चिकन खाने वालें चौकन्ना! हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

नई दिल्ली। चिकन खाने को लेकर कई तरह की खबर सामने आ चुकी हैं. हालांकि मुर्गे को जल्द तैयार करने व वजन बढ़ाने के लिए कई प्रकार की दवाईयों को इस्तेमाल किया जाता है. इसको लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. लेकिन कोर्ट ने हेल्थ का ध्यान रखकर फैसला लिया और दवा बेचने को वालों फटकार लगाई है.

जानकारी के मुताबिक मुर्गे का वजन बढ़ाने के लिए उसे एंटी बायोटिक इंजेक्शन दिए जाते हैं. जिसका बुरा असर चिकन खाने वालों की सेहत पर भी पड़ता है. यह जानकारी मुंबई हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई है.

इस जानकारी के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने मामले में नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि आगे से बगैर प्रिस्क्रिप्शन के ऐसी दवाइयों की बिक्री न हो. पशुओं के लिए किसी भी तरह की दवाई बगैर प्रिस्क्रिपशन के बेचने पर पाबंदी लगनी चाहिए. दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर सिटीजन सर्विस फॉर सोशल वेलफेयर और एजुकेशन ने एक याचिका मुंबई हाईकोर्ट में दायर की थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से मुंबई हाईकोर्ट की जानकारी में यह बात सामने आई है. इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए इस मामले में एक शपथ पत्र पेश करने के भी आदेश दिए है.

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मोदी का सर्जिकल स्ट्राइक था फर्जीकलः बीजेपी पूर्व मंत्री

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नई दिल्ली। बीजेपी के दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने ही सरकार के नीति व कामों को फर्जीकल बताया है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण शौरी ने एक बार फिर अपनी ही सरकार पर निशाना साधा है. शौरी ने कहा कि बीजेपी द्वारा सिर्फ हिन्दू मुसलमान के बीच दूरी पैदा करके राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश हो रही है. इतना ही नहीं इनका कहना है कि मोदी सरकार में सर्जिकल स्ट्राइक नहीं बल्कि फर्जीकल स्ट्राइक किया गया. इसके बाद बीजेपी में बलाव मच गया है.

कश्मीर आजादी को लेकर हालही में बयान देने पर घिरे कांग्रेस नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की बुक लॉन्च पर पहुंचे शौरी ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर बोला. साथ ही कहा कि सरकार के पास पाकिस्तान, चीन और बैंकों के लिए कोई नीति नहीं है. कश्मीर पर बयान को लेकर विवादों में सैफ़ुद्दीन सोज़ से कांग्रेस किनारा करती दिख रही है. सोमवार को उनके किताब के लॉन्च पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम समेत कई बड़े कांग्रेसी नेता दूर रहे. हालांकि इस दौरान जयराम रमेश दर्शकों के बीच बैठे दिखे. इनके बयान के बाद राजनीति में धमाल मचा दिख रहा है.

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कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी का ‘काला दिवस’

नई दिल्ली। आज 26 जून को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के 43 साल पूरे हो गए हैं. 21 महीनों तक देश में आपातकाल लागू रहा था. बीजेपी आज तक कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरती है. मंगलवार को भाजपा काला दिवस के तौर पर मना रही है. यहां तक की प्रधानमंत्री ने भी बीजेपी पर करारा वार किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर लगातार तीन ट्वीट किए हैं. आपातकाल के दौरान लड़ने वाले लोगों को उन्होंने सलाम किया है. दूसरे ट्वीट में पीएम ने आपातकाल को काला समय करार देते हुए कहा- भारत आपातकाल को एक काले समय के तौर पर याद रखता है जहां हर संस्थान को दबाया गया और भय का माहौल बनाया गया. केवल लोग ही नहीं बल्कि विचारों और कलात्मक स्वतंत्रता को राजनीतिक सत्ता के लिए बंधक बना लिया गया था.

तीसरे ट्वीट में पीएम मोदी ने गणतंत्र को मजबूत बनाने का आग्रह करते हुए लिखा- आइए हम सब मिलकर हमेशा अपनी लोकतांत्रिक आस्था को मजबूत बनाने के लिए काम करें. लिखना, बहस करना, विचार करना, सवाल करना हमारे लोकतंत्र के महत्वपूर्ण पहलू हैं जिसपर हमें गर्व है. कोई भी शक्ति कभी भी हमारे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों को कम नहीं कर सकती है.

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हरामी व्यवस्थाः बाइक चलाने के कारण दलित को सरपंच के भाईयों ने पीटा

प्रतीकात्मक फोटो

भोपाल। घोड़ी चढ़ने के बाद अब बाइक चलाने पर एक दलित युवक की पिटाई की घटना सामने आई है. प्राप्त खबर के मुताबिक मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिला में एक दलित को बाइक चलाने के कारण पीटे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. दलित लड़के का गुनाह सिर्फ इतना था कि उसने सरपंच के घर के सामने से बाइक चलाते हुए गया था.

