डॉ. आंबेडकर एवं कार्ल मार्क्स – वर्ण बनाम वर्ग

वर्ग बनाम वर्ण की चर्चा इससे पहले भी होती रही है. लेकिन जब हम कार्ल मार्क्स के बरअक्स इस चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो यहां पर वर्ग के मायने कुछ अलग हो जाते हैं. भारत में वर्ग के मायने होते हैं अमीर वर्ग और गरीब वर्ग. लेकिन कार्ल मार्क्स जिस वर्ग की बात कर रहे हैं, उसमें मालिक वर्ग और मजदूर वर्ग है. इसलिए हमें बहुत ही सावधानी पूर्वक इस अंतर को समझते हुए बात करनी होगी.

इसी प्रकार वर्ण की भी विभिन्‍न परिभाषाएं सामने आती है. कई बार वर्ण को रंगों के विभाजन के तौर पर देखा जाता है. तो कई बार वर्णों को जाति व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण इकाई के तौर पर भी देखा जाता है. हम यहां पर चर्चा के दौरान इसे इसी परिभाषा के तौर पर आगे बातचीत करेंगे.

मार्क्स ने जिस मालिक और मजदूर की बात की और उनके संघर्ष को महत्वपूर्ण बताया तथा पूंजीवाद को इन वर्ग के सिद्धांतों के आधार पर परिभाषित किया. वह अपने स्थान पर महत्वपूर्ण है लेकिन इन सिद्धांतों को उसी वर्ग के आधार पर भारत के परिप्रेक्ष्य में लागू करना कहीं ना कहीं जल्दबाजी करने जैसा रहा है. क्योंकि भारत में वर्ग का अस्तित्व कभी भी मालिक और नौकर की तरह नहीं रहा है. भारत में पूंजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग कहा गया या फिर अमीर वर्ग गरीब वर्ग कहा गया. लेकिन जैसा रिश्ता यूरोप में मालिक और मजदूर के बीच रहा है वैसा रिश्ता भारत में अमीर और गरीब के बीच कभी भी नहीं रहा है. भारत में इन वर्गों के बीच जातीय संरचना भी है जो मालिक और नौकर के सिद्धांत पर नहीं चलती.

मुझे लगता है यह भारत के परिपेक्ष में मार्क्सवादी सिद्धांतों को मालिक और नौकर के नजरिए से नहीं बल्कि जाति व्यवस्था की जटिलताओं, उनके बीच भेदभाव उनके बीच अछूतपन और धार्मिक संहिता को ध्यान में रखते हुए देखना होगा. भारत में एक छोटी जाति का व्यक्ति अमीर तो हो सकता है. उसके कल कारखाने भी हो सकते हैं. इसके पहले भी हुए हैं. गंगू तेली का उदाहरण सामने पड़ा है. शिवाजी का उदाहरण है लेकिन इन्हें धार्मिक स्वीकृति या कहें सामाजिक राजनीतिक स्वीकृति प्रदान नहीं होती है. इस कारण राजा होने के बावजूद शिवाजी को राज तिलक करवाने के लिए पापड़ बेलने पड़ते हैं. और किसी ब्राम्हण के पैर के अंगुठे से अपने माथे पर राज तिलक करवाने के लिए मजबूर होना पड़ता है. जब हम वर्ग बनाम वर्ण की बात करते हैं यह उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण है.

गंगू तेली और शिवाजी के उदाहरण से यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आती है कि भारत के परिपेक्ष्य में साम्यवाद या समाजवाद, जिसकी बात कार्ल मार्क्स कहते हैं. वह और उसका आधार आर्थिक नहीं है उससे कहीं आगे है. भारत के परिपेक्ष्य में आर्थिक समानता कभी भी राजनीतिक और सामाजिक समानता का रूप नहीं ले पाती है. और ना ले पाई है. इसके तमाम उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं. शायद मार्क्सवाद के सिद्धांत को भारत में लागू करने से पहले इन ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया गया.

इस कारण भारत के परिपेक्ष्य में कम्युनिस्ट विचारधारा फेल हो गई या फिर सिर्फ  पूंजी की लड़ाई तक सीमित रह गई या फिर उन जगह ही रह पाई जहां पर फैक्ट्री और मजदूर रहे हैं. यह लड़ाई कभी भी किसानों तक नहीं पहुंच पाई ना ही उन दलित पिछड़ा वर्ग आदिवासियों तक पहुंच पाई जिन्हें समानता साम्यवाद या समाजवाद की जरूरत थी. उन प्राइवेट दुकानों संस्थानों तक नहीं पहुंच पाई जहां पर पढ़ा-लिखा कलम चलाने वाला मजदूर शोषण का शिकार रोज होता है.

जहां एक ओर यूरोप में पूंजीवाद के गर्भ से श्रमिक वर्ग का जन्म हुआ वहीं भारत में श्रमिक वर्ग मां के गर्भ से पैदा होता है. भारत में यूरोप का वर्ग नहीं है और जब वर्ग ही नहीं तो वर्ग संघर्ष का सवाल ही पैदा नहीं होता. बल्कि भारत में वर्ग की जगह वर्ण संघर्ष हो रहा है. जिसे मार्क्स ने भी भूल स्वीकार करते हुए कहा कि भारत में वर्ण संघर्ष ही संभव है और उसके बाद ही वर्ग संघर्ष हो सकता है. इसे इमीएस नम्बूदरीपाद ने भी स्वीकार किया, जिनके नेतृत्व में केरल में पहली बार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी थी. बी. टी. रणदीवे ने भी स्वीकार किया, क्योंकि भारत में सत्ता और संपत्ति पर सवर्ण वर्ग का ही कब्जा है.

दरअसल हमें मार्क्स के साम्यवाद को नए सिरे से भारत के परिपेक्ष्य में परिभाषित करना पड़ेगा. यहां पर आर्थिक समानता से कहीं ज्यादा जरूरी सामाजिक और  राजनीतिक समानता की बात है. कार्ल मार्क्स ने जिन स्थानों पर काम किया वहां पर आर्थिक विषमता तो थी लेकिन सामाजिक तथा राजनीतिक विषमताएं नहीं रही. इसीलिए उन्होंने यह सिद्धांत दिया की पूंजी का समान वितरण होने पर साम्यवाद स्थापित हो सकेगा.

डॉ आंबेडकर अपनी किताब बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स में कार्ल मार्क्स की अवधारणा को 10 बिंदुओं में रेखांकित करते हैं. जिन पर कार्ल मार्क्स के सिद्धांत खड़े हुए हैं.

  1. दर्शन का उद्देश्य विश्व का पुनः निर्माण करना है ब्रह्मांड की उत्पत्ति की व्याख्या करना नहीं है.
  2. जो शक्तियां इतिहास की दिशा को निश्चित करती है वह मुख्यतः आर्थिक होती हैं.
  3. समाज दो वर्गों में विभक्त है मालिक तथा मजदूर.
  4. इन दोनों वर्गों के बीच हमेशा संघर्ष चलता रहता है.
  5. मजदूरों का मालिकों द्वारा शोषण किया जाता है. मालिक उस अतिरिक्त मूल्य का दुरुपयोग करते हैं जो उन्हें अपने मजदूरों के परिश्रम के परिणाम स्वरुप मिलता है.
  6. उत्पादन के साधनों का राष्ट्रीयकरण अर्थात व्यक्तिगत संपत्ति का उन्मूलन करके शोषण को समाप्त किया जा सकता है.
  7. इस शोषण के फलस्वरुप श्रमिक और अधिकाधिक निर्बल व दरिद्र बनाए जा रहे हैं.
  8. श्रमिकों की इस बढ़ती हुई दरिद्रता व निर्बलता के कारण श्रमिकों की क्रांतिकारी भावना उत्पन्न हो रही है और परस्पर विरोध वर्ग संघर्ष के रूप में बदल रहा है.
  9. चूंकि श्रमिकों की संख्या स्वामियों की संख्या से अधिक है. अतः श्रमिकों द्वारा राज्य को हथियाना और अपना शासन स्थापित करना स्वाभाविक है. इसे उसने सर्वहारा वर्ग की तानाशाही के नाम से घोषित किया है.
  10. इन तत्वों का प्रतिरोध नहीं किया जा सकता इसलिए समाजवाद अपरिहार्य है. पृष्ठ क्रमांक 346 वॉल्यूम 7

