हाल ही में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन द्वारा दी गई परमाणु हथियारों की धमकी पर एक बार फिर अमेरिका ने जवाब दिया है. किम पर पलटवार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट के ज़रिए कहा है कि उनके पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो कि कहीं ज्यादा बड़ा और पावरफुल है और वो काम भी करता है. इतना ही नहीं, उन्होने उत्तर कोरिया पर तंज कसते हुए कहा कि क्या ये बात उनके जर्जर और भुखमरी से परेशान साम्राज्य में से कोई उन्हे बताएगा?
इसकी शुरुआत नए साल पर किम जोंग उन द्वारा दिए गए भाषण से हुई जिसमें अपने देश को संबोधित करते हुए किम ने कहा था कि एक न्यूक्लियर बटन हमेशा मेरी डेस्क पर होता है और पूरा अमेरिका हमारे परमाणु हथियारों के दायरे में है. अपनी बात पर ज़ोर देते हुए किम ने यह भी कहा कि ये कोई धमकी नही है, ये सच है और देश की सुरक्षा के लिए ज़रूरत पड़ने पर हम अपनी परमाणु ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं.
यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परमाणु बम की धमकी दी है. इससे पहले भी कई बार दोनों देशों के बीच खुलेआम ज़ुबानी जंग देखने को मिली है. जहां एक तरफ उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर अमेरिका को धमकी देता रहता है वहीं अमेरिका भी हर एक धमकी का जवाब में उत्तर कोरिया को नष्ट करने की चेतावनी दे चुका है.
पीयूष शर्मा उत्तर कोरिया की धमकी पर बोले ट्रंप, मेरे पास ज्यादा बड़ा और पावरफुल न्यूक्लियर बटन है
हाल ही में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन द्वारा दी गई परमाणु हथियारों की धमकी पर एक बार फिर अमेरिका ने जवाब दिया है. किम पर पलटवार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट के ज़रिए कहा है कि उनके पास भी न्यूक्लियर बटन है, जो कि कहीं ज्यादा बड़ा और पावरफुल है और वो काम भी करता है. इतना ही नहीं, उन्होने उत्तर कोरिया पर तंज कसते हुए कहा कि क्या ये बात उनके जर्जर और भुखमरी से परेशान साम्राज्य में से कोई उन्हे बताएगा?
इसकी शुरुआत नए साल पर किम जोंग उन द्वारा दिए गए भाषण से हुई जिसमें अपने देश को संबोधित करते हुए किम ने कहा था कि एक न्यूक्लियर बटन हमेशा मेरी डेस्क पर होता है और पूरा अमेरिका हमारे परमाणु हथियारों के दायरे में है. अपनी बात पर ज़ोर देते हुए किम ने यह भी कहा कि ये कोई धमकी नही है, ये सच है और देश की सुरक्षा के लिए ज़रूरत पड़ने पर हम अपनी परमाणु ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं.
यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परमाणु बम की धमकी दी है. इससे पहले भी कई बार दोनों देशों के बीच खुलेआम ज़ुबानी जंग देखने को मिली है. जहां एक तरफ उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर अमेरिका को धमकी देता रहता है वहीं अमेरिका भी हर एक धमकी का जवाब में उत्तर कोरिया को नष्ट करने की चेतावनी दे चुका है.
पीयूष शर्मा सावित्री बाई फुले के बारे में तीन अनसुनी बातेंl
सावित्रीबाई ने समय के उस दौर में काम शुरु किया जब धार्मिक अंधविश्वास, छूआछूत, दलितों और स्त्रियों पर मानसिक और शारीरिक अत्याचार अपने चरम पर थे. बाल-विवाह, सती प्रथा, बेटियों के जन्म लेते ही मार देना, विधवा स्त्री का शोषण जैसी प्रथाएं समाज का खून चूस रही थी. ब्राह्णवाद का बोलबाला था. ऐसे में जब सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबाफुले के ऐसी व्यवस्थाओं के खिलाफ खड़े हुए तो हलचल पैदा हो गई थी.
महान शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने ना केवल शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया, बल्कि भारतीय स्त्री की दशा सुधारने के लिए उन्होंने 1852 में “महिला मंडल” का गठन कर भारतीय महिला आंदोलन की अगुआ भी बन गई. इस महिला मंडल ने बाल विवाह और विधवा महिलाओं पर होने वाले जुल्म के खिलाफ समाज को मोर्चाबन्द कर समाजिक बदलाव के लिए संघर्ष किया.
