मायावती ने साफ किया 2019 का एजेंडा, मोदी और भाजपा पर उठाया ये बड़ा सवाल

नयी दिल्ली। 2019 आमचुनाव की घोषणा के बाद आज बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा और पीएम मोदी पर हमला बोला है, साथ ही बसपा प्रमुख ने दो बड़ा सवाल उठाया है. अपने ट्वीट के जरिये मायावती ने मोदी और भाजपा को लेकर एक के बाद एक दो हमले किये. 2014 चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा किये गए वादों का जिक्र करते हुए दिग्गज नेता ने कहा-

बीजेपी राष्ट्रवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ताल ठोक रही है. बीजेपी जो चाहे करे लेकिन पहले करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगारों आदि को बताये कि अच्छे दिन लाने व अन्य लुभावने चुनावी वायदों का क्या हुआ? क्या हवा-हवाई विकास हवा खाने गया?

तो वहीं इन दिनों पाकिस्तान को पटखनी देने का दम भरने वाले मोदी को कश्मीर नीति पर ही आईना दिखाते हुए बसपा अध्यक्ष ने कहा कि-

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का आमचुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं कराना श्री मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता का द्योतक है. जो सुरक्षा बल लोकसभा चुनाव करा सकते हैं वही उसी दिन वहाँ विधानसभा का चुनाव क्यों नहीं करा सकते हैं? केन्द्र का तर्क बेतुका है व बीजेपी का बहाना बचकाना है.

जिस तरह से मायावती भाजपा और मोदी पर एक के बाद दूसरा हमला कर रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में मोदी और भाजपा बसपा प्रमुख के सीधे निशाने पर रहने वाले हैं.

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चुनाव पर इन दिग्गज़ों की पहली टिप्पणी में बहुजनों के लिए बड़ा मैसेज

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नयी दिल्ली। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही राजनीति के दिग्गजों और देश के दिग्गज पत्रकारों की प्रतिकिया आनी शुरू हो गई है. हर कोई 2019 के चुनाव को अपने तरीक़े से देख रहा है. तमाम दिग्गजों ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है. बसपा प्रमुख मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ट्वीट करते हुए कहा-

@Mayawati बहुप्रतीक्षित लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की आज शाम घोषणा होते ही आचार संहिता के लागू हो जाने से पीएम श्री मोदी की खोखली व हवाहवाई घोषणाओं व शाही खर्चों वाले इनके सरकारी शिलान्यास आदि प्रोग्रामों से देश को मुक्ति तो मिल जायेगी लेकिन जनता इनके अन्य हथकंडों से भी सावधान रहे. एक और ट्वीट में बहनजी ने लिखा-

@Mayawati बीजेपी की निरंकुश व अहंकारी सरकार के कार्यकलापों से देश में हर तरफ व्यापक अशान्ति, असंतोष व आक्रोश ही फैला है. निश्चित ही देश की 130 करोड़ जनता इससे बहुत बेहतर की हकदार है. नई सरकार लोकतंत्र की प्रहरी, संविधान की रक्षक व सर्वसमाज की हितैषी होगी तभी देश का सही भला होगा.

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश आगामी चुनाव को अलग नजरिये से देख रहे हैं. उन्होंने पत्रकारिय मूल्यों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया है. अपने ट्वीट में उर्मिलेश काफी गंभीर सवाल उठाते हैं….

@ Urmilesh ज्यादातर मित्र जानते हैं, हम जैसों की किसी पार्टी या उसके नेता से निकटता नहीं. ज्यादा बडे़ नेता हमें नापसंद करते है. इस चुनाव पर मेरा आकलन है कि यह कोई साधारण चुनाव नहीं! इसमें तय होगा कि भारत सेक्युलर- डेमोक्रेसी बना रहेगा या नहीं? संविधान भविष्य में चलेगा या कोई और विधान लागू होगा?

तो इसी तरह चुनाव विश्लेषक और राजनीति में सक्रिय योगेंद्र यादव ने राजनैतिक नैतिकता का सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. योगेंद्र यादव लिखते हैं-

@Yogendra Yadav प्रधानमंत्री जी,आप आतंक के खिलाफ युद्ध की आड़ में चुनाव लड़ना चाहते हैं? जंग की ओट में वोट मांगना चाहते हैं? सैनिकों के शौर्य का श्रेय लेकर चुनावी जीत का सेहरा बांधना जिम्मेवारी नहीं गद्दारी है. जवानों की अर्थी और खून के सहारे वोट मांगना देश भक्ति नहीं देशद्रोह है.

टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने पीएम पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया है- @Ravish Kumar कृपया इस बार प्रधानमंत्री चुने , चौकीदार नेपाल से मंगवा लेंगे .

इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि देश चुनावी मोड में आ चुका है. चुनाव का फीवर हर दिन बढ़ता जाएगा. चुनाव आयोग ने कल 10 मार्च को चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है जिसके मुताबिक चुनाव 7 चरणों मे होगा. पहले चरण का चुनाव 11 अप्रैल को होगा जबकि आखिरी चरण का चुनाव 19 मई को होगा. नतीजे 23 मई को आएंगे जिसके साथ कि साफ हो जाएगा कि 17वीं लोकसभा के लिए देश की जनता ने किसे जनादेश दिया है. फिलहाल आने वाले ढाई महीने देश लोकतंत्र के उत्सव में डूबा रहने वाला है.

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लोकसभा चुनाव में पहली बार वोटिंग मशीनों पर उम्मीदवारों की फोटो व वीवीपैट

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने रविवार को लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया. 2019 लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए 10 लाख बूथ बनाए जाएंगे. सभी पर वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का इस्तेमाल होगा. यह पहला मौका है जब देशभर में सभी बूथों पर वीवीपैट का इस्तेमाल होगा. प्रत्याशियों के एक जैसे नाम से वोटर भ्रमित न हों इसलिए वोटिंग मशीन पर पार्टी के नाम और चिन्ह के साथ ही उम्मीदवारों की फोटो भी होगी.

इस बार लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ वोटर होंगे. इनमें 8.43 करोड़ नए वोटर हैं. कुल वोटरों में 1.5 करोड़ 18-19 साल की उम्र के मतदाता हैं.

मॉनिटरिंग कमेटी में सोशल मीडिया एक्सपर्ट भी शामिल होंगे लोकसभा चुनाव में पहली बार सोशल मीडिया एक्सपर्ट मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी का हिस्सा होंगे. प्रत्याशियों को सोशल मीडिया अकाउंट और उसपर प्रचार में खर्च राशि की जानकारी देनी होगी. सोशल मीडिया पर खर्च राशि को प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे में जोड़ा जाएगा. अरुणाचल, गोवा और सिक्किम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों के प्रत्याशी चुनाव में 70 लाख रुपए खर्च कर सकेंगे. वहीं, इन तीनों में राज्यों में यह राशि 54 लाख रुपए है.

ईवीएम ले जाने वाले वाहनों में लगेगा जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि ईवीएम पर कड़ी नजर रखी जाएगी. इसके लिए मशीनों को ट्रैक करने के लिए इन्हें लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में इसको लेकर शिकायतें मिली थीं. लोकसभा चुनाव के लिए हेल्पलाइन नंबर-1950 होगा. मोबाइल पर ऐप के जरिए भी आयोग को आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी दी जा सकती है और 100 मिनट के भीतर आयोग के अधिकारी को इस पर एक्शन लेना होगा. शिकायतकर्ता की निजता का ख्याल रखा जाएगा.

बिना पैनकार्ड उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होगा चुनाव आयोग के मुताबिक, इस बार लोकसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों को न केवल पिछले पांच साल की आय का ब्यौरा देना होगा, बल्कि पैन कार्ड भी देना अनिवार्य होगा. अगर कोई उम्मीदवार पैनकार्ड नहीं देता तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा. साथ ही उम्मीदवारों को विदेश में मौजूद संपत्ति की भी जानकारी देनी होगी. इस बार फॉर्म 26 में सभी जानकारियां भरनी होंगी, नहीं तो उम्मीदवारी रद्द हो जाएगी.

क्या है वीवीपैट? इसके तहत ईवीएम से प्रिंटर की तरह एक मशीन अटैच की जाती है. वोट डालने के 10 सेकंड बाद इसमें से एक पर्ची बनती है, इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया है उसका नाम और चुनाव चिन्ह होता है. यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है, इसके बाद मशीन में लगे बॉक्स में चली जाती है. इस मशीन को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड डिजायन किया है. सबसे पहले इसका इस्तेमाल 2013 में नगालैंड विधानसभा चुनाव में हुआ था.

