कैंसर से जूझ रहे इरफान का लंदन से आया खत, पढ़कर रो पड़ेंगे

नई दिल्ली। बीमारी के गिरफ्त में कब कौन चला जाए, कोई नहीं जानता. अच्छी-खासी जिंदगी जी रहे सिने स्टार इरफान खान की जिंदगी को कैंसर की बीमारी ने तोड़ डाला है. बेइंतहा दर्द व डर के साए में जिंदगी जी रहे इरफान ने अपने फैंस को एक खत लिखा है. ये खत उनकी बेचैनी व दर्द को बयां कर रहा है. इसे पढ़कर आंख में आंसू छलक आएंगे.

मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए…

आपको तो पता हीं होगा कि अपनी बीमारी के इलाज के लिए इरफान खान लंदन गए हैं. इरफान खान के खत के चलते वो एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे इरफान खान बीमारी के दौरान भी काम करने की इच्छा ने एक ‘कारवां’ शुरू किया है. जान लें कि इरफान की कारवां फिल्म 03 अगस्त को रिलीज होगी. इरफान ने ये खत वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज को भेजा है. उन्होंने इरफान का ये इमोशनल खत अपने ब्लॉग चवन्नी चैप पर शेयर किया है.

अजय अपने ब्लॉग में लिखते हैं कि, ‘कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं. यह शब्द मैंने पहली बार सुना था. जब मैंने इसके बारे में सर्च की तो पाया कि इस पर ज्यादा शोध नहीं हुए हैं. इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी मौजूद नहीं थी. यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है.

अभी तक मैं तेज रफ्तार वाली ट्रेन में सफर कर रहा था. मेरे कुछ सपने थे, कुछ योजनाएं थीं, कुछ इच्छाएं थीं, कोई लक्ष्य था. लेकिन अचानक ही किसी ने मुझे हिलाकर रख दिया मैंने पीछे देखा तो वो टीसी था. उसने कहा, आपका स्टेशन आ गया है कृपया नीचे उतर जाइए. मैं कन्फ्यूज हो गया. मैंने कहा नहीं अभी मेरी मंजिल नहीं आई है. उसने कहा- नहीं आपको अगले किसी भी स्टॉप पर उतरना होगा.’

‘इस डर और दर्द के बीच मैं अपने बेटे से कहता हूं, ‘मैं किसी भी हालत में ठीक होना चाहता हूं. मुझे अपने पैरों पर वापस खड़े होना है. मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए. कुछ हफ्तों के बाद मैं एक अस्पताल में भर्ती हो गया. बेइंतहा दर्द हो रहा है. यह तो मालूम था कि दर्द होगा, लेकिन ऐसा दर्द… अब दर्द की तीव्रता समझ में आ रही है…कुछ भी काम नहीं कर रहा है…. पूरा खत यहां पढें

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प्राचार्य की सुविधा के लिए दुसरे जिला में शिफ्ट हुई ITI, 70Km दूर जाते हैं स्टूडेंट्स!

प्रतीकात्मक फोटो

पटना। बिहार के शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को बताते हुए एक और मसला सामने आया है. स्टूडेंट्स को पढ़ाई करने के लिए 70 किमी दूर पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ता है. समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल का एकमात्र सरकारी आईटीआई कॉलेज में पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को करीब सत्तर किलोमीटर पढाई के लिए जाना पड़ता है.

दिव्यांग छात्र-छात्राओं…

जानकारी के अनुसार आईटीआई की स्थापना 2016 में हुआ था. स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षाओं के कारण रोसड़ा से 70 किलोमीटर दूर दरभंगा शहर में कॉलेज को शिफ्ट कर दिया गया. जबतक कॉलेज के लिए अपना भवन नहीं बन जाता है तब तक के लिए शहर के ही किसी सरकारी विद्यालय या महाविद्यालय में कॉलेज को शिफ्ट किया जाना चाहिए, लेकिन प्राचार्य अपने सुविधा को देखते हुए दरभंगा शहर में शिफ्ट करा लिया. जिससे कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन 70 किलोमीटर दूरी तय करने के लिए छह घंटा आने-जाने के लिए देना पड़ता है. इसके अलावा आर्थिक व शारिरिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है. खासकर दिव्यांग छात्र-छात्राओं को जाने-आने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

नहीं सुन रहे अधिकारी

इस समस्या से निजात पाने के लिए छात्रों ने इस समस्या को लेकर कई बार जिले के उच्चाधिकारियों से अपनी समस्या बताई. लेकिन आजतक कोई नहीं सुना. इसके साथ-साथ जनप्रतिनिधियों से भी जाकर मिला, परन्तु अबतक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है. इस बात को जानने के बाद समाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार सुमन ने जानकारी को फेसबुक वॉल पर शेयर किया. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निवेदन किया है कि इस समस्या का निदान निकालें.

