वरिष्ठ साहित्यकार और अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद जी का दिनांक 19 जनवरी, 2021 को रात में 12 बजे लखनऊ में निधन हो गया। 20 जनवरी की सुबह लखनऊ से माता प्रसाद जी के पुत्र एस.पी. भास्कर जी ने फोन पर यह...
डॉ. आंबेडकर ने हिंदू कोड़ बिल (5 फरवरी 1951) के माध्यम से महिलाओं की मुक्ति और समानता का रास्ता खोलने की कोशिश किया था। उन्होंने ब्राह्मणवादी विवाह पद्धति को पूरी तरह से तोड़ देने का कानूनी प्रावधान प्रस्तुत किया। इसके तहत उन्होंने यह प्रस्ताव...
भारत सरकार का बजट 2021 कोविड महामारी के साये में आया है। पिछले एक साल से दुनिया के अन्य देशों की तरह ही भारत का जन-जीवन लगभग थमा हुआ है। ग़रीब और मध्यम आय-वर्ग के लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। करोड़ों लोग पूरी...
ऐसे में जब देश भर में किसान आंदोलन की धमक पहुंच चुकी है, लगता है सरकार फिलहाल कोई दूसरा विवाद नहीं होने देना चाहती है। केंद्र की मोदी सरकार ने दो फरवरी को लोकसभा में कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 को लागू...
20 जनवरी 2021, को कमला हैरिस ने अमेरिका की पहली महिला उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर एक प्रकार का इतिहास रचा। वो पहली अश्वेत, दक्षिण एशिया की महिला हैं जिन्हे यह सम्मान मिला है। यह अमेरिकियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण हो...
भागीदारी की बात आज की नहीं है। इसका पूरा इतिहास है। आजाद भारत में पहली बार भागीदारी के सवाल पर बात संविधान की प्रस्तावना से शुरू हुई थी। उसके पहले अंग्रेजों ने सवाल उठाया था। मध्ययुग में रैदास ने उठाया(ऐसा चाहूं राज मैं, जहां...
भारतीय समाज एक ऐसे मोड़ आकर खड़ा हो गया है, जहां जो कोई पत्रकारिता करना चाहता है, तो उसके सामने वर्तमान सत्ता ने सिर्फ दो रास्ते छोड़े हैं, पहला सत्ता की दलाली। यह दो तरीके से की जा सकती है, खुले तौर पर...
सम्मान हरेक का है, किसान हो या जवान, शहरी हो ग्रामीण। 21वीं सदी में महानगरों में जी रहे उन लोगों की अज्ञानता तो समझी जा सकती है, जिनको अब फिल्मों में भी गांव और किसान देखने को नही मिलते। लेकिन बौद्धिक होने का दंभ...
जिस देश में संविधान को लागू हुए 70 वर्ष हो गए हों और फिर भी उस देश के नागरिक मैला ढोने जैसे अमानवीय कार्य में लगे हों तो उस देश के विकास का अनुमान लगाया जा सकता है। हम भले ही मंगलयान और चंद्रयान...
26 जनवरी आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में एक है। इसी दिन (26 जनवरी) 1950 को भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया था और भारतीय संविधान को पूरी तरह लागू किया गया था। हालांकि 26 नवंबर 1950 को ही भारतीय संविधान...
20 जनवरी 2021 को सामाजिक कार्यकर्ता, संस्कृतिकर्मी, लेखक, राजनेता और अरूणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल डॉ.माता प्रसाद का लखनऊ का एसजीपीजीआई, लखनऊ में निधन हो गया। माता प्रसाद का जन्म जौनपुर जिले के मछलीशहर तहसील क्षेत्र के कजियाना मोहल्ले में 11 अक्टूबर 1924...
सुप्रीम कोर्ट ने तीन, कृषि कानूनों पर विचार करने के लिए जिन चार सदस्यों की कमेटी का गठन किया था, उसके एक सदस्य भूपेंद्र सिंह मान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि “वे हमेशा पंजाब और किसानों के साथ...
भारतीय राजनीति में सफल महिलाओं की संख्या गिनी-चुनी ही हैं। उनमें से एक नाम सुश्री मायावती का आता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री के तौर पर नेतृत्व करना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है। जिस उम्र में महिलाएं अपना...
कभी-कभार के अपवादों को छोड़कर भारत के सुप्रीम कोर्ट के अधिकांश निर्णायक फैसले वर्ण-जाति व्यवस्था, पितृसत्ता, जमींदारों-भूस्वामियों के हितों की रक्षा और पूंजीवाद के पक्ष की ओर झुकते मिले हैं यानि सुप्रीकोर्ट अपरकॉस्ट, मर्दों, सामंतो-भूस्वामियों और पूंजीपतियों के हितों की रक्षा करता रहा है।...
महाराष्ट्र के कुछ बौध्द परिवारों ने मिलकर यह बौध्द मंदिर बनाया है। यह असल में बोधगया के महाबोधि मंदिर की प्रतिकृति है। यह बहुत उत्साहवर्धक बात है, इस तरह की पहल पूरे भारत में होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि पूरे...
इन दिनों बहुजन नायकों की जयंती पर किसी अन्य जाति, धर्म और धर्म शास्त्रों को कोसने का जैसे चलन सा चल पड़ा है। पहले तो साल में बाबासाहब के नाम पर दो दिन ही होते थे। अब तो हमने कई बहुजन महापुरुषों को ढूंढ...
अतीत के इन ब्राह्मणों के धर्मग्रंथ फेंक दो
करो ग्रहण शिक्षा, जाति-बेड़ियों को तोड़ दो
उपेक्षा, उत्पीड़न और दीनता का अन्त करो!
-सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत की प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका थीं, इस तथ्य से हम सभी वाक़िफ़ हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं, जो...
2020 खत्म होने के साथ ही 21वीं सदी के दो दशक बीत गए हैं। ऐसे में हमें थोड़ा ठहर कर अपने समाज एवं आंदोलन की दशा और दिशा पर विचार करना चाहिए। हमें सोचना चाहिए की हमारा समाज और आंदोलन कहाँ तक पहुंचा...
Written By- डॉ. नरेश कुमार ‘सागर’
भारतीय इतिहास और इतिहासकारों ने बेशक अपनी मानसिक विकृति के चलते भले ही अछूतों को सही स्थान नहीं दिया हो, मगर ये सच है कि जब भी इस मूलनिवासी समाज को मौका मिला उन्होंने अपने जौहर खुलकर दिखाये हैं।...
बहुजन कैलेंडर
मेरी नज़र में काम की साधना का मतलब है उसमें डूब कर करते जाना। दलित दस्तक के अशोक दास अपने काम में साधक हैं। युवा अवस्था से ही उन्होंने अपना कुछ बनाने की चुनौती स्वीकार की है। उनके काम में प्रसार संख्या की...
Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...