आरएसएस कार्यक्रमः प्रणब मुखर्जी को बोलने से कोई रोक ना पाया, भाषण ने बढ़ा दी छटपटाहट

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नई दिल्ली। अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आरएसएस के कार्यक्रम में बोलने से कोई रोक नहीं सकता. यहां तक की प्रणब मुखर्जी ने अपनी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी के बात को दरकिनार कर दिया है. प्रणब मुखर्जी आज शाम को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. इसके लिए प्रणब बुधवार को ही नागपुर पहुंच गए थे. प्रणब के भाषण को को लेकर सबकी धड़कन तेज हो गई है. कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर वो वहां पर क्या बोलेंगे.

प्रणब मुखर्जी के दफ्तर के सूत्रों की मानें तो प्रणब का 20 मिनट का भाषण मिला-जुला रहेगा. जिसमें प्रणब संघ का बखान करेंगे और राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर जोर होगा. संभावना है कि प्रणब आज के समय के राजनीतिक माहौल पर भी अपनी बात रख सकते हैं. हालांकि ये तो संभावित चीजें है लेकिन पता तो तभी चलेगा जब प्रणब का मुंह खुलेगा. इसको लेकर प्रणब मुखर्जी ने साफ तौर पर कहा है कि जो बोलूंगा नागपुर में बोलूंगा.

बता दें कि प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने का विरोध उनकी ही बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी कर चुकी हैं. शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि आरएसएस उनके फोटो का गलत मतलब निकालकर प्रचार-प्रसार करेगी. इससे उनकी व कांग्रेस की छवि खराब हो सकती है.

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जिग्नेश की जान को खतरा !

नई दिल्ली। गुजरात के विधायक और दलित नेता जिग्‍नेश मेवाणी को एक बार फिर जान से मारने की धमकी दी गई है. जिग्नेश मेवाणी को लगातर इस तरह धमकी भरे कॉल मिल रहे हैं. फोन पर गोली मारने की धमकी दी जा रही है. लेकिन जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि इससे हम डरने वाले नहीं है. लल्‍लू पंजू समाज है क्‍या, परिणाम का इंतजार करो.

जिग्‍नेश मेवाणी ने ट्विटर पर धमकी की जानकारी देते हुए कहा कि एक बार फिर उसी नंबर से मुझे फोन आया जिसने कल मुझे जान से मारने की धमकी दी थी. बुधवार दोपहर को भी मेवाणी के एक दोस्‍त कौशिक परमार को किसी ने फोन पर जिग्‍नेश को जान से मारने की धमकी दी थी. इस मामले में बनासकांठा जिले के वडगामा में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है.

जानकारी के अनुसार गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्‍नेश मेवाणी को दो दिन से कोई गोली मारने की धमकी दे रहा है. राजवीर मिश्रा नाम के शख्‍स ने जिग्‍नेश मेवाणी के दोस्‍त को फोन कर गोली मारने की धमकी दी थी. पुलिस ने धारा 507 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

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तीन घंटे अमित शाह ने मनाया फिर भी शिवसेना ने कहा ना

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नई दिल्ली। उप चुनाव में मिली हार के बाद अमित शाह गठबंधन वाले दलों को मनाने के लिए निकले थे लेकिन बुधवार को शिवसेना से मिलने के बाद निराशा हाथ लगी. भाजपा के साथ चुनाव लड़ने से शिवसेना ने साफ तौर से मना कर दिया. इनका कहना है कि वे भाजपा के मंसूबों से वाकिफ हैं.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद शिवसेना ने एकबार फिर ऐलान कर दिया है कि वह 2019 का आमचुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेगी. उद्धव ठाकरे और अमित शाह की मुलाकात के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हम अमित शाह का एजेंडा जानते हैं. लेकिन हम कह देना चाहते हैं कि शिव सेना ने प्रस्ताव पारित किया है और हम चुनाव अपने दम पर ही लड़ेगे. भाजपा-शिवसेना के बीच गिले शिकवे दूर करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार की शाम शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ मातोश्री में मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब सवा दो घंटे से अधिक चर्चा हुई जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे.

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कर्नाटकः बसपा के एन महेश ने मंत्री बनकर बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। कर्नाटक में 06 जून को बसपा विधायक एन महेश ने मंत्री पद की शपथ लेकर रिकॉर्ड कायम किया है जिसको इतिहास हमेशा याद रखेगा. कर्नाटक में मंत्री पद का शपथ ग्रहण करने के साथ ही एन महेश बसपा के पहले ऐसे मंत्री बने जो कि उत्तर प्रदेश से बाहर राज्य में मंत्री बनाए गए. राज्यपाल वाजुभाई वाला ने जेडीएस, कांग्रेस व बसपा सहित कुल 25 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. जिसमें जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में कांग्रेस के 14 और जेडीएस के 9 मंत्री भी शामिल हैं.

कर्नाटक में अभी शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के मंत्रालय की घोषणा अधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है लेकिन सूत्रों का कहना है कि बसपा की ओर से एन महेश के लिए माइनर इरिगेशन डिपार्टमेंट की मांग की जा रही है. बसपा को भरोसा है कि कांग्रेस-जेडीएस की ओर से लघु सिंचाई विभाग की मांग पूरी की जाएगी.

