चौकीदार उमेश पासवान की कविता संग्रह को साहित्य अकादमी पुरस्कार

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नई दिल्ली। बिहार के मधुबनी जिला के लौकही थाना के चौकीदार उमेश पासवान की कविता को गांव-घर में कोई नही सुनता है. लेकिन कविता को अपन जिंदगी मानने वाले उमेश पासवान पुलिसिया नौकरी से समय निकालकर गंवई जीवन को अपने शब्दों में पिरोते हैं और अपनी मां को जबरन सुनाते फिरते हैं. इनकी लग्न रंग लाई और उमेश को उनके कविता संग्रह ‘वर्णित रस’ के लिए मैथिली भाषा में साल 2018 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिला है.

उमेश पासवान नवटोली गांव के चौकीदार हैं. गांव के माहौल में जो देखते हैं, वो लिख देते हैं. 34 साल के उमेश पासवान मैथिली भाषा में साल 2018 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार पाकर खुश हैं. 22 भाषाओं में मिलने वाला साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 35 साल से कम उम्र के साहित्यकार को मिलता है. विद्यानाथ झा मैथिली भाषा की कैटेगरी में अवॉर्ड तय करने वाली तीन सदस्यीय ज्यूरी मेंबर में से एक हैं.

उमेश के जीवन के उतार-चढ़ाव ने उनकी कविता को जन्म दिया. इनके पिता खखन पासवान चौकीदार की नौकरी करते थे और मां अमेरीका देवी को खेतों में मज़दूरी करती हैं. बाद में पिता खखन पासवान को लौकही थाने में चौकीदार की नौकरी मिली जो उनकी मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर उमेश को मिल गई.

साहित्य अकादमी यहां कोई नहीं समझता…

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उमेश बताते भी हैं, “साहित्य अकादमी यहां कोई नहीं समझता. हम मधुबनी, दिल्ली, पटना सब जगह अपनी कविता सुनाते हैं, लेकिन हमारे गांव में कोई नहीं सुनता. जब किसी ने नहीं सुना तो हमने कांतिपुर एफएम और दूसरे रेडियो स्टेशनों पर कविता भेजनी शुरू की ताकि कम से कम रेडियो के श्रोता तो मेरी कविता सुनें.” कांतिपुर एफ़एम नेपाल से प्रसारित होने वाला रेडियो स्टेशन है. दो बच्चों के पिता उमेश के अब तक तीन कविता संग्रह ‘वर्णित रस’, ‘चंद्र मणि’, ‘उपराग’ आ चुके हैं. उमेश मैथिली साहित्य में बहुत कुछ लिखना चाहते हैं इसके लिए वे चौकीदारी के साथ-साथ कविता लेखन को भी जारी रखेंगे.

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बिहार की ‘असली’ टॉपर मुसहर गर्ल की कहानी

पटना। बिहार का रिजल्ट आने के बाद मीडिया का ध्यान केवल टॉपर पर रहता है. लेकिन इसमें से कई ऐसे स्टूडेंट होते हैं जो काफी मशक्कत व बेड़ियों को तोड़कर शिक्षा प्राप्त करते हैं. इस साल 26 जून को बिहार में दसवीं का रिजल्ट आ गया. हर तरफ उन बच्चों का जिक्र है जो अपने राज्य या अपने जिले के टॉपर हैं. ऐसे में कहलगांव के पत्रकार प्रदीप विद्रोही एक अलग ही कहानी लेकर आये हैं.

यह कहानी महादलित जाति के कोमल की है.

कोमल को तो वैसे तो सिर्फ 42.4 फीसदी अंक आये हैं. मगर उसकी कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है कि 150 साल से बसे भागलपुर के घोघा के मुशहरी टोला की वह पहली मैट्रिक पास है. 50-60 घरों के उस टोले में आजतक कोई चौथी-पांचवी से आगे पढ़ ही नहीं पाया. लेकिन कोमल ने इस दायरे को तोड़कर मैट्रीक पास कर नई कहानी लिखी है.

कोमल का मैट्रिक पास होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जैसी उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है उसमें एक लड़की का पढ़ना जंग जीत लेने जैसा है. पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और मां ईट-भट्ठे पर काम करती है. घर में पांच बहनें और एक भाई है. मां बीमार हुई तो उसके बदले मजदूरी करने कोमल को ईट भट्ठे पर जाना पड़ता है. नहीं तो घर और भाई-बहनों को संभालना, खाना-पकाना. गांव का समाज इतना दंभी और जातिवादी है कि इस टोले के लोगों पर कई किस्म के जातिवादी प्रतिबंध लगाता है.

टॉपरों से बड़ी उपलब्धि

आज भी इस टोले में किसी की मौत होती है तो लोग शवयात्रा नहीं निकाल पाते. लाश को कपड़े में लपेट कर चुपके से ले जाना पड़ता है. इन परिस्थितियों में महादलित समुदाय की एक लड़की अगर पढ़कर मैट्रिक पास कर जाती है तो वह टॉपरों से बड़ी उपलब्धि है.

बड़ी बहनों ने उतनी पढ़ाई नहीं की, मगर कोमल इन तमाम बाधाओं के बीच लगातार पढ़ती रही. उस परिवेश के बीच जहां हर सुबह यह फिक्र की जाती थी कि शाम के खाने का किसी तरह इंतजाम हो जाये, वह रोज समय निकाल कर स्कूल जाती रही. और जब उसने दसवीं का फार्म भरा तो पता चला कि अपने टोले से इस परीक्षा में शामिल होने वाली वह पहली लड़की है.

फिर प्रदीप विद्रोही कोमल को लेकर फिक्रमंद हो गये.

