राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेंस की जरूरी बातें, राहुल बोलें कांग्रेस ने मोदी को ध्वस्त कर दिया

0

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के 5वें चरण के चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि मोदी हार रहे हैं. शनिवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आधे से ज्यादा खत्म हो चुका है. स्पष्ट है कि मोदी जी चुनाव हार रहे हैं. किसान, भ्रष्टाचार, रोजगार, संस्थाओं पर अतिक्रमण मुख्य मुद्दे हैं, इसलिए भाजपा चुनाव हार रही है.

मीडिया से बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष ने कई बड़े मुद्दों को भी उठाया साथ ही पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया. राहुल गांधी ने मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी रोजगार पर, भ्रष्टाचार पर बात नहीं करते. मोदीजी, मुझसे पांच मिनट किसी मुद्दे पर बहस कर लें. मुझे 5-10 मिनट दे दीजिए. जहां, चाहे वहां बुला लें, केवल अनिल अंबानी के घर नहीं जाउंगा.

कांग्रेस के पार्टी के मेनीफेस्टों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “देश में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है, उसके बारे में नरेंद्र मोदीजी कुछ नहीं बोलते हैं. कांग्रेस के घोषणापत्र में पूरा का पूरा एक चैप्टर रोजगार पर केंद्रित है. मैं हर साल दो करोड़ नौकरी के झूठे वादे नहीं करुंगा. हमने एक साल के अंदर 22 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है. 10 लाख युवाओं को पंचायतों में रोजगार दे देंगे.”

नोटबंदी को लेकर सरकार को एक बार फिर से कठघरे में खड़ा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स से उन्होंने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. एक व्यापारी ने मुझे कहा था कि मेरी आंखों से खून निकल रहा है. तो वहीं सेना और सर्जिकल स्ट्राइक पर भी मोदी को जमकर घेरा. कांग्रेस अध्यक्ष ने सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेने के मोदी के बयानों पर कहा- “सर्जिकल स्ट्राइक कांग्रेस या भाजपा ने नहीं किए हैं, भारतीय सेना ने किया है. 70 साल से सेना अपना काम करती आई है. सेना ने कांग्रेस के शासन में भी अपना काम किया है, पूरा डॉक्यूमेंट है, हमारे पास सेना के अधिकारी का. सेना सर्जिकल स्ट्राइक करती है, तो यह उनकी कामयाबी है. इसमें नरेंद्र मोदी का क्या योगदान?”

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि मसूद अजहर को पाकिस्तान किसकी सरकार ने भेजा. आतंकवादियों के साथ ‘नेगोसिएशन’ कर उसे पाकिस्तान भेज दिया. भाजपा आतंकवादियों के साथ समझौता करती है.

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग को भी नहीं बख्शा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग दो तरह के नियमों पर काम कर रहा है. उसके लिए जहां सत्ता पक्ष भाजपा के लिए अलग नियम हैं जबकि  विपक्षी पार्टियों और नेताओं के लिए अलग नियम है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर भी भाजपा का दबाव है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हम उनके साथ चार-पांच चुनाव लड़ चुके हैं. जैसे ही उन्हें लगता है कि वह चुनाव हार रहे हैं, वह ध्यान भटकाने के लिए कुछ नया करने लगते हैं. राफेल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से माफी से जुड़ा सवाल आने पर राहुल गांधी ने कहा कि मैंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर बयान दिया था, मेरी गलती थी. मैंने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है, मोदीजी से नहीं. ‘चौकीदार चोर है’ नारा है और यही सच्चाई है. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर आरोप लगाया कि राफेल सौदे में मोदीजी ने 30 हजार करोड़ रुपये अनिल अंबानी को दे दिया. कांग्रेस के पास भाजपा के और कई घोटालों के सबूत मौजूद हैं. राहुल गांधी ने कहा कि 2014 से कहा जा रहा था कि नरेंद्र मोदी कम से कम 10-15 साल तक रहेंगे. कांग्रेस ने उन्हें ध्वस्त कर दिया है. 15-20 दिनों में मोदीजी जाने वाले हैं. अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह देश की जनता तय करेगी. प्रेस कांफ्रेंस के आखिर में उस समय हंसी छूट गई जब राहुल गांधी ने पत्रकारों को कहा कि पीएम मोदी से भी कहिए कि वे भी एक प्रेस कांफ्रेंस करें. यह अच्छा नहीं लगता कि पांच साल में एक प्रधानमंत्री एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करता.

लोकसभा चुनावः बीजेपी प्रत्याशी ने मायावती को बताया ‘यूपी की गुंडी’

यूपी की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी बृजभूषण शरण सिंह ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती को ‘गुंडी’ कहा है. उन्होंने कहा कि मायावती ने उन्हें गुंडा और आंतकवादी बताया था, अब वह उन्हें गुंडी कह रहे हैं. इतना ही नहीं बीजेपी प्रत्याशी ने यहां तक कहा कि चुनाव के बाद मायावती को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता.

गोंडा में आयोजित रैली में आईं बीएसपी चीफ मायावती ने पार्टी कार्यालय में हुई तोड़फोड़ का जिम्मेदार बीजेपी प्रत्याशी को बताया था. मायावती ने रैली में कहा था कि बीजेपी प्रत्याशी गुंडा और आंतकवादी हैं. मायावती के इस बयान पर बृजभूषण शहरण सिंह ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा है, ‘मायावती ने मुझे गुंडा कहा. मैं कहना चाहूंगा कि वह उत्तर प्रदेश की गुंडी हैं. मायावती ने मुझे चुनाव के बाद जेल भेजने की धमकी दी थी. मैं कहता हूं कि अब वह जेल जाएंगी.’

गोंडा और बलरामपुर सीट से सांसद बनने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने वर्ष 2009 में कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में दस्तक दी. उस समय उन्होंने बड़ा उलटफेर करते हुए बीजेपी छोड़ एसपी में शामिल होकर चुनाव लड़ा और संसद पहुंच गए. 2014 से पहले वे अपने पुराने घर बीजेपी में वापस लौट आए और मोदी मैजिक में चुनाव जीत गए. 2019 में वह इस क्षेत्र से हैट्रिक बनाने के लिए जूझ रहे हैं.

कांग्रेस के लिए इस क्षेत्र में खोने को कुछ भी नहीं है. श्रावस्ती के पूर्व सांसद विनय पांडे को पार्टी ने टिकट देकर सत्तारुढ़ दल के लिए चुनौती जरूर कड़ी कर दी है. विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने सिर्फ पयागपुर में प्रत्याशी खड़ा किया था, उसे भी सिर्फ चार अंकों में ही वोट मिले थे.

Read it also-PM मोदी पर मायावती ने ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ का लगाया आरोप

यदि केंद्र में हमारी सरकार बनी तो छह हजार रुपये की जगह नौकरी देंगे- मायावती

सिद्धार्थनगर। बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चौकीदारी का नाटक भाजपा को इस बार बचा नहीं पाएगा और लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस देश से गरीबी नहीं हटा पायी. मायावती ने यहां एक चुनावी रैली में कहा, ‘चौकीदारी की नयी नाटकबाजी भी इन्हें अब नहीं बचा पायेगी. जुमलेबाजी काम नहीं आने वाली. चौकीदार मिलकर अपनी कितनी भी ताकत लगा ले, भाजपा सत्ता में नही आने वाली.’

कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए मायावती बोलीं, ‘आज़ादी के बाद ज़्यादातर सत्ता कांग्रेस पार्टी के हाथों में रही. कांग्रेस लम्बे अरसे तक सरकार में रहने के बाद भी गरीबी बेरोजगारी दूर नहीं कर सकी. किसान भी दुखी हैं. दलितों और आदिवासियों को जो अधिकार दिए हैं, वो भी आपको नहीं मिल पाया.’

उन्होंने कहा कि ‘नमो नमो’ जाने वाले हैं और ‘जय भीम’ आने वाले हैं. मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के रहते हुए हमारा विकास नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की हुकूमत ने आपका वोट तो लिया लेकिन आपका ध्यान नहीं दिया. मायावती ने कहा कि भाजपा भी सामन्तवादी और पूँजीवादी नीतियों की वजह से जरूर सत्ता से बाहर चली जायेगी.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसी भी समाज का खास विकास नहीं किया. पूरे देश को आरक्षण का बहुत ही कम लाभ मिल पा रहा है. इस सरकार में गरीब लोगों की भी हालत ठीक नहीं है. मायावती ने कहा कि नोटबंदी को बिना तैयारी के लागू करने से व्यापारी लोग काफी दुखी हैं. इस सरकार में हर स्तर पर भ्रष्टाचार बढा है. इससे रक्षा के भी संसाधन बचे नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ‘यदि केन्द्र में हमारी सरकार बनती हैं तो आप सभी को छह हजार रूपये देने की जगह सरकारी या अस्थायी नौकरी देने का काम किया जाएगा.’ मायावती डुमरियागंज से सपा—बसपा गठबंधन प्रत्याशी आफताब आलम के समर्थन में रैली कर रही थीं.

