BJP की महिला मंत्री ने रेप पर शिवराज सरकार को घेरा

भोपाल। मंदसौर की रेप वाली दर्दनाक घटना के बाद एनसीआरबी की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश को कठघरे में खड़ा कर दिया है. इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि शिवराज सिंह की सरकार में बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ी हैं. नाबालिग के साथ रेप के मामले में एमपी नंबर वन पर है. इसको लेकर शिवराज सरकार की महिला मंत्री ने भी कहा कि यहां बेटियां सुरक्षित नहीं है. प्रदेश में ठोस कानून व्यवस्था की कमी है.

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मध्य प्रदेश की नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने शाजापुर में मीडिया से चर्चा करते हुए तमाम बातों को कहा जो कि शिवराज सरकार की पोल खोलता है. उन्होंने कहा कि मंदसौर में सात वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना से मैं बहुत व्यथित हूं. ऐसे दरिंदों को सार्वजनिक स्थान पर फांसी की सजा दिए जाने का समर्थन करता हूं. प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा को लेकर अपनी सरकार पर हीं सवाल उठाए हैं. बच्चियां कितनी असुरक्षित हैं इस तथ्य को आंकड़े बयां करते हैं. मध्यप्रदेश में पिछले साल रोजाना कम से कम 37 बच्चे भयंकर अपराधों के शिकार बने.

हालांकि बाद में प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए भी उन्होंने कहा दिल्ली में निर्भया कांड के बाद मध्य प्रदेश ने सबसे पहले मासूम बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा देने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित करते हुए कानून बनाया है.

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश बच्चियों और औरतों से बलात्कार के मामले में देश में पहले नंबर पर है. पिछले साल मध्यप्रदेश में 2,467 बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं दर्ज हुईं, जो की देशभर में बच्चियों के साथ हुई रेप की वारदातों की कुल संख्या का आधा है. इनमें से 90 फीसदी मामलों में परिवार का कोई सदस्य या फिर कोई नजदीकी वारदात का आरोपी था. साल 2016 में नाबालिगों के खिलाफ मध्यप्रदेश में 442 रेप केस दर्ज किए गए, जबकि महाराष्ट्र में 258 और राजस्थान में 159 रेप केस दर्ज हुए.

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Bahujans of Canada wants mayawati as PM in 2019

The seminar on ‘Why can’t Bahan Mayawati become the Prime Minister of  India after more than 70 years of  democracy ” was organised Dr Ambedkar International Mission (AIM), Canada, Toronto for discussing to protect Bahujan /Moolniwasi  rights, and save  the constitution, democracy, and the nation on Saturday June 23, 2018  4:00 pm -7:00 pm at  Terry Miller Recreation Centre, 1295 Williams Pkwy, Brampton, ON L6S3J8, Canada.

More than 50 Bahujan /Moolniwasi organizations’ heads,  representatives, leaders,  professionals, businessmen,  and individuals attended the event. A healthy discussion was held. It was concluded that the Bahujan/ Moolniwasis are 85 % in India. They need a national political party and a strong leader. So many political parties and leaders  weaken the case, and do not solve their problems.

Only Mayawati is aiming at solving the real issue in India, the issue of caste and its problems. The other political parties including the Congress and the BJP have no fixed position on the caste system and annihilation of it. They have never talked openly about ending the caste system. The BJP supported the caste system and also the stalwarts in the Congress, including Gandhi and Nehru, supported the caste system. These and other Manuwadi parties want to bring caste capitalism in India.

The Bahujan Samaj Party (BSP) under the strong leadership of Bahan Mayawati is the only option in the present situation. The Bahujan Samaj Party (BSP) is the  third largest national party of India established by Manyawar Kanshi Ram. The BSP is a movement also, and  cadre based; and has its cadres in almost all states of India.

Prof Arun Gautam  presented  the work done in U.P.  under  the BSP regime/s in detail. He reminded the quote of Dr Babasaheb Ambedkar (BSA) that  political power is the master key. The majority rules in other countries of the world but it is strange that minority rules in India .The Moolniwasis/ Bahujans are more than 85% in India. They  can solve their  problems,  if they have  their own political party. The BSP has ruled 3 times the biggest state of India under the Chief Ministership of Bahan Mayawati- one time from 2007 to 2012 on its own; and 2 earlier occasions in coalition.  Twenty-one percent of U.P. budget under Special Component Plan was allocated for the welfare of Dalits/Bahujans. Under the able leadership of Bahan Mayawati world class monuments and parks  like Prerna Sthal in Lucknow, NOIDA and others  were constructed; rural  and urban residential projects for Bahujans in the names of Dr Babasaheb Ambedkar, and Manyawar Kanshiram were started, universities  like Gautam Buddha University, NOIDA, Medical and other  colleges  established; and districts were created and/or   named after  Gautam Buddha, Ambedkar, Kanshi Ram, Sahuji Maharaj, Phule, Sant Kabir, Guru Ravidass, and other Bahujan leaders, reformers, and saints; constructed NOIDA Expressway, Formula 1 Track Race, and many others…..

First time a  Dalit/ SC was made the Chief Secretary (CS), and a Tribal/ ST  the Director General of Police (DGP) of the state. Strict law and order was maintained under the BSP rule. The government contracts worth up to 25 lakhs, were brought  under the reservation, and the  physical possession were given to the Bahujans for  the land allotted to them; opened first time in India the Backward Classes Development Commission/ Department; included many castes into the list of OBCs, scholarships of  Bahujan students were doubled and paid  in the beginning of the session instead of in the end;  20 % reservation  for girls/ women was made into medical and engineering college, ……..

The details of some work is as follows:

  • In Kansi Ram Shahari Awas Yojna, more than 1 lakh residential units  to Bahujans/Moolniwasis constructed and allotted.
  • Manyawar  Kanshi Ram Urdu, Arabic, and Farasi University, Lucknow opened
  • Manyawar Kanshi Ram Government Medical College, Saharanpur opened
  • Manyawar  Kanshi Ram Degree College, Ghaziabad constructed
  • Dr Ambedkar P.G.Hostels in 20 districts constructed
  • Panchsheel Boys Inter College , NOIDA opened
  • Savitribai Phule, Girls Hostel , Kanpur  constructed
  • Manyawar Manshi Ram Multi-Speciality Hospital, Geater NOIDA constructed
  • Sant Ravidas Ghat , Nagwa, Varanasi constructed
  • 1.1 lakhs Safai Karamcharis recruited
  • Dr Shakuntla Mishra U.P. Viklang University opened in Lucknow
  • Five medical colleges  in Urai, Kannauj, Azamgarh, and Banda opened.
  • Homeopathic Medical Colleges in Gorakhpur and Banda opened
  • Nine Government Colleges opened
  • Forty-one thousand constables in police  recruited
and many more
  • The BSP. rule in U.P. brought change in mentality and attitude of the Bahujans/Moolniwasis.
  • Other speakers were- Mr/s Waman Mohile of Mumbai/ Nagpur, Dinesh Ladhar, Brahm Dutt, Ajit Lear, Jaswinder Singh, Harmesh Sandhi, Suchha Singh, Balbir Virdi,  and others.
  • The presentation / discussion were done through the slides/power point.  The stage was managed/hosted  by Mr Amarjeet Badhan, and assisted by  Mr Kuldeep Madhara.
  • Good tea and snacks were provided.
  • Finally it was decided in the seminar  to support the B.S.P., and project Bahan Mayawati as the future PM of India in 2019 elections.

