सीबीएसई विद्यार्थियों को स्कूलों में देगा नैतिक शिक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में नैतिक शिक्षा देने का प्लान बनाया हैं। सीबीएसई अपने विद्यार्थियों को ऐसा नागरिक बनाना चाहती हैं , जिनमे शांति, सौहार्द्र, विनम्रता एवं सहयोग के मूल्यों हों। इसके लिए सीबीएसई ने रामकृष्ण मिशन के साथ गठजोड़ किया है. मिशन ने छठी से लेकर नौवीं कक्षा के बच्चों के लिए 3 साल का कार्यक्रम तैयार किया है। इस बारे में सीबीएसई और रामकृष्ण मिशन के बीच 2014 में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था. इसके तहत स्कूलों में ‘जागरूक नागरिक कार्यक्रम’ का आयोजन किया जायेगा लेकिन विद्यालयों द्वारा उसका क्रियान्वयन ऐच्छिक है .

सीबीएसई ने विद्यालयों में एक परिपत्र भी भेजी है जिसमे कहा की शांति, सौहार्द्र, करुणा एवं विनम्रता जैसे मूल्य सदियों से हर समाज के विमर्श का भाग रहे हैं और उनकी आवश्यकता एवं महत्व को सार्वभौमिक रूप से स्वीकार एवं महसूस किया गया है. इस उद्देश्य के लिये रामकृष्ण मिशन उपकरण, कार्यक्रम सामग्री उपलब्ध कराने के साथ शिक्षकों को प्रशिक्षित करने में सहयोग करेगा . इस कार्यक्रम को चुनने वाले स्कूलों को साल में 16 कक्षाओं का आयोजन करना होगा और इसे तीन वर्ष तक जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त करनी होगी.

गन्धर्व गुलाटी  

डबल फायदा चाहिए तो बैंक की बजाय यहां रखें पैसा

नौकरी पेशा वालों के लिए बड़ी रकम की बचत टेढ़ी खीर के समान होता है. अगर कुछ बचत खातों में रखी भी जाए तो 3.5 से 6 फीसदी तक ही ब्याज मिलता है. लेकिन अगर आप अपना पैसा बैंक की बजाय म्युचुअल फंड में लगाते हैं, तो आप डबल फायदा हासिल कर सकते हैं. म्युचुअल फंड में निवेश से आपको बैंक से ज्यादा रिटर्न हासिल हो सकता है. अच्छी बात यह है कि इसमें निवेश की शुरुआत आप 500 रुपये से कर सकते हैं. फिर आप जब चाहें अपना निवेश बढ़ा भी सकते हैं. जहां तक म्युचुअल फंड के फायदे की बात है तो वह कई मायनों में और बचतों से ज्यादा बेहतर है.कम रकम में ज्यादा लाभ: म्युचुअल फंड में आप महज 500 रुपये से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. इसमें  ये विकल्प भी होता है कि आप हर महीने जितना चाहें, उतना निवेश बढ़ा सकते हैं.चुनने की आजादी: एफडी में आपको तय नियमों के मुताबिक अपने पैसे बैंक के पास रखने होते हैं. म्युचुअल फंड में आपको चुनने की आजादी होती हैं. यहां विकल्प होता है कि आप कितनी रकम निवेश करना चाहते हैं, कितने साल के लिए करना चाहते हैं. इसके अलावा आपके पास निवेश के लिए फंड चुनने की आजादी भी होती है.ज्यादा रिटर्न: म्युचुअल फंड आपको बैंक खाते पर मिलने वाले ब्याज से ज्यादा रिटर्न देते हैं. पिछले 10 साल का रिकॉर्ड के मुताबिक इसके जरिये 10 से 12 फीसदी रिटर्न हासिल कर सकते हैं.जब चाहें, तब निकाल सकते हैं पैसें: म्युचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप जब चाहें तब पैसे निकाल सकते हैं.सबसे जरूरी बात: निवेश शुरू करने से पहले आप जिस फंड में निवेश कर रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी हासिल कर लें. ध्यान रखिये म्युचुअल फंड बाजार के जोखिमों के अधीन होता है. इसलिए पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही सही फंड का चुनाव करें.

जातिवादी गुंडों ने मूंछ रखने पर वाल्मीकि युवक का पैर तोड़ डाला

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राजस्थान। खबरें कई तरह की होती हैं. कुछ खबरें पढ़कर दुख होता है लेकिन कई बार कुछ खबरें गुस्सा दिलाती हैं. यह खबर ऐसी ही है. राजस्थान के जालौर के निकट बालवाडा में जातिवादी गुंडों ने मूंछ रखने पर दलित समाज के कैलाश के दोनों पैर तोड़ दिए. साथ ही उसे गांव से निकालने की भी कोशिश की. युवक की एक्स-रे रिपोर्ट देखने से साफ पता चलता है कि मनुवादी शैतानों ने कैलाश को कितनी बुरी तरह से पीटा.

घटना 16 नवंबर की है. पुलिस से की अपनी शिकायत में पीड़ित कैलाश ने कहा है कि घटना के दिन शाम के करीब छह बजे जब वो अपनी मोटर साइकिल से जालोर से अपने घर बालवाडा जा रहा था उसी दौरान यह घटना घटी. पीड़ित के मुताबिक शंभू सिंह के बेटे किरण सिंह व उसके चार पांच अन्य साथी जो कि सामंतवादी प्रवृति के परिवार और जाति से संबंध रखते हैं ने उस पर यह कहते हुए हमला कर दिया कि कैलाश ‘छोटी जाति’ का होकर अच्छे कपड़े पहनता है और एक जाति विशेष की बपौती दाढ़ी और मूंछ रखता है.

