कर्नाटक में सरकार बचाने कांग्रेस-जेडीएस करेगी अहम बैठक

नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.  दोनों पार्टियों के सामने एक के बाद एक मुसीबत खड़ी हो रही है. राहुल गांधी कर्नाटक में सरकार गिरने से बचाने के लिए लगे हुए हैं. लेकिन मतभेद सुलझाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं सूझ रहा है. फिलहाल खबर  आ रही है कि इसके लिए दोनों पार्टी एक बैठक करने वाली है. इसके बाद तय हो जाएगा कि सरकार चलेगी या नहीं.

सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाएःसिद्धरमैया

प्राप्त जानकारी के अनुसार बजट और कई दूसरे मुद्दे पर दोनों पार्टियों में मतभेद जारी है. बढ़ते मतभेद के बीच रविवार को कांग्रेस और जेडीएस के वरिष्ठ नेता बेंगलुरु में बैठेंगे ताकि मतभेद ख़त्म हो सके. बता दें कि सिद्धरमैया ने एक दिन पहले कहा था कि गठबंधन में आये तनाव के चलते उन्हें संदेह है कि यह सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए. सिद्धरमैया ने कहा था कि यह (सरकार) तब तक रहेगी जब तक संसदीय चुनाव पूरे नहीं हो जाते. उसके बाद सभी घटनाक्रम होंगे.

कर्नाटक उप मुख्मंत्री परमेश्वरा ने सिद्धरमैया के इस दावे पर कोपल में संवाददाताओं से कहा कि अध्यक्ष के तौर पर मैं यह स्पष्टीकरण दे रहा हूं कि हम पांच साल तक इस सरकार को चलाने के लिए सहमत हुए हैं. अन्य लोग बाहर जो बात कर रहे हैं, वह अप्रासंगिक हैं. उन्होंने कहा , कि बाहरी लोग अलग तरह से बात करते हैं. वैसे देखना है कि रविवार की बैठक में क्या फैसलें लिए जाते हैं. इसके बाद साफ हो जाएगा कि कर्नाटक में सरकार गिरेगी या चलेगी.

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नारियल तोड़ते वक्त पेड़ पर हुई मौत, वीडियो वायरल

कोलकाता। नारियल के पेड़ पर चढ़े एक व्यक्ति की ऊपर ही मौत हो गई. काफी देर तक पेड़ पर ही आदमी को लटका देख लोगों ने आसपास के लोगों को बुलाया. फिर पेड़ के ऊपर से लाश उतारी गई. मामला पश्चिम बंगाल के वर्धवान जिले के काटवा इलाके का है. इस घटना का एक वीडियो सामने आया है. जिसमें व्यक्ति का लाश उतारा जा रहा है. और लोग काफी चिल्ला रहे हैं.

नेटवर्क18 की खबर के अनुसार स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यक्ति नारियल तोड़ने का काम करता है. हर दिन की तरह वह नारियल तोड़ने पेड़ पर चढ़ा था. संभावना जताई जा रही है कि पेड़ के ऊपर ही उसकी तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. खबर सामने आने के बाद लोग अचंभित हैं लेकिन वीडियो में साफ दिख रहा है कि नारियल के पेड़ से मृत व्यक्ति का शव उतारा जा रहा है.

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लैंडिंग से पहले प्लेन क्रैश, पांच की मौत

मुंबई। लैंडिंग करने से पहले ही एक प्लेन क्रैश कर गया. इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई है. इस घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई. न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुंबई के घाटकोपर में एक चार्टर्ड प्लेन रिहायशी इलाके पर क्रैश हुआ है. कुछ लोगों के घायल होने की बात भी कही जा रही है.

बीजेपी के विधायक राम कदम ने कहा है कि प्‍लेन में चार लोग सवार थे जिनकी इस हादसे में मौत हो गई है. इस विमान के क्रैश होने के बाद उसमें आग लग गई. और कुछ दूर तक आग का धुआं दिखाई दे रहा है. यह बीचक्राफ्ट किंग एयर सी 90 टर्बोप्रॉप विमान था. यह विमान निर्माणाधीन इमारत के पार दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. आग बुझाने के लिए कई दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई है और जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है. इस घटना की जांच हो रही है. प्लेन के क्रैश होने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है.

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दलित महिलाओं के कपड़े फाड़ कर घसीटा, हिंदू संगठनों से जुड़े जाटों ने मचाया कोहराम

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। हिंदू संगठनों से जुड़े जाटों ने खुलेआम दलित महिलाओं को कपड़े फाड़कर उनको घसीटा व मारापीटा. यहां तक की इनको गर्भवती महिला तक को ना छोड़ा और उसे भी अपना शिकार बनाया. इनके तांडव को पूरा गांव तमाशा बनकर देखता रहा और कुछ ही देर में इलाका खून से सन गया. प्राप्त खबर के मुताबिक 27 जून की सुबह भीलवाड़ा शहर के वार्ड नंबर एक के मंगलपुरा के दलितों व जाटों के बीच जमकर मारपीट हुई.

ऐसा कहा जा रहा है कि यहां पर जाट की संख्या ज्यादा है. साथ ही ज्यादातर जाट युवा शिवसेना, बजरंग दल, विहिप जैसे संगठनों में सक्रिय नजर आते हैं.

पीड़िता सायरी बलाई द्वारा दर्ज करवाई गई रिपोर्ट में बताया गया कि सुबह 8:30 बजे उनके ही पड़ोसी शिवराम जाट, शंकर लाल जाट, गोपाल जाट, राधेश्याम जाट और राजू जाट सहित कुछ अन्य लोगों ने लाठियों से लैस होकर उनके घर में जबरन प्रवेश किया और जातिगत गालियां देते हुए अचानक हमला बोला.

एक गर्भवती दलित महिला के पेट और…

नवजीवन की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित दलितों ने आरोप लगाया है कि लठैत जाटों ने दलित महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया और उन्हें घसीटकर पीटते हुए घरों से बाहर निकाला और सार्वजनिक रूप से उनके कपड़े फाड़ डाले. एक आरोपी तो कपड़े खोलकर एक दलित लड़की पर बैठ भी गया. वहीं, एक गर्भवती दलित महिला माया के पेट और सिर में चोट लगने की वजह से वह गंभीर रूप से घायल हो गई. उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. इस हमले में एक दर्जन दलित जख्मी हुए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 मिनट तक हमलावर लठैत दलितों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते रहे.