Writer- Prof. Arun Gautam

दलित अनाथ नाबालिग का रेप कर वीडियो बनाया, केस दर्ज

पाकिस्तानजयपुर। दलित बेसहारा लाचार लड़की की मजबूरी का फायदा उठाकर पहले तो रेप किया. फिर उसने जबरन एक वीडियो बनाई. फिर इसी वीडियो का डर दिखाकर उसके साथ रेप करता रहा. इसके बाद उसने जान से मारने तक की धमकी दे डाली. इस बात की जानकारी परिजनों को मिलने पर केस दर्ज कराई गई लेकिन पुलिस की लापरवाही के कारण आरोपी फरार हो गया.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक राजस्थान के मामला टोंक जिले की निवाई तहसील के ग्राम सूरतरामपूरा (करेड़ा) का है. बच्ची जब दो साल की थी तभी उसके पिता की मौत हो गई और फिर मां भी उसे छोड़कर कहीं चली गई. बच्ची ने जैसे तैसे गुजारा करती रही. फिलहाल 15 वर्षीय मासूम बच्ची काम की तलाश में निकली तो इसी दौरान धर्म राज गुर्जर (निवाई तहसील निवासी) ने काम लगाने की बात कही. काम दिलाने के बहाने वो उसे बैरवा धर्मशाला ले गया जहां उसने बलात्कार किया और वीडियो बनाई. और बोला कि किसी को बताई तो तेरे व तेरे परिवार को जान से मार दूँगा ओर वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजानिक कर दूँगा.

आखिरकार बच्ची उसके चंगुल से निकलकर पैतृक गांव सूरतरामपुरा निवाई के लिए जान बचाकर भागने में कामयाब हो गई. घर पंहुचकर सारी घटना की जानकारी अपने ताऊ-ताई, दादी को बताई. इसके बाद परिजनों ने डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक विकास संस्था राजस्थान के मुख्य संयोजक त्रिलोकराज बेनीवाल को फोन करके बताया. संस्था पीड़िता को लेकर थाना दत्तवास पहुंची लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. फिर चाकसू में बड़ी मुश्किल से रात 11:36 बजे रिपोर्ट दर्ज हुई. पीड़ित बच्ची का मेडिकल जैपुरिया हॉस्पिटल में किया गया है.

आरोपी धर्म राज गुर्जर को गिरफ्तार करने की तलाश चल रही है. आरोपी धर्म राज गुर्जर फोन फरार है. पुलिका का कहना है कि जल्द ही आरोपी जेल की सलाखों में होगा. दूसरी ओर गुर्जर समझौते के लिए दबाव डाल रहे हैं. पीड़ित परिवार को मारने की धमकी मिल रही है. संस्था का कहना है कि आरोपी को जेल करवाकर पीड़िता को न्याय दिलाया जाएगा. संस्था के मुख्य संयोजक त्रिलोकराज बेनीवाल ने बताया कि पीड़िता बच्ची के ताऊ से फोन पर सूचना मिलने पर डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक विकास संस्था राजस्थान की टीम जिनमें मुख्य संयोजक त्रिलोकराज बेनीवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र कुमार सूर्यवंशी युवा नेता बसपा मालपूरा, जिला उपाध्यक्ष जयपुर जयनारायण बैरवा मौके पर पहुंचकर मामले की पड़ताल की.

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दलित नाबालिग का रेप करने गया डॉक्टर धराया

प्रतिकात्मक फोटो

नई दिल्ली। भारत का शायद ही कोई राज्य हो जहां पर रेप की घटनाएं नहीं हो रही हैं. ऐसे में खबर हरियाणा गुरूग्राम (गुड़गांव) की है. एक मासूम नाबालिग बच्ची के साथ 55 साल का डॉक्टर रेप करने के लिए घर में घुस गया. यहां तक की उसने बच्ची के हाथ तक बांध दिए. इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई है.

मामला गुरुग्राम के सोहना हलके का है जहां एक 55 वर्षीय डॉक्टर ने अपने पड़ोस में रहने वाली एक नाबालिग दलित लड़की के साथ उसके घर में घुसा. आरोपी ने नाबालिग को डराया धमकाया और उसके हाथ-पैर बांध दिए. वहीं उस दरिंदे ने नाबालिग के चेहरों पर अपने दांतो से निशान बना दिया. इसके बाद नाबालिग के काफी शोर मचाने पर घर वाले जाग गए. लेकिन आरोपी  मौके से भाग गया.

पीड़िता के बयान पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.

पीड़िता ने बताया कि देर रात अपने घर में अपनी बहन के साथ सोई हुई थी. इस दौरान पड़ोस में रहने वाला डॉक्टर राजबीर उसके घर में आ गया और उसने उसके साथ जबरदस्ती करनी शुरू कर दी और उसके हाथ बांध दिए औऱ उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगा. सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है.

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दो दलितों का सिर कुचलकर मार डाला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। दो दलित युवकों का सिर कुचलकर कर मारने की घटना सामने आई है. दोनों शव को देखकर लग रहा है कि बड़ी बेरहमी व दर्दनाक तरीके से घटना को अंजाम दिया गया है. उत्तर प्रदेश के बहेड़ी और भोजीपुरा क्षेत्र में दो दलित युवकों की हत्या के बाद मामला गरमा गया है. तो वहीं सीबीगंज क्षेत्र में मंदिर के एक पुजारी की संदिग्ध हालात में लटकती लाश मिली है. तीन हत्याओं के बाद पुलिस की बेचैनी बढ़ गई है. हत्या और मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है.

बहेड़ी के गांव इटौआ में दो दिन से लापता रमेश बाबू उर्फ फूलबाबू के पुत्र राजवीर जाटव (19) का शव बुधवार सुबह जंगल में मिला. किसी भारी वस्तु से सिर कुचलकर उसकी हत्या की गई थी. उधर भोजीपुरा के गांव मकरंदापुर पीतमराय में मंगलवार रात एक फोन आने के बाद संतोष सागर (32) घर से निकला और बुधवार की सुबह उसका शव बाग में पड़ा मिला. चेहरे और शरीर पर करीब दर्जनों चोट के निशान थे. दोनों ही मामलों में अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. सीबीगंज के गांव वाकरनगर सुंदरासी स्थित टीबरीनाथ मंदिर परिसर में पुजारी दीनदयाल (60) का शव पेड़ से लटका मिला.

