मायावती ने किया BSP संसदीय दल का गठन, इन नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी

दिल्ली में बसपा अध्यक्ष मायावती की अध्यक्षता में हुई संसदीय दल की बैठक में सांसदों को जिम्मेदारी सौंपी गई. नगीना संसदीय क्षेत्र से जीते सांसद गिरीश चंद्र को बहुजन समाज पार्टी संसदीय दल का नेता चुना गया है जबकि जौनपुर के सांसद श्याम सिंह यादव उपनेता होंगे. बसपा के दस सांसद विजयी हुए थे. जनता दल (सेक्युलर) से आए और अमरोहा सीट से सांसद निर्वाचित हुए कुंवर दानिश अली को मुख्य सचेतक का दायित्व सौंप मायावती ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है. संसदीय दल के नवनियुक्त नेता गिरीश वर्ष 2007-12 में विधायक भी रहे हैं. मायावती के भरोसेमंद रहे गिरीश चंद मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर व मेरठ मंडल में संगठन की विभिन्न जिम्मेदारी भी संभाल चुके है.

वर्ष 2014 में लोक सभा का चुनाव हार चुके गिरीश ने इस बार नगीना सुरक्षित सीट से भाजपा के डा. यशवंत सिंह को 1.67 लाख वोटों से हराया है. इस सीट पर मायावती के चुनाव लडऩे की चर्चा भी चली लेकिन बसपा प्रमुख ने ऐन वक्त पर गिरीश को उम्मीदवार घोषित करके सबको चौंका दिया था. वहीं उपनेता बने श्याम सिंह यादव सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी व यूपी रायफल एसोसिएशन के चेयरमैन भी हैं. मुख्य सचेतक बने दानिश अली के दादा कुंवर महमूद अली वर्ष 1962 में विधायक और वर्ष 1977 में हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे.

मायावती ने शुरू की नतीजों की समीक्षा

संसदीय दल के गठन के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की राज्यवार समीक्षा भी शुरू कर दी. सूत्रों के मुताबिक सोमवार को दिल्ली में बसपा प्रमुख ने दिल्ली व उत्तराखंड राज्य में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की. मंगलवार को मायावती महाराष्ट्र व कर्नाटक में पार्टी की स्थिति की समीक्षा करेंगी. गौरतलब है कि बसपा ने ज्यादातर राज्यों में प्रत्याशी उतारे थे लेकिन उसे उत्तर प्रदेश की मात्र 10 सीटों पर ही सफलता मिली है.

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अपने बच्चों को जातिवाद से लड़ने की ट्रेनिंग जरूर दीजिए

पायल अपने परिवार की पहली डाक्टर थी. वो जिंदा रहती तो अपने खानदार और रिश्तेदारों में न जाने कितनों को डाक्टर बनने के लिए प्रेरित करती. और अपनी पायल दीदी, पायल बुआ और पायल मौसी को डाक्टर बने देख तमाम बच्चे उसके जैसा बनना चाहते. पायल की मौत अकेले उसकी नहीं है. पायल की मौत दलित-आदिवासी परिवार के सैकड़ों बच्चों के सपनों की मौत है.

पायल की मौत का कारण बनी शैतान लड़कियों, तुमने अकेले हमारी पायल को रस्सी पर लटकने को मजबूर नहीं किया, बल्कि हमारे समाज के सैकड़ों बच्चों के सपनों को लटका डाला है. पायल, तुम्हें भी गले में रस्सी डालकर लटकने से पहले सोचना चाहिए था. तुम अकेले नहीं मरी हो. तुम्हें लड़ना चाहिए था. एक के बदले तीन कहना चाहिए था.

पायल की मौत दलित-आदिवासी समाज को एक बड़ा संदेश भी दे गई है. ठीक है कि आप अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवा रहे हैं. उन्हें डाक्टर, इंजीनियर और बड़े-बड़े पदों पर पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. लेकिन आप इन तमाम बातों के बीच अपने बच्चों को जातिवाद से लड़ना भी जरूर सिखाएं. जब आपका बच्चा 9वीं में पहुंच जाए, उसको बैठा कर एक बार कास्ट सिस्टम के बारे में जरूर बताएं. आने वाले दिनों में उसके सामने जाति से जुड़े कैसे सवाल आएंगे, इसके बारे में भी जरूर बताएं. उन्हें यह भी बताएं कि वो इन सवालों से कैसे लड़ें. उन्हें यह भी भरोसा दीजिए कि वह इस सवाल के सामने आने पर तुरंत आपसे बात करें. यह बहुत जरूरी है. क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हो सकता है कि आपका बच्चा भी पायल और रोहित वेमुला बन जाए.

अब बहुत हो चुका. हमें और रोहित वेमुला और पायल नहीं चाहिए. अपने बच्चों को मजबूत बनाइए. तभी वो आपके सपनों को पूरा करेंगे. जातिवाद को नकारा नहीं जा सकता. वह कब आपके बच्चों के सामने आ जाए और उन्हें लील जाए, कहा नहीं जा सकता. इसलिए अपने बच्चों को मजबूत बनाइए, उन्हें लड़ना सिखाइए. जाति को छुपाने से काम नहीं चलेगा, उससे लड़ना होगा. इसीलिए मैं बहुजनों के अलग शैक्षिक संस्थानों की वकालत करता हूं. ताकि हमारे बच्चे जातीय दुराग्रहों को लेकर इतने मजबूत बन जाएं कि ब्राह्मणवाद और मनुवाद के हर सवाल से टकरा सके.

पायल और रोहित वेमुला जैसे अन्य बिटिया रानी, बहनों और बच्चों, हम तुम्हे पहली तस्वीर जैसा देखना चाहते हैं. ठसक के साथ गले में आला लगाए बड़ी कुर्सी पर बैठे हुए, या फिर विज्ञान पर लिखने वाला कार्ल सगान जैसा बनते हुए. हम तुम्हें तस्वीरों में नहीं देखना चाहते, खासतौर पर ऐसी तस्वीरों में जिस पर माला चढ़ी हो, और सामने मोमबत्तियां जल रही हो.

डॉक्टर पायल तडवी आत्महत्या मामले में सभी 3 आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार

ऐसी थी पायल

मुंबई में पायल तडवी आत्महत्या मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तार आरोपियों का नाम अंकिता लोखंडवाला, हेमा आहुजा और भक्ति मेहर है. हेमा आहुजा को मंगलवार रात को गिरफ्तार किया गया वहीं भक्ति मेहर को भी मुंबई सेशन कोर्ट से मंगलवार की शाम में गिरफ्तार किया गया. एक अन्य आरोपी अंकिता खंडेलवाल को मुंबई पुलिस ने बुधवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है.

पायल अपने परिवार की पहली डॉक्टर है
पायल अपने परिवार की पहली डॉक्टर थी

पायल तडवी ने कथित तौर पर अपनी वरिष्ठ सहकर्मियों द्वारा रैगिंग और जातीय टिप्पणी किए जाने से परेशान होकर 22 मई को खुदकुशी कर ली थी. डॉक्टर पायल तडवी की आत्महत्या के बाद से ही आरोपी फरार चल रही थीं. पायल ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसके सामने आने के बाद घटना की वजह पता चली. पायल तडवी के परिवार वालों का भी आरोप है कि तीनों महिला डॉक्टरों ने उनके अनुसूचित जनजाति का होने को लेकर ताने कसते थे और मानसिक रूप से प्रताणित करते थे. यहां तक की उसे ‘आदिवासी’ कह कर सवाल उठाते थे. पायल तडवी मुंबई के बीवाईएल नायर हॉस्पिटल में एमडी सेंकड ईयर की छात्रा थीं.