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लोकसभा चुनाव : आपकी सीट पर कब होगी वोटिंग, पढ़ें पूरी डिटेल

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने रविवार को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है. जिसके मुताबिक पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इनमें आंध्र प्रदेश की 25, यूपी की 8, बिहार की 4, महाराष्ट्र की 7, अरुणाचल प्रदेश की 2, असम की 5, छत्तीसगढ़ की 1, जम्मू-कश्मीर की 2, मणिपुर की 1, मेघालय की 2, मिज़ोरम की 1, नागालैंड की 1, ओडिशा की 4, सिक्किम की 1, उत्तराखंड की 5, पश्चिम बंगाल की 2, लक्षद्वीप की 1, तेलंगाना की 17, त्रिपुरा की 1 और अंडमान की 1 सीटें शामिल हैं. दूसरे चरण में 18 अप्रैल को 12 राज्यों की 97 सीट पर वोट पड़ेंगे. इनमें असम की 5, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 3, जम्मू-कश्मीर की 2, कर्नाटक की 14, महाराष्ट्र की 10, मणिपुर की 1, ओडिशा की 5, तमिलनाडु की 39, त्रिपुरा की 1, उत्तर प्रदेश की 8, पश्चिम बंगाल की 3 और पुड्डुचेरी की 1 सीटें शामिल हैं. तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान होगा. इनमें असम की 4, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 7, गुजरात की 26, गोवा की 2, जम्मू-कश्मीर की 1, कर्नाटक की 14, केरल की 20, महाराष्ट्र की 14, ओडिशा की 6, उत्तर प्रदेश की 10, पश्चिम बंगाल की 5, दादरा और नगर हवेली की 1, और दमन-दीव की 1 सीटें शामिल हैं.

चौथे चरण में 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इनमें बिहार की 5, जम्मू-कश्मीर की 1, झारखंड की 3, मध्य प्रदेश की 6, महाराष्ट्र की 17, ओडिशा की 6, राजस्थान की 13, उत्तर प्रदेश की 13, और पश्चिम बंगाल की 8 सीटें शामिल हैं. पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर वोट पड़ेंगे. इनमें बिहार की 5, जम्मू-कश्मीर की 2, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 7, राजस्थान की 12, उत्तर प्रदेश की 14 और पश्चिम बंगाल की 7 सीटें शामिल हैं. छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों पर वोट पड़ेंगे. इनमें बिहार की 8, हरियाणा की 10, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 8, उत्तर प्रदेश की 14, पश्चिम बंगाल की 8 सीटें हैं… दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर भी इसी दिन वोटिंग होगी. सातवें चरण में 19 मई को 8 राज्यों की 59 सीटों पर वोट डाले जाएंगे… इनमें बिहार की 8, झारखंड की 3, मध्य प्रदेश की 8, पंजाब की 13, पश्चिम बंगाल की 9, चंडीगढ़ की 1, उत्तर प्रदेश की 13 और हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें शामिल हैं. इसके चार दिन बाद 23 मई को नतीजे आएंगे.

दिल्ली में 7 सीटें, 1 चरण में मतदान 12 मई : चांदनी चौक, नई दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली

राजस्थान में 25 सीटें, 2 चरण में मतदान 29 अप्रैल : जोधपुर, टोंक-सवाईमाधोपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़-बारां, , अजमेर, 6 मई : दौसा, नागौर, गंगानगर, बीकानेर, चुरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर, करौली धौलपुर,

मध्यप्रदेश में 29 सीटें, चार चरण मतदान 29 अप्रैल : सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा 6 मई : टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल 12 मई : मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़ 19 मई : देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा

छत्तीसगढ़ में 11 सीटें, 3 चरण में मतदान 11 अप्रैल : बस्तर 18 अप्रैल : राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर 23 अप्रैल : रायपुर, सरगुजा, जांजगीर-चंपा, कोरबा, बिलासपुर, दुर्ग,

बिहार में 40 सीटें, 7 चरणों मतदान 11 अप्रैल : जमुई औरंगाबाद, गया, नवादा, 18 अप्रैल : बांका, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर 23 अप्रैल : खगड़िया, झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, 29 अप्रैल : दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर 6 मई : मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारन, हाजीपुर, सीतामढ़ी, 12 मई : पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, , शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सिवान, महाराजगंज, वाल्मीकिनगर 19 मई : नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकट, जहानाबाद

उत्तर प्रदेश में 80 सीटें, 7 चरणों में मतदान 11 अप्रैल : गौतमबुद्ध नगर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर 18 अप्रैल : अलीगढ़, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, मथुरा, आगरा, फतेहपुर सीकरी, नगीना 23 अप्रैल : मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली, पीलीभीत 29 अप्रैल : शाहजहांपुर, खेड़ी़, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कनौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झांसी, हमीरपुर 6 मई : फिरोजाबाद, धौरहरा, सीतापुर, माेहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, बहराइच, कैसरगंज, गोंडा 12 मई : सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीर नगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही 19 मई : महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सालेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज

झारखंड में 14 सीटें, 4 चरणों में मतदान 29 अप्रैल : चतरा, लोहारदगा, पलामू 6 मई : कोडरमा, रांची, खूंटी, हजारीबाग 12 मई : गिरीडीह, धनबाद, जमशेदपुर, सिंहभूम 19 मई : राजमहल, दुमका, गोड्डा

महाराष्ट्र में 48 सीटें, 4 चरणों में मतदान 11 अप्रैल : वर्धा, रामटेक, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, गढ़चिरौली-चिमूर, चंद्रपुर, यवतमाल-वाशिम 18 अप्रैल : बुलढाना, अकोला, अमरावती, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, उस्मानाबाद, लातूर, सोलापुर 23 अप्रैल : जलगांव, रावेर, जालना, औरंगाबाद, रायगढ़, पुणे, बारामती, अहमदनगर, मढ़ा, सांगली, सातारा, रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, हटकानांगले 29 अप्रैल : नंदूरबार, धुले, डिंडोरी, नासिक, पालघर, भिवंडी, कल्याण, ठाणे, मुंबई, मुंबई उत्तर-पश्चिम, मुंबई उत्तर-पूर्व, मुंबई उत्तर-मध्य, मुंबई दक्षिण-मध्य, मुंबई दक्षिण, मावल, शिरूर, शिर्डी

असम में 14 सीटें, 3 चरणों में मतदान 11 अप्रैल : तेजपुर, कलियाबोर, जोरहट, डिब्रूगढ़, लखीमपुर 18 अप्रैल : करीमगंज, सिलचर, ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट, मंगलदोई और नौगांव 23 अप्रैल : धुबड़ी, कोकराझार, बारपेटा, गुवाहाटी

जम्मू-कश्मीर में 6 सीटें, 5 चरणों में मतदान 11 अप्रैल : बारामूला, जम्मू 18 अप्रैल : श्रीनगर, उधमपुर 23 अप्रैल : अनंतनाग (सिर्फ अनंतनाग जिले में वोटिंग) 29 अप्रैल : अनंतनाग (सिर्फ कुलगाम जिले में वोटिंग) 6 मई : लद्दाख, अनंतनाग (सिर्फ शोपियां जिले में वोटिंग)

कर्नाटक में 28 सीटें दो चरणों मतदान 18 अप्रैल : उदुपी-चिकमगलूर, हासन, दक्षिण कन्नड़, चित्रदुर्गा, तुमकुर, मांड्या, मैसूर, चामराजनगर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु उत्तर, बेंगलुरु मध्य, बेंगलुरु दक्षिण, चिक्काबल्लापुर, कोलार 23 अप्रैल : चिक्कोडी, बेलगांव, बगलकोट, बीजापुर, गुलबर्गा, रायचूर, बीदर, कोप्पल, बेल्लारी, हावेरी, धारवाड़ा, उत्तर कन्नड़, दावणगेरे, शिमोगा

ओडिशा में 21 सीटें, 4 चरणों मतदान 11 अप्रैल : कालाहांडी, नबरंगपुर, बेरहामपुर, कोरापुट 18 अप्रैल : बरगढ़, सुंदरगढ़, बोलांगीर, कंधमाल, अस्का 23 अप्रैल : संबलपुर, क्योंझर, ढेंकानाल, कटक, पुरी, भुवनेश्वर 29 अप्रैल : मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर

मणिपुर में 2 सीटों, दो चरणों मतदान 1 अप्रैल : बाहरी मणिपुर 18 अप्रैल : आंतरिक मणिपुर

त्रिपुरा में 2 सीटों में मतदान, दो चरण में मतदान 11 अप्रैल : त्रिपुरा पश्चिम 18 अप्रैल : त्रिपुरा पूर्व

बंगाल में 42 सीटें, 7 चरणों मतदान 11 अप्रैल : कूच बिहार, अलीपुरदुआर 18 अप्रैल : जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, रायगंज 23 अप्रैल : बालुरघाट, मालदा उत्तर, मालदा दक्षिण, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद 29 अप्रैल : बेहरामपुर, कृष्णानगर, राणाघाट, बर्धमान पूर्व, बर्धमान-दुर्गापुर, आसनसोल, बोलपुर, बीरभूम 6 मई : बंगांव, बैरकपुर, हावड़ा, उलुबेरिया, श्रीरामपुर, हुगली, आरामबाग 12 मई : तामलुक, कांति, घाटल, झारग्राम, मेदिनीपुर, पूर्णिया, बांकुरा, विष्णुपुर, 19 मई : मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर, दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर,

असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन में BPSC ने की आरक्षण नियमों की अनदेखी

64वीं प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में विसंगति के आरोपों से घिरे बिहार लोक सेवा आयोग पर असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी के रिजल्ट में भी गड़बड़ी करने का आरोप अभ्यर्थियों ने लगाया है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने रिजल्ट जारी करने में आरक्षण नियमों की अनदेखी की है. आयोग ने भर्ती में 50 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण दे दिया है.

असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी के कुल 250 पदों के लिए आयोग ने गत वर्ष मई-जून में इंटरव्यू लिया था. विज्ञापन के अनुसार 250 पदों में से 126 पद अनारक्षित कोटि(सामान्य वर्ग)के लिए तथा पिछड़ा वर्ग के लिए 31, अति पिछड़ा वर्ग के लिए 42, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 06 ,अनुसूचित जाति के लिए 43 एवं अनसूचित जनजाति के लिए 02 पद आरक्षित था.

राज्य सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हेतु 2014 मेंं परिनियम बनाया था जिसमें उम्मीदवारों के चयन के लिए 85 अंक शैक्षिणिक योग्यता एवं 15 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित किए गए थे. आयोग ने नियमों के आलोक मेंं असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी के लिए कुल 1066 उम्मीदवारों को साक्षात्कार हेतु आमंत्रित किया जिसमें मात्र 753 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया. आयोग ने साक्षात्कार में सम्मिलित कुल उम्मीदवारों में से 24 की उम्मीदवारी अलग-अलग कारणों से निरस्त कर दी.शेष बचे 729 उम्मीदवारों की मेधा सूची से 250 पदों के लिए सफल उम्मीदवारों की सूची आयोग ने 12 फरवरी की रात्रि में जारी की.

अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने परिणाम जारी करने में नियमों का पालन नहीं किया जिससे अन्य पिछड़े वर्ग के कई उम्मीदवार चयनित होने से वंचित रह गए. अभ्यर्थियों का कहना है कि आनारक्षित कोटि की खुली प्रतियोगिता वाली सीटें (50 प्रतिशत) भिन्न समुदाय के शीर्ष 126 अभ्यर्थियों की मेधा सूची से भरी जानी थी , किन्तु आयोग ने आरक्षण नियमों को दरकिनार कर आनारक्षित कोटि की सभी सीटें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से भर दी. आनारक्षित कोटि में स्थान बनाने वाले (शीर्ष क्रम से 126तक) अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को उनके रिजर्व कटगरी में समायोजित कर दिया , जबकि राज्य सरकार द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए जारी परिनियम के अध्याय-4 में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि , ” अगर आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी आनारक्षित वर्ग के लिए चुना जाता है, तो उसकी नियुक्ति आनारक्षित कोटे में होगी.”

अभ्यर्थियों का कहना है कि BPSC द्वारा जारी मेधा क्रम में 09, 69, 73, 106, 110, 112 तथा 114 पर अंकित अभ्यर्थी का चयन अनारक्षित कोटे में होना चाहिए था , परन्तु आयोग ने इन्हें पिछड़ा- अतिपिछड़ा वर्ग के कोटे में डाल दिया है. इससे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कई पात्र अभ्यर्थी चयनित होने से वंचित रह गए हैं.पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता परमानंद सिंह ने बताया कि आयोग के पदाधिकारियों से इस मसले पर पूछताछ की , पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहींं दिया. यह अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है. आयोग के इस कारनामे से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आन्दोलन के मूड में हैं.

रामकृष्ण यादव
स्वतंत्र पत्रकार -सह- अध्यापक

दलित दस्तक मैग्जीन का मार्च 2019 अंक ऑन लाइन पढ़िए

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दलित दस्तक मासिक पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. जून 2012 से यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित हो रही है. मई 2018 अंक प्रकाशित होने के साथ ही पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. हम आपके लिए सांतवें साल का दसवां अंक लेकर आए हैं. इस अंक के साथ ही दलित दस्तक ने एक नया बदलाव किया है. इसके तहत अब दलित दस्तक मैग्जीन के किसी एक अंक को भी ऑनलाइन भुगतान कर पढ़ा जा सकता है.

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हवाई चप्पल पहन कर घूमने वाला यह बन्दा कौन है?

25 साल का यह युवा मगना राम केडली है,जो नोखा इलाके का रहनेवाला है. एकदम निडर युवक. बाबा साहेब के विचारों से प्रभावित हो कर 10 वर्षों से जन संघर्ष में जुटा है.

आज अचानक ही जयपुर की सड़क पर भेंट हो गई, विधानसभा के पास. सड़कछाप होने का यही फायदा रहता है,जमीन पर पैदल चलो तो कोई न कोई मिल ही जाता है,खासकर ऐसा व्यक्ति जो जमीन से जुड़ा हुआ हो .

मगना राम केडली ऐसा ही जमीनी संघर्ष करने वाला बन्दा है,बेबाक,बेलौस,बेख़ौफ़ युवा. जिसे मान ,अपमान,सम्मान ,पुलिस,कोर्ट,जेल का भय नहीं है. जनता के लिए किसी से भी भिड़ सकता है.

आज के दौर के युवा नेताओ की तरह नहीं है मगना राम,सीधा सपाट,स्पष्टवादी और डाउन टू अर्थ व्यक्ति,कोई तामझाम नहीं,कोई दिखावा नहीं,किसी प्रकार की अभिलाषा नहीं,ग़ज़ब का लड़ाकू इंसान .

गांव का पढ़ा लिखा छोकरा,जो बाद में नोखा के अम्बेडकर छात्रावास में भी रहा और अभी राजस्थान विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन कर रहा है.

क्या आजकल के युवा नेताओं से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वे 70 रुपये की हवाई चप्पल पहनकर सार्वजनिक जीवन मे जनहित के कार्य कर सकें ,पर मगना राम केडली यह करता है, वह हवाई चप्पल पहनता है.

आचरण से पक्का समाजवादी, महज दो जोड़ी कपड़े बनवाता है,वो भी एकदम सस्ते . ,प्रत्येक ड्रेस 450 रुपये की होती है,दो ड्रेस दो साल चल जाती है. गर्मी में एक चादर और सर्दियों में एक कंबल साथ रखता है,कभी होटल में नहीं रुकता,या तो परिचितों के यहां बसेरा करता है,अथवा रेलवे स्टेशन पर ही सो जाता है.

उसका पूरा अभियान जनसहयोग से चलता है. किसी भांति के नशे की कोई आदत नहीं,यहां तक कि चाय भी नहीं. हाथ में जो मोबाइल है,वह बहुत आग्रह करके मित्रों ने दिया है .

लघु सीमांत काश्तकार परिवार से आता है बन्दा,भरा पूरा परिवार है,घर में पिताजी ,माँ, दो भाई और 5 बहने है,11 बीघा खेती है,उससे बाजरी और दलहन तिलहन हो जाता है.कृषि पर ही आधारित है पूरे परिवार की आजीविका . उसी से परिवार चलता है.

