों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा. दुबई एस्ट्रोनॉमी ग्रुप के अनुसार, यह ग्रहण सदी का सबसे लंबा ग्रहण होगा जो करीब एक घंटे 43 मिनट का होगा, इस दौरान ‘ब्लड मून’ दिखेगा. ‘ब्लड मून’ पूर्ण चन्द्र ग्रहण के दौरान बनने वाले चन्द्रमा के ‘रिंग’ को कहते हैं. आंशिक चन्द्र ग्रहण दो घंटे बारह मिनट (22:24 से देर रात 2:19) जबकि पूर्ण चन्द्र ग्रहण एक घंटे 43 मिनट (रात 23:30 से देर रात 1:13) का होगा. जानकारों का ऐसा कहना है कि इस दौरान चंद्रमा पूरा दिखाई देगा लेकिन हल्का लाल रंग का दिखाई देने लगेगा. Read Also-बुद्ध पूर्णिमा विशेषः भारत में धम्म कारवां की दिशा
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बच्चियों के साथ रेप में MP नंबर वन

भोपाल। मंदसौर की दर्दनाक रेप की घटना के बाद एक और चौकाने वाली खबर सामने आई है.  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को खत लिखा है. मंदसौर में 7 साल की बच्ची के साथ रेप के बाद सतना में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की मांग की है.

श्री चौहान ने पत्र लिखकर कहा है कि बलात्कार जैसे मामलों ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया है. ऐसे मामलों को तेजी से निपटाने के साथ-साथ दोषियों को कठोर सजा दिए जाने की जरूरत है. उच्च न्यायालयों को फास्ट ट्रैक की स्थापना कर मामलों की तेजी से सुनवाई करने की जरूरत है.

वहीं अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश बच्चियों और औरतों से बलात्कार के मामले में देश में पहले नंबर पर है. पिछले साल मध्यप्रदेश में 2,467 बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं दर्ज हुईं, जो की देशभर में बच्चियों के साथ हुई रेप की वारदातों की कुल संख्या का आधा है.

इससे पहले 26 नवंबर 2017 को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने बच्ची से रेप के मामले में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया. जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप करने का दोषी पाए जाने पर गुनहगारों को मौत की सजा दिए जाने की घोषणा भी की. रेप के मामलों में इस तरह का सख्त कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया लेकिन फिर भी वहां रेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहा है.

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महिला के साथ गैंगरेप फिर निर्वस्त्र कर घुमायाःआरोप

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला उत्पीड़न का एक शर्मनाक मामला सामने आया है. हमीरपुर जिले के एक गांव में कुरारा थाना क्षेत्र की महिला ने चार दबंगों पर गैंगरेप और निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाने का आरोप लगाया है. महिला का यह भी कहना है कि आरोपियों ने उसे जान से मारने के कई प्रयास किए लेकिन वह किसी तरह से बच निकली. गंभीर रूप से घायल पीड़ित महिला का इलाज अस्पताल में चल रहा है.

इस घटना को पूरा देख तमाशाबीन बने देख रहा था लेकिन किसी की हिम्मत ना हुई कि बदमाशों को रोके. इस बीच किसी ने पुलिस को पूरे मामले की सूचना दे दी. जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल महिला को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करवाया. इस पूरे मामले में पुलिस ने साधारण मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए दबंगों को बचाने के प्रयास किए हैं. पुलिस ने महिला के आरोपों को झूठा बताते हुए मारपीट, गाली-गलौज की धारा 323, 504, 506, के तहत मामला दर्ज किया है.

हाईकोर्ट का आदेश

जिसके बाद हाईकोर्ट का आदेश है कि महिला द्वारा रेप के आरोप लगाने भर से पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू करनी चाहिए लेकिन इस मामले में पुलिस ने न महिला का मुकदमा दर्ज किया और न ही उसका मेडिकल करवाया. बल्कि मामले को मारपीट की धाराओं में तब्दील कर रफा-दफा कर दिया. इस मामले में हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह का कहना है कि रविवार को कुछ लोगों द्वारा महिला के साथ मारपीट और रेप करने की शिकायत मिली थी. सीओ सदर मामले की जांच कर रहे हैं. फिलहाल महिला का इलाज चल रहा है.

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अयोध्या भूमि पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका

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नई दिल्ली। अयोध्या की विवादित भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इंकार कर दिया है. इससे रामभक्त व बीजेपी समर्थकों को निराशा हाथ लगी है तो वहीं मुस्लिम समुदाय के लिए खुशी की बात कही जा रही है. मुस्लिम समुदाय ने कोर्ट के निर्देश का स्वागत किया है.