मनुवादी गुंडे पीड़ित कैलाश को अपनी गाड़ी में बिठाकर सुनसान जगह ले गएं और उस पर हमला कर दिया. उसके दोनों पैर तोड़ दिए और उसे मरा जानकर चले गए. होश आने पर कैलाश ने अपने पिता दलाराम मेहतर को सूचना दी, जो मौके पर पहुंच कर उसे अस्पताल ले गए. जिन लोगों ने कैलाश पर हमला किया उनके नाम शंभु सिंह,गोपाल सिंह, शैतान सिंह राठौड़, पहाड़ सिंह आदि हैं.

हालांकि पुलिस ने इस मामले में छह गुंडों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन यह घटना समाज के एक वर्ग की ओछी और घटिया मानसिकता की पोल खोलता है, जिसमें एक दलित युवक को अपनी पसंद से मुंछ रखने का अधिकार भी नहीं है.

 

मेट्रो उद्घाटन में नहीं बुलाए जाने को भुनाने में जुटे केजरीवाल​

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के मेजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह पर दिल्ली के मुख्य-मंर्ती अरविन्द केजरीवाल को न्योता न देने पर राजनीती गरमा रखी है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने ई-मेल और फेसबुक के जरिए पार्टी से जुड़े लोगों को मैसेज भेजकर चंदा देने की अपील की है. पार्टी के फेसबुक पेज पर डाले गए एक पोस्ट में कहा गया, ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री को मेट्रो की मेजेंटा लाइन के उद्घाटन के लिए नहीं बुलाया गया, अगर आप गुस्सा हैं तो चंदा दें.’ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे दिल्ली के लोगों का अपमान बताया.

मैसेज और ईमेल के ज़रिये पार्टी ने समर्थकों को भावनात्मक संदेश भेजा और 100 रूपए के चंदे की अपील की. साथ ही में लोगों को एक संगठित ताकत में तब्दील करने की बात की गयी। लोगों और समर्थकों के लिए ईमेल में एक लिंक भी भेज रहा है जो सीधा आम आदमी पार्टी को चंदा देने वाली वेबसाइट पर खुलता है.

इस पर पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “जब भी केंद्र सरकार द्वारा AAP को दबाने का प्रयास किया जाता है, जब भी दिल्ली की निर्वाचित सरकार पर हमला होता है. तब भारत के लोग खड़े होते हैं और पार्टी का समर्थन करते हैं. चंदा इस तरह के समर्थन की सिर्फ एक अभिव्यक्ति है.”

इस प्रोजेक्ट में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद मुख्य-मंत्री केजरीवाल को उद्घाटन समारोह मे नहीं बुलाया गया। गुस्साई आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी वापस करने तक की मांग कर दी थी. 25 दिसंबर 2017 को प्रधान मंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य-मंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दिल्ली मेट्रो की मैजंटा लाइन का उद्घाटन किया था.

गंधर्व गुलाटी

 

BBAU में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले शिक्षकों की जीत

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के UIET शिक्षण संस्थान अदालत में अपनी लड़ाई जीत गए हैं. विश्वविद्यालय की मनमानी के शिकार इन 28 शिक्षकों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक तरफा कार्यवाही करते हुए 6 माह पूर्व निकाल दिया था. वजह यह थी कि इन शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी और जिस वजह सीबीआई ने विश्वविद्यालय में छापा मारा था. इससे भड़के विवि प्रशासन ने उक्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध जाकर विवि से निकाल दिया.

शिक्षकों का आरोप है कि उनको विज्ञापन नियम के अनुसार पहले साल उक्त शिक्षकों की परफॉरमेंस के आधार पर 1 साल बाद 5 साल के लिए सेवा विस्तार का प्रावधान था, लेकिन विवि प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इन शिक्षकों को बिना किसी नोटिस के विवि से निकाल दिया था. सभी शिक्षकों ने परेशान होकर देश के शीर्ष अदालत में न्याय के लिए गुहार लगाई थी तथा प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी को भी स्थिति से अवगत कराया था. जहां इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने केस नंबर 32052, कृष्णकांत कन्नौजिया व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के तहत सुनवाई करते हुए विवि प्रशासन को लताड़ लगाई और कार्यमुक्त शिक्षकों को 1 महीने के अंदर पुनर्स्थापित करने का आदेश दिया है. विवि नियोक्ताओं को AICTE और BBAU अकादमिक अध्यादेश परिनियम,क्लॉज 17 के अनुसार 5 साल के लिए एक पुनः पदस्थापित करने का सख्त निर्देश दिया है. हैरत की बात यह रही कि जिस विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया था, उसने सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कोई आपत्ति जाहिर नहीं की. शिक्षकों का कहना है कि विवि प्रशासन के खिलाफ यह सत्य की जीत है.

 

गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा के जिस मामले में योगी जेल गए और संसद में रोए, फैसला हाईकोर्ट में सुरक्षित

Yogiमानवाधिकार कार्यकर्ता असद हयात बताते हैं की 22 दिसंबर को गोरखपुर साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़े दूसरे मामले में भी हाई कोर्ट इलाहाबाद में बहस पूरी हुई और फैसला सुरक्षित हुआ. रशीद खान एवं अन्य बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी व अन्य में भी मुख्य अभियुक्त योगी आदित्यनाथ हैं. असद हयात बताते हैं की दर्ज रिपोर्ट के अनुसार 27 जनवरी 2007 को सुबह के समय योगी आदित्यनाथ ने अपने समर्थकों मनोज खेमका भगवती जालान, रामावतार जालान, दयाशंकर दुबे, हर्ष वर्धन सिंह, अशोक शुक्ला, राम लक्ष्मण के साथ गोरखपुर के मोहल्ला खुनीपुर स्थित एक मज़ार और इमाम चौक पर तोड़ फोड़, धार्मिक पुस्तकों का अपमान, आगजनी और लूटपाट कारित की गयी थी. इस संबंध में मुतवल्ली रशीद खान ने केस क्राइम नंबर 43 /2007 थाना कोतवाली गोरखपुर अंतर्गत धारा 147, 295, 297, 436, 506, 153 a, IPC में दर्ज कराया था. इसी मामले में योगी गिरफ्तार हुए थे और एक सप्ताह से अधिक समय तक जेल भी रहे और ज़मानत पर बाहर आये. संसद में रो-रो कर अपनी तकलीफ भी सुनाई थी कि जेल में कितना ख़राब व्यवहार उनसे हुआ (तथाकथित).

