कश्मीर पत्रकार शुजात के हत्यारों का चेहरा आया सामने, सेना ने बताया पाक का हाथ

जम्मू। घाटी के प्रभावशाली अंग्रेजी अखबार राइजिंग कश्मीर के एडिटर इन चीफ सैय्यद शुजात बुखारी की आतंकियों ने 14 जून को गोली मारकर हत्या कर दी. बुखारी को आतंकियों ने तब गोली मार दी जब वो लाल चौक स्थित अपने ऑफिस से घर जा रहे थे. इस हमले में उनके दो रक्षक भी मारे गए. इस हत्या के पीछे पाकिस्तान का हाथ बताया जा रहा है.

भारतीय सेना के ले. जनरल ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर के एक प्रतिष्ठित पत्रकार और राइजिंग कश्मीर के संपादक सैय्यद शुजात बुखारी हत्या के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. हत्या पाकिस्तानी एजंसियों ने करवाई है. बुखारी को श्रीनगर में उनके दफ्तर के बाहर बाइक सवार तीन आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इस हत्या से जुड़े आतंकियों का चेहरा सीसीटीवी में कैद कर ली गई है. घाटी में पुलिस इनको पकड़ने की कवायद तेज कर दी है. पुलसि ने कहा है कि आवाम इनको पकड़ने में हमारा सहयोग करे. शुजात बुखारी अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. शुजात बुखारी को उनके पैतृक गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया और उनके जनाजे में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया.

Read Also-हत्या के चंद घंटे पहले पत्रकार शुजात बुखारी की लिखी लाइनें जो आपके दिल में…  

तो इसलिए केजरीवाल ने मोदी सरकार को जनतंत्र विरोधी कहा

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल धरना पर बैठेने के बाद मोदी सरकार को जनतंत्र विरोधी करार दिया है. लेकिन वहीं केजरीवाल ने दिल्ली की जनता का शुक्रिया अदा किया है. जान लें कि पिछले चार दिनों से दिल्ली की राजनीति चरमरा गई है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई कैबिनेट मंत्री राज्यपाल के खिलाफ उनके निवास पर धरना दे रहे हैं तो वहीं विपक्षी पार्टी बीजेपी सीएम केजरीवाल के खिलाफ उनके घर पर धरना दे रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उनका भाई पुणे से मिलने आया, लेकिन मिलने नहीं दिया गया. इसके बाद कहा कि मोदी सरकार जनतंत्र विरोधी हैं. बता दें कि अपनी मांगों को लेकर केजरीवाल व उनके नेता आमरण अनशन पर बैठे हैं. चौथे दिन गुरूवार को मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का गुरुवार सुबह रुटीन चैकअप हुआ. चैकअप में पता चला है कि सत्येंद्र जैन की तबीयत ठीक नहीं है.

राज्यपाल के ना मिलने पर केजरीवल ने लिखा कि, आख़िर दिल्ली वाले क्या माँग रहे हैं- IAS अफ़सरों की हड़ताल ख़त्म करो, राशन की डोरस्टेप डिलिवरी लागू करो. नहीं होना चाहिए ये? दुनिया में कोई कह सकता है कि ये नहीं होना चाहिए? फिर ये लोग क्यों नहीं कर रहे? आज चौथा दिन है. इनकी मंशा ठीक नहीं लग रही है. बता दें कि इन मांगों को लेकर दिल्ली की जनता ने केजरीवाल का साथ दिया है.

इसे भी पढ़ें-अब क्यूं बैठ गए सीएम केजरीवाल धरना देने  

कश्मीर में पत्रकार की हत्या पर मायावती ने पीएम को दी नसीहत

लखनऊ। कश्मीर में बेखौफ व उदारवादी विचार के पत्रकार व कश्मीर राइजिंग के एडिटर इन चीफ शुजात बुखारी की हत्या पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने दुःख व्यक्त किया. साथ ही लगातार शहीद हो रहे जवानों को श्रध्दांजलि अर्पित की. इनका मानना है कि सरकार को रियल चैलेंज स्वीकार कर जन कल्याण पर ध्यान देना चाहिए. सरकार देश में शांति व्यवस्था पर ध्यान दे.

अड़ियल नीति का त्याग करें पीएम

मायावती ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार अपनी अड़ियल नीति को त्याग कर अविलम्ब देशहित में अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करे. कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टी पीडीपी व बीजेपी की गठबंधन सरकार की जम्मू-कश्मीर में होने के बावजूद वहाँ के हालात लगभग बेकाबू हैं तथा पाकिस्तान सीमा के साथ-साथ आन्तरिक राज्य में भी हिंसा व हत्याओं का दुःखद दौर लगातार जारी है. हमारे सैनिकों की लगातार शहादत हो रही है. वैसे भी शान्ति व कानून-व्यवस्था किस आवाम को पसन्द नहीं होती है, इसको ध्यान में रखकर ही केन्द्र सरकार को ख़ासकर कश्मीर नीति में परिवर्तन लाना चाहिये. इस दौरान उन्होंने गुजरात व महाराष्ट्र में दलित की पिटाई पर कड़ा रूख प्रकट करते हुए बीजेपी सरकार को घेरा.

