हैवान बना पिता, बेटे का किया बुरा हाल

प्रतीकात्मक फोटो

हैदराबाद। नशे में इंसान रिश्ता भूल जाता है. एक ऐसी ही दर्दनाक घटना की वीडियो सामने आई है. इस वीडियो में एक शख्स शराब के नशे में तीन साल के अपने बेटे को बेरहमी से मारते हुए दिख रहा है. एएनआआई की मुताबिक घटना हैदराबाद इलाके की है. जिसमें कि शराबी पिता अपने बेटे को फेंक-फेंक कर मार रहा है.

पुलिस के मुताबिक, शराब के नशे में धुत शिवा गौड़ ने पहले अपनी बीवी से झगड़ा किया और फिर अपने 3 साल के बेटे पर हमला कर दिया. उसने अपने बच्चे को ज़मीन पर पटकना शुरू कर दिया. मौके पर मौजूद उसकी बीवी और बाकी लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माना. देखते ही देखते उसने अपने बेटे को ऑटो पर फेंक मारा. बच्चे के सिर और शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट लगी है. अभी बच्चे का इलाज हैदराबाद के अस्पताल में चल रहा है. डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे की हालत फिलहाल स्थिर है. ये घटना सोमवार रात दो बजे की है.

इस घटना के संबंध में जगद्गीरिगुता पुलिस को फोन आया कि श्रीनिवासनगर में एक नशे में आदमी अपने बेटे को बुरी तरह से पीट रहा है और वो किसी की बात नहीं मान रहा है. मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि 30 साल का शिवा गौड़ अपने 3 साल के बेटे रित्विक और उसकी मां को बुरी तरह से पीट रहा है. पुलिस ने इसके बाद मां और बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया. बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया गया है. आरोपी के खिलाफ न्याय अधिनियम के तहत आईपीसी धारा 324 और धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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बसपा से निकाले गए नेताओं की वापसी

लखनऊ। बसपा की ओर से ना केवल नेताओं को बाहर किया जा रहा है बल्कि बाहर निकाले गए नेताओं को फिर जोड़ा जा रहा है. इसके लिए पार्टी जोड़ तोड़ से काम कर रही है. पार्टी का कहना है कि बसपा के पुराने नेताओं को फिर वापस लाने का काम मायावती के निर्देशानुसार किया जा रहा है. फिलहाल उत्तर प्रदेश के सांसद व नेताओं को पुनः पार्टी में लाया गया है.

पार्टी से दूर हो चुके कई पुराने बसपाइयों को फिर से जोड़ने का काम आरंभ हो गया है. इसी कड़ी में देवरिया के पूर्व सांसद गोरख जायसवाल को फिर से पार्टी में शामिल किया गया है. जोनल इंचार्ज घनश्याम खरवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बीएसपी प्रमुख मायावती के निर्देश पर ही बरहज विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके मुरली मनोहर जायसवाल, श्याम मनोहर जायसवाल और प्रीतम जायसवाल को भी दोबारा पार्टी में शामिल किया गया है.

गोरख जायसवाल बीएसपी के दिवंगत विधायक राम प्रसाद जायसवाल के पिता और मुरली मनोहर जायसवाल राम प्रसाद जायसवाल के बेटे हैं. राम प्रसाद जायसवाल एक समय में मायावती के बहुत करीबी थी. एनआरएचएम घोटाले में उन्हें जेल जाना पड़ा था लेकिन पार्टी के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई थी. जमानत पर छूटने के बाद उनका देहांत हो गया था. इसके अलावा उत्तराखंड के बसपा के दिग्गज नेता व पूर्व विधायक की भी वापसी कराई जा चुकी है.

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दलित के घर सत्तू खाने व नहाने पहुंचे तेज प्रताप

पटना। दलित के घर जाकर खाने की राजनीति लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे व राजद नेता तेज प्रताप ने भी अपना ली. बीजेपी से एक कदम आगे निकलकर तेज प्रताप ने दलित के घर ना केवल खाया बल्कि खुलेआम चपाकल से नहाया भी. इस अंदाज को देखने के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ और भी बढ़ गई. लोग फोट खींच व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने लगे. तेज प्रताप ने रिक्शा चलाकर अपने क्षेत्र का दौरा किया.

दरअसल सोमवार को तेज प्रताप अपने चुनावी क्षेत्र महुआ विधान चले गए. इस दौरान उन्होनें अपने क्षेत्र का भ्रमण किया और दिनभर की थकावट को दूर करने के लिए दलित के घर खाने व नहाने चले गए. इस दौरान तेज प्रताप ने लालू प्रसाद की अंदाज में सत्तू, प्याज, आचार व चटनी का स्वाद चखा. इस दौरान भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “अपने कर्मभूमि महुआ में कार्यक्रम सत्तू पार्टी मजा लिया. फाइव स्टार होटलों का खाना दलित के घर ले जा कर खाना और राजनीतिक डंके बजाना बीजेपी, आरएसएस वालों का काम है. हम तो किसानों के घर में पिसा हुआ सत्तू खाते हैं और खुब खुश रहते हैं.”

