Saturday, February 14, 2026

ओपीनियन

संस्मरण माता प्रसाद: जनता के राज्यपाल का जाना

 वरिष्ठ साहित्यकार और अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद जी का दिनांक 19 जनवरी, 2021 को रात में 12 बजे लखनऊ में निधन हो गया। 20 जनवरी की सुबह लखनऊ से माता प्रसाद जी के पुत्र एस.पी. भास्कर जी ने फोन पर यह...

5 फरवरी यानी हिंदू कोड बिल दिवस, इसी दिन भारतीय महिलाओं की मुक्ति की शुरूआत हुई

 डॉ. आंबेडकर ने हिंदू कोड़ बिल (5 फरवरी 1951) के माध्यम से महिलाओं की मुक्ति और समानता का रास्ता खोलने की कोशिश किया था। उन्होंने ब्राह्मणवादी विवाह पद्धति को पूरी तरह से तोड़ देने का कानूनी प्रावधान प्रस्तुत किया। इसके तहत उन्होंने यह प्रस्ताव...

बजट 2021 : मौत और अकाल के आहट पर चुप्पी

 भारत सरकार का बजट 2021 कोविड महामारी के साये में आया है। पिछले एक साल से दुनिया के अन्य देशों की तरह ही भारत का जन-जीवन लगभग थमा हुआ है। ग़रीब और मध्यम आय-वर्ग के लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। करोड़ों लोग पूरी...

नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार ने कदम खींचा, संसद में दिया यह बयान

 ऐसे में जब देश भर में किसान आंदोलन की धमक पहुंच चुकी है, लगता है सरकार फिलहाल कोई दूसरा विवाद नहीं होने देना चाहती है। केंद्र की मोदी सरकार ने दो फरवरी को लोकसभा में कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 को लागू...

दक्षिण एशिया से आधी शताब्दी पीछे है अमेरिका

 20 जनवरी 2021, को कमला हैरिस ने अमेरिका की पहली महिला उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर एक प्रकार का इतिहास रचा। वो पहली अश्वेत, दक्षिण एशिया की महिला हैं जिन्हे यह सम्मान मिला है। यह अमेरिकियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण हो...

जगदेव प्रसादः भागीदारी के सवाल को पुरजोर तरीके से उठाने वाले नायक

 भागीदारी की बात आज की नहीं है। इसका पूरा इतिहास है। आजाद भारत में पहली बार भागीदारी के सवाल पर बात संविधान की प्रस्तावना से शुरू हुई थी। उसके पहले अंग्रेजों ने सवाल उठाया था। मध्ययुग में रैदास ने उठाया(ऐसा चाहूं राज मैं, जहां...

मंदीप पुनिया ने जनपक्षधर पत्रकारिता करने की कीमत चुकाई है

भारतीय समाज एक ऐसे मोड़ आकर खड़ा हो गया है, जहां जो कोई पत्रकारिता करना चाहता है, तो उसके सामने वर्तमान सत्ता ने सिर्फ दो रास्ते छोड़े हैं, पहला सत्ता की दलाली। यह दो तरीके से की जा सकती है, खुले तौर पर...

जब महेन्द्र सिंह टिकैत ने बोट क्लब पर जुटाई थी लाखों की भीड़

 सम्मान हरेक का है, किसान हो या जवान, शहरी हो ग्रामीण। 21वीं सदी में महानगरों में जी रहे उन लोगों की अज्ञानता तो समझी जा सकती है, जिनको अब फिल्मों में भी गांव और किसान देखने को नही मिलते। लेकिन बौद्धिक होने का दंभ...

संविधान के 70 साल बाद भी  मैला ढोता भारत

 जिस देश में संविधान को लागू हुए 70 वर्ष हो गए हों और फिर भी उस देश के नागरिक मैला ढोने जैसे अमानवीय कार्य में लगे हों तो उस देश के विकास का अनुमान लगाया जा सकता है। हम भले ही मंगलयान और चंद्रयान...

डॉ. आंबेडकर के लोकतांत्रिक गणराज्य पर हिन्दू राष्ट्र का खतरा

 26 जनवरी आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में एक है। इसी दिन (26 जनवरी) 1950 को भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया था और भारतीय संविधान को पूरी तरह लागू किया गया था। हालांकि 26 नवंबर 1950 को ही भारतीय संविधान...