उस दौर में हिन्दू स्त्री के विधवा होने पर उसका सिर मूंड दिया जाता था. विधवाओं के सर मूंडने जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए सावित्री बाई फूले ने एक नायाब कदम उठाया. महिलाओं के बाल नाई काटते थे. सावित्रीबाई फुले ने नाईयों को इस सामाजिक बुराई के बारे में बताते हुए उनसे विधवाओं के “बाल न काटने” का अनुरोध किया. उन्होंने इसके लिए आन्दोलन चलाया जिसमें काफी संख्या में नाईयों ने भाग लिया और विधवा स्त्रियों के बाल न काटने की प्रतिज्ञा ली. नाईयों के कई संगठन सावित्रीबाई फूले द्वारा गठित महिला मण्डल के साथ जुड़े. पूरे विश्व में ऐसा सशक्त आन्दोलन नहीं मिलता जिसमें औरतों के ऊपर होने वाले शारीरिक और मानसिक अत्याचार के खिलाफ स्त्रियों के साथ पुरूष जाति प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो. सावित्री बाई फूले और “महिला मंडल” के साथियों ने ऐसे ही अनेक आन्दोलन चलाएं व उसमें सफल भी हुए.
इसी तरह भारत का इतिहास और धर्मग्रंथों के पढ़ने से साफ पता चलता है कि हमारे समाज में स्त्रियों की कीमत एक जानवर से भी कम थी. स्त्री के विधवा होने पर उसके परिवार के पुरूष ही उनका शारीरिक शोषण करते थे, जिसके कारण वह कई बार मां बन जाती थी. बदनामी से बचने के लिए विधवा या तो आत्महत्या कर लेती थी या फिर अपने अवैध बच्चों को मार डालती थी. इस स्थिति को रोकने के उद्देश्य से सावित्रीबाई फूले ने भारत का पहला “बाल हत्या प्रतिबंधक गृह” खोला गया तथा निराश्रित असहाय महिलाओं के लिए अनाथाश्रम खोला गया, जहां विधवा महिलाएं आराम से रह सकती थीं और अपने बच्चे को जन्म दे सकती थीं.
जो लोग बहुजन महापुरुषों पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि स्वयं सावित्रीबाई फूले ने आदर्श सामाजिक कार्यकर्ता का जीवन अपनाते हुए आत्महत्या करने जाती हुई एक विधवा ब्राह्मण स्त्री काशीबाई जोकि गर्भवती थी, उसको आत्महत्या करने से रोककर उसके बच्चे का जन्म अपने घर में करवाया. उस बच्चे का नाम यशंवत रखा गया जिसे फुले दंपत्ति ने अपने दत्तक पुत्र के रुप में गोद लिया. यशवंत राव को पाल-पोसकर डॉक्टर यशवंत बनाया. इतना ही नहीं उसके बड़े होने पर उसका अंतरजातीय विवाह किया. महाराष्ट्र का यह पहला अंतरर्जातीय विवाह था.
कोरेगांव हिंसाः 29 दिसंबर को ही शुरू हो गई थी साजिश, जानिए पूरा सच
भीमा-कोरेगांव। भीमा-कोरेगांवलड़ाई की 200वीं सालगिरह पर हुई हिंसा से पूरे महाराष्ट्र में तनाव का माहौल है. पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद पूरे राज्य में हालात गंभीर बने हुए हैं. वहीं पुलिस ने शुरुआती जांच में इस पूरे मामले के लिए हिन्दुवादी संगठनों को जिम्मेदार माना है साथ ही दलित संगठनों को क्लिन चीट दी है. पुलिस के मुताबिक हिंसक झड़पों में भगवा झंडा लिए लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है.
असल में विवाद 29 दिसंबर की रात से शुरू हो गया था जिसने एक जनवरी को उग्र रूप ले लिया. 29 दिसंबर को वाडेबुडरुक गांव में गणेश महार की समाधि को दक्षिणपंथी संगठनों ने तोड़ दिया. गणेश महार ने ही छत्रपति शिवाजी के बेटे सांभाजी का अंतिम संस्कार किया था. इससे आहत दलितों ने विरोध जताया और प्रदर्शन किया.
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने दलितों की भूमिका से इंकार किया है.पुलिस का कहना है कि भीमा कोरेगांव के जश्न में दलित अपने बच्चों और महिलाओं के साथ शरीक होने आए थे और उनके पास कोई हथियार नहीं थे. घटना में घायल लोगों के घाव भी इस बात के सबूत हैं कि उनकी तरफ से कोई भी घातक हथियार इस्तेमाल नहीं हुआ. वहीं शुरुआती जांच में यह पता लगा है कि भगवे झंडे के साथ भी मार्च उसी समय किया गया जब अम्बेडकरवादियों का जश्न चल रहा था. वहीं जब दोनों दल आमने सामने हुए तो पत्थरबाजी हुई और हिंसक झड़पों की शुरुआत हुई.
भीमाकोरेगांव हिंसा पर मायावती का बड़ा बयान
महाराष्ट्र। भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा के बीच राजनीति भी तेज हो गई है. तमाम राजनैतिक दल इसके पीछे भाजपा और आरएसएस की साजिश बता रहे हैं. महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी इस पूरे मामले के पीछे भाजपा-आरएसएस की साजिश बताई है. पवार का कहना है कि सालों से दलित समाज के लोग भीमाकोरेगांव आते रहे हैं लेकिन आज तक हिंसा नहीं हुई थी. उन्होंने भाजपा-आरएसएस पर स्थानीय ग्रामीणों और हिन्दूवादी संगठनों को भड़काने का आरोप लगाया है.
वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भीमा-कोरेगांव मे हुई हिंसा पर कहा है कि यह घटना रोकी जा सकती थी. सरकार को वहां सुरक्षा की उचित व्यवस्था करनी चाहिए थी. मायावती ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार है और उन्होंने वहां हिंसा करवाई. उन्होंने इसके पीछे बीजेपी, आरएसएस और जातिवादी ताकतों का हाथ होने की बात कही.
दरअसल एक जनवरी को भीमा कोरेगांव पहुंचे अम्बेडकरवादी लोगों पर पथराव किया गया था. इसमें कई लोग घायल हो गए थे, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. हमलावरों ने पचास से ज्यादा गाड़ियों को तोड़ दिया था. इसके बाद पूरे महाराष्ट्र में हिंसा भड़क गई है.
अम्बेडकरवादियों का मुंबई बंद, डब्बा सर्विस ठप, नहीं चलेंगी 40 हजार स्कूल बसें
भीमा-कोरेगांव। भीमा-कोरेगांव के लड़ाई की सालगिरह पर भड़की चिंगारी पूरे महाराष्ट्र में फैल गई है. घटना के विरोध में अम्बेडकरवादी संगठनों ने आज बुधवार को बंद बुलाया है. इस बंद का असर इतना ज्यादा है कि मुंबई के मशहूर डब्बावालों ने भी अपनी सर्विस को ठप रखने का ऐलान किया है. तो वहीं बंद के कारण मुंबई में करीब 40,000 स्कूल बसें नहीं चलेंगी. पुलिस ने भी एहतियात बरतते हुए कुछ जगहों पर इंटरनेट सर्विस बंद करवा दी है.
बंद का असर सुबह से ही दिखने लगा. पालघर में बस सेवा पूरी तरह से ठप है तो पालघर रेलवे स्टेशन की कैंटीन भी बंद है. इसी तरह ठाणे के पास प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी. ठाणे के इलाके में चार जनवरी की रात तक धारा 144 लागू कर दी गई है. बंद के बीच मुंबई पुलिस ने हिंसा मामले में 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर 100 को हिरासत में ले लिया.
महाराष्ट्र के प्रमुख अम्बेडकरवादी नेता और बाबासाहेब के पोते प्रकाश अम्बेडकर सहित तमाम अम्बेडकरवादी संगठनों ने कोरेगांव में 1 जनवरी को अम्बेडकरवादियों पर हुए हमले के खिलाफ आज मुंबई बंद का आवाह्न किया है. घटना के खिलाफ 2 जनवरी को ही मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई इलाकों में लोग सड़क पर उतर आए थे. गुस्साई भीड़ ने कई सरकारी बसों को भी नुकसान पहुंचाया था. एक जनवरी को दक्षिणपंथी संगठनों की हिंसा में एक व्यक्ति की मौत से अम्बेडकरवादी ज्यादा नाराज हैं. फिलहाल मुंबई औऱ महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अम्बेडकरवादी संगठनों के सड़क पर उतर जाने से फडनवीस सरकार के हाथ-पांव फूले हुए हैं.
महज धान चुराने के लिए दलित को पीटकर मार डाला
उत्तर प्रदेश। धान चोरी के आरोपी दलित व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या, फतेहाबाद के गांव मढ में सामने आई घटना, एसपी दीपक सहारण ने लिया घटनास्थल का जायजा, डीएसपी बोले- 3 लोगों के खिलाफ हत्या व एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया, पुलिस शिकायत में मृतक के भाई का आरोप-मेरे भाई को बंधक बनाकर पीटा गया, फिर मरने के लिए छोड़ दिया गया, पुलिस पूरी घटना की जांच मे जुटी.
फतेहाबाद के गांव मढ में चोरी के आरोपी 38 वर्षीय एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर देने का मामला सामने आया है. गांव के लोगों के मुताबिक हत्या करने वाले लोगों ने व्यक्ति को धान चोरी के आरोप में पकड़ा था और उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी थी. घटना का पता चलने पर एसपी दीपक सहारण ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. डीएसपी रविंद्र तोमर ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मृतक के भाई ने 3 लोगों पर उसके भाई को बंधक बनाकर पीटने का आरोप लगाया है. मृतक के भाई द्वारा दी गई पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बंधक बनाकर बुरी तरह पिटाई करके उसके भाई को मरने के लिए छोड़ दिया गया. डीएसपी रविंद्र तोमर ने बताया कि इस मामले में 3 लोगों के खिलाफ हत्या व 3 एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. डीएसपी ने बताया कि पुलिस द्वारा प्राथमिक जांच में गांव के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि पिटाई का शिकार हुआ व्यक्ति रात को गांव के एक घर में धान चोरी करने के लिए घुसा था. इस दौरान कुछ लोगों ने उसे धान चोरी करते हुए पकड़ लिया और उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी. इसके बाद पिटाई से धान चोरी करने के आरोपी व्यक्ति की मौत हो गई. इस घटना के बारे में सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी एसपी को दी गई. घटना की गंभीरता को समझते हुए एसपी दीपक सहारण ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों को पूरी गंभीरता से व्यक्ति की मौत के कारणों की जांच के निर्देश दिए. डीएसपी रविंद्र तोमर ने बताया कि मृतक के भाई की शिकायत पर तीन आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरी घटना की जांच की जा रही है.
