कांशीराम दूसरे नेताओं की तरह सफेद खादी के कपड़े नहीं पहनते थे. संघर्ष के दिनों में सेकेंड हैंड बाजार से खरीदे पैंट शर्ट और बाद में सफारी सूट उनका पहनावा बना. दूसरे नेताओं से उनका ये फर्क सिर्फ कपड़ों तक नहीं था. कांशीराम के...
मूंछें रखने की वजह से गुजरात के गांधीनगर में पीयूष परमार और उनके दो भाइयों की गैर दलितों द्वारा की गई पिटाई के खिलाफ आक्रोश देश भर में बढ़ता जा रहा है. इस कृत्य की राष्ट्रव्यापी निंदा की जा रही है. मूंछों की वजह...
कांचा इलैया की इस किताब पर सारा विवाद इसकी हिंदी कॉपी आने के बाद हुआ. इसका पहला मतलब यह है कि नौ साल से इसकी इंग्लिश कॉपी बिक रही है. अमूमन देश भर की लाइब्रेरी में है. लेकिन मूर्खों को कोई दिक्कत नहीं हुई....
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अक्टूबर की सुबह ट्वीट किया, ''वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं, एक महान संत और साहित्यिक व्यक्ति के उच्च आदर्श और कार्य कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती हैं.''
मोदी की इन शुभकामनाओं में महान संत, बड़े साहित्यिक, उच्च आदर्शों और कार्यों वाले...
भारत बहुभाषी, बहुआयामी और विविधता वाला देश है. इस देश में कई संस्कृतियां जन्मीं और विकसित हुई हैं. दुर्भाग्य से पिछली कुछ शताब्दियों से हिंदू संस्कृति के द्वारा सांस्कृतिक एकाधिकार व आधिपत्य की नियत से भारत की सांस्कृतिक विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया...
बीएचयू में धरना चल रहा था. छात्राओं की स्टोरी चल रही थी. न्यूज़ एजेंसी की माइक पर लड़कियां बता रहीं थीं छेड़ख़ानी की शिकायत के बारे में. एक लड़का भी साउंड बाइट देने आया. वो लड़कियों की सुरक्षा से शुरू करके मुद्दा हॉस्टल में...
देश भर में दुर्गोत्सव के साथ दशहरा की भी धूम रही. पर झारखंड में गुमला की सुदूर पहाड़ियों पर बसने वाले आदिम जनजाति असुर दस दिनों तक शोक में डूबे रहे. दरअसल महिषासुर को अपना पुरखा मानने वाले असुरों को इसका दुख है कि...
कौन हैं आप लोग और आंदोलन भी किसके खिलाफ कर रही हो..?
मेरी नजर में आप सभी लोग निहायती बेवकूफ हो. आप पुरुषों के खिलाफ आंदोलन कर रही हो. आपको चाहिए भी क्या कि छेड़-छाड़ बन्द हो, यूनिवर्सिटी में हर जगह कैमरे लगे, और लाइट...
हमें ये सोचना चाहिए कि हमारे देश में 22 ऑफिशियल भाषाओं के होने बावजूद भी हम हर मामले में पीछे क्यों हैं? या कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत इसिलए पीछे है क्योंकि यहां इतनी ऑफीशियल भाषाएं हैं?
क्योंकि सवाल ये है कि अगर इतनी...
हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में नौवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा को एक मनचले लड़के ने सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसने उसके प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. ये सिर्फ इस बात का संकेत है कि पुरुष अपने वर्चस्व...
बीएचयू प्रकरण में न्यायिक जांच के आदेश से एक अध्याय समाप्त हो चुका है, कुछ बातें कही जानी चाहिए जो अब तक नहीं कही गई हैं. सबसे पहली बात उन लड़कियों के बारे में, जो वाकई अपनी सुरक्षा से खौफ़ज़दा थीं और धरने पर...
मेरे जवाब से बेहतर है मेरी खामोशी,
न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।
27 अप्रैल, 2012 को संसद में उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये शेर पढ़ा था. उन दिनों यूपीए सरकार हर मोर्चे पर फेल हो रही थी. घोटाले पर घोटाले...
नवरात्रि में हमारा समाज कन्याओं की पूजा करता आया है. उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया जाता है. चरण धोकर स्वागत किया जाता है और तिलक के बाद दक्षिणा और उपहार देकर विदा करने की परंपरा है. पूरे नौ दिन तक देश शक्ति की अराधना...
मशहूर फ्रेंच विचारक लुई अल्तुसर से हमारी मुलाकात 1980 के आसपास हुई थी. उन दिनों वे ‘फिलॉसफी ऑफ रीडिंग’ (पाठ का प्रयोजन) के अध्ययन के सिलसिले में भारत आए थे. उनके अध्ययन का सार यह था कि किसी किताब का पाठ हम सभी अलग-अलग...
प्राचीन वैदिक समाज को श्रम विभाजन तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत चार वर्णों में विभाजित किया गया था. कालांतर में इनसे लाखों जातियां बन गईं. प्राचीन वर्ण व्यवस्था का सही या गलत होना हमेशा से विवादित रहा है, परंतु इसमे कोई शक नही है...
कच्चे तेल के दाम में पचास फीसदी से भी ज़्यादा की कमी आ गई है मगर पेट्रोल के दाम में कमी क्यों नहीं आई है. मीडिया में महानगरों के तेल के दाम बताने का चलन है, लेकिन दूर दराज़ के शहरों के दाम देखेंगे...
डिजिटल इंडिया से न्यू इंडिया की संकल्पना आजकल सरकार की प्रमुखता में है. इसके प्रचार-प्रसार के लिए काफी धनराशि खर्च की जा रही है. हालांकि अभी भी हमारा देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें आतंकवाद, नक्सलवाद तो गंभीर समस्यायें हैं ही, इसके...
पांच सितम्बर को गौरी लंकेश जैसी महान पत्रकार की हुई हत्या समाज के लिए निंदनीय है. उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रयोग की गयी अभद्र भाषा हमारी सांस्कृति को शोभा नहीं देता. इस अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों पर...
हिंदी दिवस परिपाटी, पाखंड, प्रहसन सब कुछ है- साथ में कुछ लोगों के लिए यह प्रायश्चित भी कि कैसे वे अपनी ही भाषा के साथ धोखा कर रहे हैं. इस प्रायश्चित की सीमा बस यही है कि वे सच्चे दिल से मानते हैं कि...
संविधान में सभी लोगों के लिए समान अवसर और न्याय की व्यवस्था है. इसी संविधान ने अनुसूचित जाति/ जन जाती को सरकारी शिक्षा, नौकरी और चुनावों में आरक्षण दिया. पिछड़ों को भी 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. लेकिन आजादी के 70 वर्षों बाद भी...