शांति भंग करने की आशंका में फिलहाल दो जाट युवकों शंकर लाल और शिवराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं, पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी रिपोर्ट लेने में भी पुलिस ने जानबूझकर देरी की है. जबकि मंगलपुरा के जाट समुदाय का कहना है कि मारपीट की शुरुआत दलितों की ओर से की गई थी.

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क्या सुरक्षा को लेकर भेदभाव के शिकार हैं राष्ट्रपति कोविंद

चौबीस घंटे के समाचार इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा को लेकर रोज खबरें दिखा रहे हैं. खबरों में आ रहा है कि पीएम मोदी की जान खतरे में है और अब उनका सुरक्षा घेरा इतना मजबूत हो जाएगा जिसमें मंत्रियों तक का जाना मुश्किल हो जाएगा. मीडिया में खबर आ रही है कि अब बड़े-बड़े मंत्री भी पीएम मोदी से बमुश्किल मिल पाएंगे. प्रधानमंत्री तक वही मंत्री पहुंच पाएंगे जिसको एसपीजी कमांडो इजाजत देंगे.

लेकिन दुसरी तरफ कुछ दिनों पहले एक चिंताजनक खबर आई. तीनों सेनाओं के प्रमुख देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंघ लग गई थी. ओडिशा के विख्यात जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का मुक्की हो गई थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था.

राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ 18 मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी. राष्ट्रपति भवन ने घटना पर गहरी निराशा जताई है.

यह चौंकाने वाला मामला श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) द्वारा दुर्व्यवहार के लिए अपने 3 आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद सामने आया है. मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे.

सवाल है कि एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर इतनी सजग है लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगातार खामी सामने आई है. पिछले दिनों एक मंदिर में यात्रा के दौरान उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा करनी पड़ी थी तो दूसरी ओर जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा को इसलिए तो हल्के में नहीं लिया जा सकता कि उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कमजोर है. क्योंकि राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंध के बावजूद इस पर उतनी बहस नहीं हुई, जितनी प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर हो रही है. सवाल यह भी है कि अगर आज लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति होते या फिर कल वैंकेया नायडू राष्ट्रपति बनेंगे तो उनकी सुरक्षा ऐसी ही होगी?

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दलित सरपंच समेत 24 दलित परिवार ने छोड़ा गांव

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। देश के तमाम राज्यों के दलित सवर्णों की गुंडई से परेशान होकर घर छोड़ने को विवश हैं. पलायन के अलावा दलित हिंदू धर्म छोड़कर बौध्द धर्म अपना रहे हैं. दलितों की ऐसी स्थिति को सरकार तमाशबीन बनकर देख रही है. अभी हाल ही में खबर सामने आई है कि महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के रुद्रवाडी गांव में सवर्णों और दलितों के झगड़े के कारण एक गांव के सरपंच समेत 24 दलित परिवारों को अपना घर छोड़ दिया.

झगड़ा एक प्रेम प्रसंग को लेकर शुरू हुआ था. लेकिन केवल एक यही कारण नहीं है. दलितों को फैंसी कपड़े से लेकर, बाइक, मंदिर जाने, धूमधाम से शादी करने पर इस गांव के सवर्ण बौखला जाते थे और दलितों के साथ मारपीट करते. बीबीसी ने जब इसकी पड़ताल की तो कई चीजें सामनें आईं.

गांव छोड़ चुकी दलित सरपंच शालू बाई शिंदे अपना दर्द बयां करते हुए बताती है कि मैं तो बस नाम की सरपंच हूं. यहां के बदमाश सवर्ण अपने मनमाने ढंग से गांव पर राज करते हैं. कुछ बोलो तो जान से मारने की धमकी देते हैं. शालू बाई शिंदे कहती हैं कि ”इस तरह के झगड़े अब तक तीन बार हो चुके हैं. इससे पहले दो बार मतांग जाति के गुणवंत शिंदे इसका कारण बने थे.”

शालू बाई शिंदे के बेटे ईश्वर कहते हैं, “हम अब गांव वापस नहीं जाना चाहते. हम वहां कभी सम्मान के साथ नहीं रह पाएंगे. यहां तक कि हमारे नए कपड़े पहनने पर या रिक्शे पर तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बजाने पर भी वो लोग आपत्ति जताते हैं.” उन्होंने कहा, “मेरी कज़न मनीषा वैजीनाथ शिंदे की शादी की हल्दी की रस्म के लिए मारूति मंदिर गए. तब कुछ लड़के आए और हमें पीटने लगे. तब हम वहां से चले गए और अगले दिन गांव में शादी हुई.”

इससे पहले एक दलित लड़का व सवर्ण लड़की के बीच प्रेम प्रसंग था. इसको लेकर भी जमकर मारपीट की गई.

यहां सवर्ण मराठा जाति और अनुसूचित मतांग जाति के बीच झगड़े के बाद 24 दलित परिवार अपना घरबार छोड़कर फ़िलहाल गांव से 25 किलोमीटर दूर उदगीर के पास एक पहाड़ी पर बने टूटे-फूटे हॉस्टल में रह रहने को विवश हैं. पता नहीं सरकार-प्रशासन इनके लिए कब जागेगी?

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PM की सुरक्षा चौकस, राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की

नई दिल्ली। चौबीस घंटे के समाचार इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा को लेकर रोज खबरें दिखा रहे हैं. खबरों में आ रहा है कि पीएम मोदी की जान खतरे में है और अब उनका सुरक्षा घेरा इतना मजबूत हो जाएगा जिसमें मंत्रियों तक का जाना मुश्किल हो जाएगा. मीडिया में खबर आ रही है कि अब बड़े-बड़े मंत्री भी पीएम मोदी से बमुश्किल मिल पाएंगे. प्रधानमंत्री तक वही मंत्री पहुंच पाएंगे जिसको एसपीजी कमांडो इजाजत देंगे.

लेकिन दुसरी तरफ कुछ दिनों पहले आई एक खबर, जो चिंताजनक है. तीनों सेनाओं के प्रमुख देश के राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेंघ लग गई थी. ओडिशा के विख्यात जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का मुक्की हो गई थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता के साथ मंदिर की यात्रा के दौरान वहां के सहायकों ने दुर्व्यवहार किया था. अब इस घटना पर राष्ट्रपति भवन ने गहरी निराशा जताई है.