प्रभात खबर में उसकी कहानी छापी तो कहलगांव के व्यापारी मदद करने के लिए तैयार हो गये. विद्रोही जब भी उधर से गुजरते एक कॉपी या कलम लेकर जाते और कोमल को दे आते. सीख देते कि पढ़ लो बेटा यही काम आयेगा.

कोमल को पढ़ने में मन लगता था और वह होशियार भी थी. मगर अपने जीवन की परेशानियों के बीच उसे इतना कम समय मिलता कि वह हमेशा डरती रहती कि पास कर पायेगी या नहीं. उसने कभी नहीं सोचा था कि टॉप करेगी. वह पास करना चाहती थी. और वह पास कर गयी, इतने से ही वह खुश है.

एक ओर जहां सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा देने वाले संपन्न घर के बच्चे टेन सीजीपीए लाने के लक्ष्य के साथ पढ़ाई करते हैं, वहीं बिहार जैसे राज्य स्तरीय बोर्ड का महत्व इसलिए है कि कोमल जैसी लड़कियां भी पढ़ लिखकर आगे बढ़ती है. इसलिए कोमल का मैट्रिक पास होना मेरे लिए किसी के सीबीएसई टॉप करने से बड़ी खबर है.

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इंग्लिश चैनल को पार करने वाले सत्येंद्र जाटव बनें एशिया के पहले दिव्यांग तैराक

नई दिल्ली। सत्येंद्र सिंह जाटव ने गरीबी व दिव्यांग होने के बावजूद भी समुद्र पार ना केवल देश-दुनिया में नाम रोशन किया है. सत्येंद्र सिंह का पैर काम नहीं करता है यानी कि 75 फीसदी तक इनका शरीर काम नहीं करता है. मुश्किल केवल इतनी ही नहीं थी ट्रेनिंग लेने के लिए पैसे नहीं थे. इन तमाम मुश्किलों को मात देने के बाद सत्येंद्र ने समुद्र को भी मात दे दी.

34Km का इंग्लिश चैनल पार

सत्येंद्र सिंह जाटव मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं. पैरास्विमर सत्येन्द्र ने ब्रिटेन और यूरोप के बीच के समुद्र यानि इंग्लिश चैनल को पार करके इतिहास रच दिया है. स्विमर सत्येन्द्र ने 12 घंटे और 26 मिनट में 34 किलोमीटर का इंग्लिश चैनल पार किया. रिले की तर्ज पर सत्येन्द्र ने अपने तीन साथियों के साथ ये उपलब्धि हासिल की है. महाराष्ट्र के चेतन राउत, बंगाल के रीमो शाह और राजस्थान के जगदीश चन्द्र ने तैराकी की. इसके साथ ही सत्येन्द्र इंग्लिश चैनल पार करने वाले एशिया के पहेल पैरास्विमर (दिव्यांग तैराक) भी बन गए है. यही नहीं पूरे एशिया में भी यह खिताब हासिल करने वाले वह पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं.

इससे पहले सत्येंद्र तैराकी का सबसे बड़ा खिताब विक्रम अवॉर्ड से नवाजे जा चुके हैं. इसके अलावा करीब तैराकी स्पर्धाओं में अबतक 16 मैडल जीते हैं.

पैरों ने दे दिया जबाव

दरअसल, सत्येंद्र बचपन से ही दिव्यांग हैं. जब वह 15 दिन के थे उन्होंने ग्लूकोज ड्रिप के रिएक्शन के चलते अपने पैर खो दिेए. गरीबी के कारण भी इनका इलाज ठीक ढंग से ना हो सका. सतेंद्र को बचपन से ही तैराकी का शौक था,  लेकिन दिव्यांगता के चलते शुरुआती दौर में उन्हें खासी समस्याओं का सामना करना पड़ा. पर कमजोर शरीर को अपन ताकत बनाई और सबसे पहले अपने गांव की बैसली नदी में तैराकी की. इसके बाद तैराकी का हुनर निखरने लगा लेकिन इसके लिए उनको ट्रेनिंग की जरूरत भी थी. इसलिए ट्रेनिंग के लिए सत्येंद्र ने अपने पास बचे घर को गिरवी रखकर दाव पर लगा दिया. सत्येंद्र ने पहला मैडल कलकत्ता में 2009 में हासिल किया. और आज इनके जज्बे को दुनिया सलाम कर रही है.

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कुएं से पानी भरने पर 25 दलितों को गांव से निकाला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। योगीराज में दलितों पर अत्याचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. फिलहाल खबर सामने आई है कि ऊंची जाति के कुएं से पानी भरने पर दलित परिवार को गांव से निकाल दिया गया है. दलित परिवार कई दिनों से बेघर होकर भटक रहे हैं. पुलिस प्रशासन की ओर से भी कोई मदद नहीं मिल पाई है. पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि गांव में घुसे तो ऊंची जाति के लोग जान से मार देंगे.

सबकुछ कर दिया बंद…

मामला टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र के सरकनपुर गांव का है. इस गांव में पानी की विकट समस्या है. नवभारतटाइम्स की खबर के मुताबिक दलित मुन्ना लाल वंशकार के परिवार की महिला ने पीने के लिए कुएं से पानी भर लिया. इसके बाद ऊंची जाति वाले बौखला गए और पंचातय बुलाई. इस पंचायती कंगारू कोर्ट ने फरमान जारी करने के बाद गांव की दुकानों से सामान खरीदना, किसीसे बात करना, चक्की वाला आटा नहीं पीसना बंद कर दिया. पंचायत ने फैसला लेकर दो साल के लिए गांव से बाहर कर दिया.