तेज प्रताप ने ना केवल सत्तू खाया बल्कि चपाकल पर स्नान किया. इस दौरान ली गई तस्वीरों को फेसबुक पेज पर शेयर कर लिखा कि, “सत्तू पार्टी कार्यक्रम और अपने विस क्षेत्र महुआ में दिनभर के पैदल भ्रमण के बाद थोड़ी थकावट को दूर करने के लिए करहटिया पंचायत के एक दलित के घर जा कर उनके चापाकल पर स्नान किया. बहुत मीठी अनुभूति थी गांव के चापाकल की ठंडी पानी से नहाने का…”

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मायावती के आदेश के बाद BSP नेताओं में खलबली

लखनऊ। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे मायावती पार्टी को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठा रही हैं. मायावती ने बसपा के बागी व दागी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद इसी कड़ी में बड़ा फैसला लिया है. बसपा सुप्रीमो ने निर्देश दिया है कि पार्टी के निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार कर जल्द भेजी जाए. 75 जिलों में ऐसे नेताओं की लिस्ट बनाने की तैयारी आरंभ हो गई है. निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को मिली है.

बहनजी के आदेश के बाद बसपा नेताओं में खलबली मची है. किसके ऊपर गाज गिरेगी पता नहीं. वैसे पार्टी के सक्रिय नेताओं को इससे कोई डर नहीं है लेकिन अब वे भी तेजी से काम करने में जुट गए हैं.

नेताओं की स्क्रीनिंग शुरू

आरएस कुशवाहा का कहना है कि बीएसपी प्रमुख मायावती के निर्देश पर ऐसे नेताओं की स्क्रीनिंग शुरू हो गई है. लोकसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में निष्क्रिय नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. हम जल्द हीं बैठक कर सभी जिलों में ऐसे नेताओं की लिस्ट तैयार करेंगे. रिपोर्ट तैयार होने के बाद पार्टी मुख्यालय भेजा जाएगा.

तो वहीं देश के युवा वोटरों को ध्यान में रखकर बसपा सुप्रीमो ने भी एक निर्देश दिया है. मायावती ने कहा है कि अक्टूबर तक युवाओं की सक्रिय टीम तैयार की जाए. युवाओं की टीम अपने क्षेत्रों में युवाओं को जोड़ने का काम करेगी.

निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार होने के बाद उनका बाहर निकलना तय है. वैसे भी बहनजी ने इस साल कई दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. पार्टी को मजबूत करने के लिए मायावती कई बड़े पदों पर बदलाव भी किया. बसपा को सशक्त बनाने के लिए मायावती ऐसे कठोर फैसलें लेने से नहीं चूकती हैं.

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महानगर पालिका से परेशान स्वीपर ने की खुदकुशी

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बेंगलुरु। एक स्वीपर के खुदकुशी के मामले में बेंगलुरु महानगर पालिका फंसा दिख रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) में काम करने वाले सफाई कर्मी ने कथित तौर पर 6 महीने से तनख्वाह ना मिलने के कारण आत्महत्या कर ली. उसके साथ काम करने वालों ने बताया कि 40 वर्षीय सुब्रमणी बतौर ‘पौरा कार्मिक’ (स्वीपर) 15 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं. सैलरी ना मिलने के कारण स्वीपर काफी परेशान था उसने आत्मदाह करने की बात कही भी थी लेकिन बीबीएमपी ने ध्यान नहीं दिया.

खबरों के अनुसार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे महानगर पालिका सुब्रमणी के साथ-साथ कई और सैकड़ों लोगों की सैलरी नहीं दे पाया. BBMP पौरा कार्मिक संघ के अध्यक्ष ओबलप्पा ने News18 को बताया सुब्रमणी सरीखे 2,000 कर्मियों को सैलरी नहीं दी गई है. बीबीएमपी ने अतिरिक्त मजदूर कहे जाने वाले इन 2,000 कर्मियों का वेतन रोक दिया है. सुब्रमणी उनमें से एक थे. उनकी दो बेटियां थीं, जिनका पेट भरने के लिए उन्होंने काफी उधार ले रखा था. ओबलप्पा ने कहा, लेनदार उन्हें परेशान कर रहे थे. ऐसे में खुद को बेबस पाकर उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर दिया.