एक ही रात में हुई तीन हत्याओं के बाद पुलिस महकमा चिंतित है क्योंकि जल्द ही मुख्यमंत्री अपराध की समीक्षा बैठक करने वाले हैं. एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना है कि पुजारी की मौत फंदा लगाने से हुई है. बहेड़ी में युवक की हत्या दो रात पहले की गई थी. लाश आज मिली. भोजीपुरा वाली हत्या मंगलवार रात का मामला है. सभी घटनाओं की जांच के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं.

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मायावती और अजीत जोगी की लंबी मुलाकात से गरमायी राजनीति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर एक बड़ी खबर आई है. खबर है कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और पूर्व कांग्रेसी दिग्गज अजीत जोगी ने मुलाकात की है. बुधवार को दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की खबर है. अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना ली है. छत्तीसगढ़ के चुनाव में जोगी ने लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था.

मध्यप्रदेश के बाद बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को झटका देने की तैयारी में है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज करने के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी बसपा अपनी अलग राह चुन रही है. बसपा प्रमुख मायावती और अजीत जोगी की लंबी मुलाकात के बाद अब इसके राजनीतिक मायने तलाशे जाने लगे हैं.

दोनों कद्दावर नेताओं की मुलाकात ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी ने कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच 2018 के विधानसभा चुनाव और 2019 के आम चुनाव को लेकर चर्चा हुई है.

इस बीच बसपा प्रमुख मायावती खुद छत्तीसगढ़ में अपनी पैठ बनाने में जुटी हुई हैं. दोनों राजनेताओं के बीच राजनीतिक समझौते की संभावना को इसलिए भी बल मिलता दिख रहा है क्योंकि बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम और अजीत जोगी के आपसी रिश्ते काफी गहरे रहे हैं. इस नाते कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती की भी जोगी से निकटता है. तो दूसरी ओर प्रदेश के दलित और आदिवासी वोटरों के बीच अजीत जोगी का काफी प्रभाव है. बसपा का समर्थक भी यही वर्ग है. ऐसे में अगर इन दोनों पार्टियों के बीच कोई समझौता होता है तो इन्हें बड़ा फायदा होने की संभावना है.

प्रदेश में बसपा के ताकत की बात करें तो यहां बसपा के 5 लाख 35 हजार से ज्यादा मतदाता हैं, जो कई विधानसभा में राजनीतिक गणित बनाने और बिगाड़ने के लिए काफी है. जब राज्य का गठन हुआ था, तब साल 2003 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 3 विधायक चुने गए थे. 2008 में 2 विधायक और साल 2013 में बसपा का एक विधायक जीता था.

पिछले दिनों मायावती के निर्देश के बाद तीन दिग्गज नेताओं की घरवापसी हो चुकी है. इसमें पामगढ़ से तीन बार विधायक रहे वरिष्ठ नेता दाऊ राम रत्नाकर सहित सीपत से विधायक रह चुके रामेश्वर खरे, उदल किरण और आर सी बांझिल का नाम शामिल है. ऐसे में साफ लग रहा है कि बसपा छत्तीसगढ़ में भी कर्नाटक और हरियाणा की राह पर चलने को तैयार है, जहां वह कांग्रेस से गठबंधन की बजाय दूसरे मजबूत स्थानीय दल का चुनाव करने की रणनीति बना रही है.

कर्नाटक में बीजेपी को पटखनी देने के बाद महागठबंधन को लेकर मायावती ने सक्रियता बढ़ाई है. इसके वे विभिन्न दलों के राजनेताओं से मुलाकात कर रही हैं. हालांकि बसपा ने छत्तीसगढ़ में गठबंधन को लेकर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. ऐसे में दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को लेकर गठबंधन के कयास भी लग रहे हैं. हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन को लेकर किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. वैसे भी इसको लेकर अंतिम फैसला मायावती को ही करना है.

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सोनाली के कैंसर इलाज के लिए बाबा उमड़े

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नई दिल्ली। इरफान खान के बाद सोनाली बेंद्रे कैंसर की गिरफ्त में हैं. भारत में इलाज कराने के बाद स्थिति नहीं सुधरने पर न्यूयॉर्क में भर्ती हैं. कैंसर से पीड़ित सोनाली बेंद्रे ने एक इस संबंध में एक मार्मिक ट्वीट किया है. लेकिन इस ट्वीट पर कई बाबा व भक्त उमड़ आए हैं जो उनके कैंसर को जड़ से मिटाने का दावा कर रहे हैं. ऐसे बाबा व भक्त के एक नहीं कई ट्वीट हैं जिससे साफ पता चलता है कि वे सोनाली बेंद्रे की बीमारी का मजाक उड़ा रहे हैं.

एक तरफ जहां सोनाली जिंदगी के विकट घड़ी मे है तो वहीं सोशल मीडिया पर लोग बाबाओं की ब्रांडिंग करने में मग्न हैं.

इन भक्तों व बाबाओं के ट्वीट को पढ़कर हंसी तो नहीं लेकिन गुस्सा जरूर आएगा. किसी के बुरे समय में इस तरह ट्वीट करना उसके बीमारी का मजाक उड़ाने जैसा है. ट्वीटर पर लोग परमात्मा व कबीर से कैंसर इलाज की नसीहत दे रहे हैं और साथ ही 100 % गारंटी के साथ. ऐसे में मेडिकल व साइंस टेक्नोलॉजी के दौर में लोगों का अंधविश्वास उनके अज्ञानता को दिखा रहा है. हालांकि यहां पर कई लोगों ने ऐसे अंधभक्तों व बाबाओं को करारा जवाब भी दिया है.

एक ट्वीटर यूजर रामअवतार ने लिखा है कि, “पूर्ण परमात्मा आज इस धरती पर आया हुआ है. जो कैंसर क्या कैंसर का बाप भी क्यों न हो वो भी ठीक कर रहे है यकीन न हो तो आप स्वयं प्रमाण ले सकते है, आप भी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आकर तो देखो सच्ची श्रद्धा से फिर देखना भगवान की दया.

Replying to @iamsonalibendre #TrueWorship_Cures_Cancer Saint Rampal ji Maharaj is telling true spiritual knowledge & true worship of God. Many people have recovered from the cancer disease Watch sadhna channel at 7.30 pm

इस तरह की सैकड़ों ट्वीट आपको @iamsonalibendre पर मिल जाएंगी. जिसको देखकर आपको भी गुस्सा आएगा. इस वक्त सोनाली के लिए पूरी दुनिया उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए कामना कर रही है.