परिवार के अन्य सदस्य नाथूराम वंशकार का कहना है, ‘गांव के लोग छुआछूत मानते हैं, जिसके कारण हमें दो साल के लिए गांव से बाहर कर दिया गया है. गांव में खाने को कुछ मिल नहीं रहा, पानी भरने की मनाही है. हम पुलिस के पास गए, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई.’

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के जांच अधिकारी फूल सिंह परिहार का कहना है, ‘गांव से मारपीट की शिकायत आई थी. पंचायत या गांव से बाहर करने का कोई मामला नहीं है.’ जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि पीड़ित वंशकार परिवार के 23 सदस्य गांव नहीं जा पा रहे हैं, उनके घरों में ताले लटके हुए हैं. पुलिस के इसी रवैये से पीड़ित परिवार इंसाफ से वंचित रह गया है.

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शादी में नाच रहे दलित युवक को मारी गोली

प्रतीकात्मक फोटो

पटना। अब दलितों का नाचना-गाना भी रास नहीं आ रहा है. बिहार के मुजफ्फरपुर में शादी में नाचने को लेकर हुए विवाद में एक दलित युवक की गोली मार कर हत्या कर दी गई है. इसके बाद नाराज गांव वालों ने आधा दर्जन गाड़ियों को गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और लड़की वाले के घर पर भी हमला किया.

पुलिस ने गुरुवार 28 जून को बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. जिले के डीएसपी शंजर झा ने बताया कि माहौल तनावपूर्ण है लेकिन स्थिति पर काबू पा लिया गया है. जिला प्रशासन ने गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया है.

यह घटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले सरैया थाना क्षेत्र के अभीछपरा गांव की है. शादी में नाचने को लेकर हुए विवाद में बुधवार को नवीन मांझी नाम के शख्स को गोली मार दी गई. पुलिस के मुताबिक गांव के कुछ लोगों को शादी में नहीं नाचने की चेतावनी दी गई थी, जिसके बावजूद भी नवीन शादी में नाचने पर जोर दे रहा था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया और उसी दौरान नवीन को गोली मार दी. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

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डॉ. आंबेडकर ने गांधी से क्यों कहा कि मेरी कोई मातृभूमि नहीं है?

डॉ. आंबेडकर भारतमाता की अवधारणा या भारत सभी भारतीयों का है, इस भावात्मक कथन में बिल्कुल विश्वास नहीं रखते थे. उनका मानना था कि भारत के भीतर एक बहिष्कृत भारत है. इसी के चलते उन्होंने भारतमाता या भारतीय मातृभूमि के बरक्स बहिष्कृत भारत की अवधारणा रखी. उन्होंने अपने जीवन के उद्देश्य की घोषणा इन शब्दों में किया, “युगों से दबे हुए दरिद्र बहिष्कृतों को बंधनमुक्त करना है.”

वे यहां तक कहते थे कि बहिष्कृत भारत के लोगों की कोई मातृभूमि नहीं है.

जब द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के बाद गांधी और अम्बेडकर की पहली मुलाकात हुई, तो गांधी ने अम्बेडकर से कहा कि डॉ. अम्बेडकर भारत आपकी मातृभूमि है, तो इसके जवाब में अम्बेडकर ने कहा कि “आप कहते हैं कि यह मेरी मातृभूमि है, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं कि मेरी कोई मातृभूमि नहीं है. जिस देश में कुत्ते-बिल्ली के समान भी हमें जीने नहीं दिया जाता, उन्हें जो सुविधाएं मिल रही हैं, वह भी हमें नसीब नहीं.

अस्पृश्यों को मानवता की चेतना और स्वाभिमान दोनों से वंचित कर दिया गया है. इस देश ने हमारे साथ इतना अक्षम्य अपराध किया है कि हम उसके विरोध में कितना बड़ा द्रोह का कार्य करें, फिर भी उसके पाप की जिम्मेदारी हमारे सिर पर नहीं आएगी. अतः कोई मुझे अर्राष्ट्रीय कह दे तो भी मैं बुरा नहीं मानूंगा, क्योंकि मेरे अराष्ट्रवाद के लिए ही मुझे अराष्ट्रीय कहते हैं. मेरे पाप के वे ही उत्तरदायी हैं. मेरा कोई दोष नहीं है. लेकिन मेरे पास सद्विवेक बुद्धि है.

मैं राष्ट्र या राष्ट्र धर्म का उपासक नहीं हूं, किंतु अपनी विवेक बुद्धि का उपासक हूं. जैसा आप कहते हैं कि मेरे द्वारा राष्ट्र की सेवा की जा रही है. उसका श्रेय मेरी राष्ट्र भक्ति को नहीं, बल्कि मेरी विवेक बुद्धि से पैदा प्रेम को है. जिस राष्ट्र में मेरी अछूत जनता की मानवता धूल के समान पैरों तले रौंदी जा रही है, उस मानवता को प्राप्त करने के लिए, इस राष्ट्र को यदि मैंने कोई हानि भी पहुंचाई है तो पाप नहीं पुण्य कहलायेगा….इस राष्ट्र को हानि पुहंचाए बिना अपनी अछूत जनता का कैसे कल्याण किया जा सकता है, इसी चिंता में मैं हूं.”

आज भी भारतीय राष्ट्र और राज्य किसी भी तरह दलितों का राष्ट्र या राज्य नहीं बना है. मैं अरूनधती राय के इस कथन से अक्षरश : सहमत हूं कि भारतीय राज्य कार्पोरेट उच्च जातियों का हिंदू राज्य है. इस देश के संसाधनों और असली सत्ता के मालिक उच्च जातीय हिंदू मर्द हैं. दलित, पिछड़े, आदिवासी, औरतें, अल्पसंख्य समुदायों पर उनका पूर्ण वर्चस्व और नियंत्रण है. अभी भी ये वंचित समुदायों का यह देश नहीं, इसके मालिक कार्पोरेट उच्च जातीय हिंदू मर्द हैं.