राष्ट्रपति कोविंद अपनी पत्नी सविता के साथ 18 मार्च को इस प्रतिष्ठित मंदिर में पहली बार दर्शन के लिए गए थे. कोविंद दंपति की मंदिर यात्रा को लेकर वहां पर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, लेकिन उनके मंदिर दर्शन के दौरान कुछ सहायक सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनके करीब पहुंच गए और उन्होंने इस वीआईपी दंपति के साथ न सिर्फ धक्का-मुक्की की बल्कि कोहनी से उन्हें टक्कर भी मारी.

यह चौंकाने वाला मामला उस समय सामने आया जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजीटीए) ने दुर्व्यवहार के लिए अपने 3 आरोपी सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है, जिससे इस बात की पुष्टि हो गई है. मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ सहायकों ने कोविंद दंपति के रास्ते को उस समय रोक दिया था जब वे मंदिर में पूजा करने जा रहे थे.

सवाल है कि एक तरफ सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर इतनी सजग है लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगातार खामी सामने आई है. पिछले दिनों एक मंदिर में यात्रा के दौरान उन्हें मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा करनी पड़ी थी तो दूसरी ओर जगन्नाथ मंदिर में राष्ट्रपति के साथ धक्का-मुक्की हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं राष्ट्रपति की सुरक्षा को इसलिए तो हल्के में नहीं लिया जा सकता कि उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कमजोर है. सवाल यह भी है कि अगर आज लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रपति होते या फिर कल वैंकेया नायडू राष्ट्रपति बनेंगे तो उनकी सुरक्षा ऐसी ही होगी?

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नीतीश को मनाने बिहार जाएंगे अमित शाह

nitishनई दिल्ली। बीजेपी व जदयू का गठबंधन टूटने के कगार पर दिख रहा है. महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर करने के बाद नीतीश कुमार को मनाने के लिए बीजेपी कदम उठाने जा रही है. खबर मिल रही है कि नाराज नीतीश को राजी कराने के लिए अमित शाह बिहार जाएंगे. इस दौरान फंसाद के मुद्दे पर दोनों के बीच चर्चा की जाएगी.

सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. 2015 विधानसभा चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीट जीतने वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सीट बंटवारे में इस परिणाम को आधार बनाने की मांग पर अड़ी हुई है. हालांकि भाजपा सूत्रों ने इस फॉर्मूले को यह कहकर नकार दिया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व राजद से गठबंधन करने के कारण जदयू को ज्यादा सीट मिली थी. भाजपा और जदयू के बीच इन्हीं बिगड़ते हालात को थामने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 11 जुलाई को पटना जाएंगे. वहां जाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं लेकिन यह मुलाकात कब होगी इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है.

मंगलवार को जदयू के नेता संजय सिंह ने कहा था कि भाजपा के वह नेता जो हमेशा हेडलाइंस में बने रहना चाहते हैं उन्हें नियंत्रण में रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 के चुनाव में बहुत बड़ा अंतर है. भाजपा को बहुत अच्छे से पता है कि बिहार में नीतीश कुमार के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. अगर भाजपा को सहयोगी पार्टी की जरूरत नहीं है तो वह बिहार में सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है.

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दो बार निष्कासित बसपा एमएलए की पार्टी में वापसी

नई दिल्ली। पूर्व बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद ने तीसरी बार अब फिर से बसपा का दामन थाम लिया है. बसपा प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप बालियान ने उनकी समर्थकों के साथ पार्टी में वापसी कराई. मोहम्मद शहजाद के साथ इनके करीब बीस से ज्यादा समर्थक व जिला स्तर के नेता भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण किए. पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए मोहम्मद शहजाद ने फिर से हुंकार भरा. प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व विधायक को लोकसभा हरिद्वार का जोन इंचार्ज बनाने की भी घोषणा भी की.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक करीब 25 माह पहले शहजाद, उनके भाई और भाभी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया गया था. हरिद्वार रोड स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित एक कार्यक्रम में बसपा प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप बालियान ने माला पहनाकर पूर्व विधायक शहजाद को पार्टी की सदस्यता दिलाई. अमर उजाला की खबर के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष ने मंच से ही शहजाद के भाई एवं जिपं सदस्य सत्तार अली के अलावा चार अन्य जिपं सदस्यों निसार अहमद, अजहर हसन, अदनान खान, अंजुम बेगम बसपा में शामिल करने की घोषणा की.

निष्कासित करने की टीस

पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद के भाषण में पार्टी से दो बार निष्कासित करने की टीस साफ दिखाई दी. उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी लोगों ने पार्टी को भ्रमित कर उन्हें दो बार पार्टी से बाहर करवाया. यदि तीसरी बार भी पार्टी का ऐसा कुछ इरादा है तो उन्हें सदस्यता ही न दी जाए. कार्यक्रम में शहजाद ने कहा कि उन्हें वर्ष 2014 में पार्टी से बाहर किया गया था.

साथ ही प्रधान ऋषिपाल, प्रधान इस्लाम, प्रधान आबिद अली, यूनुस अली, प्रधान महमूद, प्रधान मनोज, प्रधान गुरुमुख, प्रधान विजय, चौधरी आजाद, डॉ. जमशेद, आरूफ, मांगेराम, दिनेश सैनी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य आजाद, प्रधान सादिक, प्रधान अशरफ, बीडीसी कुरबान, प्रधान इकबाल, प्रधान तालिब, मुंतजीर, हाफिज इमरान, मुनेश कुमार, सोनेंद्र कुमार, अनूप सिंह, यामीन मुखिया, जुल्फकार को उनके समर्थकों के साथ बसपा ज्वाइन कराई.

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इरफान खान लाश ढूंढने निकले, कहा- मय्यत पर रोमांस मत कर

नई दिल्ली। इरफान खान एक तरफ कैंसर से पीड़ित है तो वहीं वो अपनी बेबाक डायलॉग “मय्यत पर रोमांस मत और तेरी मां का…” आदि बोलते दिखे हैं. इसे देखकर इरफान के चाहने वाले काफी खुश नजर आ रह हैं. इस वीडियो को देखने वालों को काफी पसंद आ रही है. इसको लेकर चर्चा आ रही है.