Read Also-इरफान के बाद इस स्टार को हाई ग्रेड कैंसर, न्यूयॉर्क में भर्ती
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उत्तराखंड CM को एक और महिला मारने दौड़ी

देहरादून। उत्तराखंड सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. महिला शिक्षिका केस में किरकिरी कराने के बाद एक और महिला ने इनकी बेईज्जती कर दी है. आक्रोशित महिला ने कहा कि यहां से भाग जाओं नहीं तो पत्थर से मारेंगे. और भी ना जानें क्या गुस्सा में बड़बड़ाने लगी. इसकी एक वीडियो वायरल हो रही है. जिसमें कि महिला पुलिस व तमाम लोगों के सामने सीएम को मारने दौड़ती है.

बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार धुमाकोट बस हादसे के बाद घटनास्थल पर गए. वहां जाने के बाद पीड़ित परिवार की एक महिला गुस्सा में तमतमाते हुए सीएम के पास पहुंच गई और मुख्यमंत्री को खरी-खोटी सुना डाली. इसके बाद पुलिस ने उसको पकड़ा और शांत कराने की कोशिश की. इसके बाद पुलिस सीएम रावत को लेक वहां से निकल जाती है. बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में महिला शिक्षिका ट्रांसफर की फरियाद लेकर गई थी. 22 सालों से दुर्गम इलाके में काम कर रही महिला शिक्षक सिस्टम से परेशान होकर ट्रांसफर की मांर की लेकिन सीएम ने भी नहीं सुनी और उल्टे उसे सस्पेंड करने व हिरासत में लेने का फरमान दे दिया था.

Read Also-अब उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य हुआ बाबासाहेब का फोटो लगाना
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मदरसा ड्रेस कोड पर मचा बवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा मदरसा में ड्रेस कोड लागू करने के फैसले के बाद बवाल मचा है. मदरसों में ड्रेस लागू करने की योजना का मुस्लिम धर्म गुरुओं ने विरोध किया है. बुधवार को मदरसा दारुल उलूम फिरंगी महली ने कहा कि मदरसों में मुश्किल से एक या दो प्रतिशत मुस्लिम बच्चे ही शिक्षा लेते हैं. सरकार को उनके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है.

मदरसों पर बुल्डोजर चलवा दे…

इसके बाद फायर ब्रांड सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार ड्रेस कोड लागू करने के साथ पालन न करने पर मिलने वाली सजा भी बताए. सरकार पर व्यंग करते हुए कहा कि हो सकता है, सरकार आदेश का पालन न करने वाले मदरसों पर बुल्डोजर चलवा दे या शिक्षकों पर तेजाब डलवा दे.

सूफी निजाम ने मदरसों के पारंपरिक पहनावे पर छेड़छाड का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि देश भर में चल रहे कॉलेजों और स्कूलों में ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार संस्था की प्रबंध समिति को होता है, फिर मदरसों के साथ यह भेदभाव क्यों? गौरतलब है कि मंगलवार को मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने का एलान किया था. इस घोषणा के बाद मुस्लिम धर्म गुरुओं और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.

Read Also-योगी सरकार ने पेश किया धार्मिक बजट, जानिए जरूरी बिन्दु
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इरफान के बाद इस स्टार को हाई ग्रेड कैंसर, न्यूयॉर्क में भर्ती

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार शाहरुख, सलमान, गोविंदा, अजय देवगन के साथ कई हिट फिल्में दे चुकीं हिरोईन कैंसर की चपेट में है. इरफान खान के बाद हिंदी सिनेमा की हीट स्टार सोनाली बेंद्रे हाई ग्रेड कैंसर से ग्रस्त हैं. भारत में इलाज कराने के बाद सोनाली बेंद्रे का इलाज न्यूयॉर्क में चल रहा है.

इरफान की तरह सोनाली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, ‘जब आप जिंदगी से ज्यादा उम्मीदें रखते हैं तो तब वो एक जोर का झटका देती है . हाल ही में मुझे पता चला कि मुझे हाई ग्रेड कैंसर है. मेरा परिवार और दोस्त मेरे साथ हैं. मैं इन सबकी शुक्रगुजार हूं.’ ‘इसके अलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है. मेरे डॉक्टर की सलाह पर हमने तुरंत न्यूयॉर्क जाने का फैसला किया. अब सारा ट्रीटमेंट न्यूयॉर्क में होगा. मैं इस मुश्किल घड़ी से निकलने की पूरी कोशिश करूंगी.’

‘पिछले कुछ दिनों में मुझे लोगों का बहुत प्यार मिला है. मैं इतना प्यार पाकर खुद को खुशनसीब महसूस कर रही हूं . मेरे साथ पूरा परिवार मेरी ताकत बनकर खड़ा है.’ पिछले माह सोनाली का इलाज हिंदुजा सर्जिकल हेल्थकेयर में हुआ था. बता दें कि सोनाली से पहले एक्टर इरफान खान भी न्यूरो एंडोक्राइन नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं.

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‘आप’ की जीत, SC ने दिल्ली को दी ‘आजादी’

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है. इस आजादी के लिए आम आदमी पार्टी लंबे समय से संघर्ष कर रही थी जिसकी बुधवार को जीत हुई. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने मुख्य फैसले में कहा कि चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है, इसलिए मंत्री-परिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है. संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला दिया कि हर मामले में LG की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों की जानकारी देनी होगी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमनें सभी पहलुओं- संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि- पर गौर किया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि दिल्ली की असली बॉस चुनी हुई सरकार ही है यानी दिल्ली सरकार. बता दें कि दिल्ली सरकार बनाम उप राज्यपाल के बीच लंबी लड़ाई चल रही थी. दिल्ली में सरकार चलाने वाले का हमेशा शिकायत रहता था कि केंद्र सरकार यानी उप राज्यपाल काम नहीं करने दे रहे हैं लेकिन इस मामले का समाधान निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल हुई थीं. 6 दिसंबर 2017 को मामले में पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था. हालही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एलजी के यहां धरना दिया था. आखिरकार आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल कर ली.

‘आप’ का कहना

  • सुप्रीम कोर्ट से मिले फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत हुई है. लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत है.
  • दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की जनता का एक ऐतिहासिक फैसला था. मैं दिल्ली की जनता की तरफ से इस फैसले के लिए धन्यवाद करता हूं, जिसमे माननीय न्यायालय ने जनता को ही सर्वोच्च बताया है. LG को मनमानी का अधिकार नहीं, दिल्ली सरकार के काम को रोका जा रहा था. माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है.
  • आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लैंड, पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर सरकार के अधीन नहीं आएंगे. इन तीन विषयों को छोड़कर चाहे वह बाबुओं के ट्रांसफर का मसला या और नई शक्तियां हों, वह सारी शक्तियां अब दिल्ली सरकार के अधीन आ जाएंगी.

