मायावती का दावाः बीजेपी ने लीक किया ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो

लखनऊ। ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो सामने आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि बीजेपी घिनौना राजनीति कर रही है. सेना की बहादुरी के बदले में खुद ही वाहवाही बटोरने में लगी है. विकास के मुद्दे पर फेल सरकार ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का सहारा लेकर आगे बढ़ रही है. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है.

मायावती ने शुक्रवार को आरोप लगाते हुए कहा कि ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ के काफी समय बीत जाने के बाद, अब केन्द्र सरकार ने इसको लेकर खुद अपने आप ही इसकी वीडियो/फिल्म मीडिया को जारी की है. जनता ने ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ को सराहा, फिर भी इसको लेकर अपनी ईमानदारी का सबूत देने के लिये इसकी वीडियो/फिल्म मीडिया के माध्यम दिखवानी ही थी तो इनको यह तभी दिखवानी चाहिये थी जब सर्जिकल स्ट्राईक हुआ था.

बीजेपी बिना पूरी तैयारी के ख़ासकर ‘‘नोटबन्दी व जी.एस.टी’’. को लागू की. केन्द्र की भाजपा सरकार अब अपने आपको हर मोर्चे पर फेल होते हुये देखकर आमजनता का ध्यान बांटने के लिये जो इन्होंने ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ का वीडियो वायरल कराया है. अपने राजनैतिक स्वार्थ में यह घिनौना राजनैतिक षड़यन्त्र व हथकण्डा नहीं है तो और क्या है? बता दें कि ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसको लेकर विपक्षी दल भाजपा निशाना साधे हुए हैं.

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PM मोदी के विदेश यात्रा के चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल विदेश यात्रा के कारण चर्चा में रहा. ऐसा कहा जाता है कि पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा विदेश यात्रा के लिए समय बिताया है. फिलहाल एक आईआटीआई के जरिए प्रधानमंत्री के विदेश यात्रा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं जिससे पता चला है कि पीएम ने 355 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

आरटीआई कार्यकर्ता भीमप्पा गडड ने बताया ‘मैंने कुछ साल पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों द्वारा विदेशी यात्राओं के विवरण के लिए भी आवेदन किया था. हाल ही में समाचार रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की भारी आलोचना की गई थी. जिसके बाद ही मैंन उनके विदेश दौरे के विवरण मांगने के लिए आरटीआई के तहत आवेदन किया और मैं आंकड़ों को देखकर चौंक गया.’

41 विदेशी दौरों में उन्होंने 52 देशों की यात्रा की जिसमें 355 करोड़ रुपए खर्च हुए. इन यात्राओं के दौरान पीएम मोदी करीब 165 दिनों के लिए विदेश में रहे. सरकार ने पीएम की नौ दिवसीय त्रिकोणीय यात्रा (फ्रांस, जर्मनी और कनाडा) पर 31,25,78,000 रुपये खर्च किए, जो कि एक ही यात्रा पर खर्च की गई उच्चतम राशि है. वहीं प्रधानमंत्री की भूटान की यात्रा पर सबसे कम खर्च किया. 15-16 जून 2014 में उनकी पहली विदेश यात्रा पर 2,45,27,465 रुपये खर्च किए गए थे. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद पीएम मोदी एक बार फिर आलोचकों के निशाने पर हैं.

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भाजपा नेता ने दलित शिक्षक से पैर पकड़वाया

PC-satyagrah

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दलित शिक्षक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता के पैर छूकर माफी मंगवाने की खबर सामने आई है. इस मामले का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि दलित शिक्षक पुलिस के सामने बीजेपी नेता का पैर पकड़कर माफी मांग रहा है.

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक शिवदान सिंह इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक सत्यभान ने बीते दिनों फेसबुक पर स्वामी विवेकानंद के संबंध में एक विवादित पोस्ट डाली थी. इस पोस्ट पर आपत्ति जाहिर करते हुए इसी जिले के स्थानीय निवासी दीपेश दीक्षित ने आईटी एक्ट के तहत पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी.

शिकायत के आधार पर बीते मंगलवार को स्थानीय पुलिस ने सत्यभान को थाने में बुलवाया था. लेकिन आरोपी शिक्षक के जाने से पहले ही थाना में पुलिस के साथ भाजपा के कई दूसरे स्थानीय नेता पहले से ही थाने में सत्यभान का इंतजार कर रहे थे. सत्यभान के वहां पहुंचने पर विवादित पोस्ट को लेकर दोनों पक्षों में गरमागरमी के बीच बातचीत हुई. इसके बाद माजरा गरमाता देखॉ सत्यभान ने वहां मौजूद लोगों से हाथ जोड़कर माफी मांग ली. भाजपा के स्थानीय नेता कालीचरण गौड़ के पैर छूकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया था. इसके बाद उन्होंने भाजपा नेता के पैर छूकर माफी मांगी.

