मोदी सरकार की आठ नई समितियां, हर समिति में अमित शाह, राजनाथ केवल दो में

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आठ अहम समितियों का पुनर्गठन किया गया है. खास बात यह है कि इन सभी समितियों में सदस्य के तौर पर गृहमंत्री अमित शाह मौजूद हैं जबकि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को केवल दो समितियों में स्थान मिला है. इन समितियों में नियुक्ति, आवास, सुरक्षा, संसदीय, राजनीतिक, निवेश और वृद्धि, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट और आर्थिक मामलों की समितियां शामिल हैं. जिनमें प्रधानमंत्री मोदी को छह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को सात, रेलमंत्री पीयूष गोयल को पांच में जगह मिली है.

वहीं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निवेश एवं विकास पर और बेरोजगारी से निपटने के लिए रोजगार एवं कौशल विकास पर बुधवार को समितियों का गठन किया था. यह संभवत: पहली बार है जब दो मुद्दों पर कैबिनेट समितियों का गठन किया गया है

सुरक्षा संबंधी समिति के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे. वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसके सदस्य होंगे. यह समिति विदेशी मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों को देखेगी. गुरुवार को जिन समितियों की घोषणा की गई उनमें मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे जबकि शाह इसके सदस्य होंगे.

शाह आवास को लेकर बनाई गई मंत्रिमंडलीय समिति की अध्यक्षता करेंगे. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, सीतारमण और रेल एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इसके सदस्य होंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री एवं नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी आवास समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे.

आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल की प्रमुख समिति (सीसीईए) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे और इसके सदस्यों के तौर पर राजनाथ सिंह, शाह, गडकरी, रसायन एवं उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा, सीतारमण, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल शामिल होंगी. सीसीईए में एस जयशंकर, गोयल एवं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल होंगे.

संसदीय मामलों पर मंत्रिमंडल समिति की अध्यक्षता शाह करेंगे और सीतारमण, उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान, तोमर, प्रसाद, सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत, पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी इसके सदस्य होंगे. यह समिति संसद का सत्र बुलाने के लिए तारीखों की सिफारिश करती है. संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और वी मुरलीधरन इसके विशेष आमंत्रित सदस्य हैं.

महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर सरकार की मदद करने वाली राजनीतिक मामलों पर मंत्रिमंडल समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे. शाह, गडकरी, सीतारमण, गोयल, पासवान, तोमर, प्रसाद, हरसिमरत कौर, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, भारी उद्योग मंत्री अरविंद सावंत और जोशी इसके सदस्य होंगे. मंत्रिमंडलीय समितियों का गठन या पुनर्गठन तब किया जाता है जब नयी सरकार काम-काज संभालती है या मंत्रिमंडल में फेरबदल होते हैं.

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मायावती ने क्यों कहा- अब पछताये क्या हो, जब चिड़िया चुग गई खेत

बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने बेरोज़गारी शीर्ष पर और विकास दर न्यूनतम होने सम्बंधी आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से केंद्र में मोदी सरकार को फिर से जिताने वाले ग़रीब और बेरोज़गारों पर तंज कसते हुए कहा है, “अब पछताने से क्या होगा, जब चिड़िया चुग गयी खेत.”

मायावती ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, “श्रम मंत्रालय ने लोकसभा चुनाव के बाद अब अपने डाटा से इस बुरी खबर को प्रमाणित कर दिया है कि देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे अधिक 6.1 प्रतिशत हो चुकी है. परन्तु गरीबी और बेरोजगारी के शिकार करोड़ों लोगों के अब पछताने से क्या होगा, जब चिड़िया चुग गई खेत .”

उन्होंने देश की विकास दर घट कर न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के बारे में कहा, “देश के लिए यह भी अच्छी खबर नहीं है कि भारत के आर्थिक विकास की दर घट कर 5.8 पर आ गई जो बहुत नीचे है.

मायावती ने इसकी वजह कृषि विकास दर में गिरावट को बताते हुए कहा, “जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) विकास की यह दर कृषि और फैक्ट्री उत्पाद में भारी गिरावट का परिणाम है. पहले से ही काफी त्रस्त देश की गरीब जनता के जीवन का सही कल्याण कैसे होगा?”

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नेताओं की आपाराधिक छवि का ग्राफ

भारत का मतदाता हमेशा से चहाता रहा है कि आपराधिक छवि वाले लोगों को किसी भी प्रकार के चुनाव में प्रत्याशी न बनाया जाए, लेकिन होता हमेशा इसके विपरीत ही है, सभी राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक और दबंगई की छवि रखने वाले लोगों को ही विधान सभा/लोकसभा हेतु चुनावों में प्रत्याशी बनाया जाता है/जाता रहा है. कारण ये है कि सभी राजनीतिक दल सत्ता हथियाने के ही पक्षधर होते हैं, स्वच्छ और लोक्तांत्रिक आचरण के समर्थक नहीं होते. ऐसा नही है कि राजनीतिक दलों के लिए यह करना नामुमकिन है किंन्तु नजर तो सबकी कुर्सी पर होती है…जनता के भले-बुरे से किसी को कुछ लेना – देना होता ही नही. यदि सभी द्ल स्वच्छ छवि वाले लोगों को अपना-अपना प्रत्याशी बनाने की ठान लें तो आपराधिक छवि वाले लोग राजनीति में आ ही पाएंगे. धनी लोग लोकसभा में आने के बजाय राज्यसभा में जाना पसंद करते हैं, जिसके लिए आम मतदाता से वोट नहीं मांगने पड़ते…बस! राजनीतिक दलों को चन्दे के रूप में धन मुहैया करना होता है.

नवभारत टाइम्स (22.01.2019) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले को चुनाव आयोग के सामने उठा सकता है. याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अर्जी दाखिल कर चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाया था. उन्होंने अपनी अर्जी में अनुच्छेद-32 का सहारा लिया था. इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक पार्टियों को उन लोगों को उम्मीदवार नहीं बनाने का निर्देश दे, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं. अदालत को राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता चुनाव आयोग के सामने गए हैं. इस बारे में इंकार करने पर अदालत ने सुनवाई से मना कर दिया.

पिछले वर्ष (2018) भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके मांग की गई थी कि गंभीर अपराधों में, यानी जिनमें 5 साल से अधिक की सजा संभावित हो, यदि व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय होता है तो उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए. 26.09.2018 के नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार तब दागी नेताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दागी विधायक, सांसद और नेता आरोप तय होने के बाद भी चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें खुद पर निर्धारित आरोप भी प्रचारित करने होंगे. अदालत ने यह भी कहा था कि केवल चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. अदालत ने इस मामले में एक गाइडलाइन भी जारी की थी, जिसके अनुसार राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नामांकन के बाद कम से कम तीन बार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए उनके आपराधिक रेकॉर्ड मतदाताओं के सामने रखेंगे. सभी पार्टियां वेबसाइट पर दागी जनप्रतिनिधियों के ब्यौरे डालेंगी ताकि वोटर अपना फैसला खुद कर सकें…किसको वोट दें, किसको न दें.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि वक्त आ गया है कि संसद कानून बनाकर आपराधिक छवि वालों को जनप्रतिनिधि न बनने दे. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय स्पष्ट कर दी है कि उसका यह तय करना कि कौन चुनाव लड़े, कौन नहीं, जनतंत्र के मूल्यों पर आघात होगा. सबसे आदर्श स्थिति यही होगी कि मतदाताओं को इतना जागरूक बनाया जाए कि वे खुद ही आपराधिक छवि वाले कैंडिडेट को रिजेक्ट कर दें. लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक ऐसे लोगों को जनप्रतिनिधि न बनने देने की जिम्मेदारी संसद की है. तब भी यह बात सामने आई थी कि इस प्रकार के मामले चुनाव आयोग के दायरे में आते हैं. (यहाँ सवाल ये है कि भला संसद में बैठे लोग ऐसा कानून क्यों लाएंगे)

जाहिर है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के अनुसार राजनीतिक दल अपनी साइटों पर और मीडिया में अपने उम्मीदवारों का आपराधिक रेकॉर्ड डाल भी दें तो क्या गारंटी है सही आंकड़े ही प्रस्तुत किए जाएंगे. शतप्रतिशत कहा जा सकता है कि राजनीतिक दल ऐसे मामलों में केवल और केवल खानापूरी करेंगे और सही जानकारी जनता तक नहीं पहुंच पाएगी. (अब सुप्रीम कोर्ट को ये कौन बताए कि ज्यादातर मतदाताओं की पहुँच अखबारों या मीडिया तक है ही नहीं) ऐसे में चुनाव आयोग को इन सभी कामों के लिए कुछ ठोस मानक तय करके उन पर अमल सुनिश्चित करना चाहिए. कई दागी नेता आज कानून-व्यवस्था के समूचे तंत्र को प्रभावित करने की स्थिति में हैं. उनके खिलाफ मामले थाने पर ही निपटा दिए जाते हैं. किसी तरह वे अदालत पहुंच भी जाएं तो उनकी रफ्तार इतनी धीमी रखी जाती है कि आरोप तय होने से पहले ही आरोपी की सियासी पारी निपट जाती है. इसका हल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में खोजा गया, लेकिन कई राज्यों में ये कोर्ट बने ही नहीं और जहां बने भी वहां कागजों से नीचे नहीं उतर पा रहे हैं.