बॉलीवुड एक्टर इरफान खान की आगामी फिल्म ‘कारवां’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. ट्रेलर से साफ है कि फिल्म की कहानी एडवेंचर, हुल्लड़बाजी और इमोशन्स से भरपूर होगी. इरफान खान की ‘कारवां’ तीन ऐसे अनजान लोगों के इर्दगिर्द घूमती हुई नजर आएगी जो लाश ढूंढते हैं और अनजाने में एक दूसरे से मुलाकात होती है. लेकिन इनका नसीब, जिंदगी की इस विचित्र यात्रा में तीनों को एक साथ ला कर खड़ा कर देता है. इरफान खान अपने पुराने अंदाज में दिख रहे हैं, और उनके डायलॉग दिल जीत रहे हैं.

ट्रेलर में एक और डायलॉग “लोगों को हक जताना आता है लेकिन रिश्ता निभाना नहीं आता”. यह भी काफी पसंद की जा रही है. फिल्म के ट्रेलर में इरफान खान के अलावा दुलकर सलमान और मिथिला पालकर अहम किरदार में दिख रहे हैं. इनकी कहानी में नयापन है, साथ ही एक्टिंग में ये माहिर नजर आ रहे हैं. इरफान खान अभिनीत यह फिल्म रोनी स्क्रूवाला के क्रिएटिव प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी और ईशका फिल्म्स द्वारा निर्मित है. आकर्ष खुराना द्वारा निर्देशित ‘कारवां’ इस साल 10 अगस्त को रिलीज होगी.

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मायावती ने उठाई अपरकास्ट आरक्षण की मांग

लखनऊ। इसमें कोई शक नहीं कि बसपा सुप्रीमो मायावती बहुजन समाज की दिगग्ज नेता हैं. दलित मुद्दों को लेकर हमेशा लड़ती हैं लेकिन अब मौजूदा भारत की दर्दनाक तस्वीर देखकर अपरकास्ट आरक्षण का मुद्दा भी उठाया है. मायावती अपरकास्ट लोगों के विकास के लिए खुलकर सामने आई हैं. बीजेपी को घेरते हुए कहा कि मैं संसद से लेकर बाहर तक अपरकास्ट आरक्षण की मांग कर रही हूं लेकिन बीजेपी सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही. इस बयान के बाद मायावती का नया चेहरा देखने को मिला है.

भाजपा की ओर से लगातार जातिवाद, आरक्षण व आपातकाल पर टिप्पणी हो रही है जिसका कोई बुनियाद नहीं है. इस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी सरकार को घेर लिया है. बीजेपी इस मुद्दे पर ऐसी घिरी है कि कोई जवाब नहीं सूझ रहा है.

अपरकास्ट आरक्षण पर मायावती ने कहा कि ऊंचे समुदाय के गरीब लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए. इसके लिए मौजूदा सरकार को जरूरी संसोधन करना चाहिए. भाजपा सरकार यदि गरीबों का भला चाहती है तो फिर इसमें जरूरी संसोधन से कतरा क्यों रही है. भाजपा केवल बिजनेसमैन का भला चाहती है. केवल अंबानी-टाटा-बिरला जैसों का विकास करना चाहती है.

इससे भाजपा का दोहरा चेहरा दिख रहा है. अब मोदी के मंत्रियों को आरक्षण व जन कल्याण के बारे में बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है. अंत में मायावती ने कहा कि फिर भी देश के करोड़ों ग़रीबों को उनको सम्मानपूर्वक जीने का संवैधानिक हक देने में मौजूदा सरकार को ना तो दकियानूसी करनी चाहिये और ना ही कंजूसी, क्योंकि इनके हित व कल्याण के बिना भारत का भला कभी नहीं हो सकता है. लेकिन क्या भाजपा ऐसा कर पाएगी? बहनजी के इस बयान के बाद खूब वाहवाही हो रही है. इससे पता चलता है कि वह ना केवल दलित बल्कि भारत के हर गरीब व्यक्ति का विकास चाहती हैं.

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फीफा विश्व कप:मेसी, रोजो के गोल से अंतिम-16 में पहुंचा अर्जेटीना

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नई दिल्ली। मार्कोस रोजो द्वारा 86वें मिनट में किए गए बेहतरीन गोल के दम पर अर्जेंटीना ने मंगलवार देर रात खेले गए फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण में ग्रुप-डी के मैच में नाइजीरिया को 2-1 से मात देकर अंतिम-16 में जगह बना ली है. यह अर्जेंटीना की इस विश्व कप में पहली जीत है. पहले मैच में उसने आइसलैंड से 1-1 से ड्रॉ खेला था तो वहीं दूसरे मैच में उसे क्रोएशिया से 3-0 से हार मिली थी.

इसी कारण अर्जेंटीना के अगले दौर में जाने पर संकट था. उसे इस मैच में जीत चाहिए थी और साथ ही दुआ करनी थी कि ग्रुप के दूसरे मैच में क्रोएशिया आइसलैंड को मात दे. इस दिन सब कुछ अर्जेटीना के पक्ष में हुआ. उसने नाइजीरिया को हराया तो वहीं क्रोएशिया ने आइसलैंड को 2-1 से हरा दिया.

क्रोएशिया ने तीन मैचों में तीन जीत के साथ नौ अंक लेकर पहले स्थान के साथ ग्रुप दौर का अंत किया. वहीं अर्जेटीना ने तीन मैचों में चार अंक लेकर दूसरे स्थान के साथ अंतिम-16 में प्रवेश किया. नाइजीरिया और आइसलैंड को विश्व कप से बाहर जाना पड़ा है.

अर्जेंटीना ने मैच की सकारात्मक शुरुआत की. वहीं नाइजीरिया भी कम आक्रामक नहीं थी. आखिरकार मेसी ने 14वें मिनट में गोल कर अपनी टीम और प्रशंसकों वो लम्हा दिया जिसका लंबा इंतजार करना पड़ा. मेसी को मैदान के बीच से बेनेगा ने गेंद दी और अर्जेंटीना के कप्तान ने बॉक्स के बाहर गेंद पर कब्जा कर अंदर घुसे और दाईं ओर से गेंद को नेट में इस विश्व कप में अपना खाता खोला. मेसी का यह गोल इस विश्व कप का 100वां गोल था. 28वें मिनट में मेसी ने दाएं छोर से गोंजालेज हिग्युएन के गेंद दी जिसे नाइजीरिया के गोलकीपर फ्रांसिस यूझोहो ने रोक दिया.

