दौड़ते वक्त एडिशनल डीसीपी की मौत

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नई दिल्ली। एक सिपाही की दौड़ते-दौड़ते मृत्यु हो गई. इस घटना ने सबको हैरान कर दिया है. प्राप्त खबर के मुताबिक राजस्थान के जयपुर में पुलिस पदोन्नति परीक्षा में दौड़ते वक्त हेड कांस्टेबल सुशील कुमार शर्मा (45) की हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस घटना को लेकर जांच प्रक्रिया चल रही है.

जान लें कि सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा की दौड़ शहर के आमेर रोड पर आयोजित करवाई गई थी. घटना की जानकारी मिलते ही साथी पुलिसकर्मी समेत पुलिस कमिश्नर और अन्य उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए. जानकारी के मुताबिक हेड कांस्टेबल सुनील एडिशनल डीसीपी क्राइम एंव विजिलेंस के ऑफिस में तैनात थे. गुरुवार को एएसआई की लिखित परीक्षा का परिणाम भी आ चुका था. इसके बाद उनके ब्लड प्रेशर की जांच की गई और अगले दिन शुक्रवार सुबह शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया.

बताया जा रहा है कि इस परीक्षा में करीब 15 मिनट में 2 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी. जैसे ही कांस्टेबल सुनील दौड़ खत्म करने के बाद रुके तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई. अचानक उनके सीने में तेज दर्द हुआ और वह अचेत होकर गिर पड़े. शव का पोस्टमार्टम कर परिवार को सौंप दिया गया है.

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गौरी लंकेश के हत्यारे ने बताई हत्या की असली वजह

नई दिल्ली। आखिरकार कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्यारे ने गुनाह कबूल कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की टीम ने हत्यारे से सच उगलवा दिया. इस कहानी को सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी. जान लें कि गौरी लंकेश की हत्या के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने परशुराम वाघमारे को गिरफ्तार किया है. इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में एसआईटी ने आरोपी वाघमारे को उत्तर कर्नाटक के विजयपुरा जिले से गिरफ्तार किया था. एसआईटी का दावा है कि पूछताछ में वाघमारे ने लंकेश की हत्या की बात कबूल ली है. उसने जांच टीम को बहुत कुछ जानकारी दी है.

हत्यारे का कहना

एसआईटी की जानकारी के अनुसार वाघमारे को हत्या से पहले यह पता नहीं था कि वह किसे मार रहा है. और उसने 05 सितंबर, 2017 को बेंगलुरु के पॉश इलाके आरआर नगर में लंकेश को उनके घर के बाहर चार गोली मारकर हत्या कर दी.

महिला को नहीं मारना चाहिएः हत्यारा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ के दौरान वाघमारे ने कहा, “मई 2017 में मुझे कहा गया कि अपने धर्म की रक्षा के लिए हमें किसी को मारना है. मैं इसके लिए राजी हो गया. तबतक मुझे यह पता नहीं था कि किसे मारना है. अब लगता है कि मुझे किसी महिला को नहीं मारना चाहिए था.” उसे 3 सितंबर को बेंगलुरु लाया गया. उसने बेलगावी में एयरगन चलाने की ट्रेनिंग ली थी.

वाघमारे ने कहा, “सबसे पहले मुझे एक घर में ले जाया गया. कुछ देर बाद एक बाइक सवार आया और मुझे वह घर दिखाने ले गया जहां मुझे किसी को मारना था. अगले दिन बाइक सवार मुझे बेंगलुरु के किसी और घर में ले गया. एक दूसरा शख्स मुझे बाइक से आरआर नगर के एक मकान में छोड़ गया. मुझे गौरी लंकेश को आज-आज में मारने की बात कही गई लेकिन लंकेश उस दिन घर से नहीं निकलीं.”

वाघमारे ने आगे बताया, “5 सितंबर को शाम 04 बजे मुझे बंदूक दी गई. शाम को ऑफिस से लौटते वक्त लंकेश कार का दरवाजा खोलकर जैसे ही बाहर निकलीं, मैंने उनपर चार गोलियां दाग दीं. मैं और बाइक सवार अपने रूम पर लौटे और उसी रात शहर छोड़कर निकल गए.

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मजिस्ट्रेट की शादी रूकवाने महिला ने दायर की याचिका

crime against womanनई दिल्ली। मजिस्ट्रेट की शादी की बात पता चलते ही महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. प्राप्त खबरों के मुताबिक मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के मजिस्ट्रेट के खिलाफ एक महिला ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में शिकायतकर्ता महिला ने मजिस्ट्रेट की शादी पर रोक लगाने के लिए कहा है. हालांकि इसको लेकर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया है.

मजिस्ट्रेट की शादी व सुनवाई एक ही दिन

मामला कुछ ऐसा है, महिला ने मजिस्ट्रेट पर आरोप लगाया है कि उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया. मजिस्ट्रेट जिले के अजयगंज में नियुक्त हैं. संयोगवश मामले की सुनवाई अब 18 जून को होनी है और इसी दिन मजिस्ट्रेट की शादी भी तय हुई है. अब देखना है कि इस दिन कोर्ट का फैसला क्या आता है. हालांकि महिला का दावा है कि कोर्ट उसके साथ न्याय करेगा.