स्वामी ने अयोध्या की विवादित जमीन पर पूजा करने के आदेश जारी करने के लिए याचिका दायर की थी. इससे पहले भी मई में स्वामी पूजा के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं. उस समय कोर्ट ने उन्हें जुलाई को इस मामले को कोर्ट के सामने लाने के लिए कहा था. जुलाई में आदेश देने से साफ मना कर दिया है.

बता दें कि इससे पहले अयोध्या विवाद मामले को संविधान पीठ को भेजने संबंधी मांग पर हिंदू और मुस्लिम पक्षकार आमने-सामने आ गए थे. मुस्लिम पक्षकार मामले को संविधान पीठ को सौंपे जाने के पक्ष में थे, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यह विशुद्ध रूप से भूमि विवाद का मामला है, ऐसे में इसे बड़ी पीठ के पास भेजने का कोई औचित्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष हिंदू पक्षकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा था कि मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ कर रही है, इसलिए उसे ही सुनना चाहिए.

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शादी से पहले मिथुन के बेटे व पत्नी पर रेप-गर्भपात का आरोप

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नई दिल्ली।  मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाअक्षय की छह दिन बाद शादी होने वाली है. ऐसे में एक भोजपुरी एक्ट्रेस ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और सहमति के बगैर गर्भपात कराने का आरोप लगाया है. पीड़िता ने दिल्ली के बेगमपुर थाने में इसकी शिकायत की थी, पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. इसके बाद उसने कोर्ट से गुहार लगाई. सोमवार को रोहिणी कोर्ट ने महाअक्षय और उनकी मां योगिता बाली के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया.

एक्ट्रेस का आरोप है कि महाअक्षय से 2015 में उसकी पहली मुलाकात हुई थी. इसके बाद उनके बीच फोन पर बात और मिलना-जुलना होने लगा. एक दिन महाअक्षय ने उसे फिल्म में रोल दिलाने की बात कहते हुए फ्लैट पर बुलाया. यहां धोखे से ड्रिंक्स में नशीला पदार्थ पिलाने के बाद दुष्कर्म किया. विरोध करने पर उसने शादी करने का वादा किया. इसके बाद भी तीन साल में कई बार शारीरिक संबंध बनाए.

इतना ही नहीं पीड़ित एक्ट्रेस ने मिथुन चक्रवती की पत्नी योगिता पर भी आरोप लगाते हुए कहा है कि मिथुन की पत्नी ने गर्भपात कराया है. इसके बाद कुंडली ना मिलने के नाम पर महाअक्षय ने कई बार शादी करने से गुमराह किया. मिथुन चक्रवर्ती के बेटे मिमोह यानी महाअक्षय चक्रवर्ती बहुत जल्द शादी करनेवाले हैं. बता दें मिथुन की होने वाली बहु मदालसा मशहूर टीवी ऐक्ट्रेस शीला शर्मा की बेटी हैं.

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मुंबई में गिरा ओवर ब्रिज, ट्रेन सेवा भी ठप

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मुंबई। बड़ा पुल हादसा होने से मंगलवार की सुबह मुंबई में अफरा-तफरी मची है. अंधेरी रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोखले रोड ओवर ब्रिज का एक हिस्सा ढहने से कम से कम चार लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस पुल के मलबे के नीचे कोई फंसा है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. फिलहाल एनडीआरएफ व बचाव दल मलबा हटाने व घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हैं.

कम से कम चार घंटों का वक्त

पुल का मलबा रेलवे ट्रैक पर गिरने की वजह से पश्चिम रेलवे की रेल सेवाएं बाधित हुई हैं. इस कारण दफ्तर जाने वाले लोगों को खासी मुश्किलों का सामना पड़ रहा है. वहीं कामकाजी लोगों को टिफिन पहुंचाने वाले डब्बावालों ने भी काम न करने में असमर्थता जताई है. पश्चिम रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि पटरियों से मलबा हटाकर ट्रेनों का परिचालन दुरुस्त करने में कम से कम चार घंटों का वक्त लग सकता है.

रेलवे ने बयान जारी कर बताया कि इस हादसे के कारण गोरेगांव और बांद्रा स्टेशन के बीच सभी लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है, जबकि गोरेगांव से आगे और ब्रांदा व चर्चगेट के बीच ट्रेन का परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है.