यहां पर आप देख सकते हैं कि कंडिका 9 में इस बात का जिक्र किया गया है कि श्रमिकों द्वारा उनकी संख्या ज्यादा होने के कारण बलपूर्वक अपना शासन स्थापित करना स्वाभाविक है. जिसे उन्होंने सर्वहारा वर्ग की तानाशाही नाम घोषित किया है. यानी कार्ल मार्क्स श्रमिकों के द्वारा तानाशाही शासन की अनुमति देते हैं, जबकि डॉ आंबेडकर कहते हैं बलपूर्वक प्राप्त किया गया शासन वह भी तानाशाही वाला शासन ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता. इससे भविष्य में भी संघर्ष की संभावनाएं बनी रहती है. वह कहते हैं, “मार्क्सवादी सिद्धांत को 19वीं शताब्दी के मध्य में जिस समय प्रस्तुत किया गया था उसी समय से उसकी काफी आलोचना होती रही है. इस आलोचना के फलस्वरुप कार्ल मार्क्स द्वारा प्रस्तुत विचारधारा का काफी बड़ा ढांचा ध्वस्त हो चुका है इसमें कोई संदेह नहीं कि मार्क्स का यह दावा कि उसका समाजवाद अपरिहार्य है पूर्णतया असत्य सिद्ध हो चुका है. सर्वहारा वर्ग की तानाशाही सर्वप्रथम 1917 में उनकी पुस्तक ‘दास कैपिटल’ समाजवाद का सिद्धांत के प्रकाशित होने के लगभग 70 वर्ष के बाद सिर्फ एक देश में स्थापित हुई थी यहां तक कि साम्यवाद जो कि सर्वहारा वर्ग की तानाशाही का दूसरा नाम है और उसमें आया तो यह किसी प्रकार के मानवीय प्रयास के बिना किसी अपरिहार्य वस्तु के रूप में नहीं आया था. वहां एक क्रांति हुई थी और इसके रूस में आने से पहले भारी रक्तपात हुआ था तथा अत्यधिक हिंसा के साथ वहां सोद्देश्य योजना करनी पड़ी थी. शेष विश्व में अभी भी सर्वहारा वर्ग की तानाशाही के आने की प्रतीक्षा की जा रही है.

मार्क्सवाद का कहना है कि समाजवाद अपरिहार्य है. उसके इस सिद्धांत के झूठ पर जाने के अलावा सूचियों में वर्णित अन्य अनेक विचार भी तर्क तथा अनुभव दोनों के द्वारा ध्‍वस्‍त  हो गए हैं. अब कोई भी व्यक्ति इतिहास की आर्थिक व्याख्या को केवल एक मात्र परिभाषा स्वीकार नहीं करता इस बात को कोई स्वीकार नहीं करता कि सर्वहारा वर्ग को उत्तरोत्तर कंगाल बनाया गया है और यही बात उसके अन्य तर्क के संबंध में भी सही है” पृष्ठ क्रमांक 347 वॉल्यूम 7

भारत के परिप्रेक्ष्य में वर्ग की लड़ाई

जब आप वर्ग की लड़ाई लड़ते हैं तो आप सिर्फ आर्थिक समानता की बात करते हैं दरअसल भारत में जो वर्गीय अंतर है वह सिर्फ आर्थिक नहीं है. यह समझना होगा. यहां पर जातीय असमानता है. राजनीतिक असमानताएं गहरे पैठ बनाए हुए हैं. और इन जटिलताओं को सुलझाने के लिए समानता लाने के लिए आर्थिक गैरबराबरी को खत्म करना काफी नहीं है. जातीय एवं राजनीतिक असमानता को खत्म करने के लिए तमाम क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देना जरूरी है . यह प्रतिनिधित्व राजनीति, धार्मिक, समाजिक पदवी में, प्रशासन में, न्यायालय में देना होगा. डॉ अंबेडकर ने इसी प्रतिनिधित्व को रिजर्वेशन का नाम दिया. रिजर्वेशन कभी भी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तौर पर नहीं तैयार किया गया. दरअसल यह भारत में फैली असामान्यताओं को खत्म करने के लिए बेहद जरूरी कार्यक्रम है. इसीलिए डॉक्टर अंबेडकर ने आजादी के पहले गोलमेज सम्मेलन में प्रतिनिधित्व के अधिकार की मांग की थी.

यह बात सही है कि डॉ आंबेडकर और मार्क्स दोनों समाज में समानता चाहते थे. लेकिन दोनों के समानता के उद्देश्य में बुनियादी फर्क है.

एक वर्ण व्यवस्था में समानता की बात करते हैं तो दूसरे वर्ग व्यवस्था में समानता की बात करते हैं.

एक वर्ग व्यवस्था में समानता के लिए संघर्ष की बात करते हैं. चाहे इसके लिए सर्वहारा तानाशाही ही क्यों ना करनी पड़े.

दूसरे वर्ण व्यवस्था में समानता लाने के लिए लोकतांत्रिक उपाय किए जाने की बात करते हैं जिसमें खूनी संघर्ष और तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है. वे जाति व्‍यवस्‍था का उन्‍मूलन में सबको साथ लेकर चलने की बात करते है. डॉं अंबेडकर कहते है एक ऊंच नीच वाली प्रणाली को खत्‍म करने के लिए नई ऊंच नीच वाली प्रणाली का निर्माण नही किया जाना चाहिए.

जब आप वर्ण यानी जाति व्यवस्था की लड़ाई लड़ते हैं तो आप सामाजिक आर्थिक राजनैतिक तीनों प्रकार की समानता की बात करते हैं.

यह बात शायद भारतीय मार्क्सवादियों ने नजरअंदाज कर दिया होगा. क्योंकि बीमारी डायग्नोसिस करना किसी भी बीमारी के इलाज का पहला चरण होता है. डायग्नोज करने के बाद ही उसी हिसाब से उसका इलाज किया जा सकता है. जहां पर वर्ग की समस्या नहीं है वहां पर आप वर्ग के हिसाब से उसका इलाज करेंगे तो रिजल्ट्स नहीं आने वाले. जहां पर वर्ण की समस्या है, वर्ण संघर्ष की समस्या है वहां पर वर्ण के हिसाब से ही उसका इलाज करना होगा. तब कहीं जाकर उसके परिणाम सामने आ सकेंगे. यही जो बुनियादी फर्क है. वर्ग और वर्ण में. उसे समझना होगा. तब कहीं जाकर हम मार्क्सवाद और अंबेडकरवाद के समानता के सिद्धांत को अमलीजामा पहना पाएंगे.

लेखक- संजीव खुदशाह

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बीजेपी की पराजय आज से आरंभः शरद यादव

नई दिल्ली। भारतीय राजनीतिक दलों में एक नई पार्टी का नाम शामिल हो गया है. सांसद व पूर्व जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने लोकतांत्रिक जनता दल के प्रथम सम्मेलन के मौके पर कर्नाटक मुद्दा, किसान आत्महत्या, दलित, आदिवासी मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ हमला किया. साथ ही बीजेपी को गंगा में बहाने व पराजय की बात कही.

शुक्रवार को शरद यादव बीजेपी की पोल खोलते रहे और वहां मौजूद युवा, वरिष्ठ व महिला समर्थक शरद यादव जिंदाबाद के नारे से तालकटोरा स्टेडियम गूंजता रहा. मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित शरद यादव ने कहा कि बीजेपी ने जीएसटी व नोटबंदी अपने फायदे के लिए की. भाजपा सरकार अपने फायदे के लिए देश को आर्थिक संकट में डाल चुकी है.