डॉक्टर पायल का एडमिशन आरक्षित कोटे से हुआ था. इसी बात का जिक्र कर पायल के सीनियर उन्हें प्रताड़ित करते थे. छात्रा के परिवार वालों ने इस बात की शिकायत हॉस्टल वार्डन से भी की थी. वॉर्डन ने तीनों को बुलाकर समझाया भी था कि इस तरह की मानसिक प्रताड़ना से बाज आएं लेकिन सीनियर माने नहीं.

अंकिता लोखंडवाला, हेमा आहुजा और भक्ति मेहर, यही वो तीन शैतान लड़कियां हैं, जिसकी वजह से पायल ने खुदकुशी कर ली
अंकिता लोखंडवाला, हेमा आहुजा और भक्ति मेहर, यही वो तीन शैतान लड़कियां हैं, जिसकी वजह से पायल ने खुदकुशी कर ली

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है और अस्पताल को नोटिस जारी किया है. गिरफ्तारी से पहले डॉ. तडवी के के माता-पिता ने मंगलवार को मुंबई में उस सरकारी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां वह काम करती थीं. अन्य प्रदर्शनकारी भी तडवी की मां आबिदा और पति सलमान के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए और तीन वरिष्ठों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जिन्होंने कथित तौर पर रैगिंग और जातीय टिप्पणियां कर उन्हें प्रताड़ित किया और यह कदम उठाने के लिए बाध्य किया.

राहुल गांधी ने किया कांग्रेस नेताओं से किनारा

File Photo

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी की हार से परेशान चल रहे राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने का मन बना लिया है. खबर है कि पार्टी और परिवार के तमाम लोगों के समझाने के बावजूद भी राहुल गांधी मानने को तैयार नहीं हैं. हां, उन्होंने यह जरूर कह दिया है कि जब तक विकल्प नहीं मिलता वो पद पर बने रहेंगे. हालांकि शशि थरूर सहित तमाम कांग्रेस नेताओं ने उन्हें पद पर बने रहने को कहा है और साथ ही यह भी कहा है कि राहुल गांधी का विकल्प मिलना मुश्किल है.

इस बीच राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के ही तमाम नेताओं से दूरी बना ली है. उनसे मिलने के लिए उनके आवास पर तमाम नेता पहुंच रहे हैं लेकिन राहुल गांधी किसी से नहीं मिल रहे हैं. यहां तक कि राहुल गांधी ने मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से भी मुलाकात नहीं की, वो भी सिर्फ प्रियंका गांधी से ही मिल पाए.

चुनाव के बाद से ही कांग्रेस में नेतृत्व का संकट पैदा हुआ है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार होने के बावजूद खराब प्रदर्शन से राहुल खासा नाराज थे. उन्होंने कई सीनियर लीडर पर ये कहकर निशाना साधा था कि कुछ नेताओं ने सिर्फ अपने बेटों को तवज्जो दी. दरअसल राहुल गांधी का इशारा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर था.

अजय देवगण के पिता वीरु देवगण को अमिताभ ने यूं किया याद

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विगत 27 मई को ह‍िन्दी स‍िनेमा के जाने-माने एक्शन हीरो (एक्शन कोरियोग्राफर) और अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का निधन हो गया. वीरू देवगण के निधन पर तमाम फिल्मी हस्तियों ने अजय देवगण के घर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. वीरू देवगन के अंत‍िम संस्कार में ऐश्वर्या राय, अभ‍िषेक बच्चन, शाहरुख खान, सनी देओल समेत तमाम स‍ितारे पहुंचे. इस दौरान बॉलीवुड के जीवित कवदंती बन चुके अमिताभ बच्चन भी पहुंचे. अमिताभ वीरू देवगण के काफी करीब रहे हैं.

उनकी मौत की खबर सुनकर अमिताभ बच्चन को जबरदस्त झटका लगा. अपने दोस्त को खो देने का गम ब‍िग बी ने एक ब्लॉग में ल‍िखा है.अमिताभ बच्चन, वीरू देवगन के अंत‍िम संस्कार में अपनी फिल्म की शूट‍िंग छोड़कर पहुंचे थे. अपने दोस्त वीरू देवगन की मौत से दुखी अमिताभ ने बेहद इमोशनल नोट लिखा है.

अमिताभ ने आगे वीरू देवगन संग अपनी पहली मुलाकात और काम के अनुभव के बारे में बताया. अमिताभ ने ल‍िखा, “मैं उनसे पहली बार राजस्थान के एक छोटे से गांव पोशीना में मिला था. मुझे याद है मेरी फिल्म रेशमा और शेरा की. जब खन्ना साहेब (वीरू देवगन) डमी के साथ एक्शन सीन का र‍िहर्सल कर रहे थे. सीन में सुनील दत्त साहब फिल्म के लीड हीरो थे, ज‍िन्हें गांव के न‍िगेट‍िव किरदार से प‍िटना था. वो लीड‍िंग मैन की तरह सीन को कर रहे थे. “

फूल और कांटे के दौरान अपने पिता वीरू देवगण के साथ अजय देवगण (फाइल फोटो)

सीन के बारे में ड‍िटेल जानकारी देते हुए अमिताभ ने ल‍िखा, “मुझे अच्छी तरह याद है. रेत में शूटिंग के दौरान खन्ना साहब कितने दर्द में शूट‍िंग कर रहे थे. उनके चेहरे का वो दर्द याद है, लेकिन वो लगातर डमी के साथ सीन र‍िहर्सल पूरे परफेक्शन के साथ कर रहे थे.”

अमिताभ बच्चन ने ल‍िखा, “फिर एक द‍िन हमने उन्हें (वीरू देवगन) खो द‍िया… वीरू देवगन बहुत ही शानदार एक्शन डायरेक्टर रहे. ज‍िन्होंने एक्शन में नए नए तरह का इनोवेशन किया. स‍िर्फ नए तरीके से करने के साथ उसे परफेक्शन के साथ पूरा किया.”

अमिताभ के मुताबिक, वीरू देवगन ने दूसरे स्टंटमैन के लिए नौकरी के रास्ते खोले. क‍ितने ऐसे स्टंटमैन है जो आज डायरेक्टर प्रोड्यूसर बन गए हैं. वीरू जी खुद भी प्रोड्यूसर और डायरेक्टर बने.अमिताभ के मुताबिक वीरू जी ने इंडस्ट्री को ग्रूम किया, नया परफेक्शन द‍िया. उनका सबसे फाइन टैलेंट है- अजय देवगन. हमने कई फिल्मों में साथ काम किया. मेरी ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने एक्शन सीन किए. वीरू पंजाब से थे, सेट पर मेरा वेलकम भी वो उसी अंदाज में करते थे. मुझे अम‍िताभ सिंघया कहकर बुलाते थे. अमिताभ ने लिखा, “वीरू की मौत मेरे ल‍िए एक सदमे की तरह है. जब मुझे ये खबर मिली, उस वक्त चेहरे की शूटिंग कर रहा था. मैंने काम रोक द‍िया. पूरी टीम ने उनके सम्मान के लिए दो मिनट का मौन रखा. काम खत्म होने के बाद उनके अंत‍िम संस्कार में गया. वहां पहुंचकर सारी चीजें घूमने लगीं, कैसे वो काम करते थे. वक्त कैसे बीत जाता है… जो कभी वापस नहीं आता. बस रह जाती हैं यादें.