मोदी को भी दिया मात…

आपको बताते चलें कि जीतने के बाद एन महेश को भाजपा की ओर से भी लालच मिले थे लेकिन एन महेश ने साफ तौर पर मना कर दिया था और कहा था कि इस संबंध में बहन मायावती से सीधे संपर्क कर लें. इसके बाद भाजपा की किरकिरी हो गई थी. इतना ही नहीं एन महेश को हराने के लिए यहां पर 1 मई को पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार करने आए थे, लेकिन महेश की मेहनत के आगे मोदी का प्रचार भी काम नहीं आया और एन महेश सभी स्थितियों में खरे उतरे.

बसपा के प्रत्याशी एन महेश ने चामराजनगर जिले के कोल्लेगल विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल कर दक्षिण में बसपा का परचम बुलंद किया. बसपा उम्मीदवार ने कांग्रेस उम्मीदवार एआर कृष्णमूर्ति को 19,454 मतों के अंतर से पराजित किया. इस सीट पर बसपा को कुल 71,792 वोट मिले. भाजपा इस सीट पर तीसरे नंबर की पार्टी रही. महेश कर्नाटक में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. महेश ने कर्नाटक में जीतकर दक्षिण में बसपा को बड़ी संजीवनी दे दी. त्रिशंकु विधान सभा वाली सरकार बनाने में बसपा सुप्रीमो मायावती का सबसे अहम रोल रहा. इनको कर्नाटक का किंग मेकर भी कहा जा रहा है. जो कि 2019 में महागठबंधन की ओर से पीएम पद की उम्मीदवार हो सकतीं हैं.

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बिहार बोर्ड टॉपर घोटालाः रूबी के बाद कल्पना से सवाल…

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पटना। बिहार बोर्ड के रिजल्ट घालमेल को लेकर हर साल कुछ ना कुछ सामने आ रहा है. रूबी कुमारी की घटना की बीते बहुत दिन नहीं हुए हैं और एक बार फिर इस साल बिहार बोर्ड साइंस की टॉपर कल्पना सवालों के घेरे में हैं. खबरों के अनुसार इस मामले को भी टॉपर घोटाला की तरह देखा जा रहा है. हालांकि बिहार बोर्ड की गलती सबके सामने आ चुकी है. लेकिन फिलहाल बिहार बोर्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

कौन है कल्पना

बिहार बोर्ड की ओर से बुधवार को 12th के नतीजे जारी किए गए. साइंस में कल्पना कुमारी ने टॉप किया है. कल्पनी वही लड़की है, जिसने दो दिन पहले NEET में ऑल इंडिया टॉप किया है. कल्पना की पढाई-लिखाई पर कोई सवाल नहीं है लेकिन नियम-कानून की मानें तो कल्पना घिरते दिख रही हैं. इसको लेकर शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी गलती सामने आ रही है.

क्यों उठ रहे सवाल

जानकारी के मुताबिक, कल्पना ने दो साल दिल्ली रहकर आकाश इंस्टीट्यूट से कोचिंग की थी. लेकिन इसी दौरान उसने शिवहर के तरियानी में YKJM कॉलेज में रेगुलर एडमिशन लेकर पढी की. यहां ध्यान देने वाली बाता है कि, बिहार बोर्ड एग्जाम्स में बैठने के लिए स्टूडेंट को 75 फीसदी अटेंडेंस (उपस्थिति) दर्ज करानी होती है. अब सवाल ये है कि जब कल्पना कॉलेज ही नहीं गई, तो उसने 12th का एग्जाम कैसे दिया? मतलब साफ है कि इस टॉपर के लिए स्कूल ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया है. NEET में कल्पना को 720 में से मिले 691 मार्क्स मिले हैं इसलिए कल्पना के शिक्षा पर कोई शक नहीं है. अब देखना है कि बिहार का शिक्षा विभाग इसको लेकर क्या कार्रवाई करता है.

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो किसानों का फायदा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर राहुल गांधी मंदसौर में हैं. इस दौरान राहुल गांधी किसानों के बीच एक रैली को संबोधित करने के साथ ही किसानों के हित की बात कही. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा किसानों के बारे में सोचती व करती है. जबकि भाजपा किसानों के लिए जानलेवा साबित होती है. मंदौसर में आयोजित कांग्रेस ने इस रैली को किसान समृद्धि संकल्प रैली का नाम दिया है. बता दें कि मंदसौर में आज ही के दिन एक साल पहले किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी, जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई थी.

किसानों के लिए फायदा बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, हमारी सरकार बनी तो हम किसानों का कर्ज माफ कर देंगे. हम अपने मन की बात नहीं बताना चाहते हैं, बल्कि हम आपके मन की बात और आपका दर्द सुनना चाहते हैं. राहुल ने पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि कर्नाटक में सिद्धारमैया की सरकार ने मुझसे कहा कि हम दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ करने जा रहे हैं. किसान का कर्जा माफ करने का हमारा रिकॉर्ड है. इसके अलावा हम किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री बनाएंगे, उसमें यहां के किसानों के बेटे को रोजगार देंगे. इस दौरान किसानों को कांग्रेस की ओर से सौगात दी गई.

