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दलित साहित्य में पत्र-पत्रिकारिता

पत्राचार ही एक ऐसा साधन है, जो दूरस्थ व्यक्तियों को भावना की एक संगमभूमि पर ला खड़ा करता है और दोनों में आत्मीय सम्बन्ध स्थापित करता है. व्यावहारिक जीवन में पत्राचार वह सेतु है, जिससे मानवीय सम्बन्धों की परस्परता सिद्ध होती है. अतएव पत्राचार...

झूठ की फैक्टरी का सामना झूठ की फैक्टरी खड़ी करके जीत हासिल की जा सकती है?

आम आदमी अपनी सही और गलत की समझ मीडिया को सुन, पढ़ या देख कर बनाता है. एक समय था जब टेलीविजन पर रातको 9:20 पर खबर आती थी. सुबह अखबार आता था. देश-विदेश या किसी जगह हुई घटना की जानकारी का माध्यम सिर्फ...

अभिजात वर्गीय है मी टू कैंपेन

पिछले दिनों से मी टू कैंपेन सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक काफी चर्चित हो रहा है. इस मूवमेंट में महिलाएं #MeToo के साथ कडुवे अनुभव कुछ स्क्रीन शॉट्स भी शेयर कर रही हैं. भारत में इसकी शुरूआत 2017 से हुई...

सरकार ही जातिवादी है तो जनता का क्या

ज्ञात हो कि दिनांक 13 अक्तूबर 2018 को दिल्ली में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए  दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB)  ने पोस्ट कोड – 16/17 & 01/18 की जो परीक्षा ली गई थी उसमे चमार जाति के संदर्भ में प्रश्न संक्या 61...

ऐसे बनाए जाते है देवी-देवता

(ऐसा नहीं है कि किसी व्यक्ति को भगवान बनाने का यह पहला मामला है. जैसी मेरी जानकारी है, फिल्मी कलाकार रजनीकांत, अमिताभ बच्चन, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर आदि के मंदिर पहले से ही बने हुए हैं. भाजपा के वर्तमान शासनकाल में नाथूराम गोडसे का मन्दिर...

मनु या मैकाले

भारतीय इतिहास में दो तारीखें इस देश की मूलनिवासी दलितबहुजनों के लिये विशेष मायने रखती है, पहला 06 अक्टूबर 1860 और दूसरा 26 जनवरी 1950 . 06 अक्टूबर 1860 को इंडियन पेनल कोड (भारतीय दंड संहिता) लागू हुआ था और 26 जनवरी 1950 को...

“गंगा का कपूत, गंगा के सपूत को खा गया है,

"गंगा का कपूत, गंगा के सपूत को खा गया है, यह कोई सामान्य मौत नही, यह एक राजनैतिक हत्या है एक माँ की अस्मत के लिए एक बेटे ने अपनी जान दे दी है, लेकिन कभी उसका बेटा होने का दावा नहीं किया, और जो गला फाड़-फाड़ कर...

दलित-आदिवासी वोटों के बिखराव की यह पटकथा कौन लिख रहा है?

जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में अचानक कई दलित, आदिवासी, बहुजन, मूलनिवासी संज्ञाओं वाली राजनीतिक पार्टियों का प्रवेश, उद्भव हो गया है और उनके नवनियुक्त नेतागण सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा इस तरह कर रहे हैं, जैसे...

आरक्षण की प्रासंगिकता..

आरक्षण एक गंभीर विषय है. आरक्षण के संबंध में लोगों की गलत धारणा को दूर करने के लिए इसका पोस्टमार्टम करना जरूरी है. आरक्षण अवसर की समानता का मामला है. आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है . आरक्षण भागीदारी का मामला है. आरक्षण कोई योग्यता का...

लोकसभा अध्यक्ष ही आरक्षण के प्रावधानों अवगत नहीं तो बाकी का क्या

विदित हो कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों व शिक्षा में प्रदत्त संवैधानिक आरक्षण का सवर्णों के अनेकानेक संगठनों द्वारा देश के हर कौने में हमेशा नाना प्रकार से विरोध किया जाता रहा है.  ऐसे में कुछ ही दिन...

लाल बहादुर शास्त्री : स्वस्थ्य राजनीति का अंतिम पड़ाव

अक्सर लोग अपने और अपने परिवार के बारे में सोचते हैं. परिवार के दु:ख-सुख की सीमा ही उनका कार्य-क्षेत्र होता है. कुछ जाति और वर्ग तक सोचते हैं. जहाँ हित सध जाए ठीक. और कुछ लोग राष्ट्र तक ही सोचते हैं – वह भी...

हिंदी दलित साहित्य का धारावी केन्द्र शाहदरा-दिल्ली

गए दिनों जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डा. हेमलता माहेश्वर अपने शोधकर्ता छात्र के साथ मेरे घर आई थीं. तब उनके साथ दलित साहित्य आंदोलन के इतिहास पर बातों-बातों में एक गंभीर चर्चा हुई। पहली पीढी के रचनाकारों के संघर्ष को...

दलितों का विरोध राष्ट्रव्यापी मुद्दा क्यों नहीं बन पाता?

भारत देश में पद्मावती विवाद जैसे फ़िज़ूल मुद्दे आंदोलन का रूख अख्तियार कर लेते हैं, परंतु दलितों का विरोध प्रदर्शन कभी राष्ट्रव्यापी आंदोलन नहीं बन पाता. जबकि भारत में दलितों की जनसंख्या, पद्मावती विवाद को लेकर तोड़-फोड़ करके राष्ट्र का नुकसान करने वाले जाति वर्ग की...

सीवर में मरने का अभिशाप

भारत में हर पांचवें दिन एक सफाई कर्मचारी काल का ग्रास बनता है, और राज्यों से लेकर केन्द्र में सरकार के आधीन नगरपालिकाएं, या प्रशासन या निर्वाचित प्रतिनिधि अपेक्षित कदम उठाने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल कर अपना पल्ला झाड़ लेते है. हाथ से...

सड़क पर उतरी जातियां

जाति... जिसके बारे में कहा जाता है कि वो जाति नहीं... जाति समाज की सच्चाई है. आप चाहे इससे जितना बचना चाहें, यह घूम फिर कर आपके सामने आ ही जाती है. खास कर वंचित तबके के सामने तो जाति का सवाल जन्म से...

असहमति हमेशा नकारात्मक ही थोड़ी होती है

आज जब हम समाचार पत्रों अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया पर खबरें पढ़ते अथवा सुनते हैं तो विभिन्न प्रकार के संदर्भ पढ़ने और सुनने को मिलते हैं. कभी किसी खबर पर हम उछ्ल पड़ते हैं तो कभी किसी पर अपना माथा धुन लेते हैं. कारण केवल...

संघ प्रमुख मोहन भागवत से कुछ प्रश्न

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘ संघ के नजरिए से भारत का भविष्य’ तीन दिवसीय मंथन शिविर को संबोधित करते हुए मोहनभागवत ने कुछ आदर्श वाक्य बोले हैं, जिसका निहितार्थ यह निकाला जा रहा है कि सभी भारतीय बिना किसी भेदभाव के समान...

चातुर्वण्य व्यवस्था में बहुजन समाज का अस्तित्व?

भारत वर्ष में अनेक महापुरूष पैदा हुये जिनमें तथागत बुद्ध, संत रविदास, कबीर दास, साहुजी महाराज, बिरसा मुण्डा, ज्योतिबा फूले, सावित्री बाई फूले, रामास्वामी नायकर, संत गाडगे, डाॅ0 बी. आर. अम्बेडकर, जगदेव प्रसाद आदि अग्रगण्य हैं, जिन्होंने सदियों से मानवीय अधिकार से वंचित और...

भीम आर्मी के जांबाज साथी एडवोकेट चन्द्रशेखर रावण के जज्बे को भीम सलाम…..

बहुजनों के बीच अब चन्द्रशेखर रावण किसी पहचान के लिए मोहताज नही हैं.भीम आर्मी के जांबाज साथी एडवोकेट चन्द्रशेखर रावण जी अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नही रह गए हैं लिहाजा उन्हें रिहा कर दिया गया है.एक सुकून मिला है यह जानकर कि...

क्यों न सभी जातियों को संख्या के आधार पर आरक्षण प्रदान कर दिया जाए?

आरक्षण के मुद्दे को लेकर, फेसबुक पर अशोक कुमार गोयल लिखते हैं, ‘जब तक वर्तमान सरकार है सब लोग आरक्षण मांगो...जिस दिन गठबन्धन की सरकार आयेगी तो बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को आरक्षण मिलेगा और बाक़ी लोग केवल संरक्षण माँगेंगे.’ इस टिप्पणी को कई लोगों...
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जिस सतलज फिल्म पर रोक लगी है, जानिये उसके नायक जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी

तीन जुलाई को OTT प्लेटफार्म जी5 पर रिलीज़ हुई फिल्म सतलुज को पांच जुलाई को इस प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया रविवार पांच जुलाई...

राजनीति

सीएम योगी ने अखिलेश यादव को दी जन्मदिन की बधाई, सीएम योगी के जन्मदिन पर अखिलेश ने साध ली थी चुप्पी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को जन्मदिन की बधाई दी है।...
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