इसे भी पढ़ें-इग्नू में आम्बेडकर और आदिवासी पर पाठ्यक्रम शुरू    

हत्या के चंद घंटे पहले पत्रकार शुजात बुखारी की लिखी लाइनें जो आपके दिल में…

जम्मू। वरिष्ठ पत्रकार व राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या करने के बाद पूरे देश भर में आक्रोश फूट पड़ा. देश भर के पत्रकारों ने इसकी निंदा की. साथ ही हालही में कश्मीर दौरे से लौटे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आक्रोशित हो इस कायरना हरकत बताया है. तो वहीं मुख्मंत्री महबूबा मुफ्ती अस्पताल में शुजात बुखारी की शव को देखकर फफक कर रो पड़ी. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘वह बहुत बहादुर थे जिन्होंने जम्मू कश्मीर में न्याय और शांति के लिए निडरता से संघर्ष किया. मेरी संवेदना उनके परिवार के प्रति है. वह बहुत याद आएंगे.’

हत्यारों की तस्वीरें कैद

खबरों की मानें तो हमलावरों की तस्वीर सीसीटीवी में कैद हो गई है. पुलिस इनकी खोजबीन में जुट गई है. बता दें कि कल 14 जून को शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस दौरान शुजात बुखारी के अंगरक्षकों पर भी हमला किया गया. हालांकि गोली लगने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

मौत से पहले शुजात बुखारी ने लिखा…

देश के जाने माने पत्रकारों में शुजात बुखारी अपने बेखौफ अंदाज वाली पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मृत्यु से कुछ समय पहले ही शुजात बुखारी ने ट्विटर पर तब अपने काम का जबर्दस्त बचाव किया जब दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने उन पर कश्मीर को लेकर ‘पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग’ करने आरोप लगाया. आखिर ट्वीटों में एक में लिखा था, ‘कश्मीर पर पहली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार रिपोर्ट मानवाधिकार उल्लंघन की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करती है. कश्मीर में हमने पत्रकारिता गर्व के साथ की है और जमीन पर जो कुछ होगा, हम उसे प्रमुखता से उठाते रहेंगे.’ इनकी ये बातें जिम्मेदार पत्रकारिता को दर्शाती है.

मौत के बाद भी निकला अखबार

शुजात बुखारी की हत्या के बाद भी राइजिंग कश्मीर आंतकियों को चोट करता हुआ प्रकाशित किया गया. अखबार के मुख्य पृष्ठ के जरिए शुजात बुखारी को श्रध्दांजलि दी गई. साथ ही काले रंग के जरिए संदेश दिया गया. वैसे कई पत्रकारों ने लिखा है कि इससे कश्मीर व पत्रकार की आवाज नहीं दबने वाली. गोली चलती रहे, जान जाती रहे लेकिन कश्मीर की आजाद आवाज मुल्क के कोने-कोने में जाएगी.

Read Also-रमजान में मोदी सरकार का आतंकियों के लिए तोहफा!

हरामी व्यवस्थाः दलित ने पहनीं ‘राजपूती’ जूती-फैंसी कपड़े, भड़के राजपूतों ने पीटा

अहमदाबाद। गुजरात में एक बार फिर दलित के पहनावे को लेकर राजपूत भड़क उठे और मासूम को मारने लगे. मारने के साथ कह रहे थे कि, ‘तुम फैंसी कपड़े क्यों पहने हो’? हमारी बराबरी करेगा… इस तरह की दकियानूसी बातें बोलकर मारने लगे. इस दौरान उसने चाकू निकाल ली और दलित युवक डर के मारे बदमाशों के पैर पकड़कर माफी मांगने लगा.

खबरों की मानें तो ‘मोजड़ी’ व फैंसी कपड़े पहनने को लेकर चार राजपूत युवकों ने 13 वर्षीय एक दलित को बुरी तरह पिटाई की. गुजरात के मेहसाणा जिले के बहुचाराजी कस्बे में 14 जून को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रकाश में आया. हालांकि इस मामले को लेकर निर्दलीय विधायक व दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने उचित कार्रवाई की मांग की है.

बहुचाराजी के थाना प्रभारी आरआर सोलंकी ने बताया कि नाबालिग की ओर से मिली शिकायत के आधार पर चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि आरोप है कि भरत सिंह दरबार सहित चार राजपूत युवकों ने मोजड़ी पहनने को लेकर पीड़ित की पिटाई की.

दलित युवक का दर्द

अहमदाबाद जिला निवासी नाबालिग ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब वह बस स्टॉप पर बैठा हुआ था. इस बीच कुछ युवक आये और उससे जाति पूछी. जब उसने बताया कि वह दलित है तो उन्होंने पूछा कि दलित होने के बावजूद उसने मोजड़ी कैसे पहनी है. जब किशोर ने खुद को राजपूत बताकर अपना बचाव करना चाहा तो युवक उसे एक जगह ले गये और उसकी पिटाई की और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि, झूठ बोलता है, हमसे नजर मिलाता है. युवक ने बताया कि यदि वह उनके पैर नहीं पकड़ता उसे चाकू मार देते. बता दें कि इससे पहले गुजरात में दलितों के मूंछ, नाम में सिंह जोड़ने को लेकर मारपीट की घटना सामने आ चुकी है.

Read Also-दलित वर्ग फिर करेगा भारत बंद, लैटेरल एंट्री सिस्टम पर घिरी भाजपा

हरामी व्यवस्थाः कुएं में नहाने पर नाबालिग दलितों को नंगा कर गांव में घुमाया

महाराष्ट्र। तीन दलित बच्चों को कुएं में नहाना के कीमत उच्च बिरादरी के लोगों ने पीटकर व नंगा घूमाकर वसूली. इस घटना की वीडियो वायरल होने पर मामला सबके सामने आया. घटना महाराष्ट्र के जलगांव जिले के जामनेर तालुका के पाहुर गांव की है. यहां पिछड़े समुदाय से आने वाले नाबालिग बच्चों को पीटने के बाद पूरे गांव के सामने नग्न अवस्था में घूमाया गया. इनकी उम्र 14-16 साल बताई जा रही है. इन किशोरों का कसूर मात्र इतना था कि वे पड़ोस के गांव वकाडी में दूसरी जाति के एक किसान के कुएं में नहाने लगे.

पुलिस के अनुसार, कुएं के मालिक ने अपने नौकर के साथ मिलकर इन दोनों के साथ बर्बरता की. 10 जून को घटी इस घटना की जानकारी बच्चों के परिजनों को वायरल वीडियो के जरिए मिली. इसके बाद पाहुर थाना पुलिस में 10 जून की रात को पीड़ित किशोरों में से एक के पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी ईश्वर जोशी और प्रहलाद लोहार को गिरफ्तार कर लिया और 11 जून को कोर्ट के सामने पेश करते हुए उन्हें जेल भेज दिया.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने आरोप लगाया, राज्य में भाजपा के आने के बाद दलितों के खिलाफ इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं.

जान लें कि वायरल वीडियो में लड़कें केवल चप्पल पहने और कुछ पेड़ के पत्ते लपेटे हुए नग्न अवस्था में घूमाया जा रहा है. लड़कों व उनके परिवार ने स्थानीय पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई. लेकिन अब उन पर कुछ प्रभावशाली गांव वालों की वजह से शिकायत लेने का भारी दबाव है.

Read Also-इग्नू में आम्बेडकर और आदिवासी पर पाठ्यक्रम शुरू

मायावती ने दिया ईद का पैगाम

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। भाईचारे व शांति का संदेश देते हुए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती ने देश भर में मुस्लिम समाज के लोगों व ख़ासकर उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज के लोगों को ईद की तहेदिल से मुबारकबाद व शुभकामनाएं दीं.

इस दौरान मायावती ने मौजूदा हालात पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि देश के वर्तमान हालात के मद्देनज़र पूरे मुल्क व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में अच्छी क़ानून-व्यवस्था, अमनो-अमान व लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा के लिये सार्थक प्रयास व कुदरत से दुआ भी बहुत ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि शान्ति, कानून-व्यवस्था व आमजन सुरक्षा बीजेपी सरकारों की पहली प्राथमिकता नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश व देश भर में हालात चिन्ताजनक.

इस मुबारक मौके पर अपील है कि देश के वर्तमान हालात के मद्देनजर वे अपने देश में शान्ति-व्यवस्था, आपसी भाईचारे व इन्सानियत के बढ़ावे के लिये अपने प्रयासों के साथ-साथ इस सम्बंध में कुदरत से भी ज़रूर दुआ करें, क्योंकि समाज की तरक़्क़ी में ही सभी देशवासियों व मुल्क की तरक़्क़ी निहित है और बिना अच्छी कानून-व्यवस्था एवं बेहतर शान्ति-व्यवस्था के समाज व मुल्क की तरक़्क़ी मुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव है, यह बात खासकर दल को समझना आवश्यक है.

Read Also-यूपी पुलिस की दबंगई, पीड़ित दलित दिव्यांग महिला पर ही दर्ज किया मामला  

मायावती के करीबी पूर्व एमएलए का निधन, बसपा में शोक

लखनऊ। बसपा के करीबी पूर्व एमएलए का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. इस खबर से बसपा में शोक की लहर दौड़ पड़ी. बसपा सुप्रीमो मायावती के बहुत ही खास माने जाने वाले गोंडा के पूर्व विधायक मोहम्मद जलील खां का गुरुवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया. वे 62 वर्ष के थे. परिवारजन तत्काल उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

बसपा नेता मोहम्मद जकी ने बताया कि मायावती के बेहद करीबी रहे जलील खां ने वर्ष 2002 में अपना राजनीतिक सफर शुरू करते हुये गोण्डा विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन मामूली अंतराल से हार गए. इसके बावजूद बसपा सुप्रीमो मायावती ने भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा 2007 में बसपा के टिकट पर भाग्य आजमाने का मौका दिया. इस खबर ने बसपा को करारा झटका दिया है.

इसे भी पढ़ें-उदास समर्थकों ने शुरू की अटल बिहारी के लिए हवन-पूजन

बसपा ने तीन कद्दावर नेताओं को दिखाया बाहर का रास्ता

लखनऊ। बसपा के तीन नेताओं को एक साथ निकालने के बाद राजनीति में हलचल आ गई है. प्राप्त खबरों के अनुसार बसपा सुप्रीमो मायावती की नजरें पार्टी के तीन कद्दावर नेताओं पर टेढ़ीं हो गई हैं. उन्होंने पूर्व सांसद कैसरजहां, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामहेत भारती और पूर्व विधायक जासमीर अंसारी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निकाल दिया है. साथ ही मायावती के इस फैसले के बाद अन्य नेता चिंता में पड़ गए हैं.

बता दें कि तीनों ही नेता सीतापुर के हैं. इनमें से कैसरजहां 2009 में पहली बार बसपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं. वहीं, उनके पति जासमीर अंसारी 2007 में लहरपुर सीट से विधायक चुने गए थे. इनके अलावा रामहेत भारती हरगांव विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं. इसके बावजूद भी बसपा सुप्रीमो ने उनकी अनुशासनहीनता को नजरअंदाज किए बिना पार्टी से बाहर कर दिया.

Read Also-यूपी पुलिस की दबंगई, पीड़ित दलित दिव्यांग महिला पर ही दर्ज किया मामला

”अम्बेडकरवाद” को स्थापित करती फिल्म “काला”

किसी ने कहा था की “जिस विचार को आने का समय हो गया है उसे रोका नहीं जा सकता” गाँधीवाद, समाजवाद, वामपंथ के बाद ”अम्बेडकरवाद” ही वो विचार है जो भारतीय विमर्श में आ गया है.

और उसी को स्थापित करती है फिल्म “काला”…

अगर मैं कहूँ की विचारधारा के तौर पर ये भारत की ये पहली फिल्म है जिसमें अम्बेडकरवाद को दिखाया गया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. फिल्म आंबेडकर आंदोलन के प्रतीकों से भरी पड़ी है. घरों की छतों से ले कर कलाकारों के कपड़ो का नीला रंग हो, आंबेडकर, पेरियार, फूले और बुद्ध की मुर्तिया या तस्वीरें हों, बस्ती का नाम भीमवाड़ा से ले कर किरदारों का जय भीम बोलना, काला की मीटिंग पॉइंट का एक बौद्ध विहार होना आदि प्रतीक भरे पड़े हैं.

ब्लैक पैंथर आंदोलन के दौरान उत्पन्न हिप हॉप की तर्ज पर एक डांस और सिंगर ग्रुप भी है जो अमेरिकन ब्लैक क्रांति से इसको जोड़ता हुआ दिखता है. फिल्म जमीन के दर्शन को पहले सीन में ही बता देती है कि, जमीन ही इंसान की हैसियत निर्धारित करती है इस देश में. उत्तर भारत में इस फिल्म को काफी कम देखा गया है और अगर देखा जाता तो बहुत से आज कल के कथित राष्ट्रवादीयों को इस पर आपत्ति हो सकती है और उनको विवादित भी लग सकती है, बीजेपी और शिवसेना की राजनीति को एक तरह से सीधा टारगेट किया गया.

दलित-मुस्लिम एकता दिखाई गयी है. उन दलित नेताओ पर भी टिप्पणी है जो दलित कोटे से टिकट ले कर जीत जाने के बाद बिक जाते हैं. फिल्म दलितों को सन्देश देती है कि पढ़ाई करो और शाराब कभी न पियो, फिल्म वामपंथ को पूरी तरह खारिज करती है (मैं इस बात को पहले से कहता आया हूं कि वामपंथ हमारे देश के लिए नहीं है, यहाँ वर्ग भेद नहीं, जाति भेद है) फिल्म का किरदार लेनिन बाद में अम्बेडकरवाद समझ पाता है.

फिल्म उन दलितों पर भी कटाक्ष करती है जो आगे बढ़ गए है और खुद को दलितों से ही दूर रखना चाहते हैं, दलित समाज की कमजोरियां भी उजागर की गयी है. फिल्म में राम रावण के युद्ध का वर्णन करती हुई राम कथा है जिसका जिक्र करना मैं उचित नहीं समझता. फिल्म के अंदर दलितों के हाल के आंदोलनों को इधर-उधर दिखाया गया है. साथ ही दलितों का श्रम कितना महत्वपूर्ण है उसकी बानगी दलितों की हड़ताल वाली घटना दिखाती है, सफेदपोश लोगों के विचारो की संड़ांध भी है जो दलितों को सिर्फ अपराधी समझती है. फिल्म का एन्ड अवसाद पैदा करता है बिलकुल इसी तरह जैसे की आज के दौर में दलित आंदोलन है निराश. खैर फिल्म में विचारो के तौर पर इतना है की काफी कुछ लिखा जा सकता है.

वही बात करे की इस फिल्म में सिनेमा प्रेमियों के लिए क्या है तो सबसे पहले रजनीकांत जो ग्रेस और स्टाइल रजनीकांत का है उसको देख कर लगता है कि एक सत्तर साल का आदमी भी कितना जमता है अगर वो खुद पर ध्यान दे तो, सभी पचास प्लस लोगो को रजनीकांत को फॉलो करना चाहिए. दूसरा एक दृश्य है जिसमे रजनीकांत फ्लाईओवर पर अपने छाते से गुंडों को पिटता है वो सीन इतना शानदार है की उसका फ्रेम बनवा कर लगवा सकते हैं, फिल्म का ह्यूमर भी अच्छा है, अंतिम गाना और सीन भी बहुत ही शानदार है.

फिल्म की सबसे बड़ी कमी है उसकी लम्बाई ये एक घंटा कम हो सकती थी हुमा कुरैशी इतने लम्बे टाइम के लिए क्यों है समझ नहीं आता अगर उसका किरदार नहीं होता तो फिल्म को कोई फर्क नहीं पड़ता फिल्म छोटी भी होती, काफी सारी चीजों को कहने के चक्कर में निर्देशक कई जगह भटका- सा लगता है. पर क्या पता निर्देशक ने ये जान कर ही किया हो, इस फिल्म के निर्देशक है पा. रंजीत जो की अम्बेडकरवादी है जिसका दर्शन पिछली फिल्म कबाली में जो छुपा कर दिखाया वो इस फिल्म में खुल कर दिखाया है. मसान के निर्देशक नीरज घेवान वही सैराट के निर्देशक नागराजमंजुले ये तीनो ही दलित है और बॉक्स ऑफिस के सफलता के साथ दलित विमर्श को जिस सावधानी और ख़ूबसूरती से अपनी फिल्मों में स्थान दे रहे है उसके लिए ये प्रसंशा के पात्र हैं.

लेखक- मनोज कुमार जाटव​ Read Also-दाती बाबा के बाद दिल्ली की ‘गुरु मां’ ने 200 भक्तों के साथ किया ऐसा कारनामा

‘असफल’ स्टूडेंट्स को मिलेगा एडमिशन, दुबारा जारी होगा जेईई रिजल्टः आईआईटी प्रबंधन

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। जेईई में असफल छात्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है. इससे निराश छात्रों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ेगी. आईआईटी प्रबंधन ने आपातकालीन बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए जेईई एडवांस की कटऑफ गिराकर दोबारा रिजल्ट जारी करने का फैसला किया है. इससे असफल स्टूडेंट्स को भी मौका मिलेगा.

एक भी सीट खाली नहीं…

बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के अनुसार, आईआईटी प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि आईआईटी की एक भी सीट खाली नहीं रहनी चाहिए. क्योंकि एक-एक सीट बेहद महत्वपूर्ण होती है. जेईई एडवांस में क्वालिफाइड छात्रों की संख्या कम होने पर आईआईटी प्रबंधन की इमरजेंसी बैठक आयोजित हुई थी.

13,850 अतिरिक्त छात्रों को फायदा

आईआईटी ने केंद्र सरकार के सुझावों को मानते हुए ये फैसला लिया है. इस साल जेईई एडवांस में कुल सीटों की तुलना में बेहद कम छात्रों ने क्वालिफाइ किया था जिसके चलते ये फैसला लिया गया है. बता दें कि नई मेरिट लिस्ट जारी होने से 13,850 अतिरिक्त छात्रों को फायदा होगा. इस तरह पहले के 18,138 छात्रों को मिलाकर इस बार सफल होने वाले छात्रों की संख्या 31,988 हो जाएगी. बता दें कि इस बार का सामान्य कट ऑफ 126 अंक गया था. जिसे अब बदलकर 90 कर दिया जाएगा. अन्य जानकारी शाम 4 बजे के बाद प्राप्त की जा सकती है. हालांकि इसकी आईआईटी प्रबंधन के सूचना माध्यमों से ली जा सकती है.

Read Also-राजस्थान के स्कूलों में होगा संतो का प्रवचन

सवर्णों को पीछे के दरवाज़े से बुलाकर बहुजनों के हक़ मारने की क़वायद

संघी सरकार लगातार ही बहुजनों के हक़ मारने वाले निर्णय ले रही है. एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट को कमज़ोर किया जाना, आरक्षण को अप्रभावी या कमज़ोर करने वाले निर्णय, सीट कटौती, स्कॉलरशिप कटौती जैसे कई बहुजन विरोधी निर्णय लगातार सरकार ले रही है. ताकि इसके तहत वंचित तबकों के प्रतिनिधित्व और अधिकारों के मुद्दे ख़त्म हो जाएं.

इसी कड़ी में एक निर्णय बीजेपी सरकार ने लिया है.

अभी हाल ही में, भारत सरकार ने सचिव जैसे उच्च प्रशासनिक पदों पर निज़ी क्षेत्र के पेशेवरों से भर्ती के आवेदन मंगवाएं हैं. इस विज्ञापन में कहीं भी आरक्षण का उल्लेख नहीं है. ज़ाहिर तौर पर इससे सरकार बैकडोर इंट्री के जरिये सवर्णों को प्रवेश देने जा रही है. यानि अब उच्च ब्यूरोक्रेटिक पदों पर आने के लिए यूपीएससी की परीक्षा पास करने की ज़रूरत नहीं है, इसके लिए सिर्फ सवर्ण होना ही काफी है.

ऐसे में, ऐसे लोग जो निज़ी क्षेत्रों में काम करते हुए संघी सरकार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहें हैं उन्हें बंदरबांट के जरिये प्रशासन में प्रवेश मिल जाएगा. वे लोग वंचित तबकों के हक़ तो मारेंगे, बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों के एजेंट के रूप में नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करेंगे. साथ ही एक वेलफेयर स्टेट को प्राइवेट कॉरपोरेट ऑफिस की तरह ही ट्रीट करेंगे. सरकार ने प्रशासन की स्टीलफ्रेम ब्यूरोक्रेसी में अपने ब्राह्मणवादी तत्वों को घुसाना शुरू कर दिया है.

यह विज्ञापन यूपीएससी के माध्यम से होने वाली भर्ती की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समाप्त करता है. इसके कारण अनुसूचित जाति की 15%, अनुसूचित जनजाति की 7.5% और ओबीसी की 27% आरक्षित सीटों पर सलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों के हक़ मारे जाएंगे. अब तक ऐसे 10 पदों पर भर्ती हुई है, जिनमें से संवैधानिक अधिकार के तहत 05 पद आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को दिए जाते पर ये पद सवर्ण उम्मीदवारों को मिल गए.

जागिये! प्रोमोशन पर आरक्षण के निर्णय पर ताली बजवा कर सरकार आपके मुँह से निवाला छीन ले गई है.

-दीपाली तायड़े

Read Also-पांच करोड़ खर्च के बाद भी मर रही मछलियां, बिहार के सबसे बड़े तालाब बदहाल

विवि में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पीएचडी अनिवार्यः प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पीएचडी अनिवार्य कर दी गई है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि वर्ष 2021-22 से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिये पीएचडी अनिवार्य होगा. अब केवल राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को एकमात्र पात्रता के रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा. हालांकि, कॉलेजों में सीधे नियुक्ति के लिये न्यूनतम पात्रता के रूप में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी जारी रहेगा.

यह जान लें कि अभी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे प्रवेश स्तर के पदों के लिये न्यूनतम पात्रता स्नातकोत्तर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नये नियमन की घोषणा करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक (एपीआई) को कॉलेज शिक्षकों के शोध के लिये अनिवार्य बनाने को समाप्त कर दिया गया है. इससे शिक्षक छात्रों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगें. इसमें पूर्व के नियमन की सभी सुविधाओं को बनाये रखा गया है. केवल कॉलेज शिक्षकों के लिये एपीआई को समाप्त कर दिया गया है.

मंत्री ने कहा कि अब कॉलेज शिक्षकों के लिये अनिवार्य रूप से शोध करना जरूरी नहीं होगा. पदोन्न्ति में शिक्षकों के पढ़ाने से जुड़े परिणामों को ध्यान में रखा जायेगा. अगर शिक्षक शोध करते है, तब पदोन्नति में अतिरिक्त अंक जुड़ेंगे. जावड़ेकर ने कहा कि विश्वविद्ययालयों में नयी नियुक्ति केवल पीएचडी धारकों की होगी. इसके लिये तीन वर्षों का समय दिया गया है. साल 2021 से असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी धारक होना होगा.

Read Also-23 लाख रिटायर्ड शिक्षकों को सरकार का तोहफा

दाती बाबा के बाद दिल्ली की ‘गुरु मां’ ने 200 भक्तों के साथ किया ऐसा कारनामा

गुरू मां की फाइल फोटो

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में दाती महाराज के रेप केस के बाद अब एक ‘गुरु मां’ का केस सामने आया है. इस ‘गुरु मां’ की कहानी भी इन बाबाओं की तरह ही है जो कि लोगों को झांसे में लाकर लूटते हैं. इसके बाद मौका देखकर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं. ‘गुरु मां’ ने बड़ी चालाकी से आस्था के जाल में फंसाकर 200 से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया है. इस चालू ‘गुरु मां’ ने करोड़ो की चंपत लगाई है.

खजूरी इलाके में ‘गुरु मां’ के नाम से मशहूर पुष्पा गोयल ने बेटी की शादी के बहाने एक-एक अनुयायी से 5 से 20 लाख तक वसूले और मोटी राशि जमा होने के बाद फरार हो गई. नेहरू विहार निवासी संतोष तोमर नामक महिला की शिकायत पर खजूरी खास थाना पुलिस ने पुष्पा गोयल सहित तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर किया है.

दो सेविका व एक पति…

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार शिकायतकर्ता संतोष तोमर ने बताया कि वह तीन साल पहले पुष्पा गोयल से मंदिर में कीर्तन कै दौरान मिली थीं और बाद में सेवा में जुट गईं. पुष्पा गोयल का दयालपुर में किराये के मकान में रह रही थी लेकिन उसका ठिकाना कोई न कोई मंदिर ही होता था. उसके साथ हमेशा दो सेविकाएं रहती थीं.

लोगों को भरोसा इतना था कि एक बार कहने पर लोग जागरण, कीर्तन आदि कार्यक्रमों के लिए लाखों रुपये का चंदा जुटा लेते थे. कामाख्या देवी मंदिर, अमरनाथ यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए उसके साथ बड़ा जत्था रवाना होता था. यात्रा की व्यवस्था देविंदर नामक शख्स देखता था और उसे पुष्पा गोयल पति बताती थी. अप्रैल में पुष्पा व देविंदर उनके घर आए और बेटी की शादी के लिए रुपये लेने के बाद एक हफ्ते में लौटाने की बात कही. हफ्ते बाद जब वह पुष्पा गोयल के घर पहुंचीं तो उनकी तरह वहां 100 से ज्यादा लोग पैसे लेने के लिए पहुंचे थे. और पुष्पा गोयल वहां से गायब थी.

इसे भी पढ़ें-दाती बाबा के बाद दिल्ली की ‘गुरु मां’ ने किया ऐसा कारनामा

आरोपों से घिरे शनिधाम के दांती महाराज ने सफाई में क्या कहा

नई दिल्ली। शनिधाम वाले बाबा दाती महाराज पर रेप का आरोप लगने के बाद फरार हो गए थे लेकिन आखिरकार उन्होंने मीडिया में आकर कहा कि जो भी आरोप लगे हैं वो आपके सामने हैं. मैं उस बिटिया पर आरोप नहीं लगाऊंगा. वो मेरी बेटी है और मैंने गलती की है तो पुलिस जांच करेगी और जांच में सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हूं.

उल्लेखनीय है कि राजस्थान की 25 वर्षीय युवती (शिष्या) ने स्वयंभू बाबा दाती महाराज और उसके चेलों पर बलात्‍कार का आरोप लगाया था. यह मामला दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में दर्ज कराया गया था. युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब एक दशक से महाराज की शिष्या थी. लेकिन महाराज और चेलों द्वारा बार-बार बलात्कार किए जाने के बाद वह अपने घर राजस्थान लौट गई.

साथ ही यह खबर आ रही है कि, मामला जिला पुलिस से अपराध शाखा को दे दिया गया है. पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) आलोक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामला अपराध शाखा को हस्तांतरित कर दिया गया है, हालांकि अभी उन्हें आधिकारिक आदेश नहीं मिले हैं. आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

इसे भी पढ़ें-अयोध्या के महंत ने नग्न युवती के साथ ली सेल्फी, तस्वीर वायरल

यूपी पुलिस की दबंगई, पीड़ित दलित दिव्यांग महिला पर ही दर्ज किया मामला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। बांदा जिले के दंबगों ने एक दिव्यांग महिला के घर में घुसकर महिलाओं पर हमला किया था लेकिन यूपी पुलिस ने दबंगों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता पर ही मामला दर्ज कर दिया है. इससे एक बार फिर यूपी पुलिस की दबंगई साफ दिख रही है. जबकि पीड़ित महिला न्याय के लिए पुलिस से बार गुहार लगाती रही लेकिन न्याय ना मिलने पर महिला ने धर्म बदलने की बात कही.

धर्म बदलने की बात से पुलिस नाराज हो गई और यूपी पुलिस ने उसके खिलाफ ही शांति भंग करने के कारण कार्रवाई कर दी. बता दें कि हालही में यूपी पुलिस ने एक तीन साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट लगाया था. इस बात पर जज पुलिस पर भड़के थे और पुलिस की खूब फजीहत हुई थी.

धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी

दरअसल मामला बांदा जिले का है. बांदा जिले के बिसंड़ा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव के जिस दिव्यांग दलित परिवार ने कुछ दिन पूर्व धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दी थी. बिसंडा पुलिस ने उसे ही शांति भंग करने के अपराध में फंसा दिया है. इससे दबंगों पर पुलिस की मेहरबानी झलक रही है. पीड़ित दिव्यांग दलित संतोष कोरी ने बुधवार को बताया, ‘गांव के कुछ दबंगों ने 24 मई को उसके घर की महिलाओं पर हमला किया था. पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं करने पर वह अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश होकर धर्म परिवर्तन किए जाने की चेतावनी दी थी.’

पीड़ित ने कहा कि पुलिस संरक्षण से दबंगों के हौसले बुलंद हैं और 22 जून को होने जा रही उसके भतीजे की शादी में खलल डाल सकते हैं. पुलिस क्षेत्राधिकारी बी ओमप्रकाश ने बताया कि एक खंडहरनुमा पुराने मकान की जमीन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था, जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है, अभी तक ऊपर से कोई आदेश नहीं आया. दलित के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई किए जाने की जानकारी नहीं है.

Read Also-तीन साल के बच्चे पर गुंडा एक्ट, मां के गोद में आरोपी को देख जज साहब हैरान

राजस्थान की धूल भरी आंधी, घूंट रहा दिल्लीवासियों का दम!

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। करीब दो-तीन दिनों से देश की राजधानी में शाम के वक्त धूल एकाएक छाता दिख रहा है. इसको लेकर लोग परेशान हैं. लेकिन मौसम व प्रदूषण विभाग ने जानकारी दी है कि धूल राजस्थान से आ रही है जिससे दिल्ली की हवाओं को खराब कर दिया है. हालांकि बुधवार हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर से अधिक बिगड़ गई. इससे राजधानी में आंधी के कारण हवा में मोटे कणों की बढ़ोतरी हुई है. तो वहीं, उत्तर प्रदेश में भी धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया गया है.

अत्यंत गंभीर स्थिति…

बता दें कि इसी तरह पिछले साल पंजाब-हरियाणा के खेतों में आग लगने के कारण भी दिल्ली का प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इलाके में पीएम 10 (10 मिमी से कम व्यास वाले कण) का स्तर 778 पर अत्यंत गंभीर से ऊपर है. दिल्ली में यह विशेषकर 824 पर है. इसके कारण धुंध की स्थिति है, जिससे विजिबिलिटी का स्तर सीमित है.

मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में अगले तीन दिनों तक दिल्ली में यह स्थिति बरकरार रहने की आशंका व्यक्त की गई है. मंत्रालय ने इन दिनों दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने को अस्वाभाविक बताते हुए कहा कि इसकी मुख्य वजह राजस्थान में आने वाली धूल भरी आंधी है.

मौसम विज्ञाग ने दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन तक धूल भरी हवा बरकरार रहने का अनुमान व्यक्त किया है. इसके मद्देनजर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य यूनिट के माध्यम से स्थानीय निकायों और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी एजेंसियों से लगातार पानी का छिड़काव करने को कहा है.

इसे भी पढ़ें-पांच करोड़ खर्च के बाद भी मर रही मछलियां, बिहार के सबसे बड़े तालाब बदहाल

और इस तरह मायावती के करीब चले गए संजू बाबा

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। सिनेमा व राजनीति का कनेक्शन कुछ ऐसा ही होता है. वैसे दोनों ही फिल्ड में पब्लिसिटी की जरूरत होती है. अब संयोग देखिए कि जाने माने हीरो संजय इन दिनों मायावती के करीब जाने के बाद एक फिर सुर्खियों में छाए हैं. इतना ही नहीं संजय दत्त मायावती के पड़ोसी तक बन गए हैं.

राजनेता बने संजय

ऐसा बताया जा रहा है कि इन दिनों लखनऊ शहर में चल रही फिल्म ‘प्रस्थानम्’ की शूटिंग चल रही है. फिल्म में जहां संजय दत्त राजनेता का रोल अदा कर रहे हैं. इसको लेकर संजय दत्त आए दिन प्रदेश के कद्दावर नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं.

दरअसल बात ऐसी है कि शूटिंग के लिए संजय दत्त का आवास पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती के नए आवास के बगल में है. इसे महज एक संयोग कहा जा सकता है लेकिन शहर में इन दिनों संजू बाबा को लेकर चर्चा जोरों पर है. जान लें कि फिल्म में संजू बाबा नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के बेड़े नेता ठाकुर बलदेव प्रताप सिंह का किरदार निभा रहे हैं. उनका दफ्तर भी महानगर में खुला हुआ है. ऐसी संभावना है कि जल्द ही संजय दत्त मायावती से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि इससे पहले वह मुख्यमंत्री योगी व सपा नेता शिवपाल सिंह से मिल चुके हैं.

इसे भी पढ़ें-योगी सरकार ने मानी मायावती की बात

दलित वर्ग फिर करेगा भारत बंद, लैटेरल एंट्री सिस्टम पर घिरी भाजपा

File Photo/dalilyhunt

नई दिल्ली। प्रशासनिक सेवाओं में लैटरल एंट्री कराने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दलित समूह भारत बंद की तैयारी में हैं. जानकारों का ऐसा कहना है कि मोदी सरकार अप्रत्यक्ष रुप से आरक्षण व दलितों के अधिकार को छिनने का काम कर रही है. इसके खिलाफ दलित एक बार फिर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे.

ऐसा बताया जा रहा है कि अगस्त में स्वतंत्रता दिवस के आसपास इस बंद का आह्वान करने की योजना है. दलित कार्यकर्ता अशोक भारती का कहना है कि सरकार का यह कदम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संवैधानिक संस्था की उपेक्षा है. उनके मुताबिक लैटेरल एंट्री सिस्टम अनुसूचित जातियों व जनजातियों को आरक्षण देने की अनदेखी करता है. अशोक भारती ने कहा कि इस बार का भारत बंद संसद के मानसून सत्र में बुलाए जाने की योजना है ताकि आंदोलन की गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे.

उन्होंने यह भी कहा, ‘विरोध के जरिए यह संदेश देना है कि अगर (लैटरल एंट्री सिस्टम को लेकर) हमारी चिंताओं पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो दलित समुदाय 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को करारा जवाब देगा.’ इससे पहले बीते अप्रैल में एससी-एसटी एक्ट के कथित रूप से कमजोर होने के मुद्दे पर दलित संगठनों ने भारत बंद किया था.

इसे भी पढ़ें-कर्नाटक में बीजेपी को एक और झटका

लालू के 45 करोड़ की जमीन को ईडी ने किया जब्त

पटना। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को फिर करारा झटका लगा है. लालू प्रसाद यादव एक बाद एक मुश्किल में फंसते जा रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने लालू परिवार को बड़ा झटका दिया है. ईडी ने दानापुर में बन रहे निर्माणाधीन मॉल को सील कर दिया है. इससे लालू के परिवार को करोड़ों का नुकासन हुआ है.

जान लें कि इससे पहले भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पटना के बेली रोड पर सगुना मोड़ के पास लालू यादव परिवार के बन रहे चर्चित मॉल के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी. 750 करोड़ की लागत से बन रहा बिहार का यह सबसे बड़ा मॉल है.

यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और छोटे बेटे तेजस्वी यादव के नाम पर है. इस जमीन का सर्किल रेट 44.7 करोड़ रुपये है, लेकिन इसे लालू यादव की कंपनी लारा प्रोजेक्ट ने वर्ष 2005-06 में महज 65 लाख रुपये में खरीदा था.

इसे भी पढ़ें-लालू यादव ने ऐसे मैनेज किया बेटों का झगड़ा