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार जिले से लगभग 60 किलोमीटर दूर धरमपुरा में 30 वर्षीय दलित को उंची जाति के लोगों ने जमकर पीट दिया. ऐसा बताया जा रहा है कि वह मोटरसाइकिल पर सवार होकर सरपंच के बड़े भाई के घर के पास से गुजर गया. दलित व्यक्ति का बाइक पर सवार होकर सरपंच के बड़े भाई के घर के सामने से निकलने के बाद वे लोग बौखला गए और लाठी-डंडे से पिटाई करने लगे.

जमीन पर बैठा कर…

प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक रामसेवक झा ने बताया कि 21 जून को सरपंच के बड़े भाई विनोद कुर्मी ने अपने दो भाइयों और पड़ोसी दिनेश यादव के साथ मिलकर सामूहिक तौर पर दलित शख्स दयाराम की कथित तौर पर पिटाई कर दी. झा ने बताया कि पीड़ित दयाराम ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की. घटना का वीडियो भी 23 जून को वायरल हुआ जिसमें सरपंच हेमंत कुर्मी का भाई विनोद कुर्सी पर बैठा है और वह जमीन पर बैठे दयाराम के साथ मारपीट कर रहा है. पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ सम्बद्ध धाराओं में मामला दर्ज कर कल रात गांव से ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.

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मुंबई में भारी बारिश, अबतक आठ मरे

प्रतीकात्मक फोटो

मुबंई। मुंबई में भारी बारिश ने एक बार फिर तबाही मचा रखी है. भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त है. खबर यह भी है कि पवई इलाके में मौजूद पवई लेक और डैम पूरी तरह भर चुकी है. ऐसा बताया जा रहा है कि जून में जब से मॉनसून शुरू हुई है, अब तक 8 लोगों की जान गई है.

रविवार शाम से अबतक मुंबई में चार लोगों की मौत हुई है. वहीं आज़ाद मैदान के पास एक पेड़ गिर जाने से दो लोगों की मौत हो गई थी और आज मलाड पश्चिम में एक 15 साल के युवक की गड्ढे में डूबकर मौत हो गई. जबकि ठाणे में दीवार गिरने से एक 13 साल की बच्ची की मौत हो गई. बारिश की वजह से हिंदमाता, चेंबूर, लोअर परेल जैसे कई इलाक़ों में जलभराव हो गया है.

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक मुम्बई सहित कोंकण इलाके में भारी बारिश का अनुमान लगाया है जिसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी आएगी. भारी बारिश का असर मुंबई लोकल पर भी पड़ा है. मिली जानकारी के मुताबिक लोकल 5-7 मिनट की देरी से चल रही है. इस बीच दिल्लीवासियों के लिये अच्छी खबर मौसम विभाग की ओर से आ रही है. अनुमान है कि दिल्ली में मानसून 29 जून को तक पहुंच जाएगा.

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दिल्ली में शुरू हुआ ‘चिपको आंदोलन’, हाईकोर्ट ने रोका

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नई दिल्ली। प्रदूषण की मार झेल रही देश की राजधानी में करीब सोलह हजार पेड़ों को काटने को लेकर हंगामा शुरू हो गया है. इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए हजारों लोग अपनी जान लूटाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं. फिलहाल मामला को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. फिर भी आंदोलकारी पेड़ों को बचाने के लिए सरकार के खिलाफ उतर आए हैं.

सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार एक याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 जुलाई तक पेड़ न काटने का आदेश दिया है. इस मामले में एनबीसीसी की ओर से कहा गया कि एनजीटी में ये मामला बहुत साल चला और अंत मे एनजीटी ने पेड़ काटने की अनुमति दे दी. हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट में एनजीटी के आदेश का हवाला नहीं दिया. लेकिन हाईकोर्ट ने सवाल किया कि एनजीटी कैसे इतने पेड़ों को काटने की अनुमित दे सकता है. साथ ही यह भी कहा कि क्या दिल्ली इतने पेड़ों की कटाई झेल पाएगी? हालांकि इसको लेकर 4 जुलाई को सुनवाई होनी है. ऐसे में एनजीटी में होने वाली अगली सुनवाई तक दिल्‍ली में पेड़ नहीं काटे जा सकते हैं.

15 हजार आंदोलनकारी जान देने को तैयार!

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि साउथ दिल्‍ली में करीब 20 हजार पेड़ काटे जाने की योजना है. जबकि दिल्‍ली में 9 लाख पेड़ों की पहले से ही कमी है. सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली में ‘चिपको आंदोलन’ शुरू हो गया है जिसके लिए करीब 15 हजार लोग पेड़ों को बचाने के लिए आगे आए हैं. रविवार को आम आदमी पार्टी के  विधायक सौरभ भारद्वाज ने वीडियो जारी कर कहा था कि किसी भी कीमत पर दिल्ली में पेड़ कटने नहीं देंगे.

बता दें कि दक्षिण दिल्ली में 7 कॉलोनियों के पुन: विकास के लिए सरकार ने 14,000 पेड़ काटने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ रविवार को स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने विरोध-प्रदर्शन किया. सरोजनी नगर में लगभग 15000 प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को गले लगाकर चिपको आंदोलन की शुरुआत की. उल्लेखनीय है कि ‘चिपको आंदोलन’ की शुरूआत 1970 के दशक में उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश) से हुई थी.