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DU में तीन गुना फीस वृद्धि पर छात्र संगठनों का विरोध

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में फीस वृध्दि किए जाने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया. साथ ही स्टूडेंट्स ने इसे मनमाना रवैया बताया है. आक्रोशित छात्रों ने कहा फीस-वृद्धि की खुली अनुमति देने वाले कुलपति को तो मानव संसाधन मंत्री का हुक्म बजाना है. देश के राष्ट्रपति, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के विजिटर भी हैं, और प्रधानमंत्री ने फीस-वृद्धि के निर्णय पर आंखें बंद की हुई हैं. क्योंकि उनका मकसद नवउदारवादी नीतियों के तहत देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को नष्ट करके उनकी जगह विदेशी विश्वविद्यालयों व देशी कॉर्पोरेट विश्वविद्यालयों के लिए शिक्षा का बाजार उपलब्ध कराना है.

सोशलिस्ट युवजन सभा (एसवाईएस) मांग करती है कि विश्वविद्यालय/कॉलेज फीस-वृद्धि का फैसला वापस लें  और जिन छात्राओं/छात्रों ने इस सत्र में दाखिला ले लिया है उनके पैसे वापस किये जाएं. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्र हितों की रक्षा का सर्वोच्च मंच दिल्ली विश्विद्यालय छात्र संघ (डूसू) फीस-वृद्धि जैसे गंभीर मसले पर चुप है.

एसवाईएस ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को पहले के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा फीस भरनी पड़ रही है. कालेजों ने मनमाने तरीके से दाखिले की फीस का अलग-अलग पैमाना रखा हुआ है. इस मामले में छात्रों और अभिभावकों की कहीं सुनवाई नहीं है. कालेजों का रवैया है कि दाखिला लेना है तो जीतनी फीस मांगी गई है, भरो वरना अपना रास्ता नापो! सोशलिस्ट युवजन सभा (एसवाईएस) विश्वविद्यालय एवं कॉलेज प्रशासन के फीस-वृद्धि के इस अनुचित फैसले और रवैये का कड़ा विरोध करती है. एसवाईएस की नज़र में फीस-वृद्धि का यह फैसला छात्र-समुदाय के हितों के खिलाफ है. विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के हितों पर यह भारी कुठारघात है.

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कबीर को हाईजैक करने वाले ब्राह्मणों को नसीहत

नई दिल्ली। आज सामजिक क्रांति की मशाल जलाने वाले कबीर साहब का जन्मदिन है. उस समय में जब राजाओं से बख्शीस लेने के लिए कविजन उनकी तारीफों के पुल बांधने वाले छंद गाकर जेबें भर रहे थे, तब कबीर समाज की बुराइयों जैसे- जातिभेद, छुआछूत, साम्प्रदायिकता, अंधविश्वास, कर्मकांड, भेदभाव, हिंसा के विरुद्ध कमर कस के खड़े थे. कबीरदास जुलाहा जाति से थे और कपड़ा बुनने का काम करते थे. वे ना हिंदू थे और न मुसलमान. उन्होंने प्रेम, भाईचारा, हिन्दू-मुस्लिम एकता, मानवता, समानता और सद्भाव का संदेश दिया.

लेकिन ब्राह्मणों ने कबीर को भी हाईजैक कर लिया.

हिंदी साहित्य के मठाधीशों (विशेष रूप से रामचन्द्र शुक्ल, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, नामवर सिंह आदि) ने जमकर कबीर का हिन्दूकरण/हिन्दुआईज़ेशन किया और उन्हें पूरी तरह रामभक्त कवि साबित करके ही माने. इनके जन्म की भी कहानियाँ गढ़ कर उन्हें ब्राह्मण माता-पिता की संतान बताया, कबीर के काव्य में सोच-समझ के अनुसार जो भी बदलाव हुआ उन आयामों के साथ भी जमकर तोड़-मरोड़ हुई. पहले हिंदूकरण हुआ अब भगवाकरण हो रहा.

हालाँकि कबीर जब छंद कहते हैं तो किसी को नहीं छोड़ते. ब्राह्मणों को उन्होंने अपने स्पेशल होने की प्रिवेलेज पर जमकर फटकारा है-

“जो तूं बम्भन- बम्भनी का जाया, आ न बाट हवे क्यों न आया ” यानी अगर तू (ब्राह्मण) इतना ही महान है तो योनि की बजाय किसी और रास्ते क्यों पैदा नहीं हुआ.

“काहे को कीजै पंडे छूत विचार, छूत ही ते उपजा सब संसार.”

“हमरे कैसे लोहू तुमरे कैसे दूध, तुम कैसे बाम्भन पंडे, हम कैसे शुद.”

“एक बूँद ,एकै मल मुतर,एक चाम ,एक गुद.

एक जोती से सब उतपना,

कौ बामन कौ शुद.”

कर्मकांड करते लोगों को सुनाते हुए कहते हैं-

“लाडू लावन लापसी पूजा चढ़े अपार,पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुँह छार.”