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कर्नाटकः बसपा विधायक समेत 25 विधायकों को मंत्री पद मिला

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नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद कर्नाटक में बुधवार को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के मंत्रीमंडल में 25 विधायकों को जगह मिली है. बसपा के एकमात्र विधायक को मंत्री पद मिला है. कहा जा रहा है कि यह बसपा के पहले विधायक हैं जिनको यूपी के बार मंत्री पद मिला.

वर्नर वाजुभाई वाला ने जेडीएस, कांग्रेस बसपा सहित कुल 25 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में जेडीएस के 9 मंत्री तो वहीं कांग्रेस के सबसे ज्यादा 14 मंत्रियों ने शपथ ली. बसपा विधायक एन महेश को भी मंत्री पद दिया गया.

बता दें कि 23 मई को दूसरी बार कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. कर्नाटक विधान सभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा 104 सीट मिलने के बावजूद भी बहुमत साबित ना करने पर कांग्रेस व जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई. त्रिशंकु विधानसभा वाली सरकार बनाने के लिए बसपा प्रमुख मायावती का रोल सबसे अहम रहा.

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बिहार के निवासी को इस सरकारी नौकरी में मिलेगी छूट, ऑनलाइन आवेदन करें

नई दिल्ली। बेरोजगार युवा यहां पर जॉब के लिए आवेदन कर सकते हैं. बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने बिहार सरकार में अवर निरीक्षदक उत्‍पाद (Excise Sub Inspector) पदों पर 126 वैकेंसी निकाली है. इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन एप्‍लाई करना होगा. ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख 30 जून 2018 है. मूल रूप से बिहार के रहने वाले आवेदनकर्ता को आरक्षण और उम्र में छूट का लाभ मिलेगा. वहीं, दूसरे राज्‍यों के उम्‍मीदवार अनारक्षित श्रेणी में एप्‍लाई कर सकते हैं.

पद का नाम: एक्साइज सब-इंस्पेक्टर

योग्यता: इच्‍छुक उम्‍मीदवार को 1 जनवरी 2018 या इससे पहले किसी मान्‍यता प्राप्‍त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन या राज्‍य सरकार से मान्‍यता प्राप्‍त उसके समकक्ष परीक्षा में पास व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं.

आयु सीमा

  • सामान्‍य श्रेणी के पुरुष उम्‍मीदवार की न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम 37 साल होनी चाहिए.
  • पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्‍मीदवारों के लिए न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम उम्र 40 साल.
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष और महिला उम्‍मीदवार के लिए न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम 42 साल होनी चाहिए.

सैलरी: 9300 से 34800 रुपये प्रतिमाह के साथ ग्रेड-पे 4200 रुपये मिलेगा.

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा/शारीरिक मापदंड और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. लिखित परीक्षा दो चरणों में होगी- प्रारंभिक और मुख्‍य परीक्षा. लिखित परीक्षा में वैकल्पिक यानी कि ऑप्‍शनल सवाल पूछे जाएंगे. और प्रारंभिक परीक्षा दो घंटे की होगी जिसमें 200 अंकों के 100 सवाल पूछे जाएंगे. इसमें जनरल नॉलेज और करंट अफेयर्स के सवाल आएंगे. मुख्य परीक्षा के लिए दो पेपर होंगे, जिसमें पहला पेपर सामान्‍य हिन्दी का होगा. वहीं, दूसरे पेपर में सामान्य अध्ययन, सामान्य विज्ञान, इतिहास, भूगोल, गणित और रीजनिंग के सवाल आएंगे. इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग सिस्‍टम लागू होगा.

शारीरिक मापदंड

  • सामान्य और ओबीसी पुरुष उम्मीदवारों की लंबाई न्यूनतम 165 सेंटीमीटर होनी चाहिए. SC/ST उम्मीदवारों की लंबाई न्यूनतम 160 सेंटीमीटर होनी चाहिए. वहीं, सभी वर्गों के महिला उम्मीदवारों की लंबाई 160 सेंटीमीटर और वजन 48 किलोग्राम होना चाहिए.
  • सामान्य और ओबीसी पुरुष उम्मीदवारों का सीना बिना फुलाए कम से कम 81 सेंटीमीटर और फुलाने के बाद न्‍यूनतम 86 सेंटीमीटर होना चाहिए. वहीं, SC/ST उम्मीदवारों का सीना बिना फुलाए कम से कम 79 सेंटीमीटर और फुलाने के बाद न्‍यूनतम  84 सेंटीमीटर होना चाहिए.

शारीरिक दक्षता परीक्षा

पुरुष उम्मीदवारों को एक मील की दौड़ छह मिनट में पूरी करनी होगी. महिला उम्मीदवारों को एक किलोमीटर की दौड़ छह मिनट में पूरी करनी होगी. ऊंची कूद पुरुष उम्मीदवारों के लिए कम से कम चार फीट और महिला उम्मीदवारों के लिए कम से कम तीन फीट. लंबी कूद पुरुष उम्मीदवारों के लिए कम से कम 12 फीट और महिला उम्मीदवारों के लिए कम से कम नौ फीट. गोला फेंक पुरुष उम्मीदवारों को 16 पाउंड का गोला कम से कम 16 फीट तक फेंकना होगा. महिला उम्मीदवारों को 12 पाउंड का गोला कम से कम 10 फीट तक फेंकना होगा.