नाइजीरिया, अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को खाली छोड़ रही थी. इसी कारण अर्जेंटीना मौके बना रही थी. ऐसी ही लगती 32वें मिनट में नाइजीरिया ने की खाली खड़े एंजेल डी मरिया के पास गेंद आई मरिया गेंद लेकर बॉक्स में जा ही रहे थे कि बालोग ने बाहर ही उन्हें गिरा दिया. अर्जेंटीना को फ्री किक मिली जिसे मेसी ने लिया. मेसी के बेहतरीन शॉट को हालांकि फ्रांसिस बचा ले गए.

पहले हाफ में अर्जेंटीना को खुशी मिली थी, लेकिन दूसरे हाफ में वो खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई. माश्चेरानो ने बालोगन को पेनाल्टी एरिया गिरा दिया और वीएआर की दखलअंदाजी से नाइजीरिया को पेनाल्टी मिली जिसे विक्टर मोसेसे ने 51वें मिनट में गोल में बदल कर अपनी टीम को 1-1 की बराबरी दिला दी.

नाइजीरिया खिलाड़ी किसी भी अर्जेंटीनी खिलाड़ी को अकेले नहीं छोड़ रहे थे. खासकर मेसी को. मेसी कभी भी दो नाइजीरियाई खिलाड़ियों के बिना दूसरे हाफ में नहीं दिखे और इसी कारण वह अपने पास गेंद को बना नहीं पाए. नाइजीरिया का डिफेंस मजबूत था और उसकी आक्रमण पंक्ति भी मौके बनाने की कोशिश में लगी थी. इसी बीच 71वें मिनट में नदिदि ने नाइजीरिया की स्कोरशीट में दूसरा गोल डालने का मौका गंवा दिया.

इस हाफ में अर्जेंटीना के पास बढ़त लेने का बेहतरीन मौका 81वें मिनट में आया. रोजो ने गोल के सामने गेंद हिग्युएन को दी जिस पर वो आसान सा मौका गंवा बैठे. लेकिन रोजो ने अगला मौका भुना लिया. 86वें मिनट में गेब्रिएल इवान मार्सडो के बेहतरीन क्रॉस पर रोजो ने एक शॉट में गेंद को नेट में डाल अर्जेटीना को 2-1 से आगे कर दिया. रोजो का यह गोल विजयी साबित हुआ और अर्जेटीना अगले दौर में पहुंच गई.

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बसपा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग, हरियाणा में जोरों पर तैयारी

हरियाणा। बसपा की चुनावी तैयारी जोर शोर से चल रही है. बहुजन समाज पार्टी की ओर से आगामी चुनावों से पहले जनसंपर्क को लेकर अपने कैडर को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसके लिए आगामी 30 जून का सिरसा में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा. जिसमें पार्टी पदाधिकारी हिस्सा कर कैडरों को प्रशिक्षित करेंगे.

बसपा जोन प्रभारी एडवोकेट दयाराम जोइया व मीरा रानी नंदा ने बताया कि बहुजन समाज पार्टी के तत्वाधान में एक दिवसीय शिविर में कैडर प्रशिक्षण दिया जाएगा. जिसमें सिरसा लोकसभा क्षेत्रों के सभी विधानसभा कमेटी सदस्यों के साथ साथ सेक्टर कमेटी व बहुजन वालंटियर फोर्स के पदाधिकारी शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि शिविर में सीपीएच प्रभारी एवं पूर्व एमएलसी डॉ. मेघराज सिंह मुख्यातिथि होंगे जबकि अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश भारती करेंगे.

शिविर में प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रजापति व प्रदेश महासचिव कृष्ण जमालपुर विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे साथ ही जोन प्रभारी गुरदीप कंबोज, दयाराम जोइया, सुरेंद्र पंघाल, प्रदीप अंबेडकर और मीरा नंदा एवं जिला प्रभारी मांगेराम कश्यप फतेहाबाद आदि मौजूद रहेंगे.

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नीतीश ने लालू से की फोन पर बात, तेजस्वी ने कहा- धोखेबाज के लिए कोई जगह नहीं

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से फोन पर बातचीत करने के बाद राजनीति में भूचाल आ गया है. इससे साफ दिख रहा है कि बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के साथ खुश नहीं हैं. यानी कि गठबंधन टूट कभी भी सकता है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल करने के लिए तेजस्वी से बातचीत की लेकिन तेजस्वी ने बड़े हीं तीखे शब्दों में कहा कि जनादेश का पालन नहीं करने वाले के लिए कोई जगह नहीं है. अब नीतीश कुमार के लिए सारे दरवाजे बंद दिखाई दे रहे हैं.

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि मुझपर कितना भी दबाव हो मैं चाचा को महागठबंधन में नहीं आने दूंगा. तेजस्वी यादव ने मंगलवार को मीडिया के सामने कहा कि चाचा कितना भी हाथ पैर मार लें, लेकिन उनके लिए हमारे यहां के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं.

यह चर्चा तब गरमाई जब सोमवार को लालू प्रसाद यादव ऑपरेशन कराने के लिए मुंबई गए और नीतीश कुमार ने फोन के जरिए उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली. सूत्रों का कहना है कि थोड़ी लंबी बातचीत चली थी. इसके बाद ही उनको महागठबंधन में शामिल करने के लिए बिहार के बड़े-बड़े नेताओं की ओर से कहा जाने लगा लेकिन तेजस्वी ने सबकी बातों को दरकिनार कर नीतीश कुमार को नकार दिया. इसके बाद नीतीश कुमार के सामने कोई चारा नहीं रह गया है. अब देखना है कि लाचार नीतीश कुमार बीजेपी के साथ बने रहते हैं या महागठबंधन में शामिल होने के लिए कोई और दाव अपनाते हैं.

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माल्या ने 2016 में पीएम मोदी को लिखा था खत

नई दिल्ली। लंबे समय से फरार किंगफिशर के मालिक शराब कारोबारी विजय माल्या ने अपनी खामोशी तोड़ी है. इनकी खामोशी ने पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा कर दिया है. माल्या ने यह सफाई पेश करते हुए दावा किया है कि पूरे मामले में वह बेगुनाह हैं. इसके बावजूद देश के नेताओं और मीडिया ने उन्हें कर्ज लेकर फरार कारोबारी घोषित कर दिया है.