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2019 चुनावः मायावती-अखिलेश ने लिया ऐसा फैसला, बीजेपी हैरान!

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नई दिल्ली। मायावती-अखिलेश की जोड़ी ने बीजेपी की नींद उड़ा रखी है. एक के बाद एक चौकानें वाले फैसलें लेने लगे हैं. यूपी में बसपा व सपा का गठबंधन का रास्ता साफ दिख रहा है लेकिन चुनाव से पहले ही दोनों पार्टी के सुप्रीमो मिल-जुल कर आगे बढ़ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि अपनी पार्टी तक के फैसलों पर दोनों एक-दुसरे से राय-मसौदा कर रहे हैं. इससे साफ दिख रहा है मायावती-अखिलेश मिलकर बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में हैं.

द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सीट-शेयरिंग फॉर्मूला निकालने की जुगत में लगे इन दलों ने एक बड़ा फैसला किया है. सीट-शेयरिंग फॉर्मूला के आधार पर दोनों ही पार्टी किसी भी दल बदलु को अपनी पार्टी में जगह नहीं देगी. यानी कि सपा, अपनी पार्टी में दल बदलने वाले किसी बसपा नेता को शामिल नहीं करेगी और इसी तरह बसपा भी सपा के किसी नेता को शामिल नहीं करेगी. हालांकि इस तरह की कोई लिखित सहमति नहीं बनी है लेकिन इस बात पर दोनों पक्षों की तरफ से अनौपचारिक सहमति जरूर बन गई है. अब इससे एक बात तो साफ हो गई कि दोनों दल के नाखुश नेता दल छोड़ने से पहले लाख बार सोचेंगे.

हालांकि अभी महागठबंधन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन दोनों ही दल द्वारा फूंक-फूंक कर कदम रखना व साथ काम करना बहुत कुछ बता रहा है. कर्नाटक में विपक्ष का एकजुट होना व यूपी उप चुनाव में मिलकर भाजपा को हराने के बाद महागठबंधन चर्चा में बना हुआ है. साथ ही अखिलेश द्वारा मायावती के लिए सीटों को त्यागने के बयान के बाद इस फैसले ने बीजेपी की बैचेनी बढ़ा दी है.

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मुजफ्फरनगर में सरवर पीर के पास ब्लास्ट, दो की मौत, आधा दर्जन घायल

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। मुजफ्फरनगर सोमवार की सुबह धमाके से गूंज उठा. मुजफ्फरनगर शहर में सोमवार सुबह एक भीषण विस्फोट हो गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार दो लोगों की मौत हो गई और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. सूचना मिलते ही थाना सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंच कर जांच में लगी है. पुलिस ने आनन-फानन में सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया. इसके बाद पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरवर पीर के पास कबाड़ी की दुकान में पुराना स्क्रैप तोड़ते वक्त ब्लास्ट हो गया. इस घटना में इंदिरा कॉलोनी निवासी ताजीम और शहजाद आलम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन लोग घायल हो गए. युसूफ और नवाजिश की हालत गंभीर होने के कारण मेरठ के लिए रेफर कर दिया है.  बता दें कि कैसर जहां नौशाद और शोएब जिला अस्पताल में भर्ती है. इलाके में पुलिस बल तैनात कर दी गई है.

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बेटी के लिए मासूम बेटे की हत्या, मां गिरफ्तार

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नई दिल्ली। एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जो कि आपको झकझोर कर रख देगी. लोग बेटे के लिए बेटी की हत्या कर देते हैं लेकिन एक मां ने बेटी के लिए मासूम बेटे को पानी में डूबोकर मौत के घाट उतार दिया. शव पानी से भरे टब में पड़ी मिली. पुलिस ने शव जब्त कर लिया है.

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक महिला ने ‘बेटी’ की चाह में अपने 10 महीने के बेटे की हत्या कर दी. नेटवर्क18 की खबर के अनुसार यह मामला तीन दिन पुराना है. तीन दिन पहले महिला ने पुलिस थाने में अपने बेटे के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने जब बच्चे की तलाश शुरू की तो शक की सुई मां की तरफ भी घूमी. जब पुलिस ने महिला के घर की तलाशी ली तो बाल्टी से 10 महीने के मासूम का शव मिला, जिसके बाद यह मामला प्रकाश में आया.

हालांकि पूछताछ में महिला ने अपने मासूम बेटे की हत्या की बात स्वीकार कर ली है. बताया जा रहा है कि पहले बेटे के बाद महिला बेटी चाहती थी, लेकिन दूसरी बार भी उसने बेटे को जन्म दिया. परिवार के डर और डर के कारण मां ने बेटे की हत्या कर दी. मामले में पुलिस ने हत्या की आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है.

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बसपा की राह पर बीजेपी, 2019 में जीतने की तैयारी!

नई दिल्ली। एक बात तो साफ हो चुकी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती पीएम नरेंद्र को कड़ी टक्कर देंगीं. शायद इसलिए बीजेपी बसपा की नकल कर मात देने की तैयारी में जुटी है. वैसे यह जानकार हैरानी होगी कि बसपा जिन रणनीतियों पर सालों से चुनाव लड़ रही है उसी राह पर चलकर बीजेपी 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी में है. अमित शाह व उनकी टीम बहुजन समाज पार्टी की तर्ज पर काम कर रही है.