भीमा कोरेगांव में हमले को लेकर मुंबई सहित कई जगहों पर आंदोलन भड़का

मुंबई। भीमा कोरेगांव के 200 साल पूरे होने के मौके पर जुटे लोगों पर हुई पथराव की घटना ने अब बड़ा रूप ले लिया है. सोमवार 1 जनवरी को भड़की हिंसा बढ़ गई है और इसने अब जातीय संघर्ष का रूप ले लिया है. सोमवार की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे. एक जनवरी को शुरू हुई हिंसा के बाद आज भी जगह-जगह हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इस मामले में सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं.

पुणे में हुई जातीय हिंसा का असर महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में भी देखा जा रहा है. मुंबई के अलावा हड़पसर व फुरसुंगी सहित तकरीबन दर्जन भर इलाकों में सरकारी और प्राइवेट बसों पर पथराव किया गया. इस हिंसा में 100 से ज्यादा महाराष्ट्र परिवहन की बसों को नुकसान पहुंचा है. हिंसा की वजह से कुछ देर के लिए औरंगाबाद और अहमदनगर के लिए बस सेवा बंद करनी पड़ी. विरोध प्रदर्शन की वजह से मुंबई के कई हिस्सों में धारा 144 लगा दी गई है. वहीं, मुंबई पुलिस के पीआरओ ने जानकारी दी है कि राज्य में विभिन्न जगहों से 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस बीच भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वाहन किया है. पुलिस के आला अधिकारी विरोध खत्म करने के लिए नेताओं को मनाने में जुटे हुए हैं.

मामला इतना बढ़ गया है कि इस बारे में महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस को भी सामने आना पड़ा है. फडनवीस ने कहा कि, “भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे. हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी. कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई. इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिवार वालों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.” तो वहीं शरद पवार ने इस घटना के लिए दक्षिणपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है. पवार का कहना है कि दक्षिणपंथियों द्वारा स्थानीय गांववालों को भड़काया गया, जिसके बाद यह घटना घटी है. हालांकि पक्ष-विपक्ष की राजनीति और सरकार की तमाम दलीलों के बावजूद अम्बेडकरवादी सुनने को तैयार नहीं है.
BPO में बढ़ी हिन्दी और अन्य भाषा वालों की पूछ
नई दिल्ली। बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग उद्योग में अभी तक अंग्रेजी भाषी युवाओं की पूछ रही है, लेकिन जल्दी ही यह स्थित बदलने वाली है. इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम के तहत देश के 61 शहरों में खुले बीपीओ ने हिन्दी के साथ-साथ तेरह भारतीय भाषाओं में भी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं. हिन्दी के अलावा जिन अन्य भाषाओं में रोजगार मिलने लगा है, उनमें उड़िया, तमिल, गुजराती, मराठी, तेलुगू, कन्नड़, बंगाली, मलयालम, कश्मीरी, उर्दू, राजस्थानी व पंजाबी शामिल है.
इस स्कीम के तहत पहले चार दौर की निविदा प्रक्रिया में 21 राज्यों के 61 शहरों में 18160 सीटों का आवंटन किया गया है. इनमें से 13,780 सीटों वाले बीपीओ शुरू भी हो गये हैं. इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि इसकी वजह से घरेलू बीपीओ उद्योग में अंग्रेजी और अन्य विदेशी भाषाओं के अतिरिक्त भारतीय भाषाओं में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. आज की तारीख में इन सभी बीपीओ में अंग्रेजी, स्पेनिश और अरबी के अतिरिक्त हिंदी, उड़िया, तमिल, गुजराती, मराठी, तेलुगू, कन्नड़, बंगाली, मलयालम, कश्मीरी, उर्दू, राजस्थानी और पंजाबी भाषा जानने वाले युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध हो रहा हैं. इंडिया बीपीओ प्रमोशन स्कीम का मकसद देश के छोटे और मझोले शहरों तक बीपीओ उद्योग को लेकर जाना है.
गठबंधन की राह पर बसपा, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ सकती है चुनाव
नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन की चर्चा सामने आई थी. फिर खबर मिली कि बहुजन समाज पार्टी जितनी सीटें चाहती है, कांग्रेस देने को तैयार नहीं है. यही वजह है कि दोनों के बीच गठबंधन नहीं हो पाया. गुजरात के चुनाव नतीजों में यह बात साफ तौर पर देखने को मिली कि अगर कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन हुआ होता तो प्रदेश में भाजपा मुंह की बल गिरी होती और वहां कांग्रेस की सरकार होती.
कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश के चुनाव में यह गलती नहीं दोहराना चाहती है. खबर है कि 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर मैदान चुनाव लड़ सकती है. इसके लिए संगठन से लेकर पार्टी स्तर पर नेताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई है. दोनों दलों के बीच आपसी सहमति तब देखने को मिली जब हाल ही में भिंड और सतना के उपचुनाव में बसपा ने अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा किया. इन दोनों सीटों पर कांग्रेस ने भाजपा को मात दे दी.
कांग्रेस पार्टी बसपा के साथ इस दोस्ती को जारी रखना चाहती है. बसपा के हक में जो बात जाती है वह ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग में बसपा के प्रभाव वाली सीटे हैं. कांग्रेस और बसपा के वोट बंटने के कारण ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग की करीब दो दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटों पर दोनों पार्टियों को नुकसान झेलना पड़ता है.
पिछले तीन विधानसभा चुनावों को देखें तो ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, रीवा व सतना जिलों में दो से लेकर सात सीटों पर बसपा की जीत हुई है. तो वहीं भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, टीकमग़़ढ, छतरपुर, पन्ना, दमोह, रीवा, सतना की कुछ सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाई है. मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी बसपा से गठबंधन की बात को लेकर सहमत हैं. अगर बातचीत परवान चढ़ी तो मध्य प्रदेश में भाजपा औऱ शिवराज सरकार की विदाई तकरीबन तय है.
न्याय के लिए आमरण अनशन पर बैठा दलित परिवार
गोंडा। देश जब नए साल का जश्न मना रहा था, उत्तर प्रदेश के गोडा जिले के कलेक्ट्रेट में एक गरीब दलित परिवार न्याय की आस लिए आमरण अनशन पर बैठा था. परिवार का कहना है कि गांव के कुछ शैतान सामंतवादियों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उन्हें घर से निकाल दिया है. पीड़ित परिवार ने इस बारे में डीएम को आवेदन देकर शिकायत की है.
दलित परिवार ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने उसकी भूमि पर कब्जा कर उसे घर से बाहर निकाल दिया है. उसका परिवार इस ठंड में न्याय के लिए इधर-उधर भटक रहा है. पीड़ित ने बताया कि एक माह पहले दबंगों ने उसको बुरी तरह से मारा-पीटा और घर की महिला के साथ छेड़छाड़ कर बाहर निकाल कर ताला लगा दिया. पीड़ित जब अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचा तो पुलिस ने उसे डांट कर वहां से भगा दिया. इंसाफ की तलाश में यह शख्स अपने मासूम बच्चों समेत कलेक्ट्रेट में आमरण अनशन पर बैठ कर गुहार लगा रहा है. तो वहीं दलितों पर एक के एक अत्याचार से यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार दबंगों पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रही है.
- रिपोर्ट- गंधर्व गुलाटी
किन्नरों को मुफ्त शिक्षा देगा इग्नू
नई दिल्ली। पत्राचार के जरिए शिक्षा हासिल करने के सबसे बड़े केंद्र इग्नू ने एक बड़ा फैसला किया है. इग्नू ने कहा है कि वह अब किन्नरों को मुफ्त शिक्षा देगा. इग्नू के इस फैसले के बाद नाच-गाना छोड़कर आगे बढ़ने के किन्नर अब अपने जीवन में बेहतर कर सकेंगे. साल 2017 जुलाई में सुधा पहली किन्नर थी जिसने इग्नू में एडमिशन लिया था.
किन्नर समुदाय के लोगों के लिए इग्नू ने सभी पाठ्यक्रमों में नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था कर दी है. इसके साथ ही इग्नू में विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले की तिथि भी बढ़ा दी गयी है. अब विद्यार्थी 31 जनवरी 2018 तक एडमिशन ले सकते हैं, जिसकी प्रवेश परीक्षा चार मार्च 2018 को आयोजित की जाएगी. कोरेगांव में शौर्य दिवस मनाने पहुंचे बहुजनों पर ब्राह्मणवादियों का हमला, एक की मौत
कोरेगांव। पांच सौ महार सैनिकों द्वारा 28 हजार पेशवाओं को धूल चटाकर भारत में पेशवाई का खात्मा कर देने वाले भीमा कोरेगांव के युद्ध का जश्न मनाने पहुंचे लोगों पर हमले की खबर है. महाराष्ट्र के पुणे से 30किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव में हर साल एक जनवरी को दलित समुदाय के लोग शौर्य दिवस मनाने पहुंचते हैं. इस साल शौर्य दिवस के 200 साल पूरा होने के कारण देश भऱ से भारी संख्या में अम्बेडकरवादी पहुंचे थे. इस दौरान अचानक दोपहर को हिन्दुवादी संगठनों ने भीड़ पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई.