महिला का कहना है कि उसका पिछले तीन साल से मजिस्ट्रेट के साथ संबंध था. मजिस्ट्रेट ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारिरिक संबंध बनाए. इतना ही नही महिला ने आगे कहा कि जब उसने मजिस्ट्रेट को शादी के लिए कहा तो वह 50 लाख रुपये दहेजके तौर पर मांगने लगा लेकिन जब उसके परिवार ने पैसे देने से इंकार कर दिया तो उसने कहीं और शादी तय कर ली. पीड़िता ने कहा  मामला दर्ज कराने के बाद से ही उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

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दलित युवक की सीएम नीतीश कुमार को चिठ्ठी से बिहार में बवाल

nitish-kumarपटना। दलित समाज के युवकों को अक्सर आरक्षण को लेकर ताने दिये जाते हैं. यहां तक की बहस के दौरान दलित युवकों के करीबी मित्र भी आरक्षण को लेकर ताने देने से बाज नहीं आते. ऐसे लोगों को बिहार के एक युवक ने मुंहतोड़ जवाब दिया है. जब तमाम सवर्ण जातियों के लोग अपने लिए आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, यह युवक अपना आरक्षण छोड़ने को तैयार है. लेकिन इसके लिए उसने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक शर्त रखी है.

युवक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर खुद को ब्राह्मण जाति में शामिल करने की मांग की है. और इसके लिए सीएम से सिफारिश करने को कहा है. उसने लिखा है कि वह आरक्षण नहीं लेना चाहता है, बस उसको ब्राह्मण जाति में शामिल कर लिया जाए. इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए. दलित युवक की इस चिट्ठी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. साथ ही कईयों को सोचने पर विवश कर दिया है.

अब आप आगे की कहानी सुनेंगे तो आप भी खुद को इस युवक की वाहवाही करने से नहीं रोक पाएंगें. सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखने वाले इस दलित युवक का नाम अभिनंदन कुमार है, जो चमार जाति का है. ‘दलित दस्तक’ से बातचीत में अभिनंदन कहते हैं-

“हाल ही में बिहार के कुछ सवर्ण जाति के लोगों ने धरना देकर दलित बनने की मांग की थी. स्थानीय अखबारों में छपी एक खबर के मुताबिक इस मुद्दे पर नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से उन सवर्णों के मांग की अनुशंसा की है. इस पर मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी ब्राह्मण जाति अपना लूं, ताकि ब्राह्मण बनकर मुझे सदियों की प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके. मैं आरक्षण नहीं चाहता मुझे बस दलित जाति से मुक्ति चाहिए.”

अभिनंदन दलित जातियों में शामिल होने वाले सवर्णों का स्वागत करते हुए कहते हैं कि वे आएं दलित बनें, आरक्षण लें लेकिन इसके साथ ही वह दलितों की तरह नालियों की सफाई, मरे पशुओं को फेंकना, चप्पल-जूता पॉलिस का काम भी करें.”

सीएम को पत्र लिखने वाले अभिनंदन अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के शेखपुरा जिला के अध्यक्ष है. युवक की इस पहल ने सोशल मीडिया पर एक बहस को जन्म दे दिया है. सीएम नीतीश को लिखी अभिनंदन की चिट्ठी कुछ यूं है….

“मुख्यमंत्री जी, निवेदनपूर्वक कहना है कि मैं अभिनंदन कुमार, पिता- स्व. भुवनेश्वर दास चमार जाति से हूं. मैं ब्राह्मण जाति बनना चाहता हूं. मुझे सवर्ण में ब्राह्मण में जाति बनाया जाय. मैं आरक्षण छोड़ना चाहता हूं क्योंकि हमसे बड़े-बड़े जाति के लोग अब दलित बनने के लिए तैयार हैं तो मैं सवर्ण बनने के लिए तैयार हूं. क्योंकि सदियों से पूर्वजों से हरिजन, दलित, चमरवा का प्रताड़ना झेलते आ रहा हूं. इन सभी से निजात पाने के लिए मैं सवर्ण बनना चाहता हूं तब तो कोई मुझे प्रताड़ित नहीं करेंगे. जब किसी को भी किसी जाति में शामिल करने को सक्षम हैं तो फिर मुझे भी सवर्ण जाति में शामिल करने में परेशानी नही होनी चाहिए. मेरे लिए भी केंद्र सरकार से सिफारिस करने की कृपा करें. ताकि मैं भी ब्राह्मण की तरह बाकि जाति के लोगों पर शान से राज कर सकूं. मेरा जो काम है जैसे लोग कहते हैं मरा जानवर ढोना, चप्पल-जूतो में पालिस करना, गंदगी साफ करना ये सब वो लोग करेंगे जो दलित बनने को तैयार हैं. और उन्हें ही आरक्षण की जरूरत पड़ेगी. तब वे आरक्षण के हकदार भी होंगे. क्योंकि पहले जाति बना और जाति कार्य के आधार एवं परिवारिक स्थिति के अनुसार आरक्षण मिला. तो आरक्षण समाप्त करने का मतलब जाति भी समाप्त जब आरक्षण लेने वाले जाति समाप्त हो जाएंगे तो सभी ऊंची जाति हो जाएंगे यानि सवर्ण. मुझे सवर्ण में ब्राह्मण जाति बनाया जाए. इस उपकार के लिए श्रीमान का मैं सदा आभारी रहूंगा.”

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काले रंग के कारण इस बड़े कोरियोग्राफर को नहीं मिला था काम

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फिल्म काला में रंग को लेकर एक संवाद काफी मशहूर हुआ था. जब नाना पाटेकर काला का किरदार निभाने वाले रजनीकांत से पूछते हैं कि ये काला कैसा नाम है? तो रजनीकांत जवाब देते हैं कि काला मेहनतकश लोगों का रंग है. लेकिन इसी फिल्म इंडस्ट्री में काले रंग के कारण एक शानदार कोरियोग्राफर को काम नहीं मिला था. वो कोरियाग्राफर फिल्म जगत में आज अपनी पहचान बना चुके रेमो डिसूजा हैं.