24 जून को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी 543 लोकसभा क्षेत्रों में प्रभारी नियुक्त करेगी. अगले वर्ष 2019 के संसदीय चुनावों की तैयारी शुरू करने के लिए हर राज्य में 11 सदस्यीय समिति की स्थापना करेगी. बीजेपी ऐसा पहली बार कर रही है जबकि बसपा इससे पहले इन नीतियों पर चुनाव लड़ते आ रही है. पूर्णं बहुमत वाली मोदी सरकार बनाने में भी बसपा की रणनिती का बहुत बड़ा हाथ था. 2014 लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने हर बूथ पर कैंडिडेट नियुक्त किया था. बूथ पर कैंडिडेट नियुक्त करने की शुरूआत बसपा के संस्थापक कांशीराम ने की थी.

इसके अलावा बीजेपी 2019 के लिए 11 सदस्यीय पैनल बना रही है जिसको “चुनावी तैयारी टोली” कहा जाएगा. ये टीम स्पेशल टास्क पर काम करेगी. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सभी राज्यों के दौरा करना आरंभ कर दिया है. शाह ने इसकी शुरूआत 10 जून से छत्तीसगढ़ की है. वैसे इससे साफ पता चलता है कि रणनीतियों की नकल करना बीजेपी के लिए कोई नई बात नहीं है.

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यूपी में आधा दर्जन दलितों ने हिंदू धर्म छोड़ा

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। सवर्णों के अत्याचार से तंग आकर उत्तर प्रदेश के दलित हिंदू धर्म छोड़ रहे हैं. हरियाणा के बाद यूपी के करीब आधा दर्जन दलित परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाया. हिंदू धर्म छोड़ने वाले दलितों का कहना है कि हिंदू धर्म के लोग सिर्फ उनका इस्तेमाल करते हैं, अत्याचार करते हैं. ऐसे धर्म में रहने का कोई मतलब नहीं है.

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अमीनगर सराय में सिंघावली अहीर गांव के आधा दर्जन दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया. अमर उजाला की खबर के अनुसार बौद्ध संत प्रियंतीस भंते ने इन्हें दीक्षा दी. वहीं धर्म में शामिल करने के प्रमाणपत्र भी सौंपे. धर्म परिवर्तन करने वाले परिवारों का कहना है कि दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं. इसी की वजह से यह कदम उठाया गया है. रविवार को धर्म परिवर्तन करने वाले मुन्ना लाल, बाबू, अजीत, अजय, मोनू, सोनू ने कहा कि समाज पर हर रोज अत्याचार हो रहे हैं. आज भी उन्हें छूआछूत की नजरों से देखा जाता है. कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं होती. ऊंची जाति के लोग उन्हें हीन भावना से देखते हैं.

जबकि ग्राम प्रधान सतवीर यादव ने बताया कि बौद्ध धर्म दलितों ने क्यों अपनाया है इसकी जानकारी नहीं है. गांव में तो आज तक कोई उन पर अत्याचार भी नहीं हुआ है. वह हमेशा उनके पक्ष में खड़े रहे हैं. शनिवार को दूसरे समुदाय के व्यक्ति से मामूली विवाद में झगड़ा हो गया था, जिसको शांत कराया. वैसे यहां पर दलितों को करीब 200 परिवार रहते हैं. संभावना है कि इसके बाद अन्य दलित भी बौध्द धर्म का रास्ता अपनाएंगे.

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बसपा ने दिल्ली में बदला प्रदेश अध्यक्ष

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की दिल्ली इकाई में बड़ा फेरबदल हो गया है. खबर के मुताबिक कई सालों से दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद पर जमें सी.पी सिंह की छुट्टी हो गई है. उनकी जगह पार्टी के मिशनरी कार्यकर्ता और पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. 22 जून को बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती के दिल्ली आवास पर हुई बैठक में बसपा प्रमुख ने यह फैसला लिया.

सुरेन्द्र सिंह बहुजन समाज पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं. साल 1998 में पार्टी ज्वाइन करने के बाद वह लगातार बसपा से जुड़े रहे हैं. सुरेन्द्र सिंह ने पहला चुनाव बसपा के टिकट पर 2003 में रोहतास नगर विधानसभा से लड़ा. इसमें वह तीसरे नंबर पर रहें. 2008 में बसपा ने उन्हें गोकुलपुरी से टिकट दिया. सुरेन्द्र सिंह इस सीट से 3800 वोटों से जीतकर पहली बार विधायक बने. हालांकि 2013 में सुरेन्द्र सिंह सीटिंग विधायक रहते हुए भी पार्टी की अंदरुनी गुटबाजी का शिकार हो गए और पार्टी का टिकट हासिल नहीं कर पाएं.

तब सुरेन्द्र सिंह ने गोकुलपुरी से निर्दलीय चुनाव लड़ा. हालांकि वह जीत न सकें और महज 1900 वोटों से दूसरे नंबर पर रहें. वोटों के इस मामूली अंतर से पराजित हो जाने के बाद सुरेन्द्र सीधे बसपा प्रमुख मायावती की नजर में आ गए जिन्होंने सुरेन्द्र को वापस पार्टी में बुला लिया.