बीबीएमपी कर्मचारियों के एसोसिएशन के मुताबिक, इस पहल से पहले 35,000 स्वीपर थे, अब यह संख्या 18,000 हो गई है. अतिरिक्त के रूप में वर्गीकृत स्वीपर महीने पहले आधार और बॉयोमेट्रिक विवरण देने के लिए लेकिन उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया. ओबलप्पा ने आरोप लगाया कि बीबीएमपी के अधिकारियों ने वेतन जारी करने के लिए रिश्वत की मांग की और सुब्रमणी ने उन्हें भुगतान करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा BBMP के अधिकारी सैलरी देने के लिए एक स्वीपर से 500 से 1000 रुपए तक लेते हैं. अगर वह ऐसा करने से मना करते हैं तो सैलरी रोक ली जाती है. हमारी मांग है कि अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाकर उन्हें अरेस्ट किया जाए. बेंगलुरू के मेयर संपथराज ने कहा कि वह उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे जो सुब्रमणी की मौत के जिम्मेवार हैं.

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सरकारी जमीन पर बनें अस्पताल मुफ्त में करें गरीबों का इलाजः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश की राजधानी में सरकारी जमीन पर बनें प्राइवेट अस्पताल को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. इस फैसले से गरीबों को राहत मिलेगी. राजधानी दिल्ली के मूलचंद अस्पताल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजधानी में सरकारी जमीनों पर जितने भी निजी अस्पताल बने है, उन सभी को गरीबों का मुफ्त में इलाज करना होगा.

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अस्पताल के कुल बेड 25 फीसदी बेड गरीबों के लिए रखने होंगे. अगर अस्पताल गरीबों को मुफ्त इलाज नहीं देते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर मूलचंद, सेंट स्टीफंस, रॉकलैंड और सीताराम भारतिया जैसे अस्पतालों पर मुख्यतौर पर पड़ेगा जिन्होंने रियायती दर पर सरकार से जमीन ली है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के दौरान कहा कि जिन अस्पतालों ने सरकार से सब्सिडी पर जमीन ली है उन्हें भी गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देनी होगी और जो अस्पताल इस नियम को नहीं मानेंगे वो कोर्ट के आदेश की अवमानना के जिम्मेदार होंगे.

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बीजेपी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किया खोखलाः नोबेल विजेता अमर्त्य सेन

नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार से सम्मामित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भारत की मौजूदा अर्थव्यवस्था को खोखला करार दिया है. अमर्त्य सेन ने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी सरकार में अर्थव्यवस्था का हाल खस्ता हो गया है. तो वहीं अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भारत की मौजूदा सरकार एक पहिए से चल रही है और उस पहिए की भी हवा निकल रही है.

शनिवार को राजकमल प्रकाशन द्वारा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशात्री अमर्त्य सेन और ज्यां द्रेज़ की नई पुस्तक ‘भारत और उसके विरोधाभास’पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन साहित्य अकादेमी हॉल में किया गया. लोगों से खचाखच भरे हॉल में अमर्त्य सेन और ज्यां द्रेज़ से वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार और सबा नकवी ने बातचीत की. इस दौरान मौजूदा सरकार की अर्थनीति पर बातचीत हुई.

हमें शर्मिंदा होना पड़ता है…

नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भारत की सबसे बढ़ती हुई अर्थव्यस्था होने के बावजूद भारत में विरोधाभास को चिन्हित करते हुए कहा “बीस साल पहले, इस क्षेत्र के छह देशों में, भारत श्रीलंका के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ था. अब यह है दूसरा सबसे खराब देश है. वर्तमान सरकार में पिछले सरकार से ज्यादा हालत ख़राब हो गये हैं किसी भी सरकार ने स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्र के लिए कारागार उपाय नही किये, और तो और मोदी शासन में स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्र को बिलकुल ही नजरअंदाज किया गया है और सरकार का पूरा ध्यान गलत दिशा में चला गया है”.

उन्होंने आगे कहा “जब हमें भारत में कुछ अच्छे चीजों के होने पर गर्व होता है तो हमें साथ ही उन चीजों की भी आलोचना करना चाहिए जिनके कारण हमें शर्मिंदा होना पड़ता है.”

बांग्लादेश से भी पीछे हैं

पुस्तक के सह-लेखक ज्यां द्रेज ने कहा कि दुसरे देशों में मजदूर श्रेणी का विकास होता है लेकिन भारत में मजूदरों की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है. इसको लेकर सरकार ध्यान नहीं देती है. बीजेपी सरकार की बीमा योजना अच्छी है लेकिन वह आम जन या जरूरतमंद तक पहुंच नहीं पाई है. पिछले कुछ वर्षों में भारत को सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने की अपनी खोज में कुछ सफलता मिली है. मगर यह सोचने वाली बात है कि 7 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के बावजूद, ग्रामीण मजदूर की आय एक ही रही है और फिर भी कोई इसके बारे में नहीं बोलता है.

आगे उन्होंने कहा अगर हम स्वास्थ्य सुविधाओं  के बारे में बात करें, तो भारत आर्थिक रूप से आगे होने के बावजूद इस क्षेत्र में बांग्लादेश से भी पीछे है, और इसका का प्रमुख कारण भारत में सार्वजनिक कार्रवाई में कमी है. आर्थिक विकास विकास को प्राप्त करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके साथ सार्वजनिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए.