आवेदन फी

सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 700 रुपये और SC/ST और महिला उम्मीदवारों के लिए 400 रुपये.  फीस का भुगतान क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए होगा.

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अखिलेश ने दी बीजेपी को बड़ी चुनौती

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी को चुनौती दी है. ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर सरकारी कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी को चुनौती दी है कि वो 2019 के साथ ही सारे चुनाव करा ले. इसके लिए समाजवादी पार्टी पूरी तरह तैयार है. इससे अच्‍छा मौका कहां मिलेगा देश का सबसे बड़ा प्रदेश है. संदेश तो यहीं से जाएगा.

‘एक देश एक चुनाव’ तय करने को बनी सरकारी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. कमेटी ने यूपी में अगला विधानसभा चुनाव 2022 के बजाय 2024 लोकसभा चुनाव के साथ कराने की राय दी है. यदि ऐसा होता है तो योगी सरकार का कार्यकाल सात साल का हो जाएगा. कमेटी चाहती है कि दिसंबर 2021 के पहले होने वाले सारे चुनाव 2019 में लोक सभा चुनाव के साथ करा लिया जाए. विधि आयोग के सुझाव की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है. समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी.

बता दें कि हालही में बीजेपी को कैराना व नूरपुर में मात देने के बाद समाजवादी पार्टी पूरी जोश में दिख रही है. माना जा रहा है कि आगामी लोक सभा चुनाव में सपा व बसपा मिलकर चुनाव लड़ेगी. हालांकि सीट बंटवारों को लेकर फिलहाल बातचीत नहीं हो पाई है.

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भीमा-कोरेगांव हिंसा में पांच आंदोलनकारी गिरफ्तार

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नई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव मामला में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों पर आरोप है कि इन्होंने भीमा-कोरेगांव में नफरत भरे भाषण और विवादास्पद पर्चे बांटे थे. साथ ही पुणे पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से दिल्ली से मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना जैकब विल्सन को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने रोना को दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है. 8 जून को उन्हें पुणे की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा. पुलिस ने रोना के घर की तलाशी के दौरान कई दस्तावेजों और उनके लैपटॉप को जब्त कर लिया था.

इसके अलावा नागपुर से एक्टिविस्ट वकील सुरेंद्र गाडलिंग को भी केस से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. एक अन्य कार्यवाही में पुणे पुलिस ने भरतनगर में प्रोफेसर सोमा सेन के घर में तलाशी ली. सेन के पति तुषारकांत भट्टाचार्य को भी माओवादियों के साथ उनके कथित संबंधों के लिए कई बार गिरफ्तार किया गया था. इसी प्रकार पुणे पुलिस ने मुंबई, नागपुर और दिल्ली से कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.

जिग्नेश मेवानी भड़के

गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने पुलिस की गिरफ्तारी पर सवाल खड़ा करते हुए इन्हें अंबेडकवादी आंदोलन पर हमला बताया है. मेवानी ने ट्वीट कर लिखा, ” महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में अंबेडकरवादी कार्यकर्ता और संपादक सुधीर धावले, नागपुर में वकील सुरेंद्र गाडलिंग और दिल्ली में रोना विल्सन को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों पर यूएपीए के सख्त कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि भीमा कोरेगांव का अपराधी मनोहर भिड़े आजाद घूम रहा है.”

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मायावती ने बीजेपी को ललकारा, कहा-आरक्षण के आधार पर जल्द दें प्रमोशन

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी आरक्षण के आधार पर सरकारी कर्माचारियों को प्रमोशन देने पर फैसला सुनाया है. इस फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वागत किया लेकिन भाजपा सरकार पर मायावती ने कड़े रूख इख्तेयार किए. मायावती का कहना है कि भाजपा केवल सस्ती पब्लिसिटी के लिए काम करती है.

मुँह में राम बगल में छुरी…

सुप्रीम कोर्ट के फैसले  के बाद बुधवार को मायावती ने कहा कि एसससी/एसटी वर्गों के प्रति बीजेपी सरकार जातिवादी रवैया त्यागे और सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा निर्णय के बाद केन्द्र व राज्य सरकारें अपने पिछले तमाम निर्णयों की समीक्षा करे तथा इन वर्गों के कर्मचारियों पर हुये अन्यायों को दुरुस्त करने के साथ-साथ उन्हें अभियान चलाकर प्रोन्नति में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ दे. पहले कांग्रेस व अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ‘‘प्रोन्नति में आरक्षण‘‘ के मुद्दे पर भी अपना जातिवादी रवैया त्यागने को तैयार नहीं लगती है. बीजेपी सरकार व कांग्रेस पार्टी केवल सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने वाली दिखावटी सहानुभूति व काम करने का आरोप लगाते हुये मायावती ने कहा कि ख़ासकर एसससी/एसटी व ओबीसी वर्गो के हित व कल्याण के लिये ठोस काम करने के मामले में इनकी सरकारों का रिकार्ड ज़ीरों ही रहा है. इनकी नीति व कार्य प्रणाली मुँह में राम बगल में छुरी की तरह से ही है.