“मुंड मुड़ाये हरि मिलें , तो सब कोई लेई मुड़ाय,बार -बार के मुड़ते, भेड़ न बैकुण्ठ जाय.”

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सृजन घोटाले में मोदी घिरे, तेजस्वी ने दस्तावेज खोले

पटना। सृजन घोटाले में एक बार फिर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी घिरे हैं. तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सृजन घोटाले में बड़े खुलासे का दावा किया है. तेजस्वी ने इससे संबंधित दस्तावेज की कॉपी भी ट्विटर पर शेयर की जिसमें कि पैसों की लेनदेने साफ दिख रही है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनको सबकुछ पता था फिर भी खामोश होकर तमाशा देखते रहे.

तेजस्वी यादव द्वारा शेयर किए दस्तावेज में दिखाया गया है कि सृजन घोटाले में प्रयोग किए गए बैंक अकाउंट से सुशील मोदी की रिश्तेदार बहन रेखा मोदी और उर्वशी मोदी के अकांउट में ट्रांजेक्शन हुए हैं. तेजस्वी ने अपने ट्वीट कर सवाल उठाया है कि सृजन घोटाले में सुशील मोदी और नीतीश कुमार भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं तो सीबीआइ और इन लोगों से सवाल क्यों नहीं पूछ रही है?

अपने अगले ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा है कि सरकार की नाक के नीचे 2500 करोड़ रुपये का सृजन घोटाला होता रहा. नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री को इसकी जानकारी नहीं होगी क्या ऐसा संभव है? सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय में इसकी शिकायत क्यों नहीं की.

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कल हड़ताल पर रह सकते हैं दिल्ली मेट्रो कर्मी

नई दिल्ली। दिल्लीवालों की रफ्तार शनिवार को रूक सकती है. प्राप्त खबर के मुताबिक दिल्ली मेट्रो की स्टाफ काउंसिल की मांगें पूरी नहीं होने पर 30 जून को होने वाली मेट्रो कर्मियों की हड़ताल अभी टली नहीं है. इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को श्रम आयुक्त के समक्ष डीएमआरसी प्रबंधन और डीएमआरसी स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है. शुक्रवार को दोनों पक्षों की बैठक फिर बुलाई गई है.

डीएमआरसी स्टाफ काउंसिल के सचिव रवि भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के नॉन एक्जीक्यूटिव 9 हजार कर्मचारी मांगों को लेकर पिछले साल से हड़ताल कर रहे हैं. प्रबंधन में मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था. विरोध में 30 जून को पूर्ण हड़ताल की घोषणा की थी.

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मांग है कि काउंसिल के बजाय डीएमआरसी यूनियन बनाने की अनुमति दी जाए, पे कमीशन के तहत पारिश्रमिक बढ़ाया जाए, एरियर दिया जाए, स्टाफ के ड्यूटी के घंटों के साथ आराम का टाइम भी सुनिश्चित किया जाए और स्टाफ की ट्रांसफर नीतियों को पारदर्शी बनाने समेत कई शामिल हैं. उन्होंने बताया कि शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में अगर मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाया गया तो मेट्रो के 9000 कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे.

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कबीर पर राजनीति को लेकर मोदी-योगी पर भड़कीं मायावती

लखनऊ। संत कबीर का नाम वोट के लिए उपयोग किए जाने पर बहन मायावती ने चुप्पी तोड़ी. 2019 चुनाव पास आते देख बीजेपी ने यूपी में पूर्वांचल कार्ड फेंका लेकिन मायावती ने उसको फेल कर दिया है. बसपा सुप्रीमो ने बताया कि बीजेपी के शासनकाल में संत कबीर नगर के लिए कुछ नहीं किया गया है.

प्रधानमंत्री मोदी व यूपी के सीएम योगी के होने के बावजूद भी राज्य पिछड़ रहा है. मायावती ने कहा कि पूर्वांचल के विकास के मामले में पीएम और प्रदेश की योगी सरकार ने अभी तक जो भी काम किए हैं, वो ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं, जबकि वादा किया गया था कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर विकास की गंगा बहा दी जाएगी.

पुराना चिट्ठा खोलकर…

संत कबीर के नाम पर जनता को गुमराह करने वाली बीजेपी का पुराना चिट्ठा खोलकर बेनकाब कर दिया. बहन जी ने बताया कि बसपा ने संत कबीर नगर जिला बनाकर इसके विकास के लिए अहम काम किया. साथ ही हमनें पूर्वांचल राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था जो कि अब तक लंबित पड़ा है. भाजपा यदि यूपी का विकास चाहती तो फिर इसके लिए विकास के लंबित पड़े विकास की फाइलों को पास क्यों नहीं कर रही है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगहर में 24  करोड़ की संत कबीर अकादमी के शिलान्यास की आड़ में पूर्वांचल की जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं. यह सिर्फ चुनावी स्वार्थ के लिए है जो कि जनता जानती है. पीएम मोदी व योगी ने टोपी ना पहनकर मजार का मजाक बना दिया. उन्होंने नसीहत दी कि टोपी ना सही कम से कम सर पर रूमाल तो रख लेते. संत कबीर नगर में बीजेपी ने जो भी पत्ते फेंके बसपा ने उसको पूरी तरह काटकर जनता का दिल जीत लिया है.