वे बताते हैं की इस मामले में इन्वेस्टीगेशन पूरा होने पर उपरोक्त सभी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायलय में दाखिल किया गया और तत्कालीन मायावती सरकार ने 153 ए के तहत मुक़दमा चलाने की अनुमति भी 13 /10/2009 को दे दी और इसके बाद सक्षम न्यायालय ने संज्ञान आदेश 22/12/2009 को पारित कर दिए. इसके बाद आरोप निर्धारण किया जाना था मगर 2014 तक ऐसा कोई आदेश कोर्ट ने पारित नहीं किया. 2014 में मनोज खेमका ने यह आपत्ति दर्ज कराई कि मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी का जो आदेश 13 /10/2009 है, वह अवैध है क्यों कि उसपर राज्यपाल द्वारा नियुक्त सचिव /अधिकारी जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर नहीं है बल्कि अनुसचिव राम हेत के हस्ताक्षर हैं, जो अभियोजन स्वीकृति देने के आदेश पारित करने के लिए अधिकृत नहीं थे. मनोज खेमका के इस ऐतराज़ पर निचली अदालत ने 17 मार्च 2016 को आदेश पारित किया कि राज्यपाल से अनुमति के बाद ही अभियोजन मंज़ूरी के आदेश पारित किए गए हैं और उस आदेश की प्रति पुलिस अधिकारियोँ को 4 प्रतियाँ प्रेषित की गईं हैं. इस आदेश के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई हेतु 16 अप्रैल 2016 की तारीख नियत की. इस तिथि को सुनवाई कर रहे जज साहब का तबादला हो गया और नए जज साहब ने 28 जनवरी 2017 को क्रिमिनल रिवीज़न 558/2014 में अपने पहले आदेश 16 अप्रेल 2016 के विपरीत जाते हुए और उसको पूरी तरह अनदेखा करते हुए आदेश पारित कर दिया कि अभियोजन मंज़ूरी अवैध है क्यों कि उस पर अनुसचिव रामहेत के हस्ताक्षर हैं, इसके लिये अधिकृत अधिकारी जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर नहीं है.

असद हयात बताते हैं की इस आदेश को रशीद खान ने हाईकोर्ट इलाहबाद में चुनौती दी जिसपर सुनवाई हुई. जिसमें वे कहते हैं कि अनुसचिव रामहेत ने असल आदेश के पारित होने की सूचना देते हुए, उसकी प्रति संलग्न की है, जिसका मक़सद सूचना यानि comunication है और जे बी सिन्हा के हस्ताक्षर वाला पारित आदेश सरकार के रिकॉर्ड में मौजूद है जिसको तलब कराया जा सकता है और सरकारी वकीलों ने इस बात /तथ्य को छुपाया है. निचली अदालत ने अपने पूर्व पारित आदेश 17 मार्च 2016 के विपरीत जाकर आदेश पारित किया है. सरकार की यह दलील ग़लत है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद Informent को कोई अधिकार ट्रायल में दखल देने का नहीं होता है. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने जे जे इंटरनेशनल (2001 scc vol 3 पेज 462 ) पर यह अधिकार informant को दिया है और Cr.PC सेक्शन 2 w (a) में victim, सेक्शन 372 और 24 (8) को भी ऐसा अधिकार दिया गया और निचली अदालत ने रशीद खान को सुने बिना आदेश 28 जनवरी 2017 पारित किया है.

याचिकादाताओं की ओर से हाईकोर्ट इलाहबाद में अधिवक्ता फ़रमान अहमद नक़वी ने बहस की और यूपी सरकार की तरफ से एड्वोकेट जरनल श्री राघवेंद्र सिंह और उनके पैनल ने. उन्होंने सवाल किया कि राजनितिक लोगो को बचाने के लिए अदालतों के साथ फ्रॉड किया जा रहा है और सरकारी रिकॉर्ड में रखे original रिकॉर्ड को छुपाया जा रहा है और कोर्ट के सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है? अगर दलील के तौर पर ये मान लिया जाए कि राज्यपाल द्वारा अधिकृत अधिकारी जे बी सिन्हा ने दस्तखत नहीं किया तब क्या अनुसचिव रामहेत ने फर्जी आदेश पारित करके उसकी सुचना ज़िला पुलिस अधिकारियों को भेज दी? अगर वास्तव में यही है तब क्या यह माना जायेगा कि इस मामले की अभियोजन स्वीकृति की फाइल अभी तक राज्य सरकार के गृह मंत्रालय में लंबित है, अगर ऐसी स्थिति होगी तब अभियोजन स्वीकृत कौन करेगा, क्या खुद आरोपी जो गृह मंत्री और मुख्य मंत्री खुद है?

लेखक- राजीव यादव

   

बसपा कार्यकर्ता की हत्या, हाल ही में गली का नाम रखा था अम्बेडकर मार्ग

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चंद्रेश राव (लाल घेरे में)

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव चंद्रेश राव की हत्या कर दी गई है. घटना 27 दिसंबर को रात 10 और 11 के बीच घटी. कुछ गुंडे उनके घर पर आएं और गाली-गलौच करने लगे. इसके बाद बात बढ़ने लगी, जिस पर गुंडों ने लोहे की राड और डंडे से बसपा नेता पर हमला कर दिया. काफी चोट लगने के कारण उनकी मृत्यु हो गई. चंद्रेश राव के घर पहुंचे गुंडों की संख्या दस के करीब थी. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि साफ पता चल रहा था गुंडे मारपीट की नियत से ही आए हैं.