सुरेन्द्र सिंह टिकट कटने से मायूस तो थे लेकिन बहुजन आंदोलन के सच्चे सिपाही की तरह वह एक बार फिर से बसपा के लिए काम करने में जुट गए. इस बीच अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी ने उनपर लगातार डोरे डाले और उन्हें आप में शामिल करने की कोशिश में जुटे रहे लेकिन सुरेन्द्र सिंह ने मिशन का दामन थामे रखा. आप की लहर के बावजूद सुरेन्द्र सिंह 30500 वोट हासिल करने में कामयाब रहे. उनकी निष्ठा को देखते हुए बसपा प्रमुख ने आखिरकार अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी है.

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फ़िल्‍म प्रेमक बसातः दो मजहब के प्रेम की बेताब हवा

PC-dailyhunt

नई दिल्ली। मैथिली फिल्‍म ‘प्रेमक बसात’ इन दिनों खासे चर्चा में है. प्रेम की नई परिभाषा गढ़ने वाली फिल्म के ट्रेलर ने दिलों को बैचेन कर दिया है. फिल्म के लेखक रूपक शरर ने प्रेम की नई कहानी लिखी है. यह एक ऐसी फिल्म है जिसमें कि विलेन नहीं है. समाज में प्रेम की हवा लेकर आ रहे निर्देशक रूपक शरर की बातचीत रवि रणवीरा, दलित दस्तक से हुई. इन्होंने जो फिल्म के बारे में बताया वो तो वाकई बेताब कर देने वाला है…

मैथिली फिल्‍म ‘प्रेमक बसात’, बतौर लेखक व निर्देशक रूपक शरर की पहली फिल्म है. इनका कहना है कि प्रेम बहुत पुराना विषय है लेकिन ऐसी कहानी भारतीय सिनेमा में पहली बार आ रही है. ज्यादातर प्रेम कहानियां जात-पात, अमीरी-गरीबी, विलेन-हीरो तक ही सिमट कर रह जाती हैं, लेकिन मैथिली फिल्‍म ‘प्रेमक बसात’ इससे हटकर है. जो कि दर्शकों देखने के लिए विवश करेगी.

दो मजहब के प्रेम को बताने वाली यह फिल्म, यू-ट्यूब से लेकर सोशल मीडिया व मेनस्ट्रीम मीडिया में धमाल मचाई हुई है. ट्रेलर आने के बाद बेसब्री से फिल्म का इंतजार किया जा रहा है. हालांकि इसको लेकर निर्देशक का कहना है कि निर्माण कार्य अंतिम दौर में है. सेंसर आदि के बाद फिल्म बहुत जल्द पर्दे पर आ जाएगी.

वैसे तो मैथिली फिल्म का बाजार व्यापक नहीं है फिर भी मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए फिल्म निर्माता वेदांत झा व कार्यकारी निर्माता कुणाल ठाकुर ने दिल खोलकर हाथ बढ़ाया. इनका मानना है कि इस फिल्म से मैथिली सिनेमा को नया बाजार मिलेगा. वैसे इस फिल्म के रिलीज के लिए प्रेमक बसात की टीम नेपाल, कतर, दुबई, दोहा आदि जाने वाली है. संभावना है कि नेपाल में फिल्म सबसे पहले रिलीज होगी.

फिल्म के अभिनेता पियूष कर्ण व अभिनेत्री रैना बनर्जी की पहली फिल्म है.

वैसे फिल्म की शूटिंग बिहार में हुई है. पिछले साल सितंबर में फिल्म का काम शुरू किया गया था. ‘प्रेमक बसात’ का म्‍यूजिक रिलीज मुंबई में एक भव्‍य कार्यक्रम के दौरान कुछ दिन पहले ही संपन्‍न हुआ. इस फिल्म का म्यूजिक हिंदी व भोजपुरी सिनेमा के हस्तियों के हाथों किया गया. फिल्‍म ‘प्रेमक बसात’ कई मामलों में खास है, जिसमें म्‍यूजिक भी प्रमुख है.

प्‍ले बैक सिंगर उदित नारायण के बेटे

‘प्रेमक बसात’ मैथिली की पहली ऐसी फिल्‍म है, जिसमें मशहूर प्‍ले बैक सिंगर उदित नारायण के बेटे आदित्‍य नारायण ने पहली बार अपनी आवाज में गाना गया है. प्रेमक बसात के सभी गानें टी-सीरीज के यू-ट्यूब चैनल से लांच होंगे. रूपक शरर का कहना है कि फिल्‍म के सभी गानें बेहतरीन म्‍यूजिक और लिरिक्‍स के साथ बने हैं. इस फिल्‍म के गानें मैथिली की मिठास बढ़ा देंगे. इस फिल्म का संगीत सरोज सुमन, प्रवेश मल्लिक व एस कुमार का है. जेएमके इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’ जल्द ही सिनेमा घरों के पर्दे पर आ जाएगी.