चीफ जस्टिस का कहना

इस मामले को लेकर पांच जजों की बेंच चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एक सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस ने कहा कि संघीय ढांचे में absolutism और अनार्की की कोई जगह नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई फैसला लेने से पहले LG की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत. साथ ही कोर्ट ने कहा कि छोटे-छोटे मामलों में में मतभेद ना हो. राय में अंतर होने पर राष्ट्रपति को मामला भेजें LG. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्य को बिना किसी दखल के कामकाज की आजादी हो. चीफ जस्टिस और दो अन्य जजों ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर फैसला एलजी को बताना होगा. हालांकि, हर मामले में एलजी की सहमति जरूरी नहीं.

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प्यार के कारण भाभी ने ली देवर की जान

प्रतीकात्मक फोटो

कोलकाता। भाभी-देवर को रिश्ते को तार-तार करने वाली खबर सामने आई है. एक भाभी ने अपने ही देवर को मौत के घाट उतार दिया है. हत्या की वजह प्यार-दुलार बताया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 साल की एक महिला ने कोलकाता में कथित रूप से अपने देवर को मार डाला व खुद हत्या की बात भी बताई.

रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार वाले आठ साल के लड़के को ज़्यादा लाड-प्यार करते थे. इस बात से खफा प्रियंका दास (भाभी) ने रिजु दास को पानी में डुबोकर मार डाला. नेटवर्क 18 की खबर के मुताबिक पीड़ित की मां डॉली दास ने बताया कि शुरुआत में परिवार को लगा कि बच्चे की मौत एक दुर्घटना है. लेकिन बाद में आरोपी प्रियंका दास ने खुद ही अपने पति सुब्रत को बताया कि उसने ही बच्चे को मारा है. उसने कहा कि उसने बच्चे को ड्रम में नहाते हुए देखा और उसे डुबा के मार डाला. आरोपी के पति व ससुर ने मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद प्रियंका हत्या के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

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मायावती ने किया बड़ा फेर-बदल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी में दिग्गज नेताओं को निकालने के साथ-साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए भी पुरजोर काम चल रहा है. मायावती की रणनीति के अनुसार बसपा में बड़े फेर-बदल भी किए गए हैं. एक-दो दिन के भीतर ही इन राज्यों में पार्टी ने नए लोगों को बड़ी जिम्मेदारी के साथ कमान सौंपी है तो वहीं बागी नेताओं को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया है.

इनको सौंपी गई जिम्मेदारी

आगामी चुनाव को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के नेता राजिक उस्मानी को पार्टी की ओर से बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. बसपा संगठन की ओर से उन्हें गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रभारी बनाया गया है. जिला अध्यक्ष हरिश्चन्द्र गौतम की ओर से जारी सूचना के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर श्री उस्मानी को सदर विधानसभा सभा का प्रभारी बनाया गया है. संगठन की ओर से निर्देश दिये गये हैं कि श्री उस्मानी बसपा के प्रचार-प्रसार और संगठन को मजबूत करने के लिए क्षेत्र का नियमित दौरा और बैठक करें.

सूत्रों के मुताबिक श्री उस्मानी लोकसभा चुनाव में भी टिकट के दावेदार के रूप में चर्चा में है. प्रभारी बनाये जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे शीर्ष नेतृत्व की अपेक्षाओं और निर्देशों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेगें.

उत्तर प्रदेश के झांसी मंडल में बसपा ने लापरवाही से काम करने और निष्क्रिय रहने वाले पदाधिकारियों के पदों में मंगलवार को बड़ा बदलाव करते हुए मंडल जोन प्रभारी रविकांत को पद से हटाकर पवन चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी के जिलाध्यक्ष रामबाबू चिरगाईयां ने बताया कि मंडल जोन इंचार्ज रविकांत मौर्य को उनके पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर अब पवन चौधरी को झांसी मंडल जोन का इंचार्ज बनाया गया है.

इसके अलावा जयपाल अहिरवार जिला जोन इंचार्ज को पद से हटाकर उनके स्थान पर मुन्ना लाल अहिरवार (दरोगा) को जिला जोन इंचार्ज झांसी बनाया गया है. इसी क्रम में विधानसभा प्रभारी चन्द्रभान अहिरवार को हटाकर उनके स्थान पर मनोज अहिरवार को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसके साथ ही संतराम अहिरवार भट्पुरा को मऊरानीपुर विधानसभा प्रभारी बनाया गया है.

बसपा विधायक बाहर

चंडीगढ़ में पिछले चार साल से सत्तारूढ़ भाजपा को समर्थन दे रहे बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक टेक चंद शर्मा को आखिरकार पार्टी ने मंगलवार को निष्कासित कर दिया है. टेक चंद फरीदाबाद जिले की पृथला विधानसभा सीट से बसपा के एकमात्र विधायक थे. इनेलो-बसपा गठबंधन के दौरान ही शर्मा को निलंबित कर दिया गया था, मगर उनके बसपा से निष्कासन का फैसला अब जाकर हुआ है. बसपा द्वारा निष्कासित कर दिए जाने के बावजूद टेक चंद शर्मा की विधानसभा सदस्यता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा. विधानसभा में अब शर्मा को आजाद विधायक के तौर पर गिना जाएगा. विधानसभा में अब आजाद विधायक की संख्या बढ़कर छह हो जाएगी.

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बसपा-इनेलो के 23 हजार कार्यकर्ताओं के लिए अस्थाई जेल बनी अनाज मंडी

नई दिल्ली। हरियाणा की भाजपा सरकार के जन विरोधी कामों व विकास से भटकती खट्टर सरकार के खिलाफ बसपा व इनेलो ने मिलकर हमला बोला है. सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के पानी को लेकर मंगलवार को झज्जर जिले के बेरी में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बसपा ने जेल भरो आंदोलन किया. बेरी की अनाज मंडी में करीब 23 हजार कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी दी.

प्रशासन ने बेरी अनाज मंडी को ही अस्थायी जेल मानकर इनेलो कार्यकर्ताओं को पहले तो गिरफ्तार किया और उसके दो मिनट बाद ही सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया. उन्होंने कहा एसवाईएल का निर्माण सरकार को सौ फीसदी करना होगा. अगर जेल भरो आंदोलन के बाद सरकार ने नहर का निर्माण नहीं करवाया तो इससे भी बड़ा आंदोलन होगा, जिससे सरकार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

अभय चौटाला ने मंच से कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए जनता तैयार है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद किसानों का कर्ज माफ करेगी. गरीब कन्या की शादी के लिए कन्यादान के तौर पर पांच लाख रुपए देने का काम भी इनेलो सरकार करेगी. अभय चौटाला ने मंच से ही इनेलो-बसपा के कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि प्रदेश में इनेलो- बसपा की लहर है और आने वाली सरकार भी उन्हीं की होगी.