ये कहना अतिशयोक्ति नहीं कि देश की सियासत में राजनेताओं और अपराध का ‘चोली-दामन’ का साथ रहा है. देश में ऐसी कोई भी राजनीतिक पार्टी नहीं, जो पूरी तरह से अपराध मुक्त छवि वाली हो. यानी उनके किसी भी एक नेता पर अपराध के मामले दर्ज नहीं हों. यही वजह है कि राजनीति में अपराधीकरण के मामले पर अपने फैसले में भले ही सुप्रीम कोर्ट ने दागी सांसदों, विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया, मगर कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब संसद के भीतर कानून बनाना इसकी जरूरत है. दरअसल, राजनीति में अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया. इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्त आ गया है कि संसद ये कानून लाए ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें. राष्ट्र तत्परता से संसद द्वारा कानून का इंतजार कर रहा है. अब यहाँ सवाल उठता है कि जिन आपाराधिक छवि वाले दबंगों के कन्धों पर बैठकर राजनीतिक दल सरकार बनाने तक पहुँच पाते हैं, उन पर चुनाव में प्रत्याशी न बनाने की कौन सा राजनीतिक दल मन बना पाएगा?

एडीआर ने 2019 में नवनिर्वाचित 542 सांसदों में 539 सांसदों के हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर बताया कि इनमें से 159 सांसदों (29 फीसदी) के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं. इसी मामले पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शोध संस्था ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक अलायंस’ (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, आपराधिक मामलों में फंसे सांसदों की संख्या दस साल में 44 प्रतिशत बढ़ गई है. पिछले तीन लोकसभा चुनाव में निर्वाचित होकर आने वाले सांसदों में करोड़पति और आपराधिक मामलों में घिरे सदस्यों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. पिछली लोकसभा में गंभीर आपराधिक मामलों के मुकदमों में घिरे सदस्यों की संख्या 112 (21 फीसदी) थी, वहीं 2009 के चुनाव में निर्वाचित ऐसे सांसदों की संख्या 76 (14 फीसदी) थी. स्पष्ट है कि पिछले तीन चुनाव में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों की संख्या में 109 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

बीजेपी के 303 में से 301 सांसदों के हलफनामे के विश्लेषण में पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 116 सांसदों (39 फीसदी) के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. वहीं, कांग्रेस के 52 में से 29 सांसद (57 फीसदी) आपराधिक मामलों में घिरे हैं. दोबारा सत्तारूढ़ होने जा रहे एनडीए की हिस्सेदार पार्टी लोजपा के निर्वाचित सभी 6 सदस्यों ने अपने हलफनामे में उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने की जानकारी दी है. इसके अलावा एआईएमआईएम के दोनों सदस्यों और 1-1 सांसद वाले दल आईयूडीएफ, एआईएसयूपी, आरएसपी और वीसीआर के सांसद आपराधिक मामलों में घिरे हैं.

रिपोर्ट में नए चुने गए सांसदों के आपराधिक रिकॉर्ड के राज्यवार विश्लेषण से पता चलता है कि आपराधिक मामलों में फंसे सर्वाधिक सांसद केरल और बिहार से चुन कर आए हैं. केरल से निर्वाचित 90 फीसदी और बिहार के 82 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. इस मामले में पश्चिम बंगाल से 55 फीसदी, उत्तर प्रदेश से 56 और महाराष्ट्र से 58 फीसदी नए चुने गए सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं. वहीं सबसे कम 9 फीसदी सांसद छत्तीसगढ़ के और 15 फीसदी गुजरात के हैं. रिपोर्ट के अनुसार पिछली 3 लोकसभा में आपराधिक मुकदमों से घिरे सांसदों की संख्या में 44 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 के लोकसभा चुनाव में आपराधिक मुकदमे वाले 162 सांसद (30 फीसद) चुनकर आए थे, जबकि 2014 के चुनाव में निर्वाचित ऐसे सांसदों की संख्या 185 (34 फीसदी) थी.

नए सांसदों में कांग्रेस के डीन कुरियाकोस पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. केरल के इडुक्की लोकसभा क्षेत्र से चुनकर आए एडवोकेट कुरियाकोस ने अपने हलफलनामे में बताया है कि उनके खिलाफ 204 आपराधिक मामले लंबित हैं. इनमें गैर इरादतन हत्या, लूट, किसी घर में जबरन घुसना और अपराध के लिए किसी को उकसाने जैसे मामले शामिल हैं. इनके अलावा बसपा के 10 में से 5, जदयू के 16 में से 13 (81 फीसदी) , तृणमूल कांग्रेस के 22 में से 9 (41 फीसदी) और माकपा के 3 में से 2 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. इस मामले में बीजद के 12 निर्वाचित सांसदों में सिर्फ एक सदस्य ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले की हलफनामे में घोषणा की है.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक मामलों के लिप्त लोगों को प्रत्याशी न बनाने वाली याचिका को चुनाव आयोग के पाले में डाल देने से समस्या का समाधान नहीं होने वाला. समस्या ये है कि चुनाव आयोग घोषित रूप से तो एक स्वतंत्र इकाई है किंतु ऐसा है नहीं. चुनाव आयोग पर सरकार का खासा दबाव रहता है. शायद आपराधिक रेकॉर्ड वालों को जनप्रतिनिधि न बनने देने के आदेश देना चुनाव आयोग के बूते से बाहर है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वक्त आ गया है कि संसद ये कानून लाए ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें. राष्ट्र तत्परता से संसद द्वारा कानून का इंतजार कर रहा है. अब यहाँ सवाल उठता है कि जिन आपाराधिक छवि वाले दबंगों के कन्धों पर बैठकर राजनीतिक दल सरकार बनाने तक पहुँच पाते हैं, उन पर चुनाव में प्रत्याशी न बनाने का मन कौन सा राजनीतिक दल बना पाएगा? कदापि कोई नहीं. आखिर निश्कर्ष यह निकलता है कि आपराधिक छवि वाले लोगों से राजनीतिक दलों का दामन बचने वाला नहीं है. यहाँ यह भी सवाल उठता कि जनता आपराधिक छवि वाले अपने प्रतिनिधियों से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

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गठबंधन एक प्रयोग था, भले सफल न रहा हो लेकिन कमियां पता चल गईं: अखिलेश यादव

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) गठबंधन को लेकर एसपी चीफ अखिलेश यादव ने एक बार फिर बयान दिया है. अखिलेश ने कहा है कि जिंदगी में कई बार प्रयोग असफल होते हैं लेकिन उससे कमियों का पता चल जाता है. इतना ही नहीं उन्होंने इशारों-इशारों में मायावती के साथ भविष्य में चुनाव न लड़ने की बात भी कही. अखिलेश ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि अब राजनीति का रास्ता खुला हुआ है.

लखनऊ ईदगाह पहुंचे अखिलेश यादव ने लोगों को ईद की मुबारकबाद दी. अखिलेश ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह गठबंधन मेरे लिए एक प्रयोग की तरह था जो भले ही सफल न रहा हो लेकिन मुझे कमियां पता चल गईं. उन्होंने कहा, ‘मैं साइंस का छात्र रहा हूं. कई ट्रायल होते हैं. कई बार आप कामयाब नहीं होते हैं, लेकिन कम से कम आपको कमी पता चल जाती है.’

बीएसपी चीफ मायावती ने कहा था कि उनकी पार्टी उपचुनाव अकेले लड़ेगी हालांकि उसके बाद के चुनावों के लिए उन्होंने कहा था कि भविष्य में फैसला लिया जाएगा. अखिलेश ने इशारों में अब दोनों पार्टियों के अलग रास्ते होने की बात कही है. अखिलेश ने कहा, ‘जहां तक सवाल गठबंधन का है अकेले लड़ने का है, अब रास्ता राजनीति में खुला है. अगर गठबंधन में उपचुनाव में अकेले-अकेले लड़ रहे हैं तो मैं पार्टी के सभी नेताओं से राय मशविरा करके आगे की रणनीति बनाने की दिशा में काम करूंगा.’

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ईद पर बोलीं ममता बनर्जी, ‘सभी धर्मों की करेंगे रक्षा

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को ईद के मौके पर लोगों को मुबारकबाद दी. इस दौरान उन्‍होंने विरोधी दलों, खासकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में किसी को डरने की जरूरत नहीं है. हम हिंदू-मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों की रक्षा करेंगे… जो हमसे टकराएगा वह चूर चूर हो जाएगा.