Read Also-सनी लियोन का बेकाबू होने वाला वीडियो वायरल
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लश्‍कर-ए-तैयबा की ऑनलाइन मैग्जीन, तबाही का संदेश

नई दिल्ली। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा ने ऑनलाइन मैग्जीन जारी की है. इसके द्वारा लश्‍कर-ए-तैयबा ने कश्मीर में तबाही का संदेश दिया है. लश्कर ने कहा है कि साल 2018 कश्मीर घाटी में भारतीय सुरक्षाबलों के लिए मुश्किल होने वाला है. इसके लिए हमारे साथी काम कर रहे हैं. हम लोगो कश्मीर की आजादी की लड़ाई में पूरा सहयोग करेंगे. इस तरह की बातों को लेकर लश्‍कर-ए-तैयबा ने खौफनाक संदेश दिया है.

कश्मीर में ‘आम आदमी के संघर्ष’ में मदद…

लश्‍कर की इस मैग्जीन का नाम “Wyeth” है. इसमें लश्कर के प्रवक्‍ता अब्‍दुल्‍ला गजनवी ने इंटरव्‍यू देकर अपनी दिली तमन्ना जाहिर की है. इसके अलावा मैग्जीन में उन आतंकी हमलों की एक लिस्‍ट भी दी गई है जो साल 2017 में इसे कैडर्स की ओर से अंजाम दिए गए. मैग्जीन में कहा गया है कि कश्मीर में वह ‘आम आदमी के संघर्ष’ में मदद कर रहा है.

गजनवी ने इंटरव्यू में इस सवाल का भी जवाब दिया है कि क्‍या लश्‍कर, पाकिस्‍तान सेना का ही अंग है? कश्‍मीर में आजादी के अधूरे एजेंडे को पूरा करने के लिए संघर्ष को नैतिक और कानूनी तौर पर समर्थन देना पाकिस्‍तान की मजबूरी है.  गजनवी ने कहा कि अब तक लश्‍कर की ओर से कुरान और हादिथ पर आधारित साहित्‍य को वितरित किया जाता रहा है.

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर अरुण चौधरी ने कहा, लश्कर हमेशा से टेक सेवी रहा है. वह सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय लड़कों को उग्रवाद की ओर धकेलने में लगा रहता है. घाटी तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन मैग्जीन लश्कर के लिए सबसे अच्छा तरीका है.

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स्कूल टॉयलेट में जाकर लड़की को पंद्रह बार चाकू मारने वाला गिरफ्तार

गुजरात। अपनी ही जूनियर को 15 बार चाकू से गोदकर बेहरमी से मौत के घाट उतारने वाले को पुलिस ने धर दबोचा है. गुजरात पुलिस ने वडोदरा स्कूल के 10वीं क्लास में पढ़ने वाले एक आरोपी छात्र को गिरफ्तार किया है. उसके ऊपर शुक्रवार को टॉयलेट में अपने जूनियर की हत्या करने का आरोप है. इस घटना ने पिछले साल हरियाणा के गुरुग्राम की दर्दनाक घटना की याद ताज़ा कर दी. जब वहां के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में एक छात्र की गला रेतकर टॉयलेट के अंदर ही हत्या कर दी गई थी. और उसमें भी आरोपी सीनियर छात्र ही था.

3चाकू और रेड चिली सॉल्यूशन से भरी बोतल

बाथरूम में मिला हत्या से जुड़ा सामान

बारनपुर स्थित भारती विद्यालय के आरोपी छात्र को चाकू मारते हुए छात्रों ने देखा था. इसकी पुष्टि करते हुए  पुलिस कमिश्नर मनोज शशिधर ने बताया कि चार स्कूली छात्रों ने आरोपी को चाकू मारते हुए देखा था. पुलिस ने बताया कि आरोपी का एक स्कूल बैग स्कूल के पास मंदिर के चबूतरे पर मिला है. इसके अंदर तीन चाकू और एक रेड चिली सॉल्यूशन से भरी बोतल मिली है. एक अधिकारी ने बताया कि एक और 12 इंच का चाकू लड़की के शव के पास से बरामद किया गया है.

स्कूल से जुड़े एक स्टाफ ने बताया कि 9वीं के छात्र ने इसी साल दाखिला लिया था. उन्होंने आगे बताया- “सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे प्राइमरी के छात्रों ने टीचर्स को बताया कि बाथरूम में एक लाश पड़ी हुई है.” इस घटना के बाद स्कूल में मातम पसर गया था. पुलिस इस मामले को लेकर और लोगों से पूछताछ कर रही है.

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अमित शाह फिर घिरे, नोटबंदी में सबसे ज्यादा 750 करोड़ रुपये जमा

PC-abplive

नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष एक बार फिर चर्चा में हैं. नोटबंदी में सबसे ज्यादा नोट जमा करने को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं. बताया जा रहा है कि भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह जिस जिला सहकारी बैंक के निदेशक हैं, वहां नोटबंदी के फैसले के बाद करीब 750 करोड़ रुपये जमा किए गये थे.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक मुंबई के एक आरटीआई कार्यकर्ता की याचिका के जवाब में यह खुलासा हुआ है. गौरतलब है कि 08 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था और जनता को बैंकों में अपने पास जमा पुराने नोट बदलवाने के लिए 30 दिसंबर, 2016 तक यानी 50 दिनों का समय दिया गया था.