Read it also-बैन खत्म होते ही मायावती ने चुनाव आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा

#FANI : पुरी-भुवनेश्वर में भारी तबाही, रेल हवाई सेवा ठप, आठ की मौत, पश्चिम बंगाल में भी तांडव

175 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार की प्रचंड हवाओं के साथ चक्रवाती तूफान ‘फोनी’ ने शुक्रवार की सुबह ओड़िशा तट पर दस्तक दी. कई जगहों पर तूफान की गति 225 किमी/घंटे तक रही. इस दौरान भारी बारिश भी हुई. कई पेड़ उखड़ गये, कई घर तबाह हो गये. प्रभावित क्षेत्रों में एहतियातन रेल, सड़क और हवाई यातायात को शनिवार तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. तीर्थनगरी पुरी व भुवनेश्वर में काफी तबाही मची है. भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन की छत, दीवारें, होर्डिंग्स हवा में उड़ गये. शुक्रवार की शाम तक आठ लोगों की जान जा चुकी है और 160 लोग घायल हुए हैं. 12 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चक्रवाती तूफान ‘फोनी’ के कारण भुवनेश्वर में एम्स पीजी 2019 परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की. यह परीक्षा पांच मई को निर्धारित थी. दरअसल, तूफान के कारण एम्स भुवनेश्वर में एक इमारत की छत का एक हिस्सा टूट गया. सभी छात्र, स्टॉफ और मरीज सुरक्षित हैं. राज्य में संचार एवं विद्युत सेवाएं पूरी तरह ठप हो गयी हैं. एनडीआरएफ की टीमें प्रभावित जिलों में तैनात हैं. मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन दिनों तक तेज हवाओं के साथ बारिश होगी. पुरी से आगे बढ़ने के बाद फोनी की रफ्तार धीमी पड़ी है. हालांकि, ज्यों-ज्यों पश्चिम बंगाल की तरफ बढ़ रहा है. इसका असर बढ़ा है. प बंगाल के दीघा व आसपास के क्षेत्रों में 125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं. पश्चिम मेदिनीपुर व झाड़ग्राम जिले में भी तांडव मचाया. पच्चीस से अधिक लोग भी जख्मी हो गये. खड़गपुर शहर में कई मकानों के गिरने की खबर है. फोनी @ 225 किमी/ घंटा 220 से अधिक ट्रेनें कोलकाता-चेन्नई मार्ग पर आज तक के िलए रद्द 12 लाख लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गये 160 लोग हुए घायल 03 दशक बाद ऐसा तूफान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम प्रभावित राज्यों को पूरी मदद करेंगे. चक्रवात से जूझ रहे राज्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी कर चुके हैं. एनडीआएफ , कोस्टगार्ड, नौसेना और थल सेना पूरी मुस्तैदी के साथ प्रशासन के साथ जुटी हुई हैं. इस बीच बंग्लादेश ने तूफान से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली हैं. 5.5 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. सेना को अलर्ट पर रखा गया है. भागलपुर में आज बंद रहेंगे सभी स्कूल भागलपुर. जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने फोनी तूफान की आशंका को देखते हुए शनिवार को सभी सरकारी व निजी स्कूल को बंद करने का निर्देश दिया है. जिला दंडाधिकारी के तौर पर उन्होंने धारा 144 के तहत आदेश पारित किया. बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान फोनी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इसका असर बिहार के भागलपुर सहित कई जिलों में शुक्रवार को देखा गया. इसी के तहत जिलाधिकारी ने स्कूल बंद रखने का निर्देश दिया है. बिहार में भी फोनी का असर, चार की गयी जान पटना : राजधानी सहित पूरे राज्य में फोनी का असर देखा गया. कहीं अधिक तो कहीं आंशिक असर हुआ. पटना सहित अधिकतर जिलों का मौसम अचानक बदल गया. तेज हवा के साथ बिजली चमकने लगी. बेतिया में तेज हवा के साथ बारिश हुई. इस दौरान दो स्थानों पर ठनका गिरने से एक युवती समेत दो की मौत हो गयी. वहीं सीवान में भी पेड़ गिरने से एक की मौत हो गयी. छपरा में भी एक की मौत हो गयी. आंधी-पानी के साथ हुई बारिश से पटना के तापमान में पांच डिग्री की गिरावट आयी. वहीं आंधी-पानी से राज्य में फसलों को काफी नुकसान हुआ है. असर भुवनेश्वर में पांच मई की एम्स पीजी परीक्षा रद्द कोलकाता एयरपोर्ट से उड़ानें स्थगित भुवनेश्वर स्टेशन व एम्स की छत उड़ीं, दीवार िगरी तीन राज्यों में संचार सेवा बाधित, कई टावर गिरे इवीएम की सुरक्षा कड़ी चुनावी रैलियां रद्द ग्लोबल वार्मिंग का असर : मॉनसून से पहले आये तूफान से सभी हैरान अमूूमन ऐसा तूफान मॉनसून बाद सितंबर से नवंबर में आता है, मई में फोनी के आगमन से सभी हैरान हैं. 1976 के बाद यह पहला ऐसा तूफान है, जिसका निर्माण अप्रैल में शुरू हुआ. ग्लोबल वॉर्मिंग से ऐसी स्थिति पैदा हुई है. आजादी के बाद पूर्वी तट से टकरानेवाला यह चौथा खतरनाक चक्रवात है. अमूमन तूफान या तो ओड़िशा तट पर खत्म हो जाता है या पश्चिम बंगाल के तटों की तरफ बढ़ जाता है. चक्रवात की शुरुआत जितनी धीमी होती है, उसका प्रभाव उतना ही खतरनाक होता है. वजह यह कि धीमा होने से चक्रवात को नमी व ऊर्जा को एकत्रित करने का वक्त मिलता है. लैंडफॉल के बाद यह और भी खतरनाक हो जाता है. हेल्पलाइन नंबर -1938 तैयारी : एनडीआरएफ की 60 टीमें, नौसेना के छह पोत, एयरफाेर्स के दो सी-17 विमान व तटरक्षक बल के छह पोत तैनात.

Read it also-Cyclone Fani : तूफान से घबराएं नहीं, ध्यान रखें इन बातों का

नीतीश के करीबी ब्रजेश ठाकुर की करतूत पर CBI का सनसनीखेज खुलासा

नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसके सहयोगियों ने 11 लड़कियों की कथित रूप से हत्या की थी और एक श्मशान घाट से ‘‘हड्डियों की पोटली” बरामद हुई है. बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में करीब 34 लड़कियों के साथ रेप का मामला सामने आया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बिहार सरकार को भी कई बार फटकार लगा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में सीबीआई ने कहा कि जांच के दौरान दर्ज पीड़ितों के बयानों में 11 लड़कियों के नाम सामने आये हैं जिनकी ठाकुर और उनके सहयोगियों ने कथित रूप से हत्या की थी. एजेंसी ने कहा कि एक आरोपी की निशानदेही पर एक श्मशान घाट के एक खास स्थान की खुदाई की गई जहां से हड्डियों की पोटली बरामद हुई है. गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह में कई लड़कियों का कथित रूप से बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया गया था और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा उछला था.

इस मामले की जांच सीबीआई को स्थानान्तरित की गई थी और एजेंसी ने ठाकुर सहित 21 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था. सीबीआई ने कहा, ‘‘जांच के दौरान, जांच अधिकारियों और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं न्यूरो विज्ञान संस्थान द्वारा दर्ज पीड़ितों के बयान में 11 लड़कियों के नाम सामने आए हैं जिनकी आरोपी ब्रजेश ठाकुर तथा उसके सहयोगियों ने कथित रूप से हत्या कर दी थी.” सीबीआई ने एक आवेदन पर हलफनामा दायर करते हुए कहा, ‘‘गुड्डू पटेल नाम के एक आरोपी से पूछताछ के दौरान खुलासे वाले तथ्यों के आधार पर, आरोपी की निशानदेही पर श्मशान घाट में एक खास स्थान की खुदाई की गई और मौके से हड्डियों की एक पोटली बरामद हुई है.”

इस मामले में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई की. पीठ ने कहा कि वह आवेदन पर सीबीआई को औपचारिक नोटिस जारी करेगी और एजेंसी चार सप्ताह के भीतर इसका जवाब दायर करेगी. पीठ ने संक्षिप्त दलीलों के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए छह मई की तारीख तय की.

इसे भी पढ़ें-मोदी जी को हराइए…उनकी हार में ही देश की जीत है…

23 को सरकार तो 24 मई को होगा ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के भाग्य का फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक ‘पीएम नरेंद्र बायोपिक’ को काफी विवादों के बाद अब नई रिलीज डेट मिल गई है. फिल्म लोकसभा इलेक्शन रिजल्ट (23 मई) के एक दिन बाद 24 मई 2019 को रिलीज होगी. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

तरण आदर्श ने ट्वीट कर लिखा- प्रोड्यूस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी बायोपिक के लिए नई रिलीज डेट… अब लोकसभा चुनाव रिजल्ट के बाद 24 मई को रिलीज होगी फिल्म. फिल्म को ओमंग कुमार डायरेक्ट कर रहे हैं. विवेक ओबेरॉय फिल्म में पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका निभा रहे हैं.

बता दें कि विवेक ओबरॉय स्टारर मूवी पीएम नरेंद्र मोदी पहले 11 अप्रैल को रिलीज हो रही थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते फिल्म की रिलीज डेट को खिसका दिया गया था. फिल्म को लेकर जबरदस्त माहौल बन गया था. मामला चुनाव आयोग तक चला गया था. चुनाव आयोग (EC) ने पीएम मोदी की बायोपिक पर लोकसभा चुनाव तक रोक लगा दी थी. EC ने चुनाव खत्म होने के बाद ही फिल्म को रिलीज करने की अनुमति दी थी.

चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई कमेटी के अनुसार फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी एक राजनीति माहौल बनाती है. 135 मिनट की ये फिल्म में एक शख्स को सीन्स, स्लोगन और सिंबल के माध्यम से बहुत बड़े पद पर खड़ा करती है. फिल्म अंत में एक खास शख्स को संत का दर्जा देती है.

बताते चलें कि 19 मई को लोकसभा चुनाव खत्म हो रहे हैं और 23 मई को रिजल्ट आएगा. इसी के बाद फिल्म को रिलीज किया जाएगा. अब देखना होगा कि लंबे समय तक विवादों में रहने के बाद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कितनी सफलता मिलती है.

Read it also-सनी देओल के चुनाव लड़ने पर धर्मेंद्र ने दिया यह बयान

तेज बहादुर का आरोप, वाराणसी से चुनाव न लड़ने को बीजेपी ने दिया था 50 करोड़ का ऑफर

वाराणसी। बीएसएफ के बर्खास्‍त जवान तेज बहादुर यादव ने गुरुवार को वाराणसी में बीजेपी पर सनसनीखेज आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोगों ने वाराणसी से चुनाव न लड़ने के लिए 50 करोड़ का ऑफर दिया और दबाव भी बनाया था.