दूसरा रूट लेने की सलाह

ऐसे में मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने अंधेरी ईस्ट और वेस्ट के बीच सफर करने वाले लोगों को दूसरा रूट लेने की सलाह दी है. ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को अंधेरी ईस्ट से वेस्ट जाने के लिए बिसलेरी जंक्शन, तेली गली, सुर्वे चौक, अंधेरी सबवे-एसवी रोड का रूट लेने को कहा है. वहीं वेस्ट से ईस्ट जाने के लिए जेवीपीडी-सुजय हॉस्पिटल जंक्शन, मिठीबाई कॉलेज, एसवी रोड, कैप्टन गोर फ्लाइओवर- विले पार्ले ईस्ट- आधार जंक्शन और पार्ला जंक्शन का रूट लेने का कहा.

वहीं लोगों की परेशानी इसे देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों की समस्या को कम करने के लिए बीएमसी कमिश्नर को बेस्ट बसों का परिचालन बढ़ाने का निर्देश दिया, जिसके बाद बेस्ट ने बांद्रा और अंधेरी के बीच 39 अतिरिक्त बसें चलाई हैं.

उधर रेलवे की तरफ से हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं.

अंधेरी – 022676 30054

चर्चगेट – 02267622540

बोरीवली- 02267634053

मुंबई सेंट्रल- 02267644257

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बुराड़ीः 11 लोगों के मौत से पर्दा हटा! हैंड राइटिंग से खुलासा

नई दिल्ली। बुराड़ी में 11 लोगों के मौत की घटना ने देश को झकझोर दिया है. मोक्ष प्राप्ति व हरि से मिलने वाली बात करीब-करीब सच होती दिख रही है. क्राइम ब्रांच की जांच जारी है. इस मामले में एक के बाद एक कई पहलू सामने आ रहे हैं. पुलिस ने मौके से दो रजिस्टर बरामद किए हैं, जिनमें 11 मौतों की स्क्रिप्ट लिखी गई थी. इसके हैंड राइटिंग से बहुत कुछ साफ हो सकता है इसलिए पुलिस इसके पीछे लगी हुई है.

मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार परिवार के मुखिया के छोटे भाई ललित ने रजिस्टर में कुछ नोट्स लिखे थे. क्राइम ब्रांच के मुताबिक, दोनों रजिस्टर्स में छोटे भाई ललित की हैंड राइटिंग लग रही है, जिसकी फर्नीचर की दुकान थी. दोनों रजिस्टर में कुछ ऐसी चीजें लिखी हैं, वो एक-एक बातें वारदात से मेल खाती हैं.

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  1. ललित ने रजिस्टर के नोट्स में लिखा था, ‘अंतिम समय में आखिरी इच्छा की पूर्ति के वक्त आसमान हिलेगा, धरती कांपेगी. उस वक्त तुम घबराना मत. मंत्रों का जाप बढ़ा देना. मैं आकर तुम्हे उतार लूंगा. औरों को भी उतारने में मदद करूंगा.’
  2. इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि ललित अपने मरे हुए पिता से मिलता था. उनसे मिलने के दौरान हुई बातों को रजिस्टर में नोट करता था. रजिस्टर में लिखी इन बातों का मतलब ये निकाला जा रहा है कि ये मैसेज ललित को उसके पिताजी ने दिया. ललित ने परिवार के बाकी 10 सदस्यों ऐसा ही करने को कहा.
  3. रजिस्टर में एक जगह लिखा है कि पट्टियां अच्छे से बांधनी हैं. बता दें कि घर से जितने शव बरामद हुए उनमें से एक को छोड़कर सबकी आंखों पर पट्टियां बंधी थी. रजिस्टर में लिखा है कि सात दिन बाद लगातार पूजा करनी है. कोई घर में आ जाए तो अगले गुरुवार या रविवार को चुनें.
  4. दिलचस्प है कि वारदात रविवार की रात हुई. रजिस्टर में लिखा है कि बेब्बे (दादी) खड़ी नहीं हो सकतीं तो अलग कमरे में लेट सकती हैं. बेब्बे शायद उस बुजुर्ग महिला को कहा गया है जिनकी लाश अलग कमरे में बरामद की गई. रजिस्टर में लिखा गया कि मद्धम रोशनी का प्रयोग करना है. बच्चों के कान में क्यों ठूंसी थी रुई, आंखों में टेप चिपका था.
  5. बुराड़ी की यह घटना अपनी इच्छा से मौत व मोक्ष पाने की हसरत की ओर इशारा कर रही है. इसे सुनकर हर कोई हैरान है. लेकिन फिलहाल मृतक परिवार के डायरी के पन्ने व घर में मिले अजीबो-गरीब चीजें यही कहानी बता रही है.
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