कुछ दिन पहले ही चंद्रेश राव ने इस गली का नाम अम्बेडकर मार्ग रखा था

58 वर्षीय चंद्रेश राव शुरुआत से ही बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता थे. एक वक्त में वह दिल्ली के प्रदेश सचिव के पद पर भी रह चुके थे. वर्तमान में भी वह पार्टी के लिए सक्रिय थे. रावजी दिल्ली के रनभोला थाना अंतर्गत बापरोला विहार में रहते थे. उनका विधानसभा क्षेत्र विकासपुरी थी. हाल ही में उन्होंने अपनी गली के सामने अम्बेडकर मार्ग लिखवाया था. कहा जा रहा है कि कुछ लोगों को इससे भी खुन्नस थी. इस पूरे घटनाक्रम में चंद्रेश राव का 30 वर्षीय बेटा भी गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. मामले में आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करा दी गई है. मामले में एक आरोपी को पकड़ा जा चुका है, जबकि अन्य अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं.

कांग्रेस के स्थापना दिवस पर राहुल गांधी को याद आएं अम्बेडकर

नई दिल्ली। कांग्रेस के 133वें स्थापना दिवस के मौके पर नवनिर्वाचित पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहली बार पार्टी मुख्यालय पर कांग्रेस का झंडा फहराया. इस दौरान राहुल गांधी ने संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को याद करते हुए भाजपा शासन और पीएम मोदी पर निशाना साधा.

राहुल गांधी ने कहा कि- अंबेडकर का दिया संविधान आज खतरे में है. हमारा संविधान, जोकि हमारे देश की नींव है वो आज खतरे में है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता इसे लेकर सीधे बयान दे रहे हैं. संविधान पर चोरी-छिपे पीछे से हमला किया जा रहा है. ये हमारी, कांग्रेस पार्टी और हर एक भारतीय ड्यूटी है कि हम अपने संविधान की रक्षा करें. इस दौरान राहुल गांधी ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए बीजेपी झूठ बोलती है.

असल में हाल ही में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा था कि हम संविधान बदलने के लिए सत्ता में आए हैं. हेगड़े ने कहा था कि वह संविधान का सम्मान करते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में ये बदलेगा. हम उसी के लिए यहां हैं और इसलिए हम आए हैं. राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को बहाना बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को संसद में भी इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया और भाजपा को घेरने की कोशिश की.

देखना है जिग्नेश मेवाणी का भ्रम कब टूटता है

दलित वर्ग का कोई भी चेहरा जब भी पहली बार उभरता है, उस पर दलित होने का ठप्पा पहले लगा दिया जाता है. जिग्नेश मेवाणी भी जब आंदोलन में सक्रिय हुए तो उनके मुद्दों से पहले उनकी जाति की चर्चा होने लगी थी. हालांकि गुजरात की राजनीति में तेजी से उभरे मेवाणी को बार-बार खुद को दलित नेता कहना अच्छा नहीं लग रहा है. जिग्नेश मेवाणी का कहना है कि मैं सिर्फ दलित नेता नहीं हूं.

असल में मेवाणी का कहना है कि मैं सभी का नेता हूं. वह दावा करते हैं कि वडगाम में उन्‍हें 50 हजार से ज्‍यादा मुसलमानों ने वोट दिया और उनकी जीत के लिए 250 से अधिक महिलाओें ने रोज़ा रखा था. जिग्‍नेश मेवाणी कहते हैं कि-

‘मेरी लड़ाई गरीबों, वंचितों और शोषितों की है. अगर कोई दलित कारखाना मालिक अपने ब्राह्मण कर्मचारियों पर अत्‍याचार करता है तो मैं गरीब ब्राह्मण की लड़ाई लडूंगा’. वह आदिवासियों को भी जोड़ने की बात कहते हैं. जिग्नेश मेवाणी अब राजनीति में हैं. जाहिर सी बात है कि राजनीति में सबका वोट और समर्थन मायने रखता है, लेकिन ऐसा कम ही देखने में आया है कि अन्य वर्गों के लोगों ने किसी दलित समाज के व्यक्ति को अपना नेता माना हो. यहां तक की जाति की वजह से ही जगजीवन राम देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे, क्योंकि सवर्णों को यह मंजूर नहीं था. तो डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिलाओं, देश की अर्थव्यवस्था और कर्मचारी हितों के लिए तमाम काम करने के बावजूद उन्हें दलितों का नेता कह कर सीमित करने की कोशिश लगातार जारी है.

तो बहुजन समाज पार्टी के नारे बहुजन हिताय बहुजन सुखाय को बदलकर सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय कर देने और उत्तर प्रदेश में बेहतर शासन देने के बावजूद बसपा की नेता मायावती को सवर्ण समाज के लोग आज तक नहीं अपना पाए. देखना है, जिग्नेश मेवाणी का भ्रम कब टूटता है.