इस मौके पर इनेलो नेता अभय चौटाला ने मंच से भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला. अभय चौटाला ने बताया कि झज्जर प्रदेश का 18वां जिला है, जिसमें जेल भरो आंदोलन पूरा हुआ है. उन्‍होंने कहा कि 17 जुलाई के बाद इनेलो की बैठक बुलाकर बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा.

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बसपा के चार दिग्गज नेता बाहर

लखनऊ। बसपा एक के बाद एक अपने पुराने दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा रही है. पूर्व मंत्री विनोद सिंह को निकालने के बाद फिर सुल्तानपुर जिला के चार नेताओं को निकालने की बात सामने आई है. दो बार विधायक रह चुके भगेलूराम को पार्टी को बाहर निकाल फेंका है. इससे बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी के गद्दार नेताओं का सफाया किया जाना चाहिए. बहनजी सफाई अभियान चलाकर पार्टी को साफ करने का काम कर रही है.

लेकिन वहीं बसपा नेता श्यामलाल का कहना है कि इस तरह से अंधाधुंध निष्कासन करना पार्टी के नुकसानदेह साबित हो सकता है. नेताओं को निकालने से पहले समझाने का काम किया जाना चाहिए. दिग्गजों नेताओं को निकालने से उनके समर्थक भी हमसे टूट रहे हैं. इससे आगामी चुनाव में विपक्षी दल की स्थिति मजबूत होगी.

सोमवार को मायावती के आदेश के बाद कादीपुर से दो बार विधायक रहे चुके भगेलूराम को निकालने के साथ ही जिला प्रभारी राजमणि वर्मा, तिलकधारी व विनोद गौतम को भी बसपा ने बाहर निकाल दिया. बता दें कि भगेलूराम पार्टी के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे. 2002 व 2007 में दो बार पार्टी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं.

इससे पहले उन्होंने पूर्व सांसद कैसरजहां, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामहेत भारती और पूर्व विधायक जासमीर अंसारी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निकाल दिया है. साथ ही मायावती के इस फैसले के बाद अन्य नेता चिंता में पड़ गए हैं.

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फिल्म ‘संजू’ में हिरानी ने क्यों नहीं दिखाई ये सच्चाई?

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नई दिल्ली। पिछले साल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम.एस धोनी पर एक बायोपिक बनी थी. फिल्म ने खूब धूम मचाया. वो तमाम लोग जो भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन कूल की एक सहज इंसान और रांची वाले लड़के की कहानी नहीं जानते थे, इस फिल्म ने उसमें सब दिखाया. हालांकि फिल्म और जिंदगी दो अलग-अलग चीजे हैं और किसी की जिंदगी पर फिल्म बनाते वक्त कुछ बातें छोड़ देने की मजबूरी होती है लेकिन फिर भी कुल मिलाकर धोनी की बायोपिक दर्शकों को धोनी के जीवन के तमाम रंगों से परिचित करा गई.

इसमें उनका फुटबॉलर से क्रिकेटर बनना, रांची के दोस्त, रेलवे की नौकरी, क्रिकेट का स्ट्रगल, लव स्टोरी आदि तमाम चीजें दिखाई गई थी. फिल्म में धोनी के धोनी बनने में जिस-जिस ने भूमिका निभाई है, उन सभी किरदारों को समेटा गया है. फिल्म थोड़ी लंबी थी, लेकिन वो फिल्म दर्शकों को संतुष्ट करती है. लेकिन हाल ही में संजय दत्त के जीवन पर बनी फिल्म संजू में संजय दत्त के जीवन के तमाम रंग और तमाम लोग नहीं दिखे.

इस फिल्म के रिलीज होने के पहले संजय दत्त के जीवन से जुड़ी तमाम खबरें मीडिया में खूब छाई रही. उन तमाम सच्ची खबरों की फोटो भी खूब वायरल हुई, लेकिन जब दर्शक फिल्म देखने पहुंचे तो फिल्म से संजय दत्त के जीवन की वो तमाम महत्वपूर्ण बातें गायब थी, जिसके बारे में दर्शक जानना चाहते थे. आइए डालते हैं ऐसी ही घटनाओं पर एक नजर जिसे फिल्म संजू में अनदेखा कर दिया गया.

नंबर-1 लव अफेयर्स

संजय दत्त एक अभिनेता हैं. उनकी पहचान या फिर लोगों की उनमें रुचि की एक यही वजह है. लेकिन फिल्म में उनके फिल्मी जीवन की कोई बात नहीं दिखाई गई है. न किसी फिल्मी कलाकार से दोस्ती न दुश्मनी और न ही प्यार. जबकि संजय दत्त अपनी जिंदगी में 350 लड़कियों से संबंध होने की बात करते हैं. लेकिन फिल्म में उनकी फिल्मी दुनिया की एक भी गर्लफ्रेंड को नहीं दिखाया गया है. जबकि माधुरी दीक्षित और रिया पिल्लई का संजय दत्त की जिंदगी में अहम रोल रहा है.

नंबर-2 निजी जिंदगी

संजय दत्त की निजी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण किरदार फिल्म से गायब हैं. सबसे बड़ी मिसिंग संजय दत्त की पहली पत्नी ऋचा शर्मा और बेटी त्रिशाला हैं, जिनको फिल्म से साफ गायब कर दिया गया है. इसी तरह संजय दत्त के जिगरी दोस्त और बहनोई कुमार गौरव भी इस फिल्म से गायब हैं. यह बात खलती है.

नंबर-3 पोलिटिकल कनेक्शन

संजय दत्त जब मुंबई ब्लास्ट में फंसे तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और नरसिंहा राव प्रधानमंत्री थे. तो वहीं महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सरकार थी. उस दौरान सुनील दत्त कांग्रेस के एमपी थे. लेकिन बलास्ट के बाद सुनील दत्त को न तो राज्य में और न ही केंद्र सरकार से कोई मदद मिली. तब निराश सुनील दत्त अपने बेटे संजय दत्त की खातिर अपने धुर विरोधी बाल ठाकरे के पास पहुंचे. ठाकरे ने उन्हें निराश नहीं किया.

इस मुलाकात के बाद संजय दत्त के पक्ष में सामना में लेख आए और माहौल बदलने लगा. जमानत मिलने के बाद संजय दत्त अपने पिता के साथ ठाकरे के घर मातोश्री पहुंचे थे, जिसकी तस्वीरें मौजूद हैं. लेकिन यह अहम घटना फिल्म से गायब रही.