माल्या ने दावा किया कि मौजूदा सफाई उनके द्वारा 15 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखी थी. माल्या ने दावा किया कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने सरकार के आदेश पर उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए और चार्जशीट दायर की. वहीं ईडी ने उनके और उनके परिवार की 13,900 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर लिया है. इसके साथ ही बैंकों ने उन्हें धोखाधड़ी का पोस्टर बॉय बनाकर देश के सामने पेश किया है. अपनी सफाई में माल्या ने सिलसिलेवार ढंग से उनपर लगे एक-एक आरोपों पर अपना पक्ष रखा है.

गौरतलब है कि माल्या ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में 17 बैंकों के संघ ने किंगफिशर एयरलाइंस को करीब 5,500 करोड़ रुपये का लोन दिया था. इस लोन को देने के लिए बैंक के प्रत्येक स्तर पर नियम के मुताबिक उन्हें मंजूरी दी गई. इसके बाद लोन के लिए गिरवी रखी गई संपत्ति को बेचते हुए 600 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है. इसके अलावा 2013 से 1,280 करोड़ रुपये कर्नाटक हाईकोर्ट में सिक्योरिटी डिपॉजिट में पड़े हैं. लिहाजा कुल मिलाकर 1,880 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है.

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छत्रपति शाहूजी महाराज विशेषः बहुजन समाज के महानायक का संदेश

 “डिप्रेस्ड और सप्रेस्ड वर्ग के लोगों को उच्च जाति के हिन्दु नेताओं के नेतृत्व पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, और ना ही ऐसे किसी व्यक्ति को अपना नेता बनाना चाहिए, जिसके पास लोकतान्त्रिक उद्देश्य ना हो. इन समुदायों के लोगों को अपने समुदाय में से ही नेतृत्व का चुनाव करना चाहिए.”

छत्रपति शाहूजी महाराज ने इस बात का जिक्र अपने समय के प्रसिद्ध समाज सुधारक जी ए गवई से 01 फरवरी 1920 को लिखे अपने एक पत्र में किया था. आज जब देश में आगामी लोकसभा चुनाव की हलचल तेज हो चुकी है, बहुजन समाज के इस महानायक का यह संदेश बहुत कुछ कहता है, जिससे बहुजन समाज को सीख लेने की जरूरत है। 26 जून को इसी महानायक की जयंती है।

अगर हम शाहूजी महाराज को उनके समय काल में देखें तो भारतीय राजनीति में उनका उदय ऐसे समय हुआ, जब महात्मा ज्योतिराव फुले का नेतृत्व नहीं रहा. शाहूजी महाराज ने कोल्हापुर राज्य की बागडोर 1894 में संभाली थी, जिसके चार वर्ष पूर्व 28 नवंबर 1890 को महात्मा ज्योतिबा फुले का परिनिर्वाण हो चुका था. महात्मा ज्योतिबा फुले के बाद उनके मनवातावादी विचारों को जनमानस में पहुंचाने की ज़िम्मेदारी छत्रपति शाहूजी महाराज ने अपने मजबूत कंधों पर तब तक उठाए रखा, जब तक कि बाबासाहब आम्बेडकर का भारतीय राजनीति में पर्दापण नहीं हो गया.

शाहूजी महाराज ने ना केवल महात्मा ज्योतिराव फुले के आंदोलन को आगे बढ़ाया बल्कि डॉ. आम्बेडकर समेत हर उस राजनेता और समाज सुधारक की नैतिक और आर्थिक दोनों ही तरह से मदद भी की जोकि उस आंदोलन को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे थे. इससे पता चलता है कि छत्रपति शाहूजी महाराज भारत में मनवातावादी आंदोलन की ‘नीव के वह ईंट’ हैं, जिनके बिना इस आंदोलन की परिकल्पना भी करना असंभव है.

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ही यह कोशिश हो रही थी कि सभी तरह के आंदोलनों की कमान गांधीजी के हाथों में दे जी जाए और ऐसा उनको पूरे देश का भ्रमण कराके किया भी जा रहा था. लेकिन उस दौरान छत्रपति शाहूजी महाराज पूरे तन-मन-धन से इस कोशिश में लगे रहे कि सामाजिक आंदोलन का नेतृत्व किसी ऐसे कुशल व्यक्ति के नेतृत्व में दिया जाये, जोकि ‘उच्च

जाति का ना हो एवं लोकतान्त्रिक मूल्यों में विश्वास करने वाला हो.’ शाहूजी महाराज का मानना था कि ‘नेता को दूरदृष्टा होना चाहिए, उसके पास भविष्य हेतु विजन होना चाहिए.

अपने इसी सोच के कारण उन्होंने 1920 में मानगांव में हुई अखिल भारतीय अस्पृश्य सभा में यह घोषणा की कि आगे से डॉ. आम्बेडकर आप लोगों के नेता होंगे? नेतृत्व की जरूरत पर महाराज ने उस सभा में यह तक कहा था कि …. जानवरों के पास भी अपना नेतृत्व है, लेकिन अछूतों के पास नहीं हैं. ऐसे में डॉ. आम्बेडकर उनके बेहतरीन नेता हो सकते हैं.

शाहूजी महाराज और डॉ. अम्बेडकर के संबंध काफी आत्मीय थे। बाबासाहब आम्बेडकर जब लंदन में अपनी पढ़ाई कर रहे थे, तो उन्होंने शाहूजी महाराज को एक पत्र लिखकर सूचित किया कि वहां उनकी माली हालत काफी खराब है. यहां तक कि इंडिया वापस आने तक के लिए पैसे नहीं हैं,इसका जिक्र 04 सितंबर 1921 को बाबासाहब द्वारा शाहूजी महाराज को लिखे पत्र में मिलता है. इस पत्र के जरिए डॉ. आम्बेडकर ने शाहूजी से लोन के रूप में 200 पाउंड मांगे. तब शाहूजी महाराज ने डॉ. आम्बेडकर को ना केवल लंदन में वित्तीय मदद भिजवाई, बल्कि उनकी पत्नी रमाबाई आम्बेडकर को भी वित्तीय मदद भिजवाई. इसके अलावा बाबासाहब आम्बेडकर ने अपने पहले अखबार ‘मूकनायक’ को चलाने के लिए भी शाहूजी महाराज से समय-समय पर दरख्वास्त की और महाराज ने हमेशा दिल खोलकर अखबार के प्रकाशन को सुचारु रूप से जारी रखने में वित्तीय मदद दी.