वाराणसी संसदीय सीट से एसपी-बीएसपी गठबंधन के प्रत्‍याशी के रूप में पर्चा खारिज होने के बाद तेज बहादुर गुरुवार को मीडिया के सामने आए. उन्होंने बताया कि पहले निर्दल प्रत्‍याशी के तौर पर नामांकन करने के बाद जब घर गए पहुंचे तो वहां आए बीजेपी के लोगों ने 50 करोड़ का ऑफर दिया था. ऑफर देने वालों का नाम उन्‍होंने बताने से इनकार करते हुए कहा कि वे शातिर लोग हैं. नाम खोलने पर उनकी हत्‍या कराई जा सकती है. नामांकन खारिज होने पर कहा कि पहले से ही आशंका थी कि पर्चा खारिज कराने के लिए बीजेपी सारे हथकंडे अपनाएगी. इसलिए ही मेरे साथ शालिनी यादव ने गठबंधन प्रत्‍याशी के रूप में नामांकन किया था.

‘पीएम मोदी ने बर्खास्‍त कराया’ तेज बहादुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ही मुझे बर्खास्‍त कराया है. मेरे बेटे की हत्‍या की जाती है और उसकी जांच तक नहीं होती है. बेटे की मौत के समय ही पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की प्रतिज्ञा की थी. नामांकन खारिज होने जाने के बाद ही वह समाजवादी पार्टी उम्‍मीदवार शालिनी यादव के समर्थन में पीएम मोदी के खिलाफ प्रचार करेंगे. नकली चौकीदार के खिलाफ असली चौकीदार की लड़ाई जारी रहेगी.

इसे भी पढ़ें-मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले जवान तेज बहादुर का नामांकन रद्द

पुण्यतिथि: राज्यसभा जाने, पद्मश्री व फ़िल्मफेयर अवॉर्ड पाने वाली पहली अभिनेत्री थीं नरगिस

मुंबई। 3 मई को अपने दौर की चहेती अदाकारा नरगिस की पुण्यतिथि Nargis Dutt Death Anniversary मनाई जाती है! हिंदी सिनेमा को शुरूआती दौर में जिन अभिनेत्रियों ने एक अलग उंचाई दी है उनमें एक नाम उस दौर की खूबसूरत एक्ट्रेस नरगिस का भी है. क्या आप जानते हैं नरगिस राज्यसभा के लिए नॉमिनेट होने और पद्मश्री पुरस्कार पाने वाली पहली हीरोइन थीं.

नरगिस के अभिनय का जादू कुछ ऐसा था कि साल 1968 में जब बेस्ट एक्ट्रेस के लिए पहले फ़िल्मफेयर अवॉर्ड देने की बारी आई तो उन्हें ही चुना गया. आइये जानते हैं इस कमाल की अभिनेत्री के बारे में और भी कुछ दिलचस्प बातें..

बेबी नरगिस के नाम से हुईं मशहूर

नरगिस के बचपन का नाम फातिमा राशिद था. उनका जन्म 1 जून 1929 को पश्चिम बंगाल के कलकत्ता शहर में हुआ था. नरगिस के पिता उत्तमचंद मोहनदास एक जाने-माने डॉक्टर थे. उनकी मां जद्दनबाई मशहूर नर्तक और गायिका थी. मां के सहयोग से ही नरगिस फ़िल्मों से जुड़ीं और उनके करियर की शुरुआत हुई फ़िल्म ‘तलाश-ए-हक’ से. जिसमें उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया. उस समय उनकी उम्र महज 6 साल की थी. इस फ़िल्म के बाद वो बेबी नरगिस के नाम से मशहूर हो गयीं. इसके बाद उन्होंने कई फ़िल्में की.

राज कपूर से बढ़ी नजदीकियां

1940 से लेकर 1950 के बीच नरगिस ने कई बड़ी फ़िल्मों में काम किया. जैसे ‘बरसात’, ‘आवारा’, ‘दीदार’ और ‘श्री 420’. तब राज कपूर का दौर था. नरगिस ने राज कपूर के साथ 16 फ़िल्में की और ज़्यादातर फ़िल्में सफल साबित हुईं. इस बीच दोनों में नजदीकियां भी बढ़ने लगीं और दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने शादी करने का मन भी बना लिया. लेखिका मधु जैन की किताब ‘द कपूर्स’ के मुताबिक – “जब बरसात बन रही थी, नरगिस पूरी तरह से राज कपूर के लिए समर्पित हो चुकी थीं. यहां तक कि जब स्टूडियो में पैसे की कमी हुई तो नरगिस ने अपनी सोने की चूड़ियां तक बेचीं. उन्होंने दूसरे निर्माताओं की फ़िल्मों में काम करके आर.के फ़िल्म्स की खाली तिजोरी को भरने का काम किया.”

राज कपूर से ब्रेक-अप

समय अपनी रफ़्तार से बढ़ रहा था. राज कपूर जब 1954 में मॉस्को गए तो अपने साथ नरगिस को भी ले गए. कहते हैं यहीं दोनों के बीच कुछ ग़लतफ़हमी हुई और दोनों के बीच इगो की तकरार इतनी बढ़ी कि वह यात्रा अधूरी छोड़कर नरगिस इंडिया लौट आईं. 1956 में आई फ़िल्म ‘चोरी चोरी’ नरगिस और राज कपूर की जोड़ी वाली अंतिम फ़िल्म थी. वादे के मुताबिक, राज कपूर की फ़िल्म ‘जागते रहो’ में भी नरगिस ने अतिथि कलाकार की भूमिका निभाई थी. यहां से दोनों के रास्ते बदल गए. दोनों के बीच कितना गहरा रिश्ता था इस बारे में ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला ऋषि कपूर uncensored’ में भी विस्तार से लिखा है.

सुनील दत्त से प्यार और शादी

राज कपूर से अलग होने के ठीक एक साल बाद नरगिस ने 1957 में महबूब ख़ान की ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग शुरू की. मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान सेट पर आग लग गई. सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाया और दोनों में प्यार हो गया. मार्च 1958 में दोनों की शादी हो गई. दोनों के तीन बच्चे हुए, संजय, प्रिया और नम्रता. अपनी किताब ‘द ट्रू लव स्टोरी ऑफ़ नरगिस एंड सुनील दत्त’ में नरगिस कहती हैं कि राज कपूर से अलग होने के बाद वो आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगी थीं, लेकिन उन्हें सुनील दत्त मिल गए,जिन्होंने उन्हें संभाल लिया. नरगिस कहती हैं कि उन्होंने अपने और राज कपूर के बारे में सुनील दत्त को सब-कुछ बता दिया था. सुनील दत्त पर नरगिस को काफी भरोसा था और दुनिया जानती है यह जोड़ी ताउम्र साथ रही.

सोशल सर्विस

नरगिस एक अभिनेत्री से ज्यादा एक समाज सेविका थीं. उन्होंने असहाय बच्चों के लिए काफी काम किया. उन्होंने सुनील दत्त के साथ मिलकर ‘अजंता कला सांस्कृतिक दल’ बनाया जिसमें तब के नामी कलाकार-गायक सरहदों पर जा कर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाते थे और उनका मनोरंजन करते थे. गौरतलब है कि कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी से जूझते हुए नरगिस कोमा में चली गयीं. 3 मई 1981 को मुंबई में उनका निधन हुआ.

इसे भी पढ़ें-चौथे चरण में भाजपा की साख दांव पर

Cyclone Fani : तूफान से घबराएं नहीं, ध्यान रखें इन बातों का

नई दिल्ली। चक्रवाती तूफ़ान फानी धीरे-धीरे ओडिशा की ओर बढ़ रहा है. अगले कुछ घंटों में यह ओडिशा के पुरी तट से टकराएगा. इस वक्त ये तूफ़ान पुरी से 80 किमी और गोपालपुर से 65 किमी दूर है, जब ये तट से टकरायाएगा तब इसकी रफ़्तार 170 से 200 किलोमीटर/घंटा हो सकती है. तेज़ हवाओं के साथ हल्की बारिश हो रही है. गंभीर नुक़सान की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन की टीमें हाई अलर्ट पर हैं. नेवी की टीम भी ओडिशा पहुंच गई है. क़रीब 10 लाख लोगों को तटीय इलाक़ों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है. हालात को देखते हुए रात 1 बजे से भुवनेश्वर एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है. 100 से ज़्यादा ट्रेनें रद्द हैं. राज्य के सभी स्कूल-कॉलेज और दफ़्तरों को बंद रखा गया है, लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है. ओडिशा के अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी फ़ोनी तूफ़ान की वजह से अलर्ट है. वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी इसका पड़ने की आशंका है. किसानों की सलाह दी गई है कि वह अपनी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें 3 मई को 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा रफ्तार से हवा और बारिश हो सकती है.

ध्यान रखने योग्य बातें-
  • जहां तक हो सके घर से बाहर निकलें. घर में सभी जरूरी सामान टॉर्च, रस्सी, जरूरी दवाइयां और पीने का पानी अपने साथ रखें.
  • खाने-पीने की जरूरी चीजों को एक जगह सुरक्षित रख लें क्योंकि हो सकता है तूफान के बाद कुछ घंटों तक आवाजाही बंद रहे.
  • अगर घर से बाहर हैं तो मौसम खराब होने पर किसी पक्के मकान में शरण लें और जब तक मौसम पूरी तरह से ठीक न हो जाए न निकलें.
  • मौसम खराब होने पर पेड़, बिजली के खंबे के पास बिलकुल न खड़े हों.
  • अगर आप कार ड्राइव कर रहे हैं तो कोशिश करें किसी सुरक्षित स्थान में जाएं. पुल पर बिलकुल न रुकें और कार के सभी शीशे खोल दें.
  • घर में बिजली के सभी उपकरण स्विच ऑफ कर दें और आग बिलकुल न जलाएं.
इसे भी पढ़ें-धर्मयुद्ध के समक्ष दिग्विजय सिंह!