बाबा अंबेडकर की कसम खाई

शरद यादव, रमई राम समेत कई दिग्गज दलित क्रांतिकारी, किसान नेताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर, लोहिया, बिरसा मुंडा के सपनों को साकार करने के लिए शपथ लिया. इस दौरान शरद यादव ने सहारनपुर में भीम आर्मी के सचिन, रोहित वेमुला, अखलाक की हत्या को राजनीतिक साजिश बताई. बीजेपी की सरकार में दलित अत्याचार बढा है, किसान आत्महत्या के लिए विविश हैं और आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है.

दिलाई बाबरी की याद…

देश में शांति-सौहार्द बनाने के लिए जनता से अपील करते हुए कहा कि भाजपा-आरएसएस का मकसद देश को तोड़ना व भाईचारा खंडित करना है लेकिन हमें इनको रोकना होगा. बाबरी विध्वंस का उदाहरण देते हुए जानकारी दी कि वैसे समय में भी बिहार के हिंदू-मुसलमान एकजुट होकर रहे और एक दंगा तक नहीं हो पाया लेकिन नीतीश कुमार व बीजेपी के गठबंधन ने हालही में कई दंगें करा डाले. नीतीश कुमार को भी इसकी सजा हमलोग देंगे. नीतीश कुमार जैसे दगाबाज नेता को बिहार की जनता माफ नहीं करने वाली.

गंगा में बीजेपी विसर्जन

लोकतांत्रिक जनता दल के आगाज के साथ ही बीजेपी का काला दिन आरंभ हो गया है. बाबा साहेब के लोकतंत्र-संविधान की रक्षा के लिए बीजेपी को गंगा में विसर्जन किया जाएगा. 2019 तो दूर है, भापजा के पराजय के दिन आज से आरंभ हो गए हैं. बीजेपी को हराने के बाद ही देश को शांति मिलेगी.

बता दें कि लोकतांत्रिक जनता दल के प्रथम सम्मेलन में शरद यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे लेकिन फिलहाल पार्टी में किसी पद पर नहीं हैं. लेकिन पार्टी के पूरे कार्यक्रम के दौरान हर वक्त ने इनका जिक्र किया जिससे स्पष्ट होता है कि नई लोकतांत्रिक जनता दल इनके नेतृत्व में लोकतंत्र, महिला, दलितों, किसानों व के लिए लड़ाई लड़ेंगी. इस मौके पर देश भर से हजारों समर्थक व नेताओं ने हिस्सा लिया.

रिपोर्ट- रवि कुमार गुप्ता Read Also-बसपा के प्रदेश महासचिव की गोलीमार हत्या
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बसपा के प्रदेश महासचिव की गोलीमार हत्या

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बक्सर। बिहार के बक्सर में अपराधियों ने गोली मारकर बिहार यूनिट के बसपा के प्रदेश महासचिव खूंटी यादव की हत्या कर दी है. अपराधियों ने यादव के साथ मौजूद उनके बेटे यशवंत कुमार को भी गोली मार दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना देर शाम इटाढ़ी रेलवे गुमटी के पास घटी. अपराधी कितने बेखौफ हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बसपा नेता के बिल्कुल सर में सटाकर दो गोलियां मारी. यादव मुखिया भी थे.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बसपा नेता को तब गोली मारी गई, जब वो अपनी मेडिकल की दुकान बंद करने के बाद बेटे यशवंत के साथ लालगंज में अपने आवास पर लौट रहे थे. जैसे ही उनकी स्कार्पियो गाड़ी इटाढी रेलवे गुमटी के पास पहुंची, पहले से धात लगाकर बैठे लोगों ने उन पर गोली चलाना शुरू कर दिया. बसपा नेता की हत्या से गुस्साए बसपा समर्थकों ने सदर अस्पताल के सामने शव के साथ सड़क जाम कर दिया. इस दौरान लोग इतने आक्रोशित हो गए कि उन्होंने मौके पर पहुंची पुलिस को भी खदेड़ दिया. हमले में घायल बसपा नेता के बेटे को डॉक्टरों ने वाराणसी रेफर कर दिया है. उन्हें पुलिस सुरक्षा में वाराणसी भेजा गया.

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प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ याचिका पर कांग्रेस की नहीं चली

नई दिल्ली। कांग्रेस व जेडीएस ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति पर सवाल उठाया है. शनिवार को फ्लोर टेस्ट करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. कांग्रेस और जेडीएस ने याचिका में कहा है कि जूनियर विधायक को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करना संसदीय परम्परा के खिलाफ है. अब तक पार्टी लाइन से ऊपर उठकर वरिष्ठतम विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है. लेकिन एक दागदार जूनियर विधायक को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करना संसदीय परंपरा के अनुपयुक्त है.

कांग्रेस व जेडीएस की याचिका पर सुनवाई कर केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बने रहने पर फैसला सुनाया. कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे. बता दें कि कर्नाटक मुख्यमंत्री व बीजेपी नेता येदियुरप्पा शनिवार को शाम 4 बजे तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बहुमत साबित करने वाले हैं. इस प्रक्रिया के लिए प्रोटेम स्पीकर की भूमिका सर्वोरपरि रहेगी. प्रोटेम स्पीकर सभी विधायकों को शपथ दिलाता है और स्पीकर का चुनाव भी करवाता है. कर्नाटक में सरकार बनाने की सारी जिम्मेदारी प्रोटेम स्पीकर के फैसले पर निर्भर करती है.

कांग्रेस व जेडीएस प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति को लेकर गंभीर है. हालांकि कांग्रेस व जेडीएस की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल वजुभाई के फैसले को टालते हुए बीजेपी को 15 दिन के बजाय केवल एक दिन का समय बहुमत साबित करने के लिए दिया है. संभावना है कि आज शनिवार तक कर्नाटक में सरकार बनने पर बड़ा फैसला आएगा.

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बीजेपी को उखाड़ने शरद यादव की नई पार्टी ने बिगुल फूंका

नई दिल्ली. जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की नई पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल ने बिगुल फूंक दिया है. तालकटोरा स्टेडियम में शुक्रवार को पार्टी के पहले स्थापना सम्मेलन में शरद यादव ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि आगामी चुनाव में भाजपा को गंगा में बहा देंगे. साथ ही नीतीश कुमार को भी सजा देने की बात कही.
लोकतांत्रिक जनता दल के सम्मेलन में शरद यादव मुख्य अतिथि के रूप में कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार आदि राज्य के लोगों का स्वागत किए. उन्होंने कहा कि दलितों व किसानों पर बीजेपी अत्याचार कर रही है. अपने फायदे के लिए नोटबंदी, जीएसटी जैसे योजना बना जनता को लूटने का काम कर रही है. लेकिन 2019 में हिसाब चूकता कर दिया जाएगा. बीजेपी का विनाश संभव है.
कर्नाटक में सरकार बनाने के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि बीजेपी अलोकतांत्रिक व्यवस्था को बढ़ावा देकर काम कर रही है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाकर लोकतंत्र बचाया है. कांग्रेस जेडीएस फ्लोर टेस्ट में पास हो कर बीजेपी को पटखनी देगी. इस मौके पर बिहार में नौ बार विधायक रह चुके रमई राम ने हिस्सा लेकर दलितों को एकजुट होने के लिए कहा और बीजेपी को एक भी वोट ना देने की अपील की. उल्लेखनीय है कि नई पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल शरद यादव के नेतृत्व में काम करेगी और दलित, आदिवासी, महिला व संविधान के लिए लङाई लङेगी. इस दौरान हजारों की तादाद में कई राज्यों के समर्थक जुटे थे.
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बहुजन भारत के निर्माण का सबसे आसान और कारगर उपाय

PC- Hindustan Times

क्या आपको पशु पक्षियों या पेड़ पौधों में ऐसी प्रजातियों का पता है जो अपने ही बच्चों के लिए कब्र खोदती है? या अपने ही बच्चों का खून निकालकर अपने दुश्मनों को पिलाती है? मैंने तो आजतक ऐसा कोई जानवर या पक्षी या पेड़ नहीं देखा जो अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने की योजना बनाकर बड़े पैमाने पर उसका पालन करता है. लेकिन इंसानों में आपको ऐसे लोग जरुर मिलेंगे. विशेष रूप से भारत में और वो भी बहुजन समाज से आने वाले लोगों में.