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ये कैसा तिकड़मः चुबल रोल में आशुतोष राणा

नई दिल्ली। बॉलीवुड सिनेमा में स्टार आशुतोष राणा अपने अलग-अलग रोल के लिए ही जाने जाते हैं. फिलहाल वे एक ऐसा रोल लेकर आ रहे हैं जो कि हिंदी सिनेमा में धमाल मचाएगा. वैसे को हम हिंदी फिल्मों में एक ही हीरो के दो रोल देख चुके हैं लेकिन एक ही कलाकार के चार-चार अलग रूप तो शायद ही देखा होगा. अगर एक ही फिल्म में एक ही किरदार के चार धांसू रोल देखना वाकई में यादगार व मजेदार होगा.

वैसे इस रोल को लेकर आशुतोष राणा अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि “किसी भी अभिनेता का परम सौभाग्य होता है जब उसे एक ही फ़िल्म में चार रोल करने का अवसर मिले. और वो भी बिलकुल अलग-अलग भाव, भाषा, परिवेश वाले. परमपूज्य गुरुदेव की कृपा से हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री मुझ पर सदैव ही कृपालु रही है बॉलीवुड ने मुझे लगातार ही विभिन्न क़िस्म के किरदार अभिनीत करने के अवसर प्रदान किए हैं.

श्री इस्माइल दरबार द्वारा निर्देशित फ़िल्म ये कैसा तिगड़म जो 13 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है, ऐसी ही एक फ़िल्म है जिसमें मैं चुबल रोल (Quadruple चार कैरेक्टर) कर रहा हूं. आप मित्रों, प्रशंसकों, शुभचिंतकों, परिचितों, अपरचितों से ‘ये कैसा तिगडम’ का ट्रेलर साझा कर रहा हूँ, इस आशा से कि ये फ़िल्म आपको आनंद देगी और हमें आपका आशीर्वाद मिलेगा.”

‘ये कैसा तिगडम’ का ट्रेलर का ट्रेलर शानदार है. इस फिल्म में आशुतोष राणा का अलग-अलग रूप आपको देखने को विवश करेगा. साथ ही ट्रेलर में राणा के डायलॉग भी काफी मजेदार व जानदार हैं, फिलहाल ट्रेलर तो यही बयां कर रहा है.

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IBPS के लिए भारी वैकेंसी, एक से अधिक पोस्ट पर आवेदन मांगे

नई दिल्ली। आईबीपीएस के लिए भारी वैकेंसी निकली है. इसके लिए जल्द ही आवेदन करना होगा क्योंकि अंतिम तारीख काफी नजदीक है. Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) ने Office Assistant और Officers Scale 1, 2, 3 के पदों पर भर्ती निकाली हैं. बैंक में सरकारी नौकरी करने की चाह रखने वालों के लिए ये मौका अच्छा है. उम्मीदवार एक से ज्यादा पदों पर आवेदन कर सकते हैं. हर पद के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है. इन पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 2 जुलाई है. इच्छुक उम्मीदवारों के लिए और अधिक जानकारी नीचे दी गई है.

कुल पदों की संख्या: 10200

पदों के नाम

ऑफिस असिस्टेंट: 5269 पद

ऑफिसर्स स्केल 1: 3312 पद

ऑफिसर्स स्केल 2: 1459 पद

ऑफिसर्स स्केल 3: 160 पद

योग्यता

  • ऑफिस असिस्टेंट: उम्मीदवार ग्रेजुएट हो और उसे स्थानीय भाषा का ज्ञान हो.
  • ऑफिसर्स स्केल 1: उम्मीदवार के पास बैचलर डिग्री होना जरूरी है, वही एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, फॉरेस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, लॉ, इकनॉमिक्स विषय से ग्रेजुएट उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी. स्थानीय भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य है.
  • ऑफिसर्स स्केल 2: उम्मीदवार के पास 50 फीसदी अंको के साथ बैचलर डिग्री होना जरूरी है, साथ ही उम्मीदवार ने 2 वर्ष बैंक अधिकारी के पद पर काम किया हो.
  • ऑफिसर्स स्केल 3: उम्मीदवार के पास 50 फीसदी अंको के साथ बैचलर डिग्री होनी जरूरी है, बैंक अधिकारी के तौर पर 5 साल का अनुभव भी जरूरी है.

उम्र सीमा

  • ऑफिस असिस्टेंट: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 28 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 1: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 30 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 2: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 साल और अधिकतम आयु 32 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 3: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 साल और अधिकतम आयु 40 साल होनी चाहिए.

उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर होगा. इस जानकारी को पढ़ने के बाद किसी तरह की समस्या आ रही तो भर्ती के संबंध में अधिक जानकारी  www.ibps.in पर जाकर जानकारी लें. यहां पर विस्तृत रूप से जानकारी मिलेगी.

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IND vs IRE: टीम इंडिया के 100वें टी-20 में चमके रोहित-धवन, हुई रिकॉर्ड्स की बारिश

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नई दल्ली। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बुधवार को डब्लिन के मालाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर खेले गए दो मैचों की टी-20 सीरीज के पहले मैच में आयरलैंड को 76 रनों से शिकस्त दी. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 208 रन बनाए. जिसके जवाब में आयरलैंड की टीम 20 ओवरों में नौ विकेट पर 132 रन ही बना सकी.

इस मैच में टीम इंडिया के ओपनिंग बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 61 गेंद में पांच छक्कों और आठ चौकों की मदद से 97 रन की पारी खेलने के अलावा धवन (74) के साथ पहले विकेट के लिए 16 ओवर में 160 रन की साझेदारी की जिससे भारत ने पांच विकेट पर 208 रन बनाए.

जिसके बाद भारत के लिए कुलदीप यादव ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए जबकि युजवेंद्र चहल ने तीन विकेट हासिल किए. यह भारतीय टीम का 100वां टी-20 इंटरनेशनल मैच था. टीम इंडिया की इस धमाकेदार जीत से कई रिकॉर्ड बने हैं.

एक नजर डालते हैं इस मैच में बने रिकॉर्ड्स पर:

1. रोहित शर्मा 13वें ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने भारतीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट (टेस्ट, वनडे और टी-20) में 10,000 से ज्यादा रन बनाए हैं.

2. रोहित और धवन ने 160 रन ओपनिंग साझेदारी की है. भारतीय टीम की यह दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी है. भारतीय टीम की सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी 165 रन की है. जो रोहित शर्मा और केएल राहुल के बीच श्रीलंका के खिलाफ साल 2017 में हुई थी.

3. रोहित शर्मा और शिखर धवन इकलौती ऐसी ओपनिंग जोड़ी है, जिसने इंटरनेशनल टी-20 क्रिकेट में दो बार 150 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप की है.

4. टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में रोहित और धवन की ओपनिंग जोड़ी ने एक हजार रन पूरे कर लिए है.

5. शिखर धवन ने टी-20 क्रिकेट में अपने 6000 रन पूरे कर लिए है. वह ऐसा करने वाले छठे भारतीय बने है. उनसे पहले रैना, रोहित, गंभीर, कोहली और धोनी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं.

6. सुरेश रैना और एमएस धोनी ने भारत का पहला टी-20 मैच भी खेला था और अब दोनों ने भारतीय टीम का 100वां टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेला है.

7. भारतीय टीम ने 10वीं बार टी-20 इंटरनेशनल में 200 से ज्यादा रन का स्कोर खड़ा किया और इस मामले में उसने ऑस्ट्रेलिया के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. भारतीय टीम से ज्यादा टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 200 से ज्यादा का स्कोर साउथ अफ्रीका ने 11 बार किया है.

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कबीर की मजार पर योगी ने टोपी पहनने से किया इंकार

लखनऊ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत कबीर की मजार चादर चढ़ाई. संत कबीरनगर के मगहर में बुधवार को संत कबीर की मजार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चादर चढ़ाने के लिए पहुंचे लेकिन वहां पहुंचने पर मजार के संरक्षक ने टोपी पहनाने की कोशिश की लेकिन योगी ने हाथ रोक लिया. और टोपी नहीं पहनी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुरुवार को संत कबीर की मजार पर चादर चढ़ाए.

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले मुख्यमंत्री योगी तैयारियों का जायजा लेने के लिए मगहर पहुंचे थे. लेकिन टोपी ना पहनने की बात की वजह से योगी विरोधियों के निशाने पर आ गए. सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने योगी पर हमला किया. पार्टी के नेता सुनील साजन ने कहा कि योगी पाखंड में फंसे हुए हैं. ऐसे लोगों को कबीरधाम नहीं जाना चाहिए.

योगी द्वारा टोपी नहीं पहनने पर मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस तरह टोपी नहीं पहनानी चाहिए. लोगों को अपने धर्म का सम्मान करते हुए दूसरों के धर्म का भी आदर करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने यहां से विरोधियों पर जमकर हमला बोला.

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कर्नाटक में सरकार बचाने कांग्रेस-जेडीएस करेगी अहम बैठक

नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.  दोनों पार्टियों के सामने एक के बाद एक मुसीबत खड़ी हो रही है. राहुल गांधी कर्नाटक में सरकार गिरने से बचाने के लिए लगे हुए हैं. लेकिन मतभेद सुलझाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं सूझ रहा है. फिलहाल खबर  आ रही है कि इसके लिए दोनों पार्टी एक बैठक करने वाली है. इसके बाद तय हो जाएगा कि सरकार चलेगी या नहीं.

सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाएःसिद्धरमैया

प्राप्त जानकारी के अनुसार बजट और कई दूसरे मुद्दे पर दोनों पार्टियों में मतभेद जारी है. बढ़ते मतभेद के बीच रविवार को कांग्रेस और जेडीएस के वरिष्ठ नेता बेंगलुरु में बैठेंगे ताकि मतभेद ख़त्म हो सके. बता दें कि सिद्धरमैया ने एक दिन पहले कहा था कि गठबंधन में आये तनाव के चलते उन्हें संदेह है कि यह सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए. सिद्धरमैया ने कहा था कि यह (सरकार) तब तक रहेगी जब तक संसदीय चुनाव पूरे नहीं हो जाते. उसके बाद सभी घटनाक्रम होंगे.

कर्नाटक उप मुख्मंत्री परमेश्वरा ने सिद्धरमैया के इस दावे पर कोपल में संवाददाताओं से कहा कि अध्यक्ष के तौर पर मैं यह स्पष्टीकरण दे रहा हूं कि हम पांच साल तक इस सरकार को चलाने के लिए सहमत हुए हैं. अन्य लोग बाहर जो बात कर रहे हैं, वह अप्रासंगिक हैं. उन्होंने कहा , कि बाहरी लोग अलग तरह से बात करते हैं. वैसे देखना है कि रविवार की बैठक में क्या फैसलें लिए जाते हैं. इसके बाद साफ हो जाएगा कि कर्नाटक में सरकार गिरेगी या चलेगी.

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नारियल तोड़ते वक्त पेड़ पर हुई मौत, वीडियो वायरल

कोलकाता। नारियल के पेड़ पर चढ़े एक व्यक्ति की ऊपर ही मौत हो गई. काफी देर तक पेड़ पर ही आदमी को लटका देख लोगों ने आसपास के लोगों को बुलाया. फिर पेड़ के ऊपर से लाश उतारी गई. मामला पश्चिम बंगाल के वर्धवान जिले के काटवा इलाके का है. इस घटना का एक वीडियो सामने आया है. जिसमें व्यक्ति का लाश उतारा जा रहा है. और लोग काफी चिल्ला रहे हैं.

नेटवर्क18 की खबर के अनुसार स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यक्ति नारियल तोड़ने का काम करता है. हर दिन की तरह वह नारियल तोड़ने पेड़ पर चढ़ा था. संभावना जताई जा रही है कि पेड़ के ऊपर ही उसकी तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. खबर सामने आने के बाद लोग अचंभित हैं लेकिन वीडियो में साफ दिख रहा है कि नारियल के पेड़ से मृत व्यक्ति का शव उतारा जा रहा है.

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लैंडिंग से पहले प्लेन क्रैश, पांच की मौत

मुंबई। लैंडिंग करने से पहले ही एक प्लेन क्रैश कर गया. इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई है. इस घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई. न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुंबई के घाटकोपर में एक चार्टर्ड प्लेन रिहायशी इलाके पर क्रैश हुआ है. कुछ लोगों के घायल होने की बात भी कही जा रही है.

बीजेपी के विधायक राम कदम ने कहा है कि प्‍लेन में चार लोग सवार थे जिनकी इस हादसे में मौत हो गई है. इस विमान के क्रैश होने के बाद उसमें आग लग गई. और कुछ दूर तक आग का धुआं दिखाई दे रहा है. यह बीचक्राफ्ट किंग एयर सी 90 टर्बोप्रॉप विमान था. यह विमान निर्माणाधीन इमारत के पार दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. आग बुझाने के लिए कई दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई है और जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है. इस घटना की जांच हो रही है. प्लेन के क्रैश होने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है.

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दलित महिलाओं के कपड़े फाड़ कर घसीटा, हिंदू संगठनों से जुड़े जाटों ने मचाया कोहराम

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। हिंदू संगठनों से जुड़े जाटों ने खुलेआम दलित महिलाओं को कपड़े फाड़कर उनको घसीटा व मारापीटा. यहां तक की इनको गर्भवती महिला तक को ना छोड़ा और उसे भी अपना शिकार बनाया. इनके तांडव को पूरा गांव तमाशा बनकर देखता रहा और कुछ ही देर में इलाका खून से सन गया. प्राप्त खबर के मुताबिक 27 जून की सुबह भीलवाड़ा शहर के वार्ड नंबर एक के मंगलपुरा के दलितों व जाटों के बीच जमकर मारपीट हुई.

ऐसा कहा जा रहा है कि यहां पर जाट की संख्या ज्यादा है. साथ ही ज्यादातर जाट युवा शिवसेना, बजरंग दल, विहिप जैसे संगठनों में सक्रिय नजर आते हैं.