सामाजिक चेतना के सिपाही का चले जाना

गत दिवस सहारनपुर में बसपा के वरिष्ठ नेता फूल सिंह का अल्प बीमारी के बाद निधन हो गया. श्री फूल सिंह की आयु लगभग 96 वर्ष थी. स्व.फूल सिंह को यूं तो राजनीतिक रूप से बहुत प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं हुई लेकिन दलित आंदोलन, और बसपा के लोग जब यह लेख पढ़ रहे होंगे तो वे जानकर हैरान हो जाएंगे कि श्री फूल सिंह का निधन वास्तव में वर्तमान दलित राजनीति और बसपा के लिए कितनी बड़ी क्षति है? सामाजिक चेतना जगाने वाले एक ऐसे युग पुरुष का चले जाना है जिन्होंने उस समय दलित चेतना जगाने का कार्य किया जब दलित समाज के लोग अपने हकों के लिए लड़ना भी नहीं जानते थे.

बसपा अध्यक्ष कुमारी मायावती जिस विधान सभा सीट हरौड़ा से भारी मतों से जीतकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी ये वही विधान सभा सीट थी जिस पर मायावती से पहला चुनाव बसपा के टिकट पर फूल सिंह ने ही लड़ा था और मायावती के लिए इस विधान सभा सीट पर ऐसी जमीन तैयार की थी जिस पर रिकॉर्ड मतों से जीतकर मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी. मायावती से पहले जब फूल सिंह ने इस विधानसभा से चुनाव लडा था उस समय कोई भी व्यक्ति बसपा से चुनाव लड़ना ही नहीं चाहता था . लेकिन फूलसिंह ने मायावती द्वारा उन पर जताए गए विश्वास को टूटने नहीं दिया और 1991 में जब पूरे प्रदेश में राम मंदिर की लहर चल रही थी तब भी भाजपा प्रत्याशी को जबर्दस्त टक्कर दी और काफी संख्या में मत प्राप्त किए. विपरीत माहौल में भी अच्छे वोट मिलने के कारण ही मायावती की नजर इस सित पर पड़ी और वे इस सीट से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंची थी. कहीं ना कहीं ये स्व.फूलसिंह की मेहनत ही थी कि संक्षिप्त संसाधनों के बावजूद उन्होंने बसपा का एक वोट बैंक तैयार कर दिया था.

स्व. फूलसिंह का जन्म सहारनपुर के एक छोटे से गांव रूपड़ी जुनारदार में लगभग 96 वर्ष पूर्व हुआ था. उन्होंने लगभग एक सदी पूर्व भी शिक्षा के महत्त्व को जाना था. हालांकि वे मिडिल तक कि पढ़ाई भी पूरी नहीं कर सके थे लेकिन उनके अंदर कमाल की सामाजिक और राजनीतिक समझ थी. आजादी के पूर्व के महात्मा गांधी , जवाहर लाल नेहरू , सुभाष चन्द्र बोस की जनसभाओं के किस्से वे अक्सर सुनाया करते थे. आजादी के बाद वे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी की सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे. वे उस समय इंदिरा गांधी की राजनीति के समर्थक रहे.कांग्रेस के लिए खूब कार्य किया. खूब आंदोलनों में हिस्सा लिया. जेल भी गए, लेकिन अपने विचारों पर कायम रहे और उसे प्रभावित नहीं होने दिया.

स्व.फूलसिंह की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की सत्तर – अस्सी के दशक में वे मेलों, नुमाइशों में दलित जागरण के कार्यक्रमों के आयोजनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. कई बार दो – तीन दिन तक लगातार जागकर भी वें इन आयोजनों को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे.

अस्सी के दशक में ही जब मान्यवर कांशीराम ने ‘डी एस फोर’ के बैनर तले आंदोलन शुरू किया तो फूलसिंह उस आंदोलन से जुड़ गए. डी एस फोर के द्वारा किए जाने वाले बहुत से कार्यक्रमों में उन्होंने भाग लिया . बाद में बसपा के गठन के साथ ही उन्होंने पूरी तरह से बसपा के झंडे को थाम लिया. ये वो दौर था जब बसपा के कार्यकर्ताओं को बड़ी ही हीन दृष्टि से देखा जाता था. बसपा का झंडा लेकर चलने वालों का लोग मज़ाक उड़ाते थे. वो देखो हाथी के झंडे वाला जा रहा है बोलकर लोग मज़ाक उड़ाते थे.ऐसे समय में बसपा का झंडा उठाना और अपने अंतिम समय तक नीले झंडे को उठाए रखना फूलसिंह जैसी जीवटता के व्यक्ति के बूते कि ही बात थी. अपनी अंतिम सांस तक वे मान्यवर कांशीराम के गुण गाते रहे. कांशीराम जी में मुझे दूसरे अम्बेडकर की मूर्ति दिखाई देती है ये वो हमेशा बोलते थे.

श्री फूलसिंह जिस दौर में बसपा के लिए कार्य कर रहे थे वो ऐसा समय था जब पार्टी के लोगो के पास पैसा नहीं होता था. लेकिन हौसला कमाल का था. ये वो समय था जब बसपा का टिकट कोई लेने को तैयार नहीं होता था. ऐसे दौर में मज़दूरी के पैसो से और अपने परिवार का पेट काटकर समाज के लिए कुछ करने का हौसला था फूलसिंह के अंदर. दो – दो रूपए इकट्ठे करके ,लोगो से दस – बीस रूपए लेकर समाज के लिए काम करने वालो की कड़ी में अभी अगर कुछ लोग शेष बचे है तो फूलसिंह उनमें एक सबसे महत्त्वपूर्ण नाम था. नामांकन के लिए भी जेब में पैसे ना हो लेकिन मान्यवर कांशीराम के मिशन के लिए चुनाव लडने के लिए तैयार हो जाना फूलसिंह जैसे लोगो के ही बस की बात थी.

आज फूलसिंह इस दुनियां को अलविदा कहकर चले गए.लेकिन उन्हें हमेशा याद किया जाएगा उनके उन विचारों के लिए जो वे बड़ी जोरदार तरीके से लोगो के सामने रखते थे. झूठ, ढोंग, आडंबर का विरोध वे जीवनभर करते रहे. धर्म के नाम पर लोगो को मूर्ख बनाने का विरोध करते रहे. कर्मकांडों के नाम पर समाज का शोषण करने वालों का विरोध करते रहे. धर्म के नाम पर लूटने वालों का हमेशा उन्होंने विरोध किया. कई बार इसके कारण उन्हें आलोचना का शिकार भी होना पड़ा लेकिन उनके विचार कभी कोई प्रभावित नहीं कर सका.

पता नहीं बसपा के लोग या वर्तमान नेतृत्व फूलसिंह को याद रखेगा कि उन्हें भूल जाएगा लेकिन पार्टी के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को शायद ही मिटाया जा सके. फूलसिंह आखिरी समय तक मान्यवर कांशीराम की फोटो को देखकर खुश होते रहे. मायावती में देश के दबे – पिछड़े समाज के लिए कुछ अच्छा करने की संभावना देखते रहे.

आज उनका चले जाना भले ही देश में चर्चा का विषय नहीं बना हो और बसपा सुप्रीमो सहित बसपा के आज के बड़े नेता उन्हें नहीं जानते हो लेकिन स्व.फूलसिंह वास्तव में बसपा के नीव के वे पत्थर है जिनके ऊपर आज बसपा पार्टी का महल खड़ा है. आज भी उनका परिवार सामाजिक आंदोलन में उनकी परम्परा को आगे बढ़ाने में लगे है.                                                                            उन्हें शत शत नमन.

 मुकेश गौतम

इसे भी पढ़िये-बीबीएयू छात्रा ने शिक्षक के जातीय भेदभाव के खिलाफ की कुलपति से शिकायत, मांगा न्याय

बसपा सुप्रीमो का भाजपा पर बड़ा आरोप : आतंकवाद व नक्सलवाद से निपटने में सरकार फेल

लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 में समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के गणबंधन पर भाजपा की सरकार को गिराने का संकल्प लेने वाली बसपा मुखिया मायावती ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. बसपा सुप्रीमो मायावती का आरोप है कि भाजपा आतंकवाद, नक्सलवाद व अराजकता आदि से निपटने में पूरी तरह से विफल रही है.

मायावती ने कहा कि इसके बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी का उल्टा आरोप है कि हमारी सरकारें आतंकवाद पर नरम रही हैं. अगर ऐसा होता तो हमारी सरकारों के कानून के राज में हिंसक वारदातें कम व भाजपा शासन में ज्यादा क्यों. मायावती ने महाराष्ट्र में हुए नक्सली हमले में शहीद जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इसे दु:खद बताया.

उन्होंने ट्वीट किया कि ‘महाराष्ट्र के गढ़चिरौली नक्सली हमले में 15 जवानों की शहादत अति-दुख:द. उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना. किन्तु कड़वा सच यही है कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में अराजकता बढ़ी है तथा सीमा पर व देश के भीतर भी जवानों की मौतें बढ़ी हैं जो बड़ी चिन्ता की बात है.’

उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि हर प्रकार के षडय़ंत्रों आदि के बावजूद उनकी निरंकुश सरकार जा रही है. वह गैर-भाजपा शसित राज्यों में अनैतिकता, हिंसा आदि के साथ-साथ सपा-बसपा सहित विपक्ष के शीर्ष नेताओं को भी सीबीआई, ईडी, आईटी आदि सरकारी मशीनरी के जरिए भयभीत करने में लगे हुए हैं. यही नहीं राजनीतिक षडय़ंत्र करने का आरोप भी लगाया और कहा कि अभी हाल में इनका जनविरोधी अहंकार इतना सर चढ़कर बोला कि इन्होंने बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 40 विधायक तोड़कर ममता बनर्जी सरकार गिराने की खुलेआम धमकी भी दे डाली जो राजनीतिक षडयंत्र का चरम है, जिसके लिए बंगाल व देश की जनता उन्हें कभी भी माफ करने वाली नहीं है. फिलहाल मायावती पीएम मोदी पर पूरी तरह हमलावर हैं.