शादी बचपन मे ही हो गयी. एक बेटी है जो गांव में रह कर पढ़ती है. जब शादी हुई ,तब मगना राम पत्नी 5वीं तक पढ़ी हुई थी, शिक्षा के महत्व को समझने वाले मगना राम ने उसे ग्रेजुएशन करवाया ,इन दिनों वे भाटिया आश्रम में रहकर आर ए एस की तैयारी कर रही हैं .

मगना राम केडली संघर्ष का दूसरा नाम है,उन्होंने जनहित की 13 सूत्री मांगों को लेकर नोखा से जयपुर तक 7 दिन 350 किमी तक पदयात्रा की.

वे विगत 10 साल से सामाजिक संघर्ष कर रहे हैं, कक्षा 6 से 10 तक अम्बेडकर छात्रावास में रहे,वहीं से उन्होंने बाबा साहेब को जाना.

केडली राजनीतिक रूप से काफी जागरूक व्यक्ति है,उन्होंने बीए फर्स्ट ईयर में ही डूंगर कॉलेज में महासचिव का चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीत भी हासिल की .

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी के साथ रहे, डूडी न केवल जीते बल्कि नेता प्रतिपक्ष भी बने,बाद में उनसे मतभेद होने पर केडली ने डूडी को छोड़ दिया,पर राजनीतिक रूप से जवाब भी दिया,इस बार निर्दलीय चुनाव लड़कर 8 हजार से ज्यादा वोट ले लिए,जिससे रामेश्वर डूडी की हार सुनिश्चित हो गई.

केडली कहते हैं कि -“डांगावास मुद्दे पर डूडी बोले नहीं ,विपक्ष के नेता थे,मेरे दिमाग मे यह बात जम गई कि इस आदमी को अगली बार विधानसभा में नहीं पहुंचने देना है,वो मैंने कर दिया”

केडली किसी का भी निर्भीकता से सामना कर लेते हैं,जब श्रीमती राजे सीएम थी,तब उन्होंने कांकडा में वसुधरा राजे का विरोध किया. 2015 में नेता प्रतिपक्ष का पुतला फूंक दिया.

2016 में जब नोखा में डेल्टा मेघवाल का प्रकरण हुआ तो मगनाराम केडली उसमें अहम संघर्षकर्ता के तौर पर सामने आए,उन्होंने धरना दिया,पांच दिन तक. मुजरिमों की गिरफ्तारी होने पर ही उठे.

साठिका में 75 मकान तोड़े गये वर्ष 2017 में,क्योंकि ये घर जिस जगह बने थे,वह ओरण की जमीन थी ,जबकि मकान तो आज़ादी के पहले से बने हुए थे, 50 दिन तक धरना चलाया,उनकी मांग तो मानी नहीं गई, विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गयी,धरने से उठना पड़ा, पर संघर्ष आज भी जारी है.

इसी तरह केडली धुनिनाथ जी के मकान के लिए 4 साल से संघर्ष कर रहे है. उनकी खासियत यह है कि वे विस्थापन के खिलाफ व अत्याचार मुक्ति हेतु निरन्तर लड़ते रहते हैं. अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए मगनाराम इच्छा जताते है कि मैं अंतिम सांस तक समाज का काम करना चाहता हूँ. उनका सवाल है कि आज़ादी के इतने साल बाद भी अन्याय,अत्त्याचार व शोषण जारी है,हम नहीं बोलेंगे तो फिर कौन बोलेगा ?

निरन्तर संघर्षों ने उन्हें स्वाभाविक रूप से उग्रता भी दे दी है,निडरता के साथ साथ स्वाभिमानी भी और सहज अग्रेसिव भी . इसीलिये अक्टूबर 2018 में वे एक तहसीलदार के पास किसी के जाति प्रणाम पत्र के लिए गए तो तहसीलदार ने बदतमीजी कर दी ,हाथापाई हो गयी,धारा 233,253 में मुकदमा कायम हो गया,जेल जाना पड़ा,7 दिन अंदर रहना पड़ा . हजारों लोगों ने उनका समर्थन किया.

अब तक मगनाराम पर 3 मुकदमें दर्ज हो चुके है,जिसमें से 1 अभी तक चल रहा है,2 खत्म हो गए हैं .

मगनाराम केडली अपनी राजनीति को लेकर बहुत स्पष्ट है ,वे कहते है कि समाज के हितों को ताक में रख कर मुझे राजनीति नहीं करनी .

उनके लिए जनता ही प्रथम है,लोक सरोकार से कम कुछ भी मंजूर नहीं,इसलिए लोगों का भी खूब समर्थन मिलता है,केडली बताते है कि इस बार मैने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा तो जनसहयोग से,लोगों ने करीब साढ़े चार लाख की मदद की,कुछ खर्च हो गया,कुछ बच गया. वह अभी भी सुरक्षित है, वापस चुनाव लड़ूंगा तो उस सहयोग को काम मे लूंगा.

मगनाराम का कहना है कि जब तक ज़िंदा रहूंगा,गरीब लोगों की हक़ हकूक की लड़ाई लड़ता रहूंगा,सिर्फ एक जाति के लिए नहीं ,हर गरीब इंसान के लिए है मेरी लड़ाई.

दलित आदिवासी जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व खामोशी को लेकर केडली काफी चिंतित है,उनका कहना है कि जब तक राजनीतिक रिजर्वेशन रहेगा, तब तक ऐसा ही नपुसंक नेतृत्व चुना जाएगा,यही लोग हमारे लिए खतरा है. उनका मानना है कि जो जनप्रतिनिधि आरक्षित सीटों से चुने जा रहे है,वे हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करते,हमें अनारक्षित सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए.

बराबरी व भागीदारी की लड़ाई लड़ रहे इस आम संघर्षशील युवा ने संकल्प लिया है कि वे अपने आदर्श बाबा साहेब की प्रतिमा नोखा तहसील क्षेत्र की हर ग्राम पंचायत में लगाएंगे .इस हेतु उन्होंने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं .

मैंने मगनाराम केडली को उनके लक्ष्य के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी और सड़क से विदा ली,क्योंकि मुझे कुशीनगर की ट्रेन पकड़ने के लिए आगरा निकलना था .

मगनाराम केडली के मोबाइल नम्बर 09414471144 है.

– भंवर मेघवंशी (सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतन्त्र पत्रकार )

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मोदी है तो मुमकिन है, लंदन में लुक बदलकर आजाद घूम रहा नीरव मोदी

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भारत की जांच एजेंसी जिस घोटालेबाज भगोड़े नीरव मोदी को तलाश रही है, वो लंदन की सड़कों पर घूमता मिला. बैंकों का 13 हजार करोड़ लेकर फरार हीरा कारोबारी पहली बार कैमरे में कैद हुआ. बढ़ी दाढ़ी में नीरव मोदी बेखौफ नजर आया. वो इस बात से बेपरवाह दिखा कि भारत की जांच एजेंसी उसे तलाश रही है.

एक अंग्रेजी अखबार के संवाददाता ने बीच सड़क पर नीरव मोदी से कई सवाल किए, लेकिन उसने किसी भी सवाल का जबाव नहीं दिया. इस दौरान संवाददाता ने कई सवाल पूछे, जिसका जवाब देने की बजाए नीरव मोदी केवल ‘नो कमेंट’ बोलता रहा. नीरव मोदी के सामने आने के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार से कई सवाल पूछे हैं.

कांग्रेस ने कहा- ‘पत्रकार नीरव मोदी को पकड़ने में कामयाब हुए. मोदी सरकार ऐसा क्यों नहीं कर पाई? मोदी किसकी रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं? अपने आपको, नीरव मोदी या उन्हें भागने वाले लोग को?’

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरेजवाला ने कहा, ‘देश का 23,000 करोड़ लूट कर ले जाओ, बग़ैर रोक-टोक देश से भाग जाओ, फिर PM के साथ विदेश में फ़ोटो खिचवाओ, लंदन में 73 करोड़ के ऐशगाह में ज़िंदगी बिताओ, बुझो, मैं कौन हूँ, अरे छोटा मोदी, और कौन. जब मोदी भए कौतवाल, तो डर काहे का.मोदी है तो मुमकिन है.’