नंबर-4 फिल्मी जीवन

संजय दत्त फिल्म स्टार सुनील दत्त और नर्गिस के बेटे हैं. उनका खुद का करियर भी फिल्मों का रहा है. खलनायक और वास्तव जैसी फिल्मों ने संजय दत्त की वापसी को बेहतर बनाया था. लेकिन संजय दत्त के फिल्मी जीवन और शूटिंग से जुड़ा कोई भी किस्सा इस फिल्म में नहीं दिखाया गया, और न ही किसी दूसरे एक्टर को दिखाया गया है. एक जगह महेश मांजरेकर दिखते तो हैं; लेकिन यह चीजों को स्थापित नहीं कर पाती.

नंबर-5 कमजोर कड़ी

ऐसा नहीं है कि फिल्म में और घटनाएं दिखाने की गुंजाईश नहीं थी. क्योंकि फिल्म का पहला भाग काफी आराम से चलता है. घटनाएं आकर ठहर जाती हैं, फिर आगे बढ़ती हैं. फिल्म के डायरेक्टर चाहते तो इस वक्त में कुछ और घटनाओं को भी शामिल किया जा सकता था. तो जेल के कुछ किस्से भी प्रभावी हो सकते थे. मुंबई ब्लास्ट के दौरान की राजनीति को भी और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था, यह फिल्म के लिए बेहतर होता.

फिलहाल यह फिल्म बड़ी हिट हो चुकी है और रणवीर कपूर ने एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है. इस फिल्म ने रणवीर कपूर और संजय दत्त को हिट कर दिया है लेकिन थ्री इडियट और मुन्ना भाई एमबीबीएस वाले राजू हिरानी को थोड़ा पीछे छोड़ दिया है.

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जेएनयू ने पीएचडी छात्र को हॉस्टल से निकाला, छात्र ने लिखा ये खत

साथियों, आप सबके लिए कुछ शब्द….

2009 में जे॰एन॰यू॰ आने से लेके आज प्रशासन द्वारा हॉस्टल से ज़बरदस्ती निकाले जाने तक मैंने बहुत कुछ सीखा है, तरह-तरह के लोगों से सामना हुआ है और अच्छे-बुरे सारे अनुभव भी लिए है इन 9 सालों में. वक़्त के साथ सब कुछ बदलना पड़ता है, पर अपने मूल सिद्धांतो को नहीं बदलना चाहिए.

मैंने ऐसा ही करने का प्रयास किया.

सामाजिक न्याय के विचार को सिर्फ़ समझा नहीं…उसके लिए संघर्ष किया और उसे अपने निजी जीवन में भी जीने लगा. सामाजिक न्याय पर जब-जब ख़तरा मंडराया हुआ दिखा, तब मैंने और हम सब साथियों ने साथ मिल कर उसके लिए लड़ाई लड़ी.

ऐसा ही एक ख़तरा तब मंडराया जब 2016 में UGC का गज़ट आया. इस गज़ट में आदिवासी-दलित-पिछड़ों के साथ साफ़-साफ़ अन्याय हो रहा था, उनके मूल हक़ का हनन हो रहा था. इसी के विरोध में 20 जनवरी 2017 को मैं भूख हड़ताल पर बैठ गया. भूख हड़ताल तो 78 घंटे बाद प्रशासन ने पुलिस द्वारा ख़त्म करा दी, पर हम लोगों का UGC गज़ट के खिलाफ संघर्ष जारी रहा. इस संघर्ष का परिणाम ये हुआ की मई 2018 में UGC ने अपना बहुजन-विरोधी गज़ट वापस ले लिए.

UGC से तो हम जीत गए पर हमारी असली लड़ाई संघ-भाजपा जैसी ब्रह्मणवादी ताक़तों से है. इन ब्रह्मणवादी ताक़तों को ये क़तई पसंद नहीं आता है कि बहुजन अपने हक़ की आवाज़ उठाए. ये अपने जनेऊ से लगातार बहूजनो के का गला घोटने की कोशिश में लगे रहते हैं. मैं हक़ के लिए आवाज़ उठाई तो इन्होंने उसको दबाने के लिए मनु के क़ानून का हर पैंतरा अपनाया. 50 हज़ार का फ़ाइन लगाया, सस्पेंड किया, पुलिस कम्प्लेन की, हॉस्टल ट्रान्सफ़र किया और आज उस समय हॉस्टल से निकाल दिया जब मेरी PhD का सबसे अहम समय है…15 दिन में PhD जमा करनी है और मेरे पास रहने-पढ़ने के लिए कोई रूम नहीं है!

पर आज हम डंके की चोट पर कहता हूँ की ना कभी अपनी विचारधारा से समझौता किया है और ना कभी करूँगा. ये चाहे जितने भी ज़ुल्म कर लें पर मैं लगातार बहुजनो के हक़ की लड़ाई लड़ता रहूँगा…इनके जनेऊ को तोड़ कर बहुजनों का छीन लूँगा. पर इस सब के लिए मुझे आप सभी साथियों की ज़रूरत है. मेरे संघर्ष की रीढ़ की हड्डी आप लोग ही हैं. आपसे बस इतना की कहना चाहता हूँ की “साथियों, चाहे जो हो जाए, समझौता नहीं करना है. एकता के साथ लड़ना है और अपना हक़ लेना है. ब्राह्मणवादियों को दिखा देना है की हमारा हौंसला उनके जनेऊ से बहुत-बहुत मजबूत है. अरे हम तो मेहनतकश लोग हैं…मेहनत करके जीना जानते हैं…ये कुछ भी कर लें पर हम अपनी मेहनत से अपना अधिकार लेकर ही रहेंगे.”

जय भीम-जय बिरसा-जय मंडल

सामाजिक न्याय ज़िंदाबाद

साभारः दिलीप यादव का फेसबुक वॉल  इसे भी पढ़ें-बिहार की ‘असली’ टॉपर मुसहर गर्ल की कहानी
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गोरखपुर विविः शिक्षक नियुक्ति में ब्राह्मण-ठाकुरों की बहार, आरक्षण की अनदेखी

गोरखपुर। वैसे यह कहना गलत नहीं होगा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्तियों में जमकर ठाकुर-ठाकुर, बाभन-बाभन का खेल खेला गया है. 02 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय में 62 नये शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. करीब सारे सीटों पर इनका ही हक है. आंकड़ा देखने के बाद भी शायद आप भी ऐसा ही कहेंगे.

टोटल 62 शिक्षक के सीट में 42 शिक्षक सिर्फ दो जातियों के हैं. 24 ठाकुर और 18 ब्राह्मण यानी 67.74 प्रतिशत शिक्षक या तो ठाकुर या बाभन. करीब दो तिहाई. इसमें भी इस बार बाभनों से ठाकुरों ने बाजी मार ली. 18 बाभनों की तुलना में 24 ठाकुर हुए अर्थात  कुल पदों के 38.70 प्रतिशत पर ठाकुरों ने कब्जा कर लिया. बाभनों से करीब 10 प्रतिशत अधिक. कुल नियुक्तियों में बाभनों का प्रतिशत 29.03 है.

कोई पूछ सकता है कि ज्ञानी बाभनों की तुलना में ठाकुरों ने कैसै बाजी मार ली. अगर मुख्यमंत्री अजय सिंह विष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ और कुलपति विजय कृष्ण सिंह के रहते भी ऐसा न होता, तो आखिर कब होता?

बाभन ऋषि वशिष्ठ के वंशजों को ठाकुर ऋषि विश्वामित्र में वंशजों ने पराजित ही कर दिया. गोरखपुर में बाभनों और ठाकुरों का संघर्ष काफी पुराना है. हरिशंकर तिवारी और विरेन्द्र प्रताप शाही के जमाने में तो कितने लोग इस वर्चस्व की लड़ाई में मारे गये. फिलहाल गोरखपुर में अजय सिंह विष्ट के वर्चस्व के बाद गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में बाभनों के दिन ठाकुरों की तुलना में बुरे चल रहे हैं. फिर भी बाभन शंबूक के बंशजों के खिलाफ ठाकुरों के साथ एकजुट  हैं.

शंबूक के वंशजों को कितने पद मिले इसका जायजा लेने से पहले थोड़ा लाला लोगों का जायजा ले लिया जाय. 02 लाला ( श्रीवास्तव) लोग भी नियुक्त हुए हैं. लाला लोग शंबूक के वंशज हैं या वशिष्ठ-विश्वामित्र के तय नहीं हो पाया है. अंदर-अंदर बाभन-ठाकुर इन्हें शंबूक का वंशज मानते हैं, जबकि ये लोग अपने को वशिष्ठ-विश्वामित्र से जोड़ते हैं. कौन इस पचड़े में पड़े इसे छोड़ते हैं. इन्हें बाभनों-ठाकुरों की गोल का मान लेते हैं. अब जरा शंबूक के वंशजों के की चर्चा.  करीब 20 प्रतिशत पदों पर ओबीसी और दलित समाज के लोग भी नियुक्त हुए हैं.

उर्दू विभाग में 2 मुसलमानों को निुयक्त करना पड़ा है. पता चला है कि कोई हिंदू इस योग्य नहीं था. दुखद है, योगी के गढ़ में संघी कुलपति के रहते म्लेच्छ की नियुक्ति?

खैर नियुक्तियों का एक दौर और पूरा हुआ. 15 प्रतिशत से भी कम आबादी बाले ठाकुरों-बाभनों ने करीब 70 प्रतिशत पदों पर कब्जा कर लिया. ठाकुरों ने बाभनों को पराजित कर दिया. दोनों ने मिलकर शंबूक के करीब 70 प्रतिशत वंशजों को 20 प्रतिशत पद देकर राम राज्य की उदारता का परिचय दिया.

-सिध्दार्थ रामू इसे भी पढ़ें-आरक्षण की मांग पर योगी जी के ढोंग की खुली पोल
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एटीएम कार्ड फिर दे सकता है झटका

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। एटीएम कार्ड धारकों को एक बार फिर झटका लग सकता है. एटीएम कार्ड यूज करने वालों को पहले के मुकाबले ज्यादा चार्जेज पे करने पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं और भी कई प्रकार के नियम बनाने की तैयारी हो रही है. इससे एटीएम कार्ड यूजर्स की जेब का बोझ बढ़ेगा यानी कि महंगा पड़ सकता है. इसके लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से मंजूरी मिलनी है, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा.

मुफ्त ट्रांजेक्शन

बैंकों ने आरबीआई को जो प्रस्ताव दिया है उसके मुताबिक प्रत्येक ग्राहक को हर महीने मिलने वाले मुफ्त ट्रांजेक्शन की संख्या को घटाने की बात कही है. अभी ज्यादातर बैंक कुल मिलाकर 8 ट्रांजेक्शन मुफ्त देते हैं, जिनमें 5 अपनी बैंकों पर और 3 अन्य बैंकों पर मिलते हैं. ये घटकर के कुल 5 हो सकते हैं.

वर्तमान में सभी बैंक एटीएम पर होने वाले कैश ट्रांजेक्शन के लिए 15 रुपये और नॉन कैश ट्रांजेक्शन करने पर खाते से 5 रुपये काटते हैं. यह चार्ज हर महीने फ्री में मिलने वाले ट्रांजेक्शन के ऊपर लगता है.

1635 एटीएम बंद

बैंक इसके अलावा एटीएम पर होने वाले नॉन बैंकिंग ट्रांजेक्शन की फीस को भी 18 रुपये से बढ़कर 25 रुपये तक हो सकती है. आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक आदि ने पिछले एक साल में अपने 1635 एटीएम को बंद कर दिया है.

आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वो नए नियमों को 31 जुलाई तक लागू कर दें. कैश वैन के लिए बनाए गए इन नियमों के अनुसार कैश मैनेजमेंट कंपनियों के पास में कम से कम 300 कैश वैन, प्रत्येक कैश वैन में एक ड्राइवर, दो कस्टोडियन और दो बंदूकधारी गार्ड होने चाहिए ताकि कैश की सुरक्षा हो सके. इसके साथ ही प्रत्येक गाड़ी में जीपीएस, लाइव मॉनेटरिंग के साथ भू मैपिंग और नजदीकी पुलिस स्टेशन का पता होना चाहिए ताकि इमरजेंसी के वक्त मदद ली जा सके.

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बसपा प्रदेश अध्यक्ष पर FIR दर्ज

भोपाल। मध्य प्रदेश बसपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की खबर सामने आई है. प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार समेत तीन के खिलाफ FIR दर्ज हुई है. छेड़खानी और जान से मारने की धमकी का केस दर्ज हुआ है.

टीटी नगर थाने में बसपा पार्टी की ही महिला कार्यकर्ता ने केस दर्ज कराया है. बताया जा रहा है कि पांच मई को 74, बंगले में पार्टी की मीटिंग के दौरान एक महिला कार्यकर्ता को नर्मदा प्रसाद ने रात भर रुकने को कहा था. इतना ही नहीं इसके बाद नर्मदा का समर्थक महेश कुशवाहा महिला को अश्लील फोटो और वीडियो भेज कर प्रताड़ित कर रहा था. टीटी नगर थाने में नर्मदा प्रसाद अहिरवार के खिलाफ धारा 354, 506 और साइबर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

इस बात को लेकर नर्मदा प्रसाद ने आरोपों को खारिज कर दिया है. महिला के आरोपों पर प्रदेश अध्यक्ष ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है. फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर ली है.

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