भारत और उसके विरोधाभास किताब 2013 में अंग्रेजी में आयी ‘एन अनसर्टेन ग्लोरी इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन’ का हिंदी अनुवाद है.किताब के अनुवादक सुपरिचित पत्रकार अशोक कुमार हैं.

दुनिया में आर्थिक वृद्धि के इतिहास में ऐसे कुछ ही उदाहरण मिलते हैं कि कोई देश इतने लम्बे समय तक तेज़ आर्थिक वृद्धि करता रहा हो और मानव विकास के मामले में उसकी उपलब्धियाँ इतनी सीमित रही हों. इसे देखते हुए भारत में आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति के बीच जो सम्बन्ध है उसका गहरा विश्लेषण लम्बे अरसे से अपेक्षित है.

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CM योगी को थी गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी को जेल में मारने की जानकारी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. मुन्ना बजरंगी की जेल में करीब दस गोलियां मारी गई हैं लेकिन जेल प्रशासन को पता तक नहीं. हालांकि मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने सीएम योगी को बहुत पहले इसकी जानकारी दे दी थी. इसके बावजूद भी जेल में बंद कैदी की निर्ममता से हत्या करने पर पुलिस-प्रशासन व कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.

कुछ दिन पहले ही मुन्ना की पत्नी ने एसटीएफ पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई थी कि उनके पति की जान को खतरा है. मुन्ना उस समय झांसी जेल में बंद था. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा ने कहा, “मेरे पति की जान को खतरा है. यूपी एसटीएफ और पुलिस उनका एनकाउंटर करने की फिराक में हैं. झांसी जेल में मुन्ना बजरंगी के ऊपर जानलेवा हमला किया गया. कुछ प्रभावशाली नेता और अधिकारी मुन्ना की हत्या करने का षड्यंत्र रच रहे हैं.”

इस बीच योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जेल में हत्या कैसे हो गई. इसकी जांच कराई जाएगी और इसमें जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नही जाएगा. पूरे मामले की रिपोर्ट मंगाई गई है.” ​पुलिस प्रसाशन इस मामले की जांच पड़ताल कर रहे हैं.

बता दें कि बजरंगी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के अलावा दर्जनों हत्या का आरोपी है. इसके अलावा मुन्ना पर बड़ौत के पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से 22 सितंबर 2017 को फोन पर रंगदारी मांगने और धमकी देने का आरोप था. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. ऐसा माना जाता है कि एनकाउंटर के डर से उसने खुद गिरफ्तारी करवाई थी.

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CBSE नहीं, ये एजेंसी लेगी NET, JEE और NEET की परीक्षा

नई दिल्ली। सीबीएसई से जुड़ी बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा है कि नीट, जेईई मेन्स, यूजीसी नेट, प्रबंधन से जुड़ी सीमैट और फार्मेसी से जुड़ी जीपैट परिक्षाओं का आयोजन अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कराएगी. इससे पहले सीबीएसई ये परीक्षायें कराती थी.

मानव सांसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि एनटीए अब यूजीसी नेट की परीक्षा दिसंबर में आयोजित करेगी. नीट की परीक्षा का आयोजन हर साल फरवरी और मई में करायेगी. इसी तरह से जेईई (मेन्स) की परीक्षा हर साल जनवरी और अप्रैल में कराई जाएगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र दोनों बार परीक्षा दे सकते हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा आयोजन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सुधार है और इसे इस वर्ष से शुरू करने का निर्णय किया गया है. इस बारे में वेबसाइट पर कुछ सूचनाएं डाली जायेंगी और 2-3 दिनों में पूरी सूचना डाल दी जायेगी. उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में करीब 13 लाख छात्र बैठते हैं, जबकि जेईई मेन्स में 12 लाख छात्र तथा यूजीसी नेट में 12 लाख छात्र बैठते हैं. सीमैट में एक लाख छात्र और जीपैट में 40 हजार छात्र हिस्सा लेते हैं.

प्रवेश के लिए दोनों में से उच्च प्राप्तांक पर विचार किया जाएगा मंत्री ने बताया कि इन परीक्षाओं के संदर्भ में पाठ्यक्रम, पश्नों के रूप ओर भाषा के विकल्प के बारे में कोई बदलाव नहीं किया गया है. परीक्षा की फीस में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है. जावड़ेकर ने बताया कि ये परीक्षाएं कम्प्यूटर आधारित होंगी. उन्होंने कहा कि इस बारे में छात्रों को घर पर या किसी केंद्र पर अभ्यास करने की सुविधा दी जायेगी. यह मुफ्त होगा. हर परीक्षा कई तिथियों को आयोजित होगी अर्थात 4-5 दिनों तक चल सकती हैं.