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भाजपा को हराने के लिए एकजुट हो रहे विपक्षी दलों की वैकल्पिक नीतियाँ क्या हैं ?

उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उप चुनावों से एकजुट हो रहीं विपक्षी पार्टियों के सामने भाजपा की हार का जो सिलसिला शुरू हुआ वह हाल में कैराना और नूरपुर समेत अन्य जगहों पर हुए उप चुनावों में भी जारी रहा. उप चुनावों में भाजपा की लगातार जारी हार से अब मोदी-शाह के अपराजित होने का मिथक टूटता जा रहा है. पिछले चार साल में देश के बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों,संस्थाओं, समाज, संस्कृति और सभ्यता के लिए अभूतपूर्व संकट पैदा करने वाले मोदी राज से निजात पाने में यदि विपक्षी दलों की एकजुटता सफल होती है तो यह निश्चित तौर पर देश और लोकतंत्र के लिए अच्छा होगा. लेकिन क्या इससे जनता के अच्छे दिन आ जाएंगे?

इन दलों और बन रहे गठबंधन के पास बदहाल होते जा रहे किसानों और कृषि संकट का क्या समाधान है, बेरोजगारी की मार झेल रहे नौजवानों को रोजगार देने की क्या नीति है, शोषित  वर्गों और दलित, पिछड़े, आदिवासी, महिलाओं समेत वंचित तबकों की बेहतरी और न्याय के लिए उनकी क्या नीतियां हैं ? इस कसौटी पर तस्वीर बेहद निराशाजनक है.

कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन की मनमोहन सरकार के दस साल के शासन में जो जनविरोधी नीतियां देश पर थोपी गईं. उनसे जनता के विभिन्न वर्गों के विक्षोभ से फायदा उठाकर सत्ता में आई मोदी सरकार अपने पूर्ववर्तियों की उन्हीं आर्थिक- औद्योगिक नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाने का काम ही कर रही है. जनता के जीवन का संकट और अधिक गहराता गया और कारपोरेट मीडिया द्वारा गढ़ी गई मोदी की छवि से पैदा हुई छदम  उम्मीदें धरातल पर दम तोड़ने लगीं. जनता के विभिन्न वर्गों के जीवन के मूलभूत प्रश्नों को पीछे धकेलने के मोदी-संघ द्वारा किये जा रहे विभाजनकारी प्रयास अब लोकप्रिय जनमत तैयार कर पाने में तात्कालिक तौर पर ही सही सफल नहीं हो पा रहे हैं.

जाहिर है संकट ढांचागत है और नव उदारीकृत नई आर्थिक-औद्योगिक नीतियों ने इसे और गहरा किया है. कांग्रेस ने इन जनविरोधी नीतियों से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है और मानवीय चेहरे के साथ उदारीकरण का मनमोहन मॉडल कितना मानवीय था, सब देख चुके हैं.

यूपीए गठबंधन की अन्य क्षेत्रीय पार्टियां भी इन्हीं नीतियों की पिछलग्गू हैं. अजीत सिंह तो खुद कैबिनेट के अंग रहे, उत्तर प्रदेश की सपा और बसपा यूपीए -2 को बाहर से समर्थन करती रहीं और सूबे में इनकी सरकारें नई आर्थिक- औद्योगिक नीतियों की पैरोकारी में पीछे नहीं रहीं. अब 2019 में सत्ता के बदलाव में यदि ये सफल होते हैं तो यूपीए- 1 जैसी स्थिति भी नहीं होगी जहां वामदलों के दबाब में नई आर्थिक नीतियों की रफ्तार धीमी हुई, कुछ जनपक्षधर काम करने पड़े और जनता को कुछ राहत मिली. यह यूपीए-2 की नीतियों का ही विस्तार होगी. जनविरोधी नीतियों पर कोई लगाम नहीं होगी और जनता के लिए कोई विशेष राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती.

राष्ट्रीय स्तर पर आमतौर पर यूपीए-1 के समय जैसी ही गठबंधन की स्थिति है. सीपीएम ने कांग्रेस के साथ किसी भी राजनीतिक गठबंधन को नकार दिया है. जिस “भाजपा हराओ महागठबंधन” की बात की जा रही है यह उत्तर प्रदेश केंद्रित परिघटना दिखती है जहां सपा और बसपा जो यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन तो पहले भी देती रहीं थीं लेकिन सूबे की राजनीति में धुर विरोधी रहते हुए भी इस बार लोकसभा चुनावों में एक गठबंधन की दिशा में बढ़ रही हैं. इन दलों का यह गठबंधन भाजपा को हराने की कोई राजनीतिक-वैचारिक प्रतिबद्धता से अधिक अपने-अपने राजनीतिक बजूद को बचाने की कवायद ज्यादा दिखता है.

उप चुनावों में भाजपा की हार से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन से बन रहा बड़ा संगठित सामाजिक आधार चुनावी शक्ति संतुलन में भाजपा पर भारी पड़ रहा है और भाजपा तात्कालिक तौर पर उसकी काट नहीं कर पा रही है. लेकिन सपा-बसपा गठबंधन की जनमुद्दों पर चुप्पी और इसके द्वारा कोई घोषित जनपक्षधर कार्यक्रम के साथ सामने न आना इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है.