भारत के बहुजन अर्थात भारत के ओबीसी दलित आदिवासी मुसलमान सिख इसाई इत्यादि में एक भयानक किस्म की जहालत छाई हुई है. ये जातियां जान बूझकर अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करने का भारी प्रयास बड़े पैमाने पर कर रही हैं. एक गाँव में काडर केम्प की ट्रेनिंग में कुछ बहुजनों से बात हो रही थी. यादव, दलित, मुसलमान और आदिवासी युवाओं से बातचीत हो रही थी. मैंने एक यादव युवक से पूछा कि आप क्या करते हैं? वो बोला कि मैंने मोबाइल की दूकान खोली थी वो नहीं चली, अब मैं बेरोजगार हूँ घर पर मोहल्ले में सब लोग मजाक उड़ाते हैं बीबी भी रोज ताने मारती है कि कमाकर लाओ.

मुसलमान मित्रों से पूछा कि आप क्या कर रहे हैं? वे बोले कि हमें नौकरी इत्यादि तो मिलने से रही पढ़ लिखकर कोई फायदा नहीं तो हम भी सब्जियों का बिजनेस कर रहे हैं लेकिन हमारी दुकानों से खरीदने से लोग कतराते हैं हमें मार्केट में बहुत दिक्कत होती है.

फिर मैंने दलितों से पूछा कि आपके क्या हाल हैं? वे बोले कि हमारी जाति के कारण हम चाय समोसे की दूकान या कपड़े की दूकान या कोई अन्य धंधा नहीं कर सकते ऊँची जात के हिन्दू तो छोडिये बहुजन समाज के लोग भी हमारी दूकान पर नहीं आते, ऐसे में हम कौनसा बिजनेस करें? हम गरीब और बेरोजगार ही मरेंगे ऐसा लगता है.

फिर मैंने आदिवासियों से पूछा कि भाई आपकी क्या कहानी है? वे बोले कि भैया हमारे लोग महुआ खरीदकर बनियों महाजनों को बहुत सस्ते में बेचते हैं और उन्ही से महंगे में खरीदते हैं इस तरह गरीब होते जाते हैं और बर्बाद हो रहे हैं. आदिवासी युवाओं की कोई दूकान या व्यवसाय नहीं चलने दिया जाता पूरा बनिया सिन्धी और जैनों का गिरोह है जो किसी भी बहुजन को पनपने नहीं देता.

ये सुनकर मैंने उन सभी से पूछा कि आपके गाँव में ब्राह्मण,बनियों, सिंधियों, जैनों के कितने घर हैं? वे बोले कि मुश्किल से तीस या चालीस घर होंगे. मैंने फिर पूछा कि बहुजनों के कितने घर हैं? वे बोले कि बहुजनों में ओबीसी दलित आदिवासी और मुसलमान सब मिलाकर दो सौ से ज्यादा घर हैं.

मैंने फिर पूछा कि इसका मतलब कुछ समझ में आया आपको? वे बोले कुछ कुछ समझ में आया …

मैंने विस्तार से समझाते हुए उन्हें कहा कि आप लोग अपने ही बच्चों के गुनाहगार हो आपके साथ जो गुजर रही है वो आपके माता पिता और पिछली पीढी के की गलतियों का नतीजा है. और अभी आप जो गलतियां कर रहे हो उसका फल आपके ही बच्चों को भुगतना पड़ेगा.

वे बोले कि भैया कुछ विस्तार से समझाइये और बताइए कि हम ये हालत कैसे बदल सकते हैं?

मैंने बताया कि आपके बहुजन समाज के यहाँ कम से कम दो हजार लोग हैं वे अपना खून पसीना एक करके जो कुछ कमाते हैं उसे ब्राह्मण, बनियों, सिंधियों और जैनों की दुकानों से व्यापर करके लुटा देते हो. ये सवर्ण लोग आपसे नफरत करते हैं आपको इंसान भी नहीं समझते.

ये सवर्ण व्यापारी आपके पैसों से मुनाफा कमाकर आपको गुलाम बनाने वाले धार्मिक बाबाओं और धार्मिक गुंडों को चंदा देते हैं उसी से धार्मिक गुंडों की राजनीति चलती है और वे आपके बच्चों को अंधविश्वास सिखाते हैं, आपकी औरतों को अन्धविश्वास सिखाते हैं. इसी पैसे से वे मीडिया मेनेज करते हैं इसी पैसे से वे आरक्षण खत्म करने वाले और एस सी / एस टी एक्ट को खत्म करने वाले आन्दोलन चलाते हैं.

ये सुनते ही उनका मुंह खुला का खुला रह गया. वे एकदूसरे का मुंह देखने लगे.

मैंने फिर पूछा कि आपके खुद के परिवार के लोग कपड़ा, बर्तन, स्टेशनरी, सब्जी भाजी दूध तेल शकर इत्यादि कहाँ से खरीदते हैं? क्या आप बहुजनों की दूकान से खरीदते हैं?

वे बोले नहीं हम तो सभी सवर्णों की दूकान से खरीदते हैं.

मैंने फिर पूछा कि भाइयों जरा गौर करो और बताओ कि अगर आप खुद अपने परिवारों को बहुजनों की दूकान से सामान खरीदना नहीं सिखा पाए हो तो गलती किसकी है? आपका खुदका व्यापार या दूकान आपके ही गाँव में नहीं चलता तो गलती किसकी है? बहुजन जातियों के लोग अपने ही बहुजन युवाओं की दूकान से माल नहीं खरीदते तो गलती किसकी है? ऐसे में आप सब गरीब हो बेरोजगार और कमजोर हो तो अब इसमें गलती किसकी है?

वे ये बात समझ गये.

अब ये बात पूरे देश के बहुजनों को समझनी चाहिए.

अगर भारत के बहुजन ये तय कर लें कि वे सिर्फ ओबीसी दलित आदिवासी और अल्पसंख्यकों की दुकानों से ही खरीददारी करेंगे और उन्ही के व्यापार को मजबूत बनायेंगे तो वे भारत के सबसे शक्तिशाली समाज के रूप में उभरना शुरू हो जायेंगे. बहुजनों को अब समाज जीवन के सभी आयाम जैसे धर्म, सँस्कृति, भाषा, साहित्य, राजनीति, व्यापार इत्यादि सब अपने हाथ मे लेना शुरू करना चाहिए. अपने ही बहुजन नेटवर्क में एकदूसरे की मदद करते हुए समर्थ बहुजन भारत का निर्माण करना चाहिए. विशेष रूप से छोटे उद्योग धंधों और स्थानीय व्यापार में पकड़ बनानी चाहिए. मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन सूअर पालन इत्यादि क्षेत्रों में बहुजनों को तेजी से अपना अधिकार बनाना चाहिये. इससे तीन फायदे होंगे.

पहला फायदा ये कि बहुजनों को पक्की आजीविका और रोजगार मिलेगा और बहुजन समाज मे उद्यमियों की संख्या बढ़ेगी.

दूसरा फायदा ये कि बहुजनों को दैनिक भोजन में हाई प्रोटीन भोजन मिलेगा जिसकी बहुजन बच्चों और स्त्रियों को सख्त जरूरत है.

तीसरा फायदा ये कि बहुजनों का पैसा बहुजनों के पास ही रहेगा। बहुजनों से नफरत करने वाले सवर्ण व्यापारियों से व्यापार धीरे धीरे बन्द होता जाएगा. इससे बहुजन जातियों को इंसान समझने वाले बहुजन व्यापारियों की संख्या बढ़ेगी. इस कदम से भारत के मौजूद धार्मिक गुंडों की आर्थिक नसबंदी हो जाएगी.

जिस दिन 85% बहुजनों ने यह तय कर लिया कि उन्हें सिर्फ बहुजन व्यापारियों से ही माल खरीदना है, उसी दिन भारत मे इतिहास की सबसे बड़ी क्रांति बिना शोर मचाये और बिना खून बहाए अपने आप हो जाएगी. ओबीसी दलित आदिवासी और मुसलमान सिख इसाई आदि मिलकर एकदूसरे को व्यापर करने में मदद करें. इन समुदायों के आम जन इन्ही जातियों समुदायों से खरीददारी करें अपने गरीब समाज का पैसा अपने पास रहने दें. जो समाज आपसे नफरत करता है उनकी दूकान से एक रूपये का भी सामान मत खरीदिये.

ये एक निर्णायक कदम होगा. धीरे धीरे इन व्यापारियों की आर्थिक नसबंदी शुरू होगी और इनके धार्मिक, राजनीतिक आकाओं तक भी बात पहुँच जायेगी. उनकी अक्ल भी ठिकाने आएगी. आपको यकीन नहीं होता तो ये अपने गाँव मुहल्लों में करके देखिये. जो व्यापारी अब तक आपको ठगते आये हैं, जो महाजन आपको कर्ज में दबाकर चूसते आये हैं वे एक तीन से छः महीने के भीतर आपके पैर छूने लगेंगे. अगर आपको बहुजन धर्म, बहुजन संस्कृति और बहुजन राजनीति को स्थापित करना है तो उसका रास्ता कोरी वैचारिक बकवास से नहीं निकलेगा. जमीन पर जहां दो रूपये पांच रूपये का सामन खरीदा बेचा जाता है वहां पर आपको बहुजन एजेंडा लागू करना होगा.

जिस दिन बहुजन समाज के लोग एक रुपया भी खर्च करने के पहले इस तरह सोचना शुरू कर देंगे उस दिन भारत के सभी गरीबों के लिए एक निर्णायक बदलाव आना शुरू हो जाएगा. ये एकदम आसान काम है, अपने गली मुहल्ले में लोगों को इकट्ठा कीजिये और समझाइये. इसके लिए कोई बड़ा आन्दोलन, नेतागिरी धरना प्रदर्शन या रथयात्रा की जरूरत नहीं है.

– संजय श्रमण (sanjayjothe@gmail.com)

कर्नाटक के नाटक पर भाजपा पर बरसीं मायावती

कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर भाजपा द्वारा किए जा रहे जोड़-तोड़ पर बसपा प्रमुख मायावती ने हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में जो हो रहा है वह सब बीजेपी व आर.एस.एस द्वारा बाबासाहेब के बनाए संविधान को कमजोर करने व खत्म करने की साजिश है.

बसपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस- जे.डी.एस व बी.एस.पी के विधायकों की संख्या पूर्ण बहुमत की संख्या थी, लेकिन बहुमत से दूर होते हुए भी येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी गई. यह निंदनीय है. इससे साफ हो जाता है कि भाजपा और आर.एसएस न तो अपने देश के संविधान में और न ही इसमें निहित लोकतान्त्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है. यह देशहित में शुभ संकेत नहीं है.

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्यपालों की भूमिका पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि माननीय राज्यपालों द्वारा ज्यादार मामलों में केन्द्र सरकार के राजनीतिक स्वार्थ के हिसाब से ही फैसले लिए जाते रहने से राजभवनों की गरिमा खत्म हो रही है. यह देश के लोकतन्त्र के लिए भी खतरनाक हो रहा है. इसका शिकार उत्तर प्रदेश में कई बार बसपा भी हुई है.

इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय से अपील करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि वर्तमान हालात में अब हमारी पार्टी माननीय सुप्रीम कोर्ट से ही यह विशेष आग्रह करती है कि वह अपने देश के संविधान को व इसमें निहित लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने में अहम भूमिका निभाए.

मायावती ने 17 मई को जारी बयान में यह बातें कहीं. इसके बाद दूसरे दिन ही सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को 19 मई की शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट करने को कहा है. इधर दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीएसपी प्रमुख मायावती के बयान का समर्थन किया है. ममता बनर्जी ने ट्विट कर कहा है कि, ‘मैं मायावती जी के विचारों का समर्थन करती हूं. हमें अपने संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहब अंबेडकर को पूर्ण सम्मान देना चाहिए.’

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येदियुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत फैसले लेने से रोका

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को नीतिगत फैसले लेने से रोक दिया है. शुक्रवार को कांग्रेस-जेडीएस की सुनवाई के बाद बीजेपी को झटका लगा है. सीएम शपथ ग्रहण करते ही येदियुरप्पा ने वरिष्ठ आईएस व आईपीएस अधकियारियों का तबादला करा दिया था. साथ ही किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ करने का ऐलान भी किया था.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमर कुमार पांडेय को एडीजीपी, खुफिया नियुक्त किया गया. भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो में पुलिस अधीक्षक एस गिरीश को बेंगलुरू उत्तर- पूर्व डिविजन का डीसीपी बनाया गया. अधिकारियों के तबादले पर कांग्रेस ने असुरक्षा की बात उठाई थी.

आईएस व आईपीएस अधिकारियों के तबादले पर कांग्रेस व जेडीएस की ओर से आपत्ति जताई गई थीं. साथ ही कहा था कि अभी तक बहुमत साबित नहीं हो पाया है और ना ही मंत्री मंडल का गठन हुआ, ऐसे में येदियुरप्पा का नीतिगत फैसला लेना कितना सही है. इन तमाम प्रकार की बातों को सुनने के बाद भी येदियुरप्पा रूके नहीं तो सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर कह दिया कि वे नीतिगत फैसले नहीं लेंगे. बता दें कि कल 19 मई को फ्लोर टेस्ट के बाद कर्नाटक में नई सरकार बनाने का फैसला हो जाएगा.

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‘येदियुरप्पा एक दिन के सीएम रहेंगे’, कांग्रेस में खुशी की लहर!

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद कांग्रेस में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. कांग्रेस व जेडीएस कार्यकर्ताओं के चेहरे पर मुस्काल देखने को मिल रही है. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि, लोकतंत्र की जीत हुई है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.

शुक्रवार को करीब 10.30 बजे से सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया. इस फैसले के अनुसार कल शाम 04 बजे कांग्रेस-जेडीएस को फ्लोर टेस्ट देना होगा. इस फैसले से कांग्रेस का उत्साह चौगुना हो गया है. इनकी खुशी व सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देख लग रहा है कि कर्नाटक में बड़ा बदलाव आने वाला है.

एक दिन के सीएम येदियुरप्पा…

जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर लिखा कि संविधान की जीत, लोकतंत्र बरकरार और बीएस येदियुरप्पा एक दिन के सीएम रहेंगे. संविधान ने एक अवैधानिक मुख्यमंत्री को नकार दिया है. साथ ही कर्नाटक के राज्यपाल के असंवैधानिक फैसले को भी नकारा है.

जबकि वहीं बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बीजेपी बहुमत साबित करेगी और हमें विश्‍वास विधानसभा में फ्लोर टेस्‍ट करेंगे पास. इसके अलावा येदियुरप्पा का दावा है कि वे बहुमत साबित कर सीएम बने रहेंगे.