 (इनपुट भाषा व एनडीटीवी से)

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मुस्लिम पिता चिल्लाता रहा और भीड़ ने बच्चा चोर समझ कर…

मेंगलुरू। व्हाट्सएप पर फैले गलत मैसेज का प्रकोप देखने को मिल रहा है. फिर एक जगह पर भीड़ ने पिता को ही शिकार बना लिया. एक मुस्लिम युवक अपने बच्चे के साथ ऑटोरिक्शा में सफर कर रहा था. बच्चा के रोने के कारण लोगों ने समझा की वह बच्चे का अपहरण कर के ले जा रहा है और बिना कुछ पूछे ही पिटाई करने लगे.

दरअसल मामला मेंगलुरू की है. गुरूवार को खालिद (30) नामक एक मुस्लिम युवक अपने दो साल के बच्चे को लेकर जा रहा था. हालांकि खालिद थोड़ा नशे में था तो वह बच्चे को डांट व जरा रहा था जिससे कि बच्चा जोर-जोर से रोने लगा. इस दौरान दो बाइक सवारों ने जब बच्चे को रोते हुए देखा तो वो उसका पीछा करने लगे.

खालिद चाय पीने के लिए जब एक रेस्टोरेंट में गया, तो वहां दोनों बाइकसवारों ने आकर बच्चे के बारे में पूछताछ की. जब खालिद कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका तो दोनों बाइकसवार उसे बच्चा-चोर, बच्चा-चोर… कहकर पीटने लगे. इसके बाद कुछ और लोग भी वहां आ गए और वे भी मारने लगे. खालिद चिल्लाता रहा कि वो उसका पिता है. किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी.

पुलिस को इसकी जानकारी मिलने पर खालिद को भीड़ के चंगुल से निकाला. इसके बाद थाना ले जाकर पुलिस ने उसकी खालिद की पत्नी को बुलाया और इसके बाद जांच आदि के बाद खालिद को छोड़ा गया. पुलिस के मुताबिक, खालिद किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना नहीं चाहता था, इसलिए पुलिस ने भी कोई केस दर्ज नहीं किया.

गौरतलब है कि व्हाट्सऐप पर ऐसी अफवाहें फैलाई गई कि बच्चा चोरों का एक गैंग इलाके में सक्रिय है. इन्हीं अफवाहों के चलते पिछले कुछ महीनों के दौरान ‘बच्चा चोर’ होने के शक में भीड़ द्वारा पिटाई की 20 से ज्यादा घटनाएं सामने आ चुकी है.

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दलित नेता जिग्नेश, अल्पेश व हार्दिक पर FIR

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गांधीनगर। गुजरात के तीन युवा नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है. कांग्रेस विधायक अल्‍पेश ठाकोर, गुजरात के दलित नेता और निर्दलीय विधायक जिग्‍नेश मेवानी और हार्दिक पटेल पर एक ही थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. न्यूज18 की खबर के मुताबिक तीनों नेताओं के खिलाफ गुजरात के गांधीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. तीनों पर आरोप है कि इन्‍होंने जनता रेड के नाम पर जबरन एक घर में घुसकर मौजूद लोगों को धमकी दी. धमकी के बाद से वहां दहशत का माहौल है.

ऐसा कहा जा रहा है कि जहरीली शराब पीने से चार लोगों की हालत गंभीर होने के बाद से तीनों नेताओं ने गांधीनगर शराब के अड्डे पर रेड करने का दावा किया था. जिसे गांधीनगर पुलिस ने झूठा करार दिया है. पुलिस के मुताबिक तीनों नेताओं ने जनता रेड के नाम पर कुछ लोगों को धमकाने की बात सामने आई है. इसके संबंध में गांधीनगर थाने में तीनों नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.

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BJP मंत्री ने हत्या के आरोपियों को माला पहनाया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकार का निर्देश दिया है. इसके बावजूद भी भाजपा के मंत्री ने मॉब लिंचिंग के आरोपियों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया है. इस फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दल व आम जनता इसकी निंदा कर रही है. यहां तक की झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने भी फोटो को ट्वीट कर आपत्ति जताई है.

दरअसल, पिछले साल झारखंड के रामगढ़ में एक मीट व्यापारी को पीट-पीटकर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था. बीफ ले जाने के शक में उसकी हत्या हुई थी. इस मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था. जिनकी आजीवन कारावास की सजा पर रांची हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. इस फैसले से खुश हुए आरोपी जिसमें भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जय प्रकाश नारायण जेल से निकलकर सीधे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के घर पहुंचे. मंत्री ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया.

सोशल मीडिया पर किरकिरी होने पर मंत्री ने सफाई दी है कि ‘मेरा न्यायिक व्यवस्था और कानून में पूरा विश्वास है. दुर्भाग्य से, मेरे कार्यों के बारे में गैर जिम्मेदार बयान दिए जा रहे हैं जबकि मैं कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा हूं. जो निर्दोष हैं वह बच जाएंगे और जो दोषी हैं उन्हें कानून के हिसाब से सजा दी जाएगी. रामगढ़ मॉब लिंचिंग मामले में रांची हाईकोर्ट जोकि इस मामले की सुनवाई कर रही है. उसने आरोपियों की सजा पर रोक लगा दी है और उनके केस की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत दी है. केस को दोबारा सुना जाएगा.’