नीरव मोदी के खिलाफ जारी है रेड कॉर्नर नोटिस

जांच एजेंसियों ने इंडिया टुडे को बताया है कि वे नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के सिलसिले में यूके के अधिकारियों से खुश नहीं हैं. एजेंसियों का कहना है कि मोदी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने के बाद हमने ब्रिटेन के अधिकारियों को उनके पते पर प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा. अधिकारियों से उम्मीद की जाती थी कि वे मोदी को अस्थायी रूप से गिरफ्तार करेंगे, ताकि न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो सके लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

प्रवर्तन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने नीरव मोदी को गिरफ्तार करने के लिए यूके के अधिकारियों को कई रिमाइंडर भेजे हैं, लेकिन लंदन के अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी के मामले में नीरव मोदी की 147.72 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क किया.

ईडी ने 15 फरवरी, 2018 को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत नीरव मोदी और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. कथित रूप से नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अन्य लोगों ने पंजाब नेशनल बैंक के कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक के साथ धोखाधड़ी की.

अभी तक नीरव मोदी की भारत और विदेशों में मौजूद 1,725.36 करोड़ रुपये की संपत्तियां को जब्त किया जा चुका है. इसके अलावा नीरव मोदी समूह से संबंधित 489.75 करोड़ रुपये के सोने, हीरे, बुलियन, आभूषण और अन्य कीमती सामान भी जब्त किए गए.

श्रोत – आजतक Read it also-रोस्टर पर सरकार के फैसले को तात्कालिक राहत क्यों कह रहा है टीचर्स एसोसिएशन

कांग्रेस के बाद सपा ने भी जारी की पहली लिस्ट, देखिए कौन कहां से लड़ेगा चुनाव

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फाइल फोटो

लखनऊ। 2019 चुनाव की सरगर्मी तेज होने लगी है. कांग्रेस के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी शुक्रवार को अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में 6 उम्मीदवारों का नाम है, जिसमें मुलायम सिंह के अलावा यादव परिवार के तीन और नाम लिस्ट में हैं.

इस लिस्ट के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे. जबकि मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव बदायूं से अपनी किस्मत आजमाएंगे. समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव राम गोपाल यादव की ओर से जारी लिस्ट के अनुसार, फिरोजाबाद से अक्षय यादव के अलावा इटावा (सुरक्षित सीट) कमलेश कठेरिया, बहराइच (सुरक्षित सीट) शब्बीर वाल्मिकि और राबर्ट्सगंज (सुरक्षित सीट) से भाईलाल कोल को टिकट दिया गया है. फिरोजाबाद से टिकट पाने वाले अक्षय यादव पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव के बेटे हैं.

इससे पहले कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार को अपने पहले 15 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. उम्मीदवारों की इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश के 11 नाम जबकि गुजरात के 4 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं. लिस्ट के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने वर्तमान संसदीय क्षेत्र अमेठी से ही चुनाव लड़ेंगे, जबकि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी अपनी परंपरागत सीट रायबरेली से ही चुनाव लड़ेंगी.

कांग्रेस की लोकसभा चुनाव को लेकर जारी पहली लिस्ट के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद यूपी की फर्रुखाबाद सीट से चुनावी ताल ठोकेंगे. इसके अलावा सहारनपुर से इमरान मसूद, उन्नाव से अनु टंडन, जालौन से बृजलाल खबरी, बदायूं से सलीम इकबाल शेरवानी, अकबरपुर से राजाराम पाल, फैजाबाद से निर्मल खत्री के अलावा कुशीनगर से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह को टिकट दिया गया है.

बनारस में मोदी के विरोध में क्यों उतरें साधु-संत

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वाराणसी। साल 2014 में जब मोदी ने अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए काशी यानि वाराणसी को चुना तो वहां के लोगों में बहुत उत्साह था. यह कह कर कि मुझे यहां मां गंगा ने बुलाया है, मोदी ने बनारसियों का दिल जीत लिया था. तब मोदी ने यह भी वादा किया था कि वो काशी को क्योटो बना देंगे यानि शहर का विकास करेंगे. पिछले चार साल में ऐसा कुछ नहीं हो सका. काशी जैसे थी, वैसे ही बनी रही. लोगों को मोदी से शिकायत तो थी, लेकिन उनके खिलाफ गुस्सा नहीं था. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के पहले मोदी ने जो काम किया है, उससे बनारस में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है.

दरअसल आज 8 मार्च को पीएम मोदी वाराणसी में थे. इस दौरान उन्होंने कई योजनाओं की सौगात देते हुए अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की नींव रखी. इस मौके पर मोदी ने कहा कि वर्षों से बाबा विश्वनाथ बंधे हुए थे, सांस भी नहीं ले पा रहे थे, लेकिन आज इस काम से उन्हें मुक्ति मिलेगी. करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के केंद्र विश्वनाथ मंदिर को मुक्त करने के पीएम मोदी का यह बड़बोलापन बनारसियों को रास नहीं आ रहा है, और मोदी के इस बयान के खिलाफ वहीं के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है. खबर आज तक में प्रकाशित हुई है. उसी आज तक में जिसके ग्रुप के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी पहुंचे थे और दोनों ने एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधे थे.

दरअसल काशी को क्योटो बनाने के चक्कर में यहां सैकड़ों मंदिर जमींदोज किए जा चुके हैं. संकटमोचन मंदिर के महंत विशंभरनाथ मिश्र का कहना है- भगवान शंकर सबको मुक्त करने वाले हैं ऐसे में कोई उन्हें मुक्त करने की बात करे ये अनुचित है. इससे मैं बेहद आहत हूं. बनारस की जीती जागती संस्कृति को ढहा कर उस पर विकास की इमारत खड़ी की जा रही है. यह लाखों लोगों की आस्था से खिलवाड़ है.

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की जद में आने वाले इन प्राचीन मंदिरों, देव विग्रहों की रक्षा के लिए आंदोलन करने वाले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भड़के अंदाज में मोदी के खिलाफ हल्ला बोलते हैं, उनका कहना है- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के लिए जितने मंदिर तोड़े गए उतने औरंगजेब ने भी नहीं तोड़े. अगर प्रधानमंत्री का अर्थ है कि मैंने इन्हें मुक्त कराया तो सही ही है क्योंकि उन्होंने इन देव विग्रहों को उनके प्राण से मुक्त करा दिया. प्रधानमंत्री बताएं किसके कब्जे से मुक्त कराया? काशी में जो हुआ है वो अकल्प्य है. जिन देवी देवताओं के दर्शन के लिए लोग पूरे भारत से आते हैं वे उन्हें ना पाकर कैसा महसूस करेंगे.

मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की जिस योजना का ढिंढ़ोरा पीट रहे हैं, उसकी जद में आने वाले क्षेत्र को बनारस में पक्का महाल कहा जाता है. यह क्षेत्र गंगा तट पर अस्सी से राजघाट तक फैला है. बनारस का यह इलाका खुद में कई संस्कृतियों को समेटे हुए है. अलग-अलग राज्यों के रियासतों की प्राचीन इमारत व वहां पूजे जाने वाले पौराणिक मंदिर और देव विग्रह इसी क्षेत्र में स्थित हैं. इनके दर्शन करने पूरे देश से लोग आते हैं. काशी के लोग सवाल उठाते हैं कि जब यही नहीं रहेगा तो बनारस की संस्कृति आखिर बचेगी कैसे?

काशी के लोगों में जिस तरह का गुस्सा है, उसे देखते हुए अगर 2019 में मोदी यहां से चुनाव लड़ते हैं तो संभव है कि जिस संत समाज और बनारसियों ने 2014 में मोदी का स्वागत किया था, 2019 में वही उन्हें नकार कर वापस गुजरात भेज दें.

दलितों, पिछड़ों से क्यों डरते हैं मोदी और भाजपा?

एक बार फिर दलित बहुजनों की एकता के आगे भाजपा ने घुटने टेक दिए हैं. बहुजन समाज के भारी विरोध के बाद भाजपा ने 13 प्वाइंट रोस्टर को रद्द कर 200 रोस्टर के पक्ष में अध्यादेश जारी करने का आदेश दे दिया है. 7 मार्च को इसकी खबर आते ही बहुजन समाज खुशी से झूम उठा. सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को बधाई देने की होड़ मच गई. तो दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विजय जुलूस तक निकाला गया. बीते दो सालों में यह दूसरा मौका था, जब बहुजनों की ताकत के आगे भाजपा और पीएम मोदी ने घुटने टेके थे.

पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद के मंजर को याद करिए. इसी भाजपा सरकार ने एससी-एसटी एक्ट की धार को कुंद करने की पूरी तैयारी कर ली थी. अदालत में कोई सुनवाई नहीं हुई, तब दलित और आदिवासी समाज एक साथ सड़कों पर उतर गया. पिछड़े समाज ने भी तब दलित और आदिवासी समाज का साथ दिया और इस तरह बहुजन समाज की ताकत और एकता के आगे हर वक्त गुमान में डूबे रहने वाले पीएम मोदी और उनकी पार्टी भाजपा को घुटने टेकने को मजबूर होना पड़ा था.

यह कोई आम बात नहीं है कि जिस सरकार ने मीडिया से लेकर देश की कानून व्यवस्था और तमाम एजेंसियों को नचा डाला हो, वो देश के बहुजन समाज की ताकत के आगे झुकने को मजबूर हो गई. बल्कि बहुजनों की यह जीत काफी कुछ कहती है. देश के दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज की इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि अगर देश का बहुजन किसी मुद्दे को लेकर लड़ाई ठान ले तो उसे रोक पाना बहुत मुश्किल होता है.

दरअसल भाजपा औऱ तमाम दल बहुजनों से इसलिए डरते हैं क्योंकि बहुजनों के पक्ष में उनका संख्या बल है. जब देश के सारे बहुजन किसी मुद्दे पर एक साथ होते हैं तो दूसरा पक्ष अपने आप काफी कमजोर हो जाता है. ऐसे में उसके पास बहुजनों के आगे नतमस्तक होने के अलावा कोई उपाय नहीं बचता. बहुजनों की इस ताकत के बूते बसपा औऱ सपा उत्तर प्रदेश में कई बार सरकार बनाने में सफल रहें.

संख्या की इस ताकत को बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर बखूबी जानते थे, इसीलिए उन्होंने अपने जीवन में ही कह दिया था कि जाकर अपने घर की दीवारों पर लिख दो कि तुम्हें इस देश का हुक्मरान बनना है. इस वर्ग में शिक्षा का प्रसार होने और संविधान में मिले हक के प्रति समझ बढ़ने के बाद अब यह समाज अपनी लड़ाई लड़ने लगा है. चाहे दो अप्रैल 2018 का स्वतः फूर्त आंदोलन हो या फिर रोस्टर मुद्दे पर सरकार से भिड़ जाना हो, दोनों मामलों में दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज ने बिना किसी राजनैतिक दल का मुंह देखे सत्ता पर अपने हक की मांग को लेकर हल्ला बोल दिया. और जिस मुद्दे को लेकर यह समाज इमानदारी से लड़ा, उसे जीत मिली. सत्ता से सीधी टक्कर में इन दोनों लड़ाईयों में मिली जीत बहुत कुछ कहती है.

हालांकि इस पूरी लड़ाई से अभी आदिवासी तबके को प्रमुखता से और बड़ी संख्या में जोड़ना होगा. उसकी समस्याओं के साथ दलितों और पिछड़ों दोनों को खड़ा होना होगा.

रोस्टर पर सरकार के फैसले को तात्कालिक राहत क्यों कह रहा है टीचर्स एसोसिएशन

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वाराणसी, बनारस हिन्दू विवि

नई दिल्ली। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन ने भारत सरकार द्वारा 200 पॉइंट रोस्टर पर अध्यादेश लाए जाने का स्वागत किया है. एसोसिएशन ने कहा है कि इस अध्यादेश के आने से सभी वर्गों के शिक्षकों का न्याय सुनिश्चित होगा, साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के 4500 एडहॉक शिक्षक राहत महसूस कर रहे हैं.

टीचर्स एसोसिएशन के नेशनल चेयरमैन प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘व महासचिव प्रो. के पी सिंह यादव का कहना है कि पिछले एक वर्ष से देशभर के शिक्षक सड़कों पर आंदोलनरत थे, अब अध्यादेश के आने से राहत महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस अध्यादेश की वैद्यता 6 माह की होती है, आगामी संसद सत्र में पास करके कानून बनाना होगा जब जाकर स्थायी राहत मिलेगी, अभी केवल तात्कालिक राहत मिली है.

प्रो. सुमन व प्रो. यादव ने मांग किया कि 5 मार्च 2018 के बाद से डिपार्टमेंट वाइज रोस्टर के आधार पर जिन केंद्रीय विश्वविद्यालयों व राज्यों के विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों के विज्ञापन आए थे उन सभी विज्ञापनों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाये एवं नये विज्ञापन जारी करने के लिए यूजीसी/एमएचआरडी विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को सर्कुलर जारी करे जिसमें विश्वविद्यालय/कॉलेज को एक यूनिट मानकर 200 पॉइंट रोस्टर बनाकर नए विज्ञापन जारी किए जाए जिससे नियुक्ति की प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाये, तब लगेगा कि सरकार अपने प्रयास में गंभीर है. उन्होंने सरकार से यह अपील भी की है कि आरक्षित वर्ग के लाखों उम्मीदवारों को जो 13 पॉइंट रोस्टर से नुकसान हुआ है उसकी भरपाई का उचित तरीका यहीं है कि अध्यादेश के मद्देनजर 200 पॉइंट रोस्टर के आधार पर पुनः नियुक्तियां की जाये.

अभी भी संदेह बना हुआ है-

प्रो. सुमन व प्रो. यादव का कहना है कि अभी भी इस अध्यादेश के लागू होने में संदेह बना हुआ है जब तक कि ये कार्यान्वित नहीं होने लगता तब तक लोग इसे संदेह की दृष्टि से देखते रहेंगे. पहली स्थिति यह है कि 200 पॉइंट रोस्टर को डीओपीटी के आधार पर लागू करते समय शॉर्टफाल व बैकलॉग की स्थिति का भी सरकार ध्यान रखें, क्योंकि लंबे अरसे से आरक्षित वर्ग की सीटें सामान्य वर्गो से भर्ती जा रही है. पिछले वर्ष जब 13 पॉइंट रोस्टर का आदेश आया तब तो आरक्षित वर्ग की सीटें करीब-करीब खत्म कर दी गई थी, इसलिए सरकार से मांग है कि वे पिछले साल मार्च से लेकर अब तक जितने भी विज्ञापन आए हैं उनको खारिज करे तथा 200 पॉइंट रोस्टर के आधार पर पुनः विज्ञापन देकर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के प्रति न्याय करें.

नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो

यूजीसी/एमएचआरडी 200 पॉइंट रोस्टर संबंधी अध्यादेश का सर्कुलर जारी कर जल्द से जल्द विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को भेजा जाए जिससे लंबे समय से रुकी हुई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सके. प्रो. सुमन ने बताया है कि शुक्रवार तक चलने वाली डूटा की हड़ताल को जब तक समाप्त नहीं किया जा सकेगा जब तक कि डूटा जीबीएम में इस संदर्भ में कोई निर्णय नहीं लिया जाता. डूटा की जीबीएम शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में होगी.

जम्मू: बस स्टेशन पर ग्रेनेड अटैक, एक की मौत,

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जम्मू के एक बस स्टैंड पर गुरुवार दोपहर जोरदार धमाका हुआ. पुलिस के मुताबिक ग्रेनेड अटैक में 32 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. एक घायल की मौत हो गई है. सुरक्षाकर्मियों ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. सुरक्षाबलों ने 10 संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया गया है. दोपहर 12 बजे के करीब भीड़भाड़ वाले इलाके में बने बस स्टेशन में एक बस के पास धमाका किया गया. आपको बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है.

जम्मू के आईजी मनीष सिन्हा ने बताया कि यह ग्रेनेड से किया गया हमला था. घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार एक संदिग्ध हमलावर ने ग्रेनेड से हमला किया और मौके से फरार हो गया. 10 संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया है. IG का कहना है कि हमले का मकसद सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना था. इस विस्फोट में 17 साल के मोहम्मद शारिक की मौत हो गई.

चाइनीज ग्रेनेड के इस्तेमाल की आशंका रिपोर्ट के मुताबिक धमाके में चाइनीज ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया है. बताया जा रहा है कि पहले भी यह इलाका आतंकियों के निशाने पर रहा है. टाइम्स नाउ के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आ रहा है कि इस धमाके का मकसद सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था. ऐसे में प्रशासन की ओर से आगाह किया गया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें. प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर की जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है. ग्रेनेड धमाका इतना जबर्दस्त था कि आसपास की कई बसों को भी नुकसान पहुंचा है.

बस स्टैंड पहले भी बना निशाना पिछले साल 29 दिसंबर को भी आतंकियों ने बस स्टैंड को निशाना बनाया था. उस समय आतंकी बस स्टैंड पर ग्रेनेड फेंककर भाग गए थे. तब कोई नुकसान नहीं हुआ था. हालांकि बड़ा सवाल यह है कि बस स्टेशन के पास ही पुलिस स्टेशन भी है फिर भी आतंकी अपने मंसूबे में कामयाब हो गए.

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल की प्रधानाचार्या सुनंदा रैना ने बताया, ‘अब तक 28 घायलों को यहां लाया गया है. इनमें से तीन की हालत गंभीर है और दो का ऑपरेशन किया जा रहा है.’ जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एम के सिन्हा ने बताया कि प्रारंभिक जांच से लगता है कि किसी ने दोपहर के वक्त बस स्टैंड इलाके में हथगोला फेंका, जिसके चलते विस्फोट हुआ. तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेने वाले सिन्हा ने बताया कि विस्फोट के बाद बी सी रोड के आसपास के इलाके की घेराबंदी कर दी गई और हथगोला फेंकने वाले को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर तलाश अभियान चलाया जा रहा है.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि विस्फोट में बस स्टैंड पर खड़ी सरकारी बस को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ. आईजी ने कहा, ‘जब भी चौकसी ज्यादा होती है, हम जांच-पड़ताल सख्त कर देते हैं लेकिन किसी-किसी के उससे बच निकलने की आशंका रहती है और यह ऐसा ही मामला लग रहा है.’ उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा, ‘निश्चित तौर पर मंशा सांप्रदायिक शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की थी.’ उन्होंने बताया कि पुलिस सबूत इकठ्ठे कर रही है और हम निश्चित तौर पर उसे (हमलावर को) ढूंढ निकालेंगे.

रोस्टर मुद्दे पर बहुजनों के आगे झुकी सरकार, अध्यादेश को मंजूरी

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में 200 प्वाइंट रोस्टर की बहाली को लेकर चल रहे देशव्यापी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बहुजन संगठनों की मांग मान ली है. गुरुवार 7 मार्च को कैबिनेट की एक बैठक में 13 प्वॉइंट रोस्टर को पलटकर 200 प्वॉइंट रोस्टर सिस्टम लागू करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई. कैबिनेट बैटक के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने इसकी जानकारी दी. इसके साथ ही साफ हो गया कि देश भर में 13 प्वाइंट रोस्टर को रद्द किए जाने की मांग करने वाले संगठनों के आगे सरकार झुक गई है.

फैसले की जानकारी देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि 13 प्वाइंट रोस्टर की वजह से विश्वविद्यालयों में कमजोर वर्गों का प्रतिनिधित्व कम हो जाता, इसकी वजह से केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया है. हालांकि जिस तरह इस मामले पर सरकार खेलती रही उससे साफ है कि सरकार ने वंचित तबके को प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से नहीं बल्कि एससी-एसटी-ओबीसी के संयुक्त आंदोलन से डरकर यह फैसला लिया है.

सरकार के फैसले के बाद तमाम शिक्षक संगठनों ने इसका स्वागत किया है. हालांकि कुछ लोगों ने शंका जताई है कि जब तक अध्यादेश की कॉपी सामने नहीं आ जाती, कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. कुछ संगठन इस दौरान 13 प्वाइंट रोस्टर के तहत हुई बहालियों को भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं. टीचर्स एसोसिएशन के नेशनल चेयरमैन प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘व महासचिव प्रो. के पी सिंह यादव ने अध्यादेश लाए जाने का स्वागत किया है. उनका कहना है कि पिछले एक वर्ष से देशभर के शिक्षक सड़कों पर आंदोलनरत थे इसके आने से राहत महसूस कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस अध्यादेश की वैद्यता 6 माह की होती है, आगामी संसद सत्र में पास करके कानून बनाना होगा जब जाकर स्थायी राहत मिलेगी, अभी केवल तात्कालिक राहत मिली है.

राफेल की फाइल चोरी होना भ्रष्टाचार नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा – मायावती

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नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय से राफेल की फाइल चोरी होने की बात कहे जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने सरकार को निशाने पर लिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा.

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि इस सरकार में रोजगार गायब हो गया, किसानों को मिलने वाला सही दाम गायब हो गया, 15 लाख रुपये जो आने थे, वो गायब हो गए. और राफेल की जो फाइले हैं, वो गायब हो गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थाएं और मंत्री नरेन्द्र मोदी को बचाना चाहती है.

दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया सुश्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा. एक बयान जारी कर बसपा प्रमुख ने कहा कि रक्षा मंत्रालय से राफेल लड़ाकू विमान सौदे के अहम व गुप्त दस्तावेजों के गायब होने की खबर शर्मनाक और गैर जिम्मेदाराना है. सुप्रीम कोर्ट में इस तरह का सनसनीखेज रहस्योघाटन करने से पहले नरेन्द्र मोदी सरकार को देश से मांफी मांगनी चाहिए कि वो देश हित और देश की सुरक्षा के मामले में विफल साबित हुए हैं. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है.

बसपा प्रमुख ने कहा कि बदली हुई परिस्थिति में माननीय सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में जांच करानी चाहिए ताकि देश की जनता संतुष्ट हो सके. बसपा प्रमुख ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले पुलवामा और अब राफेल के मामले में भी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी केंद्र की बीजेपी सरकार अपनी घोर विफलता व वादाखिलाफी से लोगों का ध्यान बांटने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि राफेल का मामला अब सिर्फ भ्रष्टाचार का ही नहीं है, बल्कि अब वह राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है.

राहुल गांधी ने कहा- PAK के पोस्टर बॉय हैं PM नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान के पोस्टर बॉय हैं, ना कि कांग्रेस पार्टी. राफेल विमान सौदे पर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए राहुल गांधी से जब पाकिस्तान के मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने PM मोदी पर तीखा वार किया.

राहुल गांधी ने कहा कि नवाज शरीफ की शादी में जाने वाले हम नहीं थे, ISI को पठानकोट में जांच के लिए बुलवाने वाले भी हम नहीं थे. उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ की शादी में आप (नरेंद्र मोदी) गए, पठानकोट में ISI को आपने (नरेंद्र मोदी) बुलाया तो पोस्टर बॉय हम कैसे हो गए. नरेंद्र मोदी ही पाकिस्तान के पोस्टर बॉय हैं जो उनसे गले मिलते रहते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने ही नवाज शरीफ को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया था, हमने नहीं बुलाया था.

एयरस्ट्राइक पर जारी सबूतों की बहस को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि शहीदों के परिवार वाले ही जवाब मांग रहे हैं, मैंने अखबार में पढ़ा है कि शहीदों के परिवार ने ही सबूतों की मांग की है. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इस बारे में अपनी बात लगातार सभी के सामने रख रही है.

आपको बता दें कि बालाकोट में वायुसेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद से ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में जुबानी जंग जारी है. कांग्रेस के कई नेताओं ने एयरस्ट्राइक के सबूत सामने रखने की बात कही थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा था.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस के नेताओं के बयान पाकिस्तान में छप रहे हैं, उनके न्यूज़ चैनल लगातार उन्हें दिखा रहे हैं. प्रधानमंत्री के अलावा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने कांग्रेस नेताओं को जवाब दिया था. मोदी सरकार में मंत्री वीके सिंह ने तो यहां तक कहा था कि अगर विपक्ष के नेताओं को एयरस्ट्राइक का सबूत चाहिए तो वह खुद बालाकोट जाकर देख लें.

आपको बता दें कि पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ मिलकर जांच की थी, पाकिस्तान से जो टीम भारत आई उसमें ISI के कुछ अधिकारी शामिल थे. इसके अलावा 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के जन्मदिन के अवसर पर पाकिस्तान गए थे.

श्रोत:-आजतक ममता बनर्जी ने पाकिस्तान में 300 मौतों की रिपोर्ट पर उठाया गंभीर सवाल

रणबीर कपूर-आलिया भट्ट की शादी कराना चाहते हैं ऋषि कपूर

यूएस में मेडिकल ट्रीटमेंट कराने के बाद एक्टर ऋषि कपूर भारत वापस लौटने वाले हैं. इसका खुलासा उनकी पत्नी नीतू कपूर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किया. ऋषि कपूर इस महीने के आखिर तक देश लौटे जाएंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऋषि कपूर के लिए भारत वापस आने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता बेटे रणबीर कपूर की आलिया भट्ट से शादी होगी. वे चाहते हैं कि दोनों जल्दी से शादी के पवित्र बंधन में बंध जाए.

सूत्रों के मुताबिक, रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फैमिली साथ में पंडित से मिलने जाएंगे. वे रणबीर-आलिया की शादी के लिए शुभ मुहुर्त की तारीख तय करेंगे. खबरों की मानें तो पंडित से मुलाकात करने की तारीख अप्रैल में फिक्स की गई है. हालांकि अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन कपल की शादी जल्द होने की खबर जानकर फैंस एक्साइटेड जरूर हो गए हैं.

करण जौहर ने कहा था- ”हर कोई रणबीर-आलिया की जल्द शादी कराने की कोशिश कर रहा है. क्योंकि आप रणबीर कपूर के साथ नहीं जानते, वो कभी भी हाथ से जा सकता है.” करण की ये बातें सुनकर आलिया और रणबीर मुस्कुराने लगे थे. दोनों एक्टर्स के वर्कफ्रंट की बात करें तो वे फिल्म ब्रह्मास्त्र में साथ नजर आएंगे. इसी मूवी के सेट पर उनकी लव स्टोरी परवान चढ़ी थी. मूवी का लोगो कुंभ में रिलीज किया जा चुका है. बुधवार को फिल्म का ऑफिशियल लोगो रिलीज कर दिया गया. फिल्म में अमिताभ बच्चन, मौनी रॉय, नागार्जुन, डिंपल कपाड़िया अहम रोल में हैं. ये फिल्म तीन भागों में रिलीज की जाएगी.

रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी की इस साल होने की भरपूर संभावना नजर आती है. वैसे भी रणबीर-आलिया की फैमिली से उनके रिश्ते को मंजूरी मिल गई है. दोनों परिवारों के बीच मेल-जोल और करीबियां अक्सर देखने को मिलती है. पिछले दिनों स्विटजरलैंड में आकाश अंबानी और श्लोका मेहता की प्री वेडिंग सेरेमनी में करण जौहर ने आलिया को रणबीर से जल्द शादी करने की सलाह दी थी.

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बालाकोट / सैटेलाइट इमेज के हवाले से दावा- भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक से जैश काे काेई नुकसान नहीं हुआ

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनखवा के बालाकाेट में भारतीय वायुसेना के हवाई हमले में जैश के ठिकानाें काे तबाह करने के दावाें पर नए सवाल उठाए गए हैं. न्यूज एजेंसी राॅयटर्स ने सैटेलाइट इमेज का हवाला देकर दावा किया है कि वायुसेना ने जिस जगह हमला कर जैश के अड्डे काे तबाह करने का दावा किया है, वहां स्थित निर्माण ज्याें के त्याें खड़े हैं. यह सैटेलाइट इमेज सैन फ्रांसिस्काे स्थित प्राइवेट सैटेलाइट ऑपरेटर प्लानेट लैब्स इंक ने जारी की है.

4 मार्च की इस सैटेलाइट इमेज में जैश के मदरसे के पास छह इमारतें सुरक्षित दिख रही हैं. हमला 26 फरवरी काे किया था. यानी तस्वीरें हमले के छह दिन बाद की हैं. इसी जगह की अप्रैल 2018 की सैटेलाइट इमेज के आधार पर यह बताया गया है कि हमले के स्थान पर काेई तबाही या विनाश नजर नहीं आता है.

रॉयटर्स की रिपाेर्ट में मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से संबद्ध ईस्ट एशिया नाॅनप्राेलिफरेशन प्राेजेक्ट के डायरेक्टर जेफ्रे लेविस ने कहा है कि इमारतें पूरी तरह से आबाद हैं. लेविस काे 15 साल का हथियार भंडारण क्षेत्राें और हमले के स्थानाें के सैटेलाइट इमेज का विश्लेषण करने का अनुभव है. रायटर्स ने दावा किया है कि इमारत की छताें में भी काेई सुराख नहीं दिख रहा है. न काेई दीवार गिरी है और न ही आसपास के पेड़ गिरे नजर आते हैं. इस संबंध में एजेंसी ने भारतीय विदेश और रक्षा मंत्रालय से ई-मेल से कुछ सवाल पूछे थे, जिसका जवाब अभी तक नहीं दिया गया है.

रिपोर्टर्स ने किए हमले वाले इलाके का दौरा रायटर्स के दाे रिपाेर्टराें ने पिछले मंगलवार और गुरुवार काे बालाकाेट इलाके का दाैरा किया था. रिपाेर्टराें ने स्थानीय लाेगाें से बातचीत भी की थी. इन रिपाेर्टराें ने दावा किया है कि उन्हें जैश के कैंप के तबाह हाेने या किसी के मारे जाने का काेई सबूत नहीं मिले. रिपाेर्टराें काे ग्रामीणाें ने बताया था कि उन्हाेंने तेज धमाके की आवाज सुनी थी. लेकिन ये बम जंगलाें में पेड़ाें पर गिरे, जहां चीड़ के कुछ पेड़ गिरे पड़े थे. जंगल में बम से चार गड्ढे बने हैं, जहां एक कौआ भी मरा पड़ा था.

मीडिया रिपाेर्ट्स में तबाही के निशान दिखने का दावा कुछ भारतीय मीडिया रिपाेर्टाें में बताया गया है कि वायुसेना ने स्पाइस 2000 ग्लाइड बम का इस्तेमाल किया था. ये बम खास निशाने काे ध्वस्त करते हैं. इस बम से यह जरूरी नहीं है कि पूरी बिल्डिंग ध्वस्त हो जाए. भारतीय मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीराें में इमारतें टूटी-फूटी नजर आ रही हैं.

वायुसेना ने 12 पेज की रिपाेर्ट केंद्र काे साैंपी भारतीय वायुसेना ने बालाकाेट हवाई हमले काे लेकर 12 पेज की रिपोर्ट केंद्र सरकार काे सौंपी है. सेना के सूत्राें ने बुधवार काे यह दावा किया. इसमें वायुसेना ने बालाकोट के उस क्षेत्र की हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें भी साझा की हैं. ये रिपोर्ट सार्वजनिक होगी या नहीं इसका फैसला सरकार ही करेगी.

श्रोत:-दैनिक भास्कर Read it also-ममता बनर्जी ने पाकिस्तान में 300 मौतों की रिपोर्ट पर उठाया गंभीर सवाल

कांग्रेस का बड़ा दांव, मध्यप्रदेश में पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण

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भोपाल। लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी ने बड़ा दांव खेल दिया है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने पिछड़े वर्ग को उसका हक देते हुए 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घोषणा करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने की घोषणा की है. इसके साथ ही कांग्रेस की सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को दिए जाने वाले 10 फीसदी आरक्षण को भी लागू करने पर मुहर लगा दी है.

पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण दिए जाने के बाद भाजपा इसे एक राजनीतिक स्टंट बता रही है तो वहीं अगड़ी जातियों को दस फीसदी आरक्षण देने को भाजपा द्वारा बनाए गए दबाव की जीत बता रही है. हालांकि पिछड़े वर्ग को आरक्षण में उसका संवैधानिक अधिकार देकर कांग्रेस पार्टी प्रदेश में बढ़त की ओर है.

यूपी में बसपा-सपा गठबंधन को झटका

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भाजपा ज्वाइन करते बसपा के कद्दावर नेता वेदराम भाटी

लखनऊ। भाजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी विरोधी पार्टियों में तोड़-फोड़ का काम शुरू कर दिया है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी बसपा-सपा गठबंधन को झटका देते हुए पार्टी के एक कद्दावर नेता को भाजपा में शामिल कर लिया है. पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में बुधवार 6 मार्च को बसपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व मंत्री वेदराम भाटी, पूर्व सांसद सारिका बघेल समेत बसपा, रालोद और सपा के कई नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया.

वेदराम भाटी के पार्टी छोड़ने से सबसे बड़ा झटका बहुजन समाज पार्टी को लगा है. भाटी गौतमबुद्ध नगर के जेवर से दो बार और सिकंदराबाद से दो बार विधायक रह चुके हैं. केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने उन्हें सदस्यता दिलाई. वेदराम भाटी के भाजपा में जाने से गुर्जर वोट हासिल करने की चाह में लगी मायावती को गुर्जर वोटरों से झटका मिल सकता है.