15 जून को रिलिज हुई फिल्म रेस-3 के डायरेक्टर रेमो डिसूजा ने रंग को लेकर फिल्म जगत में होने वाले भेदभाव की पोल खोली है. दैनिक अखबार हिन्दुस्तान को दिए इंटरव्यू में रेमो ने यह बात बताई है. आज रेमो एक चर्चित नाम है और फिल्म जगत में हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल है. लेकिन एक वक्त ऐसा था जब रेमो को उनके काले रंग की वजह से काम नहीं मिला था.

इस इंटरव्यू में रेमो ने कहा-

“रामगोपाल वर्मा की रंगीला के लिए मैंने डांसिंग ऑडिशन दिया था. वहां सभी को मेरा डांस पसंद आया था, पर अंतिम समय में अहमद खान ने मुझे मना कर दिया, क्योंकि उन्हें एक गोरा-चिट्टा लड़का चाहिए था, जो मैं नहीं था. उस दिन मैं काफी दुखी था, क्योंकि मैं सब बदल सकता हूं लेकिन अपना रंग और शक्ल-सूरत नहीं बदल सकता था.” हालांकि रेमो डिसूजा का डांस अहमद खान के असिस्टेंट को काफी पसंद आय़ा और उन्हें रंगीला फिल्म के गाने ‘… आई रे’ के लिए रख लिया गया.

रेमों की यह बात रंग को लेकर लोगों के नजरिए को बताता है, साथ ही यह भी साफ करता है कि गोरा रंग नहीं होने के कारण देश के एक बहुत बड़े तबके को कई बार बेइज्जत तक होना पड़ता है. देश के दिग्गज कोरियोग्राफर में शुमार रेमो ने अपने इंटरव्यू में एक और घटना का भी जिक्र किया है, जब उनको अपने रंग के कारण पुलिस के डंडे तक खाने पड़े थे.

बकौल रेमा- “जब मैं गुजरात से मुंबई आया तो मेरी हालत बहुत ठीक नहीं थी. मुझे काम चाहिए था, फिर वो चाहे किसी भी कीमत पर क्यों न मिले. रंगीला के दौरान हम बीच पर शूटिंग कर रहे थे. उस दिन सुरक्षा के लिए पुलिस बुलाई गई थी. मेरा डांस सीन भी उसी दिन शूट होना था, इसलिए मैंने टपोरी के कपड़े पहने हुए थे. मैं एक तरफ खड़ा था, तभी पुलिस वाले मेरी तरफ आए और मुझ पर डंडे बरसाने लगे. मैंने कहा कि मैं फिल्म का हिस्सा हूं, लेकिन पुलिस वालों ने कहा कि … तू शूट करेगा… शक्ल देखी है अपनी!”

हालांकि तभी क्रू वालों ने रेमो को देख लिया और उन्हें बचाया. रेमो अपने साथ ऐसे कई वाकये होने की बात कहते हैं. हालांकि आज लोग रेमों को जानते हैं और उनके साथ काम करना चाहते हैं. कुछ सालों से स्टार प्लस पर डांस प्लस नाम के डांस शो के कारण रेमो अब हर घर में पहचाने जाने लगे हैं. लेकिन काले रंग को लेकर रेमो डिसूजा और तमाम लोगों के साथ भेदभाव एक बार फिर फिल्म काला के संवाद को स्थापित करती है.

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‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ पर दिग्विजय सिंह की सफाई

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नई दिल्ली। ‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ को लेकर कांग्रेस घिरी हुई है. इसके लिए राहुल गांधी को कोर्ट तक जाना पड़ा. इसी बीच ‘हिंदू आतंकवाद’ व ‘संघी आतंकवाद’ को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है. इस बयान को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है.

हां, मैं संघी आतंक का इस्तेमाल करता हूं…

अब तो दिग्विजय सिंह ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह हमेशा ‘संघी आतंकवाद’ इस्तेमाल करते हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिंसा और घृणा फैलाता रहा है फिर आतंकवाद को जन्म देने लगा है. वहीं दिग्विजय सिंह की ओर से आए इस बयान पर बीजेपी ने कहा है कि जो लोग संघ से जुड़े हैं उनकी भावनाओं को आहत हुई हैं. बीजेपी सांसद संजय पाठक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि कोई भी शख्स अगर धर्म का पालन करता है, गलत नहीं कर सकता है. कोई भी धर्म कट्टरता नहीं सिखाता है.

साथ ही आगे उन्होंने कहा कि कभी ‘हिंदू आतंकवाद’ की बात कभी नहीं की है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि आतंकवाद को कभी किसी धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता है. पत्रकारों से बातचीत करते हुये मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आपके पास गलत सूचना है कि दिग्विजय सिंह ने हिंदू आतंकवाद की बात कही है. मैंने हमेशा संघी आतंकवाद की बात की है.’ अपनी बात पर जोर देते हुये दिग्विजय सिंह ने कहा कि बम विस्फोट जिन लोगों ने किया था वह संघ की विचारधारा से प्रभावित थे फिर चाहे वह मालेगांव, मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस या फिर दरगाह शरीफ बम विस्फोट कांड रहा हो.

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बसपा नेता की प्रधान पत्नी व भतीजी पर हमला

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लखनऊ। बसपा नेता की पत्नी व भतीजी पर बदमाशों ने जानलेवा हमला किया है. खबरों की मानें तो औरैया जिले में बसपा जिलाध्यक्ष इंद्रेश कुमार शाक्य की पत्नी व भतीजी पर गांव के दबंगों ने हथियार से हमला बोला. जिससे दोनों घायल हो गई. सूचना के बावजूद पहले पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की.