मॉब लिंचिंग आरोपियों के साथ केंद्रीय मंत्री

बता दें कि 40 साल के अलीमुद्दीन अंसारी को रामगढ़ शहर के टंड इलाके में स्थित बाजार में 29 जून 2017 को भीड़ ने कार में बीफ ले जाने के शक में पीट-पीटकर मार डाला था. बाद में हुई फोरेंसिक जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई की कार में रखा मीट बीफ ही था. इस साल मार्च में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 लोगों को इस घटना में आरोपी माना था. हालांकि पिछले हफ्ते झारखंड हाईकोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता सहित 8 लोगों की सजा पर रोक लगा दी थी.

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दलित साहित्यकार का IIAS के लिए चयन

नई दिल्ली। हिंदी के युवा साहित्यकार-आलोचक डॉ. राम भरोसे का आईआईएस के लिए चयन किया गया है. डॉ. भरोसे दलित साहित्यकार तौर पर भी प्रसिध्द हैं. शनिवार को प्राप्त खबर के मुताबिक सामाजिक अध्ययन एवं मानविकी विज्ञान अनुसन्धान क्षेत्र में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आई.आई.ए.एस.) राष्ट्रपति निवास, शिमला-हिमाचल प्रदेश में सह-अध्येता (एसोसिएट) के रूप में चयन हुआ है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्था में डॉ. राम भरोसे जी का अनुसन्धान हेतु चयन होना सम्पूर्ण उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है. डॉ. राम भरोसे ‘वर्तमान साहित्यिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य की प्रमाणिकता, मूल्यांकन और प्रासंगिकता’ विषय पर अनुसन्धान कर रहे हैं.

इस खुशखबरी के बाद प्रशंसक इनको बधाईयां दे रहे हैं. प्रशंसकों का कहना है कि यह न केवल हमारे समाज के लिए गर्व की बात है. हमारी और से इनको इस महती कार्य हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं, और ये कामना करते हैं कि ये इसी प्रकार अपने अनुसन्धान से समाज और साहित्य प्रेमियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे.

उल्लेखनीय है डॉ. राम भरोसे अनेक सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े हैं, इन संस्थाओं के माध्यम से हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल व देहरादून क्षेत्र में विविध सामाजिक परिवर्तन भी आया है. इनके द्वारा स्थापित सामाजिक संस्था ‘प्रगत भारत संस्था’ हरिद्वार परिक्षेत्र में गरीब बच्चों के लिए विगत दस वर्षों से कार्य रही है.

डॉ. राम भरोसे एस.बी.सी. राजकीय महाविद्यालय, पोखरी टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हिंदी विषय में असिस्टेन्ट प्रोफेसर पद पर कार्यरत है. दलित साहित्य के क्षेत्र में डॉ. राम भरोसे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनको राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरुस्कार प्राप्त हैं. उनकी पुस्तक ‘दलित विमर्श तथा प्रेमचंद साहित्य’ हिंदी आलोचना क्षेत्र में चर्चित रही है.  सामान्य परिवार में जन्मे डॉ. राम भरोसे जी कविता, कहानी, आलोचना विधाओं में लेखन कर रहे हैं.

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दलित दस्तक मैग्जीन का जुलाई 2018 अंक ऑन लाइन पढ़िए

दलित दस्तक मासिक पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. जून 2012 से यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित हो रही है. मई 2018 अंक प्रकाशित होने के साथ ही पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. हम आपके लिए सांतवें साल का दुसरा अंक लेकर आए हैं. इस अंक के साथ ही दलित दस्तक ने एक नया बदलाव किया है. इसके तहत अब दलित दस्तक मैग्जीन के किसी एक अंक को भी ऑनलाइन भुगतान कर पढ़ा जा सकता है.

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छात्रा के साथ रेप, प्रिंसिपल व 17 लोग शामिल

प्रतीकात्मक फोटो

पटना। बिहार के छपरा जिला के एक दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ गैंगरेप करने की दर्दनाक घटना सामने आई है. आरोप है कि 10वीं की छात्रा के साथ करीब 18 लोगों ने रेप किया और इस घटना में स्कूल का प्रिंसिपल भी शामिल है. मामला सामने आने के बाद लोगों में स्कूल के प्रति गुस्सा फूट पड़ा है.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक सारण जिला मुख्यालय छपरा के दीपेश्वर बाल ज्ञान निकेतन में छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है. घटना एकमा थाना क्षेत्र के परसागढ़ इलाके की है. पीड़ित छात्रा के बयान पर प्रिंसिपल, दो शिक्षक और 15 छात्रों पर नामजद मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल, एक शिक्षक और दो छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है.