मोदी को सत्ता से हटा देने भर से जनता के अच्छे दिन नहीं आ जाएंगे. जन आंदोलन की ताकतों और जनपक्षधर लोकतांत्रिक शक्तियों को भाजपा हराने के राजनीतिक कार्यभार को सामने रखते हुए कांग्रेस सहित सपा और बसपा आदि भाजपा विरोधी गठबंधन के सामने जनता के सवालों को उठाना चाहिए और जनविरोधी नई आर्थिक-औद्योगिक नीतियों से पीछे हटने की मांग मजबूती से रखनी होगी.

(अजीत सिंह यादव, मजदूर किसान मंच, उत्तरप्रदेश के संयोजक हैं.)

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गांव जाने को नहीं मिली गाड़ी, बिहारी युवा ने शुरू की ओला-उबर से सस्ती कैब सर्विस

नई दिल्ली। स्टेशन पर उतरने के बाद गांव जाने के लिए गाड़ी ना मिलने के कारण अक्सर लोगों को भटकना पड़ता है. कई बार तो स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ती है और नहीं तो प्राइवेट गाड़ी वाले मनमाना दाम वसूलते हैं. इतना के वाबजूद भी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती. समस्या यहीं खत्म नहीं होती है. जब गांव से शहर आकर अहले सुबह या शाम-रात में ट्रेन पकड़नी हो तो गांव के लोगों को एक दिन पहले ही निकलना होता है.

इन तमाम समस्याओं से जूझते एक जुझारू बिहारी युवा ने समाधान निकाला. इस युवा ने काफी मेहनत कर ओला-उबर की तरह गांव के लिए कैब सेवा शुरू की. इसकी मेहनत देखकर पीएम के वीडियो कांफ्रेंस कार्यक्रम में शामिल किया गया. इस युवा का दावा है कि गांव के लोगों को सस्ती व सुरक्षित कार का सफर कराने के लिए सेवा आरंभ की गई है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार की कैब सर्विस ओला-उबर से भी सस्ती कैब सेवा है. रवि रणवीरा, दलित दस्तक से बातचीत करने पर बिहारी युवा ने बताई अपने सफर की कहानी…

बिहार के सहरसा के दूर दराज बनगांव में रहने वाले दिलखुश कुमार जो कल तक कंस्ट्रक्शन कंपनी में करते थे. वो आज आर्य गो कैब कंपनी के मालिक हैं. अक्टूबर, 2016 में कैब सर्विस के शुरू कर बिहार के तीन जिला सहरसा, मधेपुरा व सुपौल में कैब सेवा को पहुंचा दिए हैं. और दरभंगा व मुजफ्फरपुर में शुरू होने वाली है. इनका कहना है कि 2020 तक पूरे बिहार में इनकी कंपनी काम करना शुरू कर देगी. साथ ही उत्तराखंड में भी शुरू करने की तैयारी चल रही है.

ड्राइवर पिता का दर्द…

दिलखुश कुमार बताते हैं कि इनके पिताजी पवन खां ने प्राइवेट बस चलाकर इनको पढाया-लिखाया. लेकिन बिहार में ड्राइवरों को तनख्वाह नहीं मिलती जिसके चलते पलायन कर बड़े शहरों में चले जाते हैं. इस पलायन को रोकने के लिए दिलखुश अपनी कंपनी के जरिए ड्राइवरों की जिंदगी बदलने का संकल्प लेकर काम आरंभ किए हैं. साथ ही जिनकी कार, बेकार पड़ी हुई हैं उनको भी अपने साथ जोड़ेंगे.

बेटी होने पर मुफ्त सैर…

दिलखुश जमीनी स्तर पर जुड़े होने के कारण इनका यह भी मानना है कि मुनाफा के साथ-साथ समाजिक कल्याण के लिए भी काम किया जाना चाहिए. इसके लिए आर्य गो कैब बेटी पैदा होने पर जच्चा-बच्चा को सरकारी अस्पताल से घर तक की मुफ्त सेवा देगा. साथ ही सैनिक-शहीदों के परिवार के लिए भी आकर्षक ऑफर दिया जाएगा.

पीएम मोदी से बात…

06 जून, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा स्टार्ट्प्स से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात की. केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम में दिलखुश की कंपनी आर्य गो कैब को शामिल किया गया. इस दौरान दिलखुश ने पीएम की बात सुनी. हालांकि समय अभाव के कारण करीब एक घंटा तक ही पीएम ने युवाओं को संबोधित किया. इनका कहना है कि बिहार सरकार इनको मदद कर रही है, आने वाले दिनों में सरकार हम युवाओं की मदद करेगी तो हम रोजगार पैदा करेंगे और गांवों की तस्वीर भी बदलेगी.

सुरक्षा की गारंटी

दिलखुश बताते हैं कि सुरक्षा के लिए हमारी टीम ऑनलाइन निगरान रखेगी. इसके अलावा हमारे ड्राइवर किसी प्रकार का भेदभाव या गलती करते हैं तो उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा. इसके साथ-साथ हमारी टीम हर जिला के डीएम व पुलिस प्रशासन से मिलकर सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत कर रही है.