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कर्नाटक में कल कांग्रेस-जेडीएस फ्लोर टेस्ट, पलट सकती है बीजेपी की बाजी

नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर पिछले तीन दिनों से चल रहा ड्रामा कल खत्म हो सकता है. येदियुरप्पा द्वारा सीएम पद की शपथ के बाद कांग्रेस-जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें कांग्रेस को राहत की सांस मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा में कल शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराए जाने के आदेश पर मुहर लगा दी है. प्रोटेम स्पीकर आरवी देशपांडे पूरे टेस्ट पर नज़र रखेंगे. कल फ्लोर टेस्ट के बाद कर्नाटक में सरकार बनाने का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा. साथ ही कांग्रेस व जेडीएस ने अपने विधायकों के सुरक्षा की गुहार लगाई है.

शुक्रवार को प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस और जेडीएस कल फ्लोर टेस्ट कराए जाने के लिए तैयार है. लेकिन दोनों पार्टियों ने अपने विधायकों की सुरक्षा की मांग की है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस-जेडीएस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दोनों पार्टियों की तरफ से कल ही फ्लोर टेस्ट करवाने की बात पर सहमत हुए तब फैसले पर मुहर लगी.

कल कांग्रेस-जेडीएस फ्लोर टेस्ट में पास हो जाती है तो बीजेपी को झटका लग सकता है. हालांकि येदियुरप्पा बार-बार कह रहे हैं कि उनके पास विधायक है और वे बहुमत साबित करेंगे. लेकिन फ्लोर टेस्ट के कारण बीजेपी पर संकट मंडराता दिख रहा है. कांग्रेस व जेडीएस विधायकों को धमकी मिल रही है जिसको लेकर विधायक डरे हुए हैं. हालांकि कांग्रेस व जेडीएस अपने विधायकों को सुरक्षित स्थान पर रखी है. खबर लिखने तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई जारी थी.

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कांग्रेस विधायकों के चार्टर्ड प्लेन को उड़ान भरने से रोका, मिल रही धमकी

नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकारी एजेंसियों द्वारा धमकी मिलने व चार्टर्ड प्लेन को उड़ान भरने से रोकने पर बवाल मचा है. विधायकों के गायब होने से डरी कांग्रेस दुसरे सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए चार्टर्ड प्लेन से ले जाना चाहती थी लेकिन डीजीसीए ने इसे रोक दिया जिससे कि बस के सहारे विधायकों को शिफ्ट किया गया.

शुक्रवार की सुबह सूत्रों द्वारा प्राप्ता जानकारी के अनुसार विधायकों को टूट से बचाने के लिए कांग्रेस व जेडीएस अपने विधायकों को बेंगलुरु से हैदराबाद ले गई है. हालांकि इससे पहले कांग्रेस अपने विधायकों को कोच्चि (केरल) ले जाने की तैयारी में थी. तीन चार्टर्ड प्लेन से विधायकों को कोच्चि ले जाने की प्लानिंग की गई थी लेकिन DGCA की अनुमित नहीं मिलने के कारण प्लान रद्द करना पड़ा.

सरकारी एजेंसी से मिली धमकी

इतना ही नहीं हैदराबाद के कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने सरकारी एजेंसियों पर आरोप धमकी देने का आरोप लगाया है. सीएम शपथ ग्रहण करने के बाद ही बीजेपी की ओर से कई बड़े पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया था. इसको लेकर भी कांग्रेस-जेडीएस ने आवाज उठाई थी. फिलहाल कांग्रेस अपने विधायकों को हर कीमत पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयारी में जुटी है.

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कांग्रेस का एक और विधायक गायब, बाकि को रिसॉर्ट में छिपाया!

बेंगलुरू। कांग्रेस का एक और विधायक गायब हो गया है. कांग्रेस की ओर से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा. इस तरह से कांग्रेस के तीन विधायकों के गायब होने की खबर सामने आ चुकी है. एक कर गायब होते विधायक कांग्रेस-जेडीएस की नींद उड़ा दिए हैं. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस विधायक रमेश जरीखोली विधान सभा में धरने पर बैठे थे वहीं से गायब हो गए. कहा जा रहा है कि वह वापस उस रेसॉर्ट में नहीं लौटे जहां बाकी कांग्रेस विधायकों को रखा गया है.

एयरपोर्ट पर आखिरी बार दिखे

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस विधायक धरना पर बैठे थे. इसी बीच एक विधायक धीरे से खिसक गया. बाद में नजर पड़ी और खोजने लगे तो पता नहीं चल पाया. लेकिन इससे पहले बुधवार को गायब दो विधायकों को एयरपोर्ट पर देखा गया था.

दो विधायक गायब

इससे पहले भी कांग्रेस के दो विधायक गायब हो चुके हैं. विधायक का नाम आनंद सिंह है, जो विजयनगर से विधायक हैं. दूसरे विधायक प्रतापगौडा हैं, जो मसली विधानसभा सीट से चुने गए हैं.  हालांकि विधायकों के गायब होने पर कई प्रकार की बातें कहीं जा रही है. हालांकि इसको लेकर  कांग्रेस नेता ने कहा था कि हमारे विधायक सुरक्षित हमारे पास हैं. अफवाह फैलाई जा रही है.

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प. बंगाल पंचायत चुनाव में ममता राज, मोदी मंत्र बेअसर!

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के आगे सब फेल हैं. पंचायत चुनाव में अबतक के परिणामों से बीजेपी के साथ अन्य दलों का सुपड़ा साफ है. एक तरफ देश भर में मोदी लहर की बात कही जा रही है तो वहीं पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव से पता चलता है कि मोदी लहर गांव तक पहुंच नहीं पाई है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के वोटों की गिनती गुरूवार सुबह 8 बजे आरंभ हो गई. अब तक के नतीजों में टीएमसी काफी आगे चल रही है. इतनी आगे की दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है. जिला परिषद व पंचायत समिति की सीटों पर केवल टीएमसी ही बनी हुई है तो वहीं ग्राम पंचायत में बाकि दलों को छिटपुट सीट मिलते दिखे.

अबतक के आंकड़ें

मीडिया में जारी रिपोर्ट के अनुसार ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का प्रदर्शन सबसे बेहतर दिख रहा है. सूत्रों के अनुसार टीएमसी ने जिला परिषद की 280 व पंचायत समिति की 149 सीटों पर अकेले कब्जा जमाए रखा है यहां पर बीजेपी व बाकि दलों के हिस्से में कुछ नहीं मिला. इसके अलावा ग्राम पंचायत में टीएमसी को 1575, बीजेपी 136, एलएफ 10, कांग्रेस 08 व अन्य को 28 सीट मिली है. ध्यान दें कि फाइनल रिपोर्ट में बदलाव हो सकती है.

चुनाव में 13 की मौत

हालांकि मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के बाद भी व्यापक तौर पर हिंसा की घटना घटी जिसमें कि राज्य के कई इलाकों में हिंसक घटनाएं 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 56 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे. हिंसा के बाद राज्य के 20 जिलों में से 19 जिलों के 568 बूथों पर बुधवार को दोबारा मतदान कराया गया.

केंद्र ने मांगी पूरी रिपोर्ट

पंचायत चुनाव में हुई हिंसा की केंद्र सरकार ने रिपोर्ट मांगी थी. हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने रिपोर्ट सौंपी लेकिन गृह मंत्रालय ने उसे अधूरा बताते हुए पूरी रिपोर्ट मांगी है. इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

इन जगहों पर पुनर्मतदान

आयोग की जानकारी के अनुसार लगभग 70 फीसद मतदान दर्ज किया गया. इसके अलावा हिंसा व धांधली के कारण हुगली में 10, पश्चिम मिदनापुर में 28, कूचबिहार में 52, मुर्शिदाबाद में 63, नदिया में 60, उत्तरी 24 परगना में 59, मालदा में 55, उत्तर दिनाजपुर में 73 और दक्षिण 24 परगना में 26 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट करेगी समलैंगिकता पर सुनवाई

प्रतिकात्मक फोटोः साभार-गूगल इमेज

नई दिल्ली। समलैंकिता मसले को  लेकर वैज्ञानिकों व छात्रों द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गई है. गुरुवार को मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले पर कोई फैसला लेगी. समलैंगिकता को अपराध मुक्त करने पर विचार किया जाएगा.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में आईआईटी से जुड़े बीसे से अधिक स्टूडेंट्स व वैज्ञानिकों द्वारा आईपीसी की धारा 377 को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. इनका कहना है कि समलैंगिकता अपराध नहीं है इसलिए इसे अपराध की श्रेणी से बाहर निकलाने पर कोर्ट को विचार करना चाहिए. कोर्ट समलैंगिकता को अपराध मानने के फैसले को रद्द करने पर सुनवाई करेगा.

याचिका दायर करने वालों का कहना है कि समलैंगिकता कोई अपराध नहीं है. हम किसी के जीवन की आजादी नहीं छिन सकते हैं. हमें जीवन साथी चुनने के लिए पूरी आजादी होनी चाहिए. हालांकि समलैंगिकता को लेकर भारत में कई तरह के विवाद हैं.

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दुल्हन को साइकिल पर लेकर निकले तेजप्रताप, वायरल

PC- hindustantimes

पटना। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे को कृष्ण रूप और शंख व बांसुरी बजाते तो देखा था लेकिन अभी उनका एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें वह अपनी नई नवेली दुल्हन को साइकिल पर लेकर जाते दिख रहे हैं.

जिय हो बिहार के लाला…

ये साइकिल वाली फोटो किसी और ने नहीं बल्कि उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव ने जैसे ही इंस्टाग्राम पर पोस्ट की लोगों की लाइक व कमेंट आनी शुरू हो गई. बिहारी अंदाज बयां में फैंस ने जिय हो, क्या बात है, शानदार-जबरजस्त, मस्त-झक्कास, जिय हो बिहार के लाला… लिखकर प्यार जाहिर किया.

बता दें कि लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव व ऐश्वर्या राय ने 12 मई को पटना में शादी की. इस शादी में आने के लिए लालू प्रसाद यादव को तीन दिनों के लिए जेल से बाहर निकाला गया था. ऐश्वर्या बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की बेटी हैं. राजनीतिक परिवार की शादी पूरे धूम-धाम के साथ 12 मई को पटना में हुई. हालांकि भगदड़ मच जाने से थोड़ी किरकिरी हुई. इस दौरान राबड़ी देवी, मिसा भारती समेत कई हस्तियों ने बॉलीवुड और भोजपुरी गानों पर डांस किया. फोटो को फेसबुक व ट्विटर पर भी जमकर शेयर किया जा रहा है.

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कर्नाटकः भाजपा ने बसपा विधायक से समर्थन मांगा, विधायक ने दिया करारा जवाब

कर्नाटक का नाटक तीसरे दिन भी लगातार जारी है. भाजपा नेता येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. राज्यपाल ने येदियुरप्पा को सदन में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दे दिया है. ऐसे में 104 सीटों वाली भाजपा बहुमत के लिए जरूरी 9 सीटों का जुगाड़ करने में जुटी हुई है. इसके लिए भाजपा कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों पर डोरे डाल रही है. कांग्रेस और जेडीएस का आरोप है कि उसके विधायकों को पैसों से लेकर पद तक का लालच दिया जा रहा है. समर्थन के लिए भाजपा नेताओं ने बसपा के एकमात्र विधायक एन. महेश से भी संपर्क किया. तब बसपा विधायक ने ऐसा जवाब दिया, जिसे सुनकर भाजपा के पदाधिकारी चलते बनें.

एन. महेश के मुताबिक कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क किया. महेश का कहना है कि उन्हें भाजपा की सरकार को समर्थन देने के लिए कहा गया. पहले तो महेश ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उनसे लगातार संपर्क किया जाने लगा तो महेश ने भाजपा नेताओं को समर्थन के लिए बसपा प्रमुख मायावती से संपर्क करने को कह दिया. इतना सुनते ही भाजपा के पदाधिकारी चुपचाप निकल लिए.

दरअसल भाजपा के पदाधिकारियों के लिए मायावती से बात करने के बारे में सोचना भी आसान नहीं था. फिलहाल भाजपा के लिए जो मुश्किल खड़ी हुई है, वह मायावती के कारण ही है. मायावती ने त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और जेडीएस सुप्रीमों एच. डी देवगौड़ा से साथ आने का सुझाव दिया था. इसके बाद तुरंत कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन की घोषणा की. इसी के बाद कर्नाटक का राजनीतिक परिदृश्य अचानक से बदल गया. जो भाजपा आराम से सदन में बहुमत के लिए जरूरी सीटें जीतने का दावा कर रही थी, वो मायावती के मायाजाल में उलझ गई है.

मायावती के दखल के बाद मतगणना पूरा होने के पहले ही कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद कर्नाटक का सियासी पारा चढ़ गया. राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया. कांग्रेस और जेडीएस इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और गुरुवार  रात को ही इस मामले में सुनवाई हुई.

भाजपा नेताओं द्वारा संपर्क किए जाने पर महेश का कहना है कि मैं पूरी मजबूती के साथ जद (एस) के साथ हूं. महेश चामराजनगर जिले के कोल्लेगल विधानसभा से निर्वाचित हुए हैं.

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कर्नाटक राज्यपाल का बीजेपी कनेक्शन कितना सच?

नई दिल्ली। कर्नाटक में राज्यपाल का बीजेपी के साथ दोस्ती निभाने की बात सोशल मीडिया पर शोक मचा रही थी. कुल मिलाकर लोगों का कहना था वो बीजेपी का साथ देंगे. और आखिरकार ऐसा ही हुआ…

कर्नाटक राज्यपाल वजु भाई के साथ बीजेपी को जोड़कर कई तरह की बातें सामने आई है. इन बातों से साफ हो जाता है कि वजु भाई का आरएसएस व बीजेपी के साथ बरसो पुराना रिश्ता है. कर्नाटक में सरकार बनाने का फैसला राज्यपाल के हाथों था और गवर्नर ने भाजपा को पहले मौका देकर कयास लगा रहे लोगों की बातों को सही साबिक कर दिया.

क्या कहते हैं जानकार

बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वजु भाई संघ के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं, उनके पूरे करियर में कई उदाहरण ऐसे हैं जहां उन्होंने पार्टी के हितों को तरजीह दी है. ये अच्छी बात है कि वे राज्यपाल हैं, संवैधानिक पद पर हैं, लेकिन वो करेंगे वही जो भारतीय जनता पार्टी चाहेगी. इस बार तो सबसे बड़ी पार्टी को बुलाने की परंपरा का हवाला भी साथ में है.

इतना ही नहीं इससे पहले 2002 में वजुभाई ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राजकोट विधानसभा की अपनी सीट छोड़ी थी. फलस्वरूप 2014 में मोदी जी ने ही उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाया.

गौर करने वाली बातें

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व कानून विशेषज्ञ राम जेठमलानी ने वजू भाई के फैसले को बेवकूफी भरा बताया और असंवैधानिक करार दिया. इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की है.

बुधवार की शाम को कांग्रेस-जेडीएस की अगुवाई कर रहे कुमारस्वामी ने 117 विधायकों की समर्थन सूची राज्यपाल को सौंप दी थी. तो जानकारों का मानना है कि सरकार बनाने का पहला निमंत्रण कांग्रेस-जेडीएस को मिलना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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बीजेपी को रोकने कर्नाटक में उतरे ‘राम’

PC-zeenews
नई दिल्ली। कर्नाटक गवर्नर के फैसले के बाद बीजेपी के सीएम उम्मीदवार येद्दियुरप्पा ने शपथ ग्रहण किया. इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता व कानून विशेषज्ञ राम जेठमलानी ने राज्यपाल के फैसले को बेवकूफी भरा बताया. साथ ही कहा कि ऐसे कैसे राज्यपाल ने फैसला ले लिया. एएनआई से बात करते हुए जेठमलानी ने राज्यपाल के फैसले को “संवैधानिक शक्ति का घोर दुरुपयोग” बताया. साथ ही कहा,
“बीजेपी ने गवर्नर से ऐसा क्या कहा कि उन्होंने यह बेवकूफी भरा फैसला ले लिया? गवर्नर का यह फैसला भ्रष्टाचार को खुलेतौर पर बुलावा देना है.”

दायर कर दी याचिका

इतना ही नहीं राम जेठमलानी ने सुप्रमी कोर्ट में याचिका दायर कर दी है. इससे बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई के लिए दायर की गई जेठमलानी की याचिका पर विचार किया और कहा कि आज मामले की सुनवाई करने वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ शुक्रवार को इस पर सुनवाई करेगी. बता दें कि बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए पंद्रह दिनों का समय राज्यपाल की ओर से मिला है. इन 15 दिनों के अंदर बीजेपी को विश्वास मत हासिल करना होगा. इसके लिए बीजेपी के पास पर्याप्त समय है लेकिन दुसरी ओर कांग्रेस-जेडीएस असुरक्षा के डर से अपने विधायकों को छुपाने में लगी है. जेठमलानी का सामने आना और याचिका दायर करना नई मुसीबत खड़ा कर दिया है. Read also-जज, गवर्नर…सब पीएम से डरे हुए हैंः राहुल गांधी
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कर्नाटक में बसपा विधायक एन. महेश की पूरी हिस्ट्री

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की अगुआई वाली बहुजन समाज पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक सीट जीतकर दक्षिण भारत में फिर से अपनी दस्तक दे दी है. बसपा के प्रत्याशी एन. महेश ने चामराजनगर जिले के कोल्लेगल विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल कर दक्षिण में बसपा का परचम बुलंद किया है. बसपा उम्मीदवार ने कांग्रेस उम्मीदवार ए.आर. कृष्णमूर्ति को 19,454 मतों के अंतर से पराजित किया. इस सीट पर बसपा को 71792 वोट मिले. भाजपा इस सीट पर तीसरे नंबर की पार्टी रही. महेश कर्नाटक में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.

इससे पहले राज्‍य में आखिरी बार बसपा 1994 में जीती थी जब उसने बीदर सीट पर कब्‍जा किया था. बसपा के लिए वर्तमान चुनाव में जीती गई कोल्‍लेगल की सीट इस लिहाज से भी अहम है कि यहां पर 1 मई को पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार करने आए थे, लेकिन महेश की मेहनत के आगे मोदी का प्रचार भी काम नहीं आया, और महेश ने इस सीट को जीतकर दक्षिण में बसपा को बड़ी संजीवनी दे दी.

कोल्लेगल क्षेत्र में महेश की मेहनत और लोकप्रियता को देखते हुए स्थानीय लोग भी यह मान रहे थे कि महेश यह सीट आराम से जीत लेंगे. यह बात भाजपा को भी यह पता था. यही वजह है कि भाजपा ने महेश को लुभाने की भी कोशिश की. उन्हें हर तरह से ऑफर देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को कहा गया. महेश खुद बताते हैं, “बीजेपी हमें लुभाने की कोशिश कर रही थी क्‍योंकि उन्‍हें पता था कि हम चमराजनगर की यह सीट जीत जाएंगे और पुराने मैसूर में जेडीएस की मदद कर उनकी सीट को नुकसान पहुंचाएंगे.”

लेकिन पक्के अम्बेडकरवादी महेश ने पैतरा नहीं बदला बल्कि और मजबूती से चुनाव की तैयारियों में जुट गए. यह महेश के ऊपर अम्बेडकरवादी विचारधारा का प्रभाव रहा कि महेश ने लगातार संघर्ष किया लेकिन पार्टी का दामन नहीं छोड़ा. यह भी नहीं है कि महेश पहली बार में ही चुनाव जीत गए, बल्कि वह सालों तक लगे रहे. महेश कहते हैं-“मैंने 2004 में चौथे नंबर के प्रत्‍याशी की तरह शुरुआत की थी, 2009 में तीसरे नंबर पर रहा, 2013 में दूसरे और अब आखिरकार मैं जीत गया. यह एक लड़ाई है जो हम दलितों ने बसपा के लिए इस राज्‍य में लड़ी है. हम खुश हैं कि बहनजी और देवेगौड़ा जी ने मिलकर दो समुदायों को बसपा-सपा की तरह जोड़ा.”

दूसरी ओर कर्नाटक में चल रहे नाटक के बीच 7 सीटों की जोड़-तोड़ में लगी भाजपा ने बसपा विधायक महेश से भी संपर्क किया. इनलोगों ने महेश से भी भाजपा के लिए समर्थन मांगा. इस पर महेश ने यह कहते हुए भाजपा नेताओं का मुंह बंद करवा दिया कि हमारी नेता मायावती जी से संपर्क करो.

महेश अम्बेडकरी-फुले विचारधारा के पक्के आदमी हैं. चाहे वाल्मीकि जयंती हो, अम्बेडकर जयंती या फिर अन्य बहुजन संतों-महापुरुषों की जयंती, महेश सोशल मीडिया के जरिए शुभकामना देना नहीं भूलते. महेश के फेसबुक के कवर पेज पर चस्पा तथागत बुद्ध की तस्वीर महेश के व्यक्तित्व के एक और पहलू को उजागर करता है. फिलहाल महेश कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनने की स्थिति में मंत्रीपद की आस लगाए बैठे हैं. महेश की जीत दक्षिण भारत में बसपा और अम्बेडकरवाद दोनों के लिए बड़ी खबर है.

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डरी कांग्रेस-जेडीएस, विधायकों को छुपाने के लिए ढूंढ रही जगह

PC- hindustantimes

नई दिल्ली। भले ही येदियुरप्पा ने कर्नाटक मुख्यमंत्री की शपथ ले ली है लेकिन बीजेपी ने बहुमत साबित नहीं किया है. ऐसे में बीजेपी की ओर से कोई भी कदम उठाया जा सकता है. इस डर को भांपकर कांग्रेस-जेडीएस अपने विधायकों को छुपाने के लिए जगह तलाश कर रही है. कांग्रेस-जेडीएस असुरक्षा को लेकर सवाल कर रही है. इनको डर सता रहा है कि कहीं इनके विधायक गायब ना हो जाएं.

गुरूवार को सूत्रों के हवाले मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस-जेडीएस अपने विधायकों को किसी हाल में खोना नहीं चाहती. दोनों पार्टियां अपने विधायकों को  ईगलटन रिज़ॉर्ट में रखी थी लेकिन इनको यहां पर असुरक्षा महसूस हो रही है. हालांकि इसको लेकर कई जगहों पर दोनों पार्टियां नजर दौड़ा रही है.

यहां पर मिल सकता है शरण

कर्नाटक के सीएम येदियुरप्पा के बनते हीं कांग्रेस और जेडीएस को अपने विधायकों को वहां से हटानें की सोंच रही है. खबर है कि दोनों पार्टियां अपने विधायकों को ईगलटन रिज़ॉर्ट में रखी थीं लेकिन अब उनको किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है.

दो मुख्यमंत्री कांग्रेस-जेडीएस के साथ

इस बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जेडीएस के विधायकों को विशाखापट्टनम, जबकि तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने उन्हें हैदराबाद में शरण देने का ऑफर दिया है. वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को केरल शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि वहां की लेफ्ट सरकार ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया है. ऐसे में देखना है कि विधायकों को कहां शरण मिलता है.

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