बैंक के निदेशक अमित शाह

इस फैसले के पांच दिन बाद यानी 14 नवंबर, 2016 को सरकार की ओर से यह निर्देश दिया गया कि किसी भी सहकारी बैंक में नोट नहीं बदले जाएंगे. ऐसी आशंका थी कि जमा काले धन को सफेद करने के लिए ऐसे बैंकों का दुरुपयोग हो सकता है. इस आरटीआई के जवाब में यह सामने आया है कि अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) ने इन्हीं पांच दिनों में 745.59 करोड़ मूल्य के प्रतिबंधित नोट जमा किए. बैंक की वेबसाइट के मुताबिक अमित शाह अब भी इस बैंक के निदेशक हैं और इस पद पर कई सालों से बने हुए हैं. साल 2000 में वे इस बैंक के अध्यक्ष भी थे. 31 मार्च 2017 तक एडीसीबी में कुल 5,050 करोड़ रुपये जमा हुए थे और वित्त वर्ष 2016-17 का इसका मुनाफा 14.31 करोड़ का था.

मनोरंजन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ‘नोटबंदी के फैसले के  बाद राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों में जमा हुई राशि के बारे में पहली बार आरटीआई के तहत कोई जानकारी सामने आई है और यह चौंकाने वाली है.’ इससे पहले भी अमित शाह अपने बेटे की कंपनी के ट्रांजेक्शन को लेकर चर्चा में थे.

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ग्वालियर में बसपा के कद्दावर नेताओं ने बिगुल फूंका

ग्वालियर। बसपा राज्य के प्रमुख स्थानों पर जाकर पार्टी को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है. भोपाल के बाद ग्वालियर में पार्टी ने 2019 के लिए रणनीति के तहत कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा किया. मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर पार्टी की गतिविधियां तेज दिख रही हैं. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामअचल राजभर ने कार्यकर्ताओं की बातें सुनी.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 22 जून को डॉ. भगवत सहाय मेडिकल सभागार आमखो कम्पू ग्वालियर मे जोन स्तरीय, जिला, विधानसभा एवं सेक्टर स्तरीय कार्यकर्ता समीक्षा व प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता रामअचल राजभर ने किया. इस दौरान रामअचल राजभर ने कहा कि देशभर में बदलाव की लहर चल रही है. हमारी पार्टी की पकड़ मजबूत हो रही है. हमें और भी तेजी से मिलकर काम करना होगा. साथ ही आने वाले लोकसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो के सपनों को साकार करना है.

इस मौके पर मध्य प्रदेश के बसपा प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने कहा कि कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों के लोगों के साथ मिलकर पार्टी की बातों को बताएं. साथ ही लोगों की मदद भी करें. इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ.अशोक सिध्दार्थ, भूपेन्द्र मौर्य, पी.एस मंडेलिया, मानसिंह कुशवाह, डीपी चौधरी, रामवीर सिंह कुशवाह, मनीष कत्रोलिया व कार्यकर्ता मौजूद थे.

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दिल्ली बसपा में बड़े फेरबदल की खबर, अध्यक्ष सी.पी सिंह की छुट्टी तय

फाइल फोटो

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की दिल्ली इकाई में बड़े फेरबदल की खबर आ रही है. सूत्रों से आ रही खबर के मुताबिक कई सालों से दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद पर जमें सी.पी सिंह की छुट्टी तय मानी जा रही है. उनकी जगह नया प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा, यह अभी तय नहीं है लेकिन पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह का नाम सबसे आगे है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह के नाम पर मुहर लगा सकती हैं.

सुरेन्द्र सिंह काफी लंबे समय से पार्टी से जुड़े हैं. वह बसपा के टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं. लेकिन पार्टी की अंदरुनी राजनीति का शिकार होने के कारण उनका टिकट काट दिया गया था, जिसकी वजह से वह निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे. हालांकि पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने किसी दूसरी पार्टी को ज्वाइन नहीं किया और बसपा के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी. उनकी निष्ठा को देखते हुए आखिरकार अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलना लगभग तय माना जा रहा है.

बीजेपी को झटका देने वाले जस्टिस चेलमेश्वर के वो फैसले

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 7 साल तक सेवा देने के बाद जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को रिटायर हो गए. कई मौके पर जस्टिस चेलमेश्वर का कार्यकाल विवादित रहा. और जाते-जाते भी वो चर्चा के केंद्र में रहे. इनके फैसलों ने आम आदमी को राहत दी तो वहीं सत्ता के हिटलरों को करारी मात भी दी. इनके पूरे कार्यकाल को देखें तो इस दौरान उन्होंने भाजपा को कई झटके दिए.

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने चीफ जस्टिस की दो बार खिलाफत की. इन तमाम फैसलों के कारण जस्टिस चेलमेश्वर का कार्यकाल विवादों से भरा रहा लेकिन इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली. आइए जानते हैं इनके विवादित कोर्ट लाइफ के बारे में, जो कि बीजेपी के लिए खासे मुसीबत साबित हुए.