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अमित शाह के मुलाकात से पहले शिवसेना ने मुंहफेरा

नई दिल्ली। नाराज सहयोगी दलों के दिलों को जोड़ने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संपर्क अभियान शुरू किया है. इस संबंध में अमित शाह बुधवार की शाम शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे लेकिन इससे पहले ही शिवसेना ने साफ तौर कह दिया है कि वह 2019 में अकेले चुनाव लड़ेगी. हालांकि अभी तक शिवसेना के उध्दव ठाकरे की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि मातोश्री में सभी का स्वागत है लेकिन शिवसेना ने अब ‘एकला चलो रे’ की नीति अपना ली है. हमने पालघर के चुनाव में इसको साबित कर के दिखा दिया है. अब शिवसेना अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी.

इसके अलावा शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिये भाजपा को कड़वाहट भरा जवाब दिया है. ‘सामना’ के अनुसार अमित शाह इन चुनावों में किसी भी तरह 350 सीटें जीतना चाहते हैं. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं, किसान सड़क पर हैं, कोई भी खुश नहीं है लेकिन बीजेपी चुनाव जीतना चाहती है. शिवसेना का इशारा है कि बीजेपी पहले आम जनता का दिल जीते और इनसे संपर्क करने की कोशिश करे.

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यूपीः बसपा के चालीस सीट पर अखिलेश का जवाब

लखनऊ। महागठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी के बीट गठबंधन की बात जोरों पर चल रही हैं. हालांकि इस बात को लेकर बसपा ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में 80 में से 40 सीटों पर बसपा लड़ेगी. इसको लेकर अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार चल रहा था. अब इसको लेकर अखिलेश यादव का जवाब आया है.

समाजवादियों का दिल बहुत बड़ा

समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हो पाई है लेकिन समय आने पर इस मुद्दे पर बात जरूर होगी. बीएसपी यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 40 सीटें मांगने वाली बात पर अखिलेश ने मुस्कुरा कर कहा, ‘समाजवादियों का दिल बहुत बड़ा है. सही समय पर सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की जाएगी.’

बता दें कि अखिलेश यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव भी बसपा से गठबंधन कर लड़ने का भी ऐलान किया है. गौरतलब है कि इसी साल गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था, जिसमें बीजेपी को करारी हार मिली थी. साथ ही हाल ही में कैराना व नूरपुर में भी दोनों दलों ने मिलकर भाजपा को हराने का काम किया.

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दलित औरतों पर ट्रैक्टर चढ़ाने के विरोध में होगा चक्का जाम

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जालंधर। पंजाब में हक मांग रही दलित औरतों पर ट्रैक्टर चढ़ाने के मामले को लेकर दलितों ने विरोध जताया है. लोगों का कहना है कि प्रशासन नींद में सो रही है. इसको जगाने के लिए चक्का जाम किया जाएगा. इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा. साथ ही प्रशासन को कुंभकर्णी नींद से जागने की बात भी कही.

पेंडू मजदूर यूनियन ने बताया कि सरकार की घोषणाओं के बावजूद दलितों को उनके हक नहीं मिल पा रहे हैं. जब ब्लाक जालंधर वैस्ट के गांव हसनमुंडा में बीते दिनों अपना हक मांगने सड़क पर उतरे तो दलितों पर अत्याचार किया गया व दलित औरतों पर ट्रैक्टर चढ़ाया गया. लेकिन कान खोलकर सुन लें इससे हमारी आवाज नहीं दब सकती है. यदि ऐसा करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा.

जमीनों पर अमीरों का कब्जा

इस मामले को लेकर जिलाधीश कार्यालय में मांग पत्र दिया गया जिसमें पंचायत की जमीन का तीसरा हिस्सा दलितों को दिए जाने की बात कही. इनका कहन है कि संवैधानिक अधिकार के बावजूद भी दलितों के पंचायतों की जमीनों पर अमीर लोगों का कब्जा है. पंजाब केसरी की खबर के अनुसार गांव हसनमुंडा के अलावा ब्लाक फिल्लौर का गांव संगतपुर, ईस्ट का गांव हरदोफराला, मैहतपुर के गांव कुरशेतपुर में नियमों के विपरीत जाकर जमीनें दी गई हैं. प्रदेश प्रधान तरसेम पीटर, जिला प्रधान हंसराज पबवां, जिला सचिव कश्मीर सिंह घुगशोर, दर्शन पाल बटाला, चन्नन सिंह, बलविन्द्र कौर ने कहा कि यदि तुरंत प्रभाव से उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे 11 जून को पंजाब भर में चक्का जाम करेंगे.