भीड़ पर पत्थरबाजी के साथ ही हाथों में भगवा झंडा लिए एक दल ने कोरेगांव में शौर्य स्थल की तरफ जा रही गाड़ियों पर भी हमला कर दिया, जिसमें 40 से ज्यादा गाड़ियों के शीशे टूट गए. पुलिस के मुताबिक जब लोग गांव में युद्ध स्मारक की ओर बढ़ रहे थे तो दोपहर में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं. पुलिस के मुताबिक हिंसा तब शुरू हुई जब एक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हो गई. बहस के बाद पथराव शुरू हुआ. हालात इतने बिगड़ गए थे कि पुलिस के लिए स्थिति को संभालना काफी मुश्किल हो गया. एक व्यक्ति की मौत होने से पूरे इलाके में स्थिति तनावपूर्ण है. घटना के बाद नाराज दलित संगठनों ने 5 जनवरी को विरोध करने की घोषणा की है.
खबर यह भी है कि रविवार 31 दिसंबर को दलित और लेफ्ट संगठन के लोगों ने शनिवार वाड़ा में अम्बेडकरवादियों को संबोधित किया था. शनिवार वाड़ा पेशवाई गद्दी रही है. इसके बाद से ही स्थिति बिगड़ गई थी. पुलिस ने रविवार को ही मामला संभालने की कोशिश करते हुए इलाके में धारा 144 लगा दिया था. हालांकि शौर्य दिवस मनाने पहुंचे लोगों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने स्थानीय लोगों को छूट दे दी थी, जिसके बाद हिंसा भड़की.
पुलिस की लापरवाही की बात इसलिए भी कही जा रही है क्योंकि अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने पहले ही शनिवार वाडा में जश्न मनाए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी. ब्राह्मण महासभा ने मांग कि थी कि दलितों को पेशवाओं की ड्योढ़ी ‘शनिवार वाडा’ में प्रदर्शन करने की अनुमति न दी जाए. बावजूद इसके पुलिस सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में नाकाम रही. कुल मिलाकर इस घटना से अम्बेडकरवादियों की बढ़ती ताकत से बौखलाए हिन्दुवादी संगठनों की कुलबुलाहट सामने आ गई है.
आईसीसी U19 वर्ल्डकप की देन विराट, गब्बर और हिटमैन
नई दिल्ली। आईसीसी अंडर 19 वर्ल्डकप इसी माह से न्यूजीलैंड में प्रारंभ होने जा रहा है. मुंबई के प्रतिभावान बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के नेतृत्व में भारतीय टीम भी इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में भाग लेगी. जूनियर स्तर के इस टूर्नामेंट के भविष्य के खिलाड़ी तैयार करने के लिहाज से खास माना जाता है. भारतीय जूनियर टीम वर्ष 2000, 2008 और 2012 में इस टूर्नामेंट में चैंपियन रही है जबकि दो बार वर्ष 2006 और 2016 में उसे उपविजेता रहकर संतोष करना पड़ा था. वर्ष 2016 में बांग्लादेश में हुए अंडर-19 वर्ल्डकप में टीम फाइनल तक पहुंची थी लेकिन उसे वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. भारतीय क्रिकेट के लिहाज से बात करें तो कई खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट ने उच्च स्तर के क्रिकेट का अच्छा प्लेटफॉर्म दिया है.
दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली सहित तीन प्रमुख प्लेयर्स को आईसीसी अंडर19 वर्ल्डकप की ही देन माना जा सकता है. विराट, रोहित शर्मा और शिखर धवन ने U19 वर्ल्डकप में शानदार प्रदर्शन करते हुए हर किसी का ध्यान खींचा और फिर सीनियर टीम में स्थान बनाते हुए सफलताएं अर्जित कीं. ये तीनों खिलाड़ी इस समय भारत की तीनों फॉर्मेट की टीम का हिस्सा हैं. विराट तो वर्ष 2008 में आईसीसी U19 वर्ल्डकप की चैंपियन रही भारतीय टीम के कप्तान थे. आइए डालते हैं, इन तीनों खिलाड़ियों के आईसीसी U19 वर्ल्डकप के प्रदर्शन पर नजर…
नए साल पर किस हस्ती ने क्या कहा
नए साल का आगाज़ एक बार फिर दुनियाभर में उत्साह और जश्न का माहौल लेकर आ गया है और यह उत्साह ट्विटर, फेसबुक, इनस्टाग्राम जैसे तमाम सोशल मीडिया प्लैटफॉम्स पर भी देखने को मिला. जहाँ एक ओर लोगों ने, new year celebrations की फोटोज़, विडियोज़, मीम्स शेयर करके नए साल का उत्साह दिखाया, वहीं दूसरी ओर नेताओं, अभिनेताओं समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने टिवटर के ज़रिए अपने फौलोवर्स को अपने अपने अंदाज़ में नए साल की शुभकामनाएँ दीं.
सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने Tweeter के ज़रिए देश को नव वर्ष की बधाई देते हुए सुख, समृद्धि और सवास्थ की कामना की.
लालू प्रसाद यादव Tweet के ज़रिए कहते हैं कि नव वर्ष २०१८ की हार्दिक शुभकामनाएं. नववर्ष मे विश्व बंधुत्व का सपना साकार हो, ऊंच-नीच का भेद मिटे. गरीबी, बेबसी, बेकारी का नाश हो. सामाजिक न्याय की कल्पना साकार हो, प्रेम सौहार्द बढे़, सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित हो, इन्ही शुभ मंगलकामनाओं के साथ आप सभी के उन्नति की कामना करता हूं.