जब राजभवन भी झोपड़ी बन जाए : माता प्रसाद का जीवन

  20 जनवरी 2021 को सामाजिक कार्यकर्ता, संस्कृतिकर्मी, लेखक, राजनेता और अरूणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल डॉ.माता प्रसाद का लखनऊ का एसजीपीजीआई, लखनऊ में निधन हो गया। माता प्रसाद का जन्म जौनपुर जिले के मछलीशहर तहसील क्षेत्र के कजियाना मोहल्ले में 11 अक्टूबर 1924...

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से भूपेंद्र सिंह मान के इस्तीफे के मायने

 सुप्रीम कोर्ट ने तीन, कृषि कानूनों पर विचार करने के लिए जिन चार सदस्यों की कमेटी का गठन किया था, उसके एक सदस्य भूपेंद्र सिंह मान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि “वे हमेशा पंजाब और किसानों के साथ...

महिला सशक्तिकरण की प्रतीक मायावती : संघर्ष और चुनौतियाँ

 भारतीय राजनीति में सफल महिलाओं की संख्या गिनी-चुनी ही हैं। उनमें से एक नाम सुश्री मायावती का आता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री के तौर पर नेतृत्व करना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है। जिस उम्र में महिलाएं अपना...

क्या किसान आंदोलन को तोड़ने की सरकार की कवायद का हिस्सा बन रहा है सुप्रीमकोर्ट?

 कभी-कभार के अपवादों को छोड़कर भारत के सुप्रीम कोर्ट के अधिकांश निर्णायक फैसले वर्ण-जाति व्यवस्था, पितृसत्ता, जमींदारों-भूस्वामियों के हितों की रक्षा और पूंजीवाद के पक्ष की ओर झुकते मिले हैं यानि सुप्रीकोर्ट अपरकॉस्ट, मर्दों, सामंतो-भूस्वामियों और पूंजीपतियों के हितों की रक्षा करता रहा है।...

मूल निवासी श्रमण धर्मों की जरूरत और उनका उभार

  महाराष्ट्र के कुछ बौध्द परिवारों ने मिलकर यह बौध्द मंदिर बनाया है। यह असल में बोधगया के महाबोधि मंदिर की प्रतिकृति है। यह बहुत उत्साहवर्धक बात है, इस तरह की पहल पूरे भारत में होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि पूरे...

बहुजन नायकों की जंयती के बहाने अन्य जाति-धर्मों और शास्त्रों को कोसना कितना सही?

 इन दिनों बहुजन नायकों की जयंती पर किसी अन्य जाति, धर्म और धर्म शास्त्रों को कोसने का जैसे चलन सा चल पड़ा है। पहले तो साल में बाबासाहब के नाम पर दो दिन ही होते थे। अब तो हमने कई बहुजन महापुरुषों को ढूंढ...

आधुनिक भारत की पहली विद्रोही कवयित्री: सावित्रीबाई फुले

 अतीत के इन ब्राह्मणों के धर्मग्रंथ फेंक दो करो ग्रहण शिक्षा, जाति-बेड़ियों को तोड़ दो उपेक्षा, उत्पीड़न और दीनता का अन्त करो! -सावित्रीबाई फुले सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत की प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका थीं, इस तथ्य से हम सभी वाक़िफ़ हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं, जो...

2021 में बहुजनों के सामने चुनौतियां

2020 खत्म होने के साथ ही 21वीं सदी के दो दशक बीत गए हैं। ऐसे में हमें थोड़ा ठहर कर अपने समाज एवं आंदोलन की दशा और दिशा पर विचार करना चाहिए। हमें सोचना चाहिए की हमारा समाज और आंदोलन कहाँ तक पहुंचा...

कोरेगांवः अछूतों की वीरगाथा का स्वर्णिम अध्याय

 Written By- डॉ. नरेश कुमार ‘सागर’ भारतीय इतिहास और इतिहासकारों ने बेशक अपनी मानसिक विकृति के चलते भले ही अछूतों को सही स्थान नहीं दिया हो, मगर ये सच है कि जब भी इस मूलनिवासी समाज को मौका मिला उन्होंने अपने जौहर खुलकर दिखाये हैं।...

पढ़िए, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने बहुजन कैलेंडर के बारे में क्या लिखा है

 बहुजन कैलेंडर मेरी नज़र में काम की साधना का मतलब है उसमें डूब कर करते जाना। दलित दस्तक के अशोक दास अपने काम में साधक हैं। युवा अवस्था से ही उन्होंने अपना कुछ बनाने की चुनौती स्वीकार की है। उनके काम में प्रसार संख्या की...
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January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

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राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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