एसपी हरकिशोर राय ने बताया कि प्रिंसिपल छात्रा के साथ पिछले सात महीने से दुष्कर्म कर रहा था. शुक्रवार की सुबह पीड़ित छात्रा ने महिला थाने में मामला दर्ज कराया है. एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ अजय कुमार सिंह तथा महिला थानाध्यक्ष इंद्रा रानी ने घटना स्थल पर जाकर मामले की जांच की और चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पीड़ित छात्रा 10वीं में पढ़ती है. पुलिस ने छपरा सदर अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल जांच कराया है. इस मामले में शनिवार को कोर्ट में पीड़िता का बयान दर्ज कराया जाएगा.

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पार्टी की छवि बचाने को मायावती का बड़ा फैसला

File Photo

भोपाल। बसपा सुप्रीमो मायावती को ऐसे ही एक्शन के लिए जाना जाता है. मायावती ने पार्टी की छवि व महिला को न्याय दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मध्य प्रदेश में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार को बसपा सुप्रीमो ने उनके पद से हटा दिया है. नर्मदा प्रसाद पर एक महिला ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी के आरोप लगे हैं. पीड़ित महिला बसपा की कार्यकर्ता भी है.

दरअसल मामला 04 मई का है. इस दिन 74, बंगले में पार्टी की मीटिंग हुई थी. महिला का आरोप है कि बैठक के बाद नर्मदा प्रसदा अहिरवार ने उसको रात भर रुकने को कहा था. इतना ही नहीं इसके बाद नर्मदा प्रसाद का समर्थक महेश कुशवाहा ने महिला को अश्लील फोटो और वीडियो भेज कर प्रताड़ित कर रहा था. इसके बाद महिला ने टीटी नगर थाने में नर्मदा प्रसाद अहिरवार के खिलाफ शिकायत की. पुलिस ने धारा 354, 506 और साइबर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया.

छेड़खानी और जान से मारने की धमकी के आरोपों पर नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है. बड़े पद की मांग को लेकर इस महिला ने चार जून के कार्यक्रम में हंगामा किया था इसके बाद उसे पार्टी से बाहर निकाला गया था. अहिरवार ने कहा कि पुलिस ने मेरा बयान दर्ज कर लिया है. उन्होंने कहा कि मैं बसपा सुप्रीमो के फैसले का सम्मान करता हूं.

वैसे मायावती ने ऐसा पहली बार नहीं किया है. बसपा सुप्रीमो पार्टी के पदाधिकारी, विधायक या मंत्री के अनुशासनहीनता पर एक्शन लेने में देर नहीं करती हैं. कुछ ही महिनों बाद चुनाव हैं ऐसे में बहनजी का इस तरह फैसला लेना उनके लोकतांत्रिक व न्यायसंगत होने की बात को बताता है.

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फूलपुर में अगवा कर दलित युवती का गैंगरेप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दलित युवती का अपहरण कर गैंगरेप करने की शर्मनाक घटना सामने आई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार गंगापार के फूलपुर में बृहस्पतिवार की रात दो युवकों ने एक दलित किशोरी का अपहरण कर लिया और उसे एक कमरे में बंद कर रात भर उसके साथ दुराचार किया. सुबह किशोरी उनके चंगुल से छूटकर घर पहुंची. इसके बाद पीड़िता के परिजनों ने आरोपी को पकड़कर पेड़ से बांधकर पिटाई की.

पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो जाकर आरोपी को लेकर थाना जाने लगे. इसी बीच आरोपी मौका पाकर फरार हो गया. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है. पीड़िता ने दो युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. रायपुर गांव निवासी जितेंद्र कुमार बिंद उर्फ गोरेलाल के खिलाफ नामजद तथा उसके अज्ञात साथी के खिलाफ 342, 323, 506, 376-डी तथा एससीएसटी एक्ट तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इंस्पेक्टर फूलपुर ने बताया कि किशोरी को मेडिकल परीक्षण के लिए डफरिन हास्पिटल भेज दिया गया है. आरोपियों की खोजबीन की जा रही है.

पीड़िता बहरिया थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है लेकिन करीब एक माह से फूलपुर के एक गांव में अपने ननिहाल में रह रही है. किशोरी गुरुवार की रात घर से शौच के लिए निकली. खेत में पहले से ही घात लगाए बैठे दो युवकों ने उसे अगवा कर लिया और एक कमरे में ले जाकर रात भर उसके साथ दुराचार किया. विरोध करने पर किशोरी की रात में कई बार पिटाई भी की. इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहोल बना हुआ है.