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2019 में बीजेपी को हराने अयोध्या महंत का फरमान

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अयोध्या। राम मंदिर मुद्दा भाजपा के लिए 2019 में हार का कारण बन सकता है. विहिप के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के बाद अयोध्या के महंत सुरेश दास ने बीजेपी के खिलाफ आंदोलन कनरे की बात कही है. राम मंदिर को लेकर केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है. महंत का कहना है कि राम मंदिर बनाने में विफल मोदी सरकार को हराने के लिए कोशिश की जाएगी. भाजपा सत्ता में आना चाहती है तो फिर राम मंदिर का वादा पूरा करे.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिगंबर अखाड़े के महंत ने बात जारी रखते हुए कहा है कि भाजपा को राम मंदिर बनाना ही होगा. चेतावनी भी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो हम भाजपा के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे जिससे उनकी हार तय है. जबकि राम मंदिर मुद्दा को लेकर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मीडिया को कहा है कि 2019 के चुनाव में भाजपा का एकमात्र एजेंडा विकास ही होगा. 2019 के चुनावों में हिंदुत्व और ‘राम मंदिर’ के मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं होगी, सिर्फ विकास ही हमारा मुद्दा है. बता दें कि हाल ही में बीजेपी से नाराज बजरंग दल व विहिप के करीब 14 हजार कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला है.

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प्रेम प्रसंग के कारण दलित युवक की हत्या

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एक गांव में प्रेम प्रसंग के कारण दलित युवक की हत्या की खबर सामने आई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्यानपुर थाना क्षेत्र के बिंदकी रोड नहर पटरी पर रविवार की शाम एक दलित युवक अचेत अवस्था में पड़ा मिला. लेकिन घर से अस्पताल ले जाते समय युवक ने दम तोड़ दिया.

गंभीर चोट के निशान

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सीने में गंभीर चोट से मौत की पुष्टि हुई है. अमर उजाला की खबर के अनुसार थानाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह गौर का कहना है कि युवक के मौत के पीछे प्रेम प्रसंग है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. युवक के चचेरे भाई रामशरण ने गांव के लोधी बिरादरी के लोगों पर भाई की हत्या का आरोप लगाया है. हालांकि यह बात तो साफ हो गई है कि दलित युवक की बेरहमी से हत्या की गई है. पुलिस इस मामले में पूछताछ कर रही है.

कौन है युवक

थाना क्षेत्र के कोरसम के पुरवा निवासी रमेश सोनकर का छोटा बेटा नरेंद्र (22) रविवार सुबह किसी काम से बिंदकी गया था. सोमवार शाम करीब सात बजे बिंदकी के पहले चौडगरा रोड पर नहर पटरी में अचेत पड़ा मिला. बेटे की मौत से पिता रमेश और मां कमला बेहोश होकर गिर पड़े. स्थानीय लोगों का कहना है कि फतेहपुर गांव की गैर बिरादरी की लड़की से प्रेमप्रसंग करता था. चौडगरा पुलिस चौकी ने दो जून को चौकी बुलाकर दोनों पक्षों में सुलह समझौता कराकर घर भेज दिया था.

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कैराना-नूरपुर जीत पर जश्न, मायावती-अखिलेश को न्यौता

लखनऊ। कैराना-नूरपुर में बीजेपी को पटखनी देने पर विपक्षी दल जीत का जश्न मनाने की तैयारी में जुटे हैं. इन दो सीटों पर बीजेपी का सुपड़ा साफ करने के बाद आरएलडी काफी खुश नजर आ रही है. इसके लिए आरएलडी बुधवार को लखनऊ में पार्टी दफ्तर में इफ्तार का आयोजन कर रही है. इफ्तार पार्टी में बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निमंत्रण दिया गया है.

खबरों की मानें तो आरएलडी के इफ्तार पार्टी में कांग्रेस, सपा और बसपा नेताओं को निमंत्रण दिया गया है. आरएलडी नेता जयंत चौधरी और कैराना में जीत दर्ज करने वाली सांसद तबस्सुम हसन भी मौजूद रहेंगी. इस बात को लेकर राजनीति गरमाई दिख रही है. इसे सियासी इफ्तार बताया जा रहा है.

बता दें कि कैराना उपचुनाव में आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन के समर्थन में विपक्षी दलों ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे. इस कारण तबस्सुम ने बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह को करीब 42 हजार मतों से हरा दिया. साथ ही नूरपुर की सीट पर सपा का कब्जा रहा. इस इफ्तार पार्टी में मायावती व अखिलेश शामिल होंगे या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

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कुलपति बंधक के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में आगजनी

इलाहाबाद। छात्रसंघ ने विरोध प्रदर्शन करने के दौरान गुस्साए छात्रों ने पुलिस वाहन को फूंक दिया. साथ ही जमकर नारेबाजी की. इस दौरान विवि में जमकर तोड़फोड़ी की गई. इससे पहले विवि के कुलपति को बंधक भी बनया गया था. इसके बाद भी विवि प्रशासन ने बात नहीं मानी तो छात्र सड़कों पर उतर आए.

बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों ने जबरदस्त हंगामा किया है. इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया. साथ ही पथराव भी जमकर किया. तभी हॉस्टल खाली कराने गई पुलिस के वाहनों में गुस्साए छात्रों ने आग लगा दी. हालांकि दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई. इतना ही नहीं इस दौरान छात्रों ने हवाई फायरिंग कर देशी बम फोड़े. बता दें कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के वाश आउट के फैसले के बाद छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया.

जान लें कि सारा मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव के तबादले विरोध में आरंभ हुआ. इसके लिए कुलपति को विश्वविद्यालय प्रांगण में बंधक बना लिया. कुलसचिव कर्नल हितेश लव से कार्यभार छीनने के बाद इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थिति बिगड़ गई है.

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