लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर योगी सरकार ने एक बड़ी योजना तैयार की है। सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद अब सरकार पूरे बौद्ध सर्किट को विकसित करने जा रही है। इसके तहत सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी और संकिसा को जोड़कर एक बौद्ध सर्किट डेवलप किया जाएगा। यानी आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश दुनिया के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है।
सरकार की योजना केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। बल्कि इन बौद्ध स्थलों पर नए विजिटर फैसिलिटी सेंटर, बेहतर कनेक्टिविटी, इंटरप्रिटेशन सेंटर और ऐसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है, जिससे देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक इन ऐतिहासिक स्थलों को आसानी से समझ और देख सकें।
साल 2025 में उत्तर प्रदेश में स्थित तथागत बुद्ध से जुड़े इन छह प्रमुख स्थलों पर करीब 82 लाख पर्यटक पहुंचे थे। इनमें लगभग साढ़े चार लाख विदेशी पर्यटक थे। यानी बौद्ध पर्यटन उत्तर प्रदेश के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी बड़ा आधार बन रहा है।
इस पूरी योजना में सारनाथ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देती है। काशी में स्थित सारनाथ वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। हाल ही में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर के रूप में शामिल किया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद अब यहां पर्यटकों की सुविधाओं, साइनेंज, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की योजना है।
भगवान तथागत बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को भी इस बौद्ध सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल कुशीनगर में विपश्यना केंद्र और ‘बुद्ध गमन मार्ग’ विकसित करने की योजना है। कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मौजूदगी इसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के लिए और महत्वपूर्ण बनाती है। खासकर श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक प्रमुख प्रवेश द्वार बन सकता है।
इसी तरह कपिलवस्तु और पिपरहवा में ‘बौद्ध हेरिटेज पार्क’ विकसित करने की दीर्घकालिक योजना बताई गई है। सरकार की कोशिश इन सभी स्थानों को अलग-अलग पर्यटन स्थलों के बजाय भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी यात्रा से जुड़े एक व्यापक सर्किट के रूप में प्रस्तुत करने की है। इसके लिए ‘परंपरा पर्यटन और संस्कृति केंद्र’ जैसी पहल भी प्रस्तावित है, जहां पर्यटकों को इन स्थलों और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश दुनिया का ऐसा प्रमुख स्थान है, जहां भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े ज्यादातर महत्वपूर्ण स्थल एक ही क्षेत्र में मौजूद हैं। यही वजह है कि बौद्ध सर्किट का विकास सिर्फ पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
अगर प्रस्तावित योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को नई ऊंचाई मिल सकती है। और उत्तर प्रदेश आने वाले समय में न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के बौद्ध पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

राज कुमार साल 2020 से मीडिया में सक्रिय हैं। दलित दस्तक में उप संपादक पद पर हैं। देश और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