वहीं अभिनेता अमिताभ बच्चन ने पोती आराध्या संग फोटो शेयर करके फैन्स को नव वर्ष का बधाई दी.
लेकिन इस बार कुमार विश्वास ने फैन्स को मायूस कर दिया, ज़रा उनका tweet सुनिए: विदा 17 , स्वागत 18 ! विस्तृत शुभकामनाएँ नहीं दे पा रहा हूँ ,इसके लिए क्षमा करिए ! ईश्वर आप का मंगल करे.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ अलग अंदाज़ में tweet करते हुए कहा माना वतन में मुश्किल हालात रहे, सियासत की साज़िश से इंसानी रिश्ते तार-तार रहे….पर जो बीत गया सो बीत गया… अब नयी इबारत लिखनी है, जिससे अब इस नये साल में अमन-चैन और प्यार रहे… और हर किसी का दामन ख़ुशियों से आबाद रहे. नये साल की अनंत शुभकामनाएँ!!! इस के साथ कदम रखते हैं वर्ष 2018 में. आप सभी को दलित दस्तक परिवार की ओर से नए साल की शुभकामनएँ.
पीयूष शर्माअसम: नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस का पहला ड्राफ्ट जारी
भारत के वैध नागरिकें में 1.9 करोड़ के नाम शामिल, अवैध बांग्लादेशी होंगे बाहर
गुवाहाटी।असम में नए साल के जश्न के बीच सरकार ने नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया. यह ड्राफ्ट भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) ने रविवार मध्य रात्रि को जारी किया, जिसके ज़रिये राज्य में रह रहे कानूनी और गैरकानूनी नागरिकों की पहचान होगी. हलांकि इस बात का फैसला अभी नहीं हुआ है कि जिन लोगो का नाम इस लिस्ट में नहीं है, उनका भविष्य क्या होगा.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिये भारत के रजिस्ट्रार जनरल शैलेश कुमार ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि ‘यह ड्राफ्ट वर्ष 2018 को पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो जाएगा, इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में पिछले तीन साल में 40 से ज्यादा सुनवाई हो चुकी हैं. अगले माह फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है, जहां हम सम्माननीय अदालत के समक्ष सभी तथ्यों को रखेंगे और हमें प्राप्त होने वाले निर्देशों के आधार पर हम ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद कोई फैसला लेंगे.’ साथ ही उन्होने यह भी बताया कि एनआरसी की यह लिस्ट ऑनलाइन रिलीज की जाएगी, जिसे“viz.,nrcassam.nic.in, assam.mygov.in and assam.gov.in.” पर देखा जा सकता है.
आपको बता दें कि असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ यहाँ के मूल नागरिकों द्वारा कई बार हिंसक आंदोलन हुए हैं, जिसके चलते यह मामला 2013 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इतना ही नहीं बीजेपी ने असम में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान इसे बड़ा मुद्दा भी बनाया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के दबाव से इस पर कार्यवाही तेज़ हो चुकी है और जल्द ही दूसरे व तीसरे ड्राफ्ट तैयार होने के बाद , अंतिम सूचि का प्रकाशन किया जाएगा.
पीयूष शर्मा
तीन तलाक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली इशरत जहां भाजपा में शामिल
नई दिल्ली। देश में तीन तलाक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली इशरत जहां भाजपा में शामिल हो गई हैं. उन्होंने कोलकाता में बीजेपी का हावड़ा यूनिट ज्वाइन किया है. इस बात की जानकारी खुद राज्य के जनरल सेक्रेटरी सत्यम बासू ने दी. उन्होंने कहा कि इशरत जहां ने हावड़ा में हमारी पार्टी ज्वॉइन की है, बीजेपी की स्टेट यूनिट इशरत को कुछ दिनों में सम्मानित करेगी. इशरत जहां उन पाँच महिलाओं में से एक हैं जिन्होने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थी.
दरअसल साल 2014 में इशरत जहां के पति ने दुबई से उनको फोन पर ही तीन तलाक दे दिया. इससे सदमे में आई इशरत ने अन्य प्रताड़ित मुस्लिम महिलाओं के साथ मिलकर उन पर हो रहे अत्याचार के विरोध में लड़ने का फैसला किया था. सुप्रीम कोर्ट के एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को गैर कानूनी ठहराने से उनको इस मुहीम में जीत भी मिली. हाल ही में इस पर आधारित बिल भी लोक सभा में पास हो चुका है.
इस पूरे मामले में इशरत का कहना है कि ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी वो खुद को महफूज महसूस नहीं करतीं हैं. उन्हें आए दिन धमकियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जिन लोगों ने उन्हे सपोर्ट किया है, वह उनकी मदद करेंगी और ट्रिपल तलाक के मामले में पार्टी को सपोर्ट करती रहेंगी. पीयूष शर्मा
रेलवे भर्ती बोर्ड ने निकाली भर्तियां 10 वीं पास भी करें आवेदन
नई दिल्ली। उत्तरी रेलवे ने Apprentice पदों के लिए भर्ती निकाली है और भर्ती के माध्यम से 3162 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. इस भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 27 जनवरी 2017 से पहले आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई हैं.