इसे भी पढ़ें-मोदी जी को हराइए…उनकी हार में ही देश की जीत है…

आंध्रप्रदेश में तेज बारिश, ओडिशा में 8 लाख लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

भुवनेश्वर। फैनी चक्रवात के चलते आंध्रप्रदेश में तेज बारिश हो रही है. तूफान कल ओडिशा के पुरी से टकरा सकता है. इस दौरान हवाओं की गति 175-205 किमी प्रतिघंटे हो सकती है. खतरे के मद्देनजर सुरक्षाबलों को हाईअलर्ट पर रखा गया है. तटीय इलाकों में रहने वाले 8 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. 880 राहत शिविर बनाए गए हैं. सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं. गंजाम, पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर और कटक में भारी बारिश हो सकती है.

मौसम विभाग ने बुधवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि फैनी बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है. ईस्ट कोस्टर्न रेलवे ने अब तक 103 ट्रेनें रद्द कर दी हैं. ओडिशा 11 जिलों में आचार संहिता हटा दी गई है.

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक- फैनी 6 किमी/घंटे की रफ्तार से ओडिशा की तरफ बढ़ रहा है. ज्वाइंट टाईफून वॉर्निंग सेंटर (जेडब्ल्यूटीसी) के मुताबिक- फैनी तूफान अब तक का सबसे खतरनाक चक्रवात साबित हो सकता है. ओडिशा में 1999 में आए सुपर साइक्लोन से करीब 10 हजार लोग मारे गए थे.

क्षेत्रीय मौसम विभाग के पूर्व निदेशक शरत साहू के मुताबिक- ओडिशा में 1893, 1914, 1917, 1982 और 1989 की गर्मियों में भी तूफान आए थे. लेकिन इस बार का चक्रवात बंगाल की खाड़ी के गर्म होने से बना है. लिहाजा यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है.

किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए नेवी, एयरफोर्स और कोस्टगार्ड को हाईअलर्ट पर रखा गया है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (एनडीआरएफ) और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ओडीआरएफ) को खतरे वाले इलाकों में तैनात किया गया है. अकेले भुवनेश्वर में दमकल की 50 टीमें तैनात की गई हैं. एक टीम में 6 सदस्य हैं. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने स्थानीय अधिकारियों से कहा है वे लोगों को मुफ्त खाना देने की व्यवस्था रखें.

स्पेशल रिलीफ कमिश्नर बीपी सेठी ने चेतावनी दी है कि तूफान के टकराने के दौरान उच्च ज्वार (1.5 मीटर तक) आ सकता है. लिहाजा लोग सावधानी बरतें. 15 मई तक डॉक्टरों और स्वास्थ्य अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. पुलिस प्रमुख आरपी शर्मा ने बताया कि सभी पुलिस अफसरों की भी छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं. जो अधिकारी छुट्टी पर हैं, उन्हें भी तुरंत ड्यूटी पर आने के आदेश दिए गए हैं.

इसे भी पढ़ें-चौथे चरण में भाजपा की साख दांव पर

UN ने अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी करार दिया तो US ने दी प्रतिक्रिया

0

व्हाइट हाउस ने कहा है कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और दक्षिण एशिया में सुरक्षा एवं स्थिरता कायम करने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है. व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद  के प्रवक्ता गैरेट मार्किस ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने को लेकर कहा, ‘अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और दक्षिण एशिया में सुरक्षा एवं स्थिरता लाने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है.’

मार्किस ने एक बयान में कहा कि अमेरिका मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति की सराहना करता है. जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र पहले की वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. इसी संगठन ने कश्मीर में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 40 भारतीय जवान शहीद हो गए थे.

विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी कूटनीति की जीत है. पोम्पिओ ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों का नेतृत्व करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन को भी ट्वीट करके बधाई दी. उन्होंने कहा, ‘यह कदम आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी कूटनीति की जीत है और दक्षिण एशिया में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.’

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्तागस ने कहा कि जैश कई आतंकवादी हमलों का जिम्मेदार रहा है और वह दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता एवं शांति के लिए खतरा है. उन्होंने कहा, ‘जैश संस्थापक और सरगना होने के नाते अजहर भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की सभी अनिवार्यताओं को पूरा करता है. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश अजहर के खिलाफ संपत्तियां सील करने, यात्रा प्रतिबंध एवं हथियार संबंधी प्रतिबंध लगाने के लिए प्रतिबद्ध है. हम सभी देशों से इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने की उम्मीद करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा जताई इस प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं कि पाकिस्तान अपने बेतहर भविष्य की खातिर अपनी जमीन से आतंकवादियों एवं आतंकवादी समूहों को काम करने की अनुमति नहीं देगा.’ बता दें, संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को बुधवार को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित कर दिया. भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. संरा सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन के सरगना को ‘‘काली सूची” में डालने के एक प्रस्ताव पर चीन द्वारा अपनी रोक हटा लिए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह घोषणा की.

Read it also-भाजपा और योगी ने दिया प्रवीण निषाद को झटका

जानिये कहां-कहां ट्रेन टिकट में आपको छूट देता है भारतीय रेलवे

नई दिल्ली। रेल में सफर तो हम सभी बहुत करते है लेकिन इसके बाद भी हम रेलवे के कई नियमों के बारे में नहीं जानते हैं. क्या आपको पता है रेलवे 53 अलग-अलग श्रेणियों में टिकट पर छूट देता है. ये छूट 10 से 100 प्रतिशत तक होती है. ये छूट वरिष्ठ नागरिकों,विद्यार्थियों, डॉक्टरो को दी जाती है. इसकी जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है. बुजुर्गों के अलावा ये रियायत बाकी व्यक्तियों को संबंधित संगठन का प्रमाण पत्र दिखाने के बाद ही दी जाएगी. हालांकि किसी दूसरे देश द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज रियायत के लिए मान्य नहीं होंगे.

यहां समझे किसे कितनी छूट

व्यक्तियों की श्रेणी                                                छूट पुरुष (60 वर्ष या उससे अधिक)          सभी क्लास में 40% (राजधानी,                                                    शताब्दी, दुरंतो ट्रेन सहित) महिलाएं (60 वर्ष या उससे अधिक)       सभी क्लास में 50% (राजधानी,                                                    शताब्दी, दुरंतो ट्रेन सहित) मेडिकल कर्मियों को छूट

व्यक्तियों की श्रेणी                                              छूट का प्रतिशत डॉक्टर-एलोपैथिक (किसी भी उद्देश्य के लिए यात्रा)     राजधानी / शताब्दी /                                     जन शताब्दी ट्रेनों में सभी क्लास में 10% छूट

नर्स और दाइ (छुट्टी या ड्यूटी के लिए यात्रा)        दूसरी श्रेणी में 2 प्रतिशत                                                      और स्लीपर क्लास में 25% छूट

छात्रों को भी दी जाती है छूट

  • सामान्य वर्ग में आने वाले छात्र- छात्राओं को होमटाउन या शैक्षिक टूर पर जा रहे 2nd क्लास और स्लीपर क्लास में 50 प्रतिशत छूट दी जाती है.
  • एससी,एसटी वर्ग में आने वाले विद्यार्थियों को होमटाउन या शैक्षिक टूर पर जाने के लिए 2nd क्लास और स्लीपर क्लास में 75 प्रतिशत छूट दी जाती है.
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों छात्रों को होमटाउन या शैक्षिक टूर (साल में एक बार) जाने के लिए 75 प्रतिशत छूट दी जाती है.
  • राज्य स्तर की प्रवेश परिक्षी में जाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को 2nd क्लास में 75 प्रतिशत छूट दी जाती है.
  • यूपीएससी और केंद्रीय कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित मुख्य लिखित परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्रों को 2nd क्लास के लिए 50 प्रतिशत की रियायत मिलती है.
  • शोध कार्य के सिलसिले में यात्रा के लिए 35 वर्ष की आयु तक के शोधकर्ता को भी ट्रेन की स्लीपर क्लास और 2nd क्लास टिकट पर 50 प्रतिशत की छूट मिलती है.
  • वर्क कैंप में भाग लेने वाले छात्र के साथ ही दूसरे लोगों को स्लीपर क्लास और 2nd क्लास टिकट पर 50 प्रतिशत की रियायत मिलती है.

ये है छूट पाने के नियम

सभी रियायती किराए की गणना रेलवे के अनुसार, मेल / एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए ट्रेन के प्रकार के बावजूद किराए के आधार पर की जाती है

रियायतें केवल मूल किराए के संबंध में स्वीकार्य हैं. अन्य शुल्कों के संबंध में कोई रियायत स्वीकार्य नहीं है, जिसमें सुपर फास्ट अधिभार, आरक्षण शुल्क आदि शामिल हैं.

यात्री को एक समय में केवल एक ही प्रकार की रियायत मिलेगी है और किसी भी व्यक्ति को एक साथ दो या अधिक रियायतों की अनुमति नहीं है. रेलवे द्वारा दिए गए रियायत टिकट को यात्री किसी अन्य क्लास के लिए बदल नहीं सकते हैं.

सीजन टिकट, सर्कुलर यात्रा टिकट और कुछ ट्रेनों में रियायत नहीं दी जाएगी.

इसे भी पढ़ें-आप 2 रुपये खर्च कर जान सकते हैं किसे दिया वोट

व्रत और उपवास

व्रत और उपवास ऐसे दो शब्द हैं , जिनके बारे में लोगों में कई भ्रांतियां हैं. इस संबंध में जो हम समझते हैं या करते हैं. उसका व्रत और उपवास से कोई लेना देना नहीं है.

पाखंडी व्यवस्था (असमानता पर आधारित तथाकथित …धर्म) में व्रत और उपवास का काफी प्रचलन है . पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं . इसे अपने जीवन का एक हिस्सा समझती हैं . प्रत्येक वर्ष के 12 महीनों में लगभग प्रत्येक माह कोई ना कोई व्रत और उपवास का कार्यक्रम अवश्य रहता है. किसी- किसी माह में तीन- चार कार्यक्रम बन जाते हैं. अब तो ये टीनएजर्स में भी काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. वास्तव में व्रत और उपवास क्या है ? आओ इसका पता लगाएं.