आज जिस आरक्षण पर हमला कर के इसे समाप्त किया जा रहा है, उस आरक्षण की अवधारणा छत्रपति शाहूजी महाराज के राज्य कोल्हापुर से ही आई, जब उन्होंने 26 जुलाई 1902 को अपने एक आदेश से कोल्हापुर रियासत की पचास प्रतिशत सीटों को पिछड़ी जाति के लोगों के लिए आरक्षित कर दिया था. उनका कहना था कि इससे इन जातियों में संवृद्धि आएगी और इनका आत्मबल भी बढ़ेगा, जिसके फलस्वरूप कोल्हापुर राज्य सुखी और सम्पन्न होगा.

पिछड़ी जातियों एवं अछूतो में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में भी उनका विशेष योगदान रहा. उन्होंने फरवरी 1908 में अछूतों में शिक्षा के विस्तार के लिए एक सोसाइटी का गठन करवाया. महाराज ने अछूतों एवं पिछड़ी जातियों के लिए तमाम शहरों में हॉस्टल खुलवाएं एवं बच्चों में जाति आधारित सामाजिक विद्वेष ना फैले, इसके लिए अछूतों के लिए अलग स्कूल के प्रावधान को समाप्त करके एक सार्वजनिक स्कूल शुरू किया गया.

इसी तरह छुआछूत से भी उनको खासी चिढ़ थी। अपने राजतिलक के समय वो खुद ब्राह्मणों के छुआछूत का शिकार हो चुके थे। इस दर्द को महसूस करते हुए 15 जनवरी 1919 के अपने एक आदेश में शाहूजी महाराज ने रियासत के सभी अधिकारियों को यह आदेश जारी किया कि कोई भी अधिकारी अगर छुआछूत करते हुए मिला तो उसे राज्य की सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा. इसी क्रम में उन्होंने राज्य के डाक्टरों के लिए 18 जनवरी 1919 को अलग से एक आदेश निकाल कर ना केवल उनको व्यावसायिक कर्तव्यों की याद दिलाई बल्कि यह भी बताया कि अगर उन्होंने अछूतों का इलाज करने से मना किया तो कठोरतम सजा होगी.

उनकी दूरदर्शिता और न्यायप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाहूजी महाराज ने 03 मई 1920 को ही अपने एक आदेश से कोल्हापुर राज्य में बंधुआ और बेगार मजदूरी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अपने जीवन का सिद्धान्त बताते हुए शाहूजी महाराज ने कहा था- ‘जो व्यक्ति अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, वो कभी भी अपने प्रयास में सफलता प्राप्त नहीं करते और जो लोग अपने आप पर विश्वास करते हैं वो जरूर सफल होते हैं.’ वर्तमान वक्त में देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक हालात को देखते हुए शाहूजी महाराज का यह सिद्धांत महत्वपूर्ण हो जाता है.

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रेप आरोपी दाती महाराज की गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट का सवाल

नई दिल्ली। रेप आरोपी दाती महाराज की गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट ने सवाल उठाया है. क्राइम ब्रांच की पूछताछ के बाद भी दाती महाराज की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. इसके बाद दिल्ली के साकेत कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि कोर्ट द्वारा जारी करने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने अब तक दाती को गिरफ्तार क्यों नहीं किया.

मंगलवार को मिली जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी क्राइम को आदेश देते हुए कहा कि पुलिस मामले से जुड़े स्टेटस रिपोर्ट को हर हफ्ते कोर्ट में दाखिल करती रहे. इस मामले में अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी.

बता दें कि दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में एक युवती ने दाती महाराज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. युवती ने पुलिस को बताया कि वह पिछले दस साल से दाती महाराज की अनुयायी थी. लेकिन महाराज और चेलों ने उसके साथ बार-बार रेप किया जिसके बाद वह अपने घर राजस्थान लौट गई. पीड़िता की शिकायत के बाद दाती महाराज के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है. पीड़िता ने अपनी बात सबके सामने रखने के लिए एक पत्र लिखा है.

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मायावती का करारा जवाबः कांग्रेस की इमर्जेंसी जैसी है मोदी सरकार

लखनऊ। भाजपा की ओर से लगातार जातिवाद, आरक्षण व आपातकाल पर टिप्पणी हो रही है. इसको लेकर मंगलवार को मायावती ने कहा कि मोदी सरकार को अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है. इस सरकार के चार साल में ही देश में कई बार आपातकाल की स्थिति ला दी. इतना ही नहीं देश को जातिवाद व धर्म के नाम पर तोड़ दिया है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारों पर घोर ग़रीब, मज़दूर, किसान, दलित व पिछड़ा वर्ग-विरोधी होने का आरोप लगाते हुये कहा कि इनकी सरकारों में इन वर्गों का जिस प्रकार से भयंकर शोषण, उत्पीड़न व अन्याय लगातार होता चला आ रहा है उसके बाद इन वर्गों के हित व कल्याण के बारे में इनको बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है. बीजेपी के नेताओं को इन वर्गों के बारे में कोई भी बात करने के पहले अपने गिरेबान में झाँक कर जरूर देखना चाहिये. भाजपा का रिकार्ड कितना ज्यादा जातिवादी व दाग़दार है.

अपरकास्ट के लिए आरक्षण की मांग

आरक्षण के मुद्दे को लेकर मायावती ने कहा कि बीएसपी अपरकास्ट समाज व धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग के ग़रीबों को भी आरक्षण की सुविधा देने की पक्षधर है. इसके लिये संविधान में उचित संशोधन करने की माँग को लेकर संसद के भीतर व संसद के बाहर लगातार संघर्ष करती रही है. देश के करोड़ों ग़रीबों को उनको सम्मानपूर्वक जीने का संवैधानिक हक देने में सरकारों को ना तो दकियानूसी करनी चाहिये और ना ही कंजूसी क्योंकि इनके सही हित व कल्याण के बिना भारत का भला कभी भी नहीं हो सकता है. इसके लिए बीजेपी की सरकारें बुरी तरह से विफल साबित हो रही हैं.

इसी क्रम में लगभग 42 वर्ष पहले कांग्रेस पार्टी द्वारा देश में थोपी गई ’’राजनीतिक इमर्जेंसी’’ की याद बार-बार ताज़़ा की जाती है जबकि पूरा देश पहले इनके ’’नोटबन्दी की आर्थिक इमरजेन्सी’’ की जबर्दस्त मार झेलने के साथ ही पिछले चार वर्षों से हर मामले में  ’’अघोषित इमरजेन्सी’’ जैसा माहौल हर स्तर पर लोगों को झेलना पड़ रहा है. इससे हर समाज, हर वर्ग व हर व्यवसाय के लोग त्रस्त महसूस कर रहे हैं.

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गुजरातः शिवाजी के स्टीकर पर बवाल, दलित की पिटाई

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नई दिल्ली। गुजरात में सवर्ण समाज के बदमाश कोई ना कोई बहाना ढूंढकर दलितों को पीट रहे हैं. इस तरह की वारदातें बढ़ती जा रही है लेकिन पुलिस-प्रशासन रोकने में नाकाम हो रही है. मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार मेहसाणा जिले के बहुचराजी इलाके में शिवाजी की फोटो (स्टीकर) लगाने पर एक दलित युवक की गांव के सवर्णों ने जमकर पिटाई कर दी. पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर घटना की जांच शुरू कर दी है.

ऐसा कहा जा रहा है कि दलित युवक ने अपने मोटरसाइकिल पर शिवाजी का स्टिकर लगा रखा था. इसके बाद सवर्ण समाज के लोग भड़क उठे व उसकी पिटाई करने लगे. मेहसाणा के बहुचराजी से बीते कुछ ही समय में दलितों के साथ अत्याचार की ढेरों खबरें सामने आई हैं.

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक 20 साल के दलित युवक जयदेव परमार हाल ही में बहुचराजी में शुरू हुए मारुति के प्लांट में नौकरी करता है. जयदेव कंपनी से वापस अपने घर जा रहा था.तभी कुछ सवर्ण युवकों ने उसे नौकरी दिलाने की बात कहकर चौक पर बुलाया. फिर सवर्ण समुदाय से आने वाले कुछ लड़को ने बाइक पर लगा शिवाजी का स्टिकर हटाने की भी कोशिश की. दलित होने के बावजूद, शिवाजी का स्टिकर लगाने को लेकर दलित युवक के साथ जमकर गाली-गलौज की गई. बाद में जब दलित युवक जयदेव ने स्टिकर निकालने का भरोसा दिया तो, क्षत्रिय समाज के लोगों ने घायल अवस्था में उसी की बाइक से उसे घर पहुंचाया. हालांकि घर पहुंचने के बाद क्षत्रियों ने दलित युवक के घरवालों को भी जान से मारने की धमकी दी.

इस मामले में दलित युवक ने बहुचराजी थाने में दरबार भरत राजुजी, दरबार विरसंग, दरबार राणाजी, दरबार रामजी, दरबार राधुजी और दरबार दिलाजी के अलावा दो और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है. पुलिस ने इस मामले में 5 लोगो को हिरासत में लिया है.

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आरक्षण की मांग पर योगी जी के ढोंग की खुली पोल

नई दिल्ली। आदित्यनाथ योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार के मामले कम नहीं हुए हैं. योगीराज में दलितों को मारने-पीटने व हत्या करने की तमाम घटना इनके दलित चिंतन को साफ बयां करती है.

2019 का इलेक्शन देखते हुए इन अपराधों पर पर्दा डालने के लिए सीएम योगी ने दलितों को आरक्षण देने की बात उठाई है. सीएम योगी का कहना है कि अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिला मिलिया इस्लामिया आदि में बीएचयू की तरह दलितों को आरक्षण मिले. लेकिन सीएम योगी को पता होना चाहिए कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 30 (ए) के तहत अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी में दलितों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता. वैसे भी इसको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो कोर्ट के फैसले से पहले कुछ कहना उचित नहीं होगा.

लेकिन खुद को दलितों को हिमायती बताने के चक्कर में योगी जी तो भूल ही गए कि जिस बीएचयू का उदाहरण दे रहे हैं वहीं पर आरक्षण के नाम पर कुछ और ही चल रहा है. जो कि आरक्षण के सच का पर्दाफाश करती है.

हां, यह सही बात है कि BHU में रिजर्वेशन दिया जा रहा है. लेकिन यह भी तो बताइए किसे दिया जा रहा है. तो सच सुनिए, वहां सवर्णों को 50.5% आरक्षण दिया जा रहा है. सवर्णों के आरक्षित कोटे में आपकी सरकार किसी SC, ST, OBC को घुसने नहीं दे रही है, चाहे वह टॉपर ही क्यों न हो.

अब मिसाल के लिए इस साल का कट ऑफ देखिए.

बीएससी मैथ्य और बायोलॉजी आदि में अनारक्षित श्रेणी की कटऑफ़ ओबीसी से कम है. कुल मिलाकर बोला जाए तो 63 नंबर का अंतर है. मतलब कि बीएचयू में एडमिशन के लिए ओबीसी को अनरिजर्व कटेगरी से भी ज्यादा नंबर लाना होगा. यह है हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों का मनुवादी सामंती चरित्र, जिसे 2018 में बीएचयू जी रहा है.

सबसे पहली बात कि किसी भी तरह की अकादमिक सूची में सामान्य श्रेणी की बजाय अनारक्षित शब्द का प्रयोग होना चाहिए. इसी से कॉन्सेप्ट क्लीयर होता कि अनारक्षित सीटों पर मेरिट में आने वाले सभी कैटेगरी के छात्रों को मौक़ा मिलता. जो कि यहाँ नहीं मिल रहा है.

किसी आरक्षित वर्ग की कटऑफ़ अनारक्षित वर्ग से तभी ज्यादा हो सकता है, जब अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित मेरिट में आने के बाद भी उसे आरक्षित वर्ग में ही प्रवेश मिलेगा. इसका सीधा अर्थ है 15 फ़ीसदी सवर्ण आबादी को 50 फ़ीसदी असंवैधानिक आरक्षण. अब इससे पता चलता है कि योगी जी के कथनी व करनी में कितना फर्क है.

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