Top News

मेरी कनाडा डायरी

कनाडा से लौटने से पहले की शाम को मैं रो पड़ा था। दरअसल दूसरे दिन सुबह मेरी फ्लाइट थी और मेरी विदाई के लिये तमाम साथी इकट्ठा हुए थे। सभी बारी-बारी से मेरे बारे में अपने अनुभव बता रहे थे। फिर मेरी बारी आई,...

रेगिस्तान के दलित नौजवान की उच्च शिक्षा के लिए लंबी उड़ान

सुदूर रेगिस्तान के दलित-किसान-मजदूर परिवार में पैदा हुये भट्टाराम एक ऐसे इलाके से आते है,जहां पर जातिगत भेदभाव व छुआछूत भयंकर रूप में विद्यमान है.यह इलाका आज भी सामंतवाद की चपेट में है.आज भी यहां दलितों को छूने तक से परहेज किया जाता है.बच्चों...

भारतीय समाज: अपर कॉस्ट के हित में अपर कॉस्ट द्वारा संचालित-कुछ जरूरी तथ्य

राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक चुनावी भाषण में एक नारा दिया, “जितनी जिसकी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” इसका अर्थ है कि किसी समाज और किसी विशिष्ट सामाजिक समूह की हिस्सेदारी जनसंख्या में उनके हिस्से के अनुरूप होना चाहिए। अपनी बात राहुल गांधी ने...

पिछड़ों, दलितों और महिलाओं के मुक्तिदाता राजा : शाहू जी महाराज

ब्राह्मणवादी परंपरा में सबसे ‘महान’ राज्य ‘रामराज्य’ और सबसे ‘महान’ राजा राम हुए हैं, लेकिन इस रामराज्य में लोगों का मूल कर्तव्य वर्णव्यवस्था का पालन था। यानी शूद्र और अतिशूद्र द्विजों की सेवा करेंगे और स्त्रियां पुरुषों की। यदि कोई इसका उल्लंघन करता, तो...

आरक्षण के जनक ही नहीं, प्लेटो के आदर्श दार्शनिक राजा थे शाहूजी महाराज

प्लेटो ने अपनी चर्चित किताब ‘रिपब्लिक’ में एक ऐसे राजा की कल्पना की है जिसमें दार्शनिक जैसी मानवीय गरिमा, साहस और राजनीतिक श्रेष्ठता एवं बौद्धिकता का मेल हो. उसका कहना था कि ऐसा राजा मानव जाति को तमाम अभिशाप से मुक्त कर सकता है...

उत्तर भारत में सामाजिक क्रांति के जनक स्वामी अछूतानंद ‘हरिहर

शूद्रों गुलाम रहते, सदियां गुजर गई हैं जुल्मों सितम को सहते, सदियां गुजर गई हैं अब तो जरा विचारो, सदियां गुजर गई हैं अपनी दशा सुधारो, सदियां गुजर गई हैं बहुजनों के जागरण का आह्वान करने वाली उपरोक्त पंक्तियां स्वामी अछूतानंद ‘हरिहर’ की हैं। वे उत्तर भारत में...

कार्ल मार्क्स : मानव इतिहास के महानतम क्रांतिकारी दार्शनिक

जिस एक व्यक्तित्व ने मानव इतिहास को सर्वाधिक प्रभावित किया, उस व्यक्तित्व का नाम कार्ल हेनरिख मार्क्स है। वे पहले दार्शनिक थे, जिन्होंने यह व्याख्यायित किया कि मानव इतिहास की गति एवं उसकी विकास यात्रा की बुनियाद में क्या है? क्यों पूरी दुनिया में...

Dr. Ambedkar International Symposium in Vancouver, Canada, closed with a lot of excitement and a set of strategies & actions

Written by - Jai Birdi and Param Kainth As the saying goes, "all good things must come to an end", such is the case with the Dr. Ambedkar International Symposium on Emancipation and Equality Day Celebrations. Purpose of the symposium was to rethink, restrategize, and...

भाजपा का नया खेल: मुस्लिम आरक्षण का खात्मा!

इस समय पूरे देश की निगाहें कनार्टक विधानसभा चुनाव प्रचार पर लगी हैं, जहाँ 10  मई को 224 सीटों के लिए वोट पड़ने हैं.वोटों की गिनती 13 मई को होगी. चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि जेडीएस के साथ...

परशुराम के बारे में अम्बेडकर के गुरु जोतीराव फुले के विचार

हिंदू पांचांग के अनुसार (25 अप्रैल) या ( 26 अप्रैल) या दोनों के बीच परशुराम जयंती होती है। हिंदू धर्मग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार एवं ब्राह्मण जाति के कुल गुरु हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में भूमिहार राय...

तेलंगाना में 125 फीट की अंबेडकर मूर्ति के मायने क्या हैं?

तेलंगाना में 14 अप्रैल को 125 फीट की बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ। तेलंगाना सरकार की ओर से यह शानदार प्रतिमा बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने बाबासाहेब के पोते प्रकाश आंबेडकर को...

झारखंड के बेदिया जनजाति के युवा समाज के लिए पेश कर रहे हैं शानदार मिसाल

कहते हैं कि जज़्बा दमदार हो तो पत्थर का सीना चीर कर भी पानी निकाला जा सकता है। झारखण्ड के हजारीबाग जिले के डाडी प्रखंड अंतर्गत स्थित आदिवासियों के एक गाँव कुरकुट्टा में रहने वाले बेदिया जनजाति के युवा इस कहावत को चरितार्थ कर...

ये मुसहर टोली है, यहां न सीएम योजना पहुंची, न ही पीएम योजना

भारत में दलितों की स्थिति देश के कई हिस्सों में आज भी बदतर है। आज भी वो मूल अधिकारों और जीवन जीने की जरूरी चीजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दलितों की एक बड़ी आबादी तक आज तक न तो शिक्षा पहुंच पाई...

जयंती विशेषः ज्योतिबा राव फुले और गुलामगिरी

 1 जून, 1873 को ज्योतिराव फुले (11अप्रैल 1827 – 28 नवम्बर 1890) की रचना ‘गुलामगिरी’ का प्रकाशन हुआ था। यह किताब मराठी में लिखी गयी। इसकी प्रस्तावना फुले ने अंग्रेजी में और भूमिका मराठी में लिखी है। इस किताब को लिखने का मूल उद्देश्य...

विदेशी धरती पर अंबेडकर जयंती की धूम, भारतीय मीडिया में चुप्पी

खबर चलाने वाले खबर खा ले रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे। भारतीय मीडिया टीवी में दिनभर बैठ कर यह बात करता है कि अमेरिका जैसा एक दिन भारत होगा। लेकिन वही मीडिया, भारत के सबसे बड़े राष्ट्रनिर्माता के गौरव को छिपा...

Canada में होगा Ambedkar Jayanti का सबसे खास प्रोग्राम, दुनिया भर से जुटेंगे ये दिग्गज

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अंबेडकर जयंती की तैयारियों जोर पकड़ चुकी हैं। चाहे भारत हो, चाहे अमेरिका, चाहे इंग्लैंड या फिर कनाडा, दुनिया भर के अंबेडकरवादियों में अंबेडकर जयंती का खासा उत्साह है। कनाडा के वैंकुअर के अंबेडकरवादी इसे Dr. Ambedkar International Symposium for...

भारत के सवर्णों के लिए क्यों अछूत हैं “सम्राट अशोक”

इस बार आज 29 मार्च 2023 को सम्राट अशोक की जयंती मनाई गई। ऐसे लोगों द्वारा जो अशोक की महानता को, भारत के लिए उनके योगदान को और बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में उनके योगदान को भूले नहीं है। लेकिन भारत की सरकारों...

मध्यप्रदेश में जमीन पट्टा न मिलने से परेशान आदिवासी समाज

मध्यप्रदेश का मण्डला जिला एक आदिवासी बाहुल्य है। जो पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आता है। इस जिले में बसे आदिवासी समुदाय की आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। लेकिन, सहजता से खेती कर पाना इतना सरल नहीं है, यह हमें मण्डला जिले का मोहगांव...

अमेरिका और कनाडा का अंबेडकर जयंती को लेकर बड़ा फैसला

अमेरिका के दो राज्यों ने एक ऐसा बड़ा फैसला किया है, जो दुनिया भर में मौजूद अंबेडकरवादियों के लिए बड़ी खबर है। बहुजन समाज की मुक्ति के लिए काम करने वाले दो महानायकों बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर और महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती को देखते...

अब हार्वर्ड युनिवर्सिटी में जातिवाद बैन, अंबेडकरवादियों की बड़ी जीत

अमेरिका के सिएटल शहर में जाति आधारित भेदभाव बैन होने के बाद अब दूसरी खबर हार्वर्ड युनिवर्सिटी से आई है। अमेरिका के बोस्टन में स्थित दुनिया की शानदार युनिवर्सिटी में से एक हार्वर्ड युनिवर्सिटी ने भी अपने नॉन डिस्क्रीमिनेशन पॉलिसी में जाति को भी...
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

कास्ट मैटर्स

वीडियो

ओपीनियन

January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
Skip to content