पीड़िता सायरी बलाई द्वारा दर्ज करवाई गई रिपोर्ट में बताया गया कि सुबह 8:30 बजे उनके ही पड़ोसी शिवराम जाट, शंकर लाल जाट, गोपाल जाट, राधेश्याम जाट और राजू जाट सहित कुछ अन्य लोगों ने लाठियों से लैस होकर उनके घर में जबरन प्रवेश किया और जातिगत गालियां देते हुए अचानक हमला बोला.

एक गर्भवती दलित महिला के पेट और…

नवजीवन की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित दलितों ने आरोप लगाया है कि लठैत जाटों ने दलित महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया और उन्हें घसीटकर पीटते हुए घरों से बाहर निकाला और सार्वजनिक रूप से उनके कपड़े फाड़ डाले. एक आरोपी तो कपड़े खोलकर एक दलित लड़की पर बैठ भी गया. वहीं, एक गर्भवती दलित महिला माया के पेट और सिर में चोट लगने की वजह से वह गंभीर रूप से घायल हो गई. उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. इस हमले में एक दर्जन दलित जख्मी हुए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 मिनट तक हमलावर लठैत दलितों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते रहे.

शांति भंग करने की आशंका में फिलहाल दो जाट युवकों शंकर लाल और शिवराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं, पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी रिपोर्ट लेने में भी पुलिस ने जानबूझकर देरी की है. जबकि मंगलपुरा के जाट समुदाय का कहना है कि मारपीट की शुरुआत दलितों की ओर से की गई थी.

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क्या सुरक्षा को लेकर भेदभाव के शिकार हैं राष्ट्रपति कोविंद

चौबीस घंटे के समाचार इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा को लेकर रोज खबरें दिखा रहे हैं. खबरों में आ रहा है कि पीएम मोदी की जान खतरे में है और अब उनका सुरक्षा घेरा इतना मजबूत हो जाएगा जिसमें मंत्रियों तक का जाना मुश्किल हो जाएगा. मीडिया में खबर आ रही है कि अब बड़े-बड़े मंत्री भी पीएम मोदी से बमुश्किल मिल पाएंगे. प्रधानमंत्री तक वही मंत्री पहुंच पाएंगे जिसको एसपीजी कमांडो इजाजत देंगे.

लेकिन दुसरी तरफ कुछ दिनों पहले एक चिंताजनक खबर आई. तीनों सेनाओं के प्रमुख देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंघ लग गई थी. ओडिशा के विख्यात जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का मुक्की हो गई थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था.

राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ 18 मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी. राष्ट्रपति भवन ने घटना पर गहरी निराशा जताई है.

यह चौंकाने वाला मामला श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) द्वारा दुर्व्यवहार के लिए अपने 3 आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद सामने आया है. मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे.

सवाल है कि एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर इतनी सजग है लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगातार खामी सामने आई है. पिछले दिनों एक मंदिर में यात्रा के दौरान उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा करनी पड़ी थी तो दूसरी ओर जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा को इसलिए तो हल्के में नहीं लिया जा सकता कि उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कमजोर है. क्योंकि राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंध के बावजूद इस पर उतनी बहस नहीं हुई, जितनी प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर हो रही है. सवाल यह भी है कि अगर आज लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति होते या फिर कल वैंकेया नायडू राष्ट्रपति बनेंगे तो उनकी सुरक्षा ऐसी ही होगी?

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दलित सरपंच समेत 24 दलित परिवार ने छोड़ा गांव

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। देश के तमाम राज्यों के दलित सवर्णों की गुंडई से परेशान होकर घर छोड़ने को विवश हैं. पलायन के अलावा दलित हिंदू धर्म छोड़कर बौध्द धर्म अपना रहे हैं. दलितों की ऐसी स्थिति को सरकार तमाशबीन बनकर देख रही है. अभी हाल ही में खबर सामने आई है कि महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के रुद्रवाडी गांव में सवर्णों और दलितों के झगड़े के कारण एक गांव के सरपंच समेत 24 दलित परिवारों को अपना घर छोड़ दिया.

झगड़ा एक प्रेम प्रसंग को लेकर शुरू हुआ था. लेकिन केवल एक यही कारण नहीं है. दलितों को फैंसी कपड़े से लेकर, बाइक, मंदिर जाने, धूमधाम से शादी करने पर इस गांव के सवर्ण बौखला जाते थे और दलितों के साथ मारपीट करते. बीबीसी ने जब इसकी पड़ताल की तो कई चीजें सामनें आईं.

गांव छोड़ चुकी दलित सरपंच शालू बाई शिंदे अपना दर्द बयां करते हुए बताती है कि मैं तो बस नाम की सरपंच हूं. यहां के बदमाश सवर्ण अपने मनमाने ढंग से गांव पर राज करते हैं. कुछ बोलो तो जान से मारने की धमकी देते हैं. शालू बाई शिंदे कहती हैं कि ”इस तरह के झगड़े अब तक तीन बार हो चुके हैं. इससे पहले दो बार मतांग जाति के गुणवंत शिंदे इसका कारण बने थे.”