कोई यह पूछ सकता है कि इस देश का प्रधानमंत्री पिछड़े वर्ग (शूद्र) का और राष्ट्रपति दलित (अतिशूद्र) समुदाय का है, फिर भी इस देश के मालिक कैसे उच्च जातीय मर्द हैं. इसका सीधा और प्रत्यक्ष उत्तर यह है कि इस देश के इस समय दो ही शक्तियां चला रही हैं, उच्च जातीय कारपोरेट और उच्च जातीय संघ.

लेखक- रामू सिद्धार्थ, (लेखक पत्रकार हैं.)
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बाबासाहेब की प्रतिमा टूटने पर अम्बेडकरवादियों ने किया बवाल

जयपुर। एक बार फिर असमाजिक तत्वों द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने की खबर सामने आई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में बाबा साहेब डॉ. बीआर अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़ दी थी. घटना की जानकारी मिलते ही रात में ही भीम सैनिक व अंबेडकर आंदोलनकारी सैकड़ों की संख्या में इकठ्ठे हो कर असमाजिक तत्वों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

युवाओं में आक्रोश देखकर पुलिस ने प्रशासन मामला शांत कराने में जुटी रही लेकिन प्रतिमा नहीं लगने तक युवा गिरफ्तारी की मांग पर डटे रहे. हालांकि पुलिस गिरफ्तारी तो ना कर पाई लेकिन मामले पर काबू पाने के लिए आनन-फानन में रातों रात खंडित प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा लगवा दी.

भीम आर्मी ने एफआईआर दर्ज करवाई. शुक्रवार की सुबह तक तो एरिया पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. सुबह में फिर वापस भीम सैनिक इकट्ठे हुए और आरोपियों को गिरफ्तार करवाने के लिए पुलिस थाना मालवीयनगर जयपुर में सभी युवा साथियों ने विरोध प्रदर्शन करके दो एफआईआर दर्ज करवाई व अल्टीमेटम दिया कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक के लिए प्रतिमा के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे रहेंगे. इसके साथ ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. भीम आर्मी के अध्यक्ष अमित लहरी (जयपुर), भीम आर्मी प्रदेश सचिव भागचन्द बैरवा, निवाई राहुल कलोशिया सवाई माधोपुर आदि लोग मौजूद थे.

किशन संगत

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चारा घोटालाःलालू को कोर्ट ने दी बड़ी राहत, राजद में खुशी की लहर

File Photo

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में बड़ी राहत मिली है. लालू यादव अब करीब दो माह तक जेल नहीं जाएंगे. लालू चारा घोटाले के आरोप में रांची जेल में सजा काट रहे हैं, लेकिन जेल जाने के बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहा, जिसके बाद उनके अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ा दी गई है. चारा घोटाले के आरोप में उन्हें पांच साल कैद और 25 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है.

एएनआई की खबर के मुताबिक स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें रांची हाईकोर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह ने 17 अगस्त तक के लिए जमानत दे दी है. उनकी जमानत पर अब अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी. लालू यादव के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी जमानत अवधि को 6 हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

जमानत मिलने के बाद लालू यादव के वकील अभिषेक सिंघवी ने मीडिया से कहा कि 26 तारीख को ही यादव का ऑपरेशन हुआ है. जिसके कारण उन्हें ठीक होने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा. बता दें कि बीमारी के कारण 11 मई को कोर्ट से लालू यादव को 6 हफ्तों की जमानत मिली थी. जिसके बाद यादव इलाज के लिए मुंबई और बेंगलुरु भी गए थे.

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मायावती का दावाः बीजेपी ने लीक किया ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो

लखनऊ। ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो सामने आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि बीजेपी घिनौना राजनीति कर रही है. सेना की बहादुरी के बदले में खुद ही वाहवाही बटोरने में लगी है. विकास के मुद्दे पर फेल सरकार ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का सहारा लेकर आगे बढ़ रही है. इसकी जितनी निंदा की जाए कम है.

मायावती ने शुक्रवार को आरोप लगाते हुए कहा कि ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ के काफी समय बीत जाने के बाद, अब केन्द्र सरकार ने इसको लेकर खुद अपने आप ही इसकी वीडियो/फिल्म मीडिया को जारी की है. जनता ने ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ को सराहा, फिर भी इसको लेकर अपनी ईमानदारी का सबूत देने के लिये इसकी वीडियो/फिल्म मीडिया के माध्यम दिखवानी ही थी तो इनको यह तभी दिखवानी चाहिये थी जब सर्जिकल स्ट्राईक हुआ था.

बीजेपी बिना पूरी तैयारी के ख़ासकर ‘‘नोटबन्दी व जी.एस.टी’’. को लागू की. केन्द्र की भाजपा सरकार अब अपने आपको हर मोर्चे पर फेल होते हुये देखकर आमजनता का ध्यान बांटने के लिये जो इन्होंने ‘‘सर्जिकल स्ट्राईक’’ का वीडियो वायरल कराया है. अपने राजनैतिक स्वार्थ में यह घिनौना राजनैतिक षड़यन्त्र व हथकण्डा नहीं है तो और क्या है? बता दें कि ‘सर्जिकल स्ट्राईक’ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसको लेकर विपक्षी दल भाजपा निशाना साधे हुए हैं.