पहला मामला जज मामले से जुड़ा है

जज लोया की कथित हत्या के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नाम खूब चर्चा में रहा. इसको लेकर जजों का तबादला भी हुआ लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर खामोश होकर तमाशा देखने वालों में से नहीं थे. इन्होंने एमबी लोकुर और कुरियन जोसफ के साथ अदालत में केसों की चयन प्रक्रिया और 1 दिसंबर 2014 को सीबीआई के विशेष जज बी.एच. लोया की मौत के संवेदनशील मामलों को उठा गया. इसके बाद बीजेपी के पसीने छुटने लगे थे.

इसी से जुड़ा एक और मुद्दा चर्चा में रहा. यह दूसरी बार था, जब जस्टिस चेलमेश्वर सरकार के लिए सरदर्द बने.

बीजेपी व दीपक मिश्रा को लेकर कई तरह के कयास लग रहे थे कि तभी जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ जंग छेड़ दी. चेलमेश्वर ने अन्य तीन सुप्रीम कोर्ट जजों के साथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ 12 जनवरी को अभूतपूर्व प्रेस कान्फ्रेंस की. इससे जमकर बवाल मचा. उनके विरोध को देखते हुए मौजूदा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कोलेजियम के फैसलों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया. यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक बड़ी घटना रही.

तीसरा मामला आधार से जुड़ा है

आधार को बीजेपी सरकार हर जगह जोड़ रही थी. आम जनता इसे निजता का उल्लंघन कह रही थी. तब जस्टिस चेलमेश्वर और नौ जजों वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया. इस फैसले में जस्टिस चेलमेश्वर का बहुत बड़ा योगदान रहा. यह भाजपा के लिए करारी हार जैसा रहा.

आज हम किसी भी नेता के ऊपर सोशल मीडिया पर तीखी से तीखी टिप्पणी कर पाते हैं तो इसमें भी इनका योगदान है. सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी का हवाला देकर होने वाली गिरफ्तारी को रोकने के लिए भी जस्टिस चेलमेश्वर ने अहम फैसला लिया. उन्होंने आईटी एक्ट की धारा 66 ए को असंवैधानिक घोषित कर सोशल मीडिया को असीम आजादी दे दी. ये चौथा बड़ा फैसला था, जिसने भाजपा को बड़ा झटका दिया था.

नौकरी से जाते-जाते भी उन्होंने कुछ ऐसे फैसले लिए जिसके लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा. जस्टिस चेलमेश्वर शायद सुप्रीम कोर्ट के इकलौते जज होंगे जो अपनी ही विदाई की पार्टी में नहीं पहुंचे थे. बार काउंसिल ने इनकी विदाई को लेकर पार्टी दी थी और उनसे आने का आग्रह किया था, जिसे उन्होंनें ठुकरा दिया था. वह उस दिन कोर्ट भी नहीं पहुंचे. तो अपने रिटायरमेंट से पहले ही उन्होंने यह साफ कर दिया था कि वो रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी नियुक्ति स्वीकार नहीं करेंगे. आने वाले दिन जस्टिस चेलमेश्वर पूर्व जस्टिस हो जाएंगे लेकिन उनके दिए फैसले हर किसी को याद रह जाएंगे.

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‘मेरे मन की बाल कहानियां’ को बाल साहित्य पुरस्कार

नई दिल्ली। देश के जाने माने बाल साहित्यकार दिविक रमेश को बाल साहित्य पुरस्कार-2018 के लिए चुना गया है. साहित्य अकादेमी ने इसके लिए देश भर से 23 लेखकों को चुना है. इन लेखकों को भी अलग-अलग भाषा के लिए सम्मानित किया जाएगा. बाल साहित्य पुरस्कार मिलने की घोषणा होने पर दिविक रमेश काफी खुश हैं.

दिविक रमेश ने शुक्रवार को फेसबुक पर जानकारी शेयर करते हुए साहित्य अकादेमी के साथ-साथ अपने श्रेष्ठ-गुरूजनों का आभार व्यक्त किए. वे लिखते हैं कि “ मित्रो! छोटी-बड़ी सब खुशियां साझा करता रहा हूं. दिखावा मुझे करना नहीं आता,शायद इसीलिए. हालंकि यह सामाचार फेसबुक के माहिर मेरे एक आत्मीय जन ललित लालित्य के माध्यम से आपमें से बहुतों तक पहुंच चुका/रहा है तो भी स्वयं मुझे आप सब की शुभकामनाओं के फलस्वरूप प्राप्त इसे साझा करते हुए खुशी और गर्व का अनुभव हो रहा है. इस प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार की सबसे पहले बधाई सहित प्रामाणिक सूचना मुझे मेरे बहुत ही प्रियजन कुमार अनुपम, देवेंद्र कुमार देवेश और ज्योतिकृष्ण वर्मा से मिली. माननीय उपाध्याक्ष प्रिय माधव कौशिक जी की गर्मजोशी से भरी बधाई का शानदार उपहार मिला. माननीय सचिव श्री के. श्रीनिवासराव के इन शब्दों ने तो जैसे मुझे भीतर तक छू लिया है”.

अकादेमी की ओर से लेखकों को 14 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा. इसके लिए ताम्रफलक व 50 हजार पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया जाएगा. बता दें कि दिविक रमेश देश के प्रसिध्द बाल साहित्यकार हैं.

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