बताया जा रहा है कि बिधूना कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रुरुखुर्द की श्रीदेवी प्रधान हैं जबकि उनके पति इंद्रेश कुमार शाक्य बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं. पुलिस को उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वह अपने देवर दुर्गेश के प्लाट पर निर्माण कार्य देखने गयी थीं. तभी गांव के कई लोगों ने एक साथ हमला बोल दिया. हमलावर के हाथ में तमंचा व लाठी-डंडा लिए थे.

इसी दौरान बदमाशों ने बिना किसी वजह अचानक हमला बोल दिया. मारपीट के दौरान आरोपियों ने उनके गले में पड़ी सोने की चेन भी तोड़ ली. उनके साथ भतीजी भी मौजूद थी. उससे भी मारपीट की गई. मामला जमीनी विवाद से जुड़ा है लेकिन श्री देवी का कहना है कि जिस भूखंड पर निर्माण कार्य चल रहा है. उसके कागजात उनके पास है. इसके बावजूद गांव के ही कुछ लोग भूखंड पर कार्य नहीं होने दे रहे हैं.

मारपीट के बाद रुरुगंज चौकी पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी. लेकिन बिना शिकायत दर्ज किए यहां से उनको कोतवाली भेज दिया गया. घटना के बाद पुलिस मारपीट करने वालों की गिरफ्तारी के लिये जुटी है.

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बीजेपी विधायक ने मुसलमानों को बताया बिजली चोर

लखनऊ। बीजेपी विधायकों की बेतुकी बयानबाजी रूकने का नाम नहीं ले रही है. अभी यूपी के कौशांबी जिले से भाजपा विधायक संजय गुप्ता का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. ऑडियो में भाजपा विधायक ने कहा कि 90 फीसदी मुसलमान बिजली चोर हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है. इस ऑडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी विधायक की किरकिरी हो गई है.

बीजेपी विधायक संजय गुप्ता के क्षेत्र में विद्युत विभाग पिछले कई दिनों से छापेमारी की कार्रवाई कर रहा है और बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा रहा है. इस मामले की शिकायत जब कुछ लोगों ने बीजेपी विधायक से की. उन्होंने इस कार्रवाई को रोकने और एफआईआर वापस लेने के लिए बिजली विभाग की जेई से बात की. सूत्रों के मुताबिक विधायक संजय गुप्ता जेई से बात करते हुए एक दम भड़क गए. विधायक ने कहा है कि अगर अफसरों ने हिन्दुओं के खिलाफ हो रही कार्रवाई को बीच में रोककर सभी मामले वापस नहीं लिए तो वह न सिर्फ अफसरों का जीना मुहाल कर देंगे.

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कश्मीर पत्रकार शुजात के हत्यारों का चेहरा आया सामने, सेना ने बताया पाक का हाथ

जम्मू। घाटी के प्रभावशाली अंग्रेजी अखबार राइजिंग कश्मीर के एडिटर इन चीफ सैय्यद शुजात बुखारी की आतंकियों ने 14 जून को गोली मारकर हत्या कर दी. बुखारी को आतंकियों ने तब गोली मार दी जब वो लाल चौक स्थित अपने ऑफिस से घर जा रहे थे. इस हमले में उनके दो रक्षक भी मारे गए. इस हत्या के पीछे पाकिस्तान का हाथ बताया जा रहा है.

भारतीय सेना के ले. जनरल ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर के एक प्रतिष्ठित पत्रकार और राइजिंग कश्मीर के संपादक सैय्यद शुजात बुखारी हत्या के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. हत्या पाकिस्तानी एजंसियों ने करवाई है. बुखारी को श्रीनगर में उनके दफ्तर के बाहर बाइक सवार तीन आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इस हत्या से जुड़े आतंकियों का चेहरा सीसीटीवी में कैद कर ली गई है. घाटी में पुलिस इनको पकड़ने की कवायद तेज कर दी है. पुलसि ने कहा है कि आवाम इनको पकड़ने में हमारा सहयोग करे. शुजात बुखारी अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. शुजात बुखारी को उनके पैतृक गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया और उनके जनाजे में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया.

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तो इसलिए केजरीवाल ने मोदी सरकार को जनतंत्र विरोधी कहा

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल धरना पर बैठेने के बाद मोदी सरकार को जनतंत्र विरोधी करार दिया है. लेकिन वहीं केजरीवाल ने दिल्ली की जनता का शुक्रिया अदा किया है. जान लें कि पिछले चार दिनों से दिल्ली की राजनीति चरमरा गई है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई कैबिनेट मंत्री राज्यपाल के खिलाफ उनके निवास पर धरना दे रहे हैं तो वहीं विपक्षी पार्टी बीजेपी सीएम केजरीवाल के खिलाफ उनके घर पर धरना दे रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उनका भाई पुणे से मिलने आया, लेकिन मिलने नहीं दिया गया. इसके बाद कहा कि मोदी सरकार जनतंत्र विरोधी हैं. बता दें कि अपनी मांगों को लेकर केजरीवाल व उनके नेता आमरण अनशन पर बैठे हैं. चौथे दिन गुरूवार को मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का गुरुवार सुबह रुटीन चैकअप हुआ. चैकअप में पता चला है कि सत्येंद्र जैन की तबीयत ठीक नहीं है.

राज्यपाल के ना मिलने पर केजरीवल ने लिखा कि, आख़िर दिल्ली वाले क्या माँग रहे हैं- IAS अफ़सरों की हड़ताल ख़त्म करो, राशन की डोरस्टेप डिलिवरी लागू करो. नहीं होना चाहिए ये? दुनिया में कोई कह सकता है कि ये नहीं होना चाहिए? फिर ये लोग क्यों नहीं कर रहे? आज चौथा दिन है. इनकी मंशा ठीक नहीं लग रही है. बता दें कि इन मांगों को लेकर दिल्ली की जनता ने केजरीवाल का साथ दिया है.