ममता बनर्जी ने कहा कि त्‍याग का नाम है हिंदू, इमान का नाम है मुसलमान, प्‍यार का नाम है इसाई, सिखों का नाम है बलिदान, ये है हमारा प्‍यारा हिंदुस्‍तान…. इसकी रक्षा हम लोग करेंगे, जो हमले टकराएगा वो चूर चूर हो जाएगा. यही हमारा स्‍लोगन है. मुख्‍यमंत्री ने आगे कहा कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा होता है.

ममता ने केंद्र सरकार पर हमला बोलने हुए कहा कि कभी-कभी जब सूरज उगता है तो उसकी रोशनी बड़ी तीखी होती है लेकिन बाद में वह मद्धिम पड़ जाती है. उन्होंने जिस तेजी से ईवीएम पर कब्जा किया था, उतनी ही तेजी से पलायन कर जाएंगे. बता दें कि राज्‍य में भाजपा की मजबूत होती पकड़ के चलते सियासी तनाव बढ़ गया है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं चूक रही हैं.

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‘सुपर 30’ का ट्रेलर रिलीज, जानिए साइकिल पर पापड़ बेचने वाले टीचर आनंद कुमार के बारे में

बिहार के मैथेमटिशियन आनंद कुमार और उनकी सुपर 30 पर फिल्मकार विकास बहल फिल्म बना रहे हैं. इस फिल्म में अभिनेता ऋतिक रोशन आनंद कुमार की भूमिका में हैं. कुछ देर पहले ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ है. कुल मिलाकर ट्रेलर दमदार है. इससे पहले फिल्म के कई पोस्टर्स सामने आ चुके हैं. अब ट्रेलर आने से पहले जान लीजिए जिन पर फिल्म बन रही है उनके बारे में.

आनंद पटना में सुपर 30 के अलावा एक रामानुजम क्लासेस भी चलाते हैं. यहां पैसे लेकर पढ़ाया जाता है. आनंद का कहना है कि वो इसी पैसे से सुपर 30 चलाते हैं. रामानुजम क्लासेस में 300 या 400 बच्चे होते हैं. 27 हजार डेढ़ साल की फीस ली जाती हैं. जो फीस नहीं दे पाते हैं, उन्हें फ्री में भा पढ़ाया जाता है. पिछले 15 सालों में उनके पढ़ाए 450 बच्चों में से 396 बच्चों ने IIT क्वालिफाई किया है. कहा जाता है कि साइकिल पर घूम-घूमकर आनंद कुमार ने पापड़ बेचकर पढा़ई की. सुपर 30 में ऋतिक की पापड़ बेचते हुए तस्वीर भी सामने आई थी.

आनंद की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने ऋतु रश्मि से अंतरजातीय विवाह किया है. दरअसल ऋतु भूमिहार हैं तो वहीं आनंद कुमार कहार हैं. ऋतु और आनंद की शादी 2008 में हई थी. ऋतु को आनंद का मैथ्स पढ़ाने का तरीका बहुत पसंद था. बाद में ऋतु का चयन भी 2003 में बीएचयू आईटी के लिए हुआ. दोनों की शादी पर काफी बवाल भी काटा गया था.

वहीं दूसरी तरफ बिहार के कई कोचिंग संस्थानों, मीडिया और बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद के आनंद कुमार और सुपर 30 पर कई आरोप हैं. इतना ही नहीं आनंद कुमार पर आरोप लगते हैं कि सुपर-30 में रामानुजम क्लासेस से चुने जाने वाले स्टू़डेंट्स भी शामिल किए जाते हैं. आनंद कुमार को राष्ट्रीय कल्याण पुरस्कार के साथ कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

ये फिल्म बनने के दौरान लगातार कंट्रोवर्सी में रही और बनने के बाद भी. फिल्म में बतौर डायरेक्टर विकास बहल का नाम है जिनपर #मीटू का आरोप है. मेकिंग के दौरान भी ये फिल्म आनंद कुमार की वजह से सुर्खियों में थी. आनंद की कहानी पर बन रही फिल्म के बारे में जानने के बाद लोगों ने आरोप लगाने शुरू कर दिए थे कि आईआईटी की तैयारी कराने वाले इंस्टिट्यूट ‘सुपर 30’ को आनंद ने अकेले नहीं खड़ा किया है. हालांकि बाद में मेकर्स ने ये साफ कर दिया कि ये फिल्म आनंद कुमार की बायोपिक नहीं है.

बात करें फिल्म की तो सुपर 30 में ऋतिक के अलावा टीवी सीरियल्स में काम कर चुकी एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर नजर आएंगी. मृणाल इससे पहले टीवी सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ में काम कर चुकी हैं. ‘सुपर 30’ उनकी पहली हिंदी फिल्म होगी. इन दोनों के अलावा पंकज त्रिपाठी, नंदिश सिंह संधू, विरेंद्र सक्सेना और अमित साध जैसे कलाकार भी इस फिल्म में दिखाई देंगे.

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पाक ने कहा- ईद मुबारक और भारत के लिए खोल दिया हवाई रास्ता

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देश की दिग्गज विमानन कंपनी इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन सेंटर को सोमवार-मंगलवार की देर रात ईद मुबारक देते हुए पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई रास्ता खोल दिया. पाकिस्तान के रास्ते सबसे पहले इंडिगो की फ्लाइट ने भारत में प्रवेश किया. वहां के नागर विमानन निदेशक ने कहा कि, ‘जनाब आपको जुबान दी थी.’ बालाकोट पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायुसीमा को भारतीय विमानों के लिए बंद कर रखा था. हालांकि अब अहमदाबाद के नजदीक तेलम से भारतीय विमान पाकिस्तान में प्रवेश कर सकते हैं, या फिर दूसरे देश में जा सकेंगे. इंडिगो की दुबई से दिल्ली आने वाली फ्लाइट ने इस रास्ते से प्रवेश किया था.

इंडिगो के ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने पाक निदेशक से कहा कि ‘जनाब आप अभी तक जाग रहे हैं?’ इस सवाल के जवाब में पाक के विमानन निदेशक ने कहा कि, ‘मैं उस उड़ान को मॉनिटर कर रहा था. वो सकुशल लैंड हो गई. आपको जुबान दी थी. ईद मुबारक.’

भारत से कोई भी विमान जब यूरोप-अमेरिका या फिर खाड़ी देश में जाता है, तो पाकिस्तान में 11 रास्तों से प्रवेश कर सकते हैं. हालांकि 26 फरवरी के बाद यह सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे. रविवार को तेलम पर पाकिस्तान के रास्ते विमानों ने भारतीय सीमा में प्रवेश करना शुरू कर दिया है. सबसे पहले एतिहाद की अबूधाबी-दिल्ली की उड़ान ने रविवार शाम 5.34 पर यहां से प्रवेश किया. फ्लाइट में सवार थे 180 यात्री

इंडिगो की इस उड़ान में 180 यात्री सवार थे. कंपनी ने 14600 किलो का ईंधन भरवाया, ताकि अगर तेलम से उसे जाने की इजाजत न मिलें तो वो कोई अन्य रूट को ले सके. एयरबस ए320 ने रात 8.42 पर दुबई से उड़ान भरी. फ्लाइट संख्या 6ई 24 के पायलट ने पाक सीमा में घुसने से 10 मिनट पूर्व कराची एटीसी से संपर्क किया.

इंडिगो के अधिकारी के मुताबिक पायलट ने कहा कि कराची यह आई फ्लाई 24 (टेक्निकल कॉल साइन) है जो इतनी ऊंचाई पर उड़ रहा है. एटीसी से जवाब आया कि ठीक है. इसके बाद फ्लाइट 9.30 बजे पाक सीमा में प्रवेश किया और रात 10.40 बजे भारतीय सीमा में आई. रात 12.10 बजे फ्लाइट दिल्ली में लैंड हुईं.

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फिर अलवर जैसा कांड, मंदिर जा रही महिला से 5 ने किया गैंगरेप

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राजस्थान के पाली में अलवर रेप कांड जैसी घटना दोहाराई गई है. एक साथी के साथ बाइक से मंदिर जा रही 30 साल की शादीशुदा महिला के साथ 5 लोगों ने गैंगरेप किया है. इस दौरान महिला के साथी की पिटाई की गई.

ये घटना 26 मई को हुई थी. पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों ने गैंगरेप का वीडियो भी बना लिया था जिसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया.

भाषा के मुताबिक, औद्योगिक थाना क्षेत्र के थानाधिकारी किशोर सिंह भाटी ने बताया कि पीड़िता ने रविवार देर रात पांच आरोपियों के खिलाफ उसके साथ गैंग रेप करने, उसका वीडियो बनाने और उसे वायरल करने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई.

शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी (गैंग रेप), 341 (रास्ते रोकना), 323 (मारपीट) और 354 (छेड़खानी) में मामला दर्ज किया है.

पुलिस ने पांच में चार आरोपियों जितेन्द्र भाट (20), गोविन्द भाट (20), दिनेश भाट (24), महेन्द्र भाट (22) को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया. जबकि पांचवा आरोपी संजय भाट फरार है.