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PM मोदी के विदेश यात्रा के चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल विदेश यात्रा के कारण चर्चा में रहा. ऐसा कहा जाता है कि पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा विदेश यात्रा के लिए समय बिताया है. फिलहाल एक आईआटीआई के जरिए प्रधानमंत्री के विदेश यात्रा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं जिससे पता चला है कि पीएम ने 355 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

आरटीआई कार्यकर्ता भीमप्पा गडड ने बताया ‘मैंने कुछ साल पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों द्वारा विदेशी यात्राओं के विवरण के लिए भी आवेदन किया था. हाल ही में समाचार रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की भारी आलोचना की गई थी. जिसके बाद ही मैंन उनके विदेश दौरे के विवरण मांगने के लिए आरटीआई के तहत आवेदन किया और मैं आंकड़ों को देखकर चौंक गया.’

41 विदेशी दौरों में उन्होंने 52 देशों की यात्रा की जिसमें 355 करोड़ रुपए खर्च हुए. इन यात्राओं के दौरान पीएम मोदी करीब 165 दिनों के लिए विदेश में रहे. सरकार ने पीएम की नौ दिवसीय त्रिकोणीय यात्रा (फ्रांस, जर्मनी और कनाडा) पर 31,25,78,000 रुपये खर्च किए, जो कि एक ही यात्रा पर खर्च की गई उच्चतम राशि है. वहीं प्रधानमंत्री की भूटान की यात्रा पर सबसे कम खर्च किया. 15-16 जून 2014 में उनकी पहली विदेश यात्रा पर 2,45,27,465 रुपये खर्च किए गए थे. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद पीएम मोदी एक बार फिर आलोचकों के निशाने पर हैं.

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भाजपा नेता ने दलित शिक्षक से पैर पकड़वाया

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अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दलित शिक्षक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता के पैर छूकर माफी मंगवाने की खबर सामने आई है. इस मामले का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि दलित शिक्षक पुलिस के सामने बीजेपी नेता का पैर पकड़कर माफी मांग रहा है.

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक शिवदान सिंह इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक सत्यभान ने बीते दिनों फेसबुक पर स्वामी विवेकानंद के संबंध में एक विवादित पोस्ट डाली थी. इस पोस्ट पर आपत्ति जाहिर करते हुए इसी जिले के स्थानीय निवासी दीपेश दीक्षित ने आईटी एक्ट के तहत पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी.

शिकायत के आधार पर बीते मंगलवार को स्थानीय पुलिस ने सत्यभान को थाने में बुलवाया था. लेकिन आरोपी शिक्षक के जाने से पहले ही थाना में पुलिस के साथ भाजपा के कई दूसरे स्थानीय नेता पहले से ही थाने में सत्यभान का इंतजार कर रहे थे. सत्यभान के वहां पहुंचने पर विवादित पोस्ट को लेकर दोनों पक्षों में गरमागरमी के बीच बातचीत हुई. इसके बाद माजरा गरमाता देखॉ सत्यभान ने वहां मौजूद लोगों से हाथ जोड़कर माफी मांग ली. भाजपा के स्थानीय नेता कालीचरण गौड़ के पैर छूकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया था. इसके बाद उन्होंने भाजपा नेता के पैर छूकर माफी मांगी.

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DU में तीन गुना फीस वृद्धि पर छात्र संगठनों का विरोध

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में फीस वृध्दि किए जाने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया. साथ ही स्टूडेंट्स ने इसे मनमाना रवैया बताया है. आक्रोशित छात्रों ने कहा फीस-वृद्धि की खुली अनुमति देने वाले कुलपति को तो मानव संसाधन मंत्री का हुक्म बजाना है. देश के राष्ट्रपति, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के विजिटर भी हैं, और प्रधानमंत्री ने फीस-वृद्धि के निर्णय पर आंखें बंद की हुई हैं. क्योंकि उनका मकसद नवउदारवादी नीतियों के तहत देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को नष्ट करके उनकी जगह विदेशी विश्वविद्यालयों व देशी कॉर्पोरेट विश्वविद्यालयों के लिए शिक्षा का बाजार उपलब्ध कराना है.

सोशलिस्ट युवजन सभा (एसवाईएस) मांग करती है कि विश्वविद्यालय/कॉलेज फीस-वृद्धि का फैसला वापस लें  और जिन छात्राओं/छात्रों ने इस सत्र में दाखिला ले लिया है उनके पैसे वापस किये जाएं. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्र हितों की रक्षा का सर्वोच्च मंच दिल्ली विश्विद्यालय छात्र संघ (डूसू) फीस-वृद्धि जैसे गंभीर मसले पर चुप है.

एसवाईएस ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को पहले के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा फीस भरनी पड़ रही है. कालेजों ने मनमाने तरीके से दाखिले की फीस का अलग-अलग पैमाना रखा हुआ है. इस मामले में छात्रों और अभिभावकों की कहीं सुनवाई नहीं है. कालेजों का रवैया है कि दाखिला लेना है तो जीतनी फीस मांगी गई है, भरो वरना अपना रास्ता नापो! सोशलिस्ट युवजन सभा (एसवाईएस) विश्वविद्यालय एवं कॉलेज प्रशासन के फीस-वृद्धि के इस अनुचित फैसले और रवैये का कड़ा विरोध करती है. एसवाईएस की नज़र में फीस-वृद्धि का यह फैसला छात्र-समुदाय के हितों के खिलाफ है. विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के हितों पर यह भारी कुठारघात है.

