बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर की 131 वीं जयंती पर विशेष
आज हम भारतरत्न उस डॉ.बी.आर. आंबेडकर की 131वीं जयंती मनाने रहे है, जिनके विषय में बहुत से नास्तिक बुद्धिजीवियों की राय है कि बहुजनों का यदि कोई भगवान हो सकता है तो वह डॉ. आंबेडकर ही...
एक समाचार-पत्र के अनुसार इस बार आरएसएस दलितों को जोड़ने के लिए एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहा है। इसके अनुसार पहली बार अंबेडकर जयंती पर देशभर की शाखाओं में फोटो पर पुष्प अर्पित किए जाएंगे। अंबेडकर जयंती यानी 14 अप्रैल को शाखाओं में...
विषम परिस्थितियों में भी दलित उद्यमी अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ने में सफल हो रहे हैं। ऐसे ही एक युवा हैं उपेंद्र रविदास, जो कि मूलत: बिहार के रहनेवाले हैं लेकिन देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में अपना कारोबार करते हैं। इनकी कंपनी का...
- उदित राज, पूर्व सदस्य, लोकसभा
बाबासाहब डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 131वीं जयंती मनाई जा रही है। जाति व्यवस्था पर उनके नजरिए को देखना जरूरी पड़ जाता है जब हम देखते हैं कि हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में जाति की...
दलित-बहुजनों के विमर्श अब भारतीय सिनेमा के केंद्र में शामिल होने लगे हैं। जल्द ही जाेतिबा फुले की जीवनी पर एक फिल्म देखने को मिलेगी। इसके निर्माण की घोषणा फिल्म के निर्देशक अनंत महादेवन ने बीते 11 अप्रैल को जोतिबा फुले की 195वीं जयंती...
ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब अम्बेडकर का जीवन और कर्तृत्व बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है. आज जिस तरह की परिस्थितियाँ हैं उनमे ये आवश्यकता और अधिक मुखर और बहुरंगी बन पडी है.
दलित आन्दोलन या दलित अस्मिता को स्थापित करने के विचार...
राजीव गांधी ने बसपा को बदनाम व कमजोर करने के लिए मान्यवर कांशीराम जी को सीआईए का एजेंट तक बता दिया था। और अब उनके ही पदचिन्हों पर चलकर उनके बेटे राहुल गांधी भी गलतबयानी कर रहे हैं। ये बातें बसपा प्रमुख मायावती ने...
मामला अहमियत का है। यह सभी जानते हैं कि नये भारत के निर्माण में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की भूमिका कितनी अहम है। लेकिन नरेंद्र मोदी हुकूमत की नजर में गांधी अहम हैं। यही वजह है कि भारत सरकार ने एक बार फिर...
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज एक बार फिर अपनी अपरिपक्वता का सबूत दिया। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान ही हिंदुस्तान का हथियार है। साथ ही उन्होंने यह भी कि संस्थाओं के बिना संविधान का कोई मतलब नहीं...
देश में चुनाव लड़ना दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। इसका सबसे अधिक शिकार वे पार्टियां हो रही हैं, जो गरीबों का प्रतिनिधित्व करती हैं। जबकि वे पार्टियां जिनके पास चुनावी चंदा अकूत मात्रा में प्राप्त होता है, वे अर्थ बल का जमकर उपयोग...
भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले पहले भी होते रहे हैं। खासकर दलित-बहुजन पत्रकारों पर। लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसी घटना सामने आयी है, जो अलग हटकर है। दरअसल पुलिस महकमे ने एक पत्रकार और उसके अन्य पत्रकार साथियों को न केवल...
आपने वे तस्वीरें अवश्य देखी होंगी जब काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा स्थान कर रहे थे। लेकिन क्या आपको पता है कि गंगा के जिस पानी में वह स्नान करते दीख रहे हैं, वह एक खास तरह का शोधित पानी है जो कि...
भारतीय राजनीति में हालांकि यह पहली बार नहीं है और ना ही यह अकेले केवल उत्तर प्रदेश का मामला है। चूंकि उत्तर प्रदेश की अहमियत देश में अधिक रही है और यहां हाल ही में चुनाव संपन्न हुए हैं, लिहाजा उदाहरण के लिए यह...
उत्तर प्रदेश से हिन्दू राष्ट्र की आधारशिला रखने की शुरुआत हो गई है। इस कड़ी में सबसे पहले शहरों के नाम बदलने की कवायद की जा रही है। शहरों के नए प्रस्तावित नाम ऐसे हैं कि आप खुद को रामायण और महाभारत काल में...
उत्तर प्रदेश में चुनाव खत्म होने के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार की वापसी के साथ ही अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। चुनाव बाद की हिंसाओं में सबसे अधिक शिकार दलित और पिछड़े वर्ग के लोग हो रहे हैं। बीते 3 अप्रैल...
राजस्थान में दलित कर्मचारियों ने बड़ी एकजुटता दिखायी है। अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी एसोसियेशन ( अजाक) की ओर से पाली जिले में बीते 23 मार्च, 2022 को मारे गए जितेंद्र मेघवाल के परिजनों को तीन लाख, 31 हजार रुपए की राशि दी गयी। जाहिर...
यूपी सहित देश के पांच राज्यों में हुए एक पंजाब को छोड़कर शेष में सरकार बनाने वाली भाजपा इन दिनों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो गई है। इसमें उसका आरएसएस खुलेआम दे रहा है। यह सब इसलिए है क्योंकि इन दोनों राज्यों में...
क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी हिंदू को किसी मंदिर में जाने के लिए सरकार से लिखित अनुमति लेनी पड़ी हो? या फिर कभी आपने सुना है कि किसी इस्लाम धर्मावलंबी को किसी मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए सरकार से लिखित...
बात बहुत खास है। ठीक चार साल पहले का दृश्य यही था। पूरे देश में दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग सड़कों पर थे। देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। कइयों के खिलाफ यूएपीए जैसे काले कानून...
हम भारतीय अपनी स्वतंत्रता से प्यार करते हैं। जब भी हमारी स्वतंत्रता को छीनने का प्रयास किया गया है, हमारे सतर्क नागरिकों ने निरंकुश लोगों से सत्ताा वापस लेने में संकोच नहीं किया। ये बातें किसी राजनेता ने नहीं, बल्कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय...
Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...