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OLA कैब ड्राइवर ने की महिला के साथ ऐसी हरकत

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। ओला कैब की आए दिन खराब कामों के कारण खबरों में बना रहा है. फिलहाल खबर आ रही है कि नशे में ओला ड्राइवर ने एक महिला को लेकर भागने की कोशिश की लेकिन कामयाब ना हो सका. इस घटना के बाद ओला के सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

बताया जा रहा है कि एक महिला एयरपोर्ट जाने के लिए कैब की बुकिंग की थी. गुरूवार को बनासवाड़ी नामक स्थान से उसको टैक्सी में बिठाया. फिर उसको एयरपोर्ट की बजाय कहीं ओर लेकर जाने लगा. इस मामले को लेकर पुलिस ने बताया कि बनासवाड़ी निवासी सुरेश (28) ने बृहस्पतिवार को सुबह एक महिला यात्री को बनासवाड़ी से टैक्सी में बिठाया. उसे महिला सवारी को केंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पर छोड़ना था. सुरेश कथित तौर पर नशे में था. हवाई अड्डे के टोल गेट के पास पहुंचते ही उसने रास्ता बदल दिया. वह कार को हैदराबाद मार्ग पर ले जाने लगा. महिला ने जब चालक से रास्ता बदलने पर टोका तो उसने महिला को अपशब्द कहे और उससे चुप रहने के लिए कहा.

इसके बाद टोल प्लाजा से गुजरते वक्त महिला ने शोर मचाना शुरू किया. इस दौरान टोल प्लाजा कर्मचारियों का ध्यान महिला के शोर पर गया तो उन्होंने वाहन रोककर पीड़िता को छुड़ाया. उन्होंने आरोपी कैब चालक सुरेश को पकड़कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया. बता दें कि इस घटना से कुछ दिन ही पहले एक जुलाई को ओला के एक अन्य कैब चालक ने हवाई अड्डा जा रही एक महिला यात्री से रेप की कोशिश की थी.

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पाक के पूर्व PM व उनकी बेटी को जेल की सजा

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही उनकी बेटी मरियम नवाज को भी 7 साल की सजा हुई है. यह मामला लंदन की संपत्ति से जुड़ा हुआ है. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह खबर है. इस मामले के बारे में न्यूज एजेंसी एएनआई ने भी ट्वीट किया है.

जान लें कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ को यह सजा लंदन के एवियन फील्ड में चार फ्लैट के मामले में मिली है. बताया जा रहा है कि फिलहाल नवाज शरीफ और उनकी बेटी इस समय लंदन में ही हैं. पाकिस्तान की एकाउंटिबिलिटी कोर्ट ने नवाज शरीफ और उनकी बेटी को यह सजा सुनाई है. इससे पहले शुक्रवार को ही 7 दिन फैसला टालने की नवाज़, मरियम और सफ़दर की अर्ज़ी एकाउंटिबिलीटी कोर्ट ने खारिज कर दी थी.

लंदन में ‘अवैध ढंग से’ हासिल की गई संपत्ति केस में यह फैसला आया है. इस फैसले के बाद अब मरियम का राजनीतिक भविष्य दांव पर लग गया है. बता दें कि पनामा पेपर्स मामले में न्यायालय के फैसले के बाद शरीफ प्रधानमंत्री पद के लिये अयोग्य हो गए थे. अब इस इस फैसले के बाद इनकी बेटी का राजनीतिक कैरियर भी खत्म होने की कगार पर है.

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इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार ने SC के फैसले को मानने से इनकार कियाः केजरीवाल

नई दिल्ली। दिल्ली में अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला तो सुना दिया लेकिन अरविंद केजरीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार कोर्ट का फैसला नहीं मान रही है. दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को एलजी अनिल बैजल से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मैं अभी एलजी साहब से मिलकर आ रहा हूं. अब हर फाइल के लिए एलजी साहब की मंजूरी नहीं होगी, जितने निर्णय हैं दिल्ली सरकार से लिया जाएगा सिर्फ उससे LG साहब को अवगत कराया जाएगा. इस पर एलजी साहब तैयार हो गए हैं. अब दिल्ली के लटके काम जल्द ही किए जाएंगे.

लेकिन दिल्ली व केंद्र सरकार के बीच की लड़ाई की अभी खत्म नहीं हुई है. क्योंकि एलजी साहब सर्विसेज मामले में तैयार नहीं हुए हैं. सीएम केजरीवाल का कहना है कि, मैंने एलजी साहब को बताया कि सर्विसेज का पावर सरकार के पास होगा, इससे एलजी साहब ने मना कर दिया. इस पर केजरीवाल ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत के इतिहास में पहली बार होगा, जब केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार किया हो. इस तरह से अगर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दे तो ऐसे अराजकता फैल जाएगी.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ अपने फैसले में कहा है कि तीन सब्जेक्ट को छोड़कर पुलिस, लैंड और लॉ एंड ऑर्डर को छोड़कर सभी पावर जैसे- ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रमोशन, नई पोस्ट बनाना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना दिल्ली सरकार के पास होगी. फिलहाल इनके लिए लड़ाई अभी भी जारी है.

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