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कश्मीर में पत्रकार की हत्या पर मायावती ने पीएम को दी नसीहत

लखनऊ। कश्मीर में बेखौफ व उदारवादी विचार के पत्रकार व कश्मीर राइजिंग के एडिटर इन चीफ शुजात बुखारी की हत्या पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने दुःख व्यक्त किया. साथ ही लगातार शहीद हो रहे जवानों को श्रध्दांजलि अर्पित की. इनका मानना है कि सरकार को रियल चैलेंज स्वीकार कर जन कल्याण पर ध्यान देना चाहिए. सरकार देश में शांति व्यवस्था पर ध्यान दे.

अड़ियल नीति का त्याग करें पीएम

मायावती ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार अपनी अड़ियल नीति को त्याग कर अविलम्ब देशहित में अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करे. कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टी पीडीपी व बीजेपी की गठबंधन सरकार की जम्मू-कश्मीर में होने के बावजूद वहाँ के हालात लगभग बेकाबू हैं तथा पाकिस्तान सीमा के साथ-साथ आन्तरिक राज्य में भी हिंसा व हत्याओं का दुःखद दौर लगातार जारी है. हमारे सैनिकों की लगातार शहादत हो रही है. वैसे भी शान्ति व कानून-व्यवस्था किस आवाम को पसन्द नहीं होती है, इसको ध्यान में रखकर ही केन्द्र सरकार को ख़ासकर कश्मीर नीति में परिवर्तन लाना चाहिये. इस दौरान उन्होंने गुजरात व महाराष्ट्र में दलित की पिटाई पर कड़ा रूख प्रकट करते हुए बीजेपी सरकार को घेरा.

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हत्या के चंद घंटे पहले पत्रकार शुजात बुखारी की लिखी लाइनें जो आपके दिल में…

जम्मू। वरिष्ठ पत्रकार व राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या करने के बाद पूरे देश भर में आक्रोश फूट पड़ा. देश भर के पत्रकारों ने इसकी निंदा की. साथ ही हालही में कश्मीर दौरे से लौटे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आक्रोशित हो इस कायरना हरकत बताया है. तो वहीं मुख्मंत्री महबूबा मुफ्ती अस्पताल में शुजात बुखारी की शव को देखकर फफक कर रो पड़ी. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘वह बहुत बहादुर थे जिन्होंने जम्मू कश्मीर में न्याय और शांति के लिए निडरता से संघर्ष किया. मेरी संवेदना उनके परिवार के प्रति है. वह बहुत याद आएंगे.’

हत्यारों की तस्वीरें कैद

खबरों की मानें तो हमलावरों की तस्वीर सीसीटीवी में कैद हो गई है. पुलिस इनकी खोजबीन में जुट गई है. बता दें कि कल 14 जून को शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस दौरान शुजात बुखारी के अंगरक्षकों पर भी हमला किया गया. हालांकि गोली लगने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

मौत से पहले शुजात बुखारी ने लिखा…

देश के जाने माने पत्रकारों में शुजात बुखारी अपने बेखौफ अंदाज वाली पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मृत्यु से कुछ समय पहले ही शुजात बुखारी ने ट्विटर पर तब अपने काम का जबर्दस्त बचाव किया जब दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने उन पर कश्मीर को लेकर ‘पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग’ करने आरोप लगाया. आखिर ट्वीटों में एक में लिखा था, ‘कश्मीर पर पहली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार रिपोर्ट मानवाधिकार उल्लंघन की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करती है. कश्मीर में हमने पत्रकारिता गर्व के साथ की है और जमीन पर जो कुछ होगा, हम उसे प्रमुखता से उठाते रहेंगे.’ इनकी ये बातें जिम्मेदार पत्रकारिता को दर्शाती है.

मौत के बाद भी निकला अखबार

शुजात बुखारी की हत्या के बाद भी राइजिंग कश्मीर आंतकियों को चोट करता हुआ प्रकाशित किया गया. अखबार के मुख्य पृष्ठ के जरिए शुजात बुखारी को श्रध्दांजलि दी गई. साथ ही काले रंग के जरिए संदेश दिया गया. वैसे कई पत्रकारों ने लिखा है कि इससे कश्मीर व पत्रकार की आवाज नहीं दबने वाली. गोली चलती रहे, जान जाती रहे लेकिन कश्मीर की आजाद आवाज मुल्क के कोने-कोने में जाएगी.

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हरामी व्यवस्थाः दलित ने पहनीं ‘राजपूती’ जूती-फैंसी कपड़े, भड़के राजपूतों ने पीटा

अहमदाबाद। गुजरात में एक बार फिर दलित के पहनावे को लेकर राजपूत भड़क उठे और मासूम को मारने लगे. मारने के साथ कह रहे थे कि, ‘तुम फैंसी कपड़े क्यों पहने हो’? हमारी बराबरी करेगा… इस तरह की दकियानूसी बातें बोलकर मारने लगे. इस दौरान उसने चाकू निकाल ली और दलित युवक डर के मारे बदमाशों के पैर पकड़कर माफी मांगने लगा.

खबरों की मानें तो ‘मोजड़ी’ व फैंसी कपड़े पहनने को लेकर चार राजपूत युवकों ने 13 वर्षीय एक दलित को बुरी तरह पिटाई की. गुजरात के मेहसाणा जिले के बहुचाराजी कस्बे में 14 जून को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रकाश में आया. हालांकि इस मामले को लेकर निर्दलीय विधायक व दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने उचित कार्रवाई की मांग की है.

