जय भीम शब्द में कितनी ताकत है, यह एक बार फिर से सामने आ गया है। IMDB ने साल 2021 की सबसे लोकप्रिय भारतीय फिल्मों की अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें फिल्म जय भीम साल की सबसे लोकप्रिय बनी है। IMDB अपनी यह सूची पेज व्यूज के आधार पर बनाता है। इसके लिए किसी भी फिल्म या शो को 1 जनवरी से 29 नवंबर के बीच रिलीज किया जाना चाहिए और इसकी औसत IMDB उपयोगकर्ता रेटिंग 6.5 या उससे ज्यादा होनी चाहिए। और इस बार इसमें सबसे ज्यादा रेटिंग जय भीम को मिली है।
फिल्म जय भीम ‘द शौशैंक रिडेम्प्शन’ को पछाड़कर सबसे अधिक रेटिंग वाली आईएमडीबी (IMDb) फिल्म बन गई है। ‘जय भीम’ को 10 में से 9.6 रेटिंग मिली है। आईएमडीबी (www.imdb.com) को फिल्मों, टीवी शो और मशहूर हस्तियों के बारे में जानकारी के लिए दुनिया का सबसे लोकप्रिय स्रोत माना जाता है।
तमाम विवादों से घिरने और आलोचनाओं की मार झेलने के बावजूद तमिल फिल्म ‘जय भीम’ दर्शक वर्ग में अपनी जगह बना चुकी है। अपनी रिलीज के बाद से ही साउथ के सुपरस्टार सूर्या द्वारा अभिनित यह फिल्म लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। साउथ के निर्देशक टीजे ग्नानवेल ने इस फिल्म का निर्देशन किया है और वही इसके लेखक भी हैं। मद्रास हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस चंद्रा के एक चर्चित केस पर आधारित यह फिल्म तमिलनाडु की एक जनजाति के उत्पीड़न को दिखाती है। यह फिल्म 2 नवंबर 2021 को रिलीज हुई थी। फिल्म के टॉप पर रहने पर अभिनेता सूर्या ने अपनी खुशी जाहिर की है और कहा है कि फिल्म ‘जय भीम’ ऐसा ही एक अनुभव रहा है, इस फिल्म का हिस्सा बनकर मुझे बेहद गर्व है। बता दें कि फिल्म ‘जय भीम’ अमेजन के जरिए 200 से ज्यादा देशों में देखी गई है।
यह 1993 की एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है, जो मद्रास उच्च न्यायालय में वकील चन्द्रू, जो कि बाद में मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायधीश बने के द्वारा लड़े गए एक केस पर आधारित है। फिल्म की कहानी सिंघनी और राजकन्नू नामक ईरुला आदिवासी जोड़े के जीवन और उन पर पुलिस की ज्यादतियों पर आधारित है। सिंघनी अपने पति को न्याय दिलाने के लिए एक वकील चन्द्रू की सहायता लेती है।


मामला सामने आने के बाद ओबीसी समाज के बुद्धिजीवियों ने बद्री नारायण तिवारी पर ओबीसी के आरक्षण की हकमारी का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ओबीसी के बुद्धिजीवी इसे आरक्षण घोटाला कह कर बद्री नारायण तिवारी पर निशाना साध रहे हैं। इसके लिए उस सूची का हवाला दिया जा रहा है जो की जी. बी. पंत द्वारा सेलेक्श को लेकर जारी किया गया था।
पंत संस्थान की ओर से नौकरी के लिए निकाले गए आवेदन में- सामान्य वर्ग के लिए- 16, EWS के लिए- 9 और OBC के लिए 16 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इन्हें API यानी कि एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स के घटते क्रम में रखा गया। अब इन तीनों सूचियों को ध्यान से देखिए।
सामान्य वर्ग की नियुक्ति के लिए अंक– 93 से 87 रखा गया। गरीबी के आधार पर मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण EWS के लिए यह 87 से 81 था, जबकि OBC के लिए अंक 93 से 83 निर्धारित किया गया।
यानी 93 से 87 तक API के अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में शामिल किए गए। 87 के बाद 81 तक आने वाले सवर्ण अभ्यर्थी EWS में शामिल किए गए। मगर OBC की सूची में 93 से 83 तक API वालों को शामिल कर दिया गया। जबकि 87 से ऊपर API के OBC को सामान्य वर्ग में नहीं रखा गया। यानी UR यानी अन रिजर्वर्ड, जिसे अनारक्षित यानी ‘ओपन फ़ॉर ऑल’ होना चाहिए था, उसे सिर्फ सवर्णों के लिए रिज़र्व कर दिया गया। यानी 50 फीसदी आरक्षण सिर्फ सवर्णों को दे दिया गया।
वरिष्ठ पत्रकार और बहुजनों के मुद्दों को उठाने वाले दिलीप मंडल ने ट्विटर पर लिखा है- नॉट फ़ाउंड सुटेबल घोटाला राष्ट्रीय समस्या है। OBC, SC, ST की लाखों नौकरियाँ लूट कर सवर्णों को दे दी जा रही हैं। इंटरव्यू का नंबर कम हो और उसका लाइव वीडियो प्रसारण हो। बहुत बेईमानी चल रही है। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को इसके ख़िलाफ़ भारत बंद की तैयारी करनी चाहिए। #NFSScam
तो वहीं बहुजन चिंतक और हिन्दी के प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव ने लिखा है कि-‘बद्रीनारायण तिवारी’ एक व्यक्ति नहीं, प्रवृत्ति है। इस प्रवृत्ति ने भारतीय अकादमिक संस्थानों में दो काम किए। पहला, UR कैटेगरी को सवर्णों के लिए आरक्षित कर दिया और दूसरा, NFS करके अनगिनत दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के ख़्वाबों की हत्या कर दी। इस प्रवृत्ति से ही लड़ना है’।
मामला सामने आने के बाद बहुजन युवाओं ने जी।बी। पंत संस्थान और बद्री नारायण दोनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बहुजन समाज के बुद्धीजीवी इसे मेरिट के नाम पर खुला जातिवाद बता रहे हैं। साथ ही इस नियुक्ति को फ़्रॉड बताकर इसे तत्काल रद्द करने की मांग की जा रही है।

बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर के 65वें परिनिर्वाण दिवस के मौके पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने अपने निवास पर बाबासाहेब को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस दौरान बसपा प्रमुख ने मीडिया को संबोधित करते हुए कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा की और उन सवालों का जवाब दिया, जिसको लेकर उनकी आलोचना होती रहती है। बहनजी ने दावा किया कि 2022 के आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा के नेतृत्व में 2007 से भी मजबूत सरकार बनेगी। साथ ही उत्तराखंड और पंजाब में भी बसपा का प्रदर्शन बेहतर होगा।
वैसे तो इस रैली के जरिए दोनों पार्टियाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगी लेकिन ग्राउंड में लगे कट आउट को देखकर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि रैली में आरएलडी अपने गढ़ माने जाने वाले, यूपी के इस क्षेत्र में सपा को भी अपनी ताकत का अहसास करा देना चाहती है.
मेरठ की दबथुआ में होने वाली ये रैली दोनों विपक्षी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन यहां लगे कट आउट आरएलडी के, सपा के सामने अधिक मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं
बताया जा रहा है कि पहले यहाँ सिर्फ आरएलडी रैली करने वाली थी लेकिन गठबंधन होने के बाद सपा भी इसमें शामिल हो गई. ऐसे में बहुत सम्भावना है कि आरएलडी इन कट आउट के जरिए सपा को यह संदेश देना चाहती है कि भले ही यूपी में सपा बड़ी है लेकिन पश्चिमी यूपी में आरएलडी का पलड़ा भारी है.
बताते चले कि इस रैली में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी, यूपी सरकार को इस क्षेत्र में व्याप्त गन्ना किसानों की समस्या को लेकर घेरने की कोशिश करेंगे.
सनातन धर्म को बताया सबसे अच्छा…
धर्मपरिवर्तन के बाद रिजवी उर्फ़ जितेन्द्र नारायण सिंह त्यागी ने कहा- “धर्मपरिवर्तन की यहां कोई बात नहीं है, जब मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया, तो ये मेरी मर्जी है कि मैं किस धर्म को स्वीकार करूं। सनातन धर्म दुनिया का सबसे पहला मजहब है और जितनी उसमें अच्छाईयां पाई जाती हैं वो किसी और धर्म में नहीं है। इस्लाम को हम धर्म समझते ही नहीं है”।
उन्होंने ये भी कहा कि “मुझे इस्लाम से बाहर कर दिया गया है, मेरे सिर पर हर शुक्रवार को इनाम बढ़ा दिया जाता है, ऐसे में मैं सनातन धर्म अपना रहा हूं।“
अपनी वसीयत में लिखी अंतिम इच्छा
हिंदू धर्म अपनाने से कुछ दिनों पहले रिजवी ने अपनी वसीयत लिखी थी, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार से जुड़ी इच्छा के बारे बताया था। उन्होंने बताया था कि उनके मरने के बाद उन्हें दफनाया नहीं जाए, बल्कि हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाए और उनकी चिता को अग्नि कोई और नहीं बल्कि यति नरसिम्हानंद दें।
जब सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना
बताते चले कि वसीम रिजवी ने कुरान की कथित रूप से ‘विवादित 26 आयतों’ को हटाने और एक नया कुरान लिखने की बात भी कह चुके हैं, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इन आयातों को हटाने के लिए रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए उन पर 50 हजार रूपये का जुर्माना लगाया था।
किताब से मिली धर्मगुरुओं की नाराजगी!
इससे पहले रिजवी ने एक किताब ‘मोहम्मद’ लिखी थी। जिसे लेकर काफी सियासी हलचल बनी रही, इतना ही नहीं, इस किताब को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि इस किताब के जरिए रिजवी ने पैगंबर की शान में गुस्ताखी की है। इसी के बाद रिजवी ने कभी भी अपनी हत्या होने को लेकर बयान जारी किया था।

लेकिन क्या आपको लगता है बीजेपी ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि उसे यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर निशाना साधना है?