संस्थान का नाम – इंडियन रेलवे
पद का नाम – Apprentice
पद की संख्या – कुल 3162 पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं.
योग्यता:-
इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से 50 प्रतिशत के साथ 10वीं कक्षा पास किया होना आवश्यक है. आईटीआई कर चुके उम्मीदवार भी भाग ले सकते हैं.
आयु सीमा – 27 जनवरी 2018 तक उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 15 और अधिकतम आयु 24 साल के बीच होनी चाहिए.
चयन प्रक्रिया – उम्मीदवारों का चयन मैट्रिक और आईटीआई में मेरिट के आधार पर किया जाएगा.
एप्लीकेशन फीस – जनरल और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 100 रुपये है. वहीं SC/ST/PH और महिलओं के लिए कोई आवेदन फीस नहीं देनी है.
अंतिम तिथि – 27 जनवरी 2018
कैसे करें आवेदन – आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.rrcnr.org पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
नए साल पर मायावती ने मोदी के लिए क्या कहा
नए साल के उत्साह के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने अंदाज में सबको नए साल की बधाई दी है. मायावती ने उत्तर प्रदेश की जनता सहित समस्त देशवासियों व वीर सैनिकों को नए साल की शुभकामनाएं दी है. इस दौरान बसपा प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर खास तरह की प्रार्थना की है. मायावती ने कहा है कि कुदरत भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को इतनी सद्बुद्धि से की वे नए साल में अपनी जनविरोधी नीतियों को लागू करने से बचें.
नए साल की पूर्व संध्या पर जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यंमत्री ने युवाओं के लिए रोजगार की कामना की है. मायावती ने कहा है कि- “2016 और 2017 देश की 90 प्रतिशत जनता के लिए गहरे आर्थिक संकट में गुजरा है, ऐसे में मैं उम्मीद करती हूं कि नया साल 2018 सुकून और शांति भरा हो.” नोटबंदी को आर्थिक अपातकाल बताते हुए बसपा प्रमुख ने भाजपा पर निशाना साधते हुए नए साल में एक और आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए देशवासियों को आगाह किया है कि बैंकों में रखा उनकी अपनी कमाई का धन उनका रह पायेगा कि नहीं, यह देखने की जरूरत है. मायावती का आरोप है कि सरकार इसकी गारंटी देने से भागने की तैयारी में है.
प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर कटाक्ष करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा है कि कुदरत भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को इतनी सद्बुद्धि जरूर दे कि वे नए साल में अपनी घोर जनविरोधी सोच व नीतियों को लागू करने से बचें.
राजस्थान में सामने आई दो हजार वर्ष पुरानी बुद्ध प्रतिमा|
जयपुर। किसी पुरानी ऐतिहासिक जगह या फिर किसी मंदिर या उसके आस-पास की खुदाई के दौरान बुद्ध की प्रतिमा मिलना अब आम होता जा रहा है. देश के कई हिस्सों में इस तरह की खबरें आए दिन सामने आती रहती है. ताजा सूचना राजस्थान से आई है, जहां खुदाई के दौरान 2000 साल पुरानी बुद्ध की प्रतिमा मिली है. यह प्रतिमा प्रदेश के टोडा भीम तहसली स्थित गांवजौल में मिली है. जहां प्रतिमा मिली है, वहां मंदिर है.
21 दिसंबर को स्थानीय मंदिर के चारदीवारी का निर्माण चल रहा था. जेसीबी से खुदाई का काम शुरू होते ही जेसीबी के बोकेट में तीन मूर्तियां निकल कर आई. दो हजार वर्ष पुरानी यह प्रतिमा मथुरा कला शिल्प शैली की है. बुद्ध के साथ दो अन्य मूर्तियां भी मिली है, जिसे भिक्षुणी की मूर्तियां कहा जा रहा है. हालांकि बुद्ध की प्रतिमा का चेहरा टूटा हुआ है. सूचना मिलते ही एसडीओ जगदीश आर्य ने प्रतिमाओं को अपने कब्जे में ले लिया.
स्थानीय इतिहासकार वीरसिंह मीणा ने इस बात पर मुहर लगाई है कि जौल में जो प्राचीन मूर्तियां निकली है वे ध्यानमग्न भगवान बुद्ध की हैं. बकौल मीणा मूर्ति निर्माण की दो शैलियां रही हैं जिसमें मथुरा शैली और गांधार शैली है. सामने आई प्रतिमा मथुरा कला शिल्प शैली की है. बुद्ध प्रतिमा 78 ईसा पूर्व से द्वितीय सदी के मध्य कुषाणकाल में निर्मित लगभग दो हजार वर्ष पुरानी है.
बसपा प्रदेश अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा