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कबीर को हाईजैक करने वाले ब्राह्मणों को नसीहत

नई दिल्ली। आज सामजिक क्रांति की मशाल जलाने वाले कबीर साहब का जन्मदिन है. उस समय में जब राजाओं से बख्शीस लेने के लिए कविजन उनकी तारीफों के पुल बांधने वाले छंद गाकर जेबें भर रहे थे, तब कबीर समाज की बुराइयों जैसे- जातिभेद, छुआछूत, साम्प्रदायिकता, अंधविश्वास, कर्मकांड, भेदभाव, हिंसा के विरुद्ध कमर कस के खड़े थे. कबीरदास जुलाहा जाति से थे और कपड़ा बुनने का काम करते थे. वे ना हिंदू थे और न मुसलमान. उन्होंने प्रेम, भाईचारा, हिन्दू-मुस्लिम एकता, मानवता, समानता और सद्भाव का संदेश दिया.

लेकिन ब्राह्मणों ने कबीर को भी हाईजैक कर लिया.

हिंदी साहित्य के मठाधीशों (विशेष रूप से रामचन्द्र शुक्ल, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी, नामवर सिंह आदि) ने जमकर कबीर का हिन्दूकरण/हिन्दुआईज़ेशन किया और उन्हें पूरी तरह रामभक्त कवि साबित करके ही माने. इनके जन्म की भी कहानियाँ गढ़ कर उन्हें ब्राह्मण माता-पिता की संतान बताया, कबीर के काव्य में सोच-समझ के अनुसार जो भी बदलाव हुआ उन आयामों के साथ भी जमकर तोड़-मरोड़ हुई. पहले हिंदूकरण हुआ अब भगवाकरण हो रहा.

हालाँकि कबीर जब छंद कहते हैं तो किसी को नहीं छोड़ते. ब्राह्मणों को उन्होंने अपने स्पेशल होने की प्रिवेलेज पर जमकर फटकारा है-

“जो तूं बम्भन- बम्भनी का जाया, आ न बाट हवे क्यों न आया ” यानी अगर तू (ब्राह्मण) इतना ही महान है तो योनि की बजाय किसी और रास्ते क्यों पैदा नहीं हुआ.

“काहे को कीजै पंडे छूत विचार, छूत ही ते उपजा सब संसार.”

“हमरे कैसे लोहू तुमरे कैसे दूध, तुम कैसे बाम्भन पंडे, हम कैसे शुद.”

“एक बूँद ,एकै मल मुतर,एक चाम ,एक गुद.

एक जोती से सब उतपना,

कौ बामन कौ शुद.”

कर्मकांड करते लोगों को सुनाते हुए कहते हैं-

“लाडू लावन लापसी पूजा चढ़े अपार,पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुँह छार.”

“मुंड मुड़ाये हरि मिलें , तो सब कोई लेई मुड़ाय,बार -बार के मुड़ते, भेड़ न बैकुण्ठ जाय.”

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सृजन घोटाले में मोदी घिरे, तेजस्वी ने दस्तावेज खोले

पटना। सृजन घोटाले में एक बार फिर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी घिरे हैं. तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सृजन घोटाले में बड़े खुलासे का दावा किया है. तेजस्वी ने इससे संबंधित दस्तावेज की कॉपी भी ट्विटर पर शेयर की जिसमें कि पैसों की लेनदेने साफ दिख रही है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनको सबकुछ पता था फिर भी खामोश होकर तमाशा देखते रहे.

तेजस्वी यादव द्वारा शेयर किए दस्तावेज में दिखाया गया है कि सृजन घोटाले में प्रयोग किए गए बैंक अकाउंट से सुशील मोदी की रिश्तेदार बहन रेखा मोदी और उर्वशी मोदी के अकांउट में ट्रांजेक्शन हुए हैं. तेजस्वी ने अपने ट्वीट कर सवाल उठाया है कि सृजन घोटाले में सुशील मोदी और नीतीश कुमार भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं तो सीबीआइ और इन लोगों से सवाल क्यों नहीं पूछ रही है?

अपने अगले ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा है कि सरकार की नाक के नीचे 2500 करोड़ रुपये का सृजन घोटाला होता रहा. नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री को इसकी जानकारी नहीं होगी क्या ऐसा संभव है? सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय में इसकी शिकायत क्यों नहीं की.

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कल हड़ताल पर रह सकते हैं दिल्ली मेट्रो कर्मी

नई दिल्ली। दिल्लीवालों की रफ्तार शनिवार को रूक सकती है. प्राप्त खबर के मुताबिक दिल्ली मेट्रो की स्टाफ काउंसिल की मांगें पूरी नहीं होने पर 30 जून को होने वाली मेट्रो कर्मियों की हड़ताल अभी टली नहीं है. इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को श्रम आयुक्त के समक्ष डीएमआरसी प्रबंधन और डीएमआरसी स्टाफ काउंसिल की बैठक बुलाई. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है. शुक्रवार को दोनों पक्षों की बैठक फिर बुलाई गई है.

डीएमआरसी स्टाफ काउंसिल के सचिव रवि भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के नॉन एक्जीक्यूटिव 9 हजार कर्मचारी मांगों को लेकर पिछले साल से हड़ताल कर रहे हैं. प्रबंधन में मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था. विरोध में 30 जून को पूर्ण हड़ताल की घोषणा की थी.

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मांग है कि काउंसिल के बजाय डीएमआरसी यूनियन बनाने की अनुमति दी जाए, पे कमीशन के तहत पारिश्रमिक बढ़ाया जाए, एरियर दिया जाए, स्टाफ के ड्यूटी के घंटों के साथ आराम का टाइम भी सुनिश्चित किया जाए और स्टाफ की ट्रांसफर नीतियों को पारदर्शी बनाने समेत कई शामिल हैं. उन्होंने बताया कि शुक्रवार को बुलाई गई बैठक में अगर मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाया गया तो मेट्रो के 9000 कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे.

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कबीर पर राजनीति को लेकर मोदी-योगी पर भड़कीं मायावती

लखनऊ। संत कबीर का नाम वोट के लिए उपयोग किए जाने पर बहन मायावती ने चुप्पी तोड़ी. 2019 चुनाव पास आते देख बीजेपी ने यूपी में पूर्वांचल कार्ड फेंका लेकिन मायावती ने उसको फेल कर दिया है. बसपा सुप्रीमो ने बताया कि बीजेपी के शासनकाल में संत कबीर नगर के लिए कुछ नहीं किया गया है.

प्रधानमंत्री मोदी व यूपी के सीएम योगी के होने के बावजूद भी राज्य पिछड़ रहा है. मायावती ने कहा कि पूर्वांचल के विकास के मामले में पीएम और प्रदेश की योगी सरकार ने अभी तक जो भी काम किए हैं, वो ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं, जबकि वादा किया गया था कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर विकास की गंगा बहा दी जाएगी.

पुराना चिट्ठा खोलकर…

संत कबीर के नाम पर जनता को गुमराह करने वाली बीजेपी का पुराना चिट्ठा खोलकर बेनकाब कर दिया. बहन जी ने बताया कि बसपा ने संत कबीर नगर जिला बनाकर इसके विकास के लिए अहम काम किया. साथ ही हमनें पूर्वांचल राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था जो कि अब तक लंबित पड़ा है. भाजपा यदि यूपी का विकास चाहती तो फिर इसके लिए विकास के लंबित पड़े विकास की फाइलों को पास क्यों नहीं कर रही है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगहर में 24  करोड़ की संत कबीर अकादमी के शिलान्यास की आड़ में पूर्वांचल की जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं. यह सिर्फ चुनावी स्वार्थ के लिए है जो कि जनता जानती है. पीएम मोदी व योगी ने टोपी ना पहनकर मजार का मजाक बना दिया. उन्होंने नसीहत दी कि टोपी ना सही कम से कम सर पर रूमाल तो रख लेते. संत कबीर नगर में बीजेपी ने जो भी पत्ते फेंके बसपा ने उसको पूरी तरह काटकर जनता का दिल जीत लिया है.

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ये कैसा तिकड़मः चुबल रोल में आशुतोष राणा

नई दिल्ली। बॉलीवुड सिनेमा में स्टार आशुतोष राणा अपने अलग-अलग रोल के लिए ही जाने जाते हैं. फिलहाल वे एक ऐसा रोल लेकर आ रहे हैं जो कि हिंदी सिनेमा में धमाल मचाएगा. वैसे को हम हिंदी फिल्मों में एक ही हीरो के दो रोल देख चुके हैं लेकिन एक ही कलाकार के चार-चार अलग रूप तो शायद ही देखा होगा. अगर एक ही फिल्म में एक ही किरदार के चार धांसू रोल देखना वाकई में यादगार व मजेदार होगा.

वैसे इस रोल को लेकर आशुतोष राणा अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि “किसी भी अभिनेता का परम सौभाग्य होता है जब उसे एक ही फ़िल्म में चार रोल करने का अवसर मिले. और वो भी बिलकुल अलग-अलग भाव, भाषा, परिवेश वाले. परमपूज्य गुरुदेव की कृपा से हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री मुझ पर सदैव ही कृपालु रही है बॉलीवुड ने मुझे लगातार ही विभिन्न क़िस्म के किरदार अभिनीत करने के अवसर प्रदान किए हैं.

श्री इस्माइल दरबार द्वारा निर्देशित फ़िल्म ये कैसा तिगड़म जो 13 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है, ऐसी ही एक फ़िल्म है जिसमें मैं चुबल रोल (Quadruple चार कैरेक्टर) कर रहा हूं. आप मित्रों, प्रशंसकों, शुभचिंतकों, परिचितों, अपरचितों से ‘ये कैसा तिगडम’ का ट्रेलर साझा कर रहा हूँ, इस आशा से कि ये फ़िल्म आपको आनंद देगी और हमें आपका आशीर्वाद मिलेगा.”

‘ये कैसा तिगडम’ का ट्रेलर का ट्रेलर शानदार है. इस फिल्म में आशुतोष राणा का अलग-अलग रूप आपको देखने को विवश करेगा. साथ ही ट्रेलर में राणा के डायलॉग भी काफी मजेदार व जानदार हैं, फिलहाल ट्रेलर तो यही बयां कर रहा है.

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IBPS के लिए भारी वैकेंसी, एक से अधिक पोस्ट पर आवेदन मांगे

नई दिल्ली। आईबीपीएस के लिए भारी वैकेंसी निकली है. इसके लिए जल्द ही आवेदन करना होगा क्योंकि अंतिम तारीख काफी नजदीक है. Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) ने Office Assistant और Officers Scale 1, 2, 3 के पदों पर भर्ती निकाली हैं. बैंक में सरकारी नौकरी करने की चाह रखने वालों के लिए ये मौका अच्छा है. उम्मीदवार एक से ज्यादा पदों पर आवेदन कर सकते हैं. हर पद के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है. इन पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 2 जुलाई है. इच्छुक उम्मीदवारों के लिए और अधिक जानकारी नीचे दी गई है.

कुल पदों की संख्या: 10200

पदों के नाम

ऑफिस असिस्टेंट: 5269 पद

ऑफिसर्स स्केल 1: 3312 पद

ऑफिसर्स स्केल 2: 1459 पद

ऑफिसर्स स्केल 3: 160 पद

योग्यता

  • ऑफिस असिस्टेंट: उम्मीदवार ग्रेजुएट हो और उसे स्थानीय भाषा का ज्ञान हो.
  • ऑफिसर्स स्केल 1: उम्मीदवार के पास बैचलर डिग्री होना जरूरी है, वही एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, फॉरेस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, लॉ, इकनॉमिक्स विषय से ग्रेजुएट उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी. स्थानीय भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य है.
  • ऑफिसर्स स्केल 2: उम्मीदवार के पास 50 फीसदी अंको के साथ बैचलर डिग्री होना जरूरी है, साथ ही उम्मीदवार ने 2 वर्ष बैंक अधिकारी के पद पर काम किया हो.
  • ऑफिसर्स स्केल 3: उम्मीदवार के पास 50 फीसदी अंको के साथ बैचलर डिग्री होनी जरूरी है, बैंक अधिकारी के तौर पर 5 साल का अनुभव भी जरूरी है.

उम्र सीमा

  • ऑफिस असिस्टेंट: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 28 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 1: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 30 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 2: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 साल और अधिकतम आयु 32 साल होनी चाहिए.
  • ऑफिसर्स स्केल 3: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 साल और अधिकतम आयु 40 साल होनी चाहिए.

उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर होगा. इस जानकारी को पढ़ने के बाद किसी तरह की समस्या आ रही तो भर्ती के संबंध में अधिक जानकारी  www.ibps.in पर जाकर जानकारी लें. यहां पर विस्तृत रूप से जानकारी मिलेगी.

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IND vs IRE: टीम इंडिया के 100वें टी-20 में चमके रोहित-धवन, हुई रिकॉर्ड्स की बारिश

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नई दल्ली। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बुधवार को डब्लिन के मालाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर खेले गए दो मैचों की टी-20 सीरीज के पहले मैच में आयरलैंड को 76 रनों से शिकस्त दी. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 208 रन बनाए. जिसके जवाब में आयरलैंड की टीम 20 ओवरों में नौ विकेट पर 132 रन ही बना सकी.

इस मैच में टीम इंडिया के ओपनिंग बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 61 गेंद में पांच छक्कों और आठ चौकों की मदद से 97 रन की पारी खेलने के अलावा धवन (74) के साथ पहले विकेट के लिए 16 ओवर में 160 रन की साझेदारी की जिससे भारत ने पांच विकेट पर 208 रन बनाए.

जिसके बाद भारत के लिए कुलदीप यादव ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए जबकि युजवेंद्र चहल ने तीन विकेट हासिल किए. यह भारतीय टीम का 100वां टी-20 इंटरनेशनल मैच था. टीम इंडिया की इस धमाकेदार जीत से कई रिकॉर्ड बने हैं.

एक नजर डालते हैं इस मैच में बने रिकॉर्ड्स पर:

1. रोहित शर्मा 13वें ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने भारतीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट (टेस्ट, वनडे और टी-20) में 10,000 से ज्यादा रन बनाए हैं.

2. रोहित और धवन ने 160 रन ओपनिंग साझेदारी की है. भारतीय टीम की यह दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी है. भारतीय टीम की सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी 165 रन की है. जो रोहित शर्मा और केएल राहुल के बीच श्रीलंका के खिलाफ साल 2017 में हुई थी.

3. रोहित शर्मा और शिखर धवन इकलौती ऐसी ओपनिंग जोड़ी है, जिसने इंटरनेशनल टी-20 क्रिकेट में दो बार 150 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप की है.

4. टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में रोहित और धवन की ओपनिंग जोड़ी ने एक हजार रन पूरे कर लिए है.

5. शिखर धवन ने टी-20 क्रिकेट में अपने 6000 रन पूरे कर लिए है. वह ऐसा करने वाले छठे भारतीय बने है. उनसे पहले रैना, रोहित, गंभीर, कोहली और धोनी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं.

6. सुरेश रैना और एमएस धोनी ने भारत का पहला टी-20 मैच भी खेला था और अब दोनों ने भारतीय टीम का 100वां टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेला है.

7. भारतीय टीम ने 10वीं बार टी-20 इंटरनेशनल में 200 से ज्यादा रन का स्कोर खड़ा किया और इस मामले में उसने ऑस्ट्रेलिया के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. भारतीय टीम से ज्यादा टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 200 से ज्यादा का स्कोर साउथ अफ्रीका ने 11 बार किया है.

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कबीर की मजार पर योगी ने टोपी पहनने से किया इंकार

लखनऊ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत कबीर की मजार चादर चढ़ाई. संत कबीरनगर के मगहर में बुधवार को संत कबीर की मजार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चादर चढ़ाने के लिए पहुंचे लेकिन वहां पहुंचने पर मजार के संरक्षक ने टोपी पहनाने की कोशिश की लेकिन योगी ने हाथ रोक लिया. और टोपी नहीं पहनी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुरुवार को संत कबीर की मजार पर चादर चढ़ाए.

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले मुख्यमंत्री योगी तैयारियों का जायजा लेने के लिए मगहर पहुंचे थे. लेकिन टोपी ना पहनने की बात की वजह से योगी विरोधियों के निशाने पर आ गए. सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने योगी पर हमला किया. पार्टी के नेता सुनील साजन ने कहा कि योगी पाखंड में फंसे हुए हैं. ऐसे लोगों को कबीरधाम नहीं जाना चाहिए.

योगी द्वारा टोपी नहीं पहनने पर मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस तरह टोपी नहीं पहनानी चाहिए. लोगों को अपने धर्म का सम्मान करते हुए दूसरों के धर्म का भी आदर करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने यहां से विरोधियों पर जमकर हमला बोला.

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