महाराष्ट्रः बहुजन राजनीति का नया केंद्र

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद जो लोग उत्तर प्रदेश और बिहार में बहुजन राजनीति के सफल नहीं होने से परेशान हैं, उनके लिए जोतिबा फुले, बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर, शाहूजी महाराज और गाडगे महाराज जैसे महान समाज सुधारकों की धरती से अच्छी खबर है। यह खबर आई है बाबासाहेब के पौत्र एडवोकेट प्रकाश आम्बेडकर के जरिए। दरअसल महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रकाश आम्बेडकर और एमआईएम के नेता असुद्दीन ओवैसी ने मिलकर चुनाव लड़ा और लोकसभा चुनाव के जो नतीजे आए हैं वो बहुजन राजनीति के समर्थकों के लिए चौंकाने वाले हैं। दरअसल प्रकाश आम्बेडकर की भरिप बहुजन महासंघ और ओवैसी की पार्टी AIMIM के अलावा JDS जैसे छोटे दलों को मिलाकर वंचित बहुजन अघाड़ी बनाया गया। प्रकाश आंबेडकर ने एमआईएम के असुद्दीन ओवैसी से हाथ मिला कर दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश की और नतीजे बता रहे हैं कि ऐसा हुआ है।

वंचित बहुजन अघाड़ी ने सभी 48 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा। उसे 42 लाख से अधिक वोट मिले हैं, जबकि वोट प्रतिशत 6.5 रहा। लोकसभा चुनाव परिणामों में अघाड़ी तीसरे मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। इस अघाड़ी को प्रकाश आम्बेडकर ने ओवैसी के साथ मिलकर एक साल पहले बनाया था। इन्होंने मिलकर महाराष्ट्र में दलितों में मुख्यतः बौद्ध समाज के साथ ही मातंग, चमार, पिछड़ी जातियां जैसे धनगर, माली, वडार, कैकाली, बंजारी, धुमंतू जातिया, धीवर, वंजारी और मुसलिम समाज को प्रकाश आम्बेडकर ने एकता के सूत्र में बांधा है।

प्रकाश आम्बेडकर और ओवैसी (फाइल फोटो)

इस गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में सबसे पिछड़े जाति- समूहों को मैदान में उतारकर सामाजिक इंजीनियरिंग का आगाज किया। इस अघाड़ी ने जिन 48 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, उनमें धनगर समाज के सात, माली समाज के दो, वंजारी समाज के एक, मुस्लिम समाज से पांच, बौद्ध समाज से 9 उम्मीदवार को उतारा. इसके अलावा मातंग, चमार, वडार, कैकाडी, तैलिक, विश्वकर्मा, धीवर जातियों को भी मौका दिया। इसके अलावा सामाजिक समीकरण बनाए रखने के लिए आघाड़ी ने मराठा, कुणबी और भूमिहार जाति के उम्मीदवारों को भी मौका दिया।

अघाड़ी का प्रदर्शन भी शानदार रहा। इस अघाड़ी ने कई दिग्गज नताओं को धूल चटाया। इसमें पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, पूर्व गृह राज्य मंत्री हंसराज अहिर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का नाम शामिल है। प्रकाश आम्बडेकर ने खुद अकोला और सोलापुर दो जगहों से चुनाव लड़ा। सोलापुर में आंबेडकर सुशील कुमार शिंदे के सामने थे। यहां प्रकाश आम्बेडकर को 1,70,007 वोट मिला। दोनों की लड़ाई में यहां से भाजपा उम्मीदवार ने चुनाव जीता। तो अकोला सीट पर भी प्रकाश आम्बेडकर को 2,78,848 वोट मिले। हालांकि यहां से भी वो जीत नहीं सके और भाजपा उम्मीदवार संजय धोत्रे एक बार फिर जीतने में सफल रहें।

नांदेड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण की हार में भी वंचित बहुजन आघाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। नांदेड़ में अशोक चव्हाण 40 हजार से ज्यादा मतों से भाजपा से हारे, यहां पर बहुजन वंचित आघाड़ी के प्रत्याशी यशपाल भिंगे को एक लाख 66 हजार वोट मिले। वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवारों के कारण भाजपा-शिवसेना गठबंधन के उम्मीदवार केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर चंद्रपूर में कांग्रेस उम्मीदवार से हार गये। जीत की बात करें तो वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार इम्तियाज जलील ने औरंगाबाद में शिवसेना के दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद चंद्रकांत खैरे को करीबी मुकाबले में तकरीबन 4500 वोटों से हराकर हलचल मचा दी। खैरे को 3,84,550 वोट मिले, जबकि अघाड़ी के बैनर पर चुनाव लड़ रहे AIMIM के उम्मीदवार जलील ने 3,89,042 वोट हासिल कर शिवसेना को बड़ा झटका दे दिया।

महाराष्ट्र के तकरीबन दर्जन भर लोकसभा चुनाव क्षेत्रों में वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार एक लाख से तीन लाख तक वोट हासिल करने में कामयाब रहें। अगाड़ी के उम्मीदवारों को सांगली में तीन लाख से ज्यादा, अकोला में पौने तीन लाख, इसके अलावा हिंगोली और बुलडाणा में पौने दो लाख, हातकणंगले, चंद्रपूर, लातूर और गढ़चिरौली में सवा लाख, नांदेड़, सोलापुर और परभणी में डेढ़ लाख से ज्यादा जबकि नासिक में एक लाख से ज्यादा वोट मिले। तो वंचित बहुजन आघाड़ी लोकसभा के दस क्षेत्रों में तीसरे स्थान पर रहा।

बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो 2019 चुनाव में बसपा ने 44 स्थानों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। उन्हें कुल मतों का एक प्रतिशत भी हासिल नहीं हुआ है। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को मात्र 0.86 प्रतिशत वोट ही मिल पाए हैं। यह प्रदेश में नोटा के तहत पड़े 0.90 प्रतिशत से भी कम है। साफ है कि बसपा की यह स्थिति दलित-बहुजन मतदाता वर्ग के वंचित बहुजन आघाड़ी की तरफ खिसक जाने से हुयी है। महाराष्ट्र में वंचित समाज के तमाम राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतरते हैं। हालांकि इस चुनाव में सबके सब वंचित बहुजन अघाड़ी के सामने धाराशायी हो गए।

महाराष्ट्र में वंचित तबके के तमाम राजनैतिक दल चुनाव मैदान में उतरते हैं। चुनाव लड़ने वालों में बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष सुरेश माने को नागपुर लोकसभा क्षेत्र में मात्र 3412 वोट मिले। इसके अलावा आरपीआई का अठावले गुट हो या फिर गवई एवं अन्य गुट कोई भाजपा-शिवसेना के साथ लगा रहा तो कोई कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन के साथ लेकिन किसी ने इनकी पार्टी को चुनाव में कोई सीट नहीं दी।

महाराष्ट्र में वंचित, बहुजन, दलित, अति पिछड़े, घुमंतू जाति के साथ मुस्लिमों का गठजोड़ बहुजन वंचित आघाड़ी के रूप में आकार ले रहा है। लोकसभा चुनाव में मिले जनसमर्थन से उत्साहित वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश आम्बेडकर और ओवैसी अक्टूबर महीने में होने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इससे राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों में खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि जिस तरह प्रदेश में वंचित बहुजन अघाड़ी का उभार हुआ है, विधानसभा चुनाव तक वह एक सशक्त विकल्प के रूप में सामने आएगा। बशर्त, यह गठजोड़ अधिक संगठित होकर तथा एकता कायम रखकर मैदान में उतरे, अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र में वंचित बहुजनों का राजनैतिक भविष्य आने वाले दिनों में उज्जवल हो सकता है। और अगर वंचित तबके के सभी दल वंचित बहुजन अघाड़ी के बैनर तले इकट्ठे हो गए तो बहुजन नायकों की धरती पर बहुजनों के जीत की पताका फहराने में देर नहीं लगेगी।

महाराष्ट्रः वंचित बहुजन अघाड़ी ने रोक दिया कांग्रेस का रास्ता

प्रकाश आम्बेडकर और ओवैसी (फाइल फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते थे कि महाराष्ट्र में उनकी पार्टी का गठबंधन दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की पार्टी के साथ हो जाए, लेकिन कांग्रेस की लेटलतीफी और आंबेडकर की बड़ी मांगों के सामने न झुकने की नीति ने उसे काफी नुकसान पहुंचाया. आंबेडकर और असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन ने राज्य में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को करीब 15 सीटों पर भारी नुकसान पहुंचाया.