शिकायत के मुताबिक, महिला 26 मई को अपने एक मित्र के साथ बाइक से मामा नाडी मंदिर (भैरो मंदिर) जा रही थी.

पांचों आरोपियों ने रास्ते में उन्हें रोका और जबरन उसे सुनसान इलाके में ले जाकर गैंग रेप किया. महिला के पति एक कारखाने में मजदूरी करते हैं.

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दिल्ली मेट्रो में फ्री सफर, क्या हम दूजे ग्रह से आए है

मेट्रो, फ्री में सफर सिर्फ महिलाओं के लिए ऐसा क्यों है मुझे समझ नहीं आया. क्या हम दूसरे ग्रह से आई है. बिल्कुल भी नहीं …. .पुरुषों से कदम से कदम मिला कर चलने वाली को पुरुषों से बढ़कर क्यों? समानता का अधिकार मांगते मांगते समानता से ऊपर क्यों. मेरी समझ से जैसे IMPOSSIBLE में ‘POSSIBLE’ है कुछ वैसे ही महिलाओं के ‘अधिकसम्मान’ में असम्मान भी है. यह अधिक सम्मान मुझे नहीं ठीक लगा और हमेशा ही वाजिब नहीं लगता . हाँ, जहाँ तक बात है कि वो लोग भी सफर कर पाएंगे जो किराए की वजह से नहीं चढ़ पाती है तो तमाम पुरुष भी है जो रिक्शा चलाते है और ई रिक्शा जैसे सवारी के आ जाने से उनकी कमाई महज 150 से 200 होती है और उसमें भी रिक्शा भाड़े पर ले कर चलाते है. फिर सोचने वाली बात है क्या आर्थिक रूप से कमजोर पुरुष मेट्रो में चढ़ने के ख्वाब नहीं देख सकते? एक दूसरा कारण जो स्त्रियों की असुरक्षा को लेकर है तो सुरक्षा की व्यस्था मजबूत करने में वो राशि व्यर्थ किया जाए जो मैट्रो की फ्री सवारी के लिए की जाएगी . इससे जुड़ी हुई एक और बात है यदि सुरक्षा की दृष्टि से मेट्रो सही है तो हर लड़की या महिला के घर तक तो मैट्रो जाती नहीं तो असुरक्षा मैट्रो के बाद के सफर में ज्यादा है…. महिलाओं के लिए यह एक परेशानी भी हो सकती है जैसे उन जगहों पर जहां पुरुष किसी पारिवारिक काम से जाते थे यह भी हो सकता कि वहां अब पुरुष अपनी परिवार की महिलाओं से ज्यादा काम लें.

सोचने वाली बात यह है कि क्या महिलाओं के पास पहले से ही कम काम है क्या?इसका दूसरा पक्ष भी हो सकता कि पुरुष सिर्फ इस बात से महिलाओं को अपने साथ घूमने फिरने भी निकले की भाड़ा तो सिर्फ पुरुषों/लड़कों के लगेंगे तो भाड़ा में 50% का इजाफा पॉकेट/पर्स को होगा. मुझे लगता है यह स्त्री और पुरुष को बांटने की लकीर है. महिलाओं की हालात में आये परिवर्तन मैट्रो/बस में सफर करने वाले लोगों को यह बार बार याद दिलाता रहेगा वो जो साथ में सफर कर रहे वो एक नहीं. उनका संघर्ष एक नहीं… . यह भाड़े में कटौती विद्यार्थियों के लिए करना चाहिए क्योंकि बहुत कम विद्यार्थी है जिनकी पॉकेट मनी ज्यादा होगी. कम खर्च मिलने वालों की संख्या ज्यादा है जिससे विद्यार्थियों को सफर करने के लिए ज्यादा सोचना पड़ता है. जैसे किसी थिएटर के विद्यार्थी यदि मंडी हाउस जाना है जी टी बी से तो कम से कम 60 से 80 रुपये लगेंगे. इस हिसाब से महीने का कम से कम भाड़ा 1800 से 2400 लगेगा यह राशि ज्यादा नहीं आज के समय में पर उनके लिए जरूर है जिन्हें पॉकेट खर्च 3000 से 4000 मिलते है इसमें इनके खाने पीने का भी है . और विद्यार्थियों को दी गयी सुविधा आने वाले भविष्य में तमाम तरह के अलगाव को कम ही करेंगे क्योंकि शिक्षा ही मानव एक बेहतर इंसान बनाता है ….

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जिन 26 राज्यो में बसपा ने लड़ा देखिये क्या रही उनकी स्थिति

चुनाव के नतीजे आए एक हफ्ते से ज्यादा बीत चुके हैं. इस बीच चुनाव से जुड़े तमाम आंकड़े सामने आने लगे हैं. बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो लोकसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी की क्या स्थिति रही, उसने किस-किस राज्य में चुनाव लड़ा और उन राज्यों में बसपा का प्रदर्शन कैसा रहा, हम इस खबर में वो तमाम जानकारियां लेकर आए हैं. इसमें हम आपको बताएंगे कि बहुजन समाज पार्टी देश के जिन 26 राज्यों में चुनाव मैदान में थी, वहां उसकी स्थिति क्या रही. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बसपा से जुड़ी हुई तमाम बातें हम इस खबर में आपको बताएंगे. तो बसपा के प्रदर्शन की बात करें तो ….

  • बहुजन समाज पार्टी ने देश के 26 राज्यों में 338 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारा, लेकिन उसे सिर्फ उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर जीत मिली.
  • 26 में से 14 राज्यों में बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. इन 14 राज्यों में बसपा को मिले वोटों का प्रतिशत नोटा से भी कम रहा
  • तो 21 राज्यों में बसपा का वोट प्रतिशत दो प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका
  • बसपा सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही पांच प्रतिशत से अधिक 19.26 फीसदी वोट हासिल कर सकी तो उत्तराखंड में पांच प्रतिशत के करीब 4.48 प्रतिशत तक पहुंच सकी

जिन राज्यों में बसपा को नोटा से भी कम वोट मिले उनकी सूची देखिए

आंध्र प्रदेश बसपा को- 0.26 प्रतिशत जबकि 1.49 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया

बिहार बसपा को- 1.67 प्रतिशत, जबकि 2 प्रतिशत लोगों ने नोटा का बटन दबाया

गुजरात बसपा को- 0.86 प्रतिशत, नोटा के तहत 1.38 प्रतिशत लोगों ने बटन दबाया

हिमाचल प्रदेश बसपा को- 0.85 प्रतिशत, जबकि 0.86 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया

झारखंड बसपा को मिले वोटों का प्रतिशत 1.11 रहा, तो नोटा का बटन 1.27 प्रतिशत मतदाताओं ने दबाया

केरल बसपा को- 0.25 प्रतिशत, नोटा के हिस्से में 0.51 प्रतिशत वोटिंग हुई

महाराष्ट्र बसपा को- 0.86 प्रतिशत मत मिला, जबकि नोटा का बटन 0.90 फीसदी ने दबाया

ओडिसा बसपा का वोट प्रतिशत 0.76 रहा, नोटा के हिस्से में 1.31 प्रतिशत आया

पांडिचेरी बसपा को- 0.34 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 1.54 प्रतिशत ने वोटिंग को नकारते हुए नोटा का बटन दबाया

तामिलनाडु बसपा को- 0.38 प्रतिशत, नोटा के तहत 1.28 प्रतिशत लोगों ने बटन दबाया

तेलंगाना बसपा को- 0.24 प्रतिशत वोट, नोटा का बटन दबाने वालों का प्रतिशत 1.02 रहा

पश्चिम बंगाल बसपा को- 0.39, जबकि नोटा के लिए 0.96 प्रतिशत ने मतदान किया

इसके अलावा दादर एवं नगर हवेली में बसपा को- 0.48 प्रतिशत, नोटा को 1.48 प्रतिशत वोट मिले

तो दमन एवं दीव में भी बसपा के हिस्से में 0.91 प्रतिशत आएं जबकि नोटा के हिस्से में 1.70 प्रतिशत वोट डाले गए.

तो ये थे वो राज्य जहां बसपा ने नोटा से भी कम वोट हासिल किया. इन राज्यों के अलावा अन्य राज्यों में बसपा के प्रदर्शन की बात करें तो

राज्य                                                       प्रतीशत

अंडमान एंड निकोबार आइसलैंड-                      1.20 प्रतिशत चंडीगढ़-                                                 1.62 प्रतिशत छत्तीसगढ़-                                             2.30 प्रतिशत हरियाणा-                                               3.64 प्रतिशत जम्मू एवं कश्मीर-                                      0.87 प्रतिशत कर्नाटक-                                                1.17 प्रतिशत मध्यप्रदेश-                                              2.38 प्रतिशत दिल्ली-                                                  1.08 प्रतिशत पंजाब-                                                   3.49 प्रतिशत राजस्थान-                                               1.07 प्रतिशत उत्तर प्रदेश-                                             19.26 प्रतिशत उत्तराखंड-                                               4.48 प्रतिशत वोट हासिल कर सकी.

अब आते हैं उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के प्रदर्शन पर, जहां के बारे में माना जा रहा था कि यहां समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन के बाद 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहेगा. सीट शेयरिंग के तहत बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश में 38 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन इसके सिर्फ 10 सांसद ही जीत सकें. 2014 में पार्टी कोई भी सीट नहीं जीत पाई थी. अगर उस लिहाज से देखें तो 2019 लोकसभा चुनाव में 10 सीटें मिल जाना बसपा के लिए अच्छी खबर है, लेकिन उत्तर प्रदेश में गठबंधन होने के बाद जिस तरह यह उम्मीद की जा रही थी कि गठबंधन काफी सफल होगा और बिना गठबंधन के समर्थन के दिल्ली में कोई सरकार नहीं बनेगी, वहां गठबंधन को बड़ा झटका लगा है.

इसका एक पहलू यह भी है कि जिस तरह से भाजपा को देश भर में प्रचंड बहुमत मिला है, उस स्थिति में अगर गठबंधन नहीं हुआ होता तो बसपा और सपा को जो 10 और 5 लोकसभा सीटों पर जीत मिली है, वह जीत भी मुश्किल होती.

अब हम आपको बताते हैं कि बसपा के जो सांसद जीत कर आए हैं उनके नाम क्या हैं और वो किस सीट से जीते हैं.

(1) बिजनौर से बसपा के मूलक नागर 75000 वोटों से जीते हैं (2) नगिना सुरक्षित सीट से गिरिश चंद्रा 1 लाख 6 हजार वोटों से जीते हैं (3) अमरोहा सीट से दानिश अली ने 63000 वोटों से जीत दर्ज की हैं तो (4) सहारनपुर से हाजी फजलुर्रहमान 23000 वोटों से जीते हैं (5) अम्बेडकर नगर से रीतेश पांडे 95880 वोटों से जीते हैं (6) गाजीपुर में अफजल अंसारी 119392 वोटों से जीतने में सफल हुए हैं (7) घोसी से अतुल कुमार सिंह को 122556 वोटों से जीत मिली है (8) तो सुरक्षित सीट लालगंज से संगीता आजाद ने 161597 वोटों से जीत        दर्ज की (9) श्रावस्ती से राम शिरोमणि करीबी मुकाबले में 5320 वोटों से जीतने में          सफल रहें (10) तो जौनपुर से श्याम सिंह यादव ने 80936 वोटों से जीत दर्ज की

जातीय समीकरण की बात करें तो बसपा के 10 सांसदों में 3 मुस्लिम, 2 दलित, 3 पिछड़े वर्ग के जबकि 2 सामान्य वर्ग से हैं.

दो लोकसभा सीटें ऐसी भी रही, जहां बसपा बहुत ही कम अंतरों से हार गई. इसमें मछली शहर सीट है, जहां बसपा सिर्फ 181 वोटों के अंतर से हार गई. तो मेरठ में बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी 4000 वोटों से हार गए. इन दोनों सीटों सहित कुल 9 लोकसभा सीटें ऐसी रही, जहां बहुजन समाज पार्टी नजदीकी मुकाबले में हार गई. इन सीटों पर बसपा की हार की एक और वजह कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भी रहे, जिन्होंने भाजपा विरोधी वोटों को बाट लिया.

इन सीटों में मेरठ और मछली शहर के अलावा संतकबीर नगर, बस्ती, बदायूं, सुल्तानपुर, बलिया, चंदौली, फिरोजाबाद सीट शामिल है. तो इसके अलावा कांग्रेस के कई अन्य उम्मीदवारों ने भी गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का खेल बिगाड़ा. इन सीटों में धौरहरा, सीतापुर और कैराना की सीटे शामिल हैं.

अब हम इस पर आते हैं कि आखिर गठबंधन के बहुत सफल नहीं हो पाने की क्या वजह रही.

कारण नंबर- 1 भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार करने वालों में नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े चेहरे थे, जबकि बसपा की ओर से सिर्फ मायावती तो समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव ही चुनाव प्रचार में थे. भाजपा के तमाम नेता मिलकर ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने में सफल रहे. सिर्फ योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश 137 रैलियां की.

कारण नंबर- 2 भाजपा को 2014 लोकसभा चुनाव में 42.6 प्रतिशत वोट मिले थे, 2019 में भाजपा ने इसमें 7 फीसदी वोट बढ़ाया और 49.7 फीसदी वोट हासिल करने में सफल रही.

वहीं दूसरी ओर जहां सपा का वोट प्रतिशत 2014 के 22.20 फीसदी वोट शेयर से घटकर 2019 में 18 फीसदी तक पहुंच गया, तो बसपा भी अपना प्रदर्शन बेहतर नहीं कर पाई. बसपा को 2014 में 19.60 वोट मिले थे जो कि 2019 में 19.50 पर पहुंच गए. पूरे गठबंधन की बात करें तो इसके कुल मतों में कम से कम तीन प्रतिशत की गिरावट हुई.

कारण नंबर- 3 उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर 2019 के चुनाव में 70.48 लाख नए मतदाता थे. इसमें पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या तकरीबन 17 लाख थी. ऐसे वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा ने कई अभियान चलाए. इसमें ‘पहला वोट भाजपा को’ जैसा नारा काफी असरदार साबित हुआ. इन तमाम योजनाओं की बदौलत भाजपा को इस बार 2014 के मुकाबले 85 लाख ज्यादा वोट मिले.

बसपा-सपा और रालोद गठबंधन के पास इन नए वोटरों को जोड़ने के लिए कोई योजना नहीं थी. न तो उन्होंने इस तरह की कोई योजना ही बनाई. यह गठबंधन सिर्फ बसपा प्रमुख मायावती, अखिलेश यादव और चौधरी अजीत सिंह पर टिकी रही.

कारण नंबर- 4 गठबंधन मुख्य रूप से जाटव, यादव और मुस्लिम वोटों पर टिका रहा, जिनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत के आस-पास है. जबकि भाजपा इसकी काट के लिए बाकी की 60 फीसदी जातियों में अपनी पैठ बनाती रही.

कारण नंबर- 5 सपा के हिस्से में आई कुल 37 सीटों में से 19 सीटें ऐसी थीं, जिनपर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सपा और बसपा को मिले कुल वोटों से ज्यादा वोट मिले थे तो बसपा के खाते में इस तरह की 14 सीटें थीं. इन सीटों पर जीत के लिए सपा-बसपा गठबंधन को विशेष रणनीति बनाने की जरूरत थी. लेकिन नतीजे देखते हुए नहीं लगता कि गठबंधन इन सीटों के लिए कोई विशेष रणनीति बना पाई.

इन तमाम तथ्यों के अलावा एक तथ्य और है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है. क्योंकि यह तथ्य भाजपा की बड़ी जीत की कहानी कहती है. भाजपा देश भर में जो 303 सीटें जीतने में कामयाब रही, उसमें से भाजपा द्वारा जीते गए 16 सीटों पर जीत का अंतर सिर्फ 5000 वोटों का रहा तो भाजपा ने 42 सीटें ऐसी जीती जहां पर जीत का अंतर 5000 से 25 हजार के बीच रहा. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जमीनी स्तर पर मेहनत कर भाजपा ने तकरीबन 50 सीटें अपने नाम कर ली, जहां अन्य दलों ने गंभीरता से प्रयास ही नहीं किया.

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चीन सीमा से AN-32 विमान लापता, सर्च ऑपरेशन में वायुसेना के साथ थल सेना भी जुटी

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का Antonov AN-32 विमान अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास स्थित मेचुका एयरबेस से पिछले कुछ घंटे से लापता है. विमान के गायब होनेे के बाद वायुसेना ने इसेे खोजने के लिए सर्च अभियान चलाया था, लेकिन अब-तक इस विमान केे बारे मेंं कोई जानकारी नहीं मिल सकी है.जानकारी अनुसार सर्च ऑपरेशन रात तक जारी रहेगा. इस अभियान में वायुसेना के साथ थल सेना भी जुट गई है. स्थल के संभावित स्थान की कुछ जानकारी प्राप्त हुई है. हालांकि, अभी तक किसी मलबे को नहीं देखा गया है.

बता देें कि इस विमान में 13 लोग सवार हैं. विमान से अंतिम बार दोपहर 1 बजे संपर्क हुआ था. इस विमान में सवार लोगों में चालक दल के आठ सदस्य और पांच यात्री शामिल हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उप प्रमुख राकेश सिंह भदौरिया से बातचीत की और सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की.

जानकारी अनुसार इस विमान ने दोपहर 12.25 बजे जोरहाट से उड़ान भरी थी, लेकिन दोपहर 1 बजे के बाद से विमान से संपर्क टूट गया . वायुसेना ने इस विमान को खोजने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया है. इस अभियान के लिए सुखोई 30 एयरक्राफ्ट और सी-130 स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया गया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उप प्रमुख से विमान की जानकारी ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उप प्रमुख से बात कर लापता विमान के बारे में जानकारी ली है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘कुछ घंटों से लापता IAF के AN-32 एयरक्राफ्ट को लेकर मैंने एयर फोर्स के वाइस चीफ एयर मार्शल राकेश सिंह भदौरिया से बात की है. उन्होंने लापता विमान का पता लगाने के लिए इंडियन एयर फोर्स की तरफ से उठाए गए कदमों की मुझे जानकारी दी. मैं विमान में सवार सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं.’

2016 में बंगाल की खाड़ी से लापता हो गया था AN-32 विमान इससे पहले जुलाई 2016 में, भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान 29 लोगों के साथ बंगाल की खाड़ी से लापता हो गया था. इस विमान ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए चेन्नई के एक एयरबेस से उड़ान भरी थी. इस विमान का उड़ान भरने के लगभग एक घंटे बाद रडार सेे संपर्क टूट गया था. इस विमान के लापता होने के बाद वायुसेना ने अबतक का सबसे लंबा खोजी अभियान चलाया था, जो लगभग एक माह तक चला था. इसके बाद भी विमान के बारे में कुछ पता नहीं चल सका था.

मेचुका में पहले भी दुर्घटनाग्रस्त हो चुका AN-32 एयरक्राफ्ट जुलाई 2016 से पहले यह विमान दो बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है. पहली बार 25 मार्च 1986 को हिंद महासागर के ऊपर से यह विमान गायब हुआ था. तब यह विमान सोवियत यूनियन से ओमान के रास्ते होते हुए भारत आ रहा था. इसमें तीन क्रू मेंबर और चार यात्री सवार थे. तब इस विमान और उन लोगों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया था. उसके बाद दूसरी बार 10 जून 2009 को अरुणाचल प्रदेश के मेचुका से उड़ान भरने के बाद ये विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उस समय एएन-32 विमान में कुल 13 लोग सवार थे.

जानिए, Antonov An-32 विमान के बारे में Antonov An-32 दो इंजन वाला टर्बोप्रोप मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है. ये एयरक्राफ्ट रूसी विमान एएन-26 का आधुनिक वर्जन है. इस विमान की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सझम है. इस एयरक्राफ्ट को इंदिरा गांधी की सरकार के समय रूस और भारत के बीच दोस्ताना संबंध और भारतीय वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए मंगाया गया था. इसका अधिकतम इस्तेमाल कम और मध्यम हवाई दूरी के लिए सैन्य साजो-सामान पहुचांने, आपदा के समय घायलों को अस्पताल लाने-ले जाने और जावनों को एक जगह दूसरी जगह पहुंचाने में किया जाता है. भारत में जब भी युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों हुई है इस विमान ने इंडियन एयरफोर्स का बहुत साथ निभाया है. कारगिल युद्ध के दौरान यह विमान जवानों को दुर्गम स्थानों पर भेजने में अहम साबित हुआ था.

दुनिया में इस्तेमाल दुनिया के 10 देशों में 240 से अधिक एएन विमान संचालित किए जा रहे हैं. भारत में 105 विमान अभी सेवा में हैं.

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केरल / निपाह वायरस की दस्तक: एक व्यक्ति संक्रमित, दूसरे का सैंपल भेजा; 86 निगरानी में

तिरुवनंतपुरम। केरल में एक बार फिर निपाह वायरस ने दस्तक दी है. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने एक मरीज के मिलने की बात कही है. एर्नाकुलम का रहने वाला 23 साल का एक व्यक्ति पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया. शैलजा ने बताया कि दूसरे मरीज का सैंपल टेस्ट के लिए पुणे भेजा गया है. दो संदिग्ध मरीजों को बुखार और गले में परेशानी के कारण भर्ती कराया गया है. दो नर्स उनका इलाज कर रही हैं.

राज्य के 86 संदिग्ध मरीजों पर निगरानी रखी जा रही है. इनमें अभी निपाह वायरस की पुष्टि नहीं हुई है. एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज में बीमारी के इलाज के लिए अलग से स्पेशल वार्ड बनाया गया है. 2018 में केरल में निपाह वायरस से करीब 16 लोगों की मौत हुई थी. 750 से ज्यादा मरीजों को निगरानी में रखा गया था.

हमारे पास जरूरत की सभी दवाइयां

स्वास्थ्य मंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य विभाग हर तरह की परिस्थिति को संभालने के लिए तैयार है. हमारे पास जरूरत की सभी दवाइयां हैं. इस बीमारी से निपटने के लिए एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज में अलग से वार्ड बनाया गया है. स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से बीमारी को लेकर दहशत नहीं फैलाने की अपील भी की. वहीं, मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और ऐहतियातन उपाए किए जा रहे हैं.

ऐसे फैलता है वायरस विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस चमगादड़ से फैलता है. इन्हें फ्रूट बैट कहते हैं. चमगादड़ किसी फल को खा लेते हैं और उसी फल या सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो संक्रमित हो जाता है. निपाह वायरस इंसानों के अलावा जानवरों को भी प्रभावित करता है. इसकी शुरुआत तेज सिरदर्द और बुखार से होती है. इससे संक्रमित व्यक्ति की मृत्युदर 74.5% होती है.

वायरस का 21 साल पहले पता चला था डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 1998 में मलेशिया में पहली बार निपाह वायरस का पता लगाया गया था. यहां सुंगई निपाह गांव के लोग सबसे पहले इस वायरस से संक्रमित हुए. इस गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा. उस दौरान ऐसे किसान इससे सं​क्रमित हुए थे, जो सुअर पालन करते थे. मलेशिया मामले की रिपोर्ट के मुताबिक पालतू जानवरों जैसे कुत्ते, बिल्ली, बकरी, घोड़े से भी इंफेक्शन फैलने के मामले सामने आए थे.

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मायावती ने किया साफ, गठबंधन पर फिलहाल ब्रेक, समाजवादी पार्टी में आया सुधार तो करेंगे विचार

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन टूटने की चर्चाओं के बीच मायावती ने खुद आकर स्थिति साफ की है और फिलहाल गठबंधन पर ब्रेक लगाने की पुष्टि की है. मायावती ने मीडिया से बात करते हुए एक तरफ अखिलेश और डिंपल के साथ हमेशा के लिए रिश्ते बने रहने की बात कही तो दूसरी तरफ फिलहाल चुनावी राजनीति में अकेले ही आगे बढ़ने की भी पुष्टि की. मायावती ने लोकसभा चुनाव में करारी हार का ठीकरा समाजवादी पार्टी पर फोड़ते हुए कहा कि उन्हें यादव वोट ही नहीं मिले.

मायावती ने कहा, ‘कन्नौज में डिंपल, बदायूं में धर्मेंद यादव और फिरोजाबाद में अक्षय यादव की हार हमें सोचने पर मजबूर करती है. इनकी हार का हमें भी बहुत दुख है. साफ है कि इन यादव बाहुल्य सीटों पर भी यादव समाज का वोट एसपी को नहीं मिला. ऐसे में यह सोचने की बात है कि एसपी का बेस वोट बैंक यदि उससे छिटक गया है तो फिर उनका वोट बीएसपी को कैसे गया होगा.’

मायावती ने कहा, ‘अखिलेश और डिंपल मुझे बहुत इज्जत देते हैं. हमारे रिश्ते हमेशा के लिए हैं. लेकिन राजनीतिक विवशताएं हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजे यूपी में जो उभरकर सामने आए हैं, उसमें यह दुख के साथ कहना पड़ा है कि यादव बाहुल्य सीटों पर भी एसपी को उनका वोट नहीं मिला. यादव समाज के वोट न मिलने के चलते कई महत्वपूर्ण सीटों पर भी एसपी के मजबूत उम्मीदवार हार गए. यह हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है.’

हार का ठीकरा एसपी पर, कहा- अखिलेश ने पार्टी  सुधारी तो आएंगे साथ हमारी समीक्षा में यह पाया गया कि बीएसपी जिस तरह से कैडर बेस पार्टी है. हमने बड़े लक्ष्य के साथ एसपी के साथ मिलकर काम किया है, लेकिन हमें बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है. एसपी ने अच्छा मौका गंवा दिया है. ऐसी स्थिति में एसपी को सुधार लाने की जरूरत है. एसपी को भी बीजेपी के जातिवादी और सांप्रदायिक अभियान के खिलाफ मजबूती से लड़ने की जरूरत है. यदि मुझे लगेगा कि एसपी प्रमुख राजनीतिक कार्यों के साथ ही अपने लोगों को मिशनरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो फिर हम साथ चलेंगे. यदि वह इस काम में सफल नहीं हो पाते हैं तो हमारा अकेले चलना ही बेहतर होगा.

माया बोलीं, यादव मतदाताओं ने किया भीतरघात मायावती ने समाजवादी पार्टी का बेस वोट कहे जाने वाले यादव मतदाताओं को लेकर कहा कि उन्होंने न जाने किन कारणों से एसपी को वोट नहीं दिया. यही वजह है कि कन्नौज, फिरोजाबाद और बदायूं में भी एसपी हार गई. मायावती ने कहा कि यादव मतदाताओं ने भीतरघात किया है.

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बसपा की बैठक में उपचुनाव को लेकर बहनजी की बड़ी घोषणा

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नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की समीक्षा बैठक आज दिल्ली में संपन्न हुई. इस बैठक से सबसे बड़ी खबर यह है कि बसपा ने उत्तर प्रदेश की खाली हुई 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में उतरने का फैसला किया है. चौंकाने वाली खबर यह है कि उपचुनाव में बसपा अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी की समीक्षा बैठक सुबह 11 बजे के करीब शुरू हुई और दोपहर 1.30 बजे तक चली. ढाई घंटे तक चली इस बैठक को बसपा प्रमुख मायावती ने करीब डेढ़ घंटे तक संबोधित किया.

इस बैठक में बसपा प्रमुख ने पार्टी नेताओं से लोगों के बीच अपना जनाधार बढ़ाने का निर्देश दिया. दलित दस्तक के सूत्रों के मुताबिक बैठक में हार की एक वजह बसपा प्रमुख ने सपा के बागी नेता शिवपाल यादव द्वारा यादव वोटों के बंटवारे को भी बताया, हालांकि उन्होंने अखिलेश यादव की तारीफ की. विश्वस्त सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक बामसेफ और जिला कमेटियों के ढांचे में बदलाव की भी खबर है. इसमें बदलाव करते हुए बसपा प्रमुख ने पूर्व में मंडल स्तर और जोन स्तर पर काम करने वाले भाईचारा कमेटी को अब विधानसभा स्तर पर करने का आदेश दिया है. तो वहीं बामसेफ में अब जिला स्तर के अलावा विधानसभा स्तर, मंडल स्तर और सेक्टर स्थल पर अब दो-दो लोगों को रखने का आदेश दिया है. बैठक के दौरान बहनजी ने भाईचारा कमेटियों को मजबूत करने की बात कही और इसके जरिए 50 फीसदी वोटों को अपने पक्ष में करने का निर्देश दिया.

Rajasthan बोर्ड में 10वीं का परिणाम आज शाम 4 बजे

नई दिल्ली। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) 10वीं क्लास का रिजल्ट आज यानी 3 जून, 2019 को जारी करेगा. दिन के 11 बजे आरबीएसई की ऑफिशल वेबसाइट rajresults.nic.in पर रिजल्ट की घोषणा की जाएगी.

बता दें कि इससे पहले राजस्थान बोर्ड 12वीं कक्षा के नतीजों की घोषणा कर चुका है. बोर्ड ने साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम के रिजल्ट की घोषणा 15 मई को की थी जबकि आर्ट्स स्ट्रीम का रिजल्ट 22 मई को जारी किया गया था. अब छात्रों को दसवीं और आठवीं कक्षा के नतीजों का इंतजार है.

बोर्ड अधिकारी ने बताया कि आठवीं कक्षा के नतीजों की घोषणा दसवीं के रिजल्ट जारी करने के बाद होगी. इस रिजल्ट को आप राजस्थान बोर्ड की ऑफिशल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाकर देख पाएंगे. पिछले साल राजस्थान बोर्ड की दसवीं कक्षा में 79.86% छात्र पास हुए थे. रेगुलर छात्रों का पास प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा था. 2018 में दसवीं कक्षा में 80.13% छात्र पास हुए थे. वहीं केवल 14.55% प्राइवेट छात्र पास हुए थे.

RBSE 10th Class Result 2019 ऐसे देखें

  1. राजस्थान बोर्ड की ऑफिशल वेबसाइट                                     rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं
  2. यहां Result 2019 के लिंक पर क्लिक करें
  3.  इसके बाद एक नया पेज खुलेगा यहां दसवीं कक्षा के लिंक पर क्लिक करें
  4. अब अगले पेज पर अपना रोल नंबर डालें और सबमिट करें
  5. सबमिट करते ही आपका रिजल्ट आपके सामने होगा.
Read it also-रिजल्ट के एक दिन पहले राहुल गांधी ने ट्विट कर दिया कार्यकर्ताओं को संदेश, देखिए क्या कहा

दलित दस्तक मैग्जीन का मई-जून 2019 अंक ऑन लाइन पढ़िए

दलित दस्तक मासिक पत्रिका ने अपने सात साल पूरे कर लिए हैं. जून 2012 से यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित हो रही है. मई 2019 अंक प्रकाशित होने के साथ ही पत्रिका ने अपने सात साल पूरे कर लिए हैं. हम आपके लिए आठवें साल का पहला अंक लेकर आए हैं. अब दलित दस्तक मैग्जीन के किसी एक अंक को भी ऑनलाइन भुगतान कर पढ़ा जा सकता है.

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3 जून को दिल्ली में बसपा की समीक्षा बैठक

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बाद समीक्षा हेतु बहुजन समाज पार्टी 3 जुन को दिल्ली में बैठक करने जा रही है. इस बैठक में नवनिर्वाचित सांसद, लोकसभा प्रत्याशी, जोन इंचार्जों के साथ जिलाध्यक्षों को भी बुलाया गया है. बैठक के लिए सभी को दिल्ली स्थित केंद्रीय पार्टी कार्यालय 11 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर 10 बजे तक पहुंचने को कहा गया है. इस बैठक में मायावती ने सीटवार ब्यौरा भी मांगा है. मायावती 23 मई को मतगणना वाले दिन ही रात में दिल्ली चली गई थीं. तब से वह दिल्ली में ही हैं.

  इस बीच बसपा के मध्य प्रदेश के नेताओं की बैठक आज दिल्ली में हैं. बहुजन समाज पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 में से 27 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. लेकिन पार्टी का परफॉरमेंस इतना ख़राब रहा कि सभी प्रत्याशियों की ज़मानत ज़ब्त हो गयी. अब आज हो रही इस बैठक में अनुमान है कि मायावती एमपी में बीएसपी की हार पर मंथन करेंगी. गौरतलब है कि बसपा को लोकसभा चुनाव में 10 सीटें मिली हैं और उसका कुल वोटिंग प्रतिशत 19.26 रहा है.

कांग्रेस संसदीय दल की नेता चुनी गईं सोनिया गांधी

कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी एवं अन्य

नई दिल्ली। संसद के सेंट्रल हॉल में कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की बैठक हुई जिसमें सोनिया गांधी एक बार फिर संसदीय दल की नेता चुनी गईं. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. फिर से नेता चुने जाने पर सोनिया गांधी ने कांग्रेस को वोट करने वालों का धन्यवाद किया.

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया है. सोनिया गांधी की तरफ से उन्होंने बताया कि हम उन 12.13 करोड़ वोटरों का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने कांग्रेस पार्टी पर विश्वास जताया.

संसद सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी ने भी अपने तेवर साफ कर दिए. उन्होंने बैठक में कहा, हम 52 सांसद हैं. मैं गारंटी देता हूं कि ये 52 सांसद बीजेपी से हर इंच पर लड़ेंगे. हम बीजेपी को हर दिन नचाने के लिए काफी हैं. वे हमसे लड़ाई लड़ने के लिए गालियां देंगे, नफरत करेंगे, गुस्सा दिखाएंगे. आप इसका लुत्फ लीजिए. आपको भी आक्रामक होना होगा. वक्त आत्मनिरीक्षण और कायाकल्प करने का है.

पिछले हफ्ते कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक के बाद यह मीटिंग हुई है, जिसमें राहुल गांधी ने पार्टी की शर्मनाक हार के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसे ठुकरा दिया गया था. कांग्रेस के लिए मुश्किल यह है कि लोकसभा में उसके सिर्फ 52 सांसद हैं. विपक्ष का दर्जा पाने के लिए एक पार्टी के पास कम से कम 55 सांसद होने जरूरी हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के सिर्फ 44 संसद पहुंचे थे.

फिर शर्मसार हुई देवभूमि, 9 साल की दलित मासूम से रेप

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उत्तराखंड के जौनपुर में एक 9 साल की दलित नागबिल से बलात्कार। हवस का शिकार बनाने वाला आरोपी दरिंदा 24 साल का गाँव का ही विपिन पंवार है जो कि दो बच्चों का पिता भी है। आरोपी फिलहाल फरार है। यह उसी नैनबाग तहसील, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल का मामला है जहां कुछ दिन पूर्व ही शादी में कुर्सी पर बैठने भर से एक दलित युवक की हत्या कर दी गई थी घटना 30 मई दोपहर की है।

कुछ दिन पूर्व ही कुर्सी पर बैठकर खाना खाने पर दलित जितेंद्र दास की हत्या की गई थी अब उम्मीद की जा रही थी कि ऐसी घटनाओं से ये लोग कुछ सीख लेंगे मगर संस्कार और डीएनए कभी नहीं बदल सकता है। अफसोस यह है कि 9 साल की बच्ची पर भी इनका सभ्य समाज जरूर जातिवाद फलाने और झूठा आरोप लगाने जैसे कुतर्क दे सकता है क्योंकि ये इंसाफ के लिए कभी नहीं लड़ेंगे यह भी एक कारण है कि अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है सब सवर्ण समाज एक होकर चंदा एकत्रित करके अपराधियों को छुड़ा लेंगे फिर फुर्सत से दलित परिवार को सबक सीखाएंगे।

पुरोला, उत्तरकाशी में भी एक दलित युवती इसी तरह पीड़ित है। उसके गांव का एक सवर्ण युवक कई सालों से शादी का झांसा देकर युवती का शोषण कर रहा है। युवती का कहना है कि हमने शादी की है जबकि युवक इससे इनकार कर रहा है। फिर एक दिन गांववालों ने बैठक की और लड़की के शोषण की कीमत 5 लाख रुपये लगाई गई। पैसे तो दिए नहीं ऊपर से लड़की का शोषण कई तरह से होता गया। मामला पुलिस तक भी गया मगर कोई भी पत्रकार या पुलिस इसे प्रकाश में लाने को राजी नहीं क्योंकि वे लोग रसूख वाले हैं और लड़का लड़की से प्रेम भी करता है मगर समाज मे स्वीकार भी नही कर रहा। यह हालत है समाज की।

हमारे जन प्रतिनिधि तो फिर से कह देंगे कि हमारे यहां न जातिवाद है और न रेप की घटनाएं होती है क्यूंकि उन्होंने वोट लेने हैं और सवर्ण समाज की बात ही क्या करूँ? 9 साल की बच्ची का रेप होने के बाद भी पूरा गांव पीड़ित परिवार पर फैसले का भारी दबाव। उनका कहना है कि ऐसे में गांव की बदनामी होगी इसलिए पैसे लेकर मामला रफा दफा किया जाय। उनमे से कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार का पीछा तक किया मगर परिवार के साथ समाज दलित समाज तबतक खड़ा हो चुका था। अभी बच्ची बेहोशी की हालत में दून हॉस्पिटल देहरादून में हैं भर्ती है। हम सब पीड़ित के साथ ही हैं, एफआईआर दर्ज हो चुकी है मगर आरोपी को फरार कर दिया गया है पुलिस तलाश में जुटी हुई है।

आपको बता दूं इसी परिवार के साथ 4 साल पहले इससे भी खतरनाक दरिंदगी हो चुकी है। गांव के कुछ राजपूत लड़कों ने इसी परिवार की जवान लड़की को अगवा कर नाले में पूरी रात बलात्कार किया फिर सुबह जान से मार दिया। शव को बुरी तरह रौंदा गया। मामला बनता इससे पहले ही गांव में बैठक की गई और 5 लाख रुपये में समझौता करवाया गया। उस वक्त दलित समाज आवाज उठाने का दम नहीं कर सका हालांकि पैसा तो नहीं मिला मगर न्याय भी नहीं मिल सका। यदि उसी समय सभी को जेल हो चुकी होती तो आज अजीसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। अब उसकी भी जांच होनी चाहिए और इस 9 साल की बच्ची को भी इंसाफ मिलना चाहिए।

  • रिपोर्टः जबर सिंह वर्मा

भारत की नई सरकार में देखिए किसे मिला कौन सा मंत्रालय

नयी दिल्ली। नयी सरकार के शपथ लेने के बाद तमाम लोग इसे मोदी सरकार और भाजपा सरकार कह रहे हैं. लेकिन यह सबको पता होना चाहिए कि यह मोदी या भाजपा नहीं बल्कि भारत सरकार है. भारत सरकार जिसका निशान तीन शेरों का मुंह वाला चित्र है, जो अशोक स्तंभ के साथ होता है. देखिए भारत देश की इस नयी सरकार में किसे कौन सा मंत्रालय मिला है.

1. नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री)- प्रधानमंत्री के पद के साथ कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय. इसके अलाव वो सभी मंत्रालय जो किसी भी मंत्री को अलॉट न हुए हो. 2. राजनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री)- रक्षा मंत्रालय 3. अमित शाह (कैबिनेट मंत्री)- गृह मंत्रालय 4. नितिन गडकरी (कैबिनेट मंत्री)- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय 5. सदानंद गौड़ा (कैबिनेट मंत्री)- रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय 6. निर्मला सीतारमण (कैबिनेट मंत्री)- वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय 7. राम विलास पासवान (कैबिनेट मंत्री)- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय 8. नरेंद्र सिंह तोमर (कैबिनेट मंत्री)-कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय 9. रविशंकर प्रसाद (कैबिनेट मंत्री)-कानून एवं न्याय, संचार और इलेक्ट्रानिक एवं सूचना मंत्रालय 10. हरसिमरत कौर बादल (कैबिनेट मंत्री)- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय 11. एस. जयशंकर (कैबिनेट मंत्री)- विदेश मंत्रालय 12. रमेश पोखरियाल निशंक (कैबिनेट मंत्री)- मानव संसाधन विकास मंत्रालय 13. थावर चंद गहलोत (कैबिनेट मंत्री)- सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय 14. अर्जुन मुंडा (कैबिनेट मंत्री)- आदिवासी मामलों का मंत्रालय 15. स्मृति ईरानी (कैबिनेट मंत्री)- महिला एवं बाल विकास और कपड़ा मंत्रालय 16. हर्षवर्धन (कैबिनेट मंत्री)- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रोद्योगिकी, भूविज्ञान मंत्रालय 17. प्रकाश जावड़ेकर (कैबिनेट मंत्री)- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय 18. पीयूष गोयल (कैबिनेट मंत्री)- रेलवे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय 19. धर्मेंद्र प्रधान (कैबिनेट मंत्री)- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्रालय 20. मुख्तार अब्बास नकवी (कैबिनेट मंत्री)- अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय 21. प्रह्लाद जोशी (कैबिनेट मंत्री)- संसदीय मामले, कोयला और खान मंत्रालय 22. महेंद्र नाथ पांडेय (कैबिनेट मंत्री)- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय 23. अरविंद सावंत (कैबिनेट मंत्री)- भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय 24. गिरिराज सिंह (कैबिनेट मंत्री)- पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय 25. गजेंद्र सिंह शेखावत (कैबिनेट मंत्री)- जल शक्ति मंत्रालय 26. संतोष गंगवार (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय 27. राव इंद्रजीत सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन और नियोजन मंत्रालय 28. श्रीपद नाईक (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा मंत्रालय (राज्य मंत्री) 29. जितेंद्र सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- पूर्वोत्तर विकास (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय (राज्य मंत्री) 30. किरण रिजिजू (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- युवा मामले एवं खेल (स्वतंत्र प्रभार), अल्पसंख्यक मामले (राज्य मंत्री) 31. प्रह्लाद सिंह पटेल (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) 32. आरके सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)- बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता (राज्य मंत्री) 33. हरदीप सिंह पुरी (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (राज्य मंत्री) 34. मनसुख मंडाविया (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) जहाजरानी (स्वतंत्र प्रभार), रसायन एवं उर्वरक (राज्य मंत्री) 35. फग्गन सिंह कुलस्ते (राज्य मंत्री) इस्पात राज्य मंत्री 36. अश्विनी चौबे (राज्य मंत्री) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री 37. जनरल (रिटायर) वीके सिंह (राज्य मंत्री) सड़क, परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री 38. कृष्ण पाल गुज्जर (राज्य मंत्री) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री 39. दानवे रावसाहेब दादाराव (राज्य मंत्री) उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री 40. जी. किशन रेड्डी (राज्य मंत्री) गृह राज्य मंत्री 41. पुरुषोत्तम रुपाला (राज्य मंत्री) कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री 42. रामदास अठावले (राज्य मंत्री) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री 43. साध्वी निरंजन ज्योति (राज्य मंत्री) ग्रामीण विकास राज्य मंत्री 44. बाबुल सुप्रियो (राज्य मंत्री) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री 45. संजीव कुमार बलियान (राज्य मंत्री) पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री 46. धोत्रे संजय शमराव (राज्य मंत्री) मानव संसाधन विकास, संचार और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री 47. अनुराग सिंह ठाकुर (राज्य मंत्री) वित्त और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री 48. सुरेश अंगादि (राज्य मंत्री) रेल राज्य मंत्री 49. नित्यानंद राय (राज्य मंत्री) गृह राज्य मंत्री 50. वी मुरलीधरन (राज्य मंत्री) विदेश, संसदीय कार्य राज्य मंत्री 51. रेणुका सिंह (राज्य मंत्री) आदिवासी मामलों की राज्य मंत्री 52. सोम प्रकाश (राज्य मंत्री) वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री 53. रामेश्वर तेली (राज्य मंत्री) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री 54. प्रताप चंद्र सारंगी (राज्य मंत्री) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री 55. कैलाश चौधरी (राज्य मंत्री) कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री 56. देबाश्री चौधरी (राज्य मंत्री) महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री 57. अर्जुन राम मेघवाल (राज्य मंत्री) संसदीय कार्य, भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री 58. रतन लाल कटारिया (राज्य मंत्री) जलशक्ति और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री