बहुचाराजी के थाना प्रभारी आरआर सोलंकी ने बताया कि नाबालिग की ओर से मिली शिकायत के आधार पर चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि आरोप है कि भरत सिंह दरबार सहित चार राजपूत युवकों ने मोजड़ी पहनने को लेकर पीड़ित की पिटाई की.

दलित युवक का दर्द

अहमदाबाद जिला निवासी नाबालिग ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब वह बस स्टॉप पर बैठा हुआ था. इस बीच कुछ युवक आये और उससे जाति पूछी. जब उसने बताया कि वह दलित है तो उन्होंने पूछा कि दलित होने के बावजूद उसने मोजड़ी कैसे पहनी है. जब किशोर ने खुद को राजपूत बताकर अपना बचाव करना चाहा तो युवक उसे एक जगह ले गये और उसकी पिटाई की और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि, झूठ बोलता है, हमसे नजर मिलाता है. युवक ने बताया कि यदि वह उनके पैर नहीं पकड़ता उसे चाकू मार देते. बता दें कि इससे पहले गुजरात में दलितों के मूंछ, नाम में सिंह जोड़ने को लेकर मारपीट की घटना सामने आ चुकी है.

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हरामी व्यवस्थाः कुएं में नहाने पर नाबालिग दलितों को नंगा कर गांव में घुमाया

महाराष्ट्र। तीन दलित बच्चों को कुएं में नहाना के कीमत उच्च बिरादरी के लोगों ने पीटकर व नंगा घूमाकर वसूली. इस घटना की वीडियो वायरल होने पर मामला सबके सामने आया. घटना महाराष्ट्र के जलगांव जिले के जामनेर तालुका के पाहुर गांव की है. यहां पिछड़े समुदाय से आने वाले नाबालिग बच्चों को पीटने के बाद पूरे गांव के सामने नग्न अवस्था में घूमाया गया. इनकी उम्र 14-16 साल बताई जा रही है. इन किशोरों का कसूर मात्र इतना था कि वे पड़ोस के गांव वकाडी में दूसरी जाति के एक किसान के कुएं में नहाने लगे.

पुलिस के अनुसार, कुएं के मालिक ने अपने नौकर के साथ मिलकर इन दोनों के साथ बर्बरता की. 10 जून को घटी इस घटना की जानकारी बच्चों के परिजनों को वायरल वीडियो के जरिए मिली. इसके बाद पाहुर थाना पुलिस में 10 जून की रात को पीड़ित किशोरों में से एक के पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी ईश्वर जोशी और प्रहलाद लोहार को गिरफ्तार कर लिया और 11 जून को कोर्ट के सामने पेश करते हुए उन्हें जेल भेज दिया.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने आरोप लगाया, राज्य में भाजपा के आने के बाद दलितों के खिलाफ इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं.

जान लें कि वायरल वीडियो में लड़कें केवल चप्पल पहने और कुछ पेड़ के पत्ते लपेटे हुए नग्न अवस्था में घूमाया जा रहा है. लड़कों व उनके परिवार ने स्थानीय पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई. लेकिन अब उन पर कुछ प्रभावशाली गांव वालों की वजह से शिकायत लेने का भारी दबाव है.

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मायावती ने दिया ईद का पैगाम

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। भाईचारे व शांति का संदेश देते हुए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती ने देश भर में मुस्लिम समाज के लोगों व ख़ासकर उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज के लोगों को ईद की तहेदिल से मुबारकबाद व शुभकामनाएं दीं.

इस दौरान मायावती ने मौजूदा हालात पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि देश के वर्तमान हालात के मद्देनज़र पूरे मुल्क व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में अच्छी क़ानून-व्यवस्था, अमनो-अमान व लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा के लिये सार्थक प्रयास व कुदरत से दुआ भी बहुत ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि शान्ति, कानून-व्यवस्था व आमजन सुरक्षा बीजेपी सरकारों की पहली प्राथमिकता नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश व देश भर में हालात चिन्ताजनक.

इस मुबारक मौके पर अपील है कि देश के वर्तमान हालात के मद्देनजर वे अपने देश में शान्ति-व्यवस्था, आपसी भाईचारे व इन्सानियत के बढ़ावे के लिये अपने प्रयासों के साथ-साथ इस सम्बंध में कुदरत से भी ज़रूर दुआ करें, क्योंकि समाज की तरक़्क़ी में ही सभी देशवासियों व मुल्क की तरक़्क़ी निहित है और बिना अच्छी कानून-व्यवस्था एवं बेहतर शान्ति-व्यवस्था के समाज व मुल्क की तरक़्क़ी मुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव है, यह बात खासकर दल को समझना आवश्यक है.

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मायावती के करीबी पूर्व एमएलए का निधन, बसपा में शोक

लखनऊ। बसपा के करीबी पूर्व एमएलए का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. इस खबर से बसपा में शोक की लहर दौड़ पड़ी. बसपा सुप्रीमो मायावती के बहुत ही खास माने जाने वाले गोंडा के पूर्व विधायक मोहम्मद जलील खां का गुरुवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया. वे 62 वर्ष के थे. परिवारजन तत्काल उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

बसपा नेता मोहम्मद जकी ने बताया कि मायावती के बेहद करीबी रहे जलील खां ने वर्ष 2002 में अपना राजनीतिक सफर शुरू करते हुये गोण्डा विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन मामूली अंतराल से हार गए. इसके बावजूद बसपा सुप्रीमो मायावती ने भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा 2007 में बसपा के टिकट पर भाग्य आजमाने का मौका दिया. इस खबर ने बसपा को करारा झटका दिया है.

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बसपा ने तीन कद्दावर नेताओं को दिखाया बाहर का रास्ता

लखनऊ। बसपा के तीन नेताओं को एक साथ निकालने के बाद राजनीति में हलचल आ गई है. प्राप्त खबरों के अनुसार बसपा सुप्रीमो मायावती की नजरें पार्टी के तीन कद्दावर नेताओं पर टेढ़ीं हो गई हैं. उन्होंने पूर्व सांसद कैसरजहां, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामहेत भारती और पूर्व विधायक जासमीर अंसारी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निकाल दिया है. साथ ही मायावती के इस फैसले के बाद अन्य नेता चिंता में पड़ गए हैं.

बता दें कि तीनों ही नेता सीतापुर के हैं. इनमें से कैसरजहां 2009 में पहली बार बसपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं. वहीं, उनके पति जासमीर अंसारी 2007 में लहरपुर सीट से विधायक चुने गए थे. इनके अलावा रामहेत भारती हरगांव विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं. इसके बावजूद भी बसपा सुप्रीमो ने उनकी अनुशासनहीनता को नजरअंदाज किए बिना पार्टी से बाहर कर दिया.

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”अम्बेडकरवाद” को स्थापित करती फिल्म “काला”

किसी ने कहा था की “जिस विचार को आने का समय हो गया है उसे रोका नहीं जा सकता” गाँधीवाद, समाजवाद, वामपंथ के बाद ”अम्बेडकरवाद” ही वो विचार है जो भारतीय विमर्श में आ गया है.

और उसी को स्थापित करती है फिल्म “काला”…

अगर मैं कहूँ की विचारधारा के तौर पर ये भारत की ये पहली फिल्म है जिसमें अम्बेडकरवाद को दिखाया गया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. फिल्म आंबेडकर आंदोलन के प्रतीकों से भरी पड़ी है. घरों की छतों से ले कर कलाकारों के कपड़ो का नीला रंग हो, आंबेडकर, पेरियार, फूले और बुद्ध की मुर्तिया या तस्वीरें हों, बस्ती का नाम भीमवाड़ा से ले कर किरदारों का जय भीम बोलना, काला की मीटिंग पॉइंट का एक बौद्ध विहार होना आदि प्रतीक भरे पड़े हैं.

ब्लैक पैंथर आंदोलन के दौरान उत्पन्न हिप हॉप की तर्ज पर एक डांस और सिंगर ग्रुप भी है जो अमेरिकन ब्लैक क्रांति से इसको जोड़ता हुआ दिखता है. फिल्म जमीन के दर्शन को पहले सीन में ही बता देती है कि, जमीन ही इंसान की हैसियत निर्धारित करती है इस देश में. उत्तर भारत में इस फिल्म को काफी कम देखा गया है और अगर देखा जाता तो बहुत से आज कल के कथित राष्ट्रवादीयों को इस पर आपत्ति हो सकती है और उनको विवादित भी लग सकती है, बीजेपी और शिवसेना की राजनीति को एक तरह से सीधा टारगेट किया गया.

दलित-मुस्लिम एकता दिखाई गयी है. उन दलित नेताओ पर भी टिप्पणी है जो दलित कोटे से टिकट ले कर जीत जाने के बाद बिक जाते हैं. फिल्म दलितों को सन्देश देती है कि पढ़ाई करो और शाराब कभी न पियो, फिल्म वामपंथ को पूरी तरह खारिज करती है (मैं इस बात को पहले से कहता आया हूं कि वामपंथ हमारे देश के लिए नहीं है, यहाँ वर्ग भेद नहीं, जाति भेद है) फिल्म का किरदार लेनिन बाद में अम्बेडकरवाद समझ पाता है.

फिल्म उन दलितों पर भी कटाक्ष करती है जो आगे बढ़ गए है और खुद को दलितों से ही दूर रखना चाहते हैं, दलित समाज की कमजोरियां भी उजागर की गयी है. फिल्म में राम रावण के युद्ध का वर्णन करती हुई राम कथा है जिसका जिक्र करना मैं उचित नहीं समझता. फिल्म के अंदर दलितों के हाल के आंदोलनों को इधर-उधर दिखाया गया है. साथ ही दलितों का श्रम कितना महत्वपूर्ण है उसकी बानगी दलितों की हड़ताल वाली घटना दिखाती है, सफेदपोश लोगों के विचारो की संड़ांध भी है जो दलितों को सिर्फ अपराधी समझती है. फिल्म का एन्ड अवसाद पैदा करता है बिलकुल इसी तरह जैसे की आज के दौर में दलित आंदोलन है निराश. खैर फिल्म में विचारो के तौर पर इतना है की काफी कुछ लिखा जा सकता है.

वही बात करे की इस फिल्म में सिनेमा प्रेमियों के लिए क्या है तो सबसे पहले रजनीकांत जो ग्रेस और स्टाइल रजनीकांत का है उसको देख कर लगता है कि एक सत्तर साल का आदमी भी कितना जमता है अगर वो खुद पर ध्यान दे तो, सभी पचास प्लस लोगो को रजनीकांत को फॉलो करना चाहिए. दूसरा एक दृश्य है जिसमे रजनीकांत फ्लाईओवर पर अपने छाते से गुंडों को पिटता है वो सीन इतना शानदार है की उसका फ्रेम बनवा कर लगवा सकते हैं, फिल्म का ह्यूमर भी अच्छा है, अंतिम गाना और सीन भी बहुत ही शानदार है.

फिल्म की सबसे बड़ी कमी है उसकी लम्बाई ये एक घंटा कम हो सकती थी हुमा कुरैशी इतने लम्बे टाइम के लिए क्यों है समझ नहीं आता अगर उसका किरदार नहीं होता तो फिल्म को कोई फर्क नहीं पड़ता फिल्म छोटी भी होती, काफी सारी चीजों को कहने के चक्कर में निर्देशक कई जगह भटका- सा लगता है. पर क्या पता निर्देशक ने ये जान कर ही किया हो, इस फिल्म के निर्देशक है पा. रंजीत जो की अम्बेडकरवादी है जिसका दर्शन पिछली फिल्म कबाली में जो छुपा कर दिखाया वो इस फिल्म में खुल कर दिखाया है. मसान के निर्देशक नीरज घेवान वही सैराट के निर्देशक नागराजमंजुले ये तीनो ही दलित है और बॉक्स ऑफिस के सफलता के साथ दलित विमर्श को जिस सावधानी और ख़ूबसूरती से अपनी फिल्मों में स्थान दे रहे है उसके लिए ये प्रसंशा के पात्र हैं.

लेखक- मनोज कुमार जाटव​ Read Also-दाती बाबा के बाद दिल्ली की ‘गुरु मां’ ने 200 भक्तों के साथ किया ऐसा कारनामा

‘असफल’ स्टूडेंट्स को मिलेगा एडमिशन, दुबारा जारी होगा जेईई रिजल्टः आईआईटी प्रबंधन

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नई दिल्ली। जेईई में असफल छात्रों को बड़ी राहत मिलने वाली है. इससे निराश छात्रों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ेगी. आईआईटी प्रबंधन ने आपातकालीन बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए जेईई एडवांस की कटऑफ गिराकर दोबारा रिजल्ट जारी करने का फैसला किया है. इससे असफल स्टूडेंट्स को भी मौका मिलेगा.

एक भी सीट खाली नहीं…

बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के अनुसार, आईआईटी प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि आईआईटी की एक भी सीट खाली नहीं रहनी चाहिए. क्योंकि एक-एक सीट बेहद महत्वपूर्ण होती है. जेईई एडवांस में क्वालिफाइड छात्रों की संख्या कम होने पर आईआईटी प्रबंधन की इमरजेंसी बैठक आयोजित हुई थी.

13,850 अतिरिक्त छात्रों को फायदा

आईआईटी ने केंद्र सरकार के सुझावों को मानते हुए ये फैसला लिया है. इस साल जेईई एडवांस में कुल सीटों की तुलना में बेहद कम छात्रों ने क्वालिफाइ किया था जिसके चलते ये फैसला लिया गया है. बता दें कि नई मेरिट लिस्ट जारी होने से 13,850 अतिरिक्त छात्रों को फायदा होगा. इस तरह पहले के 18,138 छात्रों को मिलाकर इस बार सफल होने वाले छात्रों की संख्या 31,988 हो जाएगी. बता दें कि इस बार का सामान्य कट ऑफ 126 अंक गया था. जिसे अब बदलकर 90 कर दिया जाएगा. अन्य जानकारी शाम 4 बजे के बाद प्राप्त की जा सकती है. हालांकि इसकी आईआईटी प्रबंधन के सूचना माध्यमों से ली जा सकती है.

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सवर्णों को पीछे के दरवाज़े से बुलाकर बहुजनों के हक़ मारने की क़वायद

संघी सरकार लगातार ही बहुजनों के हक़ मारने वाले निर्णय ले रही है. एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट को कमज़ोर किया जाना, आरक्षण को अप्रभावी या कमज़ोर करने वाले निर्णय, सीट कटौती, स्कॉलरशिप कटौती जैसे कई बहुजन विरोधी निर्णय लगातार सरकार ले रही है. ताकि इसके तहत वंचित तबकों के प्रतिनिधित्व और अधिकारों के मुद्दे ख़त्म हो जाएं.

इसी कड़ी में एक निर्णय बीजेपी सरकार ने लिया है.

अभी हाल ही में, भारत सरकार ने सचिव जैसे उच्च प्रशासनिक पदों पर निज़ी क्षेत्र के पेशेवरों से भर्ती के आवेदन मंगवाएं हैं. इस विज्ञापन में कहीं भी आरक्षण का उल्लेख नहीं है. ज़ाहिर तौर पर इससे सरकार बैकडोर इंट्री के जरिये सवर्णों को प्रवेश देने जा रही है. यानि अब उच्च ब्यूरोक्रेटिक पदों पर आने के लिए यूपीएससी की परीक्षा पास करने की ज़रूरत नहीं है, इसके लिए सिर्फ सवर्ण होना ही काफी है.

ऐसे में, ऐसे लोग जो निज़ी क्षेत्रों में काम करते हुए संघी सरकार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहें हैं उन्हें बंदरबांट के जरिये प्रशासन में प्रवेश मिल जाएगा. वे लोग वंचित तबकों के हक़ तो मारेंगे, बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों के एजेंट के रूप में नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करेंगे. साथ ही एक वेलफेयर स्टेट को प्राइवेट कॉरपोरेट ऑफिस की तरह ही ट्रीट करेंगे. सरकार ने प्रशासन की स्टीलफ्रेम ब्यूरोक्रेसी में अपने ब्राह्मणवादी तत्वों को घुसाना शुरू कर दिया है.

यह विज्ञापन यूपीएससी के माध्यम से होने वाली भर्ती की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समाप्त करता है. इसके कारण अनुसूचित जाति की 15%, अनुसूचित जनजाति की 7.5% और ओबीसी की 27% आरक्षित सीटों पर सलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों के हक़ मारे जाएंगे. अब तक ऐसे 10 पदों पर भर्ती हुई है, जिनमें से संवैधानिक अधिकार के तहत 05 पद आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को दिए जाते पर ये पद सवर्ण उम्मीदवारों को मिल गए.

जागिये! प्रोमोशन पर आरक्षण के निर्णय पर ताली बजवा कर सरकार आपके मुँह से निवाला छीन ले गई है.

-दीपाली तायड़े

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