प्रकाश आंबेडकर ने हैदराबाद के नेता असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर वंचित बहुजन आघाड़ी का गठन किया और राज्य की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए. यह गठबंधन पूरी मजबूती से लड़ा और 40 लाख से ज्यादा वोट खींच ले गया जिसके कारण कांग्रेस को करीब छह, राकांपा को दो और उनके सहयोगी दल स्वाभिमानी शेतकरी संगठन को दो सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा.

वंचित बहुजन आघाड़ी का नुकसान औरंगाबाद में शिवसेना को भी उठाना पड़ा, जहां उसके दिग्गज नेता चंद्रकांत खैरे चुनाव हार गए और वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार एमआइएम विधायक इम्तियाज जलील 3,89,042 मत पाकर जीत गए. इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार चौथे स्थान पर जा पहुंचा. आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी को करीब आधा दर्जन सीटों पर डेढ़ लाख से ज्यादा और लगभग इतनी सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट मिले. 50 हजार से अधिक मत तो उसे कई सीटों पर हासिल हुए. आंबेडकर खुद सोलापुर और अकोला दो सीटों से चुनाव लड़े थे.

सोलापुर में कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की हार का कारण आंबेडकर को 1,70,007 वोट मिलना रहा . यहां जीत हुई भाजपा उम्मीदवार डॉ. जय सिद्धेश्र्वर महास्वामी की. अकोला सीट पर भी प्रकाश को 2,78,848 वोट मिले. यहां वह भाजपा उम्मीदवार संजय धोत्रे की जीत में मददगार साबित हुए. नांदेड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण की हार में भी वंचित बहुजन आघाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण रही.

माना जा रहा है कि आंबेडकर ने लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाकर कुछ ही महीनों बाद होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए अपनी जमीन तैयार कर ली है. अब कांग्रेस-राकांपा को विधानसभा चुनाव के लिए अपना नया गठबंधन बनाते समय कई बार सोचना पड़ेगा. हालांकि आंबेडकर की मांग बड़ी होती है.

लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस से जितनी सीटों की मांग की थी, उतनी देकर तो कांग्रेस-राकांपा के लिए भी कुछ नहीं बचता, लेकिन आंबेडकर को गठबंधन से बाहर रखकर विधानसभा चुनाव लड़ना इन दलों को और भारी पड़ सकता है. माना जा रहा है कि कांग्रेस-राकांपा इस बार आंबेडकर के सारे नखरे उठाने को तैयार रहेगी.

कुछ इस तरह दिख सकता है मोदी का नया कैबिनेट

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फाइल फोटो

प्रचंड बहुमत के साथ जीतकर दुबारा देश की सत्ता पर कब्जा जमाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब अपना कैबिनेट बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं. इस कैबिनेट में जहां भाजपा के प्रमुख चेहरे बने रहेंगे तो वहीं सहयोगियों को भी जगह मिेलेगी. इन दलों में जनता दल (यूनाइटेड), अन्नाद्रमुक को भी जगह मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन के कारण इन दोनों राज्यों के पार्टी नेताओं को भी मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है. पीएम मोदी 30 मई को नए कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे. इसके बाद मंत्रिमंडल का खाका भी लोगों के सामने आ सकता है.

नए मंत्रिमंडल में राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर और प्रकाश जावड़ेकर जैसे पुराने चेहरे बने रह सकते हैं. ऐसी अटकलें हैं कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी नई सरकार में मंत्री पद संभाल सकते हैं. हालांकि, शाह ने इस मुद्दे पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपा) के प्रमुख राम विलास पासवान ने अपने सांसद पुत्र चिराग पासवान को मंत्री बनाने की वकालत की है. लोजपा ने 6 लोकसभा सीटें जीती हैं. पासवान पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं.

बीजेपी ने इन चुनावों में पश्चिम बंगाल में 18 और तेलंगाना में चार सीटें जीती हैं. इसके कारण पार्टी नई सरकार में दोनों राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व दे सकती है. इसके अलावा जिन राज्यों में आने वाले वक्त में चुनाव है जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे राज्यों के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में प्रमुखता से जगह मिल सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ऐसी अटकलें हैं कि पिछली सरकार में वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली स्वास्थ्य कारणों से मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होंगे. लेकिन जेटली के करीबी लोगों का कहना है कि इलाज के बाद उनकी तबीयत ठीक है. सरकार ने रविवार को दखल देकर इस बात पर जोर दिया कि उनकी सेहत से जुड़ी खबरें गलत और बेबुनियाद हैं. भारत सरकार के प्रधान प्रवक्ता सितांशु रंजन कार ने ट्वीट किया, ‘केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में मीडिया के एक हिस्से में आई खबरें गलत और बेबुनियाद है. मीडिया को सलाह दी जाती है कि अफवाह फैलाने से परहेज करें.’

भाजपा की प्रचंड जीत से गदगद संघ प्रमुख बोले, ‘अब राम का काम होकर रहेगा’

mohan bhagwat
मोहन भागवत (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत से गदगद हैं. मोहन भागवत का कहना है कि ‘अब राम का काम हो कर रहेगा.’ राजस्थान के उदयपुर पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को बड़गांव इलाके में प्रताप गौरव केंद्र में नवनिर्मित भक्तिधाम प्राणप्रतिष्ठा और जन समर्पण कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने यह बात कही.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि इतिहास कहता है कि जिस देश के लोग सजग, शीलवान, सक्रिय और बलवान हों, उस देश का भाग्य निरंतर आगे बढ़ता है. संघ प्रमुख ने कहा कि हमेश चर्चा होती है कि भारत विश्वशक्ति बनेगा लेकिन उससे पहले हमारे पास एक डर का एक डंडा अवश्य होना चाहिए, तभी दुनिया मानेगी. मोहन भागवत ने मोरारी बापू के संबोधन को याद दिलाते हुए कहा कि राम का काम सभी को करना है और राम का काम होकर रहेगा.

गौरतलब है कि मार्च महीने में ग्वालियर में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन विदसीय बैठक हुई थी जिसमें राम मंदिर निर्माण का मार्ग जल्द प्रशस्त किए जाने पर जोर दिया गया था. प्रतिनिधि सभा की बैठक के पहले दिन वक्ताओं ने राम मंदिर निर्माण की पैरवी करते हुए सभी बाधाओं को दूर किए जाने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया.

इन दिग्गजों पर हार का खतरा, दर्जन भर पूर्व मुख्यमंत्री और एक पूर्व प्रधानमंत्री शामिल

नई दिल्ली। चुनावों की गिनती के राउंड जैसे-जैसे बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे तमाम दिग्गज नेताओं पर भी हार का खतरा मंडराने लगा है. जो स्थिति बन रही है, उसमें ऐसे तमाम दिग्गज इस बार लोकसभा में पहुंचते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ये दिग्गज पक्ष में रहें या विपक्ष में, इन्होंने संसद में होने वाली तमाम चर्चाओं में हिस्सा लेते हुए अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है. आइए नजर डालते हैं कि इस बार किस-किस नेता पर हार का संकट मंडराया है.

16वीं लोकसभा के बाद संसद में कांग्रेस की ओर से प्रमुख नेता के तौर पर मौजूद और दिग्गज कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पर हार का संकट दिख रहा है. खड़गे कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. इसके अलावा पटनासाहिब से शत्रुध्न सिन्हा पीछे हैं. सिन्हा को रविशंकर प्रसाद काफी आगे चल रहे हैं. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार बिहार के सासाराम से पीछे चल रहे हैं. मध्यप्रदेश के गुणा सीट से कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पीछे चल रहे हैं. सिंधिया भाजपा के केपी यादव से पीछे हैं.

भोपाल से चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह भी इस बार संसद में पहुंचते नहीं दिख रहे हैं. उन्हें भाजपा की साध्वी प्रज्ञा से हार मिलती दिख रही है. मुजफ्फरनगर से राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह भी पीछे चल रहे हैं. तो बागपत सीट से उनके बेटे जयंत चौधरी पीछे चल रहे हैं

कर्नाटक के तुमकुर सीट से पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा पीछे चल रहे हैं. तो बिहार की गया सीट से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी हारते दिख रहे हैं. बिहार के मधेपुरा सीट से शरद यादव हार रहे हैं तो प्रदेश के उजियारपुर से रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पीछे चल रहे हैं. महाराष्ट्र की बात करें तो यहां के नांदेड़ सीट से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहान पीछे चल रहे हैं. झारखंड के दुमका सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के सीबू सोरेन चुनाव में पीछे हैं.

सबसे खास बात यह है कि रुझानों में दर्जन भर पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव हारते दिख रहे हैं. इनमें अकेले कांग्रेस के नौ मुख्यमंत्री शामिल हैं. कांग्रेस के जो पूर्व मुख्यमंत्री पीछे चल रहे हैं या हारने की स्थिति में हैं, उनमें मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण, दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित, उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा आदि का नाम शामिल है.

भाजपा की एतिहासिक जीत, कांग्रेस देश भर में धाराशायी

नई दिल्ली। 17वीं लोकसभा में भाजपा को प्रचंड जीत मिली है. भाजपा अकेले बूते सरकार बना रही है. मोदी के नेतृत्व, नाम और चेहरे पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा इस बार के चुनाव में 2014 से भी बेहतर प्रदर्शन किया. भाजपा ने अकेले 302 सीटें जीती है. तो वहीं एनडीए साढ़े तीन सौ के पार पहुंच गया है. कांग्रेस पार्टी देश भर में धाराशायी हो गई है उसे सिर्फ 54 सीटें मिली है, जो 2014 से सिर्फ आठ सीटें ज्यादा है.

अन्य पार्टियों की बात करें तो सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, एआईडीएमके सहित तमाम राज्यों की क्षेत्रिय पार्टियां हैं तो उनके हिस्से में तकरीबन 100 सीटें आती दिख रही हैं.

सुबह रुझान आने के साथ ही भाजपा ने शुरुआत से ही बढ़त बनानी शुरू कर दी थी. दोपहर होते-होते यह साफ हो गया कि कांग्रेस और गठबंधन भाजपा को रोकने में कामयाब नहीं हो सका है. गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में कांग्रेस या तो कोई सीट नहीं जीत सकी है या फिर महज दो से तीन सीटों पर ही लीड लेती दिखाई दे रही है.

उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां गठबंधन के समर्थकों को 50 से 60 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन अभी तक के रुझान के मुताबिक गठबंधन 25 सीटों तक सिमटता दिख रहा है. बिहार में विपक्षी गठबंधन पूरी तरह फेल हो गया है. यहां विपक्ष को सिर्फ 2 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है.

 

भाजपा सांसद ने की चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर विविदित टिपप्णी!

नई दिल्ली। एग्जिट पोल्स में पिछड़ने के बाद से ही लोकसभा चुनाव के लिए आशंकित विपक्ष ईवीएम पर सवाल उठा रहा है. अब इस विवाद में भाजपा से सांसद रहे और हाल ही में कांग्रेस ज्वाइन करने वाले नेता उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट लिया है. हाल ही में बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए उदित राज ने शीर्ष अदालत पर विवादित टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया है. अपनी टिप्पणी में उदित राज ने कहा है- ‘सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं चाहता की वीवीपैट की सारी पर्चियों को गिना जाए. क्या वह भी धांधली में शामिल है. चुनावी प्रक्रिया में जब लगभग तीन महीने से सारा सरकारी काम मंद पड़ा हुआ है तो गिनती में दो-तीन दिन लग जाएं तो क्या फर्क पड़ता है.

उदित राज ने इस ट्वीट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी को भी टैग किया है. उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट के साथ ही चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बिक चुका है. आयोग पर ट्वीट करते हुए उदित राज ने लिखा, ‘बीजेपी को जहां-जहां ईवीएम बदलनी थी, बदल ली होगी. इसीलिए तो चुनाव 7 चरणों मे कराया गया. आप की कोई नहीं सुनेगा चिल्लाते रहिए, लिखने से कुछ नहीं होगा, रोड पर आना पड़ेगा. अगर देश को इन अंग्रेजों के गुलामों से बचाना है तो आंदोलन करना पड़ेगा साहब चुनाव आयोग बिक चुका है.’

सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद 21 विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग से 100 ईवीएम से वीवीपैट के मिलान की मांग को लेकर मिले थे. इसके अलावा कई जगहों पर ईवीएम की सुरक्षा का सवाल उठाया गया था. इस पर आयोग ने नेताओं से अपील की थी कि वे ईवीएम को लेकर भरोसे में रहें और मशीनें पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

सामने आया नया एग्जिट पोल, भाजपा को लग सकता है झटका

नई दिल्ली। एग्जिट पोल के अनुमानों को लेकर बीजेपी में जश्न का माहौल है. विपक्ष हालांकि अनुमानों को लेकर सहमा हुआ है लेकिन उसको यकीन है कि नतीजे एग्जिट पोल से अलग होंगे. इस बीच कांग्रेस पार्टी का अपना एग्जिट पोल भी सामने आ गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस एग्जिट पोल में भाजपा के 200 से कम सीटों पर सिमटने की बात कही जा रही है, जबकि एनडीए 230 सीटों पर रुक जाएगा. इस एग्जिट पोल में कांग्रेस को 140 सीटें मिलने का अनुमान बताया जा रहा है जबकि यूपीए 195 से अधिक सीटें जीत रहा है.

कांग्रेस ने यह आंकड़े देश के अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में मौजूद अपने 260 पर्यवेक्षकों, राज्य के प्रभारियों और स्थानीय नेताओं से इकट्ठा किए हैं. कांग्रेस को दक्षिण भारत से अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है, जबकि उत्तर भारत में उसे पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन करने का अनुमान है.

पार्टी के इस आंतरिक सर्वे के हिसाब से कांग्रेस को उम्मीद है कि यूपीए तमिलनाडु, केरल और पंजाब में अच्छा प्रदर्शन करेगी. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी को महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और हरियाणा में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. कांग्रेस का मानना है कि यूपीए बिहार में 15, गुजरात में 7, तमिलनाडु में 34, केरल में 15, महाराष्ट्र में 22-24, कर्नाटक में 11-13, पश्चिम बंगाल में 2, हरियाणा में 5-6, राजस्थान में 6-7 और मध्य प्रदेश में 8-10 सीटें जीतेगी.

इसके अलावा कांग्रेस और यूपीए को उत्तर प्रदेश में 5, दिल्ली में 2, पंजाब में 9, चंडीगढ़ की सीट, छत्तीसगढ़ में 9, ओडिशा में 2, तेलंगाना में 2, जम्मू एवं कश्मीर में 2, हिमाचल प्रदेश में एक, गोवा में एक, झारखंड में 5, उत्तराखंड में 2, पूर्वोत्तर के राज्यों में 9-10, असम में 6, अरुणाचल प्रदेश में एक, मेघालय में 2 और नगालैंड में 1 सीट पर जीत दर्ज करने का अनुमान है.

कांग्रेस के सर्वे को एक बार सच के करीब माना जाए तो भाजपा को 200 से भी कम सीटें मिलने की बात कही गई है जबकि एनडीए के 230 सीट तक पहुंचने की संभवना जताई जा रही है. एग्जिट पोल के बाद अब कांग्रेस के अपने अनुमान सामने आने के बाद नतीजों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है. हकीकत क्या रहने वाला है और नतीजे क्या होंगे यह 23 मई को दोपहर तक साफ हो जाएगा.

रिजल्ट के एक दिन पहले राहुल गांधी ने ट्विट कर दिया कार्यकर्ताओं को संदेश, देखिए क्या कहा

नई दिल्ली। 17वीं लोकसभा में किसकी सरकार बनने जा रही है, इसको सामने आने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है. ऐसे में अब तक एग्जिट पोल पर चुप्पी साधे रहने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विट कर कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ‘फर्जी एग्जिट पोल’ से निराश नहीं हों और सतर्क रहें. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के लोग खुद और पार्टी पर विश्वास रखें क्योंकि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी.

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के प्रिय कार्यकर्ताओं, अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण हैं. सतर्क और चौकन्ना रहें. डरे नहीं. आप सत्य के लिए लड़ रहे हैं. फर्जी एग्जिट पोल के दुष्प्रचार से निराश न हों. खुद पर और कांग्रेस पार्टी पर विश्वास रखें, आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी. जय हिन्द.’

इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया था कि वे अफवाहों और एग्जिट पोल पर ध्यान ना दें और स्ट्रांग रूम तथा मतगणना केंद्रों पर डटे रहें. कार्यकर्ताओं को जारी ऑडियो संदेश में प्रियंका ने कहा था, ‘आप लोग, अफवाहों और एग्जिट पोल से हिम्मत मत हारिये. यह अफवाहें आपका हौसला तोड़ने के लिए फैलाई जा रही हैं. इस बीच आपकी सावधानी और भी महत्वपूर्ण बन जाती है. स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों पर डटे रहिए और चौकन्ने रहिए.’ उन्होंने कहा था, ‘ हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी और आपकी मेहनत का फल मिलेगा.’

गौरतलब है कि 19 मई को आए तकरीबन सभी प्रमुख एक्जिट पोल में एनडीए को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन नतीजे क्या होंगे यह 23 मई को सामने आ पाएगा.

आलिया भट्ट को लेकर सलमान खान ने कही दिल की बात

इस साल ईद पर सलमान खान, फिल्म भारत के साथ धमाका करने के लिए तैयार बैठे हैं। सलमान की इस साल की ये सबसे बड़ी फिल्म साबित होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर और कई गाने रिलीज हो चुके हैं। फिल्म को लेकर लोगों का क्रेज देखने लायक है। आपको बता दें कि भारत की रिलीज के बाद सलमान खान, दबंग 3 में व्यस्त हो जाएंगे। इसके बाद सलमान खान जय लीला भंसाली की फिल्म ‘इंशाल्लाह’ में आलिया भट्ट के साथ नजर आएंगे। ‘इंशाल्लाह’ में सलमान-आलिया की जोड़ी पहली बार देखी जाएगी। इसी बीच हालिया में सलमान खान ने आलिया भट्ट के साथ काम करने लेकर एक सवाल किया गया, जिसका जवाब देते हुए एक्टर ने आलिया की जमकर तारीफ की। सलमान की नजर में आलिया के अंदर काफी टैलेंट है जो सलमान खान में उतना नहीं है।

मुंबई मिरर के साथ बातचीत में सलमान ने आलिया के बारे में कहा, ‘देखिए, वह कहां से कहां आ गई हैं। इस बात का क्रेडिट कोई और नहीं ले सकता है। अगर कोई कहे कि आलिया को मैंने बनाया है तो यह झूठ है। आलिया ने अपना टैलंट खुद चमकाया है।’ आलिया के साथ काम करने के बारे में पूछे जाने पर सलमान ने कहा कि आलिया टैलंट की गोदाम है जबकि उनके पास कोई टैलंट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘टैलंट की गोदाम और टैलंट के बंडल का मिलन होगा। असल में यहां कोई टैलंट नहीं है।’ इसके बाद सलमान ने कहा कि आलिया ने शानदार तरीक से खुद को स्टूडेंट से एक बेहतरीन एक्ट्रेस में तब्दील किया है। उसकी ग्रोथ का क्रेडिट सिर्फ उसी को जाता है। जो कोई यह कहे कि हमने उसको बनाया है, उसका विश्वास मत करना। आलिया ने खुद को तराशा है।

  • साभारः हिन्दुस्तान

जानिए, एग्जिट पोल और EVM को लेकर दिन भर कहां-कहां क्या हुआ

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Photo Credit- Patrika

एग्जिट पोल के बाद अब देश भर में evm को लेकर बवाल मचा हुई है. विपक्षी दलों के प्रत्याशी परेशान हैं और ईवीएम को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. इस बीच पूरे दिन गहमा-गहमी का माहौल रहा. जानिए की आखिर evm और एग्जिट पोल को लेकर दिन भर क्या-क्या.

  • उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में सोमवार को गठबंधन के उम्मीदवार अफजल अंसारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे. उनका आरोप था कि गाजीपुर लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभा आती हैं और हर विधानसभा की ईवीएम 5 अलग-अलग जगहों पर है. इसके बाद पांच लोगों को ईवीएम की निगरानी करने की अनुमति दे दी गई है. यूपी केचंदौली (Chandauli Lok sabha Seat) में भी ईवीएम को लेकर गठबंधन समर्थक धरने पर बैठ गए. आरोप है कि गाड़ी से लाई गई कुछ ईवीएम को काउंटिंग स्थल के एक अलग कमरे में रखा गया.
  • वहीं उत्तर प्रदेश के डुमरियागंज में सपा-बसपा कार्यकर्ताओं ने पिछले मंगलवार को ईवीएम से भरा एक मिनी ट्रक पकड़ा. इनका आरोप है कि इस ट्रक को ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाया जा रहा था. साथ ही इनका आरोप है कि बीजेपी के लोगों ने इन ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ की है.
  • बिहार में भी कुछ जगहों पर ईवीएम की ‘संदिग्ध आवाजाही’ का आरोप लगाया गया है. लेकिनचुनाव आयोग (Election Commission)का कहना है कि सभी मामलों को सुलझा लिया गया है, ये आरोप बेबुनियाद हैं.
  • विपक्षी दलों के तमाम नेता भी पूरे दिन सक्रिय रहें. 19 विपक्षी दलों ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक की. यह बैठक आंध्र प्रदेश के सीएम और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई. बैठक में कांग्रेस से अहमद पटेल, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद व अभिषेक मनु सिंघवी, माकपा से सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओब्रायन, टीडीपी से चंद्रबाबू नायडू, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, सपा से रामगोपाल यादव, बसपा से सतीश चंद्र मिश्रा व दानिश अली, द्रमुक से कनिमोई, राजद से मनोज झा, राकांपा से प्रफुल्ल पटेल व माजिद मेमन और कई अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में ईवीएम के साथ वीवीपैट के 100 फीसदी मिलान की मांग को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग से मुलाकात पर चर्चा हुई. तमाम दलों के नेता अपनी शिकायतों और मांगो को लेकर चुनाव आयोग पहुंचे.

एग्जिट पोल को लेकर मामला सिर्फ राजनीतिक दलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग में भी इसको लेकर दिन भर हलचल रही. पहले बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट की-

  • चेन्नई के एक एनजीओ की ओर से दाखिल जनहित याचिका जिसमें ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की 100 फीसदी मिलाने की मांग की गई थी, उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की बेंच पहले ही इस पर फैसला कर चुकी है.

चुनाव आयोग में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा. चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों ने हलचल मचा दी है. बीते दिनों चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को लगातार मिली क्लीन चिट और विपक्षी नेताओं को भेजे गए नोटिस पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि आचार संहिता से जुड़े सभी कागजों को सार्वजनिक किया जाए. इसी मुद्दे पर आज चुनाव आयोग में बड़ी बैठक हुई थी, जिसमें अशोक लवासा की आपत्तियों को खारिज कर दिया गया.  इस बैठक में 2-1 के नतीजों से तय हुआ है कि अशोक लवासा ने जो आचार संहिता से जुड़े मसले को सार्वजनिक करने की मांग की थी, वह पूरी नहीं होगी.

इन सबके बीच एग्जिट पोल से सबसे ज्यादा सकते में आई समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मतगणना के लिए अपने प्रत्याशियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं. बसपा ने अपने प्रत्याशियों से कहा कि काउंटिग एजेंट को पीठासीन अधिकारी के द्वारा प्राप्त की गई EVM को काउंटिग के दौरान खुलने से पहले हर हाल में (EVM,  BUCU और VVPAT) नंबर का मिलान कराएं. इसके साथ यह सुनिश्चित कर लें कि इस्तेमाल की गई ग्रीन पेपर सील व स्पेशल टैक का नंबर वही है जो EVM,  BUCU और VVPAT में पीठासीन अधिकारी द्वारा अंकित किए गए हैं. ऐसे में दोनों नंबर सही पाए जाने पर ही EVM को खुलने की अनुमति प्रदान की जाए. यही बात समाजवादी पार्टी ने भी अपने प्रत्याशियों से कही है.

जी हां, चमार चमार होते हैं

मई 2019 के दूसरे सप्ताह में फेसबुक पर एक पोस्ट वायरल होती रही, जिसमें एक लड़की अपने दोस्तों से बात करते दिख रही थी। इस बातचीत में इस लड़की ने जो कहा था उसे यहां ज्यों का त्यों रखा जा रहा है :

‘पहला लड़का – अ अब बोलो दूसरा लड़का – मैं मनीष सर को बोल दूंगा, ऐसा बोला। पहला लड़का – बोलो, बोलो, बोलो। लड़की (जिसका नाम बाद में पता चला रूचि सिंह है)- मनीष सर के सामने बोला था एक दिन। मैंने कहा सर, मैंने कहा या तो वो थे, अरे.. वह तो अनमोल सर थे। मैंने कहा, यार गवर्नमेंट जॉब नहीं लग रही है, साला चमार पैदा होना चाहिए था। गवर्नमेंट जॉब तो मिल जाती है एटलिस्ट। (अपने सिर की तरफ इशारा करते हुए) चमारों को यहां बिठा दिया, जरनल वालों को नीचे कर दिया।’ फिर इसने कहा, ‘चमार चमार होते हैं। उनकी कोई औकात नहीं होती है।’ ‘पहला लड़का – और? रूचि सिंह – मेरे को कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे काम बहुत करे हैं।’

सर्वप्रथम, इस लड़की के बोलों पर बात की जाए। इस ने सीधे-सीधे चमार का नाम लेकर अपनी घृणा दिखाई है। इस ने किसी अन्य दलित जाति का नाम नहीं लिया। इस का क्या अर्थ है? इस बात का केवल और केवल एक ही अर्थ है की दलित का अर्थ चमार होता है और कुछ नहीं। यह बात की सभी दलितों को गांठ लेनी चाहिए। दरअसल, बाकी अन्य दलित जातियां पेशागत हैं। तभी घृणा से ओत – प्रोत इस लड़की सहित हर वर्णवादी चमार का प्रयोग गाली के तौर पर करता पाया जाता है। इसमें सामंत के मुंशी का नाम सबसे ऊपर है।

असल में हुआ क्या है, आरक्षण से दलितों को कुछ नौकरियां मिलने लगी हैं और यही वर्णवादियों को सहन नहीं हो पा रहा। आए दिन ये आरक्षण को कोसते पाए जाते हैं। इस संदर्भ में कुछ दलितों का यह तर्क स्वीकार करने लायक नहीं है कि ‘इसे चमार से शादी कर लेनी चाहिए गवर्नमेंट जॉब मिल जाएगी।’ यह कथन अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

सोचा जाए, अगर यह लड़की प्रेम विवाह के नाम पर किसी चमार लड़के से विवाह कर ले तो उस घर का माहौल कैसा बनेगा? यह कभी भी अपने पति सहित परिवार वालों को गाली के रूप में चमार संबोधित कर बैठेगी। ऐसे में उन की क्या हालत होगी? इस का चमार पति आत्महत्या कर लेगा या मानसिक अवसाद का शिकार हो जाएगा।

ऐसे ही, अगर कोई चमार की बेटी इस लड़की के भाई से विवाह कर बैठे तो इस के जैसी ननद तो सीधे-सीधे उसे चमारी कह कर संबोधित करेगी। ऐसे में उस लड़की की ऐसी मानसिक स्थिति कैसी बनेगी, क्या वह पागल नहीं हो जाएगी? अपनी आलोचना की पुस्तक ‘चमार की बेटी रुपा’ में महान आजीवक चिंतक डॉ. धर्मवीर ने इस का अच्छे से खुलासा किया हुआ है।

तो जाति के विनाश के नाम पर प्रेम और अंतरजातीय विवाह का समर्थन करने वाले दलितों की मानसिक स्थिति का भी अध्ययन करना ही चाहिए। ये दलित बच्चों को मानसिक अवसाद में धकेलना चाहते हैं। ऐसे प्रेमवादियों और गैर दलितों से स्वैच्छिक रोटी- बेटी के रिश्ते की बात करने वालों से दलितों को सावधान रहने की जरूरत है।

असल में, इस लड़की और वर्णवादियों की ऐसी सोच एक दिन में नहीं बनी है। वर्णवादियों के हर घर की कमोवेश यही स्थिति है। इन के घर नफरत की पाठशाला हैं, जिनमें इन के बच्चों को भेदभाव का पाठ पढ़ाया जाता है। इन वर्णवादियों -अछूतवादियों के घर नाज़ियों के घरों के समान हैं जहां यहूदियों के प्रति जहर घोला जाता था‌। अब सोचना दलितों को है कि इन भारतीय नाज़ियों से कैसे निपटा जाए? हां, यह पक्का है कि केवल कानून बना कर इस तरह की नफरत से निपटा नहीं जा सकता। वैसे भी घृणा से भरी इस लड़की ने गवाही दी है कि ‘ऐसे काम बहुत करे हैं।’

इस द्विजवादी लड़की का यह कहना कि ‘चमारों को सिर पर बिठा रखा है’ आपत्तिजनक है। इसलिए, क्योंकि चमारों ने नौकरियों में जो कुछ हासिल किया है वह अपनी मेहनत और ईमानदारी से हासिल किया है। सरकार से जुड़े हर क्षेत्र में चमारों की उपस्थिति इनकी लगन और मेहनत का परिणाम है। इसी बात को समझ कर वर्णवादियों ने उदारीकरण के नाम पर प्राइवेटाइजेशन का जुमला छेड़ा हुआ है, जहां पूरी तरह से लालावाद चलता है। क्योंकि, इन की नालायक औलादें प्रतियोगी परीक्षाओं में चमारों से मुकाबला नहीं कर सकतीं। यह बात शर्त लगा कर कही जा रही है कि इस नफरत से भरी लड़की को किसी भी हालत में सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। इसी को ही नहीं बल्कि प्राइवेट स्कूलों की टीचरों को प्रतियोगिता के माध्यम से लिया जाए तो दूध का दूध – पानी का पानी हो जाएगा। इन परीक्षाओं का जिम्मा अगर किसी निष्पक्ष एजेंसी को दे दिया जाए तब इन की सारी मेरिट की पोल खुल जाएगी।