शालू बाई शिंदे के बेटे ईश्वर कहते हैं, “हम अब गांव वापस नहीं जाना चाहते. हम वहां कभी सम्मान के साथ नहीं रह पाएंगे. यहां तक कि हमारे नए कपड़े पहनने पर या रिक्शे पर तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बजाने पर भी वो लोग आपत्ति जताते हैं.” उन्होंने कहा, “मेरी कज़न मनीषा वैजीनाथ शिंदे की शादी की हल्दी की रस्म के लिए मारूति मंदिर गए. तब कुछ लड़के आए और हमें पीटने लगे. तब हम वहां से चले गए और अगले दिन गांव में शादी हुई.”

इससे पहले एक दलित लड़का व सवर्ण लड़की के बीच प्रेम प्रसंग था. इसको लेकर भी जमकर मारपीट की गई.

यहां सवर्ण मराठा जाति और अनुसूचित मतांग जाति के बीच झगड़े के बाद 24 दलित परिवार अपना घरबार छोड़कर फ़िलहाल गांव से 25 किलोमीटर दूर उदगीर के पास एक पहाड़ी पर बने टूटे-फूटे हॉस्टल में रह रहने को विवश हैं. पता नहीं सरकार-प्रशासन इनके लिए कब जागेगी?

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PM की सुरक्षा चौकस, राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की

नई दिल्ली। चौबीस घंटे के समाचार इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा को लेकर रोज खबरें दिखा रहे हैं. खबरों में आ रहा है कि पीएम मोदी की जान खतरे में है और अब उनका सुरक्षा घेरा इतना मजबूत हो जाएगा जिसमें मंत्रियों तक का जाना मुश्किल हो जाएगा. मीडिया में खबर आ रही है कि अब बड़े-बड़े मंत्री भी पीएम मोदी से बमुश्किल मिल पाएंगे. प्रधानमंत्री तक वही मंत्री पहुंच पाएंगे जिसको एसपीजी कमांडो इजाजत देंगे.

लेकिन दुसरी तरफ कुछ दिनों पहले आई एक खबर, जो चिंताजनक है. तीनों सेनाओं के प्रमुख देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंघ लग गई थी. ओडिशा के विख्यात जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का मुक्की हो गई थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था. अब इस घटना पर राष्ट्रपति भवन ने गहरी निराशा जताई है.

राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ 18 मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी.

यह चौंकाने वाला मामला उस समय सामने आया जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) ने दुर्व्यवहार के लिए अपने 3 आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है, जिससे इस बात की पुष्टि हो गई है. मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे.

सवाल है कि एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर इतनी सजग है लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगातार खामी सामने आई है. पिछले दिनों एक मंदिर में यात्रा के दौरान उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा करनी पड़ी थी तो दूसरी ओर जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा को इसलिए तो हल्के में नहीं लिया जा सकता कि उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कमजोर है. सवाल यह भी है कि अगर आज लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति होते या फिर कल वैंकेया नायडू राष्ट्रपति बनेंगे तो उनकी सुरक्षा ऐसी ही होगी?

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नीतीश को मनाने बिहार जाएंगे अमित शाह

nitishनई दिल्ली। बीजेपी व जदयू का गठबंधन टूटने के कगार पर दिख रहा है. महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर करने के बाद नीतीश कुमार को मनाने के लिए बीजेपी कदम उठाने जा रही है. खबर मिल रही है कि नाराज नीतीश को राजी कराने के लिए अमित शाह बिहार जाएंगे. इस दौरान फंसाद के मुद्दे पर दोनों के बीच चर्चा की जाएगी.

सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. 2015 विधानसभा चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीट जीतने वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सीट बंटवारे में इस परिणाम को आधार बनाने की मांग पर अड़ी हुई है. हालांकि भाजपा सूत्रों ने इस फॉर्मूले को यह कहकर नकार दिया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व राजद से गठबंधन करने के कारण जदयू को ज्यादा सीट मिली थी. भाजपा और जदयू के बीच इन्हीं बिगड़ते हालात को थामने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 11 जुलाई को पटना जाएंगे. वहां जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं लेकिन यह मुलाकात कब होगी इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है.

मंगलवार को जदयू के नेता संजय सिंह ने कहा था कि भाजपा के वह नेता जो हमेशा हेडलाइंस में बने रहना चाहते हैं उन्हें नियंत्रण में रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 के चुनाव में बहुत बड़ा अंतर है. भाजपा को बहुत अच्छे से पता है कि बिहार में नीतीश कुमार के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. अगर भाजपा को सहयोगी पार्टी की जरूरत नहीं है तो वह बिहार में सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है.

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