 

योगी आदित्यनाथ ने खारिज किये खुद पर लगे आरोप

Yogiलखनऊ। मोदी सरकार में जनता के लिए अच्छे दिन भले ही ना आए हों लेकिन भाजपा नेताओं के अच्छे दिन ज़रूर आ गये हैं. खासकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित यूपी में भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के लिए तो अच्छे दिन का फरमान भी आ गया है. असल में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के राजनेताओं पर लगे 20 हजार मुकदमे वापस लेने का ऐलान कर दिया है. इसके बाद अब खुद योगी पर लगे आरोप भी खारिज हो जाएंगे. इसी संबध में 21 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पास हो चुका है. सरकार का कहना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर रोकथाम के लिए उठाया है, लेकिन विपक्ष की माने तो सरकार इसकी आड़ में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं पर लगे मुकदमे वापस लेना चाहती है. सरकार के इस फैसले पर विवाद शुरू हो गया है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिर्फोम्स (एडीआर) के मुताबिक, यूपी सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ-साथ 20 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इतना ही नहीं बीजेपी के 312 विधायकों में से 114 पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 83 गंभीर आपराधों में शामिल हैं. गौरतलब है कि 20 दिसंबर को सरकार ने गोरखपुर के डीएम को के पत्र भेजा था, जिसमें उनसे कोर्ट में 1995 में दर्ज मुकदमें वापस लेने का आवेदन करने के लिए कहा गया था. इस मुकदमें में सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल, विधायक शीतल पांडेय सहित 10 नेताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में केस दर्ज था.

   

कलम शायर की… मिर्ज़ा ग़ालिब  

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कौन पूछता है पिंजरें में बंद परिंदो को “ग़ालिब” …. याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं. ये 19वीं सदी में पैदा हुए मिर्ज़ा ग़ालिब का एक कलाम है.

रोज़ाना गूगल अपने डूडल के ज़रिये महान हस्तियों को सम्मानित करता है और इस बार उसने हिंदुस्तान के सबसे मशहूर उर्दू-फारसी जुबां के शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के 220वें जन्मदिन पर उन्हें डूडल के ज़रिये श्रद्धांजलि दी. मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम मिर्जा असद-उल्लाह बेग खान था. उनका जन्म 27 दिसंबर 1797 में अंग्रेजी हुकूमत के वक़्त हुआ था. मिर्ज़ा ग़ालिब, उनीसवीं सदी के एक ऐसे शायर थे जिनके तआरुफ़ के बिना शायरी की हर महफ़िल अधूरी है. आज की सदी के शायर भी इनकी कस्मे लेतें हैं लेकिन इसकी मनाही  ग़ालिब पहले ही कर गए थे. इस पर वो कह गए थे के “तूने क़सम मैकशी की खाई है ग़ालिब, तेरी क़सम का कुछ ऐतबार नहीं है”.  ग़ालिब एक ऐसे शायर थे जिनकी शायरी पढ़ कर पत्थर दिल भी पिघल जाएँ और बेज़ुबान भी वाह-वाह करने लगें. इनकी शान में अगर क़सीदे पढ़े जाएँ तो ज़िन्दगी भी कम पड़ जाए.

मिर्जा गालिब की कविताओं और शायरियों को लोग अपने-अपने तरीके से गाते हैं और बॉलीवुड भी इसमें पीछे नहीं है. मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरियां केवल भारतीय युवाओं को ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगों को प्ररेरित करती हैं.  आज भी उनकी हवेली पुरानी दिल्ली में है जहाँ उन्होंने अपना आखरी वक़्त बिताया था. मिर्जा गालिब का इंतकाल  15, फरवरी 1869 में हुआ था और उनका मकबरा दिल्ली के निजामुद्दीन के चौसठ खंभा के पास स्थित है.

गन्धर्व गुलाटी,  

निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग को लेकर उदित राज ने की रैली

नई दिल्ली। भाजपा के सांसद और अनूसूचित जाति व जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ के अध्यक्ष उदित राज ने 26 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आरक्षण के समर्थन में एक विशाल रैली की. ‘आरक्षण बचाओ’ रैली में देश भर से हजारों लोग शामिल हुए. इस मौके पर सांसद उदित राज ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में अनुबंध पर काम कराने की प्रवृत्ति से सबसे ज्यादा नुकसान समाज के कमजोर तबके को हुआ है. रैली को संबोधित करते हुए उदित राज ने आरोप लगाया कि निजीकरण की आड़ में आरक्षण को ख़त्म करने का प्रयास किया जा रहा है और देश में असमानता बढ़ती जा रही है. पहले यह सामाजिक स्तर पर थी लेकिन अब आर्थिक क्षेत्र में भी बढ़ गयी हैं. अधिकतर लोग या तो बेरोजगार हैं या फिर वह कम दैनिक मज़दूरी में काम कर रहें हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर दलित, आदिवासी और पिछड़े तबकों पर पड़ा है. रैली में परिसंघ की 16 प्रमुख मांगों को लेकर एक मांग पत्र भी जारी किया गया, जिसमें प्रोमोशन यानी पदोन्नति में आरक्षण, निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति, दलितों पर अत्याचार बंद हो और कई अन्य मांगों को शामिल किया गया था. रैली में आये कुछ लोगों ने अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाज़ी की. हालांकि सवाल यह है कि जो भाजपा और उसके नेता आरक्षण ख़त्म करने की और संविधान को बदलने की बात करते हैं, उसका सांसद रहते हुए उदित राज सरकार पर कैसे दबाव बना पाएंगे.

 

लालू के जेल जाने पर बोले तेजस्वी, BJP संग होते तो ‘राजा हरिश्चंद्र’ कहलाते

पटना। लालू प्रसाद यादव के जेल जाने पर उनके बड़े बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बड़ा बयान सामनें आया है. विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए तेजस्वी ने कहा कि जेल जाने से लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक करियर खत्म नहीं हुआ है। अपने एक इंटरव्यू के दौरान तेजस्वी ने कहा कि विपक्ष को लगता है कि उनके पिता के जेल जाने से सब खत्म हो जाएगा, लेकिन यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमीं है। इतना ही नहीं तेजस्वी ने बिहार की जनता की नाराज़गी का हवाला देते हुए यह भी कहा इस इस फैसले से बिहार की जनता नाराज़ है और इसका जवाब खुद जनता देगी.