व्रत में अक्सर लोग क्या करते हैं , खासकर महिलाएं. यह समझना सबसे ज्यादा जरूरी है . जैसे एकादशी, शिवरात्रि, नवरात्रि या जन्माष्टमी आदि का सीजन आता है या दिन आता है. उस दिन महिलाएं बड़े उत्साह के साथ काम में लग जाती हैं. जल्दी-जल्दी सुबह उठती हैं. नित्य क्रिया करती हैं. स्नानादि करके पूजा पाठ की सामग्री जैसे फल-फूल, अगरबत्ती- दीपबत्ती, माचिस, मिठाई व थाली आदि लेकर अपने अराध्य देवी- देवता की फोटो के सम्मुख व्रत से संबंधित पूजा पाठ में लग जाती हैं . माला – फूल चढ़ाती हैं . मिठाई अर्पित करती हैं. एक हाथ से जलती अगरबत्ती पकड़ कर दूसरे हाथ के सहारे जलती मोमबत्ती वाले हाथ को सहारा देकर घुमा घुमा कर फोटो वाले देवी देवता को सुंघाती हैं . धूप बत्ती भी सुंघाती हैं. घर में बच्चों को भले ही खाने को घी ना मिले, लेकिन दिन के उजाले में भी प्रकाश के लिए घी का दीप जलाती हैं . घर के सारे जरूरी कामकाज छोड़कर व्रत के पूजा पाठ में लगी रहती हैं. घर के मुखिया सास-ससुर या अन्य जब किसी काम के लिए कहते हैं तो फौरन जवाब दे देती हैं कि देख नहीं रहे हो, *आज मेरा व्रत है.* अब प्रश्न यह उठता है कि क्या किसी फोटो के सामने अगरबत्ती जला देने से, फल- फूल चढ़ा देने से या घी के दिए जला देने से व्रत पूरा हो जाता है . या यूं कहें कि किसी फोटो के सामने हाथ जोड खडे होकर या बैठकर ताली बजा- बजाके, गर्दन हिला- हिलाके स्तुति गान करने को ही व्रत कहते हैं. मेरे विचार से तो शायद नही.

*व्रत* का साधारण सा अर्थ है *संकल्प लेना* या *दृढ़ प्रतिज्ञ होना*. झूठ ना बोलने , चुगली ना करने, चोरी ना करने , जुआ ना खेलने , नशा ना करने, व्यभिचार ना करने , बड़ों का सम्मान करने, गुरुओं का आदर करने, घर परिवार के भरण पोषण के लिए कुशल आजीविका अर्जित करने तथा बच्चों की शिक्षा-दीक्षा आदि के उचित प्रबंध करने के *संकल्प या दृढ़ प्रतिज्ञ होने* को *व्रत कहते हैं*. क्या हम इस प्रकार का संकल्प लेते हैं? यदि ऐसा नहीं करते हैं तो यह व्रत नही एक पाखंड है.

इसी प्रकार व्रत को पाली भाषा में भी समझ सकते हैं. *व्रत पाली भाषा के विरत शब्द से बना हुआ है,* जिसका अर्थ होता है , पाप कर्मों या बुरे कर्मों से विरत रहना या दूर रहना. जैसे हम झूठ नहीं बोलेंगें. चोरी नही करेंगें. चुगली नही करेंगें. नशीले आदि पदार्थों से दूर रहेंगें. बिना सोचे विचारे कोई काम नही करेंगें. इस प्रकार *मनोविकारों से दूर रहकर और चित्त को निर्मल कर सीलों का पालन करना ही व्रत है.* पालीसुत्त में भी कहा गया है कि-

  • *पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.* मैं प्राणी हिंसा से विरत रहने या दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता/करती हूं.
  • *अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.* मैं बिना दिए हुए दान अर्थात चोरी से विरत रहने या दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता/करती हूं.
  • *कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.* मैं व्यभिचार से विरत रहने या दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता/ करती हूं.
  • *मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.* मैं झूठ बोलने से विरत रहने या दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता/ करती हूं.
  • *सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि.* मैं प्रमाद पैदा करने वाले नशीले पदार्थों से विरत रहने या दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता/ करती हूं.

इसी प्रकार *उपवास* का भी मामला है . लोग अक्सर किसी निर्धारित माह की निर्धारित तिथि पर पड़ने वाले विशेष अवसरों पर खासकर महिलाएं बिना भोजन किए निराहार किसी विशेष अनुष्ठान में संलिप्त दिखाई पड़ती हैं. पूछने पर पता चलता है कि उनका उपवास है. उपवास के दिन वे किसी से ठीक से बात नही करती हैं. यहां तक कि सास-ससुर और पति आदि के भोजन – पानी मांगने पर नाक भौंह सिकोडते हुए कहती हैं कि दिखाई नहीं दे रहा कि *आज मेरा उपवास है.* आप लोगों को केवल अपने भोजन पानी की ज्यादा चिंता फिकर है. मेरे उपवास की नही. आज सुबह से कुछ खाया पिया नही है . इसका जरा सा भी ख्याल नही है . शाम को पति के ऊपर और अधिक उखड जाती हैं, जब उनको यह पता चलता है कि पति ने उनके खाने-पीने के लिए कुछ फल फ्रूट नही लाया है.

उपवास के दिन वे घर का कोई विशेष काम धाम नहीं करती हैं. न जानवरों को चारा पानी देती . न खेती-बाड़ी में विशेष सहयोग ही करती हैं. कुल मिलाकर यह उपवास न होकर एक प्रकार से भूख हड़ताल का तांडव सिद्ध होता है. क्या बिना भोजन किए निराहार, निराजल रहने को, अपनों का अनादर करने को, पूजा की थाल सजा के किसी फोटो के सामने बुत बनने को उपवास कहते हैं. मेरे विचार से शायद नही.

उपवास हिंदी के दो शब्दों से मिलकर बना है . *उप* और *वास*. उप का शाब्दिक अर्थ है *समीप या निकट* . वास का शाब्दिक अर्थ है *निवास करना या कहीं जाकर रहना*. अर्थात सज्जनों की संगति करना. सन्मार्ग पर चलना. बुद्धिजीवियों के समीप या निकट रहना . अच्छे और गुणवान लोगों के निकट निवास करना. बुरे लोगों की संगतियों से दूर रहना. पाप कर्मों से दूर रहकर पुण्यकर्मों को करना . सीलों का पालन करना. चित्त को निर्मल और शुद्ध करना ही उपवास है . अर्थात *दुर्जनों से दूर रहकर सज्जनों के समीप रहना ही उपवास है.* क्या हम उपवास में ऐसा करते हैं ? अगर नही करते हैं, तो यह उपवास नही एक पाखंड है.

पालीसुत्त में भी कहा गया है कि- *सब्ब पापस्स अकरणं कुसलस्स उपसंपदा सचित्त परियोदपनं एतं बुद्धान सासनं.* अर्थात सभी पाप कर्मों से दूर रहकर कुशल कर्मों को करना ही बौद्धों का संदेश है. ———————–

सुनील दत्त बौद्धिक एवं सामाजिक चिंतक रायबरेली Read it also-महागठबंधन की रैली में कन्नौज पहुंचीं मायावती तो डिंपल यादव ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद

मोदी जी को हराइए…उनकी हार में ही देश की जीत है…

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी. सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा…और ये 5 साल के शासन के बाद हमें पाकिस्तान का भय दिखा कर वोट मांग रहे है. उस पाकिस्तान का भय, जो हमसे 4 युद्ध बुरी तरह हार चुका है. जो एक फेल्ड स्टेट बन चुका है. उस पाकिस्तान का डर ये हमें दिखाते है. सोचिए, अगले 5 साल ये क्या करेंगे? इसलिए, मोदी जी को हराइए.

ये हमें परोक्ष रूप से मुसलमानों का डर दिखाते है. उस मुसलमान से, जिसने 600 साल से अधिक समय तक हिन्दुस्तान पर राज किया, लेकिन हिन्दुस्तान को मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना सके. उस मुसलमान का डर दिखा कर हमसे वोट मांग रहे है, जो आज पंक्चर और मुर्गे की दुकान न हो, तो भूखा मर जाए. सोचिए, ऐसे पीएम फिर से सत्ता में आ गए तो अगले 5 साल और क्या करेंगे? इसलिए, मोदी जी को हराइए.

मोदी जी ने जिस नोटबन्दी को आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बडा सर्जिकल स्ट्राइक बताया था, वो बुरी तरह फेल हुआ. न आतंकवाद खत्म हुआ न नक्सलवाद. अपनी असफलता का हर ठीकरा कांग्रेस के सिर पर फोडने वाले मोदी जी को हराइए, वर्ना अगले 5 साल में ये देश का क्या हाल करेंगे, इसका अन्दाजा लगाना भी मुश्किल है.

पूंजीवाद के सबसे बडे सेफ्टी वॉल्व, ट्रिकल डाउन थ्योरी, को इन्होंने नोटबन्दी और जीएसटी से बर्बाद कर दिया. अब पूंजीपतियों के घडे से धनरूपी पानी भी नहीं चूं रहा, जिसे चाट कर आम आदमी अपनी प्यास बुझा सके. मैं छोटे और मझोले उद्योगपतियों की बात कर रहा हूं. अकेले नोटबन्दी के कारण लाखों नौकरियां खत्म हुई. लोगों की आमदनी घटी. अर्थशास्त्र के ऐसे जानकार पीएम अगर दुबारा सत्ता में आते है तो सोचिए, देश का क्या होगा? इसलिए भी मोदी जी को हराइए.

7 लाख केन्द्र सरकार की असैन्य नौकरी समेत देश भर में तकरीबन 25 लाख सरकारी नौकरियों (राज्यों के) के पद रिक्त है. ध्यान रहे, अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकारे है. और 30 लाख से अधिक पद रिक्त है, लेकिन इस सरकार ने किसी को इन पदों पर नौकरी नहीं दी. प्राइवेट नौकरिओयों में भी श्रम कानूनों को इतना कमजोर बनाय अकि आज कर्मचारी गदहा बन कर रह गया है. न कोई जॉब सिक्योरिटी, न आगे बढने की असीमित संभावना. ऐसे पीएम को क्या आप दुबारा सता में आने देना चाहेंगे? बिल्कुल नहीं. इसलिए भी मोदी जी को हराइए.

जिस गाय के नाम पर ये हमसे वोट मांग रहे है, इन्हीं के शासन में भारत बीफ का सबसे बडा एक्सपोर्टर बन गया. देश में श्वेत क्रांति लाने की जगह इनकी सरकार में मॉब लिंचिंग की क्रांति आ गई. गाय जहां देश के बेरोजगार युवाओं के लिए आजीविका का साधन बन सकती थी, उसकी जगह इनकी सरकार और पार्टी की राजनीति ने युवाओं को गो पालक की जगह फर्जी गो रक्षक या कहे कि गाय के नाम पर गुन्दा और हत्यारा बना दिया. क्या आप चाहेंगे कि आपका बच्चा भी अगले 2-3 सालों में जब युवा हो तब वो एक बेहतर इंजीनियर या डॉक्टर बननेकी जगह गो रक्षक बने. अगर नहीं, तो आप मोदी जी को हराइए.

बीएसएनएल, रेलवे, एचएएल, इंडिया पोस्ट समेत सभी सरकारी विभागों के उन कर्मचारियों से एक सवाल कि आप अपने दिल पर हाथ रख कर बोलिए कि इस सरकार ने पिछले 5 साल में आपके विव्भाग का कबाडा किया या नहीं. आपकी नौकरी खतरे में डाली या नहीं. आपको अपने पेंशन का टेंशन दिया या नहीं. अगर जवाब सकरात्मक है तो आप मोदी जी को हराइए. वर्ना अगले 5 साल में ये आपकी आजीविका के साथ क्या करेंगे, आपको अन्दाजा तक नहीं.

मेक इन इंडिया के तहत आपके बच्चे को नौकरी मिल गई हो, मुद्रा लोन के तहत आपका बच्चा सेट हो गया हो, आपके बच्चे को किसी बेहतर इंजीनियरिंग मेडिकल कॉलेज में मुफ्त शिक्षा मिल रही हो, तो जरूर फिर से मोदी जी को लाइए. अन्यथा उन्हें हराइए. वर्ना, आप क्या आपकी आने वाली पीढी भी स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अपने जीवन भर की कमाई लुटाता रहेगा और सरकारें आपको ठेंगा दिखाती रहेंगी.

देश के करोडों किसान ईमानदारी से बता दे कि साल के 6 हजार मिलने से आपकी आमदनी दोगुनी हो जाएगी या इतने पैसे से आपका जीवन संभल जाएगा. यदि हां तो लाइए फिर मसे मोदी जीको जीता कर. अन्यथा, अगर आपको लगता है कि ये पैसा सीधे-सीधे वोट खरीदने के लिए रिश्वत के तौर पर दी जा रही है और इस पैसे से आपकी कृषि व्यवस्था पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पडने वाला है तो हराइए मोदी जी को. अन्यथा, अभी तो किसान से एक मल्टीनेशनल कंपनीज ने लेज आलू उगाने के लिए करोडों रुपये का हर्जाना मांगा है, ये सरकार फिर से आई तो आपकी अपनी जमीन भी अडानी-अंबानी के हाथों गिरवी रखवा देंगे. इस वजह से भी आपको मोदी जी को हराना चाहिए.

देश के युवाओं को लगता है कि उन्हें मोदी जी के शासनकाल में बेहतर शिक्षा,बेहतर नौकरी मिली है या करियर विकास के लिए संभावनाओं का द्वार खुलता नजर आ रहा है, तो उन्हें फिर से वोट दीजिए. लेकिन, उससे पहले ये जांच लीजिए कि क्या इस सरकार ने युवाओं के लिए यूनिवर्सिटीज की संख्या, सीटों की संख्या बढाई, नौकरियों की संख्या बढाई. अगर जवाब न में है तो निश्चित तौर पर मोदी जी को हराइए.

और हां, वोट करते समय ये बिल्कुल भी न सोचे कि मोदी नहीं तो कौन? ये दुनिया विकल्पहीन नहीं होती. और ये भी कि भारत जैसे देश को कोई अकेला पीएम चला ले, ये अभी तक नहीं हुआ है. ये देश सदिओं से चलता आ रहा है, चल रहा है, चलता रहेगा. हां, बीच-बीच में कुछ लोगों ने अपने अहमकपने में इस देश को थोडा पीछे जरूर धकेल दिया. फिर भी ये देश अपने और अपने लोगों के बूते आगे बढता रहा है और बढता रहेगा.

इस बीच, मोदी और इन्दिरा जैसे कितने पीएम आते-जाते रहेंगे. लेकिन, हमें किसी को ये गुमान नहीं होने देना है कि वो है तो देश है. नहीं. हम है, तो देश है. इस बार, इस गुमान को परास्त करने के लिए भी मोदी जी को हराइए…

शशि शेखर Read it also-तीसरे चरण का चुनाव सपा- बसपा के मेल का सही परीक्षण

भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने बुर्का को बताया राष्ट्रहित में

शिवसेना के बुधवार को श्रीलंका की तर्ज पर देशहित में बुर्का और नकाब पर बैन लगाने की मांग के साथ ही इस विषय पर राजनीति तेज हो गई है. शिवसेना की यह मांग ऐसे समय की है जब देश में लोकसभा चुनाव चल रहा है और 3 चरणों की वोटिंग बाकी है. केंद्र में फिर से सत्ता की वापसी में जुटी बीजेपी ने भारत में बुर्का पर प्रतिबंध को गैरजरुरी बताया, लेकिन भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने इस मांग का समर्थन किया है.

बीजेपी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने भारत में बुर्का में बैन की मांग का विरोध किया. उन्होंने कहा कि भारत में बुर्का में बैन की जरुरत नहीं. दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से भोपाल प्रत्याशी और हिंदूवादी नेता साध्वी प्रज्ञा ने इस पर देशहित में बैन का समर्थन किया.

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि किसी कारण से अगर कोई इस माध्यम का लाभ उठाते हैं और इससे देश को नुकसान पहुंचता हो, लोकतंत्र खतरे में हो या फिर सुरक्षा खतरे में हो तो ऐसी परंपराओं में थोड़ी ढील देनी चाहिए. कानून के जरिए बैन लगाया जाए इससे अच्छा है कि वो खुद ही इस पर फैसला लें. अगर कोई इसके लिए जरिए गलत काम करता है तो उनका ही पंथ बदनाम होगा.

नरसिम्हा राव ने कहा कि बुर्के पर फिलहाल पाबंदी लगाने की जरुरत नहीं. हर देश को अपनी सुरक्षा के हिसाब से फैसला लेना होता है. हमारा देश सुरक्षित है.

इससे पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने श्रीलंका में ईस्टर संडे पर आतंकवादी हमलों के बाद वहां की सरकार की ओर से बुर्का पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी नियम लाने की योजना का हवाला दिया. हमलों में 250 लोगों की मौत हो गई थी.

शिवसेना ने अपने मुखपत्रों ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ में आज बुधवार को छपे संपादकीय में कहा, ‘इस प्रतिबंध की अनुशंसा आपातकालीन उपाय के तौर पर की गई है जिससे कि सुरक्षा बलों को किसी को पहचानने में परेशानी ना हो. नकाब या बुर्का पहने हुए लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं.’ ‘डेली मिरर’ समाचार पत्र ने सूत्रों के हवाले से मंगलवार को कहा था कि श्रीलंकाई सरकार मौलानाओं से विचार-विमर्श कर इसे लागू करने की योजना बना रही है और इस मामले पर कई मंत्रियों ने मैत्रिपाला सिरिसेना से बात की है.

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी शिवसेना की इस मांग का विरोध किया है. रामदास अठावले ने कहा कि शिवसेना की यह मांग गलत है. हर बुर्का पहनने वाली महिला आतंकवादी नहीं होती. यह उनकी पारंपरिक पोशाक है. उनका हक है कि वे इसे पहन सकती हैं. ऐसा लगता है कि वे आतंकी हैं तो उनका बुर्का हटाया जा सकता है. भारत में बुर्के पर बैन नहीं लगना चाहिए.

Read it alos-ओमप्रकाश राजभर ने उतारे 39 प्रत्याशी, उठने लगा यह सवाल

मजदूर दिवस पर मिल प्रबंधन ने मजदूरों पर चलाई गोलियां, जानिए- क्‍या है पूरा मामला

गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में मेरठ हाइ-वे पर महेंद्रपुरी कट के पास स्थित मोदी कपड़ा मिल में बुधवार सुबह मिल प्रबंधन व मजदूरों के बीच झड़प हो गई. आरोप है कि मजदूर दिवस पर मिल प्रबंधन की ओर से दर्जनों राउंड फायरिंग की गई, जिसमें दो मजदूरों को गोली लगी है. करीब 15 साल से बंद पड़ी मोदी कपड़ा मिल के मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन चोरी-छिपे मिल में पड़ा स्क्रैप बेचना चाहता है. बुधवार को प्रबंधन स्क्रैप निकालने की कोशिश कर रहा था, तभी सैकड़ों की संख्या में मजदूर पहुंच गए.

बवाल की आशंका को देखते हुए करीब 8-10 थानों की फोर्स भी मौके पर बुला ली गई. ताजा जानकारी के मुताबिक प्रबंधन के लोगों को मिल से निकालकर मोदीनगर थाने भिजवाया गया है. उग्र मजदूरों को पुलिस अधिकारी समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं. पुलिस की ओर से फायरिंग के आरोप में प्रबंधन के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन दिया जा रहा है.

सूचना के बाद थाना प्रभारी के साथ सीओ मोदीनगर केपी मिश्र, एसपी ग्रामीण नीरज कुमार जादौन मौके पर पहुंचे और आसपास के कई थानों की फोर्स मौके पर बुलाई गई. पुलिस अधिकारी प्रबंधन के लोगों को मिल से बाहर निकालकर और मजदूरों को शांत कराने के प्रयास में जुटे हुए हैं.

गौरतलब है कि मोदी कपड़ा मिल करीब 15 साल पूर्व बंद हो गई थी. उस समय मिल में हजारों की संख्या में कर्मचारी काम कर रहे थे. मिल बंद होते समय मजदूरों को उनका भुगतान नहीं मिला था. उसी समय से मजदूरों और मिल प्रबंधन के बीच भुगतान को लेकर खींचतान चली आ रही है. मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से प्रबंधन चोरी-छिपे मिल में पड़ा स्क्रैप बेचने की फिराक में है. मिल की मशीनरी व अन्य उपकरण रखे हैं, जिनकी कीमत आज भी करोड़ों रुपये में है.

मजदूरों का आरोप है कि बुधवार सुबह 10 बजे उन्हें सूचना मिली की प्रबंधन के कई लोग मिल में घुसे हैं. इसके आधार पर 100-150 मजदूर मिल पहुंचे. आरोप है कि प्रबंधन ने निजी सुरक्षाकर्मियों और बाउंसरों को लगा रखा था. पीछे के रास्ते प्रबंधन स्क्रैप निकालने में जुटा था. सैकड़ों मजदूरों ने विरोध किया तो पहले उनसे मारपीट की गई. इस कारण हंगामा हुआ और जमकर पथराव किया गया. आरोप है कि मिल प्रबंधन के लोगों ने करीब तीन दर्जन राउंड फायरिंग की, जिस कारण मौके पर हड़कंप मच गया.

आरोप है कि फायरिंग में दो मजदूरों को गोली लग गई देखते ही देखते 400-500 मजदूर मिल पर जुट गए और उग्र प्रदर्शन करने लगे. वहीं फायरिंग की सूचना के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया और तुरंत स्थानीय थाना पुलिस के साथ आला अधिकारी मौके पर पहुंचे.

मेरठ हाइवे पर स्थित कपड़ा मिल पर बीते करीब दो घंटे से जोरदार हंगामा चल रहा है. करीब 500 मजदूर कपड़ा मिल व हाइवे पर इकट्ठे हैं. हंगामे के कारण हाइवे का यातायात भी बाधित हो गया. मेरठ आने और जाने वाले दोनों मार्गों पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं. एसपी ग्रामीण नीरज कुमार जादौन ने कहा कि दो लोग घायल हुए हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें गोली लगी है या पत्थर की चोट लगी है. दोनों ओर से पथराव किया गया है. मिल प्रबंधन के लोगों को थाने में बिठाया गया है. उनका कहना है कि अपनी सुरक्षा में हवाई फायर किया गया है. फिलहाल लोग शांत हैं. मामले की वीडियोग्राफी कराई जा रही है. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Read it also-कन्नौज में डिंपल यादव के लिए वोट मांगेंगी मायावती

PM मोदी पर मायावती ने ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ का लगाया आरोप

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. मायावती ने अपने ट्विटर अकाउंट पर तीन ट्वीट किए. इन ट्वीट के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा संज्ञान में नहीं लिए जाने पर सवाल उठाया है. मायावती का कहना है कि यूपी सहित देश के जिन राज्यों में भी बीजेपी की सरकारें हैं वहां चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग चरम पर बना हुआ है. इतना ही नहीं, उन्होंने गैर-बीजेपी राज्यों में अनैतिकता, हिंसा आदि के साथ-साथ सपा-बसपा सहित विपक्ष के शीर्ष नेताओं को भी सीबीआई, ईडी, आईटी आदि सरकारी मशीनरी के जरिए भयभीत करके राजनीतिक षडयंत्र करने का आरोप लगाया.

मायावती ने ट्विटर पर लिखा, ”यूपी सहित देश के जिन राज्यों में भी बीजेपी की सरकारें हैं वहां चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग चरम पर बना हुआ है. खासकर वोट वाले दिन तो हर सीमा लांघ दी जाती है. यूपी, महाराष्ट्र, त्रिपुरा आदि इसके खास उदाहरण हैं. फिर भी चुनाव आयोग इसका उचित संज्ञान क्यों नहीं ले रहा है?” वहीं दूसरे ट्वीट में उन्होंने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए लिखा, ”पीएम मोदी को पता है कि हर प्रकार के षडयंत्रों आदि के बावजूद उनकी निरंकुश सरकार जा रही है. इसीलिए वे गैर-बीजेपी राज्यों में अनैतिकता, हिंसा आदि के साथ-साथ सपा-बसपा सहित विपक्ष के शीर्ष नेताओं को भी सीबीआई, ईडी, आईटी आदि सरकारी मशीनरी के जरिए भयभीत करने में लगे हुए हैं.”

मायावती ने पीएम मोदी पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार गिराने की खुलेआम धमकी देने पर भी हमला किया. उन्होंने लिखा, ”और अभी हाल में इनका जनविरोधी अहंकार इतना सर चढ़कर बोला कि इन्होंने बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 40 विधायक तोड़कर ममता बनर्जी सरकार गिराने की खुलेआम धमकी भी दे डाली जो राजनीतिक षडयंत्र का चरम है, जिसके लिए बंगाल व देश की जनता उन्हें कभी भी माफ करने वाली नहीं है.”

Read it also-चौथे चरण में भाजपा की साख दांव पर

Fani Cyclone Alert: फेनी तूफान के चलते चुनाव आयोग ने उठाया ये बड़ा कदम

0

ओडिशा में तूफान फेनी के मद्देनजर चुनाव आयोग ने 11 जिलों में चुनावी आचार संहिता को हटाने की मंजूरी दे दी है जिससे राहत एवं बचाव कार्यक्रम तेजी से किया जा सके. एक चुनाव अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. मंगलवार को जारी आदेश में राकेश कुमार ने कहा कि इससे पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, भद्रक, बालासोर, मयूरभंज, गजपति, गंजम, खोरधा, कटक और जाजपुर में ऐहतियाती कदम उठाने में तेजी आएगी. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आग्रह पर चुनाव आयोग ने मंगलवार शाम यह निर्णय लिया.

पटनायक चुनाव आयोग से तटीय जिलों से आदर्श आचार संहिता हटाने का आग्रह करने के लिए मंगलवार को दिल्ली में थे जिससे वहां तूफान फेनी के आने से पहले ही आपदा प्रबंधन कार्यवाही की जा सके. तूफान फेनी के ओडिशा तट पर शुक्रवार तक आने की संभावना है. पटनायक ने पटकुरा विधानसभा चुनाव की तिथि 19 मई से आगे बढ़ाने का भी आग्रह किया था. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मुलाकात कर उन्होंने वहां चुनाव की तिथि को आगे बढ़ाने का आग्रह किया जिससे कि सभी लोग मिल-जुलकर काम कर सकें और प्रशासन लोगों की जान-माल को बचाने पर ध्यान दे पाए.

गृह मंत्रालय ने मंगलवार को चक्रवाती तूफान ‘फेनी’ के मद्देनजर निवारक व राहत उपाय अपनाने के लिए चार राज्यों को 1086 करोड़ रुपये की अग्रिम वित्तीय सहायता जारी की है. गृह मंत्रालय के बयान से यह जानकारी मिली. आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) के निर्णय के आधार पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से सहायता प्राप्त करेंगे. चक्रवाती तूफान ‘फेनी’ के दक्षिणपूर्व और इससे सटे दक्षिणपश्चिम बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की वजह से चार तटीय राज्यों को हाईअलर्ट पर रखा गया है. कुल 1086 करोड़ रुपये में से, आंध्रप्रदेश को 200.25 करोड़, ओडिशा को 340.875 करोड़, तमिलनाडु को 309.375 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 235.50 करोड़ रुपये मिलेंगे.

चक्रवाती तूफान ‘फेनी’ के मंगलवार मध्यरात्रि तक ‘बेहद तीव्र’ होने की आशंका है, जिससे आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में गुरुवार तक भारी वषार् होगी. भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार शाम इस बारे में आगाह किया. आईएमडी ने चेतावनी दी है कि चक्रवात से घरों, संचार और बिजली नेटवर्क और रेल व सड़क अवसंरचना को नुकसान होने की संभावना है. साथ ही खड़ी फसलों, बागवानी और नारियल व ताड़ के पेड़ों को भी काफी नुकसान होगा. इसके अलावा जहाजों और बड़ी नौकाओं के लंगर टूटने की संभावना है.

आईएमडी ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के गहरे समुद्री क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी है. आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्हा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को फिर से राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक की, और प्रभावित राज्यों में तैयारियों की समीक्षा की. सिन्हा ने निर्देश दिया कि जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए और भोजन, पीने के पानी और दवाओं समेत सभी तरह की आवश्यक आपूर्ति को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं.

बयान में कहा गया है, “उन्होंने सभी संबंधित पक्षों को सलाह दी कि वे नुकसान की स्थिति में बिजली और दूरसंचार जैसी आवश्यक सेवाओं के रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए पयार्प्त तैयारी करें.” भारतीय तटरक्षक और नौसेना ने राहत और बचाव कायोर्ं के लिए जहाजों और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है, जबकि इन राज्यों में सेना और वायुसेना की इकाइयों को भी तैयार रखा गया है.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने कुल 41 टीमें तैनात की हैं, जिसमें आंध्र प्रदेश में आठ, ओडिशा में 28 और पश्चिम बंगाल में पांच टीमों को तैनात किया गया है. इसके अलावा, एनडीआरएफ ने पश्चिम बंगाल में 13 और आंध्र प्रदेश में 10 टीमों को तैनात किया है. ‘फेनी’ फिलहाल दक्षिण-पश्चिम में और बंगाल की खाड़ी से सटे दक्षिण-पश्चिम में है. मंगलवार शाम से लगभग 21 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है.

Read it also-चंद्रशेखर का ऐलान, नहीं लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव