मुंबई के परेल में भीषण आग से 14 की मौत

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मुंबई के परेल में लगी भीषण आग

मुंबई। मुंबई के लोअर परेल के कमला मिल कंपाउंड के ‘मोजोस लाउंज’ में भीषण आग की वजह से 14 लोगों की मौत हो गई है. आशंका जताई जा रही है कि रेस्टोरेंट में आग शॉर्ट सर्किट की वज़ह से लगी. घायलों को KEM अस्पताल और ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मृतकों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर राजेश डेरे ने बताया कि सभी मृतकों की मौत दम घुटने से हुई है.

 घटना देर रात 12:30 बजे के क़रीब की है. सबसे पहले कंपाउंड के 2 रेस्टोरेंट में लगी. देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया. आग इतनी भीषण थी कि दमकल की 8 गाड़ियों और 6 वाटर टैंक को आग पर क़ाबू पाने में 2 घंटे से ज़्यादा का समय लग गया. जिस समय आग लगी, उस समय लगभग 50 लोग रेस्टोरेंट में मौजूद थे. कमला मिल कंपाउंड में कई कॉरपोरेट दफ़्तरों के अलावा कई न्यूज़ चैनलों के दफ़्तर भी हैं. आग की वजह से उनका प्रसारण भी रोक दिया गया है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्विट कर घटना पर दुख जताया

 वहीं, इस हादसे के दौरान पब में मौजूद सुलभा अरोरा ने बताया कि, “आग लगते ही पब में भगदड़ मच गई. लोगों ने मुझे धक्का दिया और मुझे कुचल कर बाहर निकल गए. कई लोगों की लाशें पब के फ्लोर पर पड़ी थीं. लोग बस बाहर निकलना चाहते थे. इस हादसे पे राष्ट्रपति कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी सहित तमाम मंत्रियों और नेताओं ने भी दुख जताया है.

अब तलाक देने वालों को मिलेगी ये सजा

नई दिल्ली। लोकसभा में तकरीबन पांच घंटे तक चली लंबी बहस के बाद आखिरकार गुरुवार को ऐतिहासिक मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पास हो गया. इसके बाद किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक, वह चाहें मौखिक हो या लिखित हो और या फिर मैसेज के जरिए हो, अवैध होगा. आईए जानते हैं कि तीन तलाक देने वालों के साथ अब क्या सलूक होगा और प्रस्तावित बिल कैसा है?

ऐसा है प्रस्तावित बिल – एक साथ तीन बार तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) कहना गैरकानूनी होगा.

– ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाएगा.

– यह कानून सिर्फ ‘तलाक ए बिद्दत’ यानी एक साथ तीन बार तलाक बोलने पर लागू होगा.

– तलाक की पीड़िता अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से अपील कर सकेगी.

– पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है. मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.

– यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा है.

 5 घंटे बहस और पास हो गया ट्रिपल तलाक के खिलाफ बिल, जानिए क्या है बिल में

नई दिल्ली। लोकसभा में तकरीबन पांच घंटे तक चली लंबी बहस के बाद आखिरकार गुरुवार को ऐतिहासिक मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पास हो गया. मोदी सरकार ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017’ नाम से इस विधेयक को लाई है. ये कानून सिर्फ तीन तलाक (INSTANT TALAQ, यानी तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा. इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पुरुष अगर अपनी बीबी को तीन तलाक देगा, तो वो गैर-कानूनी होगा.

इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक, वह चाहें मौखिक हो या लिखित हो और या फिर मैसेज के जरिए हो, अवैध होगा. जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है यानी तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय (Cognizable) अपराध होगा. इस बिल के पास होने से मुस्लिम महिलाओं को काफी सहूलियत मिलेगी. यह बिल देश की नौ करोड़ मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी से जुड़ा हुआ बिल था. करीब चार महीने पहले सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था. साथ ही सरकार से मामले में कानून बनाने को कहा था, जिसके बाद आज कानून भी बन गया.

गुरुवार को सबसे पहले केंद्र सरकार ने लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पेश किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पेश किया. उन्होंने कहा कि इस बिल का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. और न ही सरकार शरीयत में दखल देने के लिए तीन तलाक बिल लाई हैं. इसका मकसद सिर्फ तीन तलाक को रोकना है. पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों में भी तीन तलाक पर रोक है.

लोकसभा में बहस के दौरान RJD, BJD और सपा समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया. इन पार्टियों ने बिल में सजा के प्रावधान को गलत बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया. लोकसभा में बिल पर बहस का मुद्दा ही सजा का प्रावधान रहा. इसके बाद विपक्षी दलों की ओर से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पर पेश किए गए संशोधन प्रस्तावों पर वोटिंग हुई.

हालांकि वोटिंग के दौरान सभी संशोधन प्रस्ताव गिर गए और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस बिल के पास होने की घोषणा कर दी. इस दौरान कांग्रेस ने कहा कि सिर्फ मोदी सरकार ही इस बिल को पास कराने का श्रेय नहीं ले सकती है. कांग्रेस समेत किसी भी विपक्षी दल ने इस बिल का विरोध नहीं किया. कांग्रेस ने बिल को सिर्फ स्थायी समिति के पास भेजने की बात कही थी.

ज्यादा मुसलमानों को जेल में डालने के लिए बनाया जा रहा कानूनः ओवैसी

लोकसभा में तीन तलाक बिल पर बहस के दौरान AIMIM प्रमुख असादुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस बिल के जरिए न सिर्फ पर्सनल लॉ में दखल दे रही है, बल्कि ज्यादा से ज्यादा मुसलमानों को जेल में डालने का सपना देख रही. ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ तीन तलाक ही नहीं, बल्कि सभी तरह के तलाक को खत्म करने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि किसी भी मुस्लिम देश में तलाक को लेकर दंड संहिता नहीं है. इसके तहत सजा का प्रावधान नहीं किया जा सकता है. शौहर से बीबी की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए जबरदस्ती नहीं की जा सकती है.

गौरतलब है कि तलाक होने की स्थिति में मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली,  सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे.

ऐसा है प्रस्तावित बिल

– एक साथ तीन बार तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) कहना गैरकानूनी होगा.

– ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाएगा.

– यह कानून सिर्फ ‘तलाक ए बिद्दत’ यानी एक साथ तीन बार तलाक बोलने पर लागू होगा.

– तलाक की पीड़िता अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से अपील कर सकेगी.

– पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है. मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.

– यह प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा है.

विश्वनाथन आनंद ने लिया 2013 की हार का बदला

नई दिल्ली। शतरंज के चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 2013 वर्ल्ड चैंपियनशिप में हार का बदला ले लिया है. 48 साल के आनंद ने रियाद में जारी वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनिशप में वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को मात दी. चैंपियनशिप के 9वें राउंड में दोनों के बीच मुकाबला हुआ.

आनंद ने काले मुहरों के साथ आक्रामक शुरुआत की, जिसका उन्हें मानसिक तौर फायदा मिला. आनंद की चाल से 27 साल के कार्लसन दबाव में चले गए. मुकाबला 34 चालों तक चला. अच्छी बात यह है कि यहां खेले गए 9 मुकाबलों में आनंद अब तक अविजित रहे हैं. इनमें से उन्होंने 5 मुकाबले अपने नाम किए, जबकि 4 ड्रॉ रहे. गौरतलब है कि पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 ने 2013 में कार्लसन के हाथों अपनी बादशाहत गंवा दी थी. हालांकि नॉर्वे के इस चैंपियन को आनंद ने 2014 में मात दी थी.

फिर उभर आया है अमिताभ बच्चन का दर्द

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नई दिल्ली। अमिताभ फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे इकलौते अभिनेता हैं, जो अपनी उम्र को मात देकर लगातार आज भी फिल्मों में व्यस्त हैं. वह उतनी ही फिल्में कर रहे हैं जितनी आज के सुपरस्टार कर रहे हैं. इन दिनों वो ‘ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान’ और ‘102 नॉट आउट’ जैसी फिल्मों की शूटिंग में बिजी हैं. लेकिन उनके कंधे का पुराना जख्म एक बार फिर से हरा हो जाने के कारण वह ‘असहनीय पीड़ा’ से गुजर रहे हैं.

 यह जानकारी 75 वर्षीय अभिनेता ने अपने ब्लॉग में दी है. उन्होंने कहा है कि एक फिल्म के सेट पर कुछ भारी वजन उठा लेने के बाद हाल ही में उनका पुराना जख्म फिर से उभर आए. बच्चन इस समय दवा ले रहे हैं और अपने जख्म पर बर्फ की सिकाई कर रहे हैं. 26 दिसंबर को अमिताभ अपने पूरे परिवार के साथ विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की रिसेप्शन पार्टी में शामिल हुए थे. इस दौरान भी उनके हाथों पर बेल्ट लगा हुआ था.

बहुजन आर्थिक आज़ादी का महोत्सव: भीम बिजनेस एक्सपो

जयपुर में आयोजित भीम एक्सपो में आयोजक एम.एल. परिहार एवं अतिथिगण

जयपुर में 23 से 25 दिसम्बर 2017 तक तीन दिनों तक आयोजित हुए भीम बिजनेस एक्सपो ने बहुजन समाज के लोगों में आर्थिक स्वावलंबन  तथा व्यावसायिक चेतना की एक नई उमंग पैदा कर दी है. अन्य व्यापार मेलों से यह बिजनेस एक्सपो काफ़ी अलग साबित हुआ. इसमें आये लोग सिर्फ आर्थिक आज़ादी की ही बात नहीं कर रहे थे, बल्कि सदाचार और नैतिकता पर आधारित सम्यक व्यापार की अवधारणा को भी हृदयंगम कर रहे थे.

 इस आयोजन के संयोजक बहुजन चिंतक एवं लेखक  डॉ. एम एल परिहार का मानना है कि गौतम बुद्ध और बाबा साहब अम्बेडकर के अर्थ चिंतन को साकार करने की दिशा में भीम बिजनेस एक्सपो एक महत्वपूर्ण कदम था. उनका कहना है कि- ‘गौतम बुद्ध ने भूख और दरिद्रता को सबसे बड़ा रोग कहा था, जो सब बुराइयों की जड़ है और इससे निजात पाने की पूरी कोशिश जरूरी है. इसी तरह बाबा साहेब अम्बेडकर का भी विचार था कि उपेक्षित वंचित समाज के लोग उद्यमी बनें और आर्थिक रूप से सम्पन्न हों, क्योंकि आर्थिक समृद्धि के बिना हमारा कोई उद्धार नहीं है. उनका सपना था कि वंचित तबके के लोग आर्थिक रूप से सक्षम बनें और देश में सामाजिक एवं आर्थिक गैर बराबरी खत्म हो.’

 डॉ. परिहार मानते हैं कि भीम बिजनेस एक्सपो बुद्ध और बाबा साहेब के विचारों की दिशा में आगे बढ़ा है और बहुजन समाज के लोगों के मध्य व्यापार वाणिज्य की चेतना जगाने का प्रयास हुआ है. भीम बिजनेस एक्सपो में वैश्विक स्तर के उत्पादों की प्रदर्शनियां लगाई गईं, यहां आये उद्यमियों का लगभग सारा माल बिक गया, ज्वैलरी, गारमेंट्स, हैंडीक्राफ्ट, होम डेकॉर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डेयरी, खाद्य और एग्रीबिजनेस सहित कई तरह के उद्यमों की स्टॉल्स लगी. हर स्टॉल पर पूरे वक्त लोगों की मौजूदगी उत्साहित करने वाली थी. लोगों ने उम्मीद से बढ़कर इस तीन दिवसीय आर्थिक महोत्सव में भाग लिया.

दलित वंचित समाज के उधमियों के लिए देश में यह पहला मौका था, जिसमें उन्हें अपने बिजनेस को दिखाने तथा प्रमोट करने का मंच मिला. इस अवसर का सभी उद्यमियों ने भरपूर लाभ लिया और वे आपस में भी बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए चर्चा करते हुए दिखे. भीम बिजनेस एक्सपो राजस्थान की राजधानी जयपुर में अम्बेडकर सर्कल के पास ऐसे स्थान पर हुआ, जहां पर लगभग सारे ही बड़े बड़े कॉमर्शियल एक्सपो आयोजित होते हैं. इस दौरान भी चारों तरफ कई अन्य व्यापार मेले भी लगे हुए थे,मगर यह साफ तौर पर देखा गया कि उन एक्सपो से अधिक भीड़ भीम बिजनेस एक्सपो में थी. दूसरे व्यापार मेलों में लोग सिर्फ खरीददारी करके निकल रहे थे, जबकि भीम बिजनेस एक्सपो में बिजनेस के साथ-साथ सामाजिक चिंतन भी चलता रहा, लोगों ने भारी मात्रा में बहुजन साहित्य खरीदा, विभिन्न विषयों की सेमीनार में शिरकत की और सक्रिय भागीदारी निभाई.

 हर दृष्टि से भीम बिजनेस एक्सपो स्वयं में अनूठा आयोजन था और अन्य व्यापार मेलों से अत्यंत अलग भी. इसका प्रारम्भ किसी स्थापित राजनेता या नौकर शाह ने नहीं किया, बल्कि समाज के लिए उद्यमिता के क्षेत्र में आदर्श बन चुके सफल उद्यमियों के हाथों हुआ. बुद्ध, बाबा साहेब और भारतीय संविधान की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित कर इसकी शुरूआत की गई. कोई तामझाम नहीं, कोई माला साफा नहीं, कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं. जो भी मेले में आये, सब लोग इस अनूठे आयोजन के मुख्य अतिथि थे. सबने सामूहिक रूप से भीम बिजनेस एक्सपो का उदघाटन किया.

 भीम बिजनेस एक्सपो में कई महत्त्वपूर्ण लोगों की गरिमामय उपस्थिति भी उल्लेखनीय हैं. इनमें सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग मंत्रालय दिल्ली के निदेशक बी पी सिंह, डायवर्सिटी विशेषज्ञ बृजपाल भारती, दूरदर्शन अल्मोड़ा के निदेशक अशोक सचान, स्टील मोंट के संस्थापक भारत के पहले दलित अरबपति  पदमश्री राजेश सरैया के पिता नथाराम सरैया, मार्शल कंपनी के मालिक आर के सिंह, सुप्रसिद्ध बहुजन चिंतक डॉ चंद्रभान प्रसाद तथा बजट विशेषज्ञ उमेश बाबू सहित राजस्थान के कईं प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और उद्यमी मौजूद रहे. इतना ही नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड से आये रिसर्च स्कॉलर विनीत भी पूरे समय भीम बिज़नेस एक्सपो के भागीदार बने. इस दौरान देश के प्रतिष्ठित 7 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज और जिंदल यूनिवर्सिटी सोनीपत के तकरीबन 40 स्टूडेंट्स भी आये. उन्होंने सारे बहुजन उद्योगपतियों से मुलाकात कर उनकी कहानियों को लिखा. ग़ौरतलब है कि ये स्टूडेंट्स मानव अधिकार संगठन पीयूसीएल में इंटर्नशिप कर रहे हैं.

 इस एक्सपो की सबसे ख़ास बात यह रही कि सुबह से शाम तक सेमीनार हॉल खचाखच भरा रहता था, जिसमें उद्योग शुरू करने तथा उद्योग को फैलाने के लिए सरकार की योजनाओं, प्रक्योर मेन्ट पॉलिसी, जीएसटी, सेल्स टैक्स, बैंक लोन, बजट आदि से जुड़े विषयों पर व्याख्यान विशेषज्ञों द्वारा दिये गये, जिन्हें देश भर से आये सहभागियों ने मनोयोग से सुना और कई सवाल भी किए. इस दौरान युवाओं ने नौकरी की बजाय बिजनेस की ओर अपना रुझान बताया.

इस आयोजन के मुख्य संकल्पनाकार डॉ. एम. एल परिहार के सहयोगी के रूप में असीम के डॉक्टर्स की टीम का योगदान भी अविस्मरणीय कहा जा सकता है. भीम बिजनेस एक्सपो का समापन 25 दिसम्बर को था. 90 साल पहले इसी दिन 25 दिसम्बर 1927 को बाबा साहब ने महाड़ में मनुस्मृति को जलाया था. भीम बिजनेस एक्सपो का समापन “प्रबुद्ध बहुजन-समृद्ध बहुजन” के एक संकल्प प्रस्ताव के साथ हुआ कि हम आर्थिक रुप से मजबूत बनेंगे.

  • लेखक सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार

सीबीएसई विद्यार्थियों को स्कूलों में देगा नैतिक शिक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में नैतिक शिक्षा देने का प्लान बनाया हैं। सीबीएसई अपने विद्यार्थियों को ऐसा नागरिक बनाना चाहती हैं , जिनमे शांति, सौहार्द्र, विनम्रता एवं सहयोग के मूल्यों हों। इसके लिए सीबीएसई ने रामकृष्ण मिशन के साथ गठजोड़ किया है. मिशन ने छठी से लेकर नौवीं कक्षा के बच्चों के लिए 3 साल का कार्यक्रम तैयार किया है। इस बारे में सीबीएसई और रामकृष्ण मिशन के बीच 2014 में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था. इसके तहत स्कूलों में ‘जागरूक नागरिक कार्यक्रम’ का आयोजन किया जायेगा लेकिन विद्यालयों द्वारा उसका क्रियान्वयन ऐच्छिक है .

सीबीएसई ने विद्यालयों में एक परिपत्र भी भेजी है जिसमे कहा की शांति, सौहार्द्र, करुणा एवं विनम्रता जैसे मूल्य सदियों से हर समाज के विमर्श का भाग रहे हैं और उनकी आवश्यकता एवं महत्व को सार्वभौमिक रूप से स्वीकार एवं महसूस किया गया है. इस उद्देश्य के लिये रामकृष्ण मिशन उपकरण, कार्यक्रम सामग्री उपलब्ध कराने के साथ शिक्षकों को प्रशिक्षित करने में सहयोग करेगा . इस कार्यक्रम को चुनने वाले स्कूलों को साल में 16 कक्षाओं का आयोजन करना होगा और इसे तीन वर्ष तक जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त करनी होगी.

गन्धर्व गुलाटी  

डबल फायदा चाहिए तो बैंक की बजाय यहां रखें पैसा

नौकरी पेशा वालों के लिए बड़ी रकम की बचत टेढ़ी खीर के समान होता है. अगर कुछ बचत खातों में रखी भी जाए तो 3.5 से 6 फीसदी तक ही ब्याज मिलता है. लेकिन अगर आप अपना पैसा बैंक की बजाय म्युचुअल फंड में लगाते हैं, तो आप डबल फायदा हासिल कर सकते हैं. म्युचुअल फंड में निवेश से आपको बैंक से ज्यादा रिटर्न हासिल हो सकता है. अच्छी बात यह है कि इसमें निवेश की शुरुआत आप 500 रुपये से कर सकते हैं. फिर आप जब चाहें अपना निवेश बढ़ा भी सकते हैं. जहां तक म्युचुअल फंड के फायदे की बात है तो वह कई मायनों में और बचतों से ज्यादा बेहतर है.कम रकम में ज्यादा लाभ: म्युचुअल फंड में आप महज 500 रुपये से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. इसमें  ये विकल्प भी होता है कि आप हर महीने जितना चाहें, उतना निवेश बढ़ा सकते हैं.चुनने की आजादी: एफडी में आपको तय नियमों के मुताबिक अपने पैसे बैंक के पास रखने होते हैं. म्युचुअल फंड में आपको चुनने की आजादी होती हैं. यहां विकल्प होता है कि आप कितनी रकम निवेश करना चाहते हैं, कितने साल के लिए करना चाहते हैं. इसके अलावा आपके पास निवेश के लिए फंड चुनने की आजादी भी होती है.ज्यादा रिटर्न: म्युचुअल फंड आपको बैंक खाते पर मिलने वाले ब्याज से ज्यादा रिटर्न देते हैं. पिछले 10 साल का रिकॉर्ड के मुताबिक इसके जरिये 10 से 12 फीसदी रिटर्न हासिल कर सकते हैं.जब चाहें, तब निकाल सकते हैं पैसें: म्युचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप जब चाहें तब पैसे निकाल सकते हैं.सबसे जरूरी बात: निवेश शुरू करने से पहले आप जिस फंड में निवेश कर रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी हासिल कर लें. ध्यान रखिये म्युचुअल फंड बाजार के जोखिमों के अधीन होता है. इसलिए पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही सही फंड का चुनाव करें.

जातिवादी गुंडों ने मूंछ रखने पर वाल्मीकि युवक का पैर तोड़ डाला

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राजस्थान। खबरें कई तरह की होती हैं. कुछ खबरें पढ़कर दुख होता है लेकिन कई बार कुछ खबरें गुस्सा दिलाती हैं. यह खबर ऐसी ही है. राजस्थान के जालौर के निकट बालवाडा में जातिवादी गुंडों ने मूंछ रखने पर दलित समाज के कैलाश के दोनों पैर तोड़ दिए. साथ ही उसे गांव से निकालने की भी कोशिश की. युवक की एक्स-रे रिपोर्ट देखने से साफ पता चलता है कि मनुवादी शैतानों ने कैलाश को कितनी बुरी तरह से पीटा.

घटना 16 नवंबर की है. पुलिस से की अपनी शिकायत में पीड़ित कैलाश ने कहा है कि घटना के दिन शाम के करीब छह बजे जब वो अपनी मोटर साइकिल से जालोर से अपने घर बालवाडा जा रहा था उसी दौरान यह घटना घटी. पीड़ित के मुताबिक शंभू सिंह के बेटे किरण सिंह व उसके चार पांच अन्य साथी जो कि सामंतवादी प्रवृति के परिवार और जाति से संबंध रखते हैं ने उस पर यह कहते हुए हमला कर दिया कि कैलाश ‘छोटी जाति’ का होकर अच्छे कपड़े पहनता है और एक जाति विशेष की बपौती दाढ़ी और मूंछ रखता है.

मनुवादी गुंडे पीड़ित कैलाश को अपनी गाड़ी में बिठाकर सुनसान जगह ले गएं और उस पर हमला कर दिया. उसके दोनों पैर तोड़ दिए और उसे मरा जानकर चले गए. होश आने पर कैलाश ने अपने पिता दलाराम मेहतर को सूचना दी, जो मौके पर पहुंच कर उसे अस्पताल ले गए. जिन लोगों ने कैलाश पर हमला किया उनके नाम शंभु सिंह,गोपाल सिंह, शैतान सिंह राठौड़, पहाड़ सिंह आदि हैं.

हालांकि पुलिस ने इस मामले में छह गुंडों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन यह घटना समाज के एक वर्ग की ओछी और घटिया मानसिकता की पोल खोलता है, जिसमें एक दलित युवक को अपनी पसंद से मुंछ रखने का अधिकार भी नहीं है.

 

मेट्रो उद्घाटन में नहीं बुलाए जाने को भुनाने में जुटे केजरीवाल​

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के मेजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह पर दिल्ली के मुख्य-मंर्ती अरविन्द केजरीवाल को न्योता न देने पर राजनीती गरमा रखी है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने ई-मेल और फेसबुक के जरिए पार्टी से जुड़े लोगों को मैसेज भेजकर चंदा देने की अपील की है. पार्टी के फेसबुक पेज पर डाले गए एक पोस्ट में कहा गया, ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री को मेट्रो की मेजेंटा लाइन के उद्घाटन के लिए नहीं बुलाया गया, अगर आप गुस्सा हैं तो चंदा दें.’ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे दिल्ली के लोगों का अपमान बताया.

मैसेज और ईमेल के ज़रिये पार्टी ने समर्थकों को भावनात्मक संदेश भेजा और 100 रूपए के चंदे की अपील की. साथ ही में लोगों को एक संगठित ताकत में तब्दील करने की बात की गयी। लोगों और समर्थकों के लिए ईमेल में एक लिंक भी भेज रहा है जो सीधा आम आदमी पार्टी को चंदा देने वाली वेबसाइट पर खुलता है.

इस पर पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “जब भी केंद्र सरकार द्वारा AAP को दबाने का प्रयास किया जाता है, जब भी दिल्ली की निर्वाचित सरकार पर हमला होता है. तब भारत के लोग खड़े होते हैं और पार्टी का समर्थन करते हैं. चंदा इस तरह के समर्थन की सिर्फ एक अभिव्यक्ति है.”

इस प्रोजेक्ट में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद मुख्य-मंत्री केजरीवाल को उद्घाटन समारोह मे नहीं बुलाया गया। गुस्साई आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी वापस करने तक की मांग कर दी थी. 25 दिसंबर 2017 को प्रधान मंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य-मंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दिल्ली मेट्रो की मैजंटा लाइन का उद्घाटन किया था.

गंधर्व गुलाटी

 

BBAU में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले शिक्षकों की जीत

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के UIET शिक्षण संस्थान अदालत में अपनी लड़ाई जीत गए हैं. विश्वविद्यालय की मनमानी के शिकार इन 28 शिक्षकों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक तरफा कार्यवाही करते हुए 6 माह पूर्व निकाल दिया था. वजह यह थी कि इन शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी और जिस वजह सीबीआई ने विश्वविद्यालय में छापा मारा था. इससे भड़के विवि प्रशासन ने उक्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध जाकर विवि से निकाल दिया.

शिक्षकों का आरोप है कि उनको विज्ञापन नियम के अनुसार पहले साल उक्त शिक्षकों की परफॉरमेंस के आधार पर 1 साल बाद 5 साल के लिए सेवा विस्तार का प्रावधान था, लेकिन विवि प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इन शिक्षकों को बिना किसी नोटिस के विवि से निकाल दिया था. सभी शिक्षकों ने परेशान होकर देश के शीर्ष अदालत में न्याय के लिए गुहार लगाई थी तथा प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी को भी स्थिति से अवगत कराया था. जहां इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने केस नंबर 32052, कृष्णकांत कन्नौजिया व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के तहत सुनवाई करते हुए विवि प्रशासन को लताड़ लगाई और कार्यमुक्त शिक्षकों को 1 महीने के अंदर पुनर्स्थापित करने का आदेश दिया है. विवि नियोक्ताओं को AICTE और BBAU अकादमिक अध्यादेश परिनियम,क्लॉज 17 के अनुसार 5 साल के लिए एक पुनः पदस्थापित करने का सख्त निर्देश दिया है. हैरत की बात यह रही कि जिस विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया था, उसने सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कोई आपत्ति जाहिर नहीं की. शिक्षकों का कहना है कि विवि प्रशासन के खिलाफ यह सत्य की जीत है.

 

गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा के जिस मामले में योगी जेल गए और संसद में रोए, फैसला हाईकोर्ट में सुरक्षित

Yogiमानवाधिकार कार्यकर्ता असद हयात बताते हैं की 22 दिसंबर को गोरखपुर साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़े दूसरे मामले में भी हाई कोर्ट इलाहाबाद में बहस पूरी हुई और फैसला सुरक्षित हुआ. रशीद खान एवं अन्य बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी व अन्य में भी मुख्य अभियुक्त योगी आदित्यनाथ हैं. असद हयात बताते हैं की दर्ज रिपोर्ट के अनुसार 27 जनवरी 2007 को सुबह के समय योगी आदित्यनाथ ने अपने समर्थकों मनोज खेमका भगवती जालान, रामावतार जालान, दयाशंकर दुबे, हर्ष वर्धन सिंह, अशोक शुक्ला, राम लक्ष्मण के साथ गोरखपुर के मोहल्ला खुनीपुर स्थित एक मज़ार और इमाम चौक पर तोड़ फोड़, धार्मिक पुस्तकों का अपमान, आगजनी और लूटपाट कारित की गयी थी. इस संबंध में मुतवल्ली रशीद खान ने केस क्राइम नंबर 43 /2007 थाना कोतवाली गोरखपुर अंतर्गत धारा 147, 295, 297, 436, 506, 153 a, IPC में दर्ज कराया था. इसी मामले में योगी गिरफ्तार हुए थे और एक सप्ताह से अधिक समय तक जेल भी रहे और ज़मानत पर बाहर आये. संसद में रो-रो कर अपनी तकलीफ भी सुनाई थी कि जेल में कितना ख़राब व्यवहार उनसे हुआ (तथाकथित).

वे बताते हैं की इस मामले में इन्वेस्टीगेशन पूरा होने पर उपरोक्त सभी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायलय में दाखिल किया गया और तत्कालीन मायावती सरकार ने 153 ए के तहत मुक़दमा चलाने की अनुमति भी 13 /10/2009 को दे दी और इसके बाद सक्षम न्यायालय ने संज्ञान आदेश 22/12/2009 को पारित कर दिए. इसके बाद आरोप निर्धारण किया जाना था मगर 2014 तक ऐसा कोई आदेश कोर्ट ने पारित नहीं किया. 2014 में मनोज खेमका ने यह आपत्ति दर्ज कराई कि मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी का जो आदेश 13 /10/2009 है, वह अवैध है क्यों कि उसपर राज्यपाल द्वारा नियुक्त सचिव /अधिकारी जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर नहीं है बल्कि अनुसचिव राम हेत के हस्ताक्षर हैं, जो अभियोजन स्वीकृति देने के आदेश पारित करने के लिए अधिकृत नहीं थे. मनोज खेमका के इस ऐतराज़ पर निचली अदालत ने 17 मार्च 2016 को आदेश पारित किया कि राज्यपाल से अनुमति के बाद ही अभियोजन मंज़ूरी के आदेश पारित किए गए हैं और उस आदेश की प्रति पुलिस अधिकारियोँ को 4 प्रतियाँ प्रेषित की गईं हैं. इस आदेश के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई हेतु 16 अप्रैल 2016 की तारीख नियत की. इस तिथि को सुनवाई कर रहे जज साहब का तबादला हो गया और नए जज साहब ने 28 जनवरी 2017 को क्रिमिनल रिवीज़न 558/2014 में अपने पहले आदेश 16 अप्रेल 2016 के विपरीत जाते हुए और उसको पूरी तरह अनदेखा करते हुए आदेश पारित कर दिया कि अभियोजन मंज़ूरी अवैध है क्यों कि उस पर अनुसचिव रामहेत के हस्ताक्षर हैं, इसके लिये अधिकृत अधिकारी जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर नहीं है.

असद हयात बताते हैं की इस आदेश को रशीद खान ने हाईकोर्ट इलाहबाद में चुनौती दी जिसपर सुनवाई हुई. जिसमें वे कहते हैं कि अनुसचिव रामहेत ने असल आदेश के पारित होने की सूचना देते हुए, उसकी प्रति संलग्न की है, जिसका मक़सद सूचना यानि comunication है और जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर वाला पारित आदेश सरकार के रिकॉर्ड में मौजूद है जिसको तलब कराया जा सकता है और सरकारी वकीलों ने इस बात /तथ्य को छुपाया है. निचली अदालत ने अपने पूर्व पारित आदेश 17 मार्च 2016 के विपरीत जाकर आदेश पारित किया है. सरकार की यह दलील ग़लत है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद Informent को कोई अधिकार ट्रायल में दखल देने का नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने जे जे इंटरनेशनल (2001 scc vol 3 पेज 462 ) पर यह अधिकार informant को दिया है और Cr.PC सेक्शन 2 w (a) में victim, सेक्शन 372 और 24 (8) को भी ऐसा अधिकार दिया गया और निचली अदालत ने रशीद खान को सुने बिना आदेश 28 जनवरी 2017 पारित किया है.

याचिकादाताओं की ओर से हाईकोर्ट इलाहबाद में अधिवक्ता फ़रमान अहमद नक़वी ने बहस की और यूपी सरकार की तरफ से एड्वोकेट जरनल श्री राघवेंद्र सिंह और उनके पैनल ने. उन्होंने सवाल किया कि राजनितिक लोगो को बचाने के लिए अदालतों के साथ फ्रॉड किया जा रहा है और सरकारी रिकॉर्ड में रखे original रिकॉर्ड को छुपाया जा रहा है और कोर्ट के सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है? अगर दलील के तौर पर ये मान लिया जाए कि राज्यपाल द्वारा अधिकृत अधिकारी जे बी सिन्हा ने दस्तखत नहीं किया तब क्या अनुसचिव रामहेत ने फर्जी आदेश पारित करके उसकी सुचना ज़िला पुलिस अधिकारियों को भेज दी? अगर वास्तव में यही है तब क्या यह माना जायेगा कि इस मामले की अभियोजन स्वीकृति की फाइल अभी तक राज्य सरकार के गृह मंत्रालय में लंबित है, अगर ऐसी स्थिति होगी तब अभियोजन स्वीकृत कौन करेगा, क्या खुद आरोपी जो गृह मंत्री और मुख्य मंत्री खुद है?

लेखक- राजीव यादव

   

बसपा कार्यकर्ता की हत्या, हाल ही में गली का नाम रखा था अम्बेडकर मार्ग

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चंद्रेश राव (लाल घेरे में)

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव चंद्रेश राव की हत्या कर दी गई है. घटना 27 दिसंबर को रात 10 और 11 के बीच घटी. कुछ गुंडे उनके घर पर आएं और गाली-गलौच करने लगे. इसके बाद बात बढ़ने लगी, जिस पर गुंडों ने लोहे की राड और डंडे से बसपा नेता पर हमला कर दिया. काफी चोट लगने के कारण उनकी मृत्यु हो गई. चंद्रेश राव के घर पहुंचे गुंडों की संख्या दस के करीब थी. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि साफ पता चल रहा था गुंडे मारपीट की नियत से ही आए हैं.

कुछ दिन पहले ही चंद्रेश राव ने इस गली का नाम अम्बेडकर मार्ग रखा था

58 वर्षीय चंद्रेश राव शुरुआत से ही बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता थे. एक वक्त में वह दिल्ली के प्रदेश सचिव के पद पर भी रह चुके थे. वर्तमान में भी वह पार्टी के लिए सक्रिय थे. रावजी दिल्ली के रनभोला थाना अंतर्गत बापरोला विहार में रहते थे. उनका विधानसभा क्षेत्र विकासपुरी थी. हाल ही में उन्होंने अपनी गली के सामने अम्बेडकर मार्ग लिखवाया था. कहा जा रहा है कि कुछ लोगों को इससे भी खुन्नस थी. इस पूरे घटनाक्रम में चंद्रेश राव का 30 वर्षीय बेटा भी गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. मामले में आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करा दी गई है. मामले में एक आरोपी को पकड़ा जा चुका है, जबकि अन्य अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं.

कांग्रेस के स्थापना दिवस पर राहुल गांधी को याद आएं अम्बेडकर

नई दिल्ली। कांग्रेस के 133वें स्थापना दिवस के मौके पर नवनिर्वाचित पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहली बार पार्टी मुख्यालय पर कांग्रेस का झंडा फहराया. इस दौरान राहुल गांधी ने संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को याद करते हुए भाजपा शासन और पीएम मोदी पर निशाना साधा.

राहुल गांधी ने कहा कि- अंबेडकर का दिया संविधान आज खतरे में है. हमारा संविधान, जोकि हमारे देश की नींव है वो आज खतरे में है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता इसे लेकर सीधे बयान दे रहे हैं. संविधान पर चोरी-छिपे पीछे से हमला किया जा रहा है. ये हमारी, कांग्रेस पार्टी और हर एक भारतीय ड्यूटी है कि हम अपने संविधान की रक्षा करें. इस दौरान राहुल गांधी ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए बीजेपी झूठ बोलती है.

असल में हाल ही में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा था कि हम संविधान बदलने के लिए सत्ता में आए हैं. हेगड़े ने कहा था कि वह संविधान का सम्मान करते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में ये बदलेगा. हम उसी के लिए यहां हैं और इसलिए हम आए हैं. राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को बहाना बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को संसद में भी इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया और भाजपा को घेरने की कोशिश की.

देखना है जिग्नेश मेवाणी का भ्रम कब टूटता है

दलित वर्ग का कोई भी चेहरा जब भी पहली बार उभरता है, उस पर दलित होने का ठप्पा पहले लगा दिया जाता है. जिग्नेश मेवाणी भी जब आंदोलन में सक्रिय हुए तो उनके मुद्दों से पहले उनकी जाति की चर्चा होने लगी थी. हालांकि गुजरात की राजनीति में तेजी से उभरे मेवाणी को बार-बार खुद को दलित नेता कहना अच्छा नहीं लग रहा है. जिग्नेश मेवाणी का कहना है कि मैं सिर्फ दलित नेता नहीं हूं.

असल में मेवाणी का कहना है कि मैं सभी का नेता हूं. वह दावा करते हैं कि वडगाम में उन्‍हें 50 हजार से ज्‍यादा मुसलमानों ने वोट दिया और उनकी जीत के लिए 250 से अधिक महिलाओें ने रोज़ा रखा था. जिग्‍नेश मेवाणी कहते हैं कि-

‘मेरी लड़ाई गरीबों, वंचितों और शोषितों की है. अगर कोई दलित कारखाना मालिक अपने ब्राह्मण कर्मचारियों पर अत्‍याचार करता है तो मैं गरीब ब्राह्मण की लड़ाई लडूंगा’. वह आदिवासियों को भी जोड़ने की बात कहते हैं. जिग्नेश मेवाणी अब राजनीति में हैं. जाहिर सी बात है कि राजनीति में सबका वोट और समर्थन मायने रखता है, लेकिन ऐसा कम ही देखने में आया है कि अन्य वर्गों के लोगों ने किसी दलित समाज के व्यक्ति को अपना नेता माना हो. यहां तक की जाति की वजह से ही जगजीवन राम देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे, क्योंकि सवर्णों को यह मंजूर नहीं था. तो डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिलाओं, देश की अर्थव्यवस्था और कर्मचारी हितों के लिए तमाम काम करने के बावजूद उन्हें दलितों का नेता कह कर सीमित करने की कोशिश लगातार जारी है.

तो बहुजन समाज पार्टी के नारे बहुजन हिताय बहुजन सुखाय को बदलकर सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय कर देने और उत्तर प्रदेश में बेहतर शासन देने के बावजूद बसपा की नेता मायावती को सवर्ण समाज के लोग आज तक नहीं अपना पाए. देखना है, जिग्नेश मेवाणी का भ्रम कब टूटता है.

 

योगी आदित्यनाथ ने खारिज किये खुद पर लगे आरोप

Yogiलखनऊ। मोदी सरकार में जनता के लिए अच्छे दिन भले ही ना आए हों लेकिन भाजपा नेताओं के अच्छे दिन ज़रूर आ गये हैं. खासकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित यूपी में भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के लिए तो अच्छे दिन का फरमान भी आ गया है. असल में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के राजनेताओं पर लगे 20 हजार मुकदमे वापस लेने का ऐलान कर दिया है. इसके बाद अब खुद योगी पर लगे आरोप भी खारिज हो जाएंगे. इसी संबध में 21 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पास हो चुका है. सरकार का कहना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर रोकथाम के लिए उठाया है, लेकिन विपक्ष की माने तो सरकार इसकी आड़ में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं पर लगे मुकदमे वापस लेना चाहती है. सरकार के इस फैसले पर विवाद शुरू हो गया है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिर्फोम्स (एडीआर) के मुताबिक, यूपी सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ-साथ 20 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इतना ही नहीं बीजेपी के 312 विधायकों में से 114 पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 83 गंभीर आपराधों में शामिल हैं. गौरतलब है कि 20 दिसंबर को सरकार ने गोरखपुर के डीएम को के पत्र भेजा था, जिसमें उनसे कोर्ट में 1995 में दर्ज मुकदमें वापस लेने का आवेदन करने के लिए कहा गया था. इस मुकदमें में सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल, विधायक शीतल पांडेय सहित 10 नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में केस दर्ज था.

   

कलम शायर की… मिर्ज़ा ग़ालिब  

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कौन पूछता है पिंजरें में बंद परिंदो को “ग़ालिब” …. याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं. ये 19वीं सदी में पैदा हुए मिर्ज़ा ग़ालिब का एक कलाम है.

रोज़ाना गूगल अपने डूडल के ज़रिये महान हस्तियों को सम्मानित करता है और इस बार उसने हिंदुस्तान के सबसे मशहूर उर्दू-फारसी जुबां के शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के 220वें जन्मदिन पर उन्हें डूडल के ज़रिये श्रद्धांजलि दी. मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम मिर्जा असद-उल्लाह बेग खान था. उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 में अंग्रेजी हुकूमत के वक़्त हुआ था. मिर्ज़ा ग़ालिब, उनीसवीं सदी के एक ऐसे शायर थे जिनके तआरुफ़ के बिना शायरी की हर महफ़िल अधूरी है. आज की सदी के शायर भी इनकी कस्मे लेतें हैं लेकिन इसकी मनाही  ग़ालिब पहले ही कर गए थे. इस पर वो कह गए थे के “तूने क़सम मैकशी की खाई है ग़ालिब, तेरी क़सम का कुछ ऐतबार नहीं है”.  ग़ालिब एक ऐसे शायर थे जिनकी शायरी पढ़ कर पत्थर दिल भी पिघल जाएँ और बेज़ुबान भी वाह-वाह करने लगें. इनकी शान में अगर क़सीदे पढ़े जाएँ तो ज़िन्दगी भी कम पड़ जाए.

मिर्जा गालिब की कविताओं और शायरियों को लोग अपने-अपने तरीके से गाते हैं और बॉलीवुड भी इसमें पीछे नहीं है. मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरियां केवल भारतीय युवाओं को ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगों को प्ररेरित करती हैं.  आज भी उनकी हवेली पुरानी दिल्ली में है जहाँ उन्होंने अपना आखरी वक़्त बिताया था. मिर्जा गालिब का इंतकाल  15, फरवरी 1869 में हुआ था और उनका मकबरा दिल्ली के निजामुद्दीन के चौसठ खंभा के पास स्थित है.

गन्धर्व गुलाटी,  

निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग को लेकर उदित राज ने की रैली

नई दिल्ली। भाजपा के सांसद और अनूसूचित जाति व जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ के अध्यक्ष उदित राज ने 26 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आरक्षण के समर्थन में एक विशाल रैली की. ‘आरक्षण बचाओ’ रैली में देश भर से हजारों लोग शामिल हुए. इस मौके पर सांसद उदित राज ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में अनुबंध पर काम कराने की प्रवृत्ति से सबसे ज्यादा नुकसान समाज के कमजोर तबके को हुआ है. रैली को संबोधित करते हुए उदित राज ने आरोप लगाया कि निजीकरण की आड़ में आरक्षण को ख़त्म करने का प्रयास किया जा रहा है और देश में असमानता बढ़ती जा रही है. पहले यह सामाजिक स्तर पर थी लेकिन अब आर्थिक क्षेत्र में भी बढ़ गयी हैं. अधिकतर लोग या तो बेरोजगार हैं या फिर वह कम दैनिक मज़दूरी में काम कर रहें हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर दलित, आदिवासी और पिछड़े तबकों पर पड़ा है. रैली में परिसंघ की 16 प्रमुख मांगों को लेकर एक मांग पत्र भी जारी किया गया, जिसमें प्रोमोशन यानी पदोन्नति में आरक्षण, निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति, दलितों पर अत्याचार बंद हो और कई अन्य मांगों को शामिल किया गया था. रैली में आये कुछ लोगों ने अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाज़ी की. हालांकि सवाल यह है कि जो भाजपा और उसके नेता आरक्षण ख़त्म करने की और संविधान को बदलने की बात करते हैं, उसका सांसद रहते हुए उदित राज सरकार पर कैसे दबाव बना पाएंगे.

 

लालू के जेल जाने पर बोले तेजस्वी, BJP संग होते तो ‘राजा हरिश्चंद्र’ कहलाते

पटना। लालू प्रसाद यादव के जेल जाने पर उनके बड़े बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बड़ा बयान सामनें आया है. विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए तेजस्वी ने कहा कि जेल जाने से लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक करियर खत्म नहीं हुआ है। अपने एक इंटरव्यू के दौरान तेजस्वी ने कहा कि विपक्ष को लगता है कि उनके पिता के जेल जाने से सब खत्म हो जाएगा, लेकिन यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमीं है। इतना ही नहीं तेजस्वी ने बिहार की जनता की नाराज़गी का हवाला देते हुए यह भी कहा इस इस फैसले से बिहार की जनता नाराज़ है और इसका जवाब खुद जनता देगी.

इससे पहले भी तेजस्वी नें लालू के जेल जाने पर अपने बयान में कहा था कि विपक्ष द्वारा उनके पिता की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और वह सीबीआई के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे। साथ ही शत्रुघ्न सिन्हा और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी लालू के समर्थन में उनको जन का नेता और राजनीतिक साजिश का शिकार बताया.

आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव चारा धोटाला मामले के आरोप में जेल में बंद हैं और 3 जनवरी को उनकी सज़ा का ऐलान किया जाएगा.

पीयूष शर्मा

जयराम ठाकुर बने हिमाचल के नए सीएम, 10 मंत्रीयों संग ली शपथ

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बुद्धवार को मंडी के विधायक जयराम ठाकुर ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. खुले मैदान में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अंनत कुमार गीते, थावर चंद गहलोत, जगत प्रकाश नड्डा और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. यह पहला मौका है जब कोई प्रधानमंत्री सरकार के गठन में शामिल हुए हैं.

करीब 50 हजार लोगों की मौजूदगी में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जयराम ठाकुर को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई. उनके बाद 10 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की. मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वालों में महेंद्र सिंह ठाकुर, सुरेश भारद्वाज, रामलाल मरकंडा, सरवीण चौधरी, राजीव सैजल,अनिल शर्मा, विपिन परमार, वीरेंद्र कंवर, विक्रम सिंह, गोविंद सिंह के नाम शामिल हैं.

शपथ लेने से ठीक पहले जयराम ठाकुर ने अपने सवर्गवासी पिता को याद करते हुए कहा कि यदि मेरे पिता आज होते तो बड़ी खुशी होती. आपको बता दें कि जयराम ठाकुर मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं, उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और यूनिवर्सिटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखा. शपथ ग्रहण के बाद जनता को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि लोगों ने हम पर विश्वास दिखाया है और हम उस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे.

पीयूष शर्मा