सभी दलितों ने इस बात को अच्छे से पहचाना है कि इसके जैसी टीचर के कारण रोहित वेमुला को आत्महत्या करनी पड़ी। यह सच है कि विद्यालयों- महाविद्यालयों में रूचि सिंह जैसे नस्लवादी अध्यापक भरे पड़े हैं। जो हर साल हजारों दलित छात्र – छात्राओं को स्कूल – कॉलेज छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं। इस पर अगर सर्वे किया जाए तो भारतीय शिक्षा व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो सकती है।

इधर कुछ इसी तरह के और भी वीडियो आ रहे हैं, जिन में चमार का नाम ले कर गालियां दी गई हैं। यह नए कहे जा रहे भारत की असली तस्वीर है। कुछ घृणावादी यह कहते पाए गए हैं कि ‘चमार को चमार नहीं तो क्या कहेंगे?’, पूछना यह है कि चमार तो किसी को जातिगत संबोधन से पुकारता नहीं तब इन के पेट में मरोड़ क्यों उठ रही है? इन की इस घृणा के पीछे क्या वजह है? आरक्षण तो इस का कारण हो नहीं सकता, क्योंकि घृणा तो वर्णवादियों के दिलो-दिमाग में हजारों वर्षों से भरी पड़ी है। फिर, असली बात क्या है? असल में यहां जारकर्म का सिद्धांत लागू किया जा सकता है, जिस में चमार तो चमार ही होता है।

बताया जाए, चमार चमार ही होते हैं। इनके मनों में किसी के प्रति घृणा, नफरत और हिंसा के भाव नहीं होते‌। चमार पूरी मानवता में विश्वास करते हैं। यही वजह है कि वर्णवादी – नस्लवादी द्विज चमारों से खार खाए बैठे रहते हैं।

फिर, जो लोग यह कहते हैं कि आजकल के युवा जात-पात नहीं मानते तो इन्हें इस लड़की का दिमाग और चेहरा अच्छे से देख लेना चाहिए। यह द्विज युवा का प्रतिनिधि चेहरा है। तो जिस किसी को यह वहम है कि वर्णवादी अर्थात जातिवादी सुधर जाएंगे उन्हें यह बात अपने दिमाग से निकाल ही देनी चाहिए।

इस में आखरी बात जो बतानी है वह यह है, चमार शब्द को इतनी ताकत दे दो कि इस के अर्थ बदल जाएं। इस रूप में चमार शब्द आजीवक में बदल रहा है। इसके बाद क्या होगा किसी को बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

  • लेखकः कैलाश दहिया 

शरद पवार ने किया फोन लेकिन जगन मोहन रेड्डी ने नहीं की बात

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वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल जिस पार्टी को बढ़त लेता हुआ दिखाई दे रहा है, वह पार्टी जहां जश्न में डूबी है तो जिन्हें सीटें नहीं मिलती दिख रही हैं, वो पार्टियां परेशान हैं. इसी बीच विपक्षी पार्टियां अन्य दलों के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं. लेकिन बढ़त ले रहे दल फिलहाल किसी खेमे में दिखना नहीं चाह रहे हैं. खबर है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को यूपीए की ओर से वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी से फोन पर बात करने की कोशिश की. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जगन रेड्डी ने पवार से बात नहीं की.

माना जा रहा है कि आंध्र प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन कर रहे जगन मोहन रेड्डी 23 मई को आने वाले नतीजों से पहले किसी भी दल के साथ खड़े नजर नहीं आना चाहते. रेड्डी नतीजों से पहले अपना पत्ता नहीं खोलना चाहते हैं. हालांकि, एग्जिट पोल में वाईएसआर कांग्रेस को टीडीपी से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि जगन को अपने साथ लाया जाए.

कांग्रेस के साथ एनसीपी का गठबंधन है और यूपीए की ओर से ही शरद पवार जगन मोहन से फोन कर बात करना चाहते थे, लेकिन जगन इसके लिए तैयार नहीं हुए. ऐसा लग रहा है कि वे चुनाव नतीजे आने का इंतजार कर रहे हैं और तब तक किसी से बात करना नहीं चाहते हैं. बता दें कि टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने पिछले सप्ताह अपने दिल्ली दौरे पर शरद पवार से दो बार मुलाकात की थी.

पुण्यतिथि पर प्रियंका ने किया पिता राजीव गांधी को याद, शेयर की बचनप की तस्वीर और कविता

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पिता राजीव गांधी के साथ प्रियंका गांधी ने अपने बचपन की फोटो शेयर की है

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री और देश में कंप्यूटर क्रांति के जनक राजीव गांधी की आज 28वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर पूरा देश उनको याद कर रहा है. मंगलवार को सुबह ही राजीव गांधी की पत्नी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा राजीव गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

इस मौके पर राजीव गांधी की बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार सुबह अपने पिता की याद में ट्वीट करते हुए एक पुरानी तस्वीर साझा की. प्रियंका ने इस तस्वीर का कैप्शन दिया ‘आप हमेशा मेरे हीरो रहेंगे’. अपनी इस तस्वीर के साथ प्रियंका गांधी ने मशहूर कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता भी साझा की.

प्रियंका ने जिस तस्वीर को साझा किया है, वह काफी पुरानी है. जिसमें प्रियंका की तस्वीर काफी छोटी उम्र वाली है. प्रियंका ने तस्वीर के साथ हरिवंश राय बच्चन की ‘अग्निपथ..अग्निपथ..अग्निपथ’, वाली कविता साझा की है.

आपको बता दें कि राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें याद कर रहा है. गांधी परिवार के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अलावा कांग्रेस के कई दिग्गजों ने राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी. इन सभी के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी.

मायावती ने बड़े ब्राह्मण नेता को पार्टी से निकाला

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नई दिल्ली। एग्जिट पोल आने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने एक बड़ी कार्रवाई की है. पार्टी ने अपने पुराने सिपाहसलार रहे रामवीर उपाध्याय को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसके साथ ही उन्हें पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी हटा दिया गया है. उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

पार्टी महासचिव मेवालाल गौतम ने कहा कि रामवीर उपाध्याय लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल थे. उन्हें हिदायत दी गई थी, लेकिन रामवीर ने आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ समेत कई सीटों पर खड़े किए गए पार्टी प्रत्याशियों का खुलकर विरोध किया और विरोधी पार्टी के प्रत्याशियों का समर्थन किया.

जिन सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशियों के विरोध का आरोप रामवीर उपाध्याय पर लगा है, उनमें से अधिकतर सीटें आजतक और एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में बीजेपी के पास जाती दिख रही है. सर्वे में आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़, हाथरस में बीजेपी सबसे अधिक पॉपुलर पार्टी दिख रही है. बीते कई दिनों से रामवीर उपाध्याय के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन ऐसा करने पर उनकी विधायकी जा सकती थी. अब माना जा रहा है कि रामवीर उपाध्याय बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय पिछले साल बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे.

इस  कार्रवाई के पीछे वे तस्वीरें भी मानी जा रही हैं, जो लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. ये तस्वीरें आगरा लोकसभा सीट पर मतदान से पहले की हैं, जिसमें रामवीर उपाध्याय आगरा से भाजपा प्रत्याशी एस.पी. सिंह को गले लगाते दिखे थे.