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मासूम बच्ची के हाथों चली गोली, मां घायल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एक घटना घटी है. इस घटना में मां को गोली लग गई. गोली उसकी छोटी बच्ची के हाथ से चली. इसके बाद आसपास अफरा-तफरी मच गई. आनन-फानन में खून से लथपथ मां को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक एक मां ने खिलौना समझ कर अपनी बेटी को वह भरी हुई पिस्तौल थमा दी जो उसे अपने घर के बाहर एक बागान में मिली थी. बच्ची खेलते-खेलते ट्रिगर दबा दी और गोली से उसकी मां घायल हो गई. यह घटना राज्य के हुगली जिले के खानाकूल की है. गंभीर रूप से घायल काकोली जाना नामक उक्त महिला को आरामबाग अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

पुलिस की जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार को हुई. पुलिस ने बताया कि महिला को बागान में पिस्तौल मिली थी. उसने खेलने के लिए पिस्तौल अपनी बेटी को दे दी फिर घटना घटी. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वह पिस्तौल बागान में कहां से पहुंची.

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भाजपा को जीताने के लिए मैदान में उतरा संघ

नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत से जीताने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बड़ी भूमिका मानी जाती है. 2019 के चुनाव में जब भाजपा का सत्ता में वापसी करना आसान नहीं दिख रहा है, संघ ने एक बार फिर कमान संभाल ली है. भाजपा की जीत को पक्का करने के लिए संघ मैदान में उतर गया है. खास बात यह है कि इस रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए संघ अपने 100 प्रचारकों को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं. ये प्रचारक जमीन पर भाजपा की कमान संभालेंगे. और इसके लिए ये प्रचारक बकायदा भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

खबर है कि लोकसभा चुनावों की रणनीति बनाने के लिए हरियाणा के सूरजकुंड में संघ और भाजपा की 14 से 17 जून तक बैठक चली, जिसमें संयुक्त रूप से चुनाव में काम करने की रणनीति बनी. इसी दौरान संघ के 100 प्रचारकों को बीजेपी में शामिल करने का फैसला लिया गया. ये प्रचारक अभी तक विभिन्न राज्यों में बीजेपी के प्रदेश संगठन मंत्री या पार्टी के किसी न किसी संगठन से जुड़े हुए थे.

 इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशीडॉ. कृष्ण गोपाल और सुरेश सोनी शामिल हुए. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहसंगठन महासचिव रामलाल और सह संगठन महासचिव वी सतीश भी बैठक में मौजूद थे.

जिन सौ प्रचारकों को भाजपा में शामिल किया गया है, उनकी कई स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका होगी. ये 2019 में टिकटों को तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये पार्टी के सभी सांसदों के कामों और लोकप्रियता की समीक्षा करेंगे, जिसके आधार पर टिकट दिए जाएंगे. इनसे अगले एक महीने के भीतर ही रिपोर्ट देने को कहा गया है.

असल में सूरजकुंड की बैठक के दौरान ही आरएसएस और बीजेपी के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर डिनर दिया था. इसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहगृहमंत्री राजनाथ सिंहबीजेपी के संगठन मंत्री रामलाल और अन्य कई प्रमुख संघ नेता मौजूद रहे. संघ के इस साथ का भाजपा को कितना साथ मिलेगा यह आगामी लोकसभा चुनाव के नतीजे बताएंगे.

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हरामी व्यवस्थाः दलित दुल्हा के घोड़ी चढ़ने पर मचा बवाल, पुलिस ने निकलवाई बारात

गुजरात। दलित युवक के घोड़ी चढ़ने पर और नया विवाद सामने आया है. गांधीनगर में सवर्णों द्वारा दलित दुल्हे की बारात निकलने से रोक दी गई. सवर्णों ने आपत्ति जताई कि दलित दुल्हा कैसे घोड़ी पर चढकर बारात निकालेगा. इस बात को लेकर शादी के जश्न के माहोल पर बवाल मचा.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना 17 जून को सामने आई. खबरों के अनुसार पारसा गांव में क्षत्रिय समुदाय के लोगों ने रविवार को प्रशांत सोलंकी नामक दूल्हेय को घोड़ी पर चढ़ने से रोक दिया. इसके बाद फौरन पुलिस को इसकी जानकारी दी गई तब जाकर दलित दूल्हे की बारात निकली. इस मामले में पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ एट्रोसिटी, धमकी, मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है.

यह जान लें कि इस तरह का पहला मामला नहीं है. गुजरात में दलित अत्याचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इसको रोकने में पुलिस प्रशासन विफल दिख रही है. दो दिन पहले ही गुजरात में फैंसी कपड़े व मोजड़ी (जूती) पहने पर राजपूत युवाओं ने जमकर पिटा और उससे माफी मंगवाई. इससे पहले भी दलित युवक के घोड़ी चढने, मूंछ रखने, कपड़े पहनने, कुएं में नहाने को लेकर विवाद हो चुका है.

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जातिवाद के जहर में डूबा समाज और बाज़ार

(फोटो साभार : फेसबुक/Dalit Solidarity Network UK)

कुछ चीजों को तथाकथित ऊँची जात के लोगों ने अपना जातीय श्रेष्ठता दिखाने का बपौतीया अधिकार मान लिया है जैसे- मूँछ, सूट-बूट, जींस, सुनहरी मोजड़ी( जूती), सोने की मोटी सी चेन, गोरा रंग, घोड़े की सवारी, सिंह जैसे सरनेम, अच्छी कद-काठी आदि-आदि.

इसलिए जब कोई दलित इन चीजों में दिखता है तो इन सवर्णों के अंदर का जातिवाद ज़ोर मारने लगता है. इन दिनों मार्केट में जातीय दम्भ दिखाने वाले टीशर्ट-लोगों आदि भी खूब चल पड़े हैं. जातिवाद का ज़हर अचानक से मार्केट का फ़ैशन बन गया है. हालाँकि मार्केट वही बेचता है जो बिकता है, और दिनों जाति का दंभ भी बिक रहा है.

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद जाति घृणा से भरे लोग अपने ऊँचे होने का बोध कराने के लिए अब खुले रूप में सामने आने लगें हैं.

नतीज़न ये दलितों के साथ मार-पीट, गाली-गलौज, हिंसा, हत्या, सामूहिक अपमान, परेड निकालना, उन्हें नंगा करना, जैसे कृत्यों पर उतर आते हैं. मुस्लिमों( पसमांदाओं) के साथ होने वाली मॉब लिंचिंग भी इसी प्रेक्टिसेस का हिस्सा है. ऐसी कोई भी अमानवीय घटना को ये अकेले नहीं बल्कि समूह में अंजाम देते हैं. क्योंकि इन्हें पता है कि अकेले कोई हरकत करेंगे तो बराबर की टक्कर मिलेगी.

दूसरी बात इस तरह की सामूहिक मारपीट और अपमान की घटना एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समुदाय को संबोधित होती है. इसलिए एक बड़े जनसमूह को डराने के लिए ये सामूहिक रूप से घटना को अंजाम देते हैं. कारण अलग-अलग गिना देंगे पर इन सब घटनाओं का एक ही सबब है सवर्ण होने, जात के ऊंचा होने की घोषणा और बहुजनों को ग़ुलाम बनाने के लिए व्यापक स्तर पर संबोधित करना. कई बार ये पूर्णतः नियोजित या प्रायोजित भी देखी गई हैं.

-दीपाली तायड़े (लेखिका पत्रकार हैं.)

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ऑनलाइन टेस्ट देकर एयर फोर्स में पाएं जॉब

नई दिल्ली। एयर फोर्स में कई पदों पर वैकेंसी निकली है. भारतीय वायुसेना ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए नोटीफिकेशन जारी किया है. सबसे अच्छी बात यह है कि उम्मीदवारों की भर्ती एयर फोर्स कॉमन एडमिशन ऑनलाइन टेस्ट (एफसीएटी) के जरिये होगी. वायुसेना में नौकरी करने वाले ऑनलाइन फॉर्म भर कर नौकरी के आवेदन कर सकते हैं. इन पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2018 है.

यहां हम आपको कुछ जरूरी जानकारी दे रहे हैं. इसके हिसाब से आप चयन कर आगे का काम कर पाएंगे. साथ ही अलग सूचना माध्यमों से भी इसकी जानकारी ले सकते हैं. आवेदन करने के लिए इन जानकारियों को पढ़ लें.

कुल पदों की संख्या: 182

विभागः फ्लाइंग ब्रांच

पद: 42 पोस्ट

विभागः ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल)

AE (L): परमानेंट कमीशन (PC): 22, SSC: 30 पद

AE(M): PC-10, SSC: 14

विभागः नॉन टेक्निकल  (टेक्निकल)

एडमिन ऑफिसर: PC: 8, SSC-12 पद

लॉजिस्टिक्स: PC: 01, SSC- 04 पद

एकाउंट्स: PC: 3, SSC- 05 पद

एजुकेशन: PC: 3, SSC- 4 पद

योग्यताः इन पदों के लिए उम्मीदवार के पास फिजिक्स और गणित से बैचलर डिग्री होनी चाहिए. साथ ही कम से कम 60 फीसदी अंक होने चाहिए.

उम्र सीमा: फ्लाइंग ब्रांच के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 20 साल और अधिकतम आयु 24 साल निर्धारित की गई है. जबकि, ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल/नॉन टेक्निकल) के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 20 साल और अधिकतम आयु 26 साल होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का चयन AFCAT एग्जाम में प्रदर्शन के आधार पर होगा. शॉर्लिस्टेड उम्मीदवारों को ट्रेनिंग कोर्स कराया जाएगा, जिसके पूरे होने के बाद उम्मीदवारों की पोस्टिंग भारतीय वायु सेना में कमीशंड अधिकारी के तौर पर की जाएगी. ऑफिशियल वेबसाइट  www.afcat.cdac.in पर वैकेंसी के संबंध में विस्‍तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

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बाबासाहेब के नाम में ‘महाराज’ जोड़ने पर रजिस्ट्रार पर कार्रवाई

Baba Saheb Ambedkarऔरंगाबाद। बाबासाहेब के नाम में ‘महाराज’ जोड़ना रजिस्ट्रार को भारी पड़ा. प्राप्त जानकारी के मुताबिक 16 जून को महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय की कार्यवाहक रजिस्ट्रार साधना पांडे को डॉ. बीआर आंबेडकर के नाम के साथ ‘महाराज’ जोड़ने पर निलंबित कर दिया गया. विश्वविद्यालय के कुलपति बी चोपड़े ने विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्यों की बैठक के दौरान पांडे के निलंबन की घोषणा की.

जान लें कि प्रबंधन परिषद का चुनाव कराने के लिए बैठक का आयोजन किया गया था. भाषा की खबर के मुताबिक इस बैठक में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पांडे ने आंबेडकर के नाम के साथ ‘महाराज’ जोड़ दिया जिससे बैठक में हंगामा मच गया. उनके निलंबन करने पर ही मामला शांत हुआ. सीनेट के सदस्यों ने आरोप लगाया कि आंबेडकर के नाम के साथ गलत इरादे से यह शब्द जोड़ा गया. उन्होंने पांडे पर दक्षिणपंथी विचारधारा के अनुसरण का भी आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की. कुलपति ने पांडे के निलंबन की घोषणा की और उन्हें बैठक से चले जाने को कहा.

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आरक्षण बचाओ पैदल मार्चः आरक्षण मांगों को जल्द पूरा करे सरकार

लखनऊ। ‘‘आरक्षण बचाओ पैदल मार्च” में दलित नेताओं व समर्थकों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को रखा. साथ ही कहा कि आरक्षित वर्ग के अधिकारों के आधार पर फायदा दिया जाए नहीं तो एक बार फिर लाखों की तदाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरेंगे. इस दौरान हजारों की संख्या में आरक्षण समर्थकों ने योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पदोन्नति बिल पास कराने व आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को 15-11-1997 से बहाल कराने की मांग उठाई. साथ ही कहा कि आरक्षण समर्थकों का ऐलान सरकार ने शीघ्र न किया न्याय तो उप्र में लाखों की संख्या में आरक्षण समर्थक विशाल रैली करेंगे. इसके अलावा पिछड़े वर्गों के लिये पदोन्नति में आरक्षण की वर्ष 1978 में लागू व्यवस्था पुनः बहाल करने की मांग को रखा. इस दौरान संघर्ष समिति ने पिछड़े वर्गों के लिये प्रदेश में वर्ष 1978 में लागू पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को पुनः बहाल कराने की मांग उठायी.

लोक सभा में लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल पास कराने व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) को 15-11-1997 से बहाल कराने को लेकर आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में आज एक ‘‘विशाल आरक्षण बचाओ पैदल मार्च‘‘ डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मारक गोमती नगर से प्रातः 6 बजे प्रारम्भ हुआ. जिसमें हजारों की संख्या में शामिल आरक्षण समर्थक कार्मिकों के इस पैदल मार्च को उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति खेमकरन जी ने झण्डी दिखाकर रवाना किया.

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डॉ. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, रीना रजक, पीएम प्रभाकर, प्रेम चन्द्र, बनी सिंह, अशोक सोनकर, लेखराम, दिनेश कुमार, अजय चैधरी, डॉ. राजकरन, राम प्रकाश मौर्या, रामेन्द्र कुमार, योगेन्द्र रावत, सुशील कुमार, चमन लाल, प्रमोद कठेरिया, प्रभूशंकर, श्रीनिवास, सुखेन्द्र प्रताप, प्रतोष कुमार, बीना दयाल, राकेश पुष्कर, मंजू वर्मा, अनीता, अंजली, दिग्विजय सिंह, सुधा गौतम,सुनील कनौजिया, रंजीत कुमार, अरविन्द फोर्सवाल, मयाराम गौतम, बृहद्रथ वर्मा, राजेश कुमार, अरूण कुमार, रमेश चन्द्र ने आरक्षण को बचाने के लिए अपनी बात रखी.

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राहुल गांधी का बिहार के वरिष्ठ नेताओं संग लंच

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नई दिल्ली। राहुल गांधी बिहार पर नजर बनाए हुए हैं. राहुल गांधी के साथ बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं संग लंच पर बुलाया. साथ ही आगामी लोकसभा में पार्टी को जीत दिलाने को लेकर रणनीति बताई. इसको लेकर राजनीति में चर्चा जोरो पर चल रही है.

राजनीति पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता शक्तिसिंह गोहिल ने बिहार के सभी वरिष्‍ठ नेताओं को लंच पर बुलाया है. अभी राहुल गांधी के आवास पर नेताओं की बैठक हुई है. इसके बाद सभी नेताओं को गुजरात भवन बुलाया गया है. पार्टी की ओर से इसे आपस में समरसता बढ़ाने के लिए लंच बताया है. लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि लंच में बिहार की राजनीति पर भी चर्चा हो सकती है.

बता दें कि सुबह 10 बजे से बिहार कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ बैठक चली. बैठक के बाद करीब 12 बजे दिन में सभी पदाधिकारियों की राहुल गांधी से वन टू वन मुलाकात हुई. सूत्रों के अनुसार वन टू वन बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों से बिहार कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर राय मशविरा किया. बताया जाता है कि बैठक में लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस की रणनीति को भेदने के लिए विपक्षी ताक लगाए बैठे हैं.

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रेप आरोपी दाती महाराज व आश्रम की 600 लड़कियां भी गायब!

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नई दिल्ली। मशहूर शनिधाम वाले बाबा दाती महाराज उर्फ मदनलाल रेप का आरोप लगने पर छिपते फिर रहा है. क्राइम ब्रांच की टीम आश्रम जाकर तलाशी ली लेकिन वहां पर भी नहीं मिला. इतना ही पुलिस का कहना है कि आश्रम से करीब 600 लड़कियां भी गायब हैं. पुलिस ने आश्रम से सीसीटीवी फूटेज व कैसेट बरामद कर जांच के लिए भेजा है.

दिल्ली पुलिस दुष्कर्म मामले के आरोपी शनिधाम के संस्थापक दाती महाराज के काफी करीब पहुंचकर भी काफी दूर है. पुलिस ने उसे सोमवार 11 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन 1 बजे के बाद भी वह पूछताछ में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार से ही वह पाली, राजस्थान स्थित आश्रम से गायब है. तब से ही उसका कोई पता नहीं है. अपराध शाखा के अधिकारी ने बताया कि दाती महाराज को पूछताछ में शामिल होने के लिए शुक्रवार को ही नोटिस जारी किया गया था. छतरपुर स्थित शनिधाम में भी नोटिस भेजा गया था. अगर वह तफ्तीश में शामिल नहीं होता है तो उसे दूसरा नोटिस भेजा जाएगा.

अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आश्रम में रहकर करीब 700 लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं. सभी का खर्च दाती महाराज उठाता है. पुलिस को अधिकांश कमरे खाली मिले. अब सवाल यह है कि किसी डर के चलते दाती महाराज ने इन लड़कियों को कहीं भेज दिया है या वे छुट्टियां होने के कारण अपने घर चली गई हैं. पुलिस आश्रम के चप्पे चप्पे की तलाशी कर रही है.

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डीजल के बढ़ते दाम के खिलाफ हड़ताल पर नब्बे लाख ट्रक

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नई दिल्ली। डीजल के बढ़ते दाम के खिलाफ ट्रक मालिकों ने हड़ताल आरंभ कर दिया है. पूरे देश भर के ट्रक चालकों व मालिकों ने मिलकर डीजल के दाम घटाने को लेकर हड़ताल में मांग की है. सोमवार से नब्बे लाख ट्रक हड़ताल पर हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि हड़ताल काफी लंबी चलेगी जिससे आम लोगों को दिक्कत का सामना कर पड़ सकता है.

जान लें कि किसानों की दस दिनों की हड़ताल के बाद ही देशव्यापी ट्रकों की हड़ताल शुरू हुई है. इससे एक राज्य से दुसरे राज्य आने-जाने वाले सामान नहीं पहुंच पाएंगे. इससे सबसे ज्यादा परेशानी का सामना आम लोगों को करना पड़ेगा. पेट्रोल-डीजलों के दाम ने जिस तरह बीते दिनों उछाल लगाई है ट्रक चालक और मालिक उससे खफा हैं यही कारण है कि ये हड़ताल बुलाई गई है. इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का दाम बढ़ने से भी ट्रक वाले नाराज़ हैं.

ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ गुड्स व्हीकल्स ऑनर्स के अनुसार, डीजल और पेट्रोल के दाम से काफी भारी नुकसान हो रहा है. यही कारण है कि करीब 90 लाख ट्रक हड़ताल पर जा रहे हैं. ये करीब देश भर के 60 फीसदी ट्रक हैं. देश के कई ट्रक संगठनों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे के अंदर लाने की बात की है.

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केजरीवाल ऐसे कैसे कर सकते हैं हड़तालः हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सात दिन के हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है. दिल्ली में राज्य सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रही खींचतान को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को कहा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये धरना है या हड़ताल और क्या इसकी कोई अनुमति ली गई या खुद ही तय कर लिया गया.

इस मुद्दे पर कोर्ट ने पूछा कि अगर ये खुद व्यक्तिगत रूप से तय किया गया फैसला है तो ये एलजी के घर के बाहर होना चाहिए था. क्या एलजी के घर के अन्दर ये धरना करने के लिए इजाजत ली गई है? हाईकोर्ट ने कहा कि आप कैसे किसी के घर या दफ्तर में जाकर हड़ताल पर बैठ सकते हैं. उन्होंने सीधा सवाल किया कि जैसे ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठती है, क्या ये वैसी ही हड़ताल है. धरने पर बैठने का फ़ैसला कैबिनेट का है या ये व्यक्तिगत फ़ैसला है. कोर्ट की ओर से कहा गया है कि इसका जल्द से जल्द कोई समाधान ढूंढा जाना चाहिए.

जान लें कि एलजी से ना मिल पाने पर रविवार को आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास को घेरने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग से आगे नहीं बढ़ने दिया. साथ ही इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खबर की पुष्टि की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “सत्येंद्र जैन को खराब स्वास्थ्य के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है.” अरविंद केजरीवाल के इस आंदोलन को अब देश के कई अन्य नेताओं का समर्थन मिलना शुरू हो गया है. रविवार को नीति आयोग की बैठक के लिए नई दिल्ली पहुंचे कर्नाटक सीएम एच.डी. कुमारस्वामी, आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू, केरल सीएम विजयन और बंगाल की ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बारे में बात भी की.

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क्रिकेटर रोहित शर्मा ने फीफा में लहराया तिरंगा

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टीम इंडिया के ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा इन दिनों अपनी पत्नी रितिका सजदेह के साथ छुट्टियां मना रहे हैं। इस वक्त वह फीफा वर्ल्ड कप देखने के लिए रूस गए हुए हैं। दोनों ने गुरुवार को फीफा वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी और उद्घाटन मैच का आनंद उठाए। रोहित ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक फोटो शेयर की है। इस फोटो में रोहित तिरंगा थामे खड़े हैं। उन्होंने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, ‘हमें अपने तिरंगे को हर जगह ऊंचा रखना है।’

गौरतलब है कि फुटबॉल का महाकुंभ फीफा विश्व कप के 21वें संस्करण की शुरुआत 14 जून से हो चुका है। उद्घाटन मुकाबला मेजबान रूस और साउदी अरब के बीच खेला गया, जिसमें साउदी अरब को रूस के हाथों 0-5 से हार झेलनी पड़ी। 14 जून से 15 जुलाई तक चलने वाले इस महाकुंभ में 32 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिनके बीच 64 मुकाबले खेले जाएंगे। फीफा विश्व कप में भारत भले ही नहीं खेल रहा हो, लेकिन यहां के लोगों में भी अब फुटबॉल के प्रति वही जोश, जुनून और दीवानगी जगी है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक टेस्ट का हिस्सा ‘हिटमैन’ नहीं थे। टीम इंडिया ने इस ऐतिहासिक टेस्ट में अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रन के विशाल अंतर से हराया। टीम इंडिया को इस महीने के अंत में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी है। इस सीरीज के साथ रोहित क्रिकेट मैदान पर वापसी करेंगे। इसके अलावा टीम इंडिया टीम का इंग्लैंड दौरा 3 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ 3 वन-डे, 5 टेस्ट और 3 टी-20 मैच खेलना है।

बता दें कि टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी बखूबी जानते हैं कि भारत की टीम इस वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले रही है, लेकिन उनका मानना है कि अपने देश का तिरंगा हर जगह लहराते रहना चाहिए। इसके अलावा रोहित फीफा वर्ल्ड कप में स्पेन का जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। स्पेन और पुर्तगाल के बीच शुक्रवार को खेला गया मैच 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ।

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मध्यप्रदेश में बसपा ने छोड़ा कांग्रेस का साथ

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश चुनाव से पहले ही कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. बसपा के साथ मिलकर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की बात से बसपा ने नकार दिया है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से साफ तौर कहा गया है कि मध्यप्रदेश में साथ चुनाव लड़ने की बात अफवाह थी. रविवार को इस बात की पुष्टि करते हुए बसपा के प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने कांग्रेस से गठबंधन की बात क झूठा बताया. साथ ही कहा कि कांग्रेस से गठबंधन के बारे में कोई भी फैसला नहीं लिया गया है.

कांग्रेस के साथ गठबंधन की पर नर्मदा प्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस गठबंधन वाली बात तो हमारी सुप्रीमो की ओर से कभी नहीं कहा गया. प्रदेश में किससे गठबंधन करना है, इसका फैसला बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव से तीन माह पहले करेंगी. हालांकि दुसरी ओर उन्होंने दावा किया कि बसपा सभी 230 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. इन बयानों से कांग्रेस व बसपा की गठबंधन पर कोई संभावना नहीं दिख रही है. जानकारों का ऐसा कहना है कि इससे महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा सकता है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा की गठबंधन ने भी कांग्रेस को वहां अकेले चुनाव लड़ने को छोड़ दिया है.

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में, भाजपा को 44.88 फीसदी, कांग्रेस को 36.38 फीसदी जबकि बसपा को 6.29 प्रतिशत वोट मिले थे. 2013 के चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों में भाजपा ने 165, कांग्रेस ने 58, बसपा ने 4 और 3 तीन सीटें अन्य ने जीतीं थी. इसको लेकर कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

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बिहार में विकास पर नीतीश और मोदी सरकार में ठनी

पटना। बिहार में नीतीश कुमार खुद को सुशासन बाबू के तौर पर पहचाना जाना पसंद करते हैं. तो वहीं पीएम मोदी ने अपनी छवी विकास पुरुष की गढ़ी है. फिलहाल बिहार में सुशासन बाबू और विकास पुरुष की पार्टी मिलकर सरकार भी चला रहे हैं. लेकिन बिहार के विकास को लेकर इन दोनों नेताओं में ठन गई है. प्रदेश में सड़क निर्माण परियोजना से जुड़े मामले में दोनों आमने-सामने हैं.

नीतीश कुमार की सरकार ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान को झूठा करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में दो लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है. गडकरी के इस बयान पर बिहार पथ निर्माण विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में साफ किया गया कि बिहार में सिर्फ 54 हजार 700 करोड़ रुपये की ही सड़क परियोजना पर काम चल रहा है. इस परियोजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 के चुनाव के दौरान विशेष पैकेज के तौर पर की थी.

 बिहार सरकार ने केंद्रीय मंत्री गडकरी के उस आरोप को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़क निर्माण के लिए जमीन देने में राज्य सरकार देरी कर रही है. प्रेस रिलीज में कहा गया कि सिर्फ चार ऐसी परियोजानएं है, जिसमें जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. बाकी सभी परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है.

मजेदार बात यह है कि बीजेपी कोटे के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है. पथ निर्माण विभाग के मुताबिक प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के अंतर्गत कुल 82 सड़क परियोजनाएं शामिल है, जिनकी अनुमानित लागत 54 हजार 700 करोड़ रुपये है. इनमें से 24 परियोजनाएं एनएचएआई के जिम्मे हैं, जबकि 58 योजनाओं का निर्माण बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा किया जाना है.

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गुजरात की राजधानी में मनुवादी गुंडों ने दिखाई नीचता

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प्रतीकात्मक चित्र

अहमदाबाद। हर रोज देश के अलग-अलग हिस्सों से कमजोर वर्ग के लोगों पर उत्पीड़न की खबरें आना आम हो गया है. गुजरात में भी दलितों पर एक के बाद एक अत्याचार की खबरें आम हो गई है. इसी कड़ी में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के माणसा में 17 जून (रविवार) को कुछ मनुवादी गुंडों ने एक दूल्हे को जबरन इसलिए घोड़ी से उतार दिया क्योंकि वह समाज के कमजोर वर्ग से ताल्लुक रखता था.

घटना माणसा के पारसा गांव की है. रविवार को युवक की शादी थी, जिसमें उसके सगे-संबंधी पहुंचे थे. बारात धूमधाम से निकली, दूल्हा घोड़ी पर सवार था. लेकिन तभी गांव के कुछ मनुवादी गुंडों ने दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने पर आपत्ति जता दी और इसे अपना अपमान बताया. उन्होंने दूल्हे को जबरन घोड़ी से उतार दिया, जिससे बराती भड़क गए और पुलिस को घटना की सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और बीच-बचाव किया.

अच्छी बात यह रही की स्थानीय पुलिस ने तुरंत मामले को संभाला और बारात को पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के साथ रवाना कर दिया. गौरतलब है कि घटना के एक दिन पहले ही मेहसाणा में रजवाड़ी जूती पहनने पर एक अनुसूचित जाति के युवक की कथित ऊंची जाति के गुंडों ने बेरहमी से पिटाई की थी.

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गौरी लंकेश पर श्रीराम सेना प्रमुख का विवादित बयान

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बेंगलुरू। गौरी लंकेश की हत्या में शुरू से ही हिन्दूवादी संगठनों का नाम आता रहा है. तो हिन्दूवादी संगठन के लोग भी गौरी लंकेश को लेकर अपनी तल्खी अपने बयानों से सामने रखते रहे हैं. अब हिन्दूवादी संगठन श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने मृत पत्रकार गौरी लंकेश को लेकर एक विवाद बयान दिया है. प्रमोद मुतालिक ने पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की तुलना कुत्ते की मौत से कर डाली. श्रीराम सेना प्रमुख ने यह बयान कर्नाटक के बेंगलुरू में एक सभा के दौरान दी.

हर छोटी बड़ी बात पर ट्विट करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गौरी लंकेश की हत्या पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. इसको लेकर उनकी काफी आलोचना भी हुई. सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने पीएम मोदी पर इसको लेकर सवाल भी उठाए थे. ऐसा ही सवाल सामने आने पर प्रमोद मुतालिक ने कहा, “महाराष्ट्र में दो और कर्नाटक में दो हत्याएं कांग्रेस के वक्त हुई हैं. लेकिन फिर भी कोई कांग्रेस की विफलताओं की बात नहीं कर रहा बल्कि इसकी जगह यह कहा जा रहा है कि पीएम मोदी इस पर शांत क्यों हैं? पीएम मोदी अपनी प्रतिक्रिया दें? क्या आप चाहते हैं कि पीएम मोदी हर कुत्ते की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया दें?”

इस बयान के सामने आने के बाद विवाद बढ़ता देख प्रमोद मुतालिक ने बाद में इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी कोई सीधी तुलना नहीं की है. मुतालिक ने अपनी सफाई में कहा कि राज्य में कांग्रेस की सत्ता है, लेकिन बुद्धिजीवी पीएम मोदी पर उंगली उठा रहे हैं. उनके संगठन का गौरी लंकेश से वैचारिक मतभेद था, ‘लेकिन हम इतने नीचे नहीं गिर सकते कि किसी की हत्या कर दें.

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एक साल में चार गुणा बढ़ी मैला ढोने वालों की संख्या

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नई दिल्ली। देश में मैला ढोने की प्रथा खत्म करने से जुड़ा पहला कानून 1993 आया था, इसके बाद 2013 में इससे संबंधित दूसरा कानून बना, जिसके मुताबिक नाले-नालियों और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए रोज़गार या ऐसे कामों के लिए लोगों की सेवाएं लेने पर प्रतिबंध है.

विभिन्न अदालतों द्वारा समय-समय पर मानवाधिकार और गरिमामय जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकार मैला ढोने (मैनुअल स्कैवेंजर) वाले लोगों को पहचानकर उनके पुनर्वास के लिए काम करे. लेकिन स्थिति यह है कि कानून और अदालती निर्देशों के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या बढ़ती जा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक अंतर-मंत्रालयी कार्यबल (इंटर-मिनिस्टीरियल टास्क फोर्स) द्वारा देश में मौजूद मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या का आंकड़ा जारी किया गया है. उनके मुताबिक देश के 12 राज्यों में 53, 236 लोग मैला ढोने के काम में लगे हुए हैं.

यह आंकड़ा साल 2017 में दर्ज पिछले आधिकारिक रिकॉर्ड का चार गुना है. उस समय यह संख्या 13,000बताई गयी थी.

हालांकि यह पूरे देश में काम कर रहे मैनुअल स्कैवेंजर का असली आंकड़ा नहीं है क्योंकि इसमें देश के 600से अधिक जिलों में से केवल 121 जिलों का आंकड़ा शामिल है.

द वायर द्वारा इस बारे में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया भी गया था कि सरकार द्वारा पहले फेज में देश में काम कर रहे मैनुअल स्कैवेंजर की गिनती की जा रही है.

पहले फेज में वो सफाईकर्मी शामिल थे जो रात के समय सूखे शौचालयों को साफ करते हैं. सरकार द्वारा दिए गये आंकड़े में सीवर और सेप्टिक टैंक साफ करने वाले सफाईकर्मियों का आंकड़ा नहीं है. इस टास्क फोर्स को 30 अप्रैल तक यह सर्वे देना था लेकिन इसमें देर हुई.

इसकी वजह राज्यों का असहयोग था क्योंकि वे यह बात नहीं स्वीकारना चाहते थे कि वे इस मुद्दे से निपटने और इससे जुड़े लोगों के पुनर्वास में नाकाम रहे हैं. इस सर्वे का संपूर्ण आंकड़ा इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है.

सरकार द्वारा नेशनल सर्वे में बताए 53 हज़ार मैनुअल स्कैवेंजर की संख्या में से राज्यों ने 6,650 को ही आधिकारिक रूप से स्वीकारा है. राज्य सरकारों का यह रवैया स्पष्ट रूप से मैला ढोने की प्रथा और सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर उनकी उदासीनता दिखाता है.

सबसे ज्यादा 28,796 मैनुअल स्कैवेंजर उत्तर प्रदेश में रजिस्टर किए गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान,हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्य जहां राज्यों द्वारा शून्य से 100 तक की संख्या दर्ज की गयी थी, वहां यह आंकड़ा काफी बढ़ा है.

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ब्रांडेड कपड़ों पर संकट! अभी से कर लें खरीददारी

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नई दिल्ली। ब्रांडेड कपड़े खरीदना महंगा होने जा रहा है. इसको लेकर खबर आ गई है. ऐसे में यदि आप कपड़ा खरीदने का मूड बना रहे हैं तो जल्द ही कपड़े की खरदीदारी कर लें. बताया जा रहा है कि देश में विदेशी कंपनियों के ब्रांडेड कपड़े खरीदना और महंगा हो सकता है. कई कंपनियां अपने उत्पादों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी आने वाले दिनों में कर सकती हैं.

जानकारों का मानना है कि कपड़ों की डाई बनाने में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि हो गई है. इससे ब्रांड्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. जिन विदेशी ब्रांडों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ने की संभावना है उनमें ज़ारा, गैप, एचएंडएम, ओल्ड नेवी आदि हैं. यह कंपनियां भारत में ही अपने कपड़ों को तैयार कराती हैं और फिर पूरे विश्व में इनको बेचती हैं. दिल्ली-एनसीआर में ऐसी कंपनियों की तादाद सबसे ज्यादा है, जो विदेशी कंपनियों के लिए कपड़े तैयार करती हैं.

खबर यह भी आई है कि कंपनियों ने प्रोडक्शन बंद कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर में स्थित कई कंपनियों ने डाई के महंगा हो जाने के बाद अपना प्रोडक्शन बंद करने की बात भी बताई है. यह ऐसे समय में है, जब नए कलेक्शन के लिए पूरे विश्व से ऑर्डर आ रहे हैं. डाई की कीमतों में पिछले 15 दिनों में खासी वृद्धि देखने को मिली है.

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