इससे पहले भी तेजस्वी नें लालू के जेल जाने पर अपने बयान में कहा था कि विपक्ष द्वारा उनके पिता की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और वह सीबीआई के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे। साथ ही शत्रुघ्न सिन्हा और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी लालू के समर्थन में उनको जन का नेता और राजनीतिक साजिश का शिकार बताया.

आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव चारा धोटाला मामले के आरोप में जेल में बंद हैं और 3 जनवरी को उनकी सज़ा का ऐलान किया जाएगा.

पीयूष शर्मा

जयराम ठाकुर बने हिमाचल के नए सीएम, 10 मंत्रीयों संग ली शपथ

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बुद्धवार को मंडी के विधायक जयराम ठाकुर ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. खुले मैदान में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अंनत कुमार गीते, थावर चंद गहलोत, जगत प्रकाश नड्डा और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. यह पहला मौका है जब कोई प्रधानमंत्री सरकार के गठन में शामिल हुए हैं.

करीब 50 हजार लोगों की मौजूदगी में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जयराम ठाकुर को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई. उनके बाद 10 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की. मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वालों में महेंद्र सिंह ठाकुर, सुरेश भारद्वाज, रामलाल मरकंडा, सरवीण चौधरी, राजीव सैजल,अनिल शर्मा, विपिन परमार, वीरेंद्र कंवर, विक्रम सिंह, गोविंद सिंह के नाम शामिल हैं.

शपथ लेने से ठीक पहले जयराम ठाकुर ने अपने सवर्गवासी पिता को याद करते हुए कहा कि यदि मेरे पिता आज होते तो बड़ी खुशी होती. आपको बता दें कि जयराम ठाकुर मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं, उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और यूनिवर्सिटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखा. शपथ ग्रहण के बाद जनता को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि लोगों ने हम पर विश्वास दिखाया है और हम उस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे.

पीयूष शर्मा

विजय रुपाणी दूसरी बार बने गुजरात के सीएम, 9 कैबिनेट-10 राज्यमंत्रियों संग ली शपथ

गांधीनगर: गुजरात में मंगलवार को सीएम विजय रूपाणी ने दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. गांधीनगर के सचिवालय मैदान में आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा और तमाम बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए.

शपथ ग्रहण समारोह में विजय रुपाणी को राज्यपाल ओपी कोहली ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसी दौरान सौरभ पटेस, दिलीप ठाकोर, कौशिक पटेल, ईश्वर परमार, भूपेंद्र सिंह चूड़ास्मा ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. कैबिनेट मंत्रियों के अलावा राज्य मंत्री के रूप में प्रदीप सिंह जडेजा, बच्चू भाई खाबड़, परबत पटेल, पुरुषोत्तम सोलंकी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. इनमें 6 पाटीदार चेहरे और 6ओबीसी चेहरे भी शामिल हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण से पहले रूपाणी अपनी पत्नी अंजलि के संग पंचदेव मंदिर के दर्शन करने पहुंचे, जहां दोनों ने पूजा-अर्चना की.

राज्य में भाजपा की यह लगातार छठी सरकार है और रूपाणी ने मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ली है. पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में 182 मे से 99 सीटें जीती हैं. हलांकि इस चुनाव में भाजपा को 2012 के चुनाव के मुकाबले 16 सीटें कम मिली हैं. विजय रूपाणी और नितिन पटेल को 22 दिसंबर को भाजपा विधायक दल का नेता और उपनेता चुना गया. अपको बता दें कि नितिन पटेल गुजरात के मेहसाणा से विधायक हैं, मोदी के करीबी माने जाते हैं और पाटीदार समुदाय से आते हैं. पटेल दूसरी बार राज्य के डिप्टी सीएम बने हैं.

पीयूष शर्मा

प्रताड़ना ज़ाहिर करती सामने आईं जाधव की तस्वीरें।

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नई दिल्ली। हाल ही में पाक जेल में कैद पूर्व भारतीय नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव को उनकी मां और पत्‍नी से मिलवाया गया था. मुलाकात के दौरान ली गईं कुछ तस्‍वीरें सामने आयी हैं, जिनमें जाधव के सिर पर और कान के पीछे एक लंबा निशान देखा जा सकता है. इन तसवीरों में कुलभूषण जाधव को दी गईं यातनाओं का दर्द साफ बयाँ हो रहा है.

इस मुलाकात के बाद कुछ ऐसे दृश्य भी सामने आए हैं जिनसे साफ ज़ाहिर है कि जाधव को दबाव के चलते परिवार से मिलाया गया था, जैसे जाधव और उनके परिवार के बीच काँच की दीवार थी, जिसमें वह अपनी माँ और पत्नी के सामने कोट पहन कर बैठे थे, ऐसे में माना यह जा रहा है कि शरीर पर लगी चोटों को छुपाने के लिए उन्हे कोट पहनाया गया था. मराठी या हिन्दी में बात करने की जगह पर जाधव अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, दो वर्षों के बाद परिवार से मिलने पर भी उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. इतना ही नहीं मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान ने प्रेस कान्फ्रेंस में एक वीडियो जारी किया जिसमें कुलभूषण अपने परिवार से मुलाकात के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद कह रहे हैं और खुद को रॉ का एजेंट भी बता रहे हैं.

इस मुलाकात की तसवीरें तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिसमें कुछ और भी चौकाने वाली बातें सामने आयी हैं. इसमें 47 साल के कुलभूषण किसी 60-65 साल के बुजुर्ग जैसे दिखाई दे रहे थे. और परिवार के मुताबिक उनका वज़न पहले से काफी कम दिखाई दिया. हलांकी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मुलाकात के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर को कुलभूषण जाधव की मैडिकल रिपोर्ट दी, जिसके मुताबिक उनके शरीर में कोई फ्रैक्चर नहीं है साथ ही ईसीजी और अल्ट्रासाऊंड की रिपोर्ट भी नॉरमल बताई जा रही है.

पीयूष शर्मा

राजस्थान में दलितों को मंदिर जाने को रोका|

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राजस्थान। देश के कई हिस्सों में जब मनुस्मृति दहन किया जा रहा था, राजस्थान में मनु की व्यवस्था के मुताबिक दलितों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था. असल में राजस्थान के जालोर जिले के शंखवाली गांव में दलित समाज के लोग मंदिर में जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं मिल रही थी. इसे मुद्दा बनाते हुए लालसोट के विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के नेतृत्व में दलित समाज के लोग मंदिर में प्रवेश करने गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ.

असल में शंखवाली गांव के राजपुरोहित समाज ने मंदिर को निजी बताते हुए दलितों को प्रवेश करने से मना कर दिया. इस तरह दलित और राजपुरोहित समाज आमने-सामने हो गए. पुलिस प्रशासन ने राजपुरोहित समाज और दलित समाज के बीच बातचीत कराने की कोशिश की, जो नाकाम रही, जिससे स्थित और उग्र होने लगी.

इसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कानून और शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सहित पचास लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले के बाद राजस्थान की सियासत गरमा गई है। विधायक मीणा और उनके समर्थकों का कहना है कि मंदिर प्रवेश सबका अधिकार है और किसी को इससे रोका नहीं जा सकता.

 

लखनऊ में मना 12वां डाइवर्सिटी डे

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लखनऊ। भारत जैसी भीषणतम गैर-बराबरी दुनियां में कहीं नहीं है. यहां 10 प्रतिशत अल्पजन विशेषाधिकार युक्त तबकों का धन-संपदा पर 81 % कब्ज़ा है, जबकि शेष 90 प्रतिशत लोग महज 19-20 धन –संपदा पर गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं. इस स्थिति को अगर बदलना है तो सरकारी और निजी क्षेत्र की सभी प्रकार की नौकरियों, सप्लाई, डीलरशिप, ठेकों,पार्किंग, परिवहन, फिल्म-मीडिया सहित शासन-प्रशासन इत्यादि तमाम क्षेत्रों में अवसरों का बंटवारा भारत के प्रमुख सामाजिक समूहों- सवर्ण, ओबीसी, एससी/एसटी और धार्मिक अल्पसंख्यकों – के स्त्री-पुरुषों के संख्यानुपात में करना होगा. यह बातें 25 दिसंबर को लखनऊ के अमराई गाँव के अम्बेडकर पार्क में, शक्ति के स्रोतों में सामाजिक और लैंगिक विविधता के प्रतिबिम्बन की लड़ाई लड़ रही बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली द्वारा आयोजित, 12वें डाइवर्सिटी समारोह में जोर-शोर से उठीं.

इसमें देश के जाने-माने दर्जन भर के करीब लेखक-पत्रकार और शिक्षाविदों ने शिरकत किया जिनमें डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, माता प्रसाद, प्रो. रमेश दीक्षित, प्रो. कालीचरण स्नेही, डॉ. प्रो. रामनरेश चौधरी, प्रो (डॉ.) एस. एन. शंखवार, शिल्पी चौधरी, फ्रैंक हुजुर, अरसद सिराज मक्की, डॉ. राजबहादुर मौर्य, डॉ. कौलेश्वर “प्रियदर्शी”, मा. सर्वेश आंबेडकर, चंद्रभूषण सिंह यादव, कॉमरेड प्रेम रंजन इत्यादि प्रमुख रहें.

इस अवसर पर सबसे पहले दिवंगत कॉमरेड प्रभुलाल के अवदानों को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी. उसके बाद डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया के रूप में मशहूर एच एल दुसाध की चार किताबों के साथ डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी और डॉ. अनीता गौतम द्वारा लिखी पुस्तक ‘एच. एल. दुसाध: डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया’ का विमोचन हुआ. डाइवर्सिटी डे के अवसर पर हर साल शक्ति के स्रोतों में सामाजिक और लैंगिक विविधता के प्रतिबिम्बन के विचार में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ द इयर’ का सम्मान दिया जाता रहा है. इस बार फ्रैंक हुजूर, चंद्रभूषण सिंह यादव और डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी को ‘डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ द इयर’ के खिताब से नवाजा गया.

कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन खुद बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एच.एल. दुसाध ने किया. उन्होंने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि अगर मार्क्स के अनुसार दुनिया का इतिहास धन-संपदा के बटवारे पर केन्द्रित वर्ग संघर्ष का इतिहास है तो भारत का इतिहास आरक्षण पर केन्द्रित वर्ण-व्यवस्था के सुविधाभोगी अल्पजन और वंचित बहुजन के मध्य संघर्ष का इतिहास है. इस कारण ही जब मंडल की रिपोर्ट प्रकाशित होने पर एससी/एसटी के बाद जब पिछड़ों को थोडा आरक्षण मिला, वर्ण-व्यवस्था के सुविधाभोगी वर्ग के हितैषी शासकों ने नव उदारवादी अर्थनीति को हथियार बनाकर आरक्षण को कागजों तक सिमटाने का षड्यंत्र शुरू किया.

इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. राज बहादुर मौर्य ने कहा कि सारी दुनिया में सामाजिक न्याय पर प्रोफ़ेसर लोग अमेरिकी विद्वान जान रावल की किताब का अनुसरण करते हैं, किन्तु मेरा मानना है कि एच.एल. दुसाध ने रावल से बहुत आगे का चिंतन कर लिया है. आज नहीं तो कल देश के बुद्धिजीवियों को दुसाध के चिंतन का समर्थन करना ही पड़ेगा. प्रोफ़ेसर कालीचरण स्नेही ने कहा कि तुम कुछ भी करो, हमें उसमें हिस्सेदारी दे दो. यहाँ तक भ्रष्टाचार में भी हमें हिस्सदारी चाहिए.

मुख्य अतिथि माता प्रसाद ने अमेरिका के कालों की भांति भारत के दलितों को सप्लाई, डीलरशिप, ठेकों, फिल्म- मीडिया में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. जबतक दलित वाचितों को अमेरिका के कालों की भांति हर क्षेत्र में भागीदारी नहीं मिलती, यह देश आगे नहीं बढ़ सकता. इस बात को बार-बार अमेरिका जाने वाले भारत के हुक्मरानों को समझना चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि पूरा देश दुसाध को आज डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया के रूप जानता है. हमने डाइवर्सिटी के विषय में दुसाध से ही सीखा. उन्होंने बहुत जोर देकर कहा कि आरक्षण और डाइवर्सिटी हासिल करने के लिए बहुजन समाज को एक होना ही होगा. धन्यवाद ज्ञापन रंजन कुमार ने किया.

रिपोर्ट- कविश कुमार

भाजपाई मंत्री ने कहा, हम संविधान बदलने आए हैं

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कोपल। भाजपा के राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के एक बयान से सियासत में उबाल आ गया है. हेगड़े के बयान की संविधान में आस्था रखने वाले तमाम लोगों ने निंदा की है. भाजपा के इस मंत्री ने अपने बयान में कहा है कि भाजपा संविधान बदलने के लिए पावर में आई है और आने वाले समय में जल्दी ही ऐसा होगा. कर्नाटका के कोपल जिले में ब्राह्मण युवा परिषद की एक बैठक में हेगड़े ने यह बात कही.

इस दौरान मंत्री ने देश में धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाले लोगों पर भी निशाना साधा. हेगड़े ने सेकुलर लोगों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जब कोई यह कहता है कि वह मुस्लिम है, क्रिश्चियन है, लिंगायत हैं या फिर हिन्दू है तो मुझे खुशी होती है क्योंकि वे अपने बारे में जानते हैं. जबकि जो यह कहते हैं कि वो सेकुलर हैं वो खुद को और अपने खून को नहीं जानते. हेगड़े यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है इसलिए इसे स्वीकार करना चाहिए। तो मैं संविधान की इज्जत करता हूं लेकिन यह पहले कई बार बदला जा चुका है और भविष्य में फिर से बदला जाएगा। हम सरकार में संविधान बदलने के लिए ही आए हैं और ऐसा करेंगे.

विवादित बयान देने वाले अनंत कुमार हेगेड़े कर्नाटक के उत्तर कनाडा पांच बार से सांसद हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बीते अगस्त में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री बनाया था. कर्नाटक में अगले साल चुनाव होने हैं और उसी को ध्यान में रखते हुए हेगड़े को मंत्री बनाया गया था। लगता है भाजपा में किसी नेता को तभी प्रोमोशन मिलता है या फिर वो तभी महत्वपूर्ण माना जाता है, जब वो कोई विवादित बयान दे दे, क्योंकि विवादित बयान देना और संविधान पर सवाल उठाना भाजपा नेताओं का शगल बनता जा रहा है.

 

शत्रुध्न सिन्हा ने उमा भारती से जलसमाधि लेने का समय पूछा

नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता और भाजपा नेता शत्रुध्न सिन्हा लगातार भाजपा पर हमलावर हैं. सरकार की खामियों को लेकर भी सिन्हा लगातार सवाल उठाते रहते हैं. चाहे प्रधानमंत्री मोदी हों या फिर सरकार के अन्य मंत्री, सिन्हा सोशल मीडिया पर उनको लेकर अपनी राय जाहिर करते रहते हैं. इसी क्रम में सिन्हा ने आज उमा भारती पर निशाना साधा है. ट्विट कर शॉट गन ने उमा भारती से पूछा है कि वह कब ‘जलसमाधी’ लेंगी.

 सिन्हा ने लिखा है- “आदरणीय उमा भारती जी, आपने कहा था कि अगर माँ गंगा 2018 से पहले साफ नहीं हुईं तो मैं जल समाधि ले लूँगी, कुछ दिन शेष हैं आप कब जल समाधि ले रही हैं?” सिन्हा के ट्विट के बाद हालांकि अभी उमा भारती का जवाब नहीं आया है, लेकिन सिन्हा ने इस मुद्दे को उठाकर उन्हें मुश्किल में डाल दिया है.

असल में उमा भारती को केंद्रीय जल संसाधन और गंगा सफाई मामलों का मंत्रालय दिया गया था. उस दौरान उमा भारती ने कहा था कि ‘मां गंगा के साथ करोड़ों भारतीयों के साथ मेरी भी आस्था जुड़ी है. गंगा के पानी को निर्मल बनाना मेरे जीवन का लक्ष्य है. यदि मेरे कार्यकाल में गंगा का पानी निर्मल नहीं हुआ तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगी.’ हालांकि उमा भारती की इस अभियान के प्रति गंभीरता नहीं होने से गंगा से जुड़ा मंत्रालय छीन लिया गया और उन्हें पेयजल-सैनिटेशन मंत्रालय दे दिया गया था.

उसी दौरान उमा भारती का एक बयान यह भी आया था कि अगर वो 2018 तक गंगा को स्वच्छ नहीं कर पाईं तो जलसमाधी ले लेंगी. जब साल 2018 बीत रहा है तो शत्रुध्न सिन्